शरीर में जमी गन्दगी कैसे निकाले - Detox Your Body in 3 Steps | Subah Saraf

In this Hindi‑language wellness video Subah Saraf (joined by a second speaker) explains a three‑step approach to “detoxifying” the body by removing accumulated internal toxins that, according to her, cause weight gain, skin problems, hypertension, diabetes, and even cancer. She describes how food lingers in the digestive tract, forming a thick layer on intestinal villi that absorbs further waste and spreads toxicity to organs. The first step she details is a daily fasting regimen: a 14‑to‑16‑hour fast (no food after dinner until the next midday), during which only water, coconut water, or vegetable juice is allowed (no fruit juice, tea, coffee, or milk). She recommends a light evening meal of salad or soup, satvic (pure) vegetables, and specific juice recipes. The video also introduces two auxiliary detox techniques: (1) a daily enema (“Enema pot”) using warm water (with coconut oil on the tip) to flush the intestines, and (2) a cold‑compress “patty” method—cotton strips soaked in cold water placed around the abdomen, throat, and forehead for 30‑40 minutes to draw out toxins. Throughout, she shares personal anecdotes (e.g., losing 9 kg in 7 days, stopping 210 units of insulin, being cancer‑free for 21 years) and claims that these practices are more effective than medication or chemotherapy. The video ends by promising a second video covering the next two steps (diet principles and detailed meal plans) and encourages viewers to share the knowledge.
Chapters
हाय मैं हूँ सुबा इस वीडियो में हम डिस्कस करेंगे कि हम अपनी बॉडी के अंदर जमे टॉक्सिन्स यानी गंदगी को कैसे निकाल सकते हैं जैसे ही आप बॉडी में से टॉक्सिन्स निकालेंगे और बॉडी को अंदर से साफ करेंगे तो आपका वजन अपने आप कम होने लगेगा स्किन साफ हो जाएगी और पहले से बहुत ज़्यादा पहले तो खाना आपके पेट में जाता है, जहाँ पे वो टूटता है, फिर आपकी इंटेस्टाइंस में, यानि कि आपकी आँतों में, और आखिर में वो वेस्ट बनके बॉडी से बाहर निकल जाता है। लेकिन क्या आपको लगता है कि हर खाने को इस साइकिल को पूरा करने में सेम टाइम लगता है? नहीं, फलों को गुजरने में लग सब्जियों को लगते हैं लगभग छह घंटे। क्या आप जानते हैं कि अन, जैसे कि रोटी, चावल, दालों को कितना टाइम लगता है? लगभग अठारह घंटे। अब ये एक एस्टिमेट है आपको एक आइडिया देने के लिए। लेकिन समझना ये है कि जिस खाने में पानी जितना कम होता है, उसको बॉडी से निकलने में उतना ही ज़्य मतलब पहले वाला पचा नहीं हमने उपर से और डाल दिया और फिर naturally पहले वाला खाना बॉड़ी से वेस्ट के रूप में बाहर नहीं निकलता अंदर ही अंदर वो सड़ता है वाइरस, फंगस और कीड़े पैदा करता है आपने शायद लोगों के पेट में कीड़े मिलने वाली स्टोरी सुनी हो अब ऐसा तो नहीं कि उन लोगों ने कीड़े खाए तो वो की आपने सुना होगा, you are what you eat. ठीक है, पर सच्चाई तो ये है, you are what you ate. जो बर्गर हमने एक साल पहले खाया था, क्या पता वो अभी भी अंदर पड़ा सर रहा हो? चीज़े जैसे ब्रेड, चीज़, नमकीन, स्नैक्स, बिसकिट, चाय, कौ वो हमारी इंटेस्टाइन्स की दीवारों पे चिपक जाता है और एक मोटी लेयर बना लेता है। अंदर से हमारी इंटेस्टाइन कुछ ऐसी दिखती है, उसपे हजारों छोटे-छोटे उंगलियों जैसे उभार होते हैं, जिसे हम विलाई कहते हैं। इंटेस्टाइन पर जो भी लगा होता है, ये विलाई उसको अपने अंदर सोख लेते हैं औ अब अगर इंटेस्टाइन की दीवार पे गंदगी जमी होगी, तो जाहिर सी बात है कि विलय गंदगी को ही सोखेंगे। फिर ये गंदगी बॉडी के अलग-अलग अंगों में पहुंचकर उनके काम को डिस्टर्ब करती है और उसे हम कह देते हैं बीमारी। अगर ये गंदगी हमारी स्किन में जम जाती है, तो हम उसे कह देते हैं एक्ने, एक ऐसे ही मुटापा। अगर आपको वजन कम करना है, तो अंदर से गंदगी को निकालना होगा। अगर ये गंदगी ब्लड को भारी कर देती है और हार्ट को ब्लड को पंप करने के लिए ज़्यादा प्रेशर लगाना पड़ता है, तो हम इसे कहते हैं हाई ब्लड प्रेशर। अगर ये ओवरीज़ में गांठ या सिस्ट बनके जम जाती है, तो हम इसे कहत आज ये शायद एक छोटी सी बीमारी बनके बैठी हो, लेकिन अगर हमने इसको साफ नहीं किया, तो कल को ये बहुत डेंजरस बीमारी बनके बाहर आ सकती है, जैसे ट्यूमर या फिर कैंसर सेल। तो जब आप इस गंदगी को बाहर निकालेंगे, तो सारी बीमारियाँ अपने आप ठीक हो जाएंगी, क्योंकि जो बॉडी अंदर से साफ थोड़े दिनों बाद हम इसे माँ प्रकृति को वापस लौटा देंगे। जब तक के लिए हमारे पास है, हमारी ड्यूटी है कि हम इसे साफ रखें, बहुत सारी हेल्थ और एनर्जी के साथ, जैसा उन्होंने इसे हमारे लिए बनाया है। मान लीजिए एक गाड़ी है जो पेट्रोल के लिए बनी है। अगर आप उसके टैंक में पेट्रोल की ऐसे ही आपकी बॉडी के साथ है। बनी तो थी वो इसके लिए, लेकिन डाल दिया हमने ये, तो कैसे चलेगी? तो पहला स्टेप है गंदगी को निकालना और फिर सही खाना अंदर डालना। इस वीडियो में हम सिर्फ स्टेप वन की बात करेंगे और अगली वीडियो में स्टेप टू की। तो प्लीज आप इस वीडियो को एंड तक देखें क्य अब आप उपवास का नाम सुनके डर मत जाना। मेरा आपसे प्रॉमिस है कि ये मुश्किल नहीं होगा। देखिए, जो शक्ति आपके अंदर से गंदगी, टॉक्सिन को निकालेगी, बीमारी ठीक करेगी, वजन को कम करेगी, वो शक्ति आपकी बॉडी के अंदर ही बैठी है, ना कि किसी दवाई या बottल या इंजेक्शन में। जो डॉक्टर आपको और इसका प्रूफ है जब आपकी हड़ी तूटती है तो इसपे प्लास्टर लगता है उसे एक जग़ा स्टेबल रखने के लिए उसे आराम देने के लिए थोड़े दिनों माद वो हड़ी खुद बखुद जोड़ जाती है ऐसा तो नहीं कि उस प्लास् हाई ब्लड प्रेशर, ओबेसिटी या अर्थराइटिस नहीं ठीक कर सकती, सरूर कर सकती है क्योंकि प्राण शक्ति को नहीं पता बीमारी का क्या नाम है, ये नाम तो हमने दिए हैं। जब प्राण शक्ति अपना इलाज करना शुरू करती है, तो सब कुछ ठीक कर देती है, चाहे बीमारी कहीं भी हो और कितनी भी पुरानी क्यों ना हो। अब हम प्राणशक्ति को हीलिंग करने का मौका ही नहीं देते। हम उसे हमेशा डिस्टर्ब करते रहते हैं। पता है कैसे? हमेशा खाते रहने से। जैसे ही हम कुछ खाते हैं, प्राणशक्ति हीलिंग का काम रोक देती है और डाइजेशन का काम शुरू कर देती है। अनफॉर्च्यूनेटली हम हमेशा ही खाते रहते हैं। नाश्ते में हमने सातों दिन खाना ही डाइजेस्ट करती रहती है और हीलिंग का टाइम ही नहीं मिलता। अगर आप चाहते हैं कि प्राण शक्ति हीलिंग करे, तो आपको समय-समय पे डाइजेशन को ब्रेक देना होगा। हम सजेस्ट करते हैं कि आप रोज रात 16 घंटे का ब्रेक दें। मान लीजिए आपने डिनर रात को 8 बजे खाया, तो अगले दिन दोपहर 1 तो आप दिन में 16 घंटे उपवास कर रहे हैं और 8 घंटे के अंदर-अंदर खा रहे हैं। इसको कहते हैं 16 घंटे उपवास । दोपहर 12 बजे से पहले आप जूस ले सकते हैं। आप पानी, नारियल पानी या कोई भी सब्जी का जूस ले सकते हैं, लेकिन फ्रूट जूस, चाय, कॉफी या दूध बिल्कुल नहीं लेना। अब सु आजकल हमें फास्टिंग करना कुछ अब्नॉर्मल सी चीज लगती है पर अक्शुली मा प्रकृती ने हमारी बॉड़ी को टाइम टाइम पे फास्टिंग करने के लिए ही बनाया है हमारे पूर्वजों के पास सूपर मार्केट, रेफ्रिजरेटर या प वो आपकी मर्जी। हो सकता है कि दोपहर 12 बजे तक कुछ न खाना आपके लिए जरा मुश्किल हो, लेकिन आपको दिन का आखरी भोजन शाम 6 बजे खाने में कोई प्रॉब्लम ना हो। ऐसे में आप शाम 6 बजे से लेकर अगले दिन सुबह 10 बजे तक उपवास करें। अगर आप जॉब करते हैं और आप डिनर रात को 9 बजे लेते हैं, तो कम ऐसे रोज 16 घंटे उपवास के थ्रू प्राणशक्ति को थोड़ी हीलिंग का टाइम रोज मिल जाता है। अगर आपको 16 घंटे बहुत ज्यादा लगते हैं, तो कोई बात नहीं। अब 14 घंटे उपवास से शुरुआत कीजिए। धीरे-धीरे उसको 16 तक लेके जाइए। कोई बात नहीं। 12 घंटे उपवास तो शायद आप अभी भी कर रहे होंगे। म तो रात 8 बजे से लेकर सुबह 2 बजे तक आपके digestion hours चल रहे हैं, यानी पचाने के घंटे। जैसे ही खाना digest हो जाता है, प्राणशक्ति क्या शुरू कर देती है? Healing। तो अगले 10 घंटे आपके healing hours होंगे, यानी enlarge के घंटे। इस दौरान आपकी प्राणशक्ति tissues को repair करती है, skin से पुराने दाग धब्बों को दूर करती है, dead cells को बदलती है, stones सिस्ट्स, फाइब्रोइड्स को तोड़कर हार्मोन्स को रेगुलराइज करती है। इंटेस्टाइन्स में जमी गंदगी को हटाती है। एयरवेज में से म्यूकस को साफ करती है। आर्टरीज में से कोलेस्ट्रॉल को निकालती है। उपवास के दौरान आपकी प्राण शक्ति हर अंग की गहराई में जाकर वहाँ पड़े टॉक्सिन्स या गंदगी को उठ आपका शाम का डिनर हलका होना चाहिए। हम सजेस्ट करते हैं कि आप रात को सिर्फ सैलेड या सूप खाएं। अगर आप कुछ भारी खा लेते हैं, जैसे कि चपाती, चावल या दाल, तो उसको डाइजेस्ट होने के लिए ज़्यादा टाइम लगेगा और प्राण शक्ति को हीलिंग आवर्स नहीं मिलेंगे। हम आपको ये डाइट प्लान सजेस्ट करते सफेद पेठे का जूस। ये नहीं अवेलेबल हो तो किसी भी सबजी का जूस पीले। फिर दो घंटे बाद नाश्टे में एक बड़ी प्लेट मौसम के कोई भी फल लीजिये। फिर लंच में आप अन ले सकते हैं जिसमें आप सात्विक सबजी और सात्विक रोटी ले सकते हैं। जैसा कि हमने आपको अपने चैनल पे दूसरी वीडियोज में दिखाया ह बीच में भूख लगे तो नारियल पानी या कच्चे नारियल की गिरी लें। इस लाइफस्टाइल को आसान बनाने के लिए मैंने आपके लिए कुछ बहुत टेस्टी सात्विक रेसिपीज़ डिजाइन करी हैं, जिसमें से कुछ हमारे YouTube चैनल पे हैं, लेकिन सारी रेसिपीज़ के लिए आप हमारी रेसिपी बुक को आर्डर कर सकते हैं, जिसका ये नहीं सोचना, अरे मैं तो इतना हेल्दी खा रहा हूँ, तो कितना भी खा सकता हूँ। टेबल पे उठने से पहले पेट में थोड़ी जगा हमेशा खाली छोड़ना। आपकी बिमारी कितनी जल्दी ठीक होती है, ये इस पे डिपेंड करता है कि आप बॉड़ी को कितने हीलिंग आवर्स देते हो। अगर आप रोज 16 घंटे उपवास कर रहे है तीन महीने में 1500 हीलिंग आवर्स और 1500 हीलिंग आवर्स में सभी बीमारियाँ डायबिटीज़, कोलेस्ट्रॉल, पीसीओडी, थायरोइड, हाई ब्लड प्रेशर जड़ से ठीक हो सकती हैं। अगर आपकी एक ऐज कम है, तो आपको इससे भी ज़्यादा कम समय लगेगा, क्योंकि बच्चों में प्राण शक्ति और भी ज़्यादा होती है।
बस टू डायबिटीज़ और उससे होने वाली दिक्कतों को दूर कर रहे हैं।
उपवास से, ये कैलोरीज़ कम करने से बहुत अलग है।
उपवास छह गुना बेहतर है इस खतरनाक चरबी से मुक्ति पाने के लिए। सबसे पहला जो मुझे फर्क दिखा, वो है वजन का कम होना। मैंने सात दिनों में नौ किलो वजन कम किया है।
मैंने अठ और अभी भी कर रही हूँ।
असल में पहले से ज़्यादा कसरत कर सकते हैं। मैं हमेशा खाली पेट कसरत करता हूँ उपवास के दौरान।
मैं एक दिन में 210 यूनिट इंसुलिन लिया करती थी, और अब वो सारी छूट गई है। उपवास ने मेरी जान बचा ली। ये दवाई से भी अच्छा है।
मैं हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल उपवास उतना ही प्रभावगारी है जितनी कि कीमोथेरेपी।
मेरी गार्ड लगातार कम होती रही और अब बिल्कुल खत्म हो गई। No cancer। 21 साल से मैं हूँ cancer free। Isn't that amazing? दुनिया का हर धर्म हमें उपवास करना सिखाता है, चाहे वो इकादशी हो, रोज़ा हो या Good Friday हो। मैंने इंडिया के कुछ गहरे वेदों को स्टडी किया है, जैसे आयुर्वेदा, नैचुरोपैथी, योगा, और सभी इस एक सिद्धांत का पालन करने को बोलते हैं। जब आपको दोपहर तक खाने के बारे में नहीं सोचना पड़ता, तो आप पहले से ज़्यादा प्रोडक्टिव होते हैं। आप दिन में पहले से ज़्यादा काम निकाल पाते ह क्योंकि मैं आपको डीटॉक्स करने के दो और इम्पोर्टेंट तरीके बताने वाली हूँ, जो मैंने अपने गुरुओं से सीखे। और इस वीडियो को अपने सारे फ्रेंड्स और फैमिली के साथ शेयर करें, ताकि माँ प्रकृति की ये नॉलेज इंडिया के हर घर-घर तक पहुँचे और सभी बिना दवाइयों के ठीक हो सकें। इस चैनल सिर्फ क्योंकि हम रोज बाथरूम जा रहे हैं, तो जरूरी नहीं कि हमारी इंटेस्टाइन साफ है। मान लीजिए आप 30 साल के हैं, क्या आपने कभी 30 साल पुराने घर के प्लंबिंग पाइप्स देखे हैं? उसमें से रोज पानी और गंदगी जरूर गुजर रही है, लेकिन 30 सालों के बाद उसकी दीवार पे इतनी गंदगी इकट्ठा हो हमें कुछ ऐसा चाहिए जो इस गंदगी की हार्ड लेयर को सीधा मेल्ट कर सके। ये वैसे ही है जैसे हमारे बर्तनों के नीचे चिपक जाती है। हम इसे कैसे निकालते हैं? पानी में भिगोकर। उचित समय दिया जाए तो पानी लगभग हर चीज को घोल सकता है। तो अब हम अपनी इंटेस्टाइन्स में पानी कैसे लें? एनिमा के थ इसको दो-तीन बार पानी से धो लें और फिर एनिमा पॉट में 200 से 300 ml साफ पानी भर लीजिए। इसको लेने की बेस्ट जगह है आपका बाथरूम। पाइप की टिप पे थोड़ा नारियल का तेल लगा लीजिए। फिर इसको किसी ऊंचे शेल्फ पर रख लें। आपकी कमर से ऊंचा होना चाहिए। जमीन पे कोई मैट पिछा लीजिए और फिर घुटन जल्दी ही पानी एनिमा पॉट से खाली होकर आपकी इंटेस्टाइन्स में भर जाएगा। फिर पाइप को बाहर निकाल ले और पानी को करीब 10 मिनट तक अंदर होल्ड करके रखिए। बीच में थोड़ा वॉक कर ले, अपने पेट की मसाज करते रहिए ताकि गंदगी अंदर अपनी जगह छोड़ने लगे। जब आपको बाथरूम जाने का प्रेशर हो तो बाथर नहीं टॉक्सिन्स जमे पड़े थे। ये बिल्कुल सेफ है। अनसेफ तो ये है कि हम वो सारे टॉक्सिन्स को अपने अंदर सारा दिन लेके घूमते रहते हैं। जब मुझे इसके बारे में पहले पता लगा, तो मैंने अपने गुरु से कहा, मैं आपकी हर बात मान लूँगी, लेकिन मैं एनिमा कभी नहीं करूँगी। लेकिन मेरा मैं नहीं दाद ब्रश करूँगी क्योंकि वो कितने गंदे हैं। तो हम अपनी इंटेस्टाइन्स के बारे में ऐसा क्यों बोलें? सबसे अच्छा तो है कि आप एनेमा खाली पेट लें, सुबा पेट साफ होने के बाद। अगर सुबा नहीं ले पाते तो दिन में कभी भी ले लीजिए। बस आपके खाने और एनेमा के बीच में दो से तीन घंटे का ग तीन हफ्तों के बाद रोज नहीं लेना, सिर्फ हफ्ते में एक बार या जरूरत पड़ने पर लेना है। चिंता ना करें, इसकी आदत नहीं पड़ेगी। अगर आपको कोल्ड, कफ, बुखार, वॉमिटिंग, पेट दर्द या कोई भी ऐसी छोटी बीमारी आती है, इसको दिन में दो से तीन बार लीजिए। डीटॉक्स का तीसरा तरीका, ठंडी पट बेस्ट तरीका है ठंडी पट्टी। एक व्हाइट कॉटन का कपड़ा लीजिए, करीब एक मीटर चौड़ा और ढाई मीटर लंबा। इसको लंबी पट्टी में फोल्ड करने, करीब दस इंच चौड़ी। फिर इसको ठंडे पानी में भिगोकर निचोड़ने। पानी उतना ही ठंडा होना चाहिए जितना आप आसानी से सहन कर सकते हैं। पट्टी को पेट के चारो पट्टी के बीच में रहनी चाहिए। एक और छोटी पट्टी लें, करीब दो इंच चौड़ी, ठंडे पानी में भिगोकर इसे अपने गले पे लपेट लें। एक और छोटी पट्टी लें ठंडे पानी में भिगोकर अपने माथे पे लपेट लें। आप ये कपड़ा कहीं से भी खरीदकर टेलर से सिलवा सकते हैं, लेकिन इस प्रोसेस को आपके लिए इजी करने के लिए हमने एक डीटॉक्स किट बना के रखी है, जिसमें एक रेडीमेड पट्टी और एनिमा है। आप इस किट को नीचे दिए गए लिंक से आर्डर कर सकते हैं। आप पट्टी क इसको करीब 30 से 40 मिनट तक लगा के रखें। इसको आप दिन में कभी भी लगा सकते हैं, खाने के बाद भी और खाने से पहले भी। बस जब ये लगी हो, उस टाइम पर कुछ नहीं खाना या पीना। गर्मियों में आप रोज इसको दो बार करो, एक बार सुबह और एक बार शाम। दो नहीं तो कम से कम एक बार तो करिए। सर्दियों में जब एक समय पे बॉडी में दो टेम्परेचर मेंटेन होते हैं, तो ब्लड सर्कुलेशन बढ़ जाता है। ब्लड के साथ साथ गंदगी भी अपनी जगह छोड़ने लगती है। खाना डाइजेस्ट करने के लिए ये बहुत अच्छी है। जिनका पेट निकला है, उनका पेट कम हो जाता है इसको लगाकर। जिनको इंडाइजेशन, अल्सर, आईबीएस, एस सरदर्द या माइग्रेन हो तो इसको इम्मीडिएटली लगाएं और आपको इंस्टेंट रिलीफ मिलेगा। देखने में ये एक मामूली सी चीज़ लगती है। आप शायद सोचेंगे, अरे इससे कैसे डीटॉक्स होगा? लेकिन एक्चुअली पट्टी एक बहुत मैजिकल चीज़ है। तो आई होप अब आपको पता है कि अंदर से टॉक्सिन्स बाहर कै अगली वीडियो में हम फूड प्रिंसिपल्स और डाइट प्लान को डीटेल में डिसकस करेंगे सो गुडबाई फॉर नाओ और हम जल्दी मिलते हैं










