7-Year Old Sinus Problem Gone in 3 Months | Sinus Treatment at Home

Tushar, 22, had chronic sinusitis for seven years until he cleared it in three months through juice fasting, enemas, dietary changes, and avoiding dairy. His mother describes the household shifts that made the transformation possible.
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Did you see that? क्या आपको यकीन होगा कि ये लड़का जो आज ग्राउंड पे इतना अच्छा फुटबॉल खेल सकता है, कुछ ही महीने पहले तक वो ग्राउंड पर सिर्फ ये कर सकता था।
आज मैं साइनेस की प्रॉब्लम से पूरी तरह फ्री हो गया हूँ और अब मेरी लाइफ मेरे अपने हाथों में नमस्ते मेरा नाम तुषार है मैं 22 साल का हूँ महाराष्ट्र के एक छोटे से शहर जिन से बिलोंग करता हूँ 22 साल के किसी भी दूसरे यंगस्टर के जैसे बहुत सारे गोल्स हैं तुषार के वो अपना करियर सेट करना चाहता था वो प्रूफ करना चाहता था खुद को और उसको बिजनेस स्टार्ट करने की उम्मीद थी लेकिन एक बहुत बड़ी प्रॉब्लम थी पिछले सात साल से मुझे साइनस था जिसको हमारे यहाँ नजला बोलते हैं ये मुझे पंद्रह-सोलह की ऐज में बीमारी हो गई थी मुझे डिजिटल मार्केटिंग सीखने के लिए तुषार ने एक ऑनलाइन कोर्स ज्व डिजिटल मार्केटिंग एक ऐसी फील्ड है जिसमें पूरा दिन कंप्यूटर के सामने बैठना पड़ता है। लेकिन मैं लैपटॉप स्क्रीन के आगे डेढ़ से दो घंटा भी नहीं बैठ पाता था। मान के चलें तो दो घंटे की एक मूवी भी कंप्लीट नहीं कर सकता था। आंखें जलने लग जाती थीं और आंखों से पानी भी आने लग फीवर भी आ जाता था मतलब।
रात को तुषार अच्छे से सो नहीं पाता था, सवेरे उठता था तो लो एनर्जी महसूस होती थी और दिनभर आलस रहता था, कोई भी काम ढंग से नहीं कर पाता था।
जब हमने तुषार के बारे में सुना, हमें लगा कि हमें तुषार से तुरंत मिलना चाहिए। पूरी स्कूल लाइफ से ही उसको साइनसाइटिस की प्र जब कॉलेज में बाकी सब नए दोस्त बना रहे थे, नए ग्रुप्स बना रहे थे, तब तो शार अकेला रहता था. इन फैक्ट वो दूसरों को अवॉइड करता था.
साइनिस की वज़े से न मेरे कॉंफिडेंस बहुत लो रहता था. जब नोज ब्लोक होती है, तो आप किसी से बात भी नहीं कर पाते. अचानक किस टाइम छीके स्टार्ट हो जाएं.
दिमाग म औरों को साइनस का नाम सुनके शायद कोई मामूली सी बीमारी लगती है, लेकिन साइनसाइटिस यानी नजला एक ऐसी बीमारी है जो इंसान की हिम्मत कोई तोड़ देती है, और तुषार के साथ भी ऐसा ही हुआ।
वो कोई भी ठंडी चीज खा पी लेता तो तुरंत बीमार पड़ जाता था। फुटबॉल उसका फेवरेट स्पोर्ट था, लेकिन अनकंट्रोलेबली चीखते रहता।
उसकी नाक इतनी भरी-भरी सी रहती थी कि वो ढंग से सांस तक नहीं ले पाता था, पूरी रात सांस नहीं ले पाता था। इसकी वजह से वो एक रात भी ठीक से नहीं सो पाया।
उसके रुमाल के बगैर उसे घर छोड़के जाने की हिम्मत तक नहीं होती थी। उसका एक लौटा साथी था उसका रु उसने अपने साइनसाइटिस को रिवर्स कर दिया।
पर चमतकार ये नहीं कि उसका साइनसाइटिस ठीक हुआ। चमतकार तो ये है कि उसका साइनसाइटिस कैसे ठीक हुआ।
आपको क्या लगता है? तो शाहर का दस साल पुराना साइनसाइटिस किसने मिटाया होगा? दिल्ली के कोई बड़े एएलटी डॉक्टर ने?
शायद सर्जरी से या किसी महंगे बिल्कुल नहीं, मैंने खुद ही अपने आप को ठीक किया। Finally मुझे समझ में आया कि अब मैं खुद ही अपना doctor हूँ, और कोई नहीं।
यकीन नहीं होता ना, 22 साल का तुषार, जो ना कोई doctor है, ना कोई health expert, उसने अपने आप को खुद ठीक किया। पर यहाँ तक पहुँचने से पहले तुषार को काफी struggle करनी पड़ी।
चार साल तक तुषार तरह-तरह क सब कुछ मैंने ट्राइ कर लिया था और मैंने तो हार ही मान ली थी मेरी फैमिली को भी ये लगा कि इसी तरीके से रहेगा अब तो ये साइनस के साथ और मैं भी ठक चुका था जगए जगए डॉक्टर के पास जाकर उनसे मिलकर और उनसे द ऐसे एक दिन मुझे सपना नाम की लड़की का एक वीडियो मिला और ये वीडियो ना मेरे लिए टर्निंग पॉइंट था। जब मैंने वीडियो देखा कि 21 डेज़ में 20 इयर्स वाला पुराना साइनस ठीक हो गया है, तब मेरे को एक बार यही भी लगा कि यार कहीं ना कहीं ये गिमिक ना हो। लेकिन साथ ही साथ ऐसा भी ख्याल आ अच्छी बनी हुई थी मेरे को लगा कि हाँ मैं ट्राई करके देखना चाहिए क्योंकि इनकी वीडियो काफी इम्पैक्टफुल थी उन वीडियोस से मुझे समझ में आया कि हमारी जो भी डिजीज़ होती हैं उनका जड़ कारण एक ही होता है कि हमारा शरीर अंदर से साफ नहीं होता है क्योंकि मेरी ऐज में बहुत सारे लोग बाहर का फास तो उसने जूस फास्ट किया। जूस फास्ट, तीन दिन सिर्फ जूसेस के ऊपर, ना तो हमें फ्रूट्स खाना, ना ही हमें सब्जी और ना ही रोटी। पहले मैंने सोचा ये कैसे होगा? लेकिन फिर भी मैंने सोचा कि मुझे ये करना है, क्योंकि मुझे अपना साइनस रिमूव करना था किसी भी तरह से।
उसके घरवालों ने सोचा ये बुखार हो जाए तो गरम ही चीज खाते हैं, ठंडी नहीं खाते। तो इसने मतलब उल्टा किया।
तो जूस फास्ट में, ब्रेकफास्ट में जूस, लंच में जूस, डिनर में जूस। सिर्फ जूसीज पर रह सकते हैं, ये समझ में आया। पहले दो दिन तो काफी लाइट फील हुआ, बहुत अच्छा लगा। फिर तीसरे दिन जब मैं सुबह उठा मैं आराम से सांस ले पा रहा था।
बस उसके बाद उसने कभी मुड़कर पीछे नहीं देखा। जूस पास्ट के बाद उसने बाकी भी स्टेप्स फॉलो करना शुरू कर दिया। सनबेधिंग, जो लड़का कभी बाहर नहीं जाता था, अब वो सुबह की धूप में बैठने लग गया। अपने अंदर म्यूकस को मेल्ट होते हुए फील कर पाता था वो अपने दिन की शुरुआत वो एक ग्लास डीटॉक्स जूस से करने लगा। उसने 21 दिन तक रोज एनिमा लिया, और उसको ऐसा फील होता था कि सालों पुराने गंदे टॉक्सिन्स उसकी इंटेस्टाइन्स में से निकल रहे थे, और उसकी बॉडी अंदर से साफ हो रही थी। लेकिन सबसे बड़ा चैलेंज तो ये था कि ठीक होने के नए तरीके अपनाने पड़ते और ये तो impossible था।
मैं हरियाणा की typical family से belong करता हूँ, तो हमारे यहाँ तो दूध, दही, लस्सी, मसाले, पराठे यही सब normal है। पर यही तो normal नहीं है, यही हमारी बीमारी का जड़ कारण है।
पर तुषार ने रास्ता ढूंढ निकाला। वो खुद kitchen में गया और खुद का खाना खुद बनाने लगा।
मम्मी को प क्योंकि हमारे यहाँ मतलब जाते नहीं हैं रसोई के अंदर लेकिन लड़का भी खुद ही सारी चीजें करने लग गया ऐसा क्या हो गया है?
थोड़ा बहुत लालवाजी भी लगता है क्योंकि हमारे में लड़कों को काम नहीं करवाते तो वो खुद करता वो मैं मैं मना कर देती हूँ मैं कहती हूँ मैं अपना काम करूँगी या रोटी तो गोल टेढ़ी-वेढ़ी जैसी बनती है वो बना के खा लेता है।
उसने सारे स्टेप्स बिल्कुल रिलिजियसली फॉलो करे और वो किसी की बात सुनके डरा नहीं। सब उसे कहते थे, नाश्ते में सिर्फ फ्रूट्स खाओगे, कमजोर पड़ जाओगे। एनिमा क्या होता है? ये कौन करता है?
पर तुषार डटकर लाइफस्टाइल फ लेकिन हम जैसे डेली घरवाले बोल रहे हैं कि ये सब तू क्या कर रहा है तो कभी-कभी थोड़ा-थोड़ा डाउट आ जाता था मुझे कि क्या मैं सच में ठीक हो जाऊँगा क्या मेरा साइनस हमेशा के लिए रिमूव हो जाएगा क्या हम तो गुस्सा ही करते थे ना भई दूध देख हमारे लोगों में स्टार्टिंग से ही दूध पीते ह इतना राम तो मुझे तब नहीं मिलता था मैं डेली के दस नेजल स्प्रे लेता था और अभी मुझे एक हफ़ता दूद बंद कर देने से उससे ज़्यादा राम मिल रहा है और बस मैंने उसी पे फोकस किया और डिसाइड किया कि लोगों की बाते और आज दुशार पूरी तरह से स्वस्थ हो चुका है। आज मैं साइनस की प्रॉबलम से पूरी तरह फ्री हो गया हूँ। और अब मेरी लाइफ मेरे अपने हातों में है। मुझे तो याद भी नहीं कि कितने सारे कोर्सेज, कितने सारे प्रोजेक् जो भी मेरे प्लान्स साइनेस की वजह से बीच में छूट गए थे, अब मैं धीरे-धीरे उन्हें कंप्लीट करने लगा हूँ।
जो चीजें कुछ महीनों पहले तक इम्पॉसिबल थीं, आज वो वो सब कुछ कर सकता है।
अब लैपटॉप पर रीडिंग करने में उसकी आँखों से आँसू नहीं, बल्कि खुशी झलकती है।
जहाँ वो पहले पूरा द उसे थकान नहीं होती।
मिट्टी, धूल, डस्ट अब तुषार को इनसे कोई डर नहीं लगता।
पुराने दोस्तों के साथ बाहर जाना हो या नए दोस्त बनाने हो, he is confident and happy।
वो हर रात को चैन की नींद सोता है, सांस की कोई तकलीफ नहीं और सबसे जरूरी बात अब जब वो घर से निकलता है तो उसे अपने पुराने इकलौते साथी उस सफेद रुमाल की जरूरत ही नहीं पड़ती।
मैंने भी बनाया इसका, ऐसी बात नहीं है। मैंने घर में सर्दियों की जो सब्जी, आलू की, गाजर की, गोभी की मिक्स सब्जी बनाई इसके लिए। और हमने सब ने खाई। मेरे से ही बनवाता था खुद भी। मुझे भी लगा लगता था।
मतलब ये था कि मतलब जैसे मेरे को बहुत सारी च कि भई हाँ इसमें इतनी चीजें होनी चाहिए।
तो मम्मी का कितना contribution रहा आपके?
मम्मी का क्या सकता है?
Fifty percent।
क्योंकि इतना नहीं है, twenty percent है।
Twenty percent है।
Twenty percent तो मेरा है। सारा मैं लड़का करा करता हूँ। कोई मैं कोई इस बात support नहीं था कि दूध नहीं पीना, ये नहीं करना, वो नहीं करना।
हम तो लोग इसको मना ही करेंग ये पता दूध रख देता है, भूल गया मैं, याद नहीं रहा, मैंने पीना नहीं ना इसको, ऐसे फंडे मानता है।
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अभी के लिए इतना ही, हम आपसे जल्द वापस मिलेंगे।










