How I Conceived Naturally & Healed 14 Years of PCOD In 1 Month

Pragya spent 14 years without periods due to PCOD, despite hormonal treatments. She tried a 21-day Satvik lifestyle program with 16-hour fasting and detox drinks. Her periods returned within a month, and she conceived naturally, giving birth to her son Ram.
Chapters
चौदह वर्ष मैंने पीसीयूडी से संघर्ष किया और कोई मार्ग नहीं दिखाई दे रहा था माँ बनना असंभव लगने लगा था ऐसे लगा था कि मेरा पूरा जीवन व्यर्थ है इसलिए नहीं कि हाँ माँ बनना ही सब कुछ है पर मेरे लिए माँ बनना बहुत कुछ था फिर जो 21 दिन की जीवन शैली मैंने की आत्मिक मूवमेंट ने जो बताई, 21 दिन के तुरंत बाद मुझे प्राकृतिक रूप से पीरियड्स आए और मेरा आत्मविश्वास भी जगने लगा कि अब मैं माँ बन सकती हूँ। तो ये मतलब म्योर मिराकल, it was मतलब मेरे लिए इतना बड़ा चमत्कार था। मेरा नाम प्रज्ञा है। मैं घर संभालती हूँ, खाना बनाती हूँ, कुछ धर्म संस्थाओं से जुड़ी हुई हूँ। तो सबसे पहली बार मुझे पीरियड आया। सातवीं कक्षा में और 2 वर्ष तक सब ठीक था। फिर नौवीं कक्षा से मेरे पीरियड आने बंद हो गए। तब मेरी माँ मुझे डॉक्टर के पास लेके गई और उन्होंने तीन मास की दवाई दे दी हार्मोन्स बैलेंस करने की और बोला कि ये लेने के पश्चात पीरियड्स नॉर्मल आ जाएगा पर ऐसा हुआ नहीं विवाह के पश्चात भी मतलब अनटाइमली पीरियड्स तीन मास हो गए नहीं आए पीरियड्स आए तो एक मास तक चल रहा है और ये समस मतलब शारीरिक रूप से जो करती थी वो करती थी लेकिन मानसिक रूप से मैं बहुत इस चीज को लेके चिंतित रहती थी और डिप्रेशन डिप्रेशन के मोमेंट्स आते रहते थे और मुझे पता था कि क्यों आ रहे हैं क्योंकि शरीर में कुछ है जो सही नहीं है सबसे ज़्यादा मुझे लगता है वही मेरे लिए वो श्रण था जब म बनने के लिए प्रयास करें लेकिन शरीर ही नहीं तैयार लग रहा है और उस समय मुझे याद है मुझे ये ऐसे लगा था कि मेरा पूरा जीवन व्यर्थ है इसलिए नहीं कि हाँ माँ बनना ही सब कुछ है पर मेरे लिए माँ बनना बहुत कुछ था तीन चार डॉक्टर से हमने ऑनलाइन कंसल्ट किया उनकी दवाई नहीं काम कर रही थी पीरियड अंदर में मैंने मान लिया कि ये संभव नहीं है और ये जिद मुझे ये हट मुझे छोड़ देनी चाहिए मैं अपने पति के पास गई और मैंने बोला कि यार मुझे लगा था कि हमारा हमारा जीवन आगे बढ़ेगा हम माता-पिता बनेंगे तो पर मुझे नहीं लगता कि मुझसे हो पाएगा मुझे नहीं लगता मेरा शरीर मेरा साथ देगा उसमें तो माता पिता बनना शायद हमारी भाग्य में नहीं है और मेरे पति ने बस मुझे गले लगा लिया और बोला कि ठीक है जो है हमारे भाग्य में वो है कोई बात नहीं उसने भी स्वीकार ही कर लिया एक तरह से पर अपने मन के भीतर में मैं उसको नहीं स्वीकार कर पा रही थी मुझे लगा ये कैसे हो सकता तो मैं कभी वो अनुभव नहीं करूँगी क्या गर्भवती होना मैं अपने जो ट्रेट्स हैं वो या अपने पति के जो ट्रेट्स हैं वो हमारे बालक में नहीं अनुभव करूँगी क्या और ये सोच के अंदर ही अंदर मेरा मन बहुत मेको का चोटता था और बहुत रोना आता था कि क्या मतलब इतना करियर सब कुछ बना के और इतना सब कुछ यहाँ पे जीवन रुक सा गया है। बस उसके कुछ ही महीनों के पश्चात हम हिमाचल जाने वाले थे, हमारी दो मास की ट्रिप प्लान थी, और छह महीने से मुझे पीरियड्स नहीं आया था, और 300 सीढ़ी ऊपर चढ़के मतलब ट्रैक था, वहाँ पे हमने अपना एयरबीएनबी बुक किया था, और छह मास के बाद मुझे पीरियड्स आए, वो पीर तो continuously मुझे तीस दिन तक मुझे periods थे और मुझे इतनी उसमें मैं इतनी ज़्यादा निर्बल हो गई कि मैं बस वो दृश्य देखती थी और मैं सोचती थी कि मेरे जैसा अभाग्यपूर्ण कोई होगा नहीं तो बस उस समय एक दिन मीठा खाने का मन हुआ मैंने सोचा ठीक है कुछ बनाते हैं और मैंने सोचा बिना दूध के बनाते क्यो अब बिना दूध के कैसे बनाने हैं? ऐसे कर करके मैं सात्विक मूवमेंट के वो कोकोनट मिल्क वाले चलचित्र वीडियो पे आई और जब मैंने वो देखा तो मैं रुकी नहीं। मैंने ऐसा नहीं कि एक चलचित्र देखा और वहाँ पे मैं रुक गई। मैं देखती गई। दोपहर से मैंने देखना आरंभ किया और रात तक मैंने ल और मेरा भाग्य अच्छा था। अगले ही दिन हेल्थ ट्रांसफॉर्मेशन वर्कशॉप हो रही थी, मेरी समझ से 14 अगस्त को। तो मैंने उसके लिए रजिस्टर किया और क्योंकि मैंने इतना लेट रजिस्टर किया था, तो मुझे कोई रिप्लाई नहीं आया। वर्कशॉप शुरू होने के 10 मिनट पहले शायद मुझे रिप्लाई आया और फिर मत आशा के आंसू थे। लगा कि हाँ, शायद संभव है अपने शरीर को प्राकृतिक रूप से ठीक करके माँ बनने का प्रयास करना शायद संभव है। मेरे को ऐसे लगा कि ये जो बोल रहे हैं ना, every word of it makes complete sense। तो उसके बाद सबसे पहले मैंने वो 16 घंटे की intermittent fasting से आरंभ किया उसी दिन से और वो गीली पट्टी लगानी आरंभ कर दी। उसके बाद मैंने लिस्ट बनाई, 21 दिन का अपने आप को स्वयं चुनौती दे दी कि मैं ये करके देखूँगी कि क्या होता है। मुझे एक सप्ताह के बाद मुझे याद है सिर्फ एक सप्ताह मैंने ये फॉलो किया और फिर मुझे एक पीरियड हुआ, it was very clear कि वो डिटॉक्स पीरियड है। I could naturally feel कि मेरी जो मेरे शरीर में से कुछ है खराब जो निकल रहा है आप टॉक्सिन्स कहलो या जो भी ठीक एक महीने बाद मेरा पीरियड आया और फिर रेगुलर होने लगे मुझे पीरियड मतलब चौदह साल से जो समस्या थी मुझे वो ऐसे लगा जैसे ऐसे ही गायब हो गई अब उस जिसने इतना इतने कष्ट देख लिए थे हर थोड़े दिन में जैसे तो मेरे लिए तो चमत्कार से कम नहीं था। फिर मैंने फरवरी में मुझे कुछ संकेत मिले, मैंने अपने पति को कहा कि मुझे ना प्रेगनेंसी टेस्ट लेना है, तो जरा किट खरीद के ला दो। तो वो लेके आए, मैंने टेस्ट लिया और एक बार लिया पॉजिटिव, मुझे विश्वास ही नहीं हुआ। मैंने कहा अरे ऐसे कैसे हो सकत संन्यता की कोई सीमा नहीं थी। वो बहुत बड़ा उत्सव था, क्योंकि मेरे पति ने भी नहीं सोचा था। और नहीं लग रहा है अगस्त में मैंने मतलब एक वर्कशॉप की है, सितंबर में मेरे पहले पीरियड आ रहे हैं, और यहाँ पे फेब्रुअरी में हम देख रहे हैं कि मैं प्रेग्नेंट हूँ, और वो भी फिर डॉक्टर के पास तो ये मतलब मियर मिराकल, it was मतलब मेरे लिए इतना बड़ा चमत्कार था कि ऐसा हो सकता है। मतलब मेरा तो मन था उसी समय मैं साथिक मूवमेंट के पास गुड़गांव में पहुंच जाऊं और बोलूं कि यार आपको पता है आपकी बहुत सारी कथाएं कहानियां मैंने देखी हैं लोगों की लाइफ ट्रांसफॉर्मेशन किया अपना सबको ये बताओ यार ऐसा भी हो सकता है अभी राम मेरा पुत्र एक वर्ष का होने वाला है और अब भी मुझे विश्वास नहीं होता कि मैं माँ बन गई उसकी भी भोजन में सात्विक एलिमेंट्स रहते हैं और मुझे बहुत आनन्द आता है उसकी मा बनने में और सच में विश्वास नहीं होता है कि दो साल पहले ही एक वो भी समय था जब लग रहा था कि मातरित्व ही प्राकृतिक रूप से असंभव है और आज हर दिन इतना प्यारा लगता है अगर आप भी वो वीडियोज देखना चाहते हैं जो प्रज्ञा जी ने देखी तो यहाँ क्लिक करें और अगर आप वो वर्कशॉप्स अटेंड करना चाहते हैं जिनको अटेंड करके प्रज्ञा जी ने खुद की जर्नी स्टार्ट करी तो यहाँ क्लिक करें।










