In this Hindi instructional video, hosts Harsh and Suba promote traditional clay cookware (mitti ke bartan) as a healthier alternative to metal, aluminium, and Teflon pots. They explain that clay’s porous structure retains nutrients and imparts a subtle flavor, citing an experiment where vegetables cooked in clay preserve 100 % of their nutrients compared to metal. The presenters warn that aluminium leaches into food over time and that Teflon coatings can melt, potentially causing cancer, urging viewers to replace such cookware. They detail how to season new clay pots (soak 24 hours, dry, then use), and list four common reasons for cracking: lack of seasoning, high heat, sudden temperature change, and poor quality material. Cooking tips include using low‑to‑medium heat, avoiding thermal shock, and serving directly from the pot to keep food warm. Cleaning advice stresses using only warm water, lemon peel, baking soda, or salt; never soap or harsh scrubbers. They suggest starting with a clay handi for vegetables, rice, dal and a clay tawa for roti, optionally adding a clay matka for water storage. Frequently asked questions are addressed: required types of clay cookware, cooking time (about 30 minutes, slightly longer than metal), cleaning methods, and where to purchase quality items. The overall message is that switching to clay cookware can improve nutrition, reduce reliance on supplements, and promote a more natural, sustainable lifestyle.
Chapters
हाय मैं हूँ हर्ष और मैं हूँ सुबा आज हम आपको बताएंगे एक ऐसी चीज के बारे में जो 2000 साल से भारत के हर घर का हिस्सा थी एक ऐसी चीज जो हमारे दादा और परदादा के स्वास्थ्य का रहस्य थी लेकिन सिर्फ पिछले 30 सालों में हम सब इसको पूरी तरह भूल चुके हैं क्या आप जानते हैं ये क्या है ये है मिट्टी के बर्तन वो तो पुरानी चीज है वैसे भी इनसे क्या ही फर्क पड़ता है?
फर्क पड़ता है, बहुत बड़ा फर्क पड़ता है इस वीडियो में हम आपको बताएंगे कि सिर्फ अपने बर्तन बदल के आपको कितने फाइदे मिल सकते हैं सबसे पहले ये जानते हैं कि मिट्टी में और बाकी बर्तनों में difference क्या है? मिट्टी के बर्तनों की खुबी ये है कि ये porous होते हैं. मतलब इनके पूरे सर्फिस पर हजारों छोटे-छोटे छेद होते हैं. तो जब आप मिट्टी के बर्तन में खाना बनाते हैं, तो बर्तन के अंदर जो भी गर्मी पैदा होती है, वो इन छेद के थ्रू ब और जो भी पोषण तत्व, न्यूट्रिएंट्स होते हैं, वो हमारे खाने में बने रहते हैं। आप एक एक्सपेरिमेंट करके देखें। गैस पर दो पॉट्स रखें, एक मिट्टी का और दूसरा मेटल का, और दोनों में सेम खाना बनाएं। आप देखेंगे कि मेटल को टच करते ही आपका हाथ जल जाएगा, लेकिन मिट्टी पे हाथ रखने पर भी कुछ वैसे ही आपके सबजीयों का पोशन तत्व भी जल जाता है। जब साइंटिस्ट ने एक्स्पेरिमेंट किया, तो उन्होंने पाया कि यदि आप मिट्टी की हांडी में सबजी बनाते हैं, तो उसके 100% नूट्रियंट्स सबजी में रहते हैं सारा खाना मिट्टी के बर्तनों में बना रहे हैं। रोटी सारे मिट्टी के तवे पे बनते हैं और सब्जी हांडी में। घिया, तोरी, आलू, बीन्स, गाजर, मटर, कद्दू, पालक, चावल, खिचड़ी, यहाँ तक कि गाजर का हलवा भी मिट्टी की हांडी में बनता है। अच्छा एक और बात, यदि आप एल्युमिनियम यूज़ करते हैं जो धीरे-धीरे आपके भोजन में घुलने लगता है। अगर आज आप एक एल्युमिनियम का बर्तन खरीदके उसका वजन करें, फिर तीन साल उसे यूज़ करने के बाद फिर से उसका वजन करें, तो आपको वजन कम हुआ हुआ मिलेगा। आप सोचिए कहाँ गया वो सारा एल्युमिनियम? आपके पेट में, आपकी फैमिली के पेट में। एल्युमिन उसके ऊपर लगी टेफलॉन की कोटिंग हमारे खाने में पिघल जाती है और कैंसर को जन्म देती है। तो प्लीज इनको जितना जल्दी आप हटाएंगे उतना सेफ रहेंगे। अपने घर में किसी का भी खाना इनमें मत बनाइए। अगर ये आपके घर में रहेंगे तो धीरे-धीरे आप इनको यूज़ कर ही लेंगे। तो आज इन्हें हटा द माँ प्रकृति से आती है और इसमें कुछ ऐसे तत्व होते हैं जो आपके शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। आप देखिए अपने आसपास के लोगों को, हर किसी को किसी ना किसी चीज़ की तो डेफिशिएंसी है। वो डॉक्टर के पास जाते हैं, तो डॉक्टर उनको ये सप्लीमेंट, वो विटामिन, पता नहीं क्या-क्या लिख कि आपके भोजन की सारी कमियां पूरी कर देती है। मिट्टी में खाना बनाओगे तो किसी भी महंगे-महंगे सप्लीमेंट पे पैसे खर्च नहीं करने पड़ेंगे। और एक बात बताएं, अगर आपने मिट्टी के बर्तनों के खाने को चक लिया ना, तो आप बाकी सारा खाना भूल जाएंगे। कहते हैं ना कि माँ के हाथ के खाने में तो ए धरती माँ इसका एक और फायदा ये है कि आप जिस बर्तन में खाना बनाएंगे आप उसी बर्तन में खाने को सर्व भी कर सकते हैं और तो और ये आपके भोजन को लंबे समय तक गरम भी रखता है तो यदि आप पंद्रह मिनट बाद भी सेकंड सर्विंग लेते हो तो आपको स्वादिष्ट गरम-गरम सब्जी मिलती है आइए अब समझते हैं कि म हम पिछले कुछ सालों से मिट्टी के बर्तनों पे रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन हमने पाया कि बहुत लोग इनको यूज़ करने से डरते हैं।
उनको लगता है कि ये बहुत जल्दी क्रैक हो जाते हैं, टूट जाते हैं। लेकिन बहुत सारे अलग-अलग मिट्टी के कुमारों से बात करने के बाद हमने पाया कि क्रैक्स सिर्फ चार कारणों आपकी हांडी सालों तक आपके साथ चलेगी। क्रैक होने का पहला कारण, बटनों को शुरू में सीजन ना करना। जब आप इन्हें खरीदते हैं, तो तुरंत ना यूज़ करना स्टार्ट कर दे। पहले ये आपको 24 घंटे पानी में भिगोने होते हैं। इस प्रोसेस को कहते हैं सीजनिंग। 24 घंटे बाद सुखाकर फिर यूज़ करें। दूसरा हमेशा याद रखें कि इनको सिर्फ धीमी या मीडियम आंच पर ही पकाएं। तेज आंच पर पकाने से ये चटक सकते हैं। चिंता ना करें, मिट्टी के बर्तनों में खाना बहुत अच्छे से पक जाता है। तीसरा कारण, इन्हें एकदम से किसी ठंडी चीज़ पर रखते ना। यदि आप इनको गैस से उतारने के बाद एकदम किसी ठंडी चीज़ प तो ऐसा कभी ना करें। जब आप इन्हें गैस से उतारकर रखते हैं, तो सीधा मार्बल की जगह किसी कपड़े या लोहे की रिंग पर रखें। चौथा कारण बर्तनों की क्वालिटी अच्छी ना होना। जब हम ऐसे बर्तन खरीदते हैं जो अच्छी मिट्टी के नहीं बने होते, या फिर जो अच्छे से आग पे नहीं पकाए होते, वो भी बहुत लेकिन आप पूछेंगे कि अच्छी क्वालिटी की बर्तन हमें मिलेंगे कहाँ से? पूरी इंडिया में बहुत सारी छोटी-छोटी दुकानें हैं, जहाँ से आप इन्हें खरीद सकते हैं। आइए अब कुछ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल डिस्कस करें। हमें क्या-क्या मिट्टी के बर्तन चाहिए होंगे? आप सिर्फ दो चीजों से स्टार्ट करें हांडी में आपकी सभी सब्जियाँ, चावल, दाल बन जाएगी और तवे पे रोटी। आप चाहें तो अपनी लाइफ में एक तीसरी चीज भी इंट्रोड्यूस कर सकते हैं और वो है मिट्टी का मटका। पुराने जमाने में हमारे पास ये इलेक्ट्रिक रेफ्रिजरेटर तो नहीं थे, पर हमारे पास माँ प्रकृति का रेफ्रिजरेटर था मिट्टी का मटका। बाहर अगर कड़कती धूप भी होना तो भी पानी अंदर एकदम थंडा रहता है और ये आप अपने आप अनुभव करके देखें चलिए अगले सवाल पे बढ़ते हैं क्या मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाने में ज्यादा समय लगता है तो मिट्टी में 30 मिनट लगेंगे। तो समय थोड़ा ज्यादा लगता है, लेकिन बदले में ये जो आपको देते हैं, पोषण तत्वों से भरा भोजन, उसके लिए 10 मिनट ज्यादा लगे, तो क्या हुआ? फायदे भी तो इतने सारे हैं ना? चौथा सवाल, इनको साफ कैसे करें? देखिए, अगर आप सारा सात्विक भोजन बना रहे हैं एकदम आसानी से साफ हो जाते हैं। लेकिन यदि आप तेल वाला खाना बना रहे हैं, तो आप नींबू के छिलके या बेकिंग पाउडर या नमक से साफ करें। और हाँ, मिट्टी के बर्तनों पे कभी साबुन ना लगाएं। ये साबुन को सोख लेते हैं। और स्क्रब्बर भी या तो जूठ का या नारियल की रस्सी का इस्तेमाल करें। ये स अगर आपको इनको रोज यूज़ करना है, तो सिर्फ हल्के गर्म पानी से धोकर सुखा दें। फिर अगले दिन उसको फिर से आप यूज़ कर सकते हैं। लेकिन यदि आप छुट्टी पर जा रहे हैं और आपको चार पांच दिन यूज़ नहीं करना, तो फिर आपको धोकर इन्हें सूर्य की रोशनी में सुखाना होगा। जब ये पूरी तरह सू मिट्टी के तवे पर बनी सात्विक रोटी और हांडी में बनी सात्विक सब्जी सीखने के लिए यहाँ क्लिक करें।