7 Beauty Products That Women Should Stop Using Immediately (Alternatives Included)

In this Hindi-language video, the creator, Samaira Banga, shares the results of her research on over 70 women’s beauty products and highlights seven items that silently poison the body while still being widely sold. For each product she explains the harmful chemicals (e.g., toluene, formaldehyde, aluminum, sulfates, parabens, lead, mercury), describes how they are absorbed through skin or ingested, and cites studies that link them to fertility issues, hormonal imbalance, skin damage, and other health risks. She then offers natural, non‑toxic alternatives—ranging from alum stone deodorant, herbal soaps, DIY body cleansers (besan, multani mitti, moong powder, sandalwood powder), chemical‑free shampoos (liquid, bar, powder forms), plant‑based lipsticks, and cruelty‑free fairness creams—along with specific brand recommendations and simple DIY recipes. The video’s tone is conversational yet urgent, aiming to empower women to make safer beauty choices.
Chapters
पिछले कुछ महीनों में मैंने 70 से ज्यादा विमिन्स प्रोड़क्ट्स पर रीसर्च करी और मिले ऐसे 7 प्रोड़क्ट्स जो साइलेंटली आपको पॉइजन कर रहे हैं लेकिन फिर भी आज ओपनली बेचे जा रहे हैं इस वीडियो में मैं आ हर प्रोडक्ट के साथ मैं आपसे शेयर करुँगी उसका सेफ और एकदम क्लीन अल्टरनेटिव भी। पहला टॉक्सिक प्रोडक्ट है नेल पॉलिश। कभी सोचा है इस छोटी सी बोतल के अंदर आता क्या है? अगर आपके आसपास अभी कहीं नेल पॉलिश पड़ी है, तो उठाओ और घुमाओ। आपको कोई इंग्रेडिएंट लिस्ट मिली? नहीं? ऐसे कैसे जब हमने रिसर्च करी तो पता चला कि कई ब्रांड्स की नेल पॉलिश में पाए जाते हैं टॉक्सिक केमिकल्स जैसे टॉल्यूइन, फॉर्माल्डिहाइड, डाइब्यूटल फाइलेट और कई ऐसे-ऐसे नाम जो मुझसे तो अच्छे से प्रणाउंस भी नहीं किए जाते। ये वही केमिकल्स हैं जो एक वुमन की फर्टिलिटी और रिप्रोडक्टिव स लेकिन एक्चुअली वो एक स्पंज की तरह होते हैं। जैसे एक स्पंज पे ये नेल पॉलिश पोर करने से वो उसे सोख कर लेता है, वैसे ही नेल पॉलिश के केमिकल्स आपके नेल बेड के थ्रू अब्सोर्ब होके सिर्फ पंद्रह घंटों में आपकी ब्लड स्ट्रीम तक पहुंच जाते हैं। एक बहुत इंटरेस्टिंग स्टडी में साइंटिस्ट्स न जो केमिकल उस नेल पेंट में था, उन्होंने वही केमिकल उनकी यूरीन में भी पाया। यही नहीं, जब आप नेल पॉलिश लगाकर हाथ से खाना खाते हैं, ये प्लास्टिक लेयर आपके खाने में चिप भी होती रहती है, बिना आपके जाने। तो इसका अल्टरनेटिव क्या है? सबसे सेफ ऑप्शन है नेल पेंट को जितना हो सके अवॉ कुछ साल पहले तक मैं खुद हर हफ्ते नेल पेंट की नए-नए कलर्स ट्राई करती रहती थी। लेकिन आठ साल पहले, जब मुझे इनकी रियलिटी का पता लगा, मैंने इन्हें यूज़ करना बंद कर दिया। और अब, चाहे खुद की शादी भी क्यों ना हो, इनको लगाने का मन ही नहीं करता। All right, आगे बढ़ते हैं। अगर आपको नेल पॉलिश का अभी बढ़ते हैं अपने सेकंड प्रोडक्ट पे। डियोडरेंट्स एंड एंटीपस्पिरेंट्स। आपने टीवी पर इनका ऐड तो देखा ही होगा। कभी सोचा है ये एंटीपस्पिरेंट्स स्वेट को रोकते कैसे हैं? Well, जो ये ऐड्स नहीं दिखाते वो ये कि इनमें होता है एल्युमिनियम। जब आप इसे लगाते हैं तो ये एल्युमिनियम तो पसीना बनता तो है पर बाहर नहीं निकल पाता। ये पसीना क्यारी करता है टॉक्सिन्स और वेस्ट प्रोड़क्ट्स जो आपकी बॉड़ी बाहर फैखना चाती है। जब वो वेस्ट निकल नहीं पाता तो बॉड़ी उसे री अब्स फिटकरी, also called alum stone. OMG, you're so old school. Well, before you judge this फिटकरी, एक बार इसके फायदे तो सुनो। ये एक natural stone होता है, जो salt की तरह nature में मिलता है। इसमें बहुत strong antibacterial properties होते हैं। कहते हैं कि जहाँ फिटकरी हो, वहाँ bad bacteria टिक ही नहीं सकते। Use करने के लिए नहाने के बाद इसे थोड़े पानी से गीला करो। और हर अंडराम पे 10 सेकंड रब कर लो। ये आलम बेसिकली उन स्मेली बैक्टीरिया को, जो खराब बॉडी ओडर को क्रिएट करते हैं, उन्हें मार देता है, लेकिन बिना स्वेट ग्लैंड्स को ब्लॉक किए। आलम या फिटकरी आपको किसी जनरल स्टोर पर मिल जाएगी। आपके लिए और कन्वीनिएंट बनाने के लिए हमने इसका एक प इस आलम से खराब स्मेल बंद हो जाएगी। लेकिन अगर आपको एडिट फ्रेगनेंस भी चाहिए, तो आप यूज़ कर सकते हैं एसेंशियल ऑयल्स, जो बेसिकली फूल पत्तों या छिलकों से बनाए जाते हैं, उनको स्टीम या प्रेस करके। डिओडरेंट को रिप्लेस करने के लिए इनमें से कोई भी एसेंशियल ऑयल, टी ट्री, लावेंडर, लेकिन हाँ, इन्हें कभी भी सीधा स्किन पर मत लगाएं। ये काफी स्ट्रांग होते हैं। इनको हमेशा एक बेस ऑयल जैसे कोकोनट ऑयल में एक-दो ड्रॉप्स मिलाकर ही यूज़ करें। All right, बढ़ते हैं अपने अगले विमेन्स प्रोडक्ट पे, जो बहुत साइलेंटली हमारी हेल्थ को हाम करता है। And that is body soap, चाहे बार की फॉर्म में हो या चुरा ले जाता है। वो क्या? समझते हैं। आपकी स्किन एक ब्रिक वॉल जैसी होती है। ब्रिक्स हैं आपके सेल्स और बीच का सिमेंट है ये नैचुरल ऑयल्स, जो स्किन को हाइड्रेटेड और प्रोटेक्टेड रखते हैं। अब मार्केट में लगभग सभी सोप्स में पाए जाते हैं स्ट्रांग केमिकल सरफिक्टेंट्स। ये गंदगी को तो हट स्किन ड्राई होने लगती है, फिर हम सोचते हैं, अरे मॉइस्चराइजर लगाना पड़ेगा, और यही शुरू हो जाता है ब्यूटी इंडस्ट्री का ट्रैप। पहले नैचुरल ऑयल्स निकालो सोप से, और फिर वापस आर्टिफिशियल ऑयल बेचो क्रीम्स के नाम पे। तो सल्यूशन क्या है? जब मैं आपको बताऊंगी, शायद आपको शुरू पानी एक यूनिवर्सल सॉल्वेंट है और अक्सर गंदगी आराम से हटा देता है। हाँ, अगर कभी ज़्यादा पसीना या धूल मिट्टी हो, तो आप हर्बल क्लेंजर्स यूज़ कर सकते हैं, जो स्किन को साफ तो करते हैं, लेकिन बिना वो नैचुरल ऑयल्स को निकाले। इनके चार ऑप्शंस हैं। पहला, बेसन पाउडर। एक कप चना नहाते समय थोड़े पानी के साथ मिक्स करें और बॉडी पर लगाकर धो लीजिए। ये स्किन को ब्राइटन भी करता है। दूसरा मुल्तानी मिट्टी, ये एक नैचुरल क्ले है जो पोर्स के अंदर तक जाकर डर्ट और पॉल्यूटेंट्स को खींच लेती है। इसे भी पानी के साथ मिलाकर पेस्ट बनाकर लगा लीजिए। तीसरा ऑप्शन मूंग पाउडर बना लीजिए। जार में भरकर रख लीजिए। नहाते या फेसवॉश करते वक्त पाउडर में थोड़ा पानी मिलाकर जेंटली स्क्रब कर लें। ये डेड स्किन को हटाता है और स्किन को बहुत ही सॉफ्ट बना देता है। और चौथा चंदन पाउडर, जहाँ पहले तीन ऑप्शंस आप फेस और बॉडी दोनों पे लगा सकते हैं, ये स्पेशली अगर आपकी ड्राई स्किन है, तो आप इन पाउडर्स में पानी की जगह ऑयल भी मिला सकते हैं। और हाँ, अगर आप इन सिंगल इंग्रेडिएंट पाउडर्स से कुछ थोड़ा और फैंसी ट्राई करना चाहते हैं, तो हमारी टीम ने एक फेस और एक बॉडी क्लेंजर भी डेवलप किया है, जिनमें कई इंग्रेडिएंट्स का ब्लेंड है। ये वो ह All right, हमारा अगला toxic product वो है जो शरीर के एक ऐसे हिस्से पर लगता है जो आपकी हाथों की skin से चार गुना ज्यादा absorbent है। Guess कर सकते हैं ये क्या है? बताऊँगी। लेकिन पहले आपसे एक बात share करना चाहती हूँ जो personally मुझे बहुत ही अजीब लगती है। पहले के लोग skincare के लिए इन्हीं सब natural remedies को use करते थे। In fact शादी से पहले हल्दी लगान लेकिन अर्ली 1900 में जब कंपनीज़ ने ये देखा तो सोचा अरे इन चीजों के प्रोडक्ट्स बनाकर तो बहुत पैसा कमाया जा सकता है। तो वो हमें साबुन बेचने लगे और हमें लगने लगा कि बोतल या डब्बे में बंद प्रोडक्ट हमारे घर के हल्दी चंदन से ज़्यादा एडवांस्ड है। फिर जब कुछ सालों बाद लोगों को समझ तो कंपनीज़ ने क्या किया? वही केमिकल्स वाले प्रोडक्ट्स में थोड़ा सा हल्दी, चंदन, एलोवेरा डाल दिया और पैकेजिंग पर लिख दिया "कंटेन्स द गुडनेस ऑफ नेचर" और हम फिर से अट्रैक्ट होने लगे। लेकिन हम ये भूल गए कि इसका सबसे नैचुरल, प्योरेस्ट वर्जन तो हमारी किचन में कब से रखा है, जो हम स हम उसे महंगी-महंगी बottल में बंद करके केमिकल्स के साथ मिक्स करके उनका तीन गुना प्राइस दे रहे हैं। आइए बढ़ते हैं अपने अगले विमेन्स प्रोडक्ट पे और वो है केमिकल शैम्पू। अरे अब चिंता मत करो, मैं आपको शैम्पू बंद करने के लिए नहीं बोलूँगी, बल्कि इसके तीन टाइप्स ऑफ़ अल्टरन लेकिन पहले जल्दी से समझ लेते हैं कि आजकल मार्केट में मिलने वाले 99% केमिकल शैम्पूज में प्रॉब्लम क्या है? वेल अगर आप बॉटल घुमाओ, आपको छोटे से प्रिंट में लिखा मिलेगा सोडियम लॉरेट सल्फेट। इस केमिकल का काम होता है झाग बनाना, लेकिन सोप में पाए सरफेक्टिंट्स की तरह ये भी आपके स्कैल इस प्रॉब्लम को सॉल्व करने के लिए ब्यूटी इंडस्ट्री हमें बेचती है कंडीशनर और सीरम, जो एक दूसरे केमिकल सिलिकॉन से हमारे बालों को कोट करके एक फेक शाइन देते हैं। धीरे-धीरे हम कब इस ट्रैप में फंस जाते हैं हमें पता भी नहीं लगता। हम समझते नहीं कि हमेशा की तरह ये इंडस्ट्री खुद ही प्रॉब और सिर्फ सल्फेट्स ही नहीं, शैम्पू में और भी हामफुल केमिकल्स पाए जाते हैं, जैसे पैराबिन्स और फ्रेगनेंसेस। अब हमारी स्कैल्प बहुत परमिएबल होती है, हमारी हाथों की स्किन से चार गुना ज़्यादा, तो ये सारे केमिकल्स सीधा हमारी बॉडी में अब्सोर्ब हो जाते हैं। तो हर्बल शैम्पू खरीद स अक्सर प्रोडक्ट चूज़ करते हैं एक ट्रिक जिसे कहते हैं ग्रीन वॉशिंग मतलब केमिकल प्रोडक्ट में बस थोड़ा सा एलोवेरा या थोड़ा सा नीम जैसा अच्छा कोई इंग्रेडिएंट डाल देते हैं और फ्रंट पे नैचुरल लिख देते हैं इससे हम सोचने लगते हैं अरे ये प्रोडक्ट तो बहुत ही नैचुरल है और खरीद ल नैचुरल और हर्बल समझके यूज़ करती आ रही हूँ। बottल घुमाई और गेस्ट व्हाट? उसमें भी मुझे वही केमिकल्स मिले और मैं इतने सालों से उसकी पैकेजिंग और ब्रांडिंग देख देकर बुद्धू बन रही थी। एक ट्रूली क्लीन शैम्पू वो होता है जिसमें इनमें से कुछ नहीं होता। नो सल्फेट्स, नो एसएलई Let's go from good to better to best. पहली फॉर्म है लिक्विड शैम्पूज की। इनके क्लीनेस्ट ब्रांड्स ढूँढने के लिए हमारी टीम ने अलग-अलग ब्रांड्स की लिस्ट को डिटेल में पढ़ा, पर्सनली खुद ट्राई किया और फाइनली मिले चार रिलायबल ब्रांड्स: जस्ट हर्ब्स, रस्टिक आर्ट, जूसी केमिस्ट्री और बॉन ऑर्गेनिक्स। और ह यानी इन्हें रेकमेंड करके हमें कोई मॉनिटरी फायदा नहीं मिलता। दूसरी फॉर्म है शैम्पू बार्स की। ये लिक्विड शैम्पू से बेहतर इसलिए हैं क्योंकि ये प्लास्टिक बottल्स में नहीं आते, तो ये ज़्यादा एनवायरनमेंटली फ्रेंडली होते हैं। प्लस ज़्यादा लॉन्ग लास्टिंग भी। जितना समय वो है रस्टिक आर्ट और शून्यम। तीसरा और सबसे प्योर फॉर्म है शैम्पू पाउडर्स का। ये बनता है आमला, रीथा और शिखा काई तीन आयुर्वेदिक हर्ब्स को सुखा कर पाउडर बना कर। अब ये पाउडर आप घर पर खुद जरूर बना सकते हो। लेकिन जब हमने इसको एक पिछली वीडियो में आपको रेकमेंड किया, तो आप में से क नहीं है। आपके लिए प्रोसेस को इजी करने के लिए हमने ये रेडीमेड शैम्पू पाउडर सात्विक मूवमेंट की वेबसाइट और ऐप पर भी अवेलेबल कर दिया है। इसको यूज़ करने के लिए थोड़ा पाउडर बोल में लेना है, पानी मिलाकर पेस्ट बनाना है और स्कैल्प और हेयर पे अच्छे से लगाना है। अब आप इससे आर्डर क पर्सनली जब मैंने इसको पहली बार ट्राई किया, तो मैं तो थोड़ी डिसएप्पॉइंटेड हो गई थी, क्योंकि झाप की इतनी आदत जो थी, लेकिन यूज़ करने के बाद बाल इतने सॉफ्ट और क्लीन लगे कि तब से मैं यही यूज़ कर रही हूँ। तो आपको इनमें से जो शैम्पू फॉर्म अपने लिए बेस्ट लगे, आप वो अब चाहे इनको क्रीम बोलो, लोशन बोलो या मॉइस्चराइजर, एक ही बात है। इन प्रोडक्ट्स में भी प्रॉब्लम वही सेम है। इनको स्मूथ बनाने के लिए और शेल्फ लाइफ को लंबा करने के लिए इनमें भर-भर के केमिकल्स डाले जाते हैं। अब आपको पता है, इन केमिकल्स की नैचुरल स्मELL बहुत ही गंदी होती है। और उस केमिकल स्मेल को छुपाने के लिए उन्हें डालने पड़ते हैं और केमिकल्स जिन्हें कहते हैं आर्टिफिशियल फ्रेगनेंसेस परफ्यूम या पारफ्यूम। इसीलिए आपकी क्रीम से कभी फूलों की स्मेल आती है, तो कभी संतरे की, तो कभी वनिला की। इससे आपको लगता है, wow it smells so nice। लेकिन असल में ये फ्रेगनेंस कोई असली स्किन इज़ योर सेकंड माउथ। ये केमिकल्स और आर्टिफिशियल फ्रैग्रेंसेस अंदर जाके आपके हार्मोन्स के साथ इंटरफेर करती हैं। फर्टिलिटी इश्यूज़, इर्रेगुलर पीरियड्स, थायरोइड इम्बैलेंस तक क्रिएट करने के लिए जानी जाती हैं। But guess what? ये तो आपने अभी तक समझ ही लिया होगा कि माँ प्रकृति के पास ऑल अगर आपकी ड्राई स्किन है, तो आपके लिए सबसे अच्छा है तिल का तेल, बदाम का तेल या सरसों का तेल। अगर आपकी ऑयली या एक्ने प्रोन स्किन है, तो जोजोबा ऑयल बेस्ट है। और अगर आपकी स्किन नॉर्मल है, तो आप नारियल तेल यूज़ कर सकते हो, या फिर आमण या जोजोबा भी। ये ऑयल्स काम वही करते ह लेकिन उससे पहले क्रीम्स के बारे में मुझे एक बात देखकर बहुत हैरानी होती है। आज मार्केट में कितनी सारी क्रीम्स मिलने लग गई हैं। फेस क्रीम अलग, बॉडी क्रीम अलग, हैंड क्रीम अलग, फुट क्रीम अलग और जैसे ये काफी नहीं था, अब बना दी है हील क्रीम, नेल क्रीम, डे क्रीम, एंटी एजिंग क्रीम, पता नहीं क कि उसे शरीर के हर हिस्से के लिए अलग क्रीम चाहिए। It makes no sense। असल बात ये है कि हमें सिर्फ एक क्रीम बेचने से किसी कंपनी को ज़्यादा प्रॉफिट नहीं होगा। इसलिए उनको नई-नई unnecessary needs invent करनी पड़ती है, ताकि हम और ज़्यादा प्रोडक्ट्स खरीदें और वो हमसे ज़्यादा प्रॉफिट कमा पाएं। Personally मैंने पिछले नौ सालों में कोई और स्किन काफी हेल्दी रहती है। बढ़ते हैं अपने सिक्स्थ विमेन्स प्रोडक्ट पे, और ये है लिपस्टिक। अब मैं आपको इसके सेफ अल्टरनेटिव्स बताऊं। उससे पहले एक छोटा सा सवाल: लिपस्टिक और बुलेट इन दोनों में क्या कॉमन है? The answer is lead। हाँ, वही लेड जो एक बुलेट जैसे डेडली वेपन बनाने में यूज लिपस्टिक में भी मिलते हैं, जिसे हम रोज़ अपनी लिप्स पर लगाते हैं। 2013 की एक स्टडी में टेस्ट की गई 75% लिपस्टिक्स में लेड पाई गई। और आपने कभी सोचा है, लिपस्टिक एक ऐसा प्रोडक्ट है, जिसे हम लगाते भी हैं और डायरेक्टली खाते भी हैं। हाँ, हर दिन खाते-पीते वो लिपस्टिक हमारे अं क्योंकि हमारा काफी मन था एक नैचुरल लिपस्टिक डेवलप करने का, जो आप खुद घर पर बना पाएं। अनफॉर्च्यूनेटली कोई रेसिपी परफेक्टली सक्सेसफुल नहीं हो पाई। फाइनली सबसे प्रैक्टिकल सल्यूशन ये मिला कि अपनी लिपस्टिक को किसी जेनुइनली क्लीन ब्रांड से खरीदना। हमें इंडियन मार्केट में ऐसे दो ब ये दोनों एकदम सेफ और प्लांट डेराइव्ड इंग्रेडिएंट्स यूज़ करते हैं और क्योंकि ये कोई एनिमल प्रोडक्ट्स नहीं यूज़ करते ये क्रुअल्टी फ्री भी हैं इनके लिंक्स हमने नीचे डिस्क्रिप्शन में ऐड कर दिए हैं अगले प्रोडक्ट पे बढ़ने से पहले सात्विक मूवमेंट को सब्सक्राइब जरूर करें आपका सपोर छीन लेता है। ये है fairness creams। चाहे आप ये use करते हो या नहीं, समझना जरूरी है कि innocent से दिखने वाली fairness cream सबसे dangerous product क्यों है हमारी list में? आज ये अलग-अलग नामों से बिकती है skin lightening cream, brightening serum, glow booster। ये इतनी popular इसलिए है क्योंकि sadly हम आज एक ऐसी society में रहते हैं जहाँ अभी भी लोग फेयर स्किन को ब्यूटी का सिंबल मानते हैं। एक सोसाइटी जहाँ एक मदर इन लॉ को एक फेयर डॉटर इन लॉ चाहिए, चाहे वो खुद डार्क स्किन्ड हो। एक सोसाइटी जहाँ गोरा-गोरा रंग और चिटिया कलया जैसे गाने नॉर्मल हैं। और जहाँ मुझे तो समझ नहीं आता ऐसे टीवी एड्स दिखाए भी हमें बताते हैं गोरी बन जाओ दुनिया तुम्हें नोटिस करेगी हमें बिलीफ करवाना चाहते हैं कि अगर हम गोरे नहीं तो किसी लायक ही नहीं लेकिन इन सफेद करने वाले प्रोड़क्ट्स की दाल में कुछ तो काला है इन फाक्ट इनकी प उसका नैचुरल कलर देता है। जब मर्क्यूरी स्किन में अब्सोर्ब होता है, तो सबसे पहले ये मेलेनिन प्रोड्यूसिंग सेल्स को मार देता है, जिससे स्किन सफेद होने लगती है। लेकिन बात यहीं खत्म नहीं होती। ये मर्क्यूरी फिर ब्लडस्ट्रीम के थ्रू किडनीज़ तक पहुंचता है, वहाँ जमा होता है और उनके या आपको गोरा बनाने के लिए कोई होम रेमेडी? अ अ बिल्कुल नहीं। सल्यूशन छुपा है सोच बदलने में। अपने दिमाग से ये कंडीशनिंग निकालकर फेंक दो कि फेयर इस इक्वल टू ब्यूटीफुल। जो रंग भगवान ने दिया है, चाहे वो वीटिश हो, डार्क हो या डस्की, उसी में आपकी खूबसूरती है। अगर आप वहीं से शुरू करो और बस इतना याद रखो कि इन मल्टीनेशनल कंपनीज से हजार गुना ज़्यादा आपकी स्किन, आपके बाल, आपके शरीर के बारे में जानती हैं मात्रकृति। अगर आप इस वीडियो में बताए नैचुरल अल्टरनेटिव्स को आर्डर करना चाहते हैं, तो यहाँ क्लिक कर सकते हैं। और अगर आप समझना चाहते हैं










