The video is a Hindi‑language courtroom‑style dramatization in which the presenters act as plaintiffs, defense counsel and a judge to expose the Indian packaged‑food industry. Through a series of scripted exchanges they argue that packaged foods hide harmful chemicals (e.g., calcium propionate, sodium benzoate), use artificial colors, contain excessive sugar, and employ deceptive labeling that misleads consumers about nutritional content. They illustrate the contrast between fresh home‑cooked items (which spoil naturally) and packaged products that stay fresh due to preservatives, and they dissect packaging claims (e.g., “almond” biscuits that contain only a few almonds, “spinach” noodles with 1.2 % spinach). The speakers cite multiple research studies linking these additives to insulin spikes, obesity, diabetes, carcinogenicity, and addiction stronger than cocaine. They also claim the industry deliberately targets children, creating a generation addicted to sugary drinks and snacks. The defense side offers generic rebuttals about compliance with regulations and transparency, which are dismissed by the plaintiffs. The video concludes with a strong call‑to‑action: read ingredient lists, avoid processed foods, switch to whole fruits, vegetables, nuts and grains, and join a 21‑day health challenge, with a link to a follow‑up video.
Chapters
आज हम इस कोर्टरूम में खड़े हैं एक नहीं, दो नहीं, लेकिन तीन बड़े सच को आगे लाने, जो हर दिन हजारों लोगों की जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं टेस्ट के बहाने।
बच्चों से उनकी सेहत को छुड़ाया, फैमिलीज़ को बीमारियों के नीचे दबाया। इसके पीछे है The Packaged Food Industry, जिसने है हम सबको बहकाया।
बातें तो पहला सबूत छुपा है इस केले में। एक केला, एक टमाटर या कोई भी असली भोजन वक्त के साथ साथ तड़ जाता है, गल जाता है। यह प्रकृति का नियम।
अब एक महीने पहले हमने घर पे ही सिंपल आटे की बिस्किट्स बनाएं, काउंटर पे खुले छोड़ दिए और ये देखो, आज इनपे पूरे फंगस है भरा है।
यही नहीं, हमने ये दिखने में लगे शायद अजीब और काफी बुरा, लेकिन कीड़े और बैक्टीरिया सिर्फ वहीं जाते हैं जहाँ जीवन हो भरा। खाने का वक्त के साथ साथ तड़ना है एकदम नॉर्मल, एकदम सही। अब नॉर्मल तो ये होगा जब कोई खाना टाइम के साथ बदले ही नहीं।
अब साथ ही हमने रखी वो सेम चीज लेकिन बाजार से पैकेट में लाई क्या आप तयार हैं देखने के लिए इनकी सचाई हम कमपनी से पूछना चाहते हैं जब हमारी घर पे बनाई चीज कुछ दिनों में ही सड़ जाती है तो आपकी कैसे रह जाती है इतने महीने My Lord, इस सवाल का जवाब छुपा है इस डब्बे में। इस इंडस्ट्री के बहुत से प्रोडक्ट्स भरे हैं इन्हीं से, और यही है पहला सच। The packaged food industry is guilty of hiding chemicals in their food।
इन केमिकल्स की वजह से ना फंगस ना बैक्टीरिया है इन प्रोडक्ट्स पर आते। इन्हें हम कैसे खाएं जब बैक्टीरिया भी इन्हें नहीं खाते?
Objection! ये केमिकल्स गवर्नमेंट Overruled.
Please continue.
My lord, in chemicals का एक example है calcium propionate. ये कुछ packet वाली bread और अक्तर store bought cakes में पाया जाता. Government approved तो है, लेकिन research studies के मुताबिक ये आपका insulin बढ़ाके आपको diabetes और obesity के करीब लाता. और वो? वो है sodium benzoate. एक preservative जो ketchups, soft drinks और jam जब महीनों पुराने हो जाते, उनको फ्रेश दिखाता, लेकिन रिसर्च स्टडीज में प्रूफ किया गया है कि जब ये केमिकल विटामिन सी के साथ मिलता, तो वो कार्सिनोजेनिक बन जाता।
माय लॉर्ड, खाना तो उस चीज को कहते हैं ना, जो हमें जीवन दे, हमारे अंदर ताकत लाए, लेकिन जो चीज हमारी लाइफ को छोटी कर दे, क्या सच में उसे खाना कहना और वो है कि the packaged food industry is also guilty of deception मतलब पैकेट पे जो लिखा होता है वो सच नहीं होता और जो सच होता है वो लिखा ही नहीं होता ये देखिए चॉकलेट आमंड बिस्किट नाम में ही है आमंड्स क्या लगता है कितने बदाम होंगे इस पैकेट में 20-25 होंगे 15 से ज़्यादा नहीं अगर सच जानना है तो पैकेट घुमाओ और पता लगाओ 4% लिखा है साफ 100 ग्राम का पैक है तो हिसाब लगा लो आप धोका दे रहा है इस बिसकिट का नाम क्योंकि इस पूरे पैकेट में मिलेंगे आपको सिर्फ तीन बदाम ये स्पिनिच आटा नूडल्स जिस पे लिखा है न्यूट्रियंट पैक्ट एंड स्पिनिच इन एवरी बाइट क्या लगता है इसमें कितना पालक होगा देखते हैं, गेस्ट कर सकते हो क्या राइट?
Thirty percent। सच जानना है तो एक बार फिर पैकेट घुमाओ और पता लगाओ। इंग्रेडिएंट लिस्ट के हिसाब से स्पिनेच है one point two percent लिखा है साफ। सत्तर ग्राम के पैकेट में मिलेंगे सिर्फ तीन छोटे पालक के पत्ते। अगर करो हिसाब।
बस तीन पत्ते पालक, बाकी तेल, केमिकल्स और आटा। ये नहीं कोई इत्तेफाक। पालक के नाम पे डाला है हरा रंग और लिखते हैं न्यूट्रिशियस। माय लॉर्ड, ये कैसा मजाक?
लेकिन हम हर एक इंग्रेडिएंट पूरी ट्रांसपेरेंसी के साथ लिस्ट पे लिखते हैं। We are following all the rules.
Order, order.
Sorry my lord, इनको बस ट्रांसपेरेंसी बोलते सुन थोड़ी हंसी आ गई। ये देखिए शायद आपने कभी इस तरह के पाइनापल क्रीम वाले बिस्किट्स को खाया होगा। खुशबू पाइनापल की, टेस्ट पाइनापल का क्या लगता है? इसमें पाइनापल कितना होगा? एक आधा टुकड़ा होगा और कितना? माय लॉर्ड, आप ही बताइए। इसकी इंग्रेडिएंट लिस्ट में कितना पाइनापल है?
इसमें तो पाइनापल है ही नहीं।
ये है बिना पाइनापल वाले बिस्किट के पैकेट पे पाइनापल लिखना, ये तो ऐसा ही हो गया जैसे किसी को बड़ा ही सुंदर गिफ्ट रैप करके देना, लेकिन वो खोले तो अंदर हवा के अलावा उसमें और कुछ मिले ना।
बिना असली पाइनापल के इसका रंग और टेस्ट कैसा है?
My lord, अगर आप इसकी इंग्रेडिएंट लिस्ट देखें, तो ये है पैकेज फूड इंडस्ट्री का एक और राज किसी प्रोडक्ट का असली रंग होता है फीका देखने में हलका तो लगे बेजान बस थोड़ा आर्टिफिशियल रंग मिला दो और वही चीज अब जगा देगी मन में भूख का तूफान जब कोई कैंडी डल लगे तो रंग से चमका दो जब बिस्किट की क्रीम फीकी लगे तो कलर में नहला दो। इन प्रोडक्ट्स में डाले हैं नकली रंग, ये तो आपको इंग्रेडिएंट लिस्ट पढ़के खुद ही समझ आ जाएगा। लेकिन कैसे ये रंग आपके ब्रेन को खराब करते, ये आपको किसी ऐड में नहीं दिखाया जाएगा।
मिलॉर्ड, हम सिर्फ वही चीज बेचते हैं जो लोग खाईना चाहते हैं। ये रंगों वाली क वो भी बार-बार।
ये बात तो इन्होंने एकदम करेक्ट बोली, और इसी के साथ हम पेश करना चाहेंगे अपना तीसरा सच। किसी भी बिजनेस को चलने के लिए एक परफेक्ट टारगेट चाहिए ऐसा जो उनसे बार-बार खरीदता रहे, ताकि आता रहे पैसा। आपको क्या लगता है? कौन होगा ये परफेक्ट टारगेट पैकेज्ड फूड इंड बस खाता रहे बिना सेहत की परवा किये जिसको बहकाना हो आसान जो इतना भोला हो कि जूट को सच समझ ले ना कर पाए पहचान योर ओडर हम बुलाना चाहेंगे इनके जूट से अफेक्ट हुए सबसे बड़े विक्टिम्स को हमारे देश के बच्चे The packaged food industry is guilty of targeting our youth.
आपकी एनर्जी ड्रिंक पी पीकर मैंने बॉटल कर दी खत्म, ना हाइट बढ़ी, ना सेहत बढ़ी, ऊपर से हुई कैविटीज की प्रॉब्लम।
एड में कहा कि आपका प्रोडक्ट खाकर मैं बनूंगी छोटा भीम, लेकिन बन गए मैं टुंटन मासी, ये आपकी कैसी स्कीम? कोल्ड्रिंक्स को कूल दिखाकर हमें उनकी आदत डलवाई, लेकिन बदले में हमें मिले बस पिंपल्स। हमारी हेल्थ की तो क्या बैंड बजाई?
अगर इन्हें इतनी ही प्रॉब्लम है, तो ना खाएं। जबरदस्ती तो नहीं कर रहे हम।
ना खाएं? आपके प्रोडक्ट से बचना इतना आसान होता तो बात ही क्या थी? माय लॉर्ड, ये देख कहता है बनाए दिमाग को होशियार, लेकिन पलटो तो समझ आए। दूसरा सबसे बड़ा इंग्रेडिएंट है चीनी, जो करे इनके शरीर पे सीधा वार।
हेल्थ ड्रिंक में चीनी, बिस्किट में चीनी, सीरियल में चीनी, केचप में चीनी, जूस में चीनी, जाम में चीनी। सिर्फ ऐसे ही नहीं डाली जाती, ये एक सोची-समझी चाल है तो उसे छोड़ना बहुत मुश्किल हो जाता। एक बाइट के बाद और चाहिए होती है, मन कंट्रोल ही नहीं हो पाता।
ये चीनी हमारे दिमाग में डोपामिन नाम का एक केमिकल जगाए, जो बोले, once more, once more, once more, once more।
आपको कोर्ट के रूल्स नहीं पता क्या?
Sorry Your Honor।
मैं ये सर विश्वास नहीं कर सकता, जब तक आपके पास कोई एविडेंस ना हो इनके क्लेम्स बेसलेस हैं और इनके पास कोई सबूत भी नहीं है।
नहीं मिलेगा सबूत है ही नहीं।
माय लॉर्ड, ये रहा एविडेंस। ये कोई राज की बात नहीं। आज एक नहीं, दो नहीं, बल्कि मल्टीपल रिसर्च स्टडीज कह रही हैं यही। कुछ स्टडीज ने पाया कोकेन से भी ज़्यादा एडिक्शन हो जाती है चीनी की इसलिए अक्सर इन प्रोड़क्ट की एक बाइट खाने के बाद हम रुख पाते ही नहीं दुख की बात तो ये है कि इस ट्राप में हम फसते हैं बार-बार सिर्फ बड़े ही नहीं बच्चे भी बने इसका शिकार आपको पता है आज से 30 साल पहले ओबीसिटी सिर्फ बड़ों की परिशानी थी लेकिन रीसर्च ने पाया कि आज हमारे माय लॉर्ड अपने बिजनेस के लिए हमारी हेल्थ से खेलना क्या ये सही बात चाहे आने वाली पूरी जेनरेशन घिर जाए बीमारियों के साथ आज हम एक अपील करना चाहते हैं पर ये अपील कंपनीज के लिए नहीं है क्योंकि शायद ये कभी ना सुधरे इनका प्राइमरी मोटिव है प्रॉफिट बनाना चाहे हम कितना भी लड़ लें हम स्टूडेंट से है, इस देश के हर सिटिजन से है। ये दो बातें याद रखो, अगर चाहते हो एक लंबी और स्वस्थ ज़िंदगी। पहली, इन फैक्ट्री में बने प्रोडक्ट्स को हटा दो अपने घर और लाइफ से अभी। जो भी ताकत, शक्ति, ऊर्जा चाहिए तुम्हें, वो मिलेगी फल, सब्जी, नट्स और अनाज इन प्रकृति के उपहार म दूसरा, जब भी कुछ खरीदे, सबसे पहले पैकेट घुमाओ और पता लगाओ।
लेबल पढ़ो, चाहे कितना भी छोटा क्यों न हो। अगर कुछ ऐसा मिले, जिसका नाम आप आसानी से बोल न पाओ, या कुछ ऐसा, जो खुद की किचन में कभी न मिले, तो उस प्रोडक्ट को वहीं छोड़ाओ।
Your Honor, जो हमें कहना था, वो कह दिया।
अब फाइनल वर्डिक सारे सबूतों को देख कर आज सच है आपके सामने, लेकिन ये फैसला अब मेरे हाथ में नहीं बल्कि ये अब है आपके हाथ में। मैं जानता हूँ आप काफी समझदार हो तो अब बुद्धू बनना छोड़ो कानून बेशक अंदाज हो लेकिन आप। अपनी आंखें तो खोलो।
अगर आप सीखना चाहते हैं कि आप अपनी पैकेज्ड फूड क्रेविंग्स को कैसे ओवरकम कर सकते हैं, तो यहाँ क्लिक करके ये वीडियो जरूर देखें।
और अगर आप अपनी फूड हैबिट्स इम्प्रूव करना या अपनी पीक हेल्थ में पहुँचना चाहते हैं, तो आप हमारा 21 डे अल्टीमेट हेल्थ चैलेंज