In this Hindi health‑awareness video, the presenter warns viewers about the invisible electromagnetic (EMF) radiation emitted by everyday gadgets such as mobile phones, laptops, tablets, Wi‑Fi routers and smartwatches. She explains how prolonged exposure can negatively affect reproductive health (reducing sperm quality and harming ovaries/uterus), cause chronic pain, and be especially harmful to children whose skulls are more vulnerable. The core of the video is three practical, zero‑cost protection strategies: 1) Keep laptops at least a foot away, use wired or low‑radiation Bluetooth keyboards/mice, or switch to a desktop to reduce direct exposure to reproductive organs. 2) Avoid holding the phone to the head or body for long calls; use speaker mode, keep the phone away from the body, and switch it to airplane mode while sleeping (or keep it a foot away). 3) Do not place Wi‑Fi routers in the bedroom; locate them where you spend little time, and put children’s devices on airplane mode and download content beforehand. The presenter stresses that these steps protect both the user and family without sacrificing technology. The video ends with a promotional call‑to‑action for a paid online workshop, “The Ultimate Health Challenge,” promising a comprehensive health‑improvement program.
Chapters
अगर आप मेरी ही तरह फोन और लैपटॉप पे रोज बहुत समय बिताते हैं, तो ये वीडियो जरूर देखें क्योंकि इसमें आप सीखेंगे कि आप इन गैजेट्स के फायदे लेते-लेते इनकी हार्मफुल रेडिएशन से खुद को कैसे बचा सकते हैं। मोबाइल फोन्स, लैपटॉप्स, टैबलेट्स, वाईफाई राउटर्स, स्मार्टवॉचेस ये अब ये EMF रेडिएशन हमारी आंखों को दिखती नहीं, लेकिन सिर्फ क्योंकि किसी चीज़ को आप देख नहीं सकते, मतलब ये नहीं कि वो एक्जिस्ट नहीं करती। जैसे-जैसे हम 2G से 3G से 4G और अब 5G की तरफ बढ़ रहे हैं, हमारी टेक्नोलॉजी और फास्ट तो हो रही है, लेकिन साथ साथ इन डिवाइसेस में से निकलने व तो ये हमारी हेल्थ को ओवर टाइम बहुत नेगेटिवली इंपैक्ट करती है। तो इस वीडियो में आप सीखेंगे तीन तरीके अपनी और अपनी फैमिली को इन गैजेट्स में से निकलने वाली रेडिएशन से प्रोटेक्ट करने के लिए, बिना टेक्नोलॉजी को छोड़े और बिना एक भी रुपए खर्च किए। पहली चीज़ अपने लैपटॉप ऐसे या ऐसे यूज़ करते होंगे। लेकिन ऐसा करने से ये रेडिएशन डायरेक्टली आपके रिप्रोडक्टिव पार्ट्स में ट्रेवल करती है और आपकी फर्टिलिटी को इफेक्ट करती है। आपने शायद अपने आसपास नोटिस किया हो कि आज इतने सारे कपल्स आसानी से कंसीव नहीं कर पाते। आज इनफर्टिलिटी बहुत कॉमन हो चुकी है। कई सारे साइंटिफिक रिसर्चर्स ने ये प्रूफ किया है कैसे इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फ्रीक्वेंसी हमारे रिप्रोडक्टिव सिस्टम को इफेक्ट करती है। मेल्स में स्पर्म क्वालिटी और क्वांटिटी को घटाती है, और फीमेल्स में यूटरस और ओवरीज़ की हेल्थ को खराब करती है। तो अगर आप चाहते हैं कि आगे जाके आपक ना काम करे। ये इफेक्ट्स ऐसे नहीं होते कि आपने एक बार किया तो आपको एक ही बार में कुछ डैमेज हो जाता है, नहीं। जब आप इसको हर दिन घंटों तक करते हैं तो ओवरटाइम ये सीरियस डैमेज क्रिएट करता है। तो सल्यूशन क्या है? जब आप अपने लैपटॉप को लंबे समय तक यूज़ करने वाले हैं, तो अपने जितना आप किसी डिवाइस के पास होते हैं, उतनी EMF रेडियेशन स्ट्रॉंग होती है। एक फुट का डिस्टेंस बनाने से भी उसका इंपैक्ट आपकी बॉड़ी पर कम हो जाता है। जब मैंने पहले इसके बारे में सीखा, तो मुझे लगा, कुछ साल पहले मुझे मेरे राइट हाथ में बहुत दर्द होने लगा था और सिर्फ राइट हाथ में होता था, लेफ्ट में नहीं जैसे जैसे मैंने इसके बारे में पढ़ा तो मुझे समझ आया कि मुझे EMF रेडियेशन की वज़ज़ से ये पेन हो रहा है सबसे बढ़िया तो है वायर्ड कीबोर्ड और माउस, लेकिन वो नहीं है तो आप ब्लूटूथ से कनेक्ट करने वाले वायरलेस कीबोर्ड और माउस भी यूज़ कर सकते हैं। ब्लूटूथ रेडिएशन, वाईफाई रेडिएशन के मुकाबले बहुत कम होती है। अगर आप लैपटॉप की जगह डेस्कटॉप या कंप्यूटर यूज़ करते हैं, तो क्योंकि वो सारी हामफुल रेडियेशन उस बच्चे तक पहुँच रही होती है और उसके डेवलप्मेंट में इंटरफेर करती है तो लैपटॉप को सेफली यूज़ करने का तरीका तो हमने सीख लिया अब मोबाईल फोन के बारे में सीखते हैं और आजकल क्या हो गया है? हम हर समय अपना फोन खुद से चिपकाके रखते हैं, तब भी जब हमें इनकी जरूरत भी नहीं होती। हम अपने घर पे एक कमरे से दूसरे कमरे भी जाते हैं, तो मोबाइल फोन हाथ में पकड़के लेके जाते हैं, और ऑफिस में हर समय इसको जेब में रखते हैं, ड्राइव करते हैं, तो गोदी में रखते अगर आपको कभी फोन पे लंबी देर तक बात करनी पड़ती है, तो उसको पूरा टाइम अपने कान से चिपका के ना रखें। ऐसा करने से वो सारी रेडिएशन आपके हेड के थ्रू आपके ब्रेन तक पहुंचती है। इंस्टेड जब कभी किसी से लंबी देर बात करनी हो, तो या तो अपने फोन को स्पीकर फोन पे खुद से थोड़ा दूर रखके फोन को अपनी पॉकेट में या बॉडी से चिपकाकर न रखें। जैसे लैपटॉप फर्टिलिटी इफेक्ट करता है, वैसे ही मोबाइल फोन रेडिएशन भी इनफर्टिलिटी का बड़ा कारण है। कुछ लेडीज़ अपना फोन अपनी ब्रां में कैरी करके घूमती हैं, तो कुछ जेंट्स अपनी शर्ट या पैंट की पॉकेट में। लेकिन इसकी बज और हाँ रात को कभी अपना फोन अपने तकिये के नीचे रखके मत सोइए इसकी बजाय इसको एयरप्लेन मोड में अपनी बॉडी से कम से कम एक फुट दूर रखें एयरप्लेन मोड पर रेडिएशन ना के बराबर हो जाती हैं तो अभी तक आपने सीख लिया कैसे अपने फोन और लैपटॉप की रेडिएशन से आप खुद को प्रोटेक्ट कर सकते हैं अभी इस वीडियो के एंड में हम आपके साथ एक एक्साइटिंग अनाउंसमेंट भी शेयर करने वाले हैं। ईएमएफ रेडिएशन से खुद को प्रोटेक्ट करने का तीसरा तरीका, अपने वाईफाई राउटर को अपने बेडरूम में ना रखें। मैं ऐसे कुछ लोगों को जानती हूँ जो अपने रूम में ही, अपने सर के एकदम ऊपर वाईफाई राउटर रखके तो बॉडी में हीलिंग और रिपेयर का काम ठीक से हो ही नहीं सकता। तो क्या करें? बेस्ट तो है कि आप अपने बेडरूम में वाईफाई राउटर ना रखें। इंस्टेड उसको घर के किसी ऐसी जगह रखें जहाँ आप दिन का ज्यादातर समय ना बिताते हों। आपको पता है ईएमएफ रेडिएशन से सबसे ज्यादा कौन इफेक्ट होता है? बच क्योंकि उनका स्कल और उनका हेड हम अडल्ट्स के मुकाबले बहुत सौफ्ट, पथला और परमियेबल होता है तो अगर एक अडल्ट के सर में ये रेडियेशन कुछ इंच अंदर तक जाती है तो एक बच्चे के सर में ये पूरी तरह अं पूरी तरह EMF से सराउंडेड है और उसके बावजूत हम उनको प्रोटेक्ट करने के लिए कुछ नहीं कर रहे हम उनको फोन पकड़ा देते हैं और वो उसको कान पे लगा कर बात करते रहते हैं या उसको अपनी बॉड़ी के पास पकड़ कम से कम जब वो फोन यूज़ कर रहे हो, उसको एयरप्लेन मोड पे रखो और जो भी वो ऐप यूज़ करते हैं या वीडियो देखते हैं, उसको पहले से डाउनलोड करके रख लो। जो भी मैंने आपके साथ शेयर किया है, ये टेक्नोलॉजी को लेके कोई डर पैदा करने के लिए नहीं, but आपको टेक्नोलॉजी को सेफ तरीके से य अगर आप हेल्थ के बारे में और सीखना चाहते हैं या सात्विक मूवमेंट के साथ अपनी हेल्थ जर्नी स्टार्ट करना चाहते हैं, तो हमारे साथ जुड़िए हमारी नई सिग्नेचर वर्कशॉप में The Ultimate Health Challenge। इसमें आप हेल्थ के बारे में A to Z सब सीख पाएंगे। इसमें हम रोज सुबह 21 दिन के लिए एक ऑनलाइन सेशन के लिए मिलेंगे, जिसम सिखाया नहीं जाएगा, लेकिन आपसे ये सारे बदलाव अपनी लाइफ में एक्चुअली करवाए जाएंगे। अगले अल्टीमेट हेल्थ चैलेंज में जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें। और अगर आपको ये वीडियो बेनिफिशियल लगा, तो हमें नीचे कमेंट्स में जरूर बताएं। अभी के लिए इतना ही, हम आपसे जल्द वापस मिलेंगे।