3 Beautiful Krishna Stories to hear this Janmashthami

Three Krishna stories from Hindu mythology explore the power of devotion over material wealth. In one, Krishna refuses a king's lavish feast but accepts Vidura's humble banana peels because they were offered with pure love. Another tells of a prince whose divine blessing came with an unexpected challenge, raising questions about reliance on God versus personal effort.
Chapters
Happy Janmashtami to all of you!
Hare Krishna everyone! Happy, happy Janmashtami!
Thank you for joining us on this beautiful evening.
Please tell us in the comments if you can hear us and see us clearly. Are we audible to everyone?
Please let us know if you can see us and hear us clearly.
Fabulous.
Okay. So, to celebrate this beautiful divine festival of Lord Krishna's birth, let us absorb ourselves in hearing, listening about Krishna's beautiful pastimes and singing kirtan together. So, आप जहाँ भी हैं, कहीं जहाँ से भी आप हैं, अपनी पूरी family को लाइए इस festival में.
इंगेज करिए सब हम मिलके कीर्तन करते हैं और कृष्ण की कथाएं सुनते हैं। तो अगले एक घंटे के लिए अब आप हमारे साथ हैं, हम एक दूसरे के साथ हैं। तो जो भी चीज़ आपको डिस्ट्रैक्ट कर रही है, जो भी चीज़ आपके दिमाग में है, जो शायद आपको करनी है या करनी थी, आप प्लीज़ अभी के लिए सब कुछ भ जब आप कीर्तन कर रहे हैं हमारे साथ पूरे दिल से अपने भगवान से स्ट्रेंथ मांगिए कि जो भी आपका लाइफ पथ है उसमें जो भी ऑब्स्टिकल्स आते हैं उनको ओवरकर ओवरकम करने की ताकत दे आपको भगवान आपको अपनी सेवा में ले भगवान पूरे दिल से बिल्कुल प्योर हार्ट से हम सभी प्रार्थना करते हैं आइए हम भगवान का नाम लेके आज की ये बहुत खूबसूरत इवनिंग शुरू करते हैं। तो आप जहाँ पर भी है, please join us and chant along with us। हमारे कृष्णा महामंत्र से शुरू करेंगे। आप जिस भी भगवान में विश्वास रखते हैं, आप उनका आंखें बंद करके नाम ले सकते हैं। और अब जहाँ कहीं भी है, please loudly गाइएगा हमारे साथ। Kृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे राधे हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे राधे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रामा हरे रामा राम राम हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रामा हरे रामा राम राम हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रामा, हरे रामा, रामा रामा, हरे हरे, हरे कृष्णा, हरे कृष्णा, कृष्णा कृष्णा, हरे हरे, हरे रामा, हरे रामा, रामा रामा, हरे हरे, हरे कृष्णा, हरे कृष्णा। कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रामा हरे रामा राम राम हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रामा हरे रामा राम रामा हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रामा हरे रामा Rama, Rama, Har Har.
Thank you for joining us on this beautiful evening, this divine festival. Please tell us in the live chat where are you joining us from today? आप कहाँ से हैं? कहाँ से आप हमें join कर रहे हैं आज? आप किस city से हैं? कहाँ से आप ये देख रहे हैं? Please tell us in the live chat. जयपुर, भुवनेश्वर, बिहार, पटना, बांग्लादेश, गुहाटी, उड़ीसा, नेपाल, कोलकाता, जम्मू, थाने, लंदन, कोलकाता, छत्तीसगढ़, देहरादून, बैंगलोर, दुबई, अहमदाबाद ओरिसा, हरियाणा, इंदौर इतनी अलग अलग जगहों से आप हमारे साथ आज जुड़े हैं। हमारे साथ जुड़ने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद। तो आज के बारे में हम आपको थोड़ा बताना चाहेंगे। करीब 1 रफली 1 घंटे में हम। कोई बहुत खूबसूरत कृष्णा के स्टोरीज़, कृष्णा के पास टाइम्स आपके साथ शेयर करेंगे। ये हमारे फेवरेट स्टोरीज़ हैं, जो कहीं ना कहीं हमारे दिल में हमें टच किए, तो हम आशा करते हैं, हम होप करते हैं कि आपको भी अच्छे लगें। हमारा पहला स्टोरी है आज का स्टोरी का नाम है कृष्णा स हेडेक ये बहुत ही सुंदर एक स्टोरी है इसमें लॉर्ड कृष्णा और उनके एक डिवोटी का प्यार समझाया गया है ट्रू लव क्या होता है ट्रू भक्ति क्या होती है स्टोरी में लॉर्ड कृष्णा हमें समझाते हैं तो आइए शुरू करते हैं। अब आप चैट में आपको कुछ लिखने की जरूरत नहीं है, आप पूरी तरह से ध्यान दे सकते हैं स्टोरी पे। तो ये स्टोरी द्वारका की बात है, जहाँ लॉर्ड कृष्णा रिजाइड करते थे, द्वारका में हुई थी। आज से करीब पांच हजार साल पहले कृष्णजी अपने क्वार्टर्स में थे, अपने बेड में थे और एकदम से आवाज आई। बहुत दर्द हो रहा है। I'm in so much pain। वो अपने बेड में लेटे हुए थे और उनके सारे जो आसपास उनके महल में, पैलेस में जो भी लोग थे, एकदम चौंकान हो गए थे, एकदम शock हो गए थे। दर्द तो क्या आज तक उन्होंने कृष्ण को थोड़ा भी अनडिसकंफर्ट मैंने देखा था और अब कृष्णजी बोल रहे हैं मुझे बहुत तेज दर्द हो रहा है वो सब एकदम उनका हाथ बिल्कुल एक तरह से बहुत उनको फियर फील हो रहा था बहुत बुरा फील हो रहा था वो सब बहुत कृष्ण से प्रेम करते थे For the first time ever, Krishna had a headache. कृष्ण जी को headache हो रहा था और सब उनके आसपास shocked थे कैसे उनको headache हो गया ये तो हमारे भगवान हैं भगवान को कैसे headache हो सकता है They all used to look up to him. ये पूरी problem solve करने के लिए उनकी जो रानियाँ थीं जो queens थीं कृष्ण जी की उन्होंने एक जन को बुलाया क्या आप गैस कर सकते हैं कौन था ये किसको बुलाया सारी क्वीन्स ने कृष्ण जी की हेडेक की रेमिटी ढूंढने के लिए any ideas tell us in the chat box ओके सम पीपल आर सेइंग सुदामा सम पीपल आर सेइंग राधा वन पर्सन हैज़ गोट द राइट आंसर नारद मुनि यस तो कृष्ण जी का ये हेडेक दूर करने के लिए नारद मुनि को बुलाया गया और जैसे-जैसे नारद मुनि कृष्ण कृष्ण के जो क्वार्टर्स थे एंटर कर रहे थे उनकी तरफ़ बढ़ रहे थे वहाँ पे सबके दिल की धड नारद मुनि कृष्ण के क्वार्टर्स के अंदर पहुँचे, कृष्णजी को चेक किया क्या प्रॉब्लम है, और जैसे ही वो बाहर आए, उनके हाथ में एक उनका विना था, और चेहरे पे एक मुस्कुराहट। सब नारद मुनि की तरफ देख रहे थे, क्या हुआ, क्या हुआ? सबके दिल की धड़कन बिल्कुल तेज़-तेज़ दिल धड़क रहा था, प नारद मुनी ने जो सारे द्वारकावासी थे उनकी तरफ देखा और कहा हमारे श्री कृष्ण को हेडेक है, सर में दर्ध है और जितना मैंने देखा लगता है उसका सिरफ सिरफ एक इलाज है उन सब लोगों की धरकन और भी तेज हो गई एक ही इलाज क्या है एक ही इलाज? भारत मुनि ने बोला किसी ऐसे भक्त के चरणों, किसी ऐसे भक्त के पैरों की डस्ट कृष्ण के फोरहेड पे लगानी है जो उनसे बहुत प्रेम करता है, जो से जो उनसे बहुत प्यार करता है। The dust from someone who loves Krishna. Has to be placed on Krishna's forehead, and then and only then can Krishna be relieved of his headache. जैसे ही उन द्वारकावासियों ने ये सुना, वो और भी ज़्यादा चौंकान हो गए। अभी तक तो उनकी प्रॉब्लम थी कृष्णजी को हेडेक था, और अब उससे भी ज़्यादा बड़ी प्रॉब्लम। ऐसे व्यक्ति को कैसे ढूंढे जो अपनी अपने पैरों की डस्ट देगा कृष्णजी के भगवान के हेड पे लगाने के लिए सब एकदम कंफ्यूज थे, बिविल्डर्ड थे, समझ नहीं आ रहा था क्या करें सोचते थे ऐसा कैसे हो सकता है? How is this possible? कोई इंसान, कोई डेवोटी अपने पैरों की डस्ट कैसे दे सकता है? वो भी भगवान के माथे पे लगाने के लिए आज से पहले कभी ना सुना था, ना हुआ था बट नारद मुनी ने बोला इलाज तो देखो यही है तो पहुँच जाते हैं नारद मुनी जो कृष्ण की क्वीन्स होती हैं उनके पास सबसे पहले नारद मुनी कृष्ण की क्वीन्स के पास पहुँच जाते हैं स्माइल करते हुए उनसे पूछते हैं, मेरी प्यारी रानियाँ, क्या तुम्हें मुझे क्या तुम मुझे अपने पैरों की थोड़ी सी डस्ट क्या डस्ट बिल्कुल नहीं अब सोच भी कैसे सकते हो हम अपने पैरों की डस्ट दे भगवान के सर पे लगाने के लिए हम तो नरक चले जाएंगे हम ऐसा पाप कैसे कर सकते हैं ये तो बहुत गलत है हम तो अपने कभी सपनों में भी ऐसे नहीं सोचेंगे इतना इतनी गलत चीज करने के लिए हमारे चरणों हमारे पैरों की डास्ट कृष्ण जी के सर पे लगाना मतलब एक तरफ से हम अपने पैर उनके सर पे लगा रहे हैं ऐसा तो हम बिल्कुल नहीं कर सकते ऐसे एक-एक करके हर रानी स्टेप बैक कर जाती है हर र नारद मुनि एकदम साड़ हो जाते हैं परेशान रानियाँ नहीं डस्ट तेरी देंगी तो कौन देगा फिर नारद मुनि पहुँचते हैं द्वारका वासियों के पास नारद मुनि पहुँचते हैं सारे जो द्वारका में लोग रिजाइड करते हैं the citizens of द्वारका उनके पास और उनसे पूछते हैं क्या तुम्हें क्या तुम अपने पैरों की थोड़ी डस्ट दोगे कृष्ण को बहुत हेडेक हो रहा है और एक ही इलाज है किसी ऐसे जन के पैरों की डस्ट लगाना जो उनसे बहुत प्रेम करता हो जैसे ही द्वारकावासी ये सुनते हैं क्या कहते हैं ऐसा तो हो ही नहीं सकता भगवान पेन में भगवान कैसे पेन में हो सकते हैं आप जूत बोल रहे हो। तो सारी क्वीन्स ने भी उनको डिसमिस कर दिया। द्वारकावासियों ने भी उनको डिसमिस कर दिया। फाइनली नारद मुनी सोचते हैं अब मैं क्या करूँ, क्या करूँ। फाइनली वो पहुँच जाते हैं वृंदावन। और वृंदावन में किससे मिलते हैं? क्या आप गेस्ट कर सकते हैं? Who does Narad Muni meet in Vrindavan? Yes, Narad Muni meets Sri Radha in the beautiful lanes of Vrindavan. राधा जी ने अपने एक हाथ से अपना स्कर्ट पकड़ा हुआ था और दूसरे हाथ से एक मटका, जो कि उन्होंने अपने सर पे रखा हुआ था। नारद जी जैसे ही राधा जी को देखते हैं, वो एक बहुत ब्यूटीफुल ट्यून प्ले करने लगते हैं, बहुत ही सुंदर, बहुत ही मधुर गाना अपने विना पे बजाने लगते हैं। और जैसे ही राधा जी उनकी ट्यून सुनती है, उनकी आवाज सुनती है, नारायण नारायण। राधा जी उनकी तरफ टर्न करती है और जैसे ही नारद मुनि को देखती है, उनके जो सर पे पॉट रखा था, उनको उस पॉट को जमीन पे रखती हैं और दोनों हाथों को जोड़कर नारद मुनि के आगे छुपती हैं। और अपनी रिस्पेक्ट देती है नारद मुनि को कहती हैं हे नारद मुनि मैं आपकी क्या सेवा कर सकती हूँ उनकी आवाज़ अपने आप में म्यूजिक जैसी होती है इतनी मधुर होती है उनकी स्किन बहुत ही ब्यूटीफुल गोल्डन कलर की होती है उनके हेड के एक साइड से एक चोटी एक ब्रेड लटक रही होती है और वो अपनी दो बड़ी बड़ी आँखों से नारद जी को देखती है और पूछती है हे नारायन मैं आपकी क्या सेवा कर सकती हूँ राधा जी की आवास सुनकर नारद मुनी पूरा किस्सा उनको सुनाते हैं कैसे क्रिशन जी को बहुत तेज हेडेक हो रहा है और सिर्फ एक ही रेमिडी है जो कृष्ण जी को क्यों कर सकती है, और वो है किसी ऐसे भक्त के चरणों की धूल जो उनसे बहुत प्यार करता हो। जैसे ही राधा जी कृष्ण जी के हेडेक की, कृष्ण जी के पेन की बात सुनती है, उनका गोल्डन फेस एकदम पेल हो जाता है, एकदम डार्क हो जाता है। अभीतक कितनी खुश राधा जी एकदम दुखी लगने लगत नारदजी अपनी बात खत्म भी नहीं करते और राधा जी की कंडीशन ऐसी हो जाती है कि वो अभी फेंट हो जाएंगी, अभी गिर जाएंगी। वो इतनी अंदर से सैड हो जाती हैं क्योंकि वो कृष्णक से बहुत प्रेम करती हैं, बहुत प्यार करती हैं। उनकी बात सुनके वो पूछती है, कुछ तो इलाज होगा? There has to be some cure. नारद जी को लगता है अभी तक जैसे सब ने उनको रिजेक्ट किया है पहले सारी क्वीन्स ने रिजेक्ट कर दिया फिर सारे द्वारकावासियों ने रिजेक्ट कर दिया उनको लगता है राधा जी को भी जैसे मैं बताऊँगा राधा जी तो सबसे बड़ी भक्त हैं कृष्ण की वो भी रिजेक्ट कर देंगी वो सोचते हैं क्या फायद बट राजा जी पूछती हैं बताओ मुझे कुछ तो इलाज होगा उनके हड़ेक का कृषन जी बोलते हैं इलाज है सिर्फ एक इलाज है किसी ऐसे भक्त की धूल उनके फोरहेट पे लगानी है जो उनसे बहुत प्यार करता हो सिर्फ और सिर्फ ये करके कृषन जी अपने पेन से बाहर निकल सकते हैं जैसे ही राधा जी उनकी बात सुनती हैं, उनका फेस एकदम रिलीव हो जाता है। अभी तक जो फेस पेल हो गया था, एक सुंदर सी स्मайл उनके चेहरे पे आ जाती है। और राधा जी बोलती हैं नारद मुनि को, बस इतनी सी बात, इतनी छोटी सी बात, ये लो राधा जी झुकती हैं और वृंदावन में उस टाइम पे बारिश का मौसम होता है तो उनके चरणों से जो धूल होती है उनके चरणों में बहुत सारी जो मिट्टी लग जाती है वो सारी मिट्टी अपने हाथ से निकालती हैं और जो पॉट वो अपने हेड पे अभी तक कैरी कर रही थी उस पॉट में वो सारी मिट्टी को भर देती है और वो जो पॉट होता है वो नारद मुनी को दे देती हैं और कहती हैं हे नारद मुनी प्लीज आप इसको मेरे कृष्ण को दे देना ये मेरे चरणों की धूल है नारद जी राधा जी से पॉट तो ले लेते हैं उनकी चरणों की धूल तो ले लेते हैं लेकिन उनसे पूछते हैं तुम पक्का देना चाहती हो ना ये धूल तुम्हें पता है ना तुम हो सकता है नरक चले जाओ ये करने के लिए अभी तक किसी ने नहीं दे मुझे तुम पहली हो राधा जी एकदम confused वो पूछती हैं ये नारद मुनि आप ऐसे क्यों बोल रहे हो आप ऐसे सोच भी कैसे सकते हो मेरे भगवान दर्द में हैं my lord is suffering नारद जी पूछते हैं, तुम्हें धर नहीं लगता? हो सकता है तुम हेल में चले जाओ, हो सकता है तुम नरक चले जाओ। राधा जी कहती है, मुझे फर्क ही नहीं पड़ता। I will gladly dwell in hell as long as there is no suffering of my Lord. मैं नरक में भी खुश रहूँगी। As long as मेरे भगवान, मेरे श्रीकृष्ण सुखी हैं, मेरे श्रीकृष्ण happy हैं। नारदजी बहुत खुशी-खुशी राधा जी से वो पॉट लेते हैं और कृष्ण को दे देते हैं। जैसे ही नारद मुनि राधा जी के चरणों की धूल कृष्ण के forehead पे लगाते हैं, कृष्ण का सारा headache एकदम चला जाता है। तो ये है एक true devotee और कृष्ण का प्यार। This is the nature of the divine love of Radha and Krishna। ऐसा प्यार जो सभी material चीजों को transcend कर देता है। श्री राधा को कुछ फर्क ही नहीं पड़ता था। उनको क्या होगा? वो स्वर्ग जाएंगी या नरक जाएंगी? उनके साथ क्या होगा? वो सिर्फ और सिर्फ अपने कृष्ण के बारे में चिंता थी उनको। This is the power. Of unconditional love. उन्होंने ये नहीं सोचा कि सोसाइटी में क्या होगा। She did not think about the conventions of society before she gave her dust to Krishna. She didn't think about the fact that it was wholly improper to give the dust of her feet to Krishna. She simply gave it. Because she deeply and truly loved Krishna.
When I heard this story for the first time, जब मैंने कहानी सुनी, तो मैं सोच रहा था मेरी लाइफ में क्या आज हम ऐसी लव के बारे में सुने भी हैं क्या जानते भी हैं कि ऐसा भी लव होता है? जहाँ हम किसी और के लिए इतना कुछ करने तैयार हैं, जहाँ हमें फर्क ही नहीं पड़ता हमारे साथ क्या हो रही है। And this is not something कि जो सिर्फ कहानियाँ में होती है, आज हम today as of अभी अभी हम वो ही relationship कृष्णा के साथ कर सक रख सकते हैं, वैसा ही रिश्ता, वैसा ही प्यार बना सकते हैं। हमें राधा रानी या वृंदावन या वो उस जमाने में होना जरूरी नहीं है, वो तो हमारी दिल की रिलेशनशिप है। जब हम सच्चे दिल से उनके तरफ एक भी कदम आगे बढ़ाएंगे, तो वो हमारे तरफ दस कदम आगे आएंगे। आइए तो I hope आपने सब अच्छे से ध्यान देके स्टोरी सुनी और आपको अच्छा लगा हो। अब हम अपने नेक्स्ट कहानी की तरफ मूव ऑन करते हैं। थोड़ी सी अलग कहानी है। मैं चाहूँगा कि आप सब अच्छे से ध्यान दीजिये। तो ये 1 कहानी है 1 राजा की 1 बहुत बड़ा। राजा था, उसका बहुत बड़ा पैलेस था और किंगडम था, और उसका एक यंग सन प्रिंस बना था, और उस प्रिंस की बहुत अच्छी ग्रोथ रही थी, और वो किंग बनने के लिए बिल्कुल रेडी था, और सब कोई उस किंगडम में उस प्रिंस से बहुत प्यार करते थे और बहुत रिस्पेक्ट भी करते थे उसको。 उसका हेल्थ भी बहुत अच्छा था, उसका नेचर भी बहुत अच्छा था, लेकिन कुछ एक कारण से उसकी शादी नहीं हो रही थी। He was not able to get married. तो किंग ने बोला अपने बेटे को कि आप भगवान की पूजा करिए और आप भगवान से प्रार्थना करिए कि आपको एक वाइफ मिले। सो ये जो हमारा प्रिंस है, ये भगवान की खोज में निकल जाता है और बहुत मेहनत करके अपने राजमहल से बहुत दूर जाके भगवान से मिलता है। सो इतना मेहनत करके जब वो भगवान के पास पहुंचता है, तो वो भगवान को देखके बहुत प्रसन्न होता है। और इंस्टेंटली भगवान के चरणों पे गिर जाते हैं। तो भगवान भी अपने भक्त को देखे इतना खुश होते हैं और पूछते हैं, अरे तुम इतने दूर से आए हो, मैं तुम्हारी क्या हेल्प कर सकता हूँ, क्या सेवा कर सकता हूँ? तो ये हमारे जो राजकुमार हैं, वो भगवान से कहते हैं कि आपकी दया से, आपकी आपके हमारा किंगडम बहुत अच्छा है, हमारी प्रजा बहुत सुखी है और घर पे सब कोई अच्छे हैं। बस मेरी शादी नहीं हो रही। अगर आप मेरी शादी कर दे, तो मुझे हर एक खुशी मिल जाएगी जो मनुष्य को मिल सकती है। I will be the happiest person in the world only if I get married and भगवान पूछते हैं बस इतनी सी बात is that all तुम्हें और कुछ नहीं चाहिए and truly the prince he had everything उसके पास हर चीज था ऐसा कुछ था ही नहीं जो वो चाहता था और उसको नहीं था उसके पास तो उसने बोला भगवान सिर्फ शादी चाहिए और कुछ भी नहीं चाहिए भगवान जी ने बोला ठीक है कोई बात नहीं granted तुम्हारी शादी हो जाएगी। तो उसने फिर से झुका प्रणाम किया भगवान को और अपने राज में वापस आ गया। जब तक वो नीचे पहुंचा, अपने राज के द्वार पे एंटर करने में, इतने में उसको खुशखबरी मिल गई थी कि उनके पिताजी जो उस समय राजा थे, उन्होंने ऑलरेडी वाइफ ढूंढ रखी थी और उनकी शादी की डेट So while he was gone, the king had already found a wife who was willing to marry the Rajkumar. तो अब तो आप सोच ही सकते हैं कि कितना बड़ा पार्टी हुआ होगा, कितना जोर-धोर से सेलिब्रेशन हुई होगी और शादी की तैयारियाँ की गई। So हमारे राजकुमार ने शादी किया और सारे वहाँ के जो प्रजा थी जो किंगडम में जो लोग रह रहे थे, वो इतना प्यार करते थे राजकुमार से, सबने इन्वॉल्व हुआ और उसके साथ सेलिब्रेशंस की। और ऑब्वियसली राजकुमार बहुत-बहुत खुश थे क्योंकि ही हैड फाउंड अ रियली ब्यूटीफुल वाइफ। सो शादी में उन्होंने भगवान को तो थैंक यू बोला ही और हर वो सुख का अनुभव भी क राजा रानी बन गए हैं और बहुत खुशी से जिंदगी गुजार रहे हैं। अब आप सोच ही सकते हैं, शादी को जब समय हो जाता है और राज्य में एक प्रिंस के बाद उनके जो प्रजा होते हैं, they are starting to look forward to the next prince कि अब उनका अगला राजकुमार कौन बनेगा? But unfortunately जो हमारे नए राजा है उनके चाइल्ड नहीं हो रहा, तो फिर सब थोड़े से उदास, थोड़े से दुखी हैं कि ऐसा क्यों हो रहा हमारा आगे राजा कौन बनेगा इनके बाद? सो पांच साल गुजर जाते हैं शादी को और राजा का लड़का नहीं हो रहा, बच्चा नहीं हो रहा। सो जो राजा के पिताजी थे, वो बोले कि मुझे लगता है आपको भगवान से फिर प्रार्थना करनी चाहिए और फिर उनको जाके बोलना चाहिए कि आपको क्या तकलीफ है तो जब हमारे राजा है वो राजकुमार थे पहले वो फिर से जाते हैं भगवान के पास मेहनत करके भगवान को ढूंढने और फिर जब भगवान को ढूंढते हैं फिर से उनको प्रार्थना करते हैं उनसे कि इतना बड़ा राज्य है, हमारे पेरेंट्स खुश हैं, हमारी प्रजा खुश है, इतना धन दौलत है, हेल्थ भी बहुत अच्छा है, वाइफ भी बहुत अच्छी है, बस एक संतान चाहिए, सिर्फ एक राजकुमार लायक पोता होता, बेटा होता तो बहुत अच्छा होता। तो भगवान कहते हैं, बस इतनी सी बात, क्या तुम्हें बेटा मिलने तो हमारे राजा जी कहते हैं अफ़कोस भगवान बस यही तो एक चीज है जो मुझे आज सुक नहीं दे पारी अगर आप इतनी कृपा करेंगे तो I will be the happiest person in the world तो इतना कहके भगवान जी फिर से बोलते हैं Granted तुमारा बेटा हो जाएगा उसे खुशखबरी मिल जाती है कि उसका वाइफ उनके वाइफ ऑलरेडी प्रेग्नेंट है और उनका बेटा एक्सPECTED है तो फिर से पूरी की पूरी जो राज्य है खुशियाँ मनाता है एक्साइटेड हो जाते हैं सब कोई कि अब हमारे अगले राजकुमार आने वाले हैं और हम उनके साथ और सेलिब्रेट कर सकते हैं तो फिर तीन साल बहुत खुशिया के साथ नए लड़का हुआ उनका तो बहुत खुशिये से पाटी की और फिर हम फ़ौबर्ट कहते हैं तीन साल आगे अब जब राणी और राजा, राजा राणी अपने नए बच्चे के साथ खेल रहे हैं तो पुछते हैं कि उन्हें फिर वो जब चेकअप कराते हैं डॉक्टर से, तो उन्हें पता चलता है कि ये जो उनका लड़का हुआ था, एक्चुअली सुन नहीं सकता और बोल नहीं सकता। वो डेफ एंड डम था। तो अब राजा रानी, उनके पेरेंट्स और सारी प्रजा, फिर उदास हो जाते हैं, फिर दुखी हो जाते हैं कि ऐसा कैसा हमारा राजा बनेगा? जो सुन ही नहीं सकता, जो बोल ही नहीं सकता। तो जो रानी थी, उन्होंने बोला राजा को, आप फिर से भगवान के पास जाइए। आपकी जब शादी नहीं हो रही थी, आप भगवान के पास गए थे, और आपकी जब बेटा नहीं हो रही थी, आपने राजा के पास, भगवान के पास आप गया, आप वापस से भगवान के पास जाइए, और उनसे फिर तो अब मैं आपसे पूछना चाहूँगा आपको क्या लगता है हमारे राजा ने क्या किया? क्या वो फिर से भगवान के पास गए की नहीं? प्लीज हमें बताईए आपके हिसाब से उन्होंने क्या किया? तो मैं आपको बताता हूँ वो इस बार भगवान के पास नहीं गए। वो अपने आप से सोचे, मैं हमेशा भगवान के पास जाता हूँ एक ही चीज मांगने, और भगवान हमेशा मुझसे पूछते हैं, क्या इसको देने इस ये चीज मिल जाने से आप हमेशा के लिए पूरी तरह से खुश रहोगे? और मैं हमेशा यकीन से बोलता हूँ हाँ, मुझे सिर्फ यही तो चाहिए खुश और हमेशा मैं वापस दो तीन साल बाद देखता हूँ कि फिर दुखी हो गया हूँ, फिर उदास हो गया हूँ तो इस बार भी मैं जाओंगा और भगवान से प्रार्थना करूँगा तो वो कुछ न कुछ करके हमारे लड़का का सुनने की और बोलने की प्रॉब्लम तो ठीक ही कर देंगे, जरूर कर देंगे और वो मुझसे पूछेंगे भी कि अगर मैं कि फिर तीन साल बाद मुझे और कुछ चाहिए होगी खुशी प्राप्त करने के लिए तो कहानी यहाँ खत्म होते हैं दोस्त हम इसके थ्रू क्या सीखना चाह रहे हैं कि हम हमेशा कुछ न कुछ भगवान से मांगते रहते हैं हमेशा पूरे टाइम कभी गाड़ी मांगते हैं तो कभी पैसा मांगते हैं कभी दूसरों की बुराई मांगते हैं, कभी खुद की भलाई मांगते हैं, लेकिन यही सोच के मांगते हैं। बस ये चीज मिल जाए भगवान, तो हम हमेशा के लिए खुश हो जाएंगे। क्या ये सच है? क्या भगवान हमें कुछ ऐसा एक चीज दे सकते हैं, जिससे हम हमेशा के लिए खुश हो जाएं?
हाँ, ऐसा एक चीज है, मगर हम कभी वो चीज मांग हम हमेशा और कुछ अपने लिए ही मांगते रहते हैं और वो एक चीज क्या है जो हम मांग सकते हैं जिसे हम सचमुच हमेशा के लिए खुश हो सकते हैं वो है भगवान की प्रेम यदि हम सिर्फ उनसे उनकी प्रेम मांगे कि हम उनकी चरण में उनकी दिखाई रास्ता में चल सके वो सचमुच हमें इम्पावर करेंगे वो सचमुच हमें वो स्ट्रेंथ और जब वो स्ट्रेंथ हमें मिल जाएगी, हमें और कहीं खुशी ढूंढने ही नहीं पड़ेगी। तो जैसे हमने स्टोरी में देखा, भगवान जो वो इंसान, जो वो राजा मांगता था भगवान से, भगवान वो दे तो देते थे, भगवान उसकी पूरी तो कर देते थे। लेकिन वो उसके लिए बेस्ट पाथ नहीं था। तो ऐसे जब हम भगवान से, जब हम कृष्णा से कुछ मांगेंगे, वो पूरा तो कर देंगे, बट हो सकता है वो हमारे लिए बेस्ट पाथ ना हो। वो हमने अपने लिए डिजाइन किया है हम भगवान के प्लान को अपनी लाइफ में उतरने नहीं दे रहे हैं जब हम भगवान से कुछ मांगते हैं अपने लिए तो आज जब हम जन्माष्टमी का पूजा करेंगे और भगवान के सामने अपना माथा और सर जुकाएंगे तो आप so i hope कि अभी तक हम जो कृष्ण की लीलाएं कथाएं आपसे शेयर कर रहे हैं, आप उनको समझ पा रहे हैं, अब्सोर्ब कर पा रहे हैं और आगे चलके हम सभी इन कृष्ण के पास टाइम्स को। अपनी लाइफ में उतार पाए और इनसे सीख पाए। ऐसी ही एक और स्टोरी हुई थी हस्तिनापुर में। ये स्टोरी है The Story of Banana। एक बहुत ही स्वीट स्टोरी है ये कृष्ण के एक और लीला है। जो भी पास्टाइम्स भगवान करते हैं, ये एक्चुअली अपने आप के लिए नहीं करते। हमें कुछ सिखाने के लिए करते हैं, हमें कोई मैसेज देने के लिए करते हैं, जो हम उनके जाने के बहुत सालों साल बाद तब भी याद रख पाएँ। ये स्टोरी हमारे एक बहुत दिल के करीब है ये स्टोरी। ये हमें समझाती है कि हमें सच्ची भक्ति करने के लिए दिमाग, mind नहीं चाहिए, हमें heart चाहिए. For pure devotional service, it's not the mind which is needed, it is the heart which is needed. So this is set in Hastinapur right before the Mahabharata war.
बिल्कुल जब पांडवों और कौरवाओं की वॉर होने वाली होती है। एकदम उसके पहले ये स्टोरी भगवान के साथ भगवान ने बताई है हमें। ये बहुत ही शॉर्ट स्टोरी है, तो आप प्लीज पूरी तरह से ध्यान दीजिए और आपको बहुत अच्छा लगेगा, मुझे पूरा यकीन है। तो आप सबको पता है दुर्योधना कौन था?
Do you know who was Duryodhan? He was the eldest of the Kaurava brothers. So the Mahabharata war was between the Kauravas and the Pandavas. So जो कौरवास में सबसे बड़ा भाई था, वो था दुर्योधन। और वार के बिल्कुल पहले वो चाहता था कि जो कृष्ण है वो पांडवोस की साइड छोड़के कौरवास की साइड ले ले तो दुर्योधन क्या करता है? कृष्ण जी को इंटाइस करने के लिए अपनी तरफ पुल करने के लिए एक बहुत ही लाविश फीस्ट ओगनाइज करता है अपने घर पे तो रियोधन जो होता है बहुत रिच होता है, बहुत वैल्डी, बहुत अमीर होता है वो एक बहुत लाविश मील ओगनाइस करता है कृष्ण जी के लिए गोल्ड के प्लेट, गोल्ड की चम्मच, हर प्लेट पे डाइमंड्स लगे होते हैं ऑर्गेनाइज करवाता है, बहुत लाविश मील। कृष्ण के पास पहुंचता है दुर्योधन और कृष्ण को प्लीड करता है, प्लीज कृष्ण मेरे घर खाना खाने आओ। तो कृष्ण कहते हैं, मैं तुम्हारे घर नहीं आ सकता दुर्योधन। दुर्योधन कहते हैं, क्यों नहीं आ सकते? कृष्ण कहते हैं किसी के भी घर जाने के लिए किसी के भी घर खाना खाने के लिए दो कंडीशन मीट होनी चाहिए पहली कंडीशन मुझे सच्ची भूख लगनी चाहिए और दूसरी कंडीशन मेरा उस व्यक्ति के साथ एक लविंग रिलेशनशिप होना चाहिए एक ऐसा रिलेशनशिप होना चाहिए जिसमें प्यार हो तो कृष्ण कहते हैं मैं तुम्हारे घर नहीं आऊँगा दुर्योधन मैं नहीं आ सकता क्योंकि ना तो मुझे अभी सच्ची भूख लगी और ना हमारा एक लविंग रिलेशनशिप है कृष्णजी दुर्योधन छोड़के चल निकल पड़ते हैं वो निकल पड़ते हैं विदुरा के घर की तरफ ये विदुरा कौन है? विदुरा दुर्योधन की तरह वेल्डी नहीं होता, रिच नहीं होता, बल्कि विदुरा के पास कोई ज़्यादा पैसे नहीं होते। वो बहुत ही एक छोटी सी हठ में रहता है अपनी वाइफ के साथ, बहुत पूर होता है वो लेकिन वो कृष्ण का बहुत बड़ा डेवोटी होता है, बहुत बड़ा भक्त होता है वो कृष्ण का विदुरा। but जब कृष्ण विदुरा के घर पहुंचते हैं, तो कृष्णा surprise विदुरा was not there। विदुरा घर पे होता ही नहीं, लेकिन विदुराई घर पे होती है। विदुराई कौन थी ये? विदुराई थी विदुरा की वाइफ। जैसे ही कृष्ण पहुंचते हैं विदुराई और विदुरा के घर, विदुराई को बोलते हैं, ओ विदुराई, ओ विदुराई महारानी, मुझे बहुत भूख लगी है, प्लीज मुझे कुछ खाने के लिए दो। अब विदुराई बिल्कुल जैसे कृष्णा आते एंटर करते एकदम चौंकान हो जाती है। आप सोचो जिसकी वो अभी तक पूजा कर रही थी, जिसकी वो अभी तक कितना रोज सुबह उठके पूजा करती थी, she was in absolute awe of Krishna। तो जैसे कृष्णा आते हैं वो एकदम nervous सी हो जाती है। कितना वो look up to करती है कृष्णा को? लेकिन क्योंकि विदुरा और विदुराई के पास पैसे नहीं होते, उनके पास घर पे कृष्ण को खिलाने के लिए भी कुछ नहीं होता। उनके घर पे कुछ नहीं होता, सिर्फ थोड़ा सा, थोड़े से बनानाज होते हैं, थोड़े से केले होते हैं घर पे। तो विदुराई कहती है, हे कृष्णा मेरे पास तो कुछ भी नहीं है तुम्हें खिलाने के लिए मुझे प्लीज माफ करो सिर्फ कुछ केले हैं कृष्ण कहते हैं हाँ तो केले खिलाओ ना मुझे तो विदुराई एक-एक करके हर केले को छीलने लगती है और कृष्ण को अपने हाथों से फीड करने लगती है एक केला लेती है उसको पील करती है और कृष्ण को खिला देती है। दूसरा केला लेती है, उसको पील करती है, कृष्ण को खिला देती है। तीसरा केला लेती है, पील करती है, कृष्ण को खिला देती है। और कृष्ण खाते रहते हैं, खाते रहते हैं, खाते रहते हैं। बहुत प्रेम से विदुराई खिलाती है और बहुत प्रेम से कृष्ण और कृष्णा को उन खेलों का टेस्ट दुर्योधना के किसी भी लाविश मील से ज़्यादा मीठा लगता है। So while विदुराई was completely absorbed in कृष्णा के love, guess who comes back home? कौन घर वापस आता है? विदुराई का हस्बैंड विदुरा। और जैसे ही वो घर का दरवाजा खोलता है, वो शॉक्ड रह जाता है। अपने सामने जो देखता है, हैरान हो जाता है वो एकदम। वो देखता है कि विदुरानी कृष्ण के प्रेम में इतनी खोई हुई है, इतनी deeply absorbed है कि confusion में अभी तक से वो क्या कर रही होती है? क्या कर रही होती है विदुराई जो विदुरा इतना चौंकान रह जाता है? क्या आप guess कर सकते हैं? विदुराई इतनी देर से जो बिनाना का फ्रूट होता है उसको निकाल के फेकती रहती है और बिनाना का जो छिलका होता है इतनी देर से उस छिलके को कृष्ण को खिला रही थी। वो इतनी confused थी, वो इतनी कृष्ण को जैसे ही विदुराई ने देखा, वो एकदम nervous सी हो गई थी। वो इतनी transcendental love में थी, वो भूल गई उसके सामने आसपास क्या चल रहा है, वो इतनी खोई हुई थी कृष्ण के प्रेम में, वो उसने realize ही नहीं किया कि अभी तक से वो peel खिला रही है, fruit नहीं। जैसे ही विदुरा ने विदुराई को रोकने की कोशिश करी कृष्ण बोलते हैं रुको रुको रुको रुको रुको अभी कुछ मत बोलो अभी ये अपनी एक्सटर्नल सेंसर्स में नहीं है अभी ये मेरे प्यार में मेरी सेवा में बिल्कुल खोई हुई है अभी इसको मत रोको लेकिन विदुरा की आवाज सुनके विदुरानी अपने होश में वापस आ जाती है और बहुत जल्द वो रियोलाइज करती है वो अभी तक से क्या कर रही थी वो अभी तक से कृष्ण को छिलका खिला रही थी फ्रूट फैक रही थी केले का तो जैसे ही उसको समझ आता है वो वापस से अपने होश में वापस आती है और कृष्ण को बनाना का फ्रूट खिलाने लगती है। लेकिन जैसे ही विदुरानी अपना पहला फ्रूट खिलाती है, पील नहीं, कृष्ण क्या कहते हैं? Oh, this fruit is not as tasty as the peels were. पील ज़्यादा टेस्टी था, फ्रूट नहीं। तो ये स्टोरी एक बहुत ही सुंदर कहानी है, एक सच कहानी है, एक भक्त के प्रेम की। It's the story of the true love of a devotee. It explains us, it tells us in a beautiful way how Krishna will never accept anything from someone who has no deep love and affection from for him. चाहे हम कृष्ण को कुछ भी क्यों ना ऑफर कर रहे हो, चाहे वो प्रशादम हो, चाहे वो हम कीर्तन गा रहे हो, हम चांटिंग कर रहे हो, हम उनका नाम जप रहे हो, कुछ भी हम क्यों ना कर रहे हो? अगर हम उसको पूरे प्रेम से, पूरी भावना से नहीं कर रहे, तो कृष्ण एक्सेप्ट नहीं करेंगे। On the other hand, अगर हम कृष्ण को कोई भी चीज़ थोड़े भी प्यार के साथ देंगे, love and affection के साथ देंगे, कृष्ण उसको बहुत relish करेंगे, चाहे वो कुछ भी क्यों ना हो। This is Krishna's nature। कृष्ण को हमसे कुछ चाहिए नहीं। कृष्ण तो भगवान है। उनके पास तो सब कुछ है, लेकिन वो फिर भी हमसे क्या मांगते हैं? पत्रम पुष्पम फलम तोयम क्यों मांगते हैं? ताकि हमें उनको सर्व करने का मौका मिल सके और हम अपनी लाइफ को एक स्पिरिचुअल पथ की तरफ आगे निकाल सके। तो भागवत गीता में कृष्ण जी कहते हैं पत्रम पुष्पम फलम तोयम। If one offers me with love and devotion a leaf, a flower, a fruit or water, I will accept it. पत्रम यानि leaf, पुष्पम यानि flower, फलम यानि fruit. तोयम यानी वाटर इसके लावा कृष्ण हमसे और कुछ नहीं मांग रहे आप सोचिए अगर हम पूरे प्यार पूरी श्रद्धा के साथ कृष्ण को एक पत्ता भी ओफर करें वो ज्यादा बेटर है ना की अलग-अलग पकवान बनाएं प So this is a beautiful story that teaches us in whatever we do, we should do it with all our love towards Krishna. It's the feeling that matters, not the action itself. हम किस भाव से वो चीज़ कर रहे हैं? वो ज़्यादा ज़रूरी है। वो नहीं हम क्या कर रहे हैं?
ये जो भाव की हम बात कर रहे हैं, इसको डेवलप करने का सबसे इजी रास्ता भजन और कीर्तन। ये जब हम भगवान की नाम गाते हैं और उनकी भजन कीर्तन करते हैं, वो अंदर से ही भाव अपने आप आ जाती है। हमें ढूंढना नहीं पड़ता और न ही हमें कोशिश करनी पड़ती है। अब लास्ट के जो टेन मिनट्स हमारे बचे हैं एक साथ में हम उनका एक कीर्तन करेंगे और हम रिक्वेस्ट करेंगे ये वाला कीर्तन आप हमारे साथ जुड़के करिए क्या आप तैयार हैं आपकी जितनी भी फैमिली है आपके आसपास इन दस मिनट के लिए उन सभी को बुला लीजिए और हम सब एक साल में एक बार आता है ये त्योहार इसको अच्छे से, दिल से कृष्ण का धन्यवाद करते हैं। अचुतम केशवम् कृष्णदामोदरम् आचुतम केशवम् कृष्णदामोदरम् रामनारायणम् जानकी वल्लभम रामनारायण जानकी वल्लभम कौन कहता है भगवान आते नहीं कौन कहता है भगवान आते नहीं तुम मीरा के जैसे बुलाते नहीं तुम मेरा कि जैसे बुलाते नहीं आचुतम केशवम कृष्णदामोदरम आचुतम केशवम कृष्णदामोदरम रामनारायणम जानकी वल्लभम रामनारायणम जान की वल्लभ कौन कहता है भगवान खाते नहीं कौन कहता है भगवान खाते नहीं बेरशबरी के जैसे खिलाते नहीं बेरशबरी के जैसे खिलाते नहीं आचुतम केशवम कृष्ण नामोदरम आचुतम केशवम कृष्ण नामोदरम रामनारायणम जानकीवल्लभम रामनारायणम जानकीवल्लभम कौन कहता है भगवान सोते नहीं कौन कहता है भगवान सोते नहीं माया शोदा के जैसे सुलाते नहीं माया शोदा के जैसे सुलाते नहीं आचुतम केशवम कृष्ण दामोदरम आचुतम केशवम कृष्ण दामोदरम रामनारायणम जानकी वल्लभम रामनारायणम जानकी वल्लभम कौन कहता है भगवान नाचते नहीं कौन कहता है भगवान नाचते नहीं गोपियों की तरह तुम ना चाहते नहीं, गोपियों की तरह तुम ना चाहते नहीं। नाम जपते चलो, काम करते चलो, नाम जपते चलो, काम करते चलो, हर समय कृष्ण का ज्ञान करते चलो। हर समय कृष्णा का ध्यान करते चलो याद आएंगी उनको कभी ना कभी याद आएंगी उनको कभी ना कभी कृष्ण दर्शन तो देंगे कहीं ना कहीं कृष्ण दर्शन तो देंगे कहीं ना कहीं अच्युतम केशवं कृष्णदामोदरं प्रामनारायनं जानकी वल्लभं हरे कृष्णा वालफ्लोस Thank you, everyone, for joining us for this beautiful divine evening.
We're really thankful from the bottom of our hearts to have all of you with us today on this special day. You've truly made it really special for us.
हमें हमने जो आज कहानियाँ सुनी कुछ बातें हैं जो हमें याद रखनी है कि भगवान ने हमारे लिए हमारी लाइफ में ऑलरेडी बहुत ब्यूटीफुल बहुत क्लियर पथ बना के भेजा है हम जो भी उनसे मांगते हैं हम जो भी उनसे प्रार्थना करते हैं हमें कुछ देने की मटेरियल कुछ देने की हम एक तरह से अपने लाइफ पाथ में अपनी स्पिरिचुअल जर्नी में इं हमें भगवान के सामने जाके कभी अपने लिए अपने फायदे के लिए कुछ नहीं मांगना चाहिए। भगवान दे तो देंगे, लेकिन हो सकता है वो हमारे लिए best possible चीज़ ना हो। और हमने सीखा कि हम भगवान को कुछ भी करे, चाहे वो भोग ऑफर करे, प्रशादम ऑफर करे, भगवान के लिए कीर्तन गाए, भगवान का नाम ले, उनका जप करे, जो भी हम करे, पूरे प्यार के साथ करना है हमें, मैकेनिकली नहीं करना, क्योंकि जैसा हमने विदुराई की कहानी में सुना, विदुराई तो कृष्ण को बनाना के पील खिला रही थी। लेकिन फिर भी कृष्णा उनके पूरे लव में अब्सोर्ब होके पील भी खाए जा रहे थे क्योंकि विदुराई इतने प्यार से खिला रही थी सो वापस से आप सभी को जन्माष्टमी के बहुत-बहुत प्यार और दिल से हम यही आशा करते हैं कि आज के दिन आप भगवान से एक रिश्ता जोड़ सकें चाहे वो कईयों के लिए शायद शुरुआत हो और बहुत जनों के लिए एक और दिन हो आप रोज ही भगवान की वो रिश्ता में आप प्रेम में खोए रह रहे हो जो भी आपकी आज स्टेज हो आप एक कदम आगे बढ़ाइए वो आपकी तरफ दस कदम बढ़ाएंगे और लाइफ आपकी अपने आप ब्यूटीफुल हो जाएगी और हमारी यही अंदर से दिल से आपके लिए इसके साथ हम आज का ना ये प्रोग्राम एंड करेंगे। हरे कृष्णा, हरे कृष्णा, एवरीवन थैंक यू फॉर ज्वाइनिंग अस।










