5 Daily Habits Destroying Your Brain Health and Memory (Most People Do All 5)

In this Hindi‑English YouTube video, presenter Samaira Banga (Speaker A) explains five everyday habits that silently damage brain health, memory and focus, and offers practical, science‑backed remedies. She begins with habit 5 – multitasking – demonstrating an experiment where participants take twice as long to complete a simple alternating‑alphabet‑number task when forced to switch tasks, illustrating how partial attention weakens the brain’s focus muscle. She recommends monotasking and turning off phone notifications. Habit 4 is doom‑scrolling; endless social‑media scrolling exhausts the brain’s “energy rooms” and leads to mental fatigue. She proposes a 12‑hour digital‑fasting window using phone app‑limit settings. Habit 3 is consuming digital junk (mindless memes, celebrity gossip, violent or low‑value content). She cites a study where participants exposed to junk food‑style content showed increased cravings, stress and sadness, arguing that such content “feeds” the brain. The solution is to unfollow junk pages and curate a high‑value content diet. Habit 2 is staying glued to a chair and avoiding movement. She explains how physical activity releases endorphins, dopamine and serotonin, improving mood and cognition, and suggests incorporating daily exercise or yoga via the Satvic app. Habit 1 is cutting sleep short; she describes how sleep clears beta‑amyloid and cerebrospinal fluid, and how sleep deprivation leads to memory lapses and long‑term risk of Alzheimer’s. The remedy is 7‑8 hours of sleep, preferably ending by 9:30 pm. Throughout, she uses relatable examples, brief experiments, and actionable steps (notification off, app‑limit schedules, monotasking, digital fasting, movement routines, sleep hygiene) to help viewers protect their brain health.
Chapters
इस वीडियो में आप जानेंगे पांच ऐसी हैबिट्स जो साइलेंटली आपकी ब्रेन हेल्थ, मेमोरी और फोकस को डिस्ट्रॉय कर रही हैं। From bad to worst। क्या आपके साथ भी ऐसा होता है? कि आप फोन अनलॉक करते हो और तुरंत भूल जाते हो क्यों किया? या पूरा पेज पढ़ने के बाद रिएलाइज करते हो कि एक शब्द भी अंदर नहीं गया लेकिन वर्ल्ड के टॉप न्यूरोलॉजिस्ट्स बता रहे हैं कि ये अर्नी ब्रेन डैमेज के साइंस हैं, जिनके पीछे हैं यही पांच हैबिट्स। शुरू करते हैं नंबर फाइव से मल्टीटास्किंग मतलब ब्रेन से दो एनर्जी रिक्वायरिंग टास्क्स साथ में करवाना। मान लो आप किसी से बात कर रहे हो, लेकिन हर पांच मिनट म मिनट में देखते हो कितने व्यूज आए या शायद जैसे अभी भी आप इस वीडियो को देखते-देखते साइड में कुछ काम कर रहे हो लेकिन ये मल्टीटास्किंग से ब्रेन में होता क्या है यही समझने के लिए हमने अपनी टीम के साथ एक बहुत इंटरेस्टिंग एक्सपेरिमेंट किया ऑलराइट अब आप सबके पास एक पेपर और पेन है आपका Your time starts now. Done, done. Okay. Done. All right. तो आपको ये करने में लगे almost thirty five seconds. अब हम उसी exercise को एक बार फिर करेंगे, लेकिन एक twist के साथ। इस बार आपको पहले एक alphabet लिखना है, फिर एक number, फिर एक alphabet, फिर एक number। बार-बार switch करते जाना है। Ready?
Yes. Your time Starts now.
Done. Okay. Done. इस बार आपको वो same चीज़ करने में लगा almost fifty five seconds, यानी nearly double time. आपको पता है क्यों? क्योंकि second round में जब multitasking करी, brain deep focus mode में जा ही नहीं पाया. और यही exactly रोज़ हमारी life में भी होता है. जब हमारी Zoom meeting चल रही होती है और हम साथ साथ grocery ordering भी कर रहे होते हैं. या जब अपने लैपटॉप पे 10 टैब्स खोलके रखते हैं और एक से दूसरे पे जंप करते रहते हैं। अगर हमारे पास 100 यूनिट्स ऑफ़ फोकस है, वो दो या तीन चीजों के बीच स्प्लिट रहता है पूरा दिन और पूरी लाइफ। रिजल्ट? हाँ, सब कामों की स्पीड तो गिरती ही है, जैसे आपने उस एक्सपेरिमेंट में देखा पार्शियल अटेंशन देना नॉर्मल है और महीनों ऐसा करते-करते हमारी ब्रेन की फोकस मसल इतनी श्रृंखल हो जाती है कि हम किसी चीज़ को फुल फोकस, फुल अटेंशन दे ही नहीं पाते। डॉन से ज़्यादा मुश्किल तो आपकी फोकस को पकड़ना हो गया है। लेकिन याद रखना, विराट कोहली आधे फोकस से क्रिकेट खेलता दुनिया का कोई भी ग्रेट काम आधा फोकस करके नहीं हुआ। तो सल्यूशन क्या है? मोनोटास्किंग, यानी एक टाइम पे एक काम करना, उसमें पूरा अब्सोर्ब हो जाना। मीटिंग में हो तो बस मीटिंग अटेंड करो, खाना खा रहे हो तो सिर्फ खाना खाओ। कोई आपसे बात कर रहा है तो आप उनको अपनी पूरी प्रेजेंस देके सुन उसको लिख लो और बाद में उसपे वापस आजाओ। अब अगली हैबिट पे पढ़ने से पहले मैं आपको एक बहुत प्रैक्टिकल चीज बताना चाहती हूँ। मल्टीटास्किंग को बंद और अपनी ब्रेन पावर को वापस लाने के लिए अपने फोन की सारी नोटिफिकेशंस बंद कर दो। सोचो आप किसी काम पे फोकस कर रहे हो और अचानक ट्रिंग फैम ये एप्स दिन भर आपके कंधे पे टैप करती रहती हैं, बिना आपकी परमिशन के, बिना किसी काम के। तो क्या करना है? फोन की सेटिंग्स में जाओ, फिर नोटिफिकेशंस पे और एक-एक करके सब बंद कर दो। सोशल मीडिया, जोमेटो, ब्लिंकिट, शॉपिंग एप्स, स्पोर्ट्स अलर्ट्स सब। मैंने पर्सनली सिर्फ फोन कॉल्स और ए अंजाइटी होती है ना हमको कि कोई मैसेज या अपडेट मिस तो नहीं हो जाएगा। वेल उसके लिए दिन में तीन-चार बार जाके देख लो अपने मर्जी से, लेकिन इन ऐप्स के हाथ में विक्टिम मत बनो। Just remember multitasking chips your brain, monotasking strengthens it। बढ़ते हैं हैबिट नंबर फोर पे। यहाँ से हर नेक्स्ट हैबिट का आपकी ब्रेन हेल्थ पे डैमेज और भी गहर कर सोचना कि फोन एक बार चेक कर लेते हैं और 20 मिनट तक स्क्रॉल ही करते जाना या रात को नींद में खुद को कहना बस एक और रील ये डूम स्क्रॉलिंग से हमारे ब्रेन में कुछ ऐसा होता है जो सोशल मीडिया कंपनीज आपसे छुपाने की पूरी कोशिश करती हैं आपका ब्रेन एक घर जैसा है जिसमें बहुत सारे रूम्स ह तो ब्रेन की एनर्जी थोड़ी खाने के रूम में। अगला वीडियो किसी का डांस, तो ब्रेन की एनर्जी थोड़ी एंटरटेनमेंट के रूम में। अगला ब्रेकिंग न्यूज़, तो वही एनर्जी गए न्यूज़ के रूम में। अगला किसी की शादी, अगला फिटनेस टिप, अगला कॉमेडी क्लिप, अगला ब्यूटी टिप, तो एक मिनट में वही होता है आपके ब्रेन के साथ। कुछ मिनट स्क्रोलिंग के बाद ही वो इग्जॉस्ट हो जाता है, और यही है सबसे बड़ी आयरनी। क्योंकि जब हम दिनभर काम करके थक जाते हैं, सोचते हैं चलो थोड़ा चिल कर लेते हैं, और स्क्रोल करना चालू। ये सिर्फ आपके साथ नहीं होता, मेरे साथ भी होता है। हम सोचते हैं कि याद रखना, जैसे-जैसे आप करते हो स्वाइप, वैसे-वैसे ब्रेन होता रहता है वाइट। तो इसका सल्यूशन क्या है? Well, best सल्यूशन है रोज 12 आवर्स की फास्टिंग। सुबह जी, आपको फास्टिंग से प्यार है क्या? इसका स्क्रॉलिंग से क्या कनेक्शन? अरे, मैं खाने वाली फास्टिंग की बात नहीं कर रही, 12 आवर न्यूज़ चैनल्स या आपके ब्रेन को आपकी तरफ से पहला गिफ्ट होगा, the gift of silence।
लेकिन ये प्रैक्टिकल होगा कैसे? ये वीडियो देखने के बाद दो दिन तो बड़ा जोश रहेगा, लेकिन फिर सब वापस वही।
बिल्कुल राइट। अगर आपने डूम स्क्रॉलिंग की आदत को तोड़ना अपनी विल पावर पे छोड़ दिया, तो फेलियर आपको इन ऐप्स से हुक्ड रखना, तो मोटिवेशन पर रिलाय नहीं कर सकते। इंस्टेड एक सिस्टम सेट करना होगा, जिससे स्क्रॉलिंग की आदत यूं छूट जाए, रिजल्ट ऑफ़ विच आपका ब्रेन एकदम शार्प और फोकस्ड रहने लगेगा। ये सिस्टम है रोज़ 12 घंटे के लिए सोशल मीडिया ऐप्स को ब्लॉक कर देना। इसके लिए आपके सेकंड टैब पे जाके ऐप लिमिट पे क्लिक करो, फिर क्रिएट स्केच्यूल पे अपनी डिजिटल फास्टिंग की विंडो सिलेक्ट करो, सारे डेज सिलेक्ट करो और जो सोशल मीडिया ऐप्स ब्लॉक करनी हैं उनको सिलेक्ट करो। अब इन 12 घंटों में ये ऐप्स खुलेंगे ही नहीं। हाँ, एक और इम्पोर्टेंट चीज़, बाकी 12 घं अब पंद्रह मिनट स्क्रॉलिंग के बाद वो आपको और स्क्रॉल करने ही नहीं देगा। ये कुछ ही चेंजेस करने से होगा क्या? जब आप सुबह उठोगे, पहला खयाल आपका अपना होगा, किसी और की रील का नहीं। वो खयाल आने लगेंगे जो स्क्रॉल करते वक्त कभी नहीं आते। आपके बेस्ट आइडियाज़, आपके सवालों के जवाब, वो बिन अगर मल्टीटास्किंग और डूम स्क्रॉलिंग ब्रेन को इतना नुकसान करता है, तो बाकी तीन हैबिट्स क्या हैं जिनका नुकसान और भी ज़्यादा है? आपको सच बोलूँ तो वो फर्स्ट हैबिट ऐसी है जिसके लिए मैं खुद गिल्टी हूँ। लेकिन पहले देखते हैं हैबिट नंबर थ्री: फॉलोइंग डिजिटल जंक। डूम फालतू का सीरो वैल्यू कंटेंट कंज्यूम करना। डिजिटल जंक में क्या आता है? ब्रेनलेस मीम्स, सेलेब्रिटी गॉसिप, जैसे एयरपोर्ट पे किसी एक्टर की वीडियो जहाँ पापराज़ी उनको फॉलो कर रहे हो। बाय दे आपको पता है ना आधे से ज़्यादा टाइम ये नकली होता है। सेलेब्रिटीज़ खुद उन वीडियोग्र और आजकल तो AI animated videos जहां लॉकी से लेकर बोबी तक सब बात कर रहे होते हैं। अगर आप टीवी देखते हैं, तो ऐसे शोज जिनमें लोग लड रहे होते हैं, रोने का नाटक कर रहे होते हैं, एक दूसरे के पीछे गॉसिप कर रहे होते हैं, वो मूवीज जिनमें सिर्फ वायलेंस होता है, खून, मार, धमकी।
मुझे पता है अभी थोड़ा बहुत ही तो देखते हैं क्या फर्क पड़ता है?
आप मैजिन करो आप एक फ्राइड समोसा उसके ऊपर कोक उसके ऊपर एक शुगर से भरी जलेबी अपनी बॉडी में डाल दो जितना ये आपकी बॉडी को डैमेज करता है उतना ही ये डिजिटल जंक आपके ब्रेन को डैमेज करता है एक रिसर्च स्टडी में 63 यंग अडल्ट्स को जंक फूड कंटेंट की फीड देखी। बाद में दोनों से क्वेश्चनिंग की गई। जो ग्रुप जंक फूड वाली फीड देख रहा था, उन्हें ज़्यादा अनहेल्दी फूड की क्रेविंग्स आए, साथ ही ज़्यादा हंगर भी और ज़्यादा स्ट्रेस और सैडनेस भी। रिसर्चर्स का इससे ये कंक्लुशन था कि जो आप स्क्रीन पे देखते हो, वो गॉसिप करने लगोगे, किसी की हॉलिडे देखते रहोगे तो अपनी लाइफ छोटी लगेगी, वायलेंस देखोगे तो अंदर वायलेंस फील होगा। तो देखा जाए तो ये जंक कंटेंट आप नहीं कंज्यूम कर रहे, असल में वो कंटेंट आपको कंज्यूम कर रहा है। तो क्या हम सोशल मीडिया देखना बंद करते, कंटेंट देखना छोड़ दे? जो आपके ब्रेन को डिप्लीट नहीं नरिश करे, जो पेजेस डिजिटल जंक शेयर कर रहे हैं, उन्हें आज ही अनफॉलो करें और वो पेजेस और चैनल्स जिनसे आपको सच में कुछ सीखने को मिले, जो वैल्यूअबल इनफॉरमेशन या स्किल्स शेयर कर रहे हैं, उन्हें फॉलो करो। उनमें से एक ऐसा चैनल जो आप ऑलरेडी द तो सब्सक्राइब जरूर करें ताकि ये सफर यहाँ खत्म ना हो। दूसरा, OTT प्लेटफॉर्म्स पे भी आप क्या देखते हैं उसको कैरफुली चूज़ करो। कुछ मूवीज़ होती हैं टाइम पास मूवीज़। देखते वक्त तो मजा आता है, लेकिन एंड होने के बाद आपको कंपैरिजन, ईगो, फ़ियर जैसी फीलिंग्स फील होती हैं। लेकिन अंदर बहुत कुछ जगा भी देती हैं जैसे कोई स्टोरी जो आपको महीनों मोटिवेट करें मैं ये नहीं कह रही कि कुछ लाइट हार्टेड या टाइम पास कभी मत देखो मैं खुद देखती हूँ लेकिन वो एक एक्सेप् अगर आपको एक शार्प ब्रेन चाहिए, तो अपनी कंटेंट डाइट का उतना ही ध्यान रखना होगा जितनी अपनी फूड डाइट का। आप रैंडमली ऐसी कुछ खाते नहीं हो ना, तो रैंडमली कुछ भी देखते क्यों हो? चलिए बढ़ते हैं सेकंड वर्स्ट हैबिट पे, लेकिन पहले मैं आपसे एक सवाल पूछना चाहती हूँ। देखते हैं और एक फोन। अगर मैं आपसे पूछूं, इनमें से आपके ब्रेन के लिए सबसे ज्यादा अनहेल्दी चीज़ कौनसी है? आप क्या बोलोगे? आप में से ज्यादातर लोग सिगरेट या अल्कोहल की तरफ पॉइंट करोगे, या शायद बर्गर भी। लेकिन इन सबके नेगेटिव इफेक्ट्स के बारे में तो आप ऑलरेडी जानते हैं, और इन्हें हम अपना पूरा दिन एक कुर्सी से दूसरी कुर्सी पे बैठे-बैठे बिताते हैं। सुबह उठते हैं, बेड पे बैठते हैं। बाथरूम गए तो टॉयलेट पे बैठे हैं। ब्रेकफास्ट कर रहे हैं तो टेबल पे बैठे हैं। ऑफिस जाते हैं तो कैब या मेट्रो पे बैठे हैं। काम करते हैं तो पूरा दिन डेस्क पे बै Not in a birthday party, but in our real life. और यही है हमारी second habit जो आपके brain health और memory को कमजोर कर रही है Living glued to a chair. आपने कभी notice किया है कोई workout करने से पहले चाहे आप खुद को कितना भी force करके क्यों न लाओ करने के बाद आपको हमेशा बहुत अच्छा feel होता है एक खुशी सी feel होती है ये एक coincidence नहीं है ये इसलिए होता है क्योंकि जब आप मूव करते हो अपने बॉडी को, आपका ब्रेन तुरंत तीन पावरफुल हार्मोन्स रिलीज़ करता है: एंडोरफिन्स, डोपामिन और सेरेटोनिन। इन्हें कहते हैं हैप्पी हार्मोन्स। ये वही केमिकल्स हैं जो आपके मूड को अपलिफ्ट करते हैं, जो आपको मोटिवेटेड फील कराते हैं। इनफैक्ट ड्यूक य सिर्फ एक्सरसाइज करें। चार महीने बाद आपको पता है क्या हुआ? दोनों ग्रुप्स में सेम इम्प्रूवमेंट पाई। इसलिए मल्टीपल रिसर्च स्टडीज़ ने कंक्लूड किया है कि रेगुलर एक्सरसाइज़ डिप्रेशन को ट्रीट करने के लिए एंटीडिप्रेसेंट पिल्स जितनी इफेक्टिव है। दूसरी तरफ जब आप हफ्तों कोई मूवमेंट काम करने की कोशिश करते हैं लेकिन ब्रेन एकदम स्लगिश रहता है। ब्रेन फॉग इतना होता है कि एक सिंपल डिसिशन लेने में इतना समय लग जाता है। So remember, movement is one of the best medicines for your brain। अगर आप मूवमेंट को अपनी डेली लाइफ का हिस्सा बनाना चाहते हो, तो हमने सात्विक ऐप पे recently डेली योगा क्लासेस शुरू करी हैं। मतलब हर रोज़ राधिका और अक्षय हमारा इससे एक ही इंटेंशन है कि ये नॉलेज ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुँचे। अगर आप शुरू करना चाहते हो, तो सात्विक ऐप डाउनलोड करके इनरोल कर सकते हो। All right, moving on। आपको क्या लगता है? वो कौन सी हैबिट है जो ब्रेन हेल्थ को सबसे ज़्यादा डैमेज करती है? इन चारों से को बार-बार स्नूज करते रहते हैं? क्या दिन में चाय या कॉफी पीने के बिना आपका काम ही नहीं चलता? क्या कभी ऐसा होता है कि आप किसी से मिले और पांच मिनट बाद उनका नाम ही भूल गए? अगर आप हाँ नोड कर रहे थे, तो मतलब आप भी ये हैबिट कर रहे हैं। कटिंग योर स्लीप शॉर्ट। और नहीं, सिर्फ ज़्याद जिससे पहले मैं आपको बताऊं, आपको पता है? जब आप सो रहे होते हो, आपके ब्रेन के अंदर एक बहुत ही माइंड ब्लोइंग प्रोसेस चल रहा होता है। पूरा दिन आप सोचते हैं, काम करते हैं, इससे ब्रेन सेल्स वेस्ट प्रोड्यूस करते हैं, जो ब्रेन के अंदर जमा होता रहता है। इन्हें कहते हैं बीटा अमेलोइड। बनती है और उस जगह में एक fluid flow होती है जिसे कहते हैं cerebrospinal fluid. So if you think about it, sleep is actually a shower for your brain. लेकिन जब आप अपनी sleep को cut short कर देते हो, तो क्या होता है? Brain में ये waste clean हो ही नहीं पाता अच्छे से. Short term में इस toxic buildup के कारण memory weak होने लगती है. हम छोटी-छोटी चीज़ जैसे किसी का नाम या हम क्या बोल रहे थे उसको भूलने लगते हैं और लॉन्ग टर्म में ये टॉक्सिक बिल्डअप अल्जाइमर्स और डिमेंशिया भी क्रिएट करता है। तो क्या करें? दो चीजें। पहली, रोज कम से कम सात से आठ घंटे की नींद लीजिए। ये मिनिमम है। और दूसरी, और ज़्यादा इम्पोर्टेंट, स्लीप की गोल्डन विंडो में कुछ और नहीं, लेकिन सबसे ज्यादा क्लीनिंग होती है, सबसे गहरा रिपेयर होता है। मैंने आपको आज जो भी बताया, पर्सनली मेरे लिए ये हैबिट फॉलो करना सबसे मुश्किल है। but मैं पूरी कोशिश कर रही हूँ कि रात साढ़े नौ बजे तक सब काम खत्म करके बेड में आ जाऊँ। all right so यही कंप्लीट होती है हमारी फिफ्थ हैबिट के साथ साथ प मेरी तरफ से आज के लिए इतना है हम जल्द फिर वापस मिलेंगे










