In this Hindi instructional video, the speaker explores the nature of anger, arguing that it is a natural and potentially useful emotion that signals perceived injustice or unmet needs. She explains common maladaptive reactions—shouting, using profanity, or bottling up feelings—and shows how these either perpetuate violence toward others or self‑suppression. The core solution she proposes is an "intelligent" or "expressive" response: clear, non‑violent communication using statements like "I feel..." and a calm tone, which respects both the speaker’s and the listener’s dignity. She grounds this approach in Jain philosophy’s principle of ahimsa (non‑violence) and Patanjali’s Yoga Sutras, linking non‑violent expressive behavior to a happier, more content life. The video concludes by encouraging viewers to adopt this expressive practice, promising increased confidence, inner peace, and inviting them to join a 21‑day live yoga practice.
Chapters
Is anger useful? हमने तो बच्पन से यही सुनाया कि गुस्सा करना बुरी बात होती है, नहीं करना चाहिए गुस्सा. तो अब हम कैसे बोल सकते हैं कि गुस्सा useful होता है? पहले समझते हैं कि गुस्सा आता कब है? जबी भी आपको लगता है आपके साथ injustice हुई है, गुस्सा आता है. मानी आप अपना 100% दे रहे हैं relationship में. दूसरा जना सिर्फ 50% दे रहा है गुस्सा आएगा। आपको लगता है आपके सिबलिंग्स को आपके पेरेंट्स ज़्यादा प्यार करते हैं, उनकी डिमांड्स हमेशा पूरी होती हैं, आपको मना कर दिया जाता है, गुस्सा आएगा। आपके घर के सामने कोई बार-बार गाड़ी खड़ी कर देता है, इंजस्टिस हो गई, गुस्सा आएगा। ये समझना बहुत ज़रूरी है कि गु ये आना बहुत नैचुरल है। नेचर ने हमारे अंदर ऐसा कुछ भी नहीं डाला जो यूज़फुल ना हो। एंगर कैन आल्सो बी यूज़फुल। ये एक साइन की तरह है, एक मैसेंजर की तरह है। हमें बताने आता है, मेबी समथिंग नीड्स टू चेंज। आप कुछ बदल सकते हैं। हाँ, इस गुस्से को किस तरह से एक्सप्रेस करना ह उसके बारे में सोचना होगा पर डिनाय नहीं करना अभी जब गुस्सा आता है हम इन दोनों मेंसे एक रस्ता अपनाते हैं पहला रस्ता होता है शाउटिंग का जिसमें हम चीकते हैं, चिलाते हैं, दर्वाजा पटकते हैं फोन बैंक कर देते हैं कभी-कबार फेक भी देते हैं इसमें हमने emotional reaction immediately दे दिया बिना सोचे समझे हम द चांसेस हैं दूसरा जना भी उसी तरह से रिएक्ट करेगा। नैचुरल इंस्टिंक्ट है। सल्यूशन नहीं निकला प्रॉब्लम का। और आगे चलके जब भी भी ऐसी सिचुएशन आएगी, चांसेस हैं हम इसी तरह से रिएक्ट करें, चीख के, चिल्ला के, कर्स वर्ड्स यूज़ करके, क्योंकि वो हमारी लैंग्वेज बन गई, हमारा एट जिसमें हम अपने emotions को दबा देते हैं. हम लड़ाई नहीं करना चाहते. हम दूसरे के सामने अच्छा बना रहना चाहते हैं. I want to be a good person. पर इस good और bad के चक्कर में आप अपने साथ क्या कर रहे हैं? अपने emotions को दबाए चले जा रहे हैं आगे चलके कभी भी ऐसी सिचुएशन आएगी, आपका फर्स्ट रिस्पांस होगा इसको दबा लेना। कोई भी आप पे चिल्लाएगा, दबा लेते हैं। इसमें आप अपनी तरफ वायलेंट हो गए। एक और तीसरा रास्ता होता है, इंटेलिजेंट वे ऑफ़ रिस्पांडिंग। इसको हम बोलते हैं एक्सप्रेसिवनेस। एक्सप्रेसिवनेस। इसमें हम चाह देते हैं। For example, आपके boss आप पे सबके सामने चिल्ला देते हैं। Naturally बुरा तो लगेगा, humiliated भी feel होगा। अगर हम shouting का पथ पकड़ते हैं, तो हम उसी समय emotional reaction दे देंगे। नहीं करना जी आपके लिए काम बहुत हो गया। कल से नहीं आऊँगा मैं। आप ढूँढ लो कोई और। I quit। छोड़ दिया job। पर सल्यूशन नहीं निकला। आगे चलके ऐसी सिचुएशंस और जगह भी आ सकती हैं। आप कितनी जobs छोड़ेंगे? अगर हम बॉटलिंग का रास्ता अपनाते हैं, तो हम सोचेंगे, मेरी जॉब न छूट जाए अगर मैंने कुछ बोल दिया तो। ये तो सब जगह होता है। कोई बात नहीं, जाने दो, सह लेते हैं। एक-दो बार जाने दिय मन में कहीं ना कहीं यही चलता रहता है। मुझे ये बोलना चाहिए था, मुझे वो बोलना चाहिए था, पर निकलता कुछ भी नहीं है। अगर हम एक्सप्रेसिवनेस का रास्ता अपनाएँ, तो हम अपने बॉस से बहुत क्लियरली अपने मन की बात एक्सप्रेस कर सकते हैं। मुझे ना बहुत एम्बैरेस्ट फील होता है, जब आप सबके साम गलती भी है, तो क्या हम आगे से इन कॉन्वर्सेशंस को अकेले में कर सकते हैं? सल्यूशन ढूंढेंगे। ऐसे में आपने ना तो अपने बॉस के प्रति वायलेंस दिखाया, ना अपने प्रति वायलेंस दिखाया। एक सल्यूशन ओरिएंटेड अप्रोच फॉलो करी। जब ही भी हमको गुस्सा आता है, हम हमारी रिस्पONSिबिलिटी है दूसर embarrassed या I feel disappointed, I feel hurt जब आप अपने से शुरू करते हैं आप दूसरे को अपनी बात समझने का मौका दे रहे हैं पर हाँ अपनी tone of voice के बारे में भी थोड़ा ध्यान देना होगा एक चीज होती है I feel embarrassed when you talk to me like this एक चीज होती है मुझे बुरा लगता है मुझे embarrassment होती है जब आप इस तरह से बात करते हैं तो आपकी आवाज में भी एक ह्यूमिलिटी होनी चाहिए, प्यार होना चाहिए। तभी दूसरा जना समझेगा। जैनिज्म में बताया गया है अहिंसा परमो धर्म। तो जब हम दूसरे के प्रति वायलेंट नहीं होते, अपने प्रति वायलेंट नहीं होते, पर तभी भी अपनी बात बोल देते हैं, हमने अपना धर्म निभा दिया। अब इसके बाद सामने वाला किस सल्यूशन निकलने के चांसेस सबसे ज़्यादा हैं। आगे चलके आपके अंदर बहुत कॉन्फिडेंस बिल्ड होगा अपनी बात बोलने का, अपने अंदर बहुत पीसफुल फील होने लगेगा, बहुत कंटेंटमेंट आएगा। पातंजलि योगा सूत्राज में भी बताया गया है, अहिंसा बेडरॉक है एक सक्सेसफुल हैप्पी लाइफ का। तो आगे स ऑब्जर्व करिए आप शाउटिंग की तरफ जा रहे हैं या बॉटलिंग की तरफ जा रहे हैं उस समय आप एक्सप्रेसिवनेस को चूज़ कर सकते हैं लेट दिस बी योर साधना ऐसे और बहुत से योगिक कॉन्सेप्ट सीखने के लिए और हमारे साथ रोज सुबह लाइव योगासना प्रैक्टिस करने के लिए ज्वाइन अस फॉर द 21 डे योगा च