How I Healed My Eyesight Naturally (No Surgery, No Lasik)

In this Hindi‑language YouTube video, Samaira Banga presents a five‑step natural program for reducing or eliminating the need for glasses. She begins by describing the daily frustration of searching for spectacles and promises a plan that restored her own vision within weeks. The program consists of: (1) a six‑point eye acupressure massage around the orbital bone, performed with medium pressure and careful finger placement; (2) a 10‑minute eye‑exercise routine that includes horizontal, vertical, diagonal, clockwise, anti‑clockwise, Z‑shaped, M‑shaped, push‑up, and palming movements, each repeated a set number of times; (3) regular exposure to soft natural daylight—morning or evening sun‑gazing for 1‑5 minutes, gradually increasing, while avoiding midday sun, and an alternative candle‑gazing (trataka) practice; (4) a gradual reduction in spectacle dependence by wearing glasses only when essential and progressively lowering prescription strength; and (5) blue‑light mitigation strategies such as night‑mode on devices, setting a screen‑off cutoff (e.g., 9 pm), and sleeping in complete darkness. Throughout, she cites Chinese medicine origins, a Sydney study linking outdoor daylight to reduced myopia in children, and community anecdotes of success. Safety cautions are emphasized (short nails, avoid excessive pressure, stop if pain, do not gaze at bright sun). The video concludes with a call to action to follow the steps and a promise to return with more content.
Chapters
क्या आपका भी हर दिन चश्मे ढूंढते-ढूंढते शुरू होता है? ऐसा लगता है कि ये चश्मा आपका कॉन्फिडेंस भी कम कर देता है। अगर हाँ, तो इस वीडियो में मैं आपको बताऊँगा एक फाइव स्टेप प्लान टू गेट रिड ऑफ़ योर स्पेक्टैकल्स नैचुरली। अगर आपने ये प्लान रोज़ फॉलो किया, बिना फिर जब मैंने ये नैचुरल स्टेप्स अपनाएं, कुछ ही हफ्तों में मेरी आँखों की शक्ति वापस आ गई और चश्मे छूट गए। जब मैंने ये स्टेप्स आगे शेयर किए, तो हजारों लोगों ने बताया कि इनको फॉलो करके उनका भी नंबर कम हुआ। इस प्लान का पहला स्टेप है आई मसाज। इसमें हम आईज़ के आसपास के छह एक्य जो पहले ब्लॉक थे, वो ओपन हो जाते हैं। एस रिजल्ट आँखों के अराउंड ब्लड सर्कुलेशन और प्राण शक्ति, यानी लाइफ एनर्जी, दोनों बढ़ जाते हैं, जिसके कारण आपकी आँखें हील होने लगती हैं। इसको करने के लिए सबसे पहले एक कंफर्टेबल पोजीशन में बैठ जाइए। बैक सीधी रखिए। चश्मे या कांटेक इसी बोन पे छह एक्यूप्रेशर पॉइंट्स होते हैं, जिन्हें हम एक-एक करके एक्टिवेट करेंगे। पहला पॉइंट है जहाँ से आपकी आईब्रो शुरू होती है, यहाँ फिंगर रखिए और छोटे-छोटे सर्कुलर मोशंस में मसाज कीजिए। टेन इनवर्ड और टेन आउटवर्ड सर्कल्स। प्रेशर मीडियम होना चाहिए, ना बहुत हल्का ना बहुत ध्यान रहे, आपको अपनी ऑर्बिट बोन फील होनी चाहिए। ना उसके अंदर दबाएँ, ना बाहर। आपको बोन के एकदम रिज पर, यानी एज पर ही रहना है। अब तीसरा पॉइंट है जहाँ आईब्रो एंड होती है। यहाँ भी जेंटल सर्कुलर मसाज कीजिए। तो ये थे पहले थ्री पॉइंट्स। अब पॉइंट फोर, फाइव और सिक्स डायरेक्ट पॉइंट्स वन, टू और थ्री के नीचे हैं। इनको भी एकदम सेम तरीके से मसाज करेंगे। जब मसाज करें तो इन तीन बातों का ध्यान जरूर रखें। पहली और बहुत जरूरी, आपके नेल्स थोड़े भी लंबे नहीं होने चाहिए, वरना चोट भी लग सकती है। नेल्स अच्छे से कट होने चाहिए। याद रखिए, आंखें हमारे बॉड दूसरी मसाज करते समय बाकी सारी फिंगर्स लूज नहीं होनी चाहिए, उन्हें प्रॉपरली बंद रखिए। इससे आपकी पूरी एनर्जी इंडेक्स फिंगर में गैधर होती है। तीसरी अगर आपको आई प्रॉब्लम है, तो मसाज करते वक्त हल्का सा हेड में पेन महसूस हो सकता है। चिंता मत कीजिए, ये नॉर्मल है। ये छह एक्यूप्र और कुछ ही हफ्तों में आप नोटिस करेंगे कि आपको हर चीज़ पहले से क्लियर नहीं दिखने लगेगी। ये टेक्निक चाइनीज़ मेडिसिन से ओरिजिनेट हुई है और इसका मेन फोकस है आँखों में ची एनर्जी, यानी प्राण शक्ति को बढ़ाना। अरे हाँ, मेडिसिन से याद आया। आपको पता है आँखों के लिए दुनिया की बेस्ट म कभी खत्म ही नहीं होती। गेस्ट कर सकते हैं क्या है? मैं आपको बताऊंगा आपके आई केयर प्लान के थर्ड स्टेप में। अभी बढ़ते हैं अपने प्लान के सेकंड स्टेप पे, जो है आई एक्सरसाइजेस। आप इन आई एक्सरसाइजेस को तुरंत आई मसाज के बाद कर सकते हैं। इनको करने में लगते हैं लगभग 10 मिनट और ये टोटल बच्चों का तो नंबर एक्चुअली और भी जल्दी कम हो जाता है। अब सवाल ये है, ये एक्सरसाइजेस काम करते कैसे हैं? देखिए, जैसे हम बॉडी की एक्सरसाइज करके अपनी मसल्स को स्ट्रांग बनाते हैं, वैसे ही ये आँखों की एक्सरसाइज करके हम अपनी आँखों की मसल्स को स्ट्रांग बनाते हैं, जिससे विज़न न आँखों को जितना ऊपर ले जा सकते हो उतना ऊपर ले जाओ और फिर जितना नीचे ले जा सकते हो उतना नीचे ले जाओ। ये आपको 10 बार करना है। फिर है लेफ्ट एंड राइट मूवमेंट, कुछ इस तरह। कोशिश करें कि आईबॉल आँखों के कोने तक जाए। इसको भी 10 बार करें। ध्यान रहे, इन सब एक्सरसाइजेस में आपकी अब करेंगे डायगनल मूवमेंट। आँखों को टॉप राइट से बॉटम लेफ्ट लेके जाओ, 10 बार। और फिर सेम डायगनल मूवमेंट ओपोजिट डायरेक्शन में करेंगे, टॉप लेफ्ट से बॉटम राइट। फिर आती है क्लॉकवाइज मूवमेंट। आँखों को पांच बार क्लॉकवाइज रोटेट करें। और फिर एंटी क्लॉकवाइज मूवमेंट, कु Z बनाना है और फिर उसे reverse करना है। सभी exercises को 10 बार करना है। और फिर M shape movement, इसमें basically आपको अपनी आँखों से M shape बनाना है। Next exercise है eye push-ups। डरिए मत, ये body push-ups की तरह मुश्किल नहीं है। इस exercise के लिए पहले अपने thumb को नाक के पास अपने दोनों आँखों के बीच में रखें और अपने नेल के ऊपरी हिस्से को देखें। फिर धीरे-धीरे बिना थम से फोकस हटाएं, अपने हाथ को स्ट्रेच करें और थम को दूर ले जाएं। जैसे ही अंगूठा एकदम दूर चले जाए, तब पूरा फोकस दूर डिस्टेंस पर ले जाएं। फिर वापस अंगूठे के टिप पर फोकस करें और जल्दी-जल्दी अपनी आंखें ब्लिंक करनी हैं, जितना फास्ट हो सके, और फिर आपको थोड़ा प्रेशर लगाकर ब्लिंक करनी है, 10 बार। आखिर में करेंगे पामिंग, अपने हाथों को एक दूसरे के साथ रब करके थोड़ी हीट जेनरेट कीजिए, और आंखों पर रखकर उन्हें आराम दीजिए। याद रहे, आपको अपना हाथ सिर्फ आंखो जैसे जिम के पहले दिन बॉडी में पेन होता है, वैसे ही शुरू-शुरू में आँखों में भी थोड़ा स्ट्रेन फील पुनः नैचुरल है। बस ध्यान रहे, अगर ज़्यादा पेन हो या ज़्यादा डिसकंफर्ट हो, तो ये एक्सरसाइजेस को रोककर अपनी बॉडी की सुनें। आप इन आई एक्सरसाइजेस को कहीं भी कर सकते हैं, फॉलो अलोंग वीडियो बनाई है। सिंपली YouTube पर टाइप कीजिए आई एक्सरसाइजेस सात्विक मूवमेंट। उस वीडियो को फोन पे चला दीजिए और आवाज सुनते हुए बस फॉलो कीजिए। पंद्रह मिनट के अंदर-अंदर आपके दोनों स्टेप्स आई मसाज और आई एक्सरसाइजेस पूरे हो जाएंगे। ओके, अब तीसरे और शायद सबसे जरूरी स्टेप प मैं एक इम्पोर्टेंट डाउट क्लियर करना चाहता हूँ। क्या ये स्टेप सिर्फ छोटी पावर के लिए ही हेल्पफुल है, या इनसे हाई पावर भी जैसे -5 या -6 भी ठीक हो सकती है? ये पांच स्टेप्स हर पावर के लिए बेनिफिशियल हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि रिजल्ट्स आने में हर किसी को अलग समय लगता है। अगर आपकी प नंबर कम होना शुरू हो जाएगा और तीन-चार महीने में पूरी तरह छूट भी सकता है। हमने अपने कम्युनिटी के हजारों लोगों में इन स्टेप्स से पावर नैचुरली कम होते देखा है, लेकिन अगर पावर ज़्यादा है, जैसे -5 या -6, तो रिजल्ट्स धीरे आते हैं और कंप्लीट रिकवरी में भी थोड़ा टाइम ज़्यादा थोड़ी देर पहले मैंने कहा था हमारे आँखों के लिए एक ऐसी मेडिसिन है जो सब के लिए फ्री है और जितना उसे यूज़ कर लो कभी ख़तम ही नहीं होती वैल ये मेडिसिन है सनलाइट और द थर्ड स्टेप इस सिंपली एक्सपोजर तू सनलाइट आपको पता है हमारे ग्रंथों में आँखों पर एक पूरा उपनिषद लिखा गया है और ये सिर्फ कोई पुरानी जमानी के ज्ञान नहीं हैं। आज मॉडर्न साइंस भी प्रूफ कर रही है कि मायोपिया, यानी दूर ना देख पाने की प्रॉब्लम का सबसे बड़ा कारण जेनेटिक्स या स्क्रीन टाइम नहीं है। इनफैक्ट मायोपिया का सबसे बड़ा कारण है लोगों का बाहर नैचुरल डेलाइट में कम समय बिताना। आज हम सब सिडनी में 4000 बच्चों पर एक स्टडी की गई। तीन साल तक उन्हें ऑब्जर्व किया गया। रिजल्ट, बच्चों ने जितना ज़्यादा टाइम आउटडोर स्पेंड किया, उतना उनका मायोपिया, यानी दूर ना देख पाने की प्रॉब्लम का चांस कम हुआ। और सबसे इंटरेस्टिंग बात ये थी, फर्क इस बात से नहीं पड़ा कि वो बाहर क अगर आप चश्मों से सच में आजादी पाना चाहते हो, तो अपनी आँखों को सूर्य की रोशनी से मिलाना होगा। याद रहे, हम यहाँ उस कड़कती धूप की बात नहीं कर रहे, हम सुबह या शाम की वो सॉफ्ट लाइट की बात कर रहे हैं, जो सूरज से आती है। तो इसको प्रैक्टिकली कैसे करें? सिंपल है, रोज कम से कम आधा घंट एक्सरसाइजेस करते वक्त चश्मा या लेंसेस ना पहनें। इंस्टेड सूर्य की किरणें अपनी आँखों पर पड़ने दें। मॉर्निंग वॉक्स पे जाएं और हो सके तो अपना ब्रेकफास्ट बाहर नैचुरल लाइट में कीजिए। और जब आप आई एक्सरसाइजेस कर रहे हैं, तो उन्हें आउटडोर बैठकर कर लीजिए। आप अपने रूटीन के ह आधा घंटा आउटडोर्स बिताना है सुबह या शाम और सूर्य की हल्की रोशनी को अपनी आँखों तक पहुँचने देना है। अब अगर आप फॉर्च्यूनेट हैं कि आपकी बालकनी या छत या वरांडा से आपको सुबह का सनराइज़ या शाम का सनसेट दिखता है, प्रकृति ने आपको एक बोनस टूल दिया है अपनी आँखों की पावर संगेजिंग का मतलब है सनराइज या सनसेट के टाइम पे सूर्य को डिरेक्टली करीब पांच मिनिट के लिए देखना अगर आप कहीं ऐसी जग़ा रहते हैं जहां आपको उगता या ढलता सूरज नहीं दिखता तो कोई बात नहीं आगे जाके मैं आ घंटे के अंदर-अंदर या सनसेट के एक घंटे पहले के अंदर-अंदर। इस वक्त सन से हीट उतनी नहीं आती, रोशनी आती है, जो बहुत माइल होती है और आपकी आईज़ के लिए एक्चुअली हीलिंग होती है। लेकिन दोपहर में या जब सूरज तेज़ हो, तब सन गेजिंग बिल्कुल नहीं करनी, तब ये जरूर अनसेफ हो सकती है। क्ल और फिर सूर्य को देखें। जैसे आप टीवी का दर्शन करते हैं, अब वैसे ही सूर्य का दर्शन करना है। अगर आपको बीच में ब्लिंक करना पड़े, तो आप कर सकते हैं। कितनी देर करनी है संगे सिंग? शुरू करें सिर्फ एक मिनट से और ग्राजूली कुछ दिन के अंदर अंदर इसे पांच मिनट तक लेके जाएए। इस प्राक्टिस को भी अब अगर आप सन गेजिंग नहीं कर सकते, तो आपको करनी है त्राटक क्रिया, also called candle gazing। इसमें हमें कैंडल फ्लेम को बिना आंखें झपकाए पांच से सात मिनट के लिए देखते हैं। ये आँखों के लिए एक पावरफुल क्लेंजिंग टेक्निक है। इसका फुल मेथड हमने एक अलग वीडियो में डिटेल में बताया है। त्राटक क्रिया सात्विक उन्होंने एक महीने तक त्राटक या फिर संगेजिंग करी और सिर्फ एक महीने में ही उनकी आँखों की क्लारिटी इतनी बढ़ गई कि वो स्नेलिन चार्ट की एक लाइन और पढ़ पाए। अब तक हमने अपने आई केयर हीलिंग प्लान के चार स्टेप सीख लिए हैं। अब सिर्फ एक लास्ट स्टेप बचा है, जिसके बिना इन चारों स्टेप्स का ये रूटीन फॉलो करते समय क्या मुझे अपने चश्मे धीरे-धीरे कम कर देने चाहिए? देखिए, चश्मा एक सहारा है, एक क्रच की तरह है। अगर हम हमेशा चश्मा पहने रहते हैं, तो आंखें अपनी असली शक्ति वापस पाने की कोशिश ही नहीं करती। इसीलिए जरूरी है कि हम धीरे-धीरे इन पे अपनी डिपेंडेंस कम करें। कै रोज कर रहे हैं, तो कोशिश कीजिए चश्मा जितना कम हो सके उतना कम पहनें। सिर्फ जरूरी काम के समय पहनिए, जैसे गाड़ी चलाते वक्त या कोई इम्पोर्टेंट मीटिंग में। और अगर आपकी पावर ज़्यादा है, तो पहले कुछ हफ्तों तक ये प्रैक्टिसेस रेगुलरली कीजिए। फिर अपने चश्मे का नंबर थोड़ा कम करवा लीज आपको नए ग्लासेस में भी सब कुछ क्लियरली दिखने लगेगा। कुछ महीने बाद जब आँखों की पावर और इम्प्रूव हो, तो फिर से थोड़ा और कम नंबर के लेंस बनवा लीजिए। ओवरऑल अगर नंबर थोड़ा ज़्यादा है, तो प्रोसेस में कुछ महीने ज़्यादा लग सकते हैं, पर पेशेंस रखिए, रिजल्ट ज़रूर मिलेगा। आइए ब्लू लाइट एमिट होती है और जब हम इनका ज़्यादा यूज़ करते हैं तो ये लाइट आँखों के अंदर तक पेनेट्रेट करने लगती है। अब ऑब्वियसली हम इन गैजेट्स को लाइफ से हटा तो नहीं सकते। आज दुनिया इन्हीं पे चलती है, लेकिन हम इन्हें सेफली यूज़ करना ज़रूर सीख सकते हैं। वो कैसे? वेल पह दूसरा अपने फोन और लैपटॉप में नाइट मोड ऑन कर दो। इसे शाम आते-आते स्क्रीन थोड़ी वॉम हो जाती है, जो आंखों पर पड़ने वाली ब्लू लाइट और स्ट्रेन दोनों कम करता है। तीसरा एटलिस्ट रात को गैजेट्स देखना बंद कर दीजिए। एक कटऑफ टाइम सेट कर लीजिए। मान लेते हैं 9 बजे। उसके बाद रील कभी भी हील नहीं हो पाएंगी। और चौथा, जब आप सोएं तो पूरे अंधेरे में सोएं। कोशिश कीजिए कि आपके कमरे में ना कोई गैजेट्स की लाइट आए, ना स्ट्रीट लाइट का ग्लो है। कंप्लीट डार्कनेस में सोएं, ताकि आँखों को रात को पूरा रेस्ट मिल सके और हीलिंग फास्ट हो। इन छोटी-छोटी आदतों को अपना के आप जिसमें हम आपके साथ वो सब आज एक्सरसाइजेस करते हैं तो यहाँ क्लिक करें। अभी के लिए इतना ही मैं आपसे जल्द वापस मिलूंगा।










