इस Diet Plan से किसी भी बीमारी का इलाज संभव | Subah Saraf | Satvic Movement

In this Hindi video, the speaker (Subah Saraf) presents a comprehensive Satvic diet plan that claims to cure a wide range of chronic illnesses—including diabetes, hypertension, thyroid disorders, PCOD, hair loss, joint pain, migraines, and cervical issues—by changing one’s food and lifestyle. The core premise is that only "living" (fresh, unprocessed) foods contain prana (life force) and can restore health, while processed, packaged, or cooked‑ahead foods are "dead" and detrimental. The plan is built on four pillars: (1) eat living food (fresh, directly from the earth, no factory‑processed items), (2) eat wholesome food (whole, unrefined ingredients like brown rice, coconut oil, dates/gur), (3) eat plant‑based food (strict vegetarian, no meat, fish, eggs, and minimal dairy, favoring fresh coconut milk), and (4) eat water‑rich food (fruits and vegetables high in water content). The speaker advises a three‑hour rule for cooked vegetables, avoidance of refrigerated leftovers, and a daily routine of five meals: a detox juice (white peetha), breakfast, lunch, mid‑day snack, and dinner, combined with a 16‑hour intermittent fast. Specific food swaps (e.g., brown over white rice, coconut over refined oils, dates/gur over sugar) and preparation methods (e.g., coconut‑grated toppings, herb‑flavored vegetables, special vegetable‑based chapatis) are detailed. A detox juice made from white peetha (or coconut water) is recommended to draw out toxins. The speaker emphasizes seasonal, regional produce, minimal seasoning, and the importance of listening to natural thirst and hunger cues. FAQs address water intake and how long to follow the plan, concluding that the diet is a lifestyle aimed at reconnecting with Mother Nature and achieving lasting health without medication.
Chapters
हाय, आई एम सुबा। अगर मैं आपसे कहूँ कि सिर्फ अपना खाना बदलके आपकी कोई भी बीमारी जर से ठीक हो सकती है, तो क्या आप मेरा विश्वास करेंगे? आपको कोई भी बीमारी क्यों ना हो, डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर, थायरोइड, पीसीओडी, हेयरफॉल, जोड़ों में दर्द, माइग्रेन, सर्वाइकल। अगर आप अपनी ड मुझे मालूम है आप मेरा भरोसा नहीं करेंगे। आप शायद सोचे, लेकिन मेरे खाने और बीमारी का क्या संबंध? बीमारी तो दवाई से ठीक होती है, खाने से थोड़ी। लेकिन आज दुनिया भर में हजारों लोग दवाइयाँ छोड़कर सिर्फ अपना डाइट और लाइफस्टाइल बदलकर बड़ी से बड़ी बीमारियाँ ठीक कर रहे हैं। इस डाइट को फॉलो करने से मेरा पीसीओडी, थायराइड और हेयरफॉल सिर्फ तीन महीनों में बिना दवाइयों के चर से खत्म हो गया। मैंने ये डाइट अब हजारों लोगों के साथ शेयर करी और जो भी इसको 100% अच्छे से फॉलो करता है, उन सभी की बीमारियाँ खत्म हो रही हैं। लेकिन डाइट से भी ज़्यादा ज़रूरी ह उसमें कोई बीमारी हो ही नहीं सकती। इससे पहले वाली वीडियो में मैंने शरीर में से गंदगी निकालने का तरीका बताया था। तो प्लीज आप उस वीडियो को जरूर देखें। उसका लिंक इस YouTube वीडियो के नीचे दिये गए डिस्क्रिप्शन में मिलेगा। अब जिससे पहले मैं आपको बताऊं कि आपको ब्रेकफ़स्ट, लांच, डिनर म देखिए, यदि आप जमीन में कुछ बोते हैं और रोज उसे पानी देते हैं, तो कुछ दिन बाद उसमें से पौधा उग जाएगा, है ना? For example, यदि आप दाल का बीज मिट्टी में बोते हैं, तो कुछ दिन बाद वो अंकुरित हो जाएगा और उसमें से पौधा निकल आएगा। लेकिन यदि आप कोई biscuit या noodles बोते हैं, क्या आपको लगता है कि उसमें प्राण नहीं है और इसलिए वो जीवन दे भी नहीं सकता। ये निर्जीव भोजन है, डेड फूड है और कोई निर्जीव चीज हमारे शरीर को जीवन कैसे दे सकती है? दूसरी तरफ फल, सबजीयां, स्प्राउट्स, अनाज, मेवे ये सब जीवित भोजन है, यानि लिविंग फूड है और जब ये हमारे शरीर में जाते हैं तो हमारे शरीर में पागवत गीता के सत्रवे अध्याय के दस्वे शलोक में भगवान कृष्ण कहते हैं कि जो भोजन पका हो उसे पकने के एक पहर यानी तीन घंटों के अंदर अंदर खा लेना चाहिए तीन घंटों के बाद वो तामसिक हो जाता है उसमें से प्रान जाने लगता है इसलिए योगिक संस्कृति में यदि चावल चपाती या सबजी तीन घंटों से अधिक रखी हो हमारे दादी दादा और पूर्वज भी ऐसा करते थे। खाना सीधा चूले से प्लेट में आता था। और आजकल क्या हो रहा है? लोग सबजी को फ्रिज में अगले दो दोन चार चार दिन तक रखते हैं, रोज उसमें से थोड़ा निकालते हैं, खाते हैं और वापस फ्रिज में स्टोर कर देते हैं। वो बासी निरजीव खाना खा रहे हैं तो उसे हमें तीन घंटों के अंदर-अंदर ज़्यादा से ज़्यादा पांच घंटों के अंदर-अंदर खा लेना चाहिए। अब मुझे एक बात बताइए, ये तीन घंटों वाला नियम हम केवल सब्जी चपाती पे क्यों लागू करें? इन सब चीजों का क्या? क्या आप सोच भी सकते हैं कि ये चीजें कितने समय पहले पकाई गई होंगी? तीन घंटे पैकेट बॉटल चैन या डब्बे में बंद करके इनपे बहुत सारा केमिकल डाला जाता है ताकि ये दिखने या सूंघने में पासी ना लगे। ये केमिकल इन चीजों की शेल्फ लाइफ तो शायद बढ़ा देते हैं, लेकिन हमारे खुद के शरीर की शेल्फ लाइफ कम कर देते हैं। अगर आप गहराई में सोचें, तो ये खाना तो है ही ये निर्जीव है, डेड है, इसमें कोई प्राण शक्ति नहीं बची। तो पहला नियम, लिविंग फूड खाएं, यानी वो भोजन जिसमें जीवन हो। कुछ भी बottल बंद, पैकेट बंद या डब्बा बंद ना खाएं। ऐसी कोई भी चीज़ ना खाएं जो इंसानों द्वारा फैक्ट्री में बनाई गई हो। ऐसा खाएं जो सीधा माँ प्रकृति से आता और फिर माँ प्रकृति खुद आपका ध्यान रखेंगी। बिस्किट के बजाय नारियल की गिरी के टुकड़े खाएं, सोडा कैन खोलने के बजाय नारियल पानी खोलें, ये नमकीन और स्नैक्स की बजाय ताजे प्लेट भर फल और सैलेड खाएं। दूसरा, eat wholesome food मतलब ऐसा खाना जिसमें पूर्णता हो। माँ प्रकृति को सब पता है, वो गलती नह आलू देती है, आलू के चिप्स नहीं। वो भोजन जो हमें सीधा-सीधा धरती से मिलता है, उसमें पूर्णता होती है, मतलब वो खुद में पूरा होता है, उसमें से कुछ निकाला नहीं गया। माँ प्रकृति ने हर खाने को बनाने से पहले बहुत प्लानिंग करी है। उन्होंने हर भोजन में प्रोटीन, फैट्स, विटामिन्स एक पर यदि हम उसमें से सिर्फ फैट्स निचोड़ के खाते हैं या उसकी बाहरी परत निकाल देते हैं, तो हम इसको माँ प्रकृति के ओरिजिनल डिजाइन से पूरी तरह बदल रहे हैं। इसीलिए सफेद चावल की जगह ब्राउन चावल खाएं। ब्राउन चावल होलसम होते हैं, उसमें पुरंता होती है। यदि हम उसपे लगी ब्रांड निकाल देत सफेद चावल खाना ऐसा है जैसे आम की घुटली खाली और आम बाहर छोड़ दिया। चीनी के बजाय खजूर या गुड़ खाएं। खजूर और गुड़ में पूर्णता होती है, चीनी खंडित यानी fragmented है। किसी चीज की तेल की जगह उसे साबुत खाएं। नारियल तेल की बजाय अपने खाने में कच्चे नारियल की गिरी घिस के डालें। केहूं को चोकर से अलग ना करें, अपना आटा खुद पिसवाएं। तीसरा, eat plant-based food यानी शुद्ध शाकाहारी भोजन खाएं, यानी ऐसा भोजन जो पेड़ पौधों से आता है, न कि पशुओं से। मीट मछली या अंडा बिल्कुल नहीं खाना। माँ प्रकृति ने हमारे शरीर को जानवर खाने के लिए बनाया ही नहीं। मैं इस विषय पे आगे चलकर आपका अगला सवाल शायद ये हो कि दूद और दूद से बनी चीजों का क्या? देखिए, देसी गाय का शुद्ध दूद अच्छा है, लेकिन समस्या ये है कि आजकल जो हमें दूद मिलता है, वो दूद है ही नहीं. हमें जो टेट्रा पैक और थैलियों में मिलता है, वो मिल्क पाउडर, यूरिया और बहुत हानीकारक केमिकल से बना एक सफ नामिलावटी है कि यदि हम इसे पीते रहेंगे, तो 2025 तक 87 प्रतिशत भारत को कैंसर होगा। अब आप शायद पूछें, लेकिन मेरे घर का दूध तो बिल्कुल शुद्ध है, मेरी खुद की गौशाला से आता है, तो क्या मैं पी सकता हूँ? नहीं, जिन लोगों को अपनी बीमारी ठीक करनी है, वजन घटाना है, या फिर दिनभर छोटे बच्चे जिनकी हाइट बढ़ रही है या एथलीट्स जो दिन में चार-चार पांच-पांच घंटे धूप में खेलते हैं, वो शुद्ध दूध को शायद पचा सके। लेकिन आजकल हम में से ज्यादातर लोग नहीं पचा सकते। दूध नहीं तो दूध से बनी कोई चीज भी नहीं लेनी। पनीर, घी, बटर अभी नहीं पचेगा। अब आप चिंता न अंतर बस इतना है कि आपका शरीर इसे पचा सकता है। आप जानते हैं वो क्या है? नारियल का दूद। नारियल धर्ती पर सबसे अच्छे भोजनों में से एक है। इसे हमारे पूर्वज श्रीफल कहते थे। भारत में हर जन्म, हर शादी, हर उत्सव की शुरुवात नारियल तवनने से होती है क्योंकि हमारे पूर्वजों को पता था कि अगर वो तो शायद कोई ना खाए, लेकिन इसे हमारे रीति-रिवाज में शामिल करने के बहाने ये नारियल किसी ना किसी तरह भारत के घर-घर में पहुंच जाएगा। आप हमेशा नारियल का दूध खुद बनवाएं, पैकेट वाला नारियल का दूध नहीं पीना। बनाने की विधि नीचे दिए गए YouTube डिस्क्रिप्शन में मिल जाएगी। चौथा, eat water rich food, य दो तरह के भोजन होते हैं Water Rich यानि ऐसा भोजन जिसमें पानी भरपूर मातरा में हो और दूसरा Water Poor जिसमें कोई पानी नहीं है Water Rich में आते हैं फल जैसे की तरबूज, पपीता, ग्रेप्स, संतरा, टमाटर, खीरा, पत्तिदार सबजियां, लौकी Water Poor में आते हैं सभी तरह के अनाच, चावल, गेहूं, चपाती, दाल, सूखे मेवे जैसे बदाम, और स्टार्च वाली सब्जियाँ जैसे आलू, अरबी। देखिए, यदि आप उसे जूसर में डालें और बहुत सारा जूस निकले, तो आप समझ जाना वो वाटर रिच है। क्या आप कभी रोटी या चावल का जूस बनाते हैं? नहीं, क्योंकि आपको पता है कि उसमें रस है ही नहीं। अब आपका शरीर 70 प्रतिशत पानी है और 30 प्रतिशत तो स्वाभाविक है आपकी डाइट 70 प्रतिशत वाटर रिच फूड्स की होनी चाहिए, जैसे जूस, फल, सब्जियाँ और 30 प्रतिशत वाटर पूर्व फूड्स की, जैसे अनाज और सूखे मेवे। लेकिन हम में से ज्यादातर लोग इसका बिल्कुल उल्टा खाते हैं। हम अनाज दिन में तीन बार खाते हैं, जो पूरी तरह पचता नहीं और Eat living food, यानी ऐसा भोजन जिसमें जीवन हो, जो सीधा खेत से आपकी किचन में आता है, किसी फैक्ट्री से नहीं आता। Number two, eat wholesome food, यानी ऐसा भोजन जिसमें पूर्णता हो, सफेद चावल की जगह ब्राउन चावल, चीनी की जगह घुड़ या खजूर, तेल की जगह नारियल की गिरी। Number three, eat plant based food, यानी शुद्ध शाकाहारी भोजन। आपका भोजन पेड़ मीट मछलियाँ अंडा बिल्कुल ना खाएं। गाय के दूध की बजाय नारियल का दूध इस्तेमाल करें। चौथा, eat water rich food, यानी ऐसा भोजन जो रस से भरा हो। तो अब चलिए डाइट प्लान की बात करते हैं। हम दिन में पांच मेन मील सजेस्ट करते हैं। सुबह का डिटॉक्स चूस, नाश्ता, लंच, बीच की मिड मील और डिनर। मैं आपको आप उसको अपने रूटीन के हिसाब से एडजस्ट कर सकते हैं, कोई प्रॉब्लम नहीं। याद रखें कि इस टाइट प्लान में आप रोज 16 घंटे उपवास जरूर जोड़ के रखें, जिसकी बात हमने पिछले वीडियो में की थी। मतलब अगर आप डिनर रात को 7 बजे लेते हैं, तो अगले दिन सुबह 11 बजे तक कुछ सॉलिड भोजन नहीं खाना करीब 9 बजे। इसके लिए हम एक बहुत स्पेशल सब्जी का जूस बनाते हैं। जब ये हमारे शरीर में जाता है, सारे टॉक्सिन्स और गंदगी अपने अंदर सोखने लगता है, मैग्नेट की तरह। और जब ये निकलता है, बहुत सारी गंदगी अपने साथ लेके निकलता है। वजन कम करने के लिए और त्वचा साफ करने के लिए ये बहु क्या आप जानते हैं ये कौन सी सबजी है? हिंदी में इसको सफेद बेठा कहते हैं और इंग्लिश में आश कार्ड ये आपको सबजी वाले के पास मिल जाएगी जूस बनाने के लिए पहले इसके छिलकों को निकालने अंदर से सारे बीज भी निकालने फिर इसको काट कर जूसर में जूस निकालने जूसर ना हो तो इसको मिक्सी में भी बन करीब 300 ml पेठे का जूस पीएं। इसमें कोई नमक, नींबू, मिर्च मसाला नहीं डालना। चिंता ना करें, ये कड़वा नहीं होता। आप चाहें तो इसको आधा नारियल पानी के साथ मिक्स करके भी ले सकते हैं। अगर सफेद पेठा ना मिले तो एक ग्लास नारियल पानी का पीलें। अगर नारियल पानी भी ना मिले तो आप एक ग्लास क्योंकि पेठे का जूस शरीर में सफाई का काम कर रहा है। कुछ खाएंगे तो सफाई रुक जाएगी। लगभग 11 बजे नाश्ते में आप एक बड़ी प्लेट मौसम का कोई भी फल ले सकते हैं, जैसे कि तरबूज, पपीता, संतरा, ग्रेप्स, सेब, नाशपाती। ऐसे फल खाएं जिसमें पानी ज्यादा हो। इसलिए केला नहीं खाना। सबसे अच्छा फल खाएं जो आपके देश में उगते हैं और मौसम के हैं। Always eat seasonal and regional। Seasonal फल हमेशा सस्ते भी होंगे। आप चाहें तो इसके ऊपर नारियल की गिरी घिस के डाल सकते हैं। फिर लगभग दो बजे लंच में आप अनाज ले लें, चपाती और सब्जी। हमें खास तरह की चपाती बताते हैं जिसे digest करना पहचाना आसान होता है। ये पूरी तर आधी केहूं और आधी सबजी से बनती हैं आप किसी भी सबजी की चपाती बना सकते हैं खीरे की चपाती, चुकुंदर की चपाती, पालक चपाती, घीया चपाती, गाजर चपाती इस तरह यदि आप दो चपाती भी खाते हैं तो आ आपको इस YouTube वीडियो के नीचे दिए गए डिस्क्रिप्शन में चपाती वीडियो का लिंक मिल जाएगा। चपाती के साथ आती है सब्जी। अब जो हम सब्जी रेकमेंड करते हैं, वो भी थोड़ी अलग है। तेल की बजाय हम इसमें नारियल घिस के डालते हैं और मिर्च मसालों की बजाय हम इसमें ताजे हर्ब्स डालते हैं। इस तरीके से इस वीडियो के नीचे दिए गए डिस्क्रिप्शन में मिल जाएगी। यदि आप एक चपाती खाते हैं, तो दो कटोरी सब्जी खाएं। यदि आप दो चपाती खाते हैं, तो चार कटोरी सब्जी खाएं। मतलब सब्जी ज़्यादा खानी है और अनाज कम। जब आप सिर्फ अनाज खाते हो, बिना सब्जी के, तो उसको पचाना मुश्किल होता है। लेकिन ब्राउन राइस भी ले सकते हैं। दाल रोटी की जगह सब्जी रोटी खाएं, दाल चावल की जगह सब्जी चावल खाएं। राजमा, चना, छोला बिल्कुल नहीं खाना, कम से कम तब तक जब तक आप पूरी तरह ठीक नहीं हो जाते। देखिए, ऐसा नहीं है कि दाल गलत है या राजमा गलत है। बात ये है कि हमारा ये मॉडर्न लाइफस ऐसे में उसको पचाना मुश्किल होता है। हमारे पूर्वज उसको आसानी से पचा पाते थे क्योंकि वो दिन के 6-8 घंटे धूप में मेहनत का काम करते थे। समस्या ये है कि हम लाइफस्टाइल तो आज का जी रहे हैं, लेकिन डाइट अपने पूर्वजों की खा रहे हैं और इसलिए बीमार पड़ रहे हैं। अब लंच और डिनर के बीच या पेठे का जूस या नारियल पानी ले सकते हैं। बिस्किट, स्नैक, नमकीन वो सब बिल्कुल नहीं लेना। यदि जूस के बाद भी भूख लगे तो दो-तीन बिस्किट जितने टुकड़े नारियल की गिरी के ले लें या फिर कोई हल्का फल खा लें। बहुत लोगों को इस समय चाय या कॉफी की आदत होती है। ऐसे में आप हर्बल फिर डिनर में सैलेड या सूप लीजिए। आपका सैलेड रॉ, यानी कच्चा होना चाहिए। मौसम की कोई भी सब्जियों को काटकर, जैसे खीरा, टमाटर, चुकुंदर, लेटस, धनिया, गाजर, उसमें नट, जैसे काजू, बदाम से बनी होममेड ड्रेसिंग बनाके डाल सकते हैं। सैलेड में कोई अन्न, जैसे कि राजमा, दाल, चना उनमें से कुछ हमारे YouTube चैनल पे हैं, लेकिन सारी रेसिपीज के लिए आप हमारी फूड बुक ओर्डर कर सकते हैं, जिसका लिंक इस YouTube वीडियो के नीचे दिये गए डिस्क्रिप्शन में हैं. अगर आप चाहें, तो सैलेट के साथ एक स जब आप रात को अन छोड़कर सिर्फ सुपर सैलेड खाएंगे, तो आपको बहुत लाइट फील होगा। और जब आप रोज सुबह अपना एक्स्ट्रा वजन घटता हुआ देखेंगे और बिना दवाइयों के अपनी रीडिंग्स कंट्रोल में आते हुए देखेंगे, तो वापस मुड़ने का मन भी नहीं करेगा। तो आप दिन में एक बार अन खा रहे हैं, एक ब लंच में आप सैलेड ले सकते हैं और डिनर में अनाज। अब ये डाइट प्लान उनके लिए है जिनको कोई बीमारी है और वो उसे जड़ से खतम करना चाहते हैं। ये उनके लिए भी है जो पहले से फिट है और अपना वजन और हेल्थ मेंटेन करना चाहते हैं। लेकिन एथलीट्स और बच्चों के लिए ये सजेस्टेड नहीं है। 16 आइए अब कुछ इम्पोर्टेंट प्रश्नों का आंसर करते हैं। पहला प्रश्न जो होता है लोगों का, मुझे कितना पानी पीना चाहिए? आपको पानी केवल तब पीना चाहिए जब आपको प्यास हो। ठीक वैसे ही आपको खाना सिर्फ तब खाना चाहिए जब भूख हो। जबरदस्ती हर रोज आठ-नौ ग्लास पानी पीने की कोई जरूरत नहीं। एक्सेस म जिसमें पानी भरपूर मात्रा में हो, water rich food। अगला प्रश्न, मुझे ये कब तक follow करना है? इसको तब तक follow करें जब तक आपको स्वस्थ और fit रहना है और जब तक आपको शरीर में बीमारी नहीं जाए है। जो मैंने आपको यहाँ दिया, वो कोई diet plan या वजन कम करने की तरकीब नहीं है। ये एक lifestyle है, जो आपको माँ प्रकृति और उनके खाने हमारे ये शरीर माँ प्रकृति का एक बहुत कीमती गिफ्ट है और दिन-ब-दिन हफ्ते दर हफ्ता साल दर साल समय गुजरे जा रहा है। रोज सुबह हम उठते हैं, खुद को शीशे में देखते हैं और सोचते हैं काश मुझे अपने दिन की शुरुआत ये दवाइयाँ लेकर ना करनी पड़ती, काश मेरा ये सारा एक्स्ट्रा वेट ना होता। मैं लगता है। आपके शरीर का हर अंग जब बिल्कुल अच्छे से काम कर रहा होता है, जब आपके शरीर में कोई बीमारी या बीमारी का बीज नहीं होता। मेरा यहाँ होने का सिर्फ 1 मकसद है आपको वापस माँ प्रकृति मदर नेचर से जोड़ना। अभी के लिए इतना ही हम वापस फिर मिलेंगे।










