In this Hindi instructional video, the presenter argues that the health of the entire body hinges on a clean intestinal tract. She explains that accumulated waste in the intestines, caused by modern diets and lifestyle, leads to a wide range of ailments, citing a claim that 80 % of diseases originate in the gut. Drawing on historical yogic practices and the work of Dr. Norman Walker, she introduces enema (referred to as “एनिमा”) as a simple, low‑cost detox method. The video details the equipment needed (enema kit, 300‑500 ml of room‑temperature water, lubricating oil), step‑by‑step procedure (filling the pot, inserting the tip, gentle water flow, abdominal massage, retention of water for 5‑7 minutes, and post‑enema bathroom use). She outlines dosage progression (starting with 300 ml, then 150 ml, up to 500 ml) and therapeutic schedules: a 21‑day intensive protocol for specific health issues, followed by maintenance phases (daily for a week, alternate days the second week, twice a week the third week). Dietary recommendations accompany the protocol (avoid non‑vegetarian food, focus on sattvic diet). A substantial FAQ segment addresses common concerns: adding substances to the water (not recommended), risk of habit formation (none if used as advised), suitability for children, pregnancy, menstruation, hemorrhoids, fissures, fistulas, and the timing of the enema (best on an empty stomach in the morning). Safety cautions emphasize using only water, avoiding excessive pressure, and stopping if discomfort occurs. The presenter also briefly promotes a website where enema kits can be purchased and encourages viewers to watch more of her videos. The overall message is that regular, correctly performed enemas can cleanse the gut, improve digestion, skin, energy levels, and overall health.
Chapters
आपको क्या लगता है? वो कौन सा हिस्सा है जिसपे आपके पूरे शरीर की हेल्थ निर्भर करती है? लीवर, किडनी, लंग्स? नहीं, वो हिस्सा है आपकी इंटेस्टाइन्स, यानी आँतें। जब तक आपकी इंटेस्टाइन साफ नहीं, तब तक बाकी कोई अंग अपना काम ढंग से कर ही नहीं सकता। मगर मैं तो रोज दो बार बाथरूम नहीं, रोज दो बार बात्रूम जाने के बावजूद भी आपकी आंतों में बहुत सारी गंदगी, बहुत सारा कच्रा जमा पड़ा हो सकता है आप पूछेंगे, ये गंदगी आती कहां से है? जब आप कुछ ऐसा खाना खाते हैं जो सदियों से चली आ रही है, जो हमारी योगिक संस्कृति का हिस्सा है, और ये है एनिमा। रुकिए रुकिए रुकिए। मुझे पता है अभी आप क्या सोच रहे होंगे। एनिमा तो बिल्कुल सेफ नहीं होता, इसमें तो दर्द होता होगा, अरे ये तो अननैचुरल है। मैंने भी जब इसके बारे में पहली बार सीखा था, मुझे भी तो ये 100% सेफ है। अनसेफ तो ये है कि हम वो सारी गंदगी अपने अंदर इतने सालों तक रखते हैं। घर, ऑफिस, मॉल, पार्क हर जगह इस गंदगी को अपने साथ लेके घूमते रहते हैं। तो चाहे आज आपको कोई बीमारी है या आप एकदम हेल्दी हो, चाहे आप यंग हो या ओल्ड, चाहे आप मोटे हो या पतले, ये एनिमा कब लेना है, इसके क्या-क्या फायदे हैं और ये कौन सी कंडीशंस में नहीं लेना चाहिए? तो ये वीडियो एंड तक जरूर देखें। एनिमा की विधि समझने से पहले आइए समझते हैं कि इसकी जरूरत क्यों है? क्या आपने कभी डॉक्टर नॉर्मन वॉकर के बारे में सुना है? ये चार्ट डॉक्टर नॉर्मन वॉकर ने इस चार्ट को देखिए, देखिए कैसे आपकी इंटेस्टाइन का हर एक हिस्सा किसी न किसी बॉडी पार्ट से कनेक्टेड है। जहाँ गंदगी जमने लगती है, उसी बॉडी पार्ट में बीमारी पैदा होती है। तो जब भी आप वो चीजें खाते हैं जो माँ प्रकृति से सीधा-सीधा नहीं मिलती, उनको पचाना, यानी डाइजेस्ट करना और तो ये सब चीजें शरीर से कभी पूरी तरह बाहर निकल ही नहीं पाती, अंदर आंतों में जमने लगती है। और जैसे-जैसे हमें निखाते रहते हैं, आंतों के अंदर और गंदगी चिपकती रहती है। क्या आपको पता है? 80 प्रतिशत बीमारियों का जन्म आपकी इंटेस्टाइन में होता है। अब वो चाहे कफ हो या कैंसर, वो प और खून के जरिए शरीर के हर दूसरे अंग तक पहुंचाती है। यही नहीं, जब तक ये साफ नहीं, तब तक ये कभी साफ हो ही नहीं सकता। जब तक इंटेस्टाइन में गंदगी पड़ी है, तब तक हमेशा आलस, चिढ़चिड़ापन, स्ट्रेस, टेंशन का अनुभव होता ही रहेगा, क्योंकि इसका और इसका बहुत गहरा रिश्ता है। एनिमा क ये कोई नई चीज नहीं है। इस डीटॉक्स टेक्निक के बारे में हमारी हथयोगा प्रदीपिका में जलबस्ती के नाम से हजारों साल पहले बताया गया था। तो आइए देखते हैं ये एनिमा लेते कैसे हैं। आपको एक एनिमा किट की जरूरत पड़ेगी, और आपके लिए इजी करने के लिए हमने इसे अपने वेबसाइट पर भी अवेलेबल क फिर उसमें करीब 300 से 500 ml पानी भर ले। हालांकि एनिमा पॉट इससे ज़्यादा पानी ले सकता है, आप 500 ml से ज़्यादा पानी ना डालें। शरीर पे थोड़ा सा भी प्रेशर नहीं डालना। यदि आप पहली बार ले रहे हैं, तो 300 ml से शुरू करिए। याद रहे कि पानी का तापमान रूम टेम्परेचर जितना हो, मतलब ना ही लेकिन अगर आप नल का पानी यूज़ करने में कंफर्टेबल नहीं हैं, तो पीले वाला पानी भी इस्तेमाल कर सकते हैं। पहले आप पाइप की टिप पे थोड़ा तेल लगा लीजिए। आप नारियल का तेल या कोई भी दूसरा तेल लगा सकते हैं। कोई केमिकल वाली क्रीम ना लगाएं। तेल लगाने से पाइप ल्यूब्रिकेट हो जाता है और बस आपकी कमर से उंचा होना चाहिए वैसे तो एनिमा लेने के लिए सबसे अच्छी जगा है आपका बात्रूम लेकिन अगर आपका बात्रूम छोटा है तो आप इसे अपने बेड्रूम में भी ले सकते हैं नीचे कोई मैट या टा आपके पाइप पर एक ऐसा स्विच लगा होगा, इसको ऑन कर दे। ऑन करते ही पानी का फ्लो शुरू हो जाएगा। अगर पानी अंदर ना जाए, तो पाइप को थोड़ा आगे पीछे करके एडजस्ट कर ले। पानी एनिमा पॉट से आपकी इंटेस्टाइंस में ट्रांसफर होगा। इसमें करीब एक मिनट लगता है। पॉट खाली होने पर अपने पाइप को निकाल दे थोड़ी वॉक करें। वॉक करते समय अपना हाथ थोड़ा ठंडे पानी में गीला कर लीजिए और उसे अपने पेट पे मसाज कीजिए। पहली क्लॉकवाइज़ डायरेक्शन में और फिर एंटी क्लॉकवाइज़ डायरेक्शन में। मसाज करने से अंदर पड़ी गंदगी अपनी जगह छोड़ने लगती है। पानी को पांच सात मिनट अंदर होल्ड करना बहुत जर अगर आप पांच मिनट भी होल्ड नहीं कर पाते, तो अगले दिन क्वांटिटी थोड़ी कम कर दें। डेढ़ सौ एमएल से शुरुआत करें। पानी ज्यादा लेने से फायदा नहीं होता, बल्कि पानी को अच्छे से करीब पांच सात मिनट अंदर होल्ड करने से फायदा होता है। जब आपको बाथरूम जाने का प्रेशर आए, तो आप बाथरूम जाएं और अगर आप एक पूरे दिन के उपवास के बाद एनिमा लेंगे, तो उसका और असर अच्छा आएगा। आप देखेंगे कि एनिमा के बाद बहुत डार्क कलर का वेस्ट निकलेगा, जिसका मतलब कि वो बहुत पुरानी गंदगी है। एनिमा के पूरे प्रोसेस को करने में सिर्फ 10 मिनट लगते हैं, और इसे करना बहुत ही आसान है। तो इसे टाइम तो क्यों ना आपने 10 मिनट निकालकर उस गंदगी को बाहर निकाला जाए? एनिमा कितने समय तक लेना है? ये आपकी हेल्थ पर डिपेंड करता है। प्लीज अब आप ध्यान से सुनिएगा, क्योंकि ये बहुत इम्पोर्टेंट पॉइंट है। अगर आप किसी हेल्थ प्रॉब्लम यानी बीमारी को ठीक करना चाहते हैं, जैसे कि डायबिटीज 21 दिन के बाद इसको छोड़ दें। इसको कभी अपनी आदत नहीं बनाना। 21 दिन के बाद इसको सिर्फ जरूरत पड़ने पर लें, जब भी आपको थोड़ी भी bloating, constipation या gas या headache महसूस हो। ये याद रखें कि ये 21 दिन का समय आपके शरीर के लिए एक deep cleaning का time है। तो इन दिनों आप अपने भोजन पे भी ज्यादा ध्यान दें। ज्यादा स तीन बंद खाना, नॉन वेज बिल्कुल बंद करते। अब अगर आप एकदम स्वस्थ हैं, आपको कोई भी बीमारी नहीं है, तब भी एनिमा आपके लिए बहुत फायदेमंद है। ऐसे में आप इसको सात दिन तक रोज़ लें, फिर दूसरे हफ्ते हर अल्टरनेट दिन लें और तीसरे हफ्ते सिर्फ दो बार लें और तीन हफ्तों के बाद सिर आपको दिन के बीच आलस या नींद आने भी बंद हो जाएगी। आपकी स्किन साफ दिखने लगेगी, वेट ज़्यादा है तो वो कम हो जाएगा। और अगर आपको कोई भी दूसरी हेल्थ प्रॉब्लम है, आप देखेंगे उसमें भी इम्प्रूवमेंट आने लगेगी। आँतों को साफ रखना, ये एक ऐसा सच है, जो ना डॉक्टर्स, ना कोई दवाई किसी का प्रॉफिट नहीं है, सिवाय आपके। एक और इम्पोर्टेंट बात, कभी भी एनिमा का फायदा ना उठाएं, कभी ऐसा मत सोचे, अरे चलो जो खाना है खा लेते हैं, एनिमा से निकाल देंगे, नहीं, एनिमा सिर्फ तब काम करेगा जब आपका भोजन भी अच्छा होगा, जब भोजन सात्विक होगा। अगर आप ऊपर से रोज़ गंदगी जिसमें हमने बाकी स्टेप्स बताए हैं। एक और क्वेश्चन जो अक्सर आप में से कुछ लोग पूछते हैं, वो ये कि एनिमा दिन के किस समय लेना चाहिए? बेस्ट है इसको खाली पेट सुबह के टाइम लेना। सुबह हमारी बॉडी क्लेंजिंग मोड, यानी सफाई के मोड में होती है। सुबह के टाइम यदि आपको नैचुरल मोशन होता है, तो फिर भी आप एनेमा ले सकते हैं। अगर किसी भी वजह से आप इसको सुबह नहीं ले सकते, तो आप दिन के किसी भी समय ले सकते हैं। लेकिन आपको हमेशा एनेमा और खाने के बीच दो घंटे का गैप रखना होगा। अगर आप एनेमा को डबल इफेक्टिव बनाना चाहते हैं, तो एनेमा से पहले वेट पैक, यानि ठंडी पट्टी लग आप में से कुछ लोगों को अभी भी शायद लग रहा हो, ये तो हमसे कभी नहीं हो पाएगा। जब मैंने इसके बारे में पहली बार सीखा था, तो मुझे भी यही लगा था, एनेमा, ये तो मैं कभी नहीं कर पाऊँगी, ये मुझसे नहीं हो पाएगा, मुझे इसकी क्या जरूरत? लेकिन आप मेरा विश्वास कीजिए, सिर्फ एक बार ये करने के छी मैंने ही दांत ब्रश करूँगी क्योंकि वो इतने गंदे हैं तो हम अपनी इंटेस्टाइन्स के लिए ऐसा क्यों सोचें आइए अब कुछ इम्पोर्टेंट प्रश्नों के जवाब डिस्कस करते हैं पहला क्या हम पानी में कुछ मिला सकते हैं बिल्कुल नहीं आजकल कॉफी एनेमा बहुत फेमस है लेकिन हम आपको नहीं रेकमेंड करते आपक और एनेमा भी वो यूज़ करें जो ऐसा दिखता हो। आजकल केमिस्ट्स पर साबुन और ग्लिसरीन वाले एनेमा मिलने लगे हैं, वो बिल्कुल ना यूज़ करें। दूसरा, क्या मुझे एनेमा की आदत तो नहीं लग जाएगी? नहीं, जैसे हमने बताया, अगर आप वैसे ही फॉलो करेंगे, तो आदत नहीं लगेगी। ज़्यादा से ज फिर जैसे कि हमने आपको पहले बताया इसको छोड़ दे और सिर्फ जरूरत पड़ने पढ़ ले ऐसे फॉलो करेंगे तो आदत बिल्कुल नहीं लगेगी आदत उन चीजों की लगती है जो हम उपर से लेते हैं लाक्सेटिव्स, पॉग तो आंतों के अंदर गंदगी की मोटी-मोटी परतें चिपक जाती हैं। गंदी आंतों में अच्छे किटाडू कैसे पैदा हो सकते हैं? आप ही बताइए। लेकिन जब एनिमा के थ्रू आप आंतों को साफ करेंगे, तभी तो उसमें अच्छे बैक्टीरिया आ पाएंगे। अगला सवाल: क्या ये एनिमा अननैचुरल नहीं है? हम मानते हैं कि ये लेकिन हम आपसे पूछना चाहेंगे, जो हम खाते आए हैं, क्या वो नैचुरल है? जब हमारा खाना ही नैचुरल नहीं, तो जब हम उसको साफ करने के लिए बाहर से किसी चीज़ की मदद ले रहे हैं, तो इतनी हिचकिचाहट क्यों? और हम डाल क्या रहे हैं? सिर्फ पानी, सादा पानी। अगला सवाल, क्या बच्चे भी एनिमा ले सकते उनके लिए आप थोड़ा कंपनी इस्तेमाल करें, 300 ml से ज्यादा नहीं। 10 साल से छोटे बच्चे भी ले सकते हैं, लेकिन उनको एक एक्सपर्ट की सुपरविजन में लेना चाहिए। अगला सवाल, क्या प्रेगनेंसी में इसको ले सकते हैं? प्रेगनेंसी में हम इसको लेना नहीं रेकमेंड करते। क्या पीरियड्स के दौरान इसको ल क्या हम इसे पाइल्स, हैमरोइड्स, फिशर्स और फिस्टुला की प्रॉब्लम में भी ले सकते हैं? इन सिचुएशंस में हम एनएमआ नहीं रेकमेंड करते, क्योंकि इन सिचुएशंस में स्किन बहुत सेंसिटिव होती है और थोड़ी भी इंटरफेरेंस से प्रॉब्लम हो सकती है। तो ऐसे में आप एनएमआ ना लें और बाकी सात्विक लाइफस रजिस्टर करने के लिए यहाँ क्लिक करें और हमारे और वीडियोज देखते रहने के लिए यहाँ क्लिक करें। अभी के लिए इतना ही हम आपसे जल्द वापस मिलेंगे।