कभी ना करें ये 7 गलतियां भोजन खाते समय | 7 Habits of Mindful Eating

The video, presented by Samaira Banga, explains seven habitual errors that undermine healthy digestion and overall well‑being, and offers practical, culturally rooted remedies. It begins by describing how eating without genuine hunger leaves the digestive fire ("jatar agni") dormant, leading to poor digestion and toxin buildup. It then warns against using strong sauces to mask lack of appetite, and stresses the importance of listening to true hunger signals. The third point advocates eating with the hands, arguing that tactile nerve endings trigger digestive signaling, whereas fork‑and‑spoon eating deprives the body of this cue. The fourth mistake is combining many different dishes on a single plate, which overwhelms the stomach’s enzymatic capacity and causes acidity, weight gain, and other ailments. The fifth error is insufficient chewing; thorough mastication releases saliva, reduces digestion time, and prevents food from lingering in the gut for hours. The sixth mistake is over‑filling the stomach with large bites, ignoring the natural limit that a half‑full stomach is optimal for digestion. Finally, the seventh mistake is jumping straight into work after a meal, creating a competition for bodily resources between digestion and mental activity. Throughout, the speaker interweaves Ayurvedic concepts, references to Indian scriptures (Bhagavad Gita, ancient dietary customs), and modern health reasoning, concluding with a step‑by‑step mindful‑eating routine that includes gratitude, small bites, proper chewing, moderate portions, and a brief post‑meal rest.
Chapters
क्या आपको पता है हम में से जादातर लोग भोजन तो बहुत अच्छा खाते हैं लेकिन दुनिया का सबसे अच्छा भोजन खाने के बावजूद भी ऐसी साथ गलतिया करते हैं जिनकी वज़े से अच्छे से अच्छे खाने का भी हमें कोई फायदा नहीं मिलता ये ऐसी साथ गलतिया है जो आप या तो भोजन से पहले, भोजन के वक्त या भोजन के ब तो चाहे आप इनमें से तीन गलतियाँ कर रहे हो या सातों की सात, ये वीडियो पूरी जरूर देखें क्योंकि इस वीडियो में आप सिर्फ गलतियाँ नहीं, हर एक गलती को सुधारना भी सीखेंगे।
अरे, लेकिन मेरा खाना पीना तो ठीक चल रहा है, मुझे तो कोई दिक्कत की बात ही नहीं है, तो मुझे इसकी क्या जरूरत?
क अगर इन में से एक भी सवाल का जवाब ना है, तो मतलब आप इन साथ में से कोई ना कोई गलती जरूर कर रहे हैं। आईए सीखते हैं ये गलतिया है क्या और आप इने ठीक कैसे कर सकते हैं। पहली गलती बिना भूख के भोजन खाना तो जब तक लंच या डिनर का टाइम आता है, आपको असली भूख लगती ही नहीं। लंच या डिनर खाते तो हैं, लेकिन आपकी जटर अग्नि, यानी आपकी डाइजेस्टिव फायर प्रजालित ही नहीं होती, और बुझी जटर अग्नि पे आप प्लेट भर दाल-चावल, रोटी, सब्जियाँ, इडली सांबर डाल देते हैं। अब ये बात ध्यान से स डाइजेस्ट नहीं होता और पचेगा नहीं तो बाहर कैसे निकलेगा? वो अंधरी अंदर पड़ा-पड़ा सरती रहता है। तो करे क्या? बीच-बीच में ये स्नैकिंग और मंचिंग बंद करे। आप समझिए कि भोजन खाना हवन करने जैसा है। आप हवन या पूजा करने से पहले उसकी तैयारी करते हैं, सारी सामग्री को इकट्ठा करके एक ज क्या आप में से कोई है जो चलते फिरते घूमते भागते बस आग में सामग्री फेंकते रहते हैं? नहीं, क्योंकि आप समझते हैं कि हवन करने का एक नियम होता है। लेकिन जब सेम बात इस पेट में जली आग पे आती है, तो क्यों हम सब कुछ भूलकर बस चलते फिरते घूमते भागते उसमें सामग्री डालते रहते हैं, जबकि आराम से बैठकर धीरे-धीरे पेट की अग्नि में आहुति डालनी चाहिए और आहुति तभी डालनी चाहिए जब आग अच्छे से जली हो। धीमी अग्नि पे आहुति यानी भोजन डालेंगे, तो अग्नि भी भुज जाएगी और भोजन भी नहीं पचेगा। तो अपने ब्रेकफास्ट और लंच के बीच, लंच और डिनर के बीच और डिनर और ब्रेकफास टमेटो सॉस, शेजवान सॉस, सोया सॉस कौनसी है? ना टमेटो ना शेजवान और ना सोया। दुनिया की बेस्ट सॉस है आपकी भूख। जब असली भूख लग रही हो ना, तो सिंपल सादा खाना भी बहुत टेस्टी लगता है। और जब असली भूख के बिना खाते हैं, तो खाने को जबरदस्ती चटपटा बनाने के लिए उसमें हम सब कु सिर्फ तभी खाइए जब असली भूख लगी हो। असली भूख वो होती है जो पेट में गुरगुर के रूप में अनुभव होती है, और नकली भूख वो होती है जो हर दो घंटे बाद आपसे कुछ नमकीन, कुछ चटपटा, कुछ मसालेदार मांगती है। अगर भूख न हो, तो अपना मील स्किप कर दीजिए। आजकल हम मील स्किप करने से डरते हैं, गुस्से, चिरचिराहट, टेंशन या स्ट्रेस में खाना। आप इमेजिन कीजिए कि आप एक लंबे दिन के बाद बहुत मेहनत करने के बाद डिनर करने बैठे हैं। प्लेट में आपका मन पसंद खाना रखा है और आपको जबरदस्त भूख भी लग रही है। वो पेट में गुड़गुड़ वाली भूख। आप अपनी पहली बाइट उठा के मुंह में डालने ह प्रिय मित्र के साथ एक दुर्घटना गड़ गई है। आप क्या करेंगे? आप उसी वक्त प्लेट को साइड करेंगे। अगर आपके घर के बड़े लोग आपको बोले, अरे बेटा थोड़ा तो कुछ खालो, आप क्या बोलेंगे? नहीं, अभी मुझे भूख नहीं लगी। पर 30 सेकंड में आपकी भूख कैसे मर गई? क्योंकि जब आपके मन में किसी भी तरह यहाँ लग जाती है। जब शरीर की सारी ऊर्जा यहाँ लग गई, तो क्या यहाँ तक काम करने के लिए ऊर्जा बचेगी? नहीं। आप जो भी चीज़ दुख, गुस्से या बिना इच्छा के खाते हैं, वो आपके शरीर में जाते ही जहर बन जाती है, क्योंकि वो पचती ही नहीं। और इसका हमारी भारतीय संस्कृति में उदाहरण भी ह हमारे पूर्वजों ने ऐसा नियम क्यों बनाया? क्योंकि उन्हें पता था परिशानी और दुख के माहौल में परिवार वाले खाना पचा नहीं सकते तो जब आप खा भी रहे होते हो तो एकदम खुशी से, रिलाक्स होके अराम से खाएं और एकदम स्थिर था, शांति और प्रसन्नता के साथ अपना भोजन खाए। आप देखेंगे इस एक चेंज का आपकी डाइजेशन और आपकी हेल्थ पर कितना असर पड़ेगा। आइए अब बढ़ते हैं हमारी तीसरी गलती पर हमेशा कांटा चम्मच के साथ खाना। अंग्रेज हमारे देश में बहुत कुछ छोड़के गए हैं, उनमें से एक है कांटे और चम हमेशा हाथ से ही खाना सिखाया है क्यों? क्योंकि जब आप अपने भोजन को उंगलियों से छूते हैं, आपकी उंगली में मौजूद नर्व एंडिंग्स के द्वारा आपके दिमाग को तुरंत सिग्नल जाता है कि अब खाना आने वाला है और फिर वही सिग्नल आपका दिमाग आपके पेट, आँतों, लीवर, किडनी सबको भेजता है। तो ऐस और आते लुब्रिकेट होने लगती है। दूसरी तरफ जब हम काटा चमच से खाते हैं, तो शरीर को सिग्नल नहीं मिलता। हाथ से खाने का एक और फायदा ये है कि हमारे हाथ हमें कुछ ज़्यादा थंडा या ज़्यादा गरम खाने ही नहीं देते। और भगवत गीता में भगवान कृष्ण हमें बताते हैं कि हमें कभी कुछ ज़्यादा थं और हाथों से खाते वक्त कभी कोई शर्म मत कीजिए। दुनिया को दिखाइए कि खाना खाने का सही तरीका क्या है, हमारा भारतीय तरीका। खाना खाते वक्त चौथी गलती जो आप शायद कर रहे हो, बहुत सारे पकवान साथ में मिला देना। क्या कभी आपने ऐसी दिखने वाली थाली खाई है? थोड़ी दाल, उसके साथ थोड़ा चावल पुरा रायता। अरे पापड़ के बिना स्वाद कैसे आएगा? तो थोड़ा पापड़। और हाँ, चटनी आचार तो भूल ही गए। और क्यों ना इन सबके बाद कुछ मीठा हो जाए? ऐसी प्लेट को आप जितनी मर्जी भूख के साथ क्यों ना खालो? जितने मर्जी आराम के साथ, हाथों के साथ क्यों ना खालो? आपका पेट बेचारा कंफ्यूज हो ज जिसमें बहुत सारी अलग-अलग सामग्री हो, आपका पेट उसको पचाने के लिए इतने अलग-अलग तरह के पाचक रस छोड़ी नहीं पाता। तो फिर क्या होता है? जो खाना नहीं पच पाता, वो अंदर पड़ा-पड़ा शरीर में सरता है और एसिडिटी, हेडेक, मोटापा, पिंपल्स, आलस जैसी प्रॉब्लम्स पैदा करता है। एसीन गॉस्पल ऑफ इसमें वो बताते हैं दो या तीन भोजनों से संतुष्ट रहो जो तुम्हें मा प्रकृती देती है मैं तुम्हें सच बताता हूँ यदि तुम अपने शरीर में सभी तरह के भोजन एक साथ मिला देते हो तो तुम्हारे शरीर की शान्ती भंग हो जाएगी और युद्ध प्रारंब हो जाएगा तो क्या करें एक बार में एक ही चीज खाएं अगली चावल और रोटी अगर दोनों पड़े हैं तो कोई एक उठाएं। आईए बढ़ते हैं अपनी पाँच्मी गल्ती पर अच्छे से चबाकर न खाना। चबाना जानते हैं मगर करते नहीं। बच्पन से सुनते आये हैं कि 32 बार चबा के खाना खाना चाहिए। लेकिन करें क्या? हम इसका महत्व ही नहीं समझते। बस टीवी देखते देखते बात करते करते लेकिन अब से एक रूल ध्यान रखना किसी भी भोजन को अंदर लेने से पहले इतना चबाएं कि वो जूस में कनवर्ट हो जाएं जब तक आप चबा चबा कर उसका जूस नहीं बनाते उसको अंदर मत लीजिए क्यों? क्योंकि जितना जादा चबाते हैं उतना जादा सलाइवा निकलता है और जितना निकलेगा सलाइवा उतना आसान होगा उसको पच तो उबालने में करीब पंद्रह मिनट लगते हैं। लेकिन जब आप उसको छोटा-छोटा काटकर उबालते हैं, तो कितना समय लगता है? मुश्किल से सात मिनट, almost आधा समय। बस exactly यही होता है आपके पेट के साथ। बिना अच्छे से चबाए खाएंगे, तो भोजन को करीब बीस घंटे लग जाएंगे पचने में। लेकिन उसी चीज़ को एकदम चबा-चब क्योंकि जो काम आपके दांत कर सकते हैं, वो आपकी आँतें कभी कर ही नहीं सकती।
अरे ये सब तो ठीक है, लेकिन इसको करें कैसे? जैसे ही प्लेट सामने आती है, मैं तो धराधर खाना शुरू हो जाती हूँ। चबाने के बाद में तो याद भी नहीं रहता, और जब याद आता है, तब खाना खत्म हो जाता है।
देख मैंने अक्सर लोगों को देखा है, उनकी एक बाइट करीब आधी रोटी के बराबर होती है। अगर आप इतनी बड़ी-बड़ी बाइट खाते हैं, तो पेट तो छोड़ो, दांत भी अपना काम अच्छे से नहीं कर पाएंगे। तो छोटी-छोटी बाइट लें। दूसरी चीज़, जब खाते हैं, तो खाने पे ध्यान दें। हम इंसान अलग ही है अगर आप खाते समय पांच अलग-अलग चीज कर रहे हैं, तो चबाने पे ध्यान जा ही नहीं सकता। तो बस छोटी बाइट ले और शांति से बिना ज़्यादा distraction के खाइए। चबाने में खुद ध्यान चला जाएगा। अगली और छठी गलती एकदम ऊपर तक ठसा-ठस पेट को भर के खाना। आप किचन में जाइए और एक मिक्सी लीजिए। उसको ऊपर अगर उसको आप ठसा ठस कपड़ों से भर देंगे, क्या कपड़े धोल पाएंगे? नहीं। क्यों? क्योंकि प्रकृति का नियम है कि कुछ चीज मिक्स करने के लिए थोड़ी जगह खाली छोड़नी पड़ती है। हम अपनी मिक्सी के साथ ऐसा कभी नहीं करते, तो पेट के साथ ऐसा क्यों करते हैं? एकदम दबाकर खाना मानो कोई नया रिवाज बन तो क्या करें? हमारे शास्त्र सिखाते हैं कि पेट को सिर्फ आधा ही खाना से भरना चाहिए। एक चौथाई हिस्सा पाचक रस छोड़ने के लिए रखो और एक चौथाई हिस्सा खाली रखो मंथन क्रिया के लिए।
लेकिन पता कैसे लगेगा कि पेट कितना भर गया? इस नियम को प्रैक्टिकली फॉलो कैसे करें?
आसान है। जब आपका दूस लेकिन ब्रेक देने से अक्सर आपको पता चल जाएगा कि वो दूसरी सर्विंग लेने का आपको ना मन था और ना जरूरत। आप खुद रुक जाएंगे। और हाँ, एक बहुत जरूरी बात, फर्क नहीं पड़ता है आप क्या खा रहे हो, आप हरी से हरी सब्जियाँ क्यों न खा रहे हो, फल, मेवे, पौषण से भरा भोजन क्यों न खा रहे हो? आखरी गलती जो हम करते हैं, वो है भोजन के तुरंत बाद काम पे लग जाना। आचार्य के लक्ष्मण शर्मा, भारत में प्राकृतिक चिकित्सा के जनक, ने हमें सिखाया है, work and digestion must be kept apart, so there may be no competition between them। यानी काम और पाचन को अलग-अलग रखना आवश्यक है, ताकि दोनों के बीच मुकाबला ना हो। ऐसा क्यों? क्योंकि आपका शरीर एक बार या फिर सोच-विचार पढ़ाई लिखाई का काम। आप जब खाने के तुरंत बाद अपने काम पे लग जाते हैं, तो आपके शरीर में लड़ाई शुरू हो जाती है। पेट कहता है, पूरी शरीर की शक्ति मुझे चाहिए, वरना मैं ये खाना कैसे डाइजेस्ट करूँगा? और दिमाग कहता है, नहीं, सारी शक्ति मुझे चाहिए, वरना मैं स और दोनों ही काम अच्छे से नहीं हो पाते। काम में नींद और आलस आता है और साथ ही साथ पहले खाया भोजन पच ही नहीं पाता। इसीलिए दुनिया के इतने देशों में सीएसटा टाइम बनाया गया है, जिसमें दोपहर में लंच के बाद दुकानें, ऑफिस सब कुछ थोड़ी देर के लिए बंद कर देते हैं। स्पेन, मैक्सिको, फिलीपी या तो हम बाहर का काम कर सकते हैं या अंदर का काम और तो और आपने देखा ही होगा जो लोग मजदूरी का काम करते हैं वो कभी भी खाने के बाद तुरंट काम पे नहीं लगते थोड़ी देर ब्रेक लेते हैं अगर आप भी अच्छी स्वास्य पाना चाहते हैं तो किसी भी अनाज वाले भोजन के बाद कुछ देर अराम कीजिए कितनी देर कम से इस समय आप सोना चाहे तो सो भी सकते हैं। ध्यान रखे, खाने के तुरंद बाद नहीं लेटना चाहिए। दो तीन मिनिट या सौ कदम वॉक करने के बाद ही लेटें। हम जानते हैं कि अगर आप ओफिस जाते हैं, तो आप लंच के बाद सो तो नहीं सकते। ऐसे में आप सिंप्ली सर टेबल पर रखके दस मिनिट के लिए रेस्ट लीजिए। अरे तो आपके पास दो उपाय हैं। पहला, लंच में हल्का भोजन ले, जैसे कि सूप या सैलेड। आराम करने की जरूरत सिर्फ अनाज वाले भोजन खाने के बाद ही होती है। हलके खाने, जैसे कि सैलेड, फल, स्मूथी या सूप के बाद आराम नहीं भी करेंगे, तो चलेगा, क्योंकि उनको पहचाना बहुत आसान होता है। दूसरा, कि लंच के बाद सिर्फ 20 मिनट आराम करने से अगले चार घंटे के लिए आपकी प्रोडक्टिविटी डबल हो सकती है। अब आपने जान ली है सातों की सातों गलतियाँ। अब अगले दो मिनट कहीं नहीं जाइएगा, क्योंकि हम आपको बताएँगे कि एक परफेक्ट ईटिंग एक्सपीरियंस कैसा होना चाहिए। आप टेबल पे खाने तभी बैठें मन में कोई जल्दी, गुस्सा, परेशानी, चिरचिराहट नहीं होनी चाहिए। जब खाना परोसे, तो दो-तीन से ज़्यादा चीजें साथ में न मिलाएं। अपनी पहली बाइट लेने से पहले हाथ जोड़ के आप जिस भी भगवान को मानते हो, उनको धन्यवाद बोलें। आपको ये भोजन देने के लिए उस किसान को धन्यवाद करें, जिसने आपके कुक को थैंक यू बोले जिसने आपके लिए ये भोजन बनाया है। इस भोजन को आपकी प्लेट तक लाने के लिए इतने लोगों ने इतनी मेहनत करी है। धरती माँ ने उसके बीज को पोषित किया है, इतने सारे छोटे-छोटे इंसेक्ट्स ने उसको छुआ है, सूर्य देव ने उसको अपनी आँख से पकाया है, सिर्फ आपके लिए, अपने हाथों से भोजन को छुए और उसके टेक्सचर अपने उंगलियों पे महसूस कीजिए। भोजन खाते-खाते उसको चबाना जरूर याद रखें, छोटी-छोटी बाइट्स लीजिए और धीरे-धीरे खाइए। खाते समय लंबी गहरी सांसें लीजिए, तब तक चबाइए जब तक वो जूस न बन जाए। जूस बनने के बाद ही उसको अंदर दीजिए। य जरूरत से ज्यादा न खाइए। टेबल पे उठने से पहले पेट में जगह जरूर खाली छोड़ें। भोजन के कुछ देर बाद आराम जरूर करें। डायरेक्ट काम पर न लगें। जब आप भोजन करते समय माँ प्रकृति की ये सिंपल सिद्धांत फॉलो करेंगे, आपको उसी भोजन से ऊर्जा बहुत ज्यादा मिलेगी। अगर आपको ये वीडियो यूजफ और यदि आप सीखना चाहते हैं कि भोजन होना कैसा चाहिए, नाश्ता, लंच, डिनर के लिए सबसे बेस्ट खाना क्या है तो यहाँ क्लिक करके ये वीडियो जरूर देखें।










