High Blood Pressure को 21 दिन में ख़तम करे | हाई ब्लड प्रेशर का इलाज

Samaira Banga and three speakers claim hypertension affects 8 crore Indians and can be reversed in 21 days with a plant-based diet and six-step morning routine including detox juice, sun exposure, cold compresses, and enemas. They argue processed foods cause "dirty" blood, not genetics, and share stories of people stopping blood pressure medication within weeks.
Chapters
नमस्ते क्या आप जानते हैं कि आज इंडिया में हर पांच लोगों में से एक हाई ब्लड प्रेशर का शिकार है यानी आठ करोड़ लोग अब आप ये सोच रहे होंगे तो क्या फर्क पड़ता है आठ करोड़ में से एक मैं भी हूँ तो क्या फर्क पड़ता है फर्क अभी नहीं पड़ रहा फर्क पड़ेगा आज से दस साल बाद जब यही ब्लड जब इसी ब्लड प्रेशर के कारण न जाने कितने हॉस्पिटल के चक्कर काटने पड़ेंगे, कितना पैसा वेस्ट होगा और आपका ये हाल देखकर आपका परिवार कितनी तकलीफ से गुजरेगा। इतना क्यों अपने आप को डेंजर में डालना और डर-डर के जिंदगी जीना जब इसका सल्यूशन आप ही के हाथ में है? सात्विक लाइफस्टाइल अपन वो कारण जो आज हमें कोई नहीं बता रहा। और दूसरे पार्ट में जानेंगे अपना डिटेल्ड मॉर्निंग रूटीन और फूड प्लान, जिसको फॉलो करके आप सिर्फ 21 दिन में अपने ब्लड प्रेशर को पूरी तरह कंट्रोल में ला सकते हैं। ऐसा हमारे कहने पे मत जाइए, आप खुद देख लीजिए आपके ही जैसे कुछ लोगों की कहान Taken all kind of medicines, whether it was homeopathic or allopathic.
That won't go away. Both of us started this journey religiously from the first of September. My weight has come down. My blood pressure medicines are gone. I am no medic on no medication at this point of time, and I am perfectly healthy. My challenges of BP, regular headache. जब मैं ज़्यादा काम ज़्यादा चलता था तो मुझे सांस So I started following the lifestyle. After about 15 days or so of following this, you know, it became 127, 80, 82, and within three, three, three and a half weeks, it started to go further southwards. So 116, you know, 65 types. I said, okay, no medications at all. उनको डब्बे में डाला मैंने। Okay, because my readings were perfectly, perfectly okay.
मतलब वेर आई यूज्ड टू बी वर्सेस वेर आई एम टुडे इज़ अ 180 डिग्री ट्रांसफॉर्मेशन मेरा आठ साल से आठ नौ साल से मुझे हाई ब्लड प्रेशर और हाई कोलेस्ट्रॉल का प्रॉब्लम हो गया था मतलब तो विदिन वन एंड हाफ मंथ्स है वो मेरा ब्लड प्रेशर है वो 110 70 के नीचे आने लगा वो तो कभी भी मेरा दवाई के That too with medication.
Whenever I used to get angry, the BP used to shoot up to 180/140. And after following the Satvic lifestyle, my current blood pressure is— the diastolic is 80 and systolic is 130/135. I have almost reversed my blood pressure, I can say. Within about 3 to 4 months, I got over all my medicines. I was taking 12 in a day. 12 in a day! I was spending about ₹5,000 in a month on my medicines. Not a zero. There was a lot of stress in my life due to which my blood pressure was shooting out, and gradually one day it was like more than 200, 250 almost. And on that day, like there was a small vein in my in my brain which was about to burst if I was not treated in time. I was in coma for almost three days, and I was almost one one and a half month in ICU. पहले तो मुझे ऐसा लग रहा थे nothing was possible in my life. The thing is, the static lifestyle actually it helped me to like reduce my weight as well as reverse my disease. The panting has completely gone. Likewise, the the headache is completely gone.
मुझे ऐसा लगता था कि मेरी life अब दवाइयों पे ही बीतेगी और मुझे लगता था मेरा lifespan बहुत short हो जाएगा मैं कभी मुझे वो कभी खुशी नहीं मिलेगी मुझे वो कभी शांति जो life में चाहिए वो कभी नहीं मिलेगी but जब मैंने ये follow करना start किया तब मुझे लगा कि हाँ लाइफ में होप है।
अभी एक माइंडसेट ऐसा हो गया है पूरा कि कोई भी बड़े से बड़ा भी रोग है ना उसके लिए भी दवाई की आवश्यकता नहीं है, वो भी naturally cure हो सकता है, reverse हो सकता है।
मतलब मैं इसको follow करके मैं अपनी life change कर सकती हूँ, जो मुझे लगता था कि कभी change नहीं होगी।
ये lifestyle is the only way and this is this is extremely extremely extremely simple to follow तो अगर नंबर गिनने हैं, तो अपने ब्लड प्रेशर के मत गिनिए, अपने ब्लड प्रेशर के आखरी दिनों के गिनिए। Because it's not if you can cure it, it's about how fast you can cure it। अब सोचिए, जिस दिन आपकी ये ब्लड प्रेशर की प्रॉब्लम रिवर्स हो जाती है, उस दिन से आपके बैक ऑफ़ द माइंड जो एक फ़ियर बैठा है, कभी भी फेंट हो जाने का, ये हमेशा के कभी ब्रेथलेसनेस नहीं होगी, वजन ज़्यादा है तो वजन अपने आप कम हो जाएगा। बीपी के साथ और कोई दूसरी बीमारी है, शुगर, थायरोइड, पीसीओडी, स्किन प्रॉब्लम, हेयर प्रॉब्लम तो वो भी रिवर्स हो जाएगी। दिन में एनर्जी कितनी भर जाएगी? आप अपनी ज़िंदगी बिना दवाइयों के खुल के जी पाओगे। इस वीडियो को एंड तक जरूर देखें क्योंकि हम आपको बताएंगे उन्होंने क्या फॉलो करके अपने बीपी को हमेशा हमेशा के लिए गुड बाय किया। पर जब तक आप अपने हाई ब्लड प्रेशर का रूट काउज़ नहीं समझेंगे, आप इसको कभी जड़ से नहीं मिटा पाएंगे। तो आइए समझते हैं इसका रूट काउज़ क्या है? क्या आपको आपका हार्ट हमेशा ब्लड पंप करते रहता है, इसको कभी छुट्टी नहीं मिलती। जो प्रेशर आपके हार्ट को पंप करने में लगाना पड़ता है, इस ब्लड को हर जगह भेजने के लिए इस प्रेशर को हम कहते हैं ब्लड प्रेशर। जब आपके हार्ट को ब्लड पंप करने के लिए ज़्यादा प्रेशर लगाना पड़ता है, तो उसको हम कहते हैं हाई ब यानी जब हमारा खून गाढ़ा हो जाता है, अगर हार्ट जोर नहीं लगाएगा, तो ये भारी ब्लड शरीर के कोने-कोने में कैसे पहुंचेगा? पर ये तो कोई पूछता ही नहीं कि ये ब्लड गंदा हुआ कैसे? जब हम प्रोसेस्ड पैकेट बंद खाना, पूरी पराठे, चाय, बिस्किट, नमकीन स्नैक्स, तेल से भरा खाना खाते हैं, वो उसको अब्जॉर्ब कर लेती है और आपके पूरे शरीर में भेजती है। अगर गंदगी लगी होगी, तो वो गंदगी ही अंदर लेगी और गंदगी ही पूरे शरीर में भेजेगी। फिर ये गंदगी, ये टॉक्सिन्स आपके ब्लड को गंदा करते हैं और भारी बनाते हैं और गाढ़ा बनाते हैं, जिसकी वजह से आपके बिचारे दिल हाई फूड प्रेशर है। आप समझिए, इस भारी ब्लड को पंप करना आपके हार्ट के लिए हेवी वेटलिफ्टिंग करने जैसा है। दिन में 24 घंटे, हफ्ते में सातों दिन हेवी वेटलिफ्टिंग करते रहता है आपका अंदर बैठा ये दिल। और जाहिर सी बात है कि जब हम किसी भी ऑर्गन से इतना काम करवाएंगे, तो वो हमें जल्दी कि जिन लोगों को बहुत लंबे समय तक बीपी का प्रॉब्लम रहती है, उनको आगे चलके हार्ट डिजीज़, स्ट्रोक और हार्ट फेलियर होता ही होता है। हम आपको डराना नहीं चाहते, हम तो ये चाहते हैं कि आपको और आपकी फैमिली को कभी ये दिन ना देखना पड़े। इस ब्लड प्रेशर को जड़ से ठीक करने का केवल एक ही अब आप शायद सोच रहे हो, लेकिन हमारा काम तो एक गोली सुबह और एक गोली शाम को लेकर चल रहा है, तो ये शरीर साफ़-साफ़ क्या करना? तो आइए एक बार ये भी समझ लें कि आपकी ये दवाई अच्छी है कि नहीं, लेनी चाहिए कि नहीं। देखिए, ये दवाई मशीन पे नंबर ठीक लाने के लिए तो बहुत अच्छी है, लेक एक भी जन नहीं मिलेगा, पूरी जिन्दगी खाते रहेंगे और बिमारी ठीक होना तो छोड़ो और बढ़ती ही जाएगी. सोचिए आप अपने कमरे में एक मीटिंग करने बैठे हैं, अचानक आपके रोते हुए बच्चे की चीखे आने ल जैसे ही आपकी मीटिंग खतम होती है, आप अगले रूम में जाते हैं और आपको बहुत बड़ा शौक लगता है। आप देखते हैं कि आपके बच्चे की आँखे रो रो कर सूज गई हैं और उसका दम घूट रहा हैं। क्योंकि जिसे आपने अ पर हमने उसे चुप कराने की जल्दी में दूसरी तरफ मुँह मोड़कर उसे सिर्फ दर्द दिया। कुछ इसी तरह हम अपने हार्ट को भी ट्रीट करते हैं। जब गंदगी से तंग आकर वो हाई ब्लड प्रेशर के आंसू रोता है, तो हम उसे दवाइयों के दबाव से चुप कराने की कोशिश करते हैं। कभी चुप नहीं होता, पूरी जिंदगी रोते को साफ नहीं करेंगे, तब तक प्रॉब्लम नहीं जाएगी। एक बात याद रखिए, दवाई मैनेजमेंट नहीं, सफाई मैनेजमेंट इस द की टू बिकमिंग बीपी फ्री। आपके पास मौका है अपने दिल को इस बोझ से फ्री करने का, उससे ये प्रेशर हटाने का, उसको खुल के धड़कने देने का। कदम उठाइए। इस वीडियो के अगले पार्ट म आपको ये वीडियो एंड तक देखनी बहुत जरूरी है। ऐसा नहीं अपने रिवर्सल प्लान के पहले दो पार्ट्स देख लिए और वीडियो बंद कर दी। अगर आप इनकम्पलीट इनफॉरमेशन लेके जाएंगे, तो वो आपके लिए डेंजरस भी हो सकती है। वीडियो एंड तक जरूर देखें और पूरे सल्यूशन को समझिए और आप रिजल्ट पहले हम आपको बताएंगे आपका मॉर्निंग रूटीन और फिर आपका फूड प्लान।
आइए शुरुआत करते हैं आपके मॉर्निंग रूटीन से। उठने के बाद फ्रेश हो जाएंगे। आप तुरंत नहाना चाहते हैं तो नहा भी सकते हैं। फिर हमारा फर्स्ट स्टेप है स्पिरिचुअल एक्टिविटी। अक्सर हमें बताया जाता है कि हाई ब्लड जब तक हम अपने दिन का कुछ समय भगवान में नहीं लगाएंगे, हमें हमेशा किसी न किसी चीज़ का स्ट्रेस लगा रहेगा। अपने दिन का कम से कम आधा घंटा किसी भी स्पिरिचुअल एक्टिविटी में लगाएं। अब जिस भी भगवान में विश्वास करते हैं, उनको याद करें। आप चांटिंग यानी जप कर सकते हैं, स्क्रिप्चरल स्टडी यान आरती या पूजा करना चाहें तो वो कर सकते हैं। भगवान का नाम यानि कीर्तन सुन सकते हैं। लेकिन इस आधे घंटे के लिए बाकी सब काम बंद करके भगवान के लिए निकालिए। उनको अपना gratitude धन्यवाद express कीजिए। आपको शायद लगे, अरे मेरे BP का इससे क्या connection? Connection है, बहुत बड़ा connection है। भगवान का नाम लेने से, उनकी सेवा करने स हमारा माइंड और सोल दोनों प्यूरिफाई होते हैं। जो हमारे माइंड में टॉक्सिन्स बैठे हैं, जो हमें कांस्टेंटली स्ट्रेस देते हैं, स्पिरिचुअल एक्टिविटी से वो मेंटल टॉक्सिन्स एलिमिनेट होते हैं। आप रोज 30 मिनट इसको दें। एक महीने बाद आप देखेंगे, बाहर सिचुएशन कुछ भी हो, आप अंदर से स्ट्रेस, गुस्सा, डर ये आपकी लाइफ से खुद एक्सिट कर जाएंगे। आप अपनी स्पिरिचुअल एक्टिविटी सुबह जितनी जल्दी करेंगे, ये उतनी अच्छे से हो पाएगी। अब हम अपने मन को तो प्योरिफाई कर लिया। अब बारी आती है आपकी बॉडी की। आपके मॉर्निंग रूटीन का दूसरा स्टेप है एक्सरसाइज। देखिए, अगर जब हम हफ्तों तक एक्सरसाइज नहीं करते, अंदर ऑर्गन्स धीरे-धीरे रॉट होने लगते हैं। मूवमेंट के बिना ये ऑर्गन्स अपना काम अच्छे से नहीं कर पाते। हमारे शरीर को किसी ना किसी प्रकार की एक्सरसाइज तो रोज चाहिए। बीपी में आप ब्रिस्क वॉकिंग कर सकते हैं, यानी बाहर आधे घंटे के लिए अच्छी स कुछ हफ्तों में उसको धीरे-धीरे बढ़ाइए, 10 तक लेके जाइए, फिर 15, फिर 20। एक्सरसाइज के वक्त कुछ चीजें याद रखनी हैं। पहली, बीपी की प्रॉब्लम में आपको शुरू-शुरू में कोई भी वायलेंट एक्सरसाइज नहीं करनी, जो आपकी एकदम से सांस फूला दे। सिंपल एक्सरसाइज से शुरुआत कीजिए और धीरे-ध शवासन ही वो टाइम है जब आपको एक्सरसाइज का बेनिफिट है, वो अब्सोर्ब होता है और आपकी ब्रेथ स्टेबलाइज होती है। तीसरी, जितना हो सके बाहर खुली हवा में एक्सरसाइज कीजिए ताकि आपको धूप और हवा का भी फायदा साथ में मिल पाए। बंद जिम में एक्सरसाइज करने से बहुत बढ़िया है अगर आप खुली हवा म व्हाइट कॉटन के कपड़े पहनके एक्सरसाइज कीजिए। पॉलिएस्टर, सिंथेटिक, नाइलॉन के कपड़े या फिर बहुत टाइट कपड़े ना पहनें। ये स्वेट को अब्सोर्ब नहीं कर पाते, उसको वापस अंदर भेज देते हैं। इसकी जगह व्हाइट कॉटन के कपड़े पहनिए। चलिए, अब एक्सरसाइज के बाद आपको शायद प्यास लगे, तो अब सफेद पेठा कुछ ऐसा दिखता है, इसको आशगार्ड भी कहते हैं। ये बाहर से ग्रीन, अंदर से व्हाइट होता है। इसका छिलका और बीज निकालना बहुत जरूरी है, वरना आपका जूस कड़वा टेस्ट करेगा। इनको निकालकर पेठे को कट कर लीजिए और जूस निकाल लीजिए। जूसर ना हो, तो मिक्सी में ब्लेंड करके छान घुट घुट सुबह पी लीजिए। इसमें कोई भी नमक, मिर्च, मसाला, नींबू कुछ नहीं डालना। ये सफेद पेठे का जूस हाई बीपी के लिए बहुत फायदेमंद है, क्योंकि ये एक बहुत डीटॉक्सिफाइंग जूस है। जैसे ही आपकी बॉडी में एंटर करता है, जो भी टॉक्सिन्स अंदर जमा हैं, उनको मैग्नेट की तरह अपने अं बहुत अच्छा है और याद रहे ब्लड साफ होगा तो वो हल्का होगा हार्ट को उसको पंप करने में कम प्रेशर लगाना होगा बीपी खुद बखुद ठीक हो जाएगा सफेद पेठा आपको किसी भी सब्जी वाले के पास मिल जाएगा नहीं मिले तो चिंता नहीं आप इसकी जगह नारियल पानी भी ले सकते हैं यदि आपको शुगर की प्रॉब्लम ना हो तो इंडिया से बाहर रहने वालों के लिए सेलरी जूस बहुत अच्छा है। तो ये हो गया आपका मॉर्निंग डीटॉक्स जूस। अब हम लेंगे आशीर्वाद सूर्यदेव का, जो अपनी गोल्डन रेस से हमारी सैकड़ों स्किन पोर्स के थ्रू अंदर जाके हमारे ब्लड को प्योरिफाई करती हैं। हमारा नेक्स्ट स्टेप है सनबेधिंग, यान कब करना है? आपको सन बेधिंग सिर्फ सुबह या शाम के टाइम करनी है, दोपहर की कड़कती धूप में नहीं करनी। सनराइज के करीब दो घंटे बाद कर सकते हैं। याद रहे, हमें सूर्य की गर्मी नहीं, रोशनी चाहिए। कितनी देर करनी है? करीब तीस मिनट। पंद्रह मिनट पूरी फ्रंट बॉडी को रोशनी दिखाएं और पंद्रह मिनट प पहनने ही है तो व्हाइट कॉटन के पतले कपड़े पहने, हो सकता है तो कोई कपड़े नहीं। अगर थोड़ी भी ज्यादा गर्मी है तो अपने हेड को एक व्हाइट कॉटन क्लॉथ से ढक ले। सनबेथिंग करते समय कोई सनस्क्रीन नहीं लगानी, और हाँ इसको हमेशा खुली हवा में करना है, कांच या ग्लास के थ्रू करने से उतना लाभ न सूर्य की रोशनी आपके लिए एक हीलिंग मेडिसिन है। जब सूर्य की रोशनी आपकी स्किन पर पड़ती है, आपकी स्किन थोड़ा गर्म महसूस करती है, उस समय ये रोशनी आपकी स्किन के अंदर जाकर आपके ब्लड वेसल्स के अंदर चल रहे खून तक पहुंचती है, और खून में से जो भी टॉक्सिन्स यानी गंदगी है, उसको हार्ट का काम ऑटोमैटिकली कम हो जाता है और ब्लड प्रेशर नॉर्मलाइज होने लगता है। सिर्फ ब्लड प्रेशर ही नहीं, सनबेधिंग के और बहुत सारे फायदे हैं। रोज सूर्य की रोशनी मिलने से हमारा मन खुश रहता है, स्ट्रेस गायब हो जाता है, ये अंदर बैठे जो भी वायरस या फंगस है उसको मारती है, इम्यून थोड़ा समय अपने शरीर को सूर्य की रोशनी जरूर दिखाएं। चलिए, अब अपने स्पिरिचुअल एक्टिविटी, एक्सरसाइज, डीटॉक्स, जूस, सनबेधिंग चारों कर लिए। अब आपके मॉर्निंग रूटीन के लास्ट दो स्टेप बाकी हैं। बढ़ते हैं हाइपरटेंशन रिवर्सल प्लान के नेक्स्ट स्टेप पे, और वो है ठंडी पट्टी, बहुत डीप है। क्या होती है ये ठंडी पट्टी? और हमें क्या करना है? एक व्हाइट कॉटन का कपड़ा लीजिए, उसको लंबी पट्टी में फोल्ड कीजिए, करीब 10 इंच चौड़ी। फिर इसको ठंडे पानी में भिगोकर निचोड़ लें। पानी उतना ही ठंडा होना चाहिए जितना आप आसानी से सहन कर सकें। पट्टी को पेट के चारों ओर आपकी नाभि इस पट्टी के बीच में होनी चाहिए। एक और छोटी पट्टी लें, करीब दो इंच चौड़ी, ठंडे पानी में भिगोकर अपने गले पे लपेट लें। एक और छोटी पट्टी लें, ठंडे पानी में भिगोकर इसे अपने माथे पे लपेट लें। याद रहे, तीनों पट्टियों को हमेशा साथ में लगाएं। इसको 30 से 40 मिनट तक लगा के बस जब ये लगी हो उस समय कुछ खाना या पीना नहीं है। आप पट्टी के ऊपर अपने कपड़े पहनकर अपना कोई भी दूसरा काम भी कर सकते हैं। जब आप अपना हाइपोटेंशियल रिवर्सल प्लान फॉलो करना शुरू करेंगे, पहले तीन महीने इसको रोज दो बार लगाना है, एक बार सुबह एक बार शाम, और फिर तीन महीने के बाद बहुत सर्दी के महीनों में पट्टी नहीं लगाने, उस समय इसको छोड़ दें, बाकी सारे स्टेप्स फॉलो करें। इस पट्टी से होता क्या है? पट्टी लगाने से आपके शरीर में दो टेम्परेचर मेंटेन होते हैं, जहाँ पट्टी लगी है, वो इससे बाकी शरीर से ज़्यादा ठंडे हो जाते हैं, और ये प्रकृति का नियम है कि तो पट्टी लगाने से आपका ब्लड सर्कुलेट करने लगता है। सर्कुलेट करने से जो भी ब्लड के अंदर गंदगी, टॉक्सिन्स फंसे हैं, वो भी सर्कुलेट होने लगते हैं और फिर बाहर निकलने लगते हैं। पहले जो खून एकदम गाढ़ा और गंदा हो गया था, वो साफ और हल्का होने लगता है। खून हल्का होगा, तो ऑटोम होगा ही होगा। इस प्रोसेस को आपके लिए इजी करने के लिए हमने पट्टी को अपने वेबसाइट पे भी अवेलेबल किया है। वहाँ से आप इसको डायरेक्टली आर्डर कर सकते हैं। एक और बात, ये वेट पैक सरदर्द के समय भी बहुत फायदेमंद है। जब भी आपको हेडेक हो, दवाई ना ले, तुरंत अपने माथे पे वेट पैक लगाएं। आ आपको पता है बीपी की प्रॉब्लम की शुरुआत होती कहाँ से है? आपकी इंटेस्टाइन से, आँतों में। कंस्टिपेशन इज़ द मदर ऑफ़ ऑल डिजीज़स, इवन हाई ब्लड प्रेशर। अगर आपको आज हाई ब्लड प्रेशर की प्रॉब्लम है, तो मतलब आँतों में गंदगी जमी है। तो हमें इस गंदगी की हार्ड कोटिंग को मेल्ट करना है। कैसे? ऐसा एनिमा ले जो कुछ ऐसा दिखता है। इसको पहले पानी से धो ले और फिर एनिमा पॉट में 300 से 500 ml साफ पानी भर ले। इसको लेने की बेस्ट जगा है आपका बात्रूम। पाइब की टिप पे थोड़ा तेल लगा लीजिये। एक हाथ से पाइप को पकड़े रखें ताकि वो बाहर ना गिरे। जल्द ही पानी एनिमा पॉट से खाली होकर आपकी इंटेस्टाइन्स में भर जाएगा। फिर पाइप को बाहर निकाल लें और पानी को जितना देर अंदर होल्ड कर सकते हैं उतनी देर होल्ड कीजिए, करीब पांच से सात मिनट। बीच में थोड़ी वॉक कर लें, अपने पेट की मसाज करत जब आपको बाथरूम जाने का प्रेशर हो तो बाथरूम जाइए और आप देखकर हैरान रह जाएंगे कि अंदर कितनी गंदगी, कितने टॉक्सिन्स जमे पड़े थे। इस पूरे प्रोसेस को करने में सिर्फ 10 मिनट लगते हैं। हो सकता है कि अभी आपको लगे कि इसमें तो दर्द होता होगा, but ऐसा बिल्कुल नहीं है। इसमें दूर-दूर अपने साथ अपने अंदर लेके पूरा दिन घूमते रहते हैं। हो सकता है शुरू में आपको ये थोड़ा मुश्किल लगे, लेकिन आप हमारी बात मानिए। इसको बस एक बार कीजिए। ज़्यादा सोचिए मत क्या होगा, कैसे होगा? बस एक बार ट्राई कीजिए। फिर आपको ये बिल्कुल नॉर्मल लगने लगेगा। एनिमा में कुछ नहीं मिल अगर नैचुरल मोशन नहीं आता तो एनिमा जरूर लें। एनिमा कब तक लेना है? ये बहुत इम्पोर्टेंट पॉइंट है। अपना हाइपरटेंशन रिवर्सल प्लान शुरू करने के तीन हफ्ते तक ये रोज सुबह लेना है। तीन हफ्तों के बाद रोज नहीं लेना, सिर्फ हफ्ते में एक बार लेना है, या फिर जरूरत पड़ने पर लेना ह मैं ये ना करूँ, बाकी चीजें कर लूँ, तो चलेगा क्या? देखिए, अगर आपको सच में हाई ब्लड प्रेशर को रिवर्स करना है, तो आप कोई चीज स्किप मत कीजिए। एनिमा के बिना आपकी हीलिंग इनकम्पलीट है। आपके लिए इजी करने के लिए हमने एनिमा पॉड को भी अपनी वेबसाइट पे अवेलेबल किया है सात्विकमूवमेंट तो ये हो गया आपका सिक्स स्टेप मॉर्निंग रूटीन कंप्लीट। सुबह फ्रेश होके पहले अपने आप को स्पिरिचुअली चार्ज करेंगे, फिर एक्सरसाइज करके फिजिकली चार्ज करेंगे, फिर लेंगे अपना डीटॉक्स चूस और फिर सूर्यदेव का आशीर्वाद और फिर जो भी गंदगी अंदर जमी पड़ी है उसको वेट पैक और एनिमा अब चिंता मत कीजिए। जैसे-जैसे हम आगे बढ़ेंगे, हम आपको समझाएंगे कि इन सब स्टेप्स को प्रैक्टिकल कैसे बनाना है। अभी आप बस खुले माइंड से सब कुछ अच्छे से समझिए। वैसे भी इन सिक्स में से एनिमा और वेट पैक तो आपको बस कुछ ही टाइम तक करना है। अल्टीमेटली तो बस चार स्टेप्स बचेंगे, जो कि देखिए, दो तरह के खाने होते हैं। Blood thickening food यानी ऐसा खाना जो आपके खून को गाढ़ा बनाता है, और दूसरी तरफ blood cleansing food यानी ऐसा खाना जो उसको साफ करके पतला रखता है। Blood thickening food की पहली category है dead food यानी वो जो packet bottle, डब्बे, tin, carton में बंद आता है। ये सब चीजें हमारे शरीर में गोंद की तरह चिपक जाती हैं और फिर अंदर बैठी-बैठी सड़ती हैं और गंदगी क्रिएट करके ब्लड को मोटा करती हैं। इसमें कोई जान नहीं है, ये डेड फूड है। जो चीज खुद डेड है, वो आपको लाइफ कैसे दे सकती है? दूसरी तरफ है लिविंग फूड, यानी वो जिसमें जान ह जो हमें सीधा-सीधा माँ प्रकृति से मिलता है, ये शरीर के अंदर जमी गंदगी को निकालने में मदद करते हैं। डेड फूड को आईडेंटिफाई करने का एक सिंपल फॉर्मूला है, जिस खाने का टीवी पे कमर्शियल आता है, समझ जाना वो फूड नहीं, प्रोडक्ट है। खून गंदा करने वाले खाने की दूसरी कैटेगरी है रिफ तेल और तेल से बनी चीजें, मैदा, ये भी हमारे हाट पे बहुत जोर डालती हैं ये सबी चीजें हमें माँ प्रकृती से सीधा सीधा नहीं मिलती इसकी जगा आपको ऐसा खाना खाना है जो होलसम है यानि ब्राउन राइस, चोकर सहित आठा ब्लड थिकनिंग फूड की तीसरी कैटेगरी है एनिमल बेस्ड फूड, यानी नॉनवेज, मछली, अंडा, दूध और दूध से बने प्रोडक्ट्स। इन सभी चीजों में बहुत ज़्यादा कलेस्ट्रॉल होता है, जो कि हमारी आर्टरीज़ की दीवारों पे जाके चिपक जाता है। आर्टरीज़ में जगह कम हो जाती है, और इसकी वजह से फिर इसकी जगह प्लांट बेस्ड फूड खाएं, वो जो पेड़ पौधों से आता हो। नहीं, ये बिल्कुल बोरिंग नहीं होने वाला, क्योंकि हमने आपके लिए सभी चीजों के सब्सटिट्यूट्स बनाए हैं, जिसकी और डिटेल आपको हमारी सात्विक फूड बुक में मिल जाएगी। डेरी मिल्क की जगह कोकोनट मिल्क ले सकते हैं, डेरी चीज सभी के प्लांट बेस्ड वर्जन्स बनाने सिखाए हैं। ब्लड थिकनिंग फूड की आखरी कैटेगरी है वाटर पूर फूड, यानी ऐसा खाना जिसमें रस्य ना हो, जैसे कि ढेर सारा अनाज, दाल, राजमा, छोला, मेवे। इसकी जगह वाटर रिच फूड ले, वो जिसमें पानी भरपूर मात्रा में हो, जैसे कि जूसेज, फल और सब्ज लेकिन अगर मैं आपसे पूछूं बताओ क्या-क्या खाते हो, तो आप बोलेंगे सुबह उठके थोड़ी चाय लेते हैं, ब्रेकफास्ट में कभी ब्रेड तो कभी पोहा, लंच में दो रोटी के साथ दाल और डिनर में कभी चावल तो कभी रोटी। आप ही बताइए ऐसी डाइट में ज्यादातर खाना एल्किलाइन है या एसिडिक? पूरी तरह एसिड हमारी डाइट 80% अल्किलाइन यानि वाटर रिच होनी चाहिए और सिर्फ 20% एसिडिक हो सकती है ये कैसे करना है हम आपको थोड़ी देर में डीटेल में बताएंगे अभी इतना समझ लीजिये कि जो वाटर रिच फूड होता है इसका फाइबर आ ये तो बताओ हम खाएं क्या? आइए डिस्कस करते हैं आपका नया फूड प्लान। सुबह उठके सबसे पहले किसी भी सब्जी का जूस ले सकते हैं सफेद पेठे का रस, नारियल पानी या कोई भी सब्जी का जूस। जूस के दो घंटे बाद ही ब्रेकफास्ट ले। ब्रेकफास्ट में एक प्लेट भर के अपने फेवरेट फ्रूट्स खाइए। सबसे अच्छा ह कोई बात नहीं, हमेशा वो फल खाइए जो आपके देश में उगते हैं और मौसम के हैं। Always eat seasonal and regional. Seasonal फल हमेशा सस्ते भी होते हैं। Lunch में आप अपना grain meal ले सकते हैं, लेकिन इसमें अनाज कम होना चाहिए और सब्जी ज़्यादा। हमें खास तरह की चपाती suggest करते हैं। ये पूरी तरह गेहूँ की जगह आधी गेहूँ और आधी सब्जी की आप किसी भी सब्जी की चपाती बना सकते हैं खीरा, चुकुंदर, पालक, घीया, गाजर चपाती के साथ आती है सब्जी अब जो हम सब्जी रेकमेंड करते हैं वो भी थोड़ी अलग है तेल की बजाए हम इसमें नारियल घिसके डालते हैं यदि आप एक चपाती खाते हैं तो दो कटोरी सब्जी खाएं, यदि दो चपाती खाते हैं तो चार कटोरी सब्जी खाएं। मतलब सब्जी ज़्यादा खाएं और अनाज कम। एक और बात, एक बाल में एक ही अनाज खाएं, one grain per meal। ऐसा नहीं दो-दो तीन-तीन अनाज मिलाके खा रहे हैं। दाल रोटी की जगह सब्जी रोटी खाएं, दाल चावल मल्टीग्रेन आटा बिल्कुल बेकार प्रकृति ने हमें नहीं दिया राजमा चना छोला बिल्कुल नहीं खाना कम से कम तब तक जब तक आप पूरी तरह ठीक नहीं हो जाते आप डिनर में सूप या सैलेड ले सकते हैं चाहे तो लंच और डिनर को स्विच भी कर सकते हैं आपको शायद लगे ये तो अभी जो मैं कर रहा हूँ उससे हाँ जी अलग तो होगा ही यदि आप वही चीजें करते रहेंगे जो आप पहले करते थे तो आपका हाई ब्लड प्रेशर रिवर्स कैसे होगा लेकिन चिंता ना करें आपको इसमें बहुत जल्द बहुत मजा आने लगेगा हम में से कुछ लोगों को लगता है कि हमारा बीपी स्ट्रेस की वजह से है एक बात याद रखिएगा जैसा अन वैसा मन जब सारे सातवें गुण भी आने लगेंगे। Happiness, compassion, love, bliss, self-control, fearlessness, purity। दूसरी तरफ जो खाना बहुत मिर्च मसालों से भरा होता है, पासी, सड़ा हुआ खाना, non-veg meat, अंडे, चाय, कॉफ़ी, ये सब राजसिक और तामसिक कैटेगरी में आते हैं और हमारे अंदर ego, anxiety, गुस्सा, impatience डर, डिप्रेशन, आलस्य और टायर्डनेस लाते हैं। अगर आप राजसिक और तामसिक खाने के रास्ते पे चलते रहोगे, तो ये समझ लीजिए कि हार्ट डिजीज़, स्ट्रोक, हार्ट अटैक्स बहुत दूर नहीं हैं। इस खाने का नेचर ही ये है बीमारी पैदा करना। हमारा काम है आपके सामने सच्चाई लाना। चॉइस पूरी तरह आ तो एक और बहुत जरूरी बात ध्यान में रखेंगे और वो है 16 आवर फास्टिंग यानि 16 घंटे उपवास जब हम डॉक्टर के पास जाते हैं तो वो अक्सर हमें बलड थिनिंग मेडिसिन्स दे देते हैं लेकिन आपको पते है प्रकृती ने मदर नेचर ने हमें एक नैचुरल बलड थिनिंग का तरीका दिया है ये तरीका है उपवास यानी 16 घंटे उपवास। 16 घंटे उपवास कैसे करना है? Simply अगर आप अपना dinner शाम को 7 बजे खाते हैं, तो अपना next solid meal अगले दिन सुबह 11 बजे ही लीजिए। 6 बजे खाते हैं, तो 10 बजे ले लीजिए। Basically हर रात 16 घंटे अपनी body को break देना है। जितना मुश्किल अभी लग रहा है, उतना है नहीं, क्योंकि 16 में से ज़्य 16 घंटे उपास क्यों करना है? क्योंकि आपकी बॉडी एक बार में एक ही काम अच्छे से कर पाती है डाइजेशन यानी खाने को पचाने का काम या क्लीनिंग यानी ब्लड में से वेस्ट को बाहर निकालने का काम जब आप पूरा दिन खाते ही रहते हैं तो आपकी बॉडी दिन में 24 घंटे डाइजेशन में ही बिजी रहती है उसको सफाई क रेक देते हैं तो आपका शरीर डाइजेशन को छोड़के क्लीनिंग पे लग पाता है। हर दिन 16 घंटे का उपवास करने से सालों पुरानी अंदरजमी गंदगी बाहर खुद बखुद निकलने लगती है, ब्लड साफ होने लगता है, जिसकी वजह से वो हल्का होने लगता है, हार्ट को इसको पंप करने में प्रेशर कम लगाना पड़ता है, बीपी र साहिर सी बात है कि आपके मन में अभी बहुत सारे प्रश्न आ रहे होंगे। चलिए उनको भी आंसर करते हैं।
पहला प्रश्न, मेरे बीपी को रिवर्स होने में कितना टाइम लगेगा? देखिए, अगर आप मॉर्निंग रूटीन और फ़ूड प्लान को रिलिजियसली फॉलो करेंगे, तो हम अपने अनुभव से आपको बता सकते हैं कि लगभग 21 में रीडिंग्स नॉर्मल आनी शुरू हो जाती है, लेकिन पूरी तरह जड़ से रिवर्स होने में तीन महीने लग जाते हैं। हो सकता है कि आप में से कुछ लोगों को इससे थोड़ा कम समय लगे, तो कुछ लोगों को थोड़ा ज्यादा। डिपेंड करता है बीमारी कितनी पुरानी है, इसकी फिक्र ना करें। एक बहुत इम्पोर्टें वॉमिटिंग, डायरिया, कफ आ जाए। अगर ऐसा होता है, तो समझ लीजिएगा कि आपने जो रास्ता चुना है, वो काम कर रहा है। कोल्ड, कफ, फीवर, डायरिया, वॉमिटिंग इन सबको डीटॉक सिम्टम्स कहते हैं। ये आपकी बॉडी से उस गंदगी को निकालने के तरीके हैं। घबराना नहीं, इनको सेलिब्रेट करना है। ये नह उस समय एक दो दिन का फुल फास्टिंग कर ले, पूरे दिन लिक्विड्स लेते रहे और सॉलिड फूड को छोड़ दे। उस समय ठंडी पट्टी और एनीमा तो करना ही है ताकि बॉडी और जल्दी साफ हो पाए। दूसरा क्वेश्चन मैंने तो सुना है कि हाई बीपी हेरेडिटरी प्रॉब्लम है, फिर कैसे ठीक होगी? देखिए हम ये मानते ह Disease is not hereditary, our kitchen is hereditary. साहिर सी बात है कि अगर एक बच्चा वही खाना खाएगा जो उसके माता पिता खाते हैं, तो उसको बिमारिया भी वही होगी. जिन लोगों के आपने healing stories सुनी, उनकी family में BP के बावजूद भी उन्होंने अपना BP के problems को solve किया, reverse किया. इसका क्या मतलब है? हमारा BP हमारे हाथ में है, हमारे genes में नहीं. तीसरा क्वेश्चन हम दवाइयाँ कैसे छोड़े? देखिए जब आप ये लाइफस्टाइल फॉलो करेंगे तो आपकी बीपी की रीडिंग्स अपने आप नॉर्मल आने लगेंगी और दवाइयों की जरूरत ही खत्म हो जाएगी क्योंकि जो काम दवाइयाँ आर्टिफिशियली कर रही थी वो आपके फूड और लाइफस्टाइल ने नैचुरली कर दिया। तो आप उनकी सलाह लेकर ही दवाई कम करें। हम यकीन से कह सकते हैं कि अगर आपने ये प्लान रिलिजियसली फॉलो किया, तो आप मेडिसिन फ्री और डिजीज़ फ्री लाइफ जरूर जिएंगे। चौथा क्वेश्चन: जब मैं कभी बाहर जाता हूँ या ट्रेवल करता हूँ, तो कैसे फॉलो करूँ? जब आप बाहर जाते हैं, ट्रेवल करते स्पिरिचुअल प्रैक्टिस तो ऐसी चीज़ है जो आप कभी भी कर सकते हो। अगर आप 30 मिनट्स नहीं निकाल सकते, तो 5-10 मिनट निकालकर भगवान को याद करें या वेदों का अध्ययन करें। एक्सरसाइज़ इसका तरीका तो आप ढूंढ ही लोगे। अगर सनलाइट में नहीं हो सकता, कोई बात नहीं, कम से कम रूम के अंदर कर लो। स तीन हफ्ते रोज लेना है, उसके बाद तो सिर्फ जरूरत पड़ने पर ही लेना है। उन तीन हफ्तों में भी यदि आप ट्रेवल कर रहे हैं, तो अपने साथ ले जाइए। ठंडी पट्टी भी आपको सिर्फ शुरू के तीन महीने रोज करनी है, इसके साथ भी आप आराम से ट्रेवल कर सकते हैं। अब आती है बात फूड प्लान की। अगर आप बाकी दिन फल, सबजीयों और जूसिस पे रहिए और 16 आफाशिंग तो ऐसी चीज है जो आप दुनिया में किसी भी कोने में कर सकते हैं अब और इंतजार नहीं आज अपने दिल पे हाथ रखके अपने आप से प्रॉमिस करिए कि आप उसको और तकलीफ नहीं देंगे इस वीडियो को उन सभी के साथ शेयर करें जो आज इस बिमारी से गुजर रहे हैं










