5 गलतियां जो आप पानी पीते समय करते है | 5 Mistakes You May Be Making While Drinking Water

Five mistakes when drinking water: not holding it in your mouth to mix with saliva, drinking it too cold or hot, consuming large amounts with meals, using plastic bottles that leach chemicals, and ignoring water quality for a fixed daily volume. Room-temperature water in glass or clay, sipped slowly, and monitored by urine color works better.
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इस धरती पर हर जानवर और पक्षी को पता है कि पानी कहाँ से पीना है, कितना पीना है और कब पीना है। फिर एक हम ही क्यों हैं जो आज इतने confused हैं इस पानी के सवाल को लेकर? कभी कोई कहता है चार नहीं आठ glass पियो, शाम को नहीं सुबह पियो, ये filter नहीं वो filter use करो। कोई कहता है गरम पियो, कोई कहता है room temperature पे पियो। आखिर करे तो करे क्या? लेकिन अब आपकी सारी confusion दूर होने वाली है क्योंकि इस वीडियो के एंड तक आप जान जाएंगे पानी के बारे में सब कुछ पहले जानेंगे ऐसी पांच गल्तिया जो आप शायद पानी पीते समय कर रहे हैं पानी कैसे पिए? आप ही बताइए। इनमें से कौन सा तरीका सबसे अच्छा है? यह है रिंकू, घर आते ही या सुबह उठते ही गड़गड़ करके पूरी बottल ही खत्म कर जाता है। यह है टिंकू, सिप पर सिप अपना ग्लास खत्म करता है। यह है बबली, एक सिप लेके उसे मुंह में थोड़ी देर स्क्विश करती है, फिर ही अंदर जो पानी भी पीएंगे तो लेट कर ही पीएंगे। कौन सा है सही? आपके पास है पांच सेकंड। सबसे अच्छा तरीका है मिस बबली का। आइए समझते हैं क्यों। ऑप्शन थ्री वो है जो हमारे मास्टर्स ने हमें सिखाया है। Don't drink your water, eat your water। यानी हर सिप को मुंह में लेकर दो-तीन सेकंड के लिए स्क्विश करें। कुछ इस तरह और फिर ही गल्प करें। इससे क्या होता है? ऐसा करने से आपके मुंह में सलाइवा पैदा होता है और वो पानी के साथ मिक्स हो जाता है। जैसे सलाइवा खाने को डाइजेस्ट करने के लिए जरूरी है, वैसे ही सलाइवा लिक्विड्स को डाइजेस्ट करने के लिए भी बहुत जरूरी है। आयुर्वेद और नैचुरोपैथ पानी का टेम्परेचर क्या होना चाहिए? ये भी आप ही बताइए। इनमें से कौन सा सही है? रिंकू, जो फ्रिज से ठंडा-ठंडा पानी पीता है, टिंकू, जो हर बार गरम पानी ही पीता है, बबली, जो बरफ डालके ही पानी पीती है, या मॉन्टी, जो रूम टेम्परेचर पे पानी पीता है? सोचिए सोचिए। सही जवाब है ऑप्शन फ जरूरी है कि रूम टेम्परेचर पे ही लें, क्योंकि ज़्यादा ठंडा या ज़्यादा गरम पानी दोनों ही बॉडी के लिए मिनी शॉक्स की तरह होते हैं। बॉडी को दुगनी मेहनत करनी पड़ती है उस पानी को पहले रूम टेम्परेचर पे लाने पर और फिर ही पूरे शरीर में भेजने पर। अब अगर गर्मियाँ ज़्यादा हैं औ वो पानी को उतना ही ठंडा करेगा जितने आपकी बॉडी के लिए सही है। और जब सर्दियाँ हो, तो पानी को थोड़ा न्यूक्वम करके ले सकते हैं। बस कभी बहुत ठंडा या बहुत गरम पानी ना ले। तीसरा सवाल, खाने के साथ पानी कितना ले? पहला है रिंकू, ये खाने के साथ साथ हर तीसरी बाइट पे पानी पीता है। दूसरा फिर है बबली जो पानी को खाने के साथ कभी लेती ही नहीं और लास्ट है मॉंटी ये खाने के बाद एक गलास पानी पीते हैं ताकि खाना गले से नीचे उतर जाए आपको क्या लगता है? कौन इन में से ठीक कर रहा है? सही जवाब है खाना खाते समय आपके पेट में एक अग्नि होती है, जिसे आयुर्वेद कहता है जटहर अग्नि, यानी digestive fire। ये वो अग्नि है जो आपके खाने को digest करती है। जब आप खाने के साथ या खाने के तुरंत पहले या तुरंत बाद पानी पी लेते हैं, तो ये जटहर अग्नि भुज जाती है और आपका खाना पचता नहीं। फिर वो अंदर पड खाना खाने से एक घंटा पहले और एक घंटा बाद ही पानी लें और अगर खाने के बीच में पानी लेना ही है तो एक या दो सिप एकदम छोटी मुँ में स्कुश करके अंदर लें पूरा गलास मत पी जाएए और इससे भी बहतर टेक्नीक आ टिंकू की तरह मिट्टी की इन बottल्स में, बबली की तरह दुकान से लाए हुई मिनरल वाटर बottल से, या मॉन्टी की तरह ग्लास की बottल में? गैस करिए। सही जवाब है एक नहीं दो। मिट्टी बottल्स और ग्लास बottल्स दोनों ही सही हैं। लेकिन कोई भी तरह की प्लास्टिक बottल्स एकदम बेकार। जो बाजार में प्लास्टिक ब इसमें कोई जान नहीं होती। सोचिए कितने हफ्तों पहले फैक्ट्री से पैक होकर बाहर निकलता है, कितने दिनों तक गोडाउन्स, वेयरहाउसेस और दुकानों में पड़ा रहता है, और कितने महीनों बाद आपके हाथ में पहुंचता है? ये पानी जो हम प्लास्टिक की बottल्स में खरीद खरीदकर पीते हैं, ये फ्रेश वाटर नहीं होत हमारे पानी में लीच जाते हैं। तो जब हम इन बॉटल से पानी पीते हैं, समझ लीजिए कि हम पानी के साथ साथ धेर सारे माइक्रो प्लास्टिक्स भी अंदर ले रहे हैं। तो आज से ही प्लास्टिक में पानी पीना छोड़ दीजिए पानी को डेड वाटर से लिविंग वाटर बनाने का एक बहुत अच्छा तरीका बताना चाहते हैं। इंट्रोड्यूसिंग सनचार्ज्ड वाटर। बेसिकली ये एक ऐसा मेथड है, जिसमें आप पानी को पांच से आठ घंटे सन में रखते हैं। इस समय वो पानी सन की एनर्जी और सन की हीलिंग प्रॉपर्टीज़ को अब्सोर्ब कर लेता है। तो पानी बेस्ट है अगर आपको ऐसे तरीके का पॉट मिल जाए जो ज़्यादा डीप ना हो और जिसका मुंह वाइड हो। रोडसाइड पे जो मिट्टी की बर्तनों की दुकानें होती हैं, वहाँ से ये आपको मिल जाएगा। बाय चांस ना मिले, तो आप ग्लास की बottल्स में भी पानी को संचार्ज कर सकते हैं। उसमें अपने फ़िल्टर का पीने वाला फिर उसे धूप में पांच से आठ घंटों के लिए छोड़ दें। मानो सुबह नौ बजे रखा, तो शाम चार से पांच बजे उसको उठा सकते हैं। फिर उसको बottल्स या फिर किसी भी मटके में भरकर दिनभर में वो पानी पीते जाएंगे। Suncharged water is like medicine for the body, क्योंकि इस पानी में sunlight stored होती है। आप चाहें तो पानी में नौ से दस तुलसी की पत पानी में से इम्प्योरिटीज को खींच कर उसको नैचुरली प्यूरिफाई करती है। ध्यान रहे इन पत्तियों को खाए न। अब बढ़ते हैं अपने आखिरी और सबसे जरूरी प्वाइंट पर रोज पानी कितना पिए आपको क्या लगता है 3 लीटर, 8 ग्लास, 4 ग्लास या 2 ग्लास सोचिए सोचिए। जवाब है इनमें से कोई भी नहीं क्यों? क्योंकि कोई बहार वाला हमें नहीं बता सकता कि हमें कितने गलास पानी पीना चाहिए आपको रोज कितना पानी पीना चाहिए ये आपके लाइफस्टाइल पर डिपेंड करता है आप रोज क्या खाते हैं सिंपली अपना यूरिन का कलर ऑब्जर्व करो। अगर यूरिन डार्क येलो आता है, तो मतलब आपकी बॉडी सिवरली डिहाइड्रेटेड है। और अगर यूरिन एकदम लाइट येलो, ऑलमोस्ट व्हाइट आता है, तो मतलब आपकी बॉडी को इनफ पानी मिल रहा है। ऑन एवरेज अपने लाइफस्टाइल के अनुसार आपको एक से तीन लीटर के यह हमारे अंदर की सफाई करता है, सारे अंगों को ढंग से काम करने की शक्ति देता है, खून को सर्कुलेट करता है। चलिए एक और बहुत जरूरी बात सीखते हैं। हम सोचते हैं पानी सिर्फ ऐसा दिखता है, लेकिन माँ प्रकृति ने हमें पानी सिर्फ ऐसे नहीं दिया, मगर ऐसे, ऐसे और ऐसे भी दिया है। जब आप अपनी ड पहले से ज्यादा यूरिनेट कर रहे हैं और जूसेस, फ्रूट्स और वेजिटेबल्स में सबसे प्योरेस्ट फॉर्म ऑफ़ वाटर स्टोर्ड होता है जो सीधा माँ प्रकृति के फ़िल्ट्रेशन सिस्टम से गुजर के आता है और न्यूट्रिशन से भरा हुआ होता है। तो इस वीडियो में आपने इतना कुछ सीख लिया। अगर आपको कुछ भी नही नंबर थ्री प्लास्टिक में पानी ना पिए नंबर फोर खाने के दौरान तुरंत बाद या तुरंत पहले पानी ना पिए और नंबर फाइव पानी की क्वांटिटी से ज़्यादा पानी की क्वालिटी पर ध्यान दें अगर आप सात्विक लाइफ के बारे में और जानना चाहते हैं तो हमारी हेल्थ ट्रांसफॉर्मेशन वर्कशॉप ज़रूर अटेंड कर और आप इसे घर बैठे-बैठे ही अटेंड कर सकते हैं। वर्कशॉप के लिए रजिस्टर करने के लिए यहाँ क्लिक करें। हमें नीचे कमेंट्स में बताएं कि आप अगली वीडियो किस टॉपिक पे देखना चाहते हैं, और इस वीडियो को अपनी फैमिली के साथ जरूर शेयर करें ताकि वो भी आपके साथ ये हैबिट अपना पाएं। अभी क










