सुबह की धूप के चमत्कारिक फायदे | Sun Charge Your Body in 2 Steps

Samaira Banga explains the benefits of morning sunlight and shares a two-step method to energize your body with sun exposure. The video covers how morning rays can boost your health and vitality.
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हाय मैं हूँ सुबह हमें बचपन से पढ़ाया जाता है कि सूर्य की रोशनी से पौधे उगते हैं पेड़ बड़े होते हैं और ये पौधों के लिए कितनी जरूरी है लेकिन ये नहीं सिखाया जाता कि सूर्य की रोशनी हमारे शरीर के लिए भी उतनी ही जरूरी है जितनी पेड़ों के लिए सूर्य की रोशनी में जीवन देने वाल पल उगने लगते हैं और पौधे पेड़ों में बदल जाते हैं। यदि हम इस शक्ति को सही समय पे, सही मात्रा में, सही तरीके से लेने लगें, तो वही शक्ति हमारे शरीर में ट्रांसफर होती है और हमारे टिशु और सेल्स का इलाज करने के लिए यूज़ होती है। इस वीडियो में हम सूर्य की रोशनी को लेने का तरीका सीखेंग कुछ ही महीनों में चढ़ से ठीक हो जाती हैं। सिर्फ हेल्दी बॉडी ही नहीं, सूर्य हमें इंटेलिजेंस भी देते हैं। यदि हम सुरक्षित समय पर सूर्य को देखें, तो रोशनी आँखों के द्वारा सीधा ब्रेन तक पहुँचती है। हमारी आँखें हमारे ब्रेन का ही हिस्सा हैं। Our eyes are an extended part of the brain, windows for the brain। जब रोशनी ब्रेन तक पहुँचती ह तो हमारा फोकस और कंसंट्रेशन बढ़ाती है। इस प्रैक्टिस को हम संगेजिंग कहते हैं, और इससे बड़ी-बड़ी बीमारियाँ, टेंशन, डिप्रेशन, इंसोम्निया, माइग्रेन, हेडेक जड़ से ठीक हो जाती हैं। जो काम महंगी-महंगी दवाइयाँ और सप्लीमेंट नहीं कर पाते, वो आपकी सूर्य की रोशनी कर देती हैं। इस वीड देखिए आजकल इतने सारे उपचार चल रहे हैं लेकिन सब में हमें कुछ ना कुछ लगाना पड़ता है कुछ पैसा खर्च करना पड़ता है लेकिन सूर्य एक ऐसा ट्रीटमेंट है जो 100% फ्री है जीरो कॉस्ट ट्रीटमेंट सभी के लिए अवेलेबल है और सबसे ज़्यादा पावरफुल है माँ प्रकृति ने हमारी ह्यूमन बॉडी को सूर्य के सनलाइट इस फूड फॉर आवर सेल्स। लेकिन आजकल क्या हो रहा है? हम एक इंडोर जेनरेशन बन चुके हैं। हम बंद कमरों में अपनी ज़िंदगी बताने लगे हैं। और अब जब हमें धूप नहीं मिल रही, तो शरीर में बहुत सारी चीजें बिगड़ रही हैं। हमारी हड्डियाँ कमजोर हो रही हैं और बीमारियाँ जैसे ऑस्ट क्योंकि हमें कभी सिखाया ही नहीं गया कि सूर्य की रोशनी हमारी हड्डियों को मजबूत रखने के लिए कितनी जरूरी है। सिर्फ हड्डियों की मजबूती के लिए ही नहीं, लेकिन सूर्य की रोशनी हमारी मेंटल हेल्थ के लिए भी बहुत जरूरी है। ये रोशनी हमें खुश रखती है। क्या आप जानते हैं कि डेनमार्क जैसे द और कुछ सुसाइड भी कर लेते हैं। साइंटिस्ट्स ने इसका नाम दिया सीजनल इफेक्टिव डिसऑर्डर। उन्होंने पाया कि जैसे-जैसे जीवन में रोशनी कम होती है, वैसे-वैसे उदासी बढ़ती जाती है। ये तो हुई सूर्य से ना मिलने पे डिप्रेशन की बात। अब जानते हैं कि इसका क्या असर पड़ता है हमारे बच्चो बच्चे इम्पेशिएंट हो गए हैं और उनका अटेंशन स्पैन बहुत कम हो रहा है। सूर्य हमारे शरीर की बायोलॉजिकल नीड है। इसके ना मिलने के कारण हमारे सारे बॉडी पार्ट्स जैसे पैनक्रियास, ओवरीज, हार्ट, स्किन नॉर्मल तरीके से फंक्शन करना बंद कर देते हैं और फिर हमें डायबिटीज, पीसीओडी, हार्मोन हमें एक इंडोर जनरेशन से आउटडोर जनरेशन बनना है। हमें सूर्य को अपनी जिंदगी में वापस लाना है। सूर्य की रोशनी एक ऐसी नैचुरल मेडिसिन है, जिसका उपयोग हम हजारों सालों से करते आ रहे हैं। हमारे पूर्वज सूर्य को स्वास्थ्य और सुख के देवता के रूप में पूछते थे। वो सुबह की शुरुआत गायत्री के लिए गया जाता था। सूर्यदेव को सूर्यनारायण भी बोला जाता है, और ऋग्वेद में कहा है कि सूर्य कोई भी बीमारी खत्म कर सकते हैं। इतना ही नहीं, हर योगा की शुरुआत सूर्यनमस्कार से होती है। जर्मनी में वर्ल्ड वॉर वन के दौरान सूर्य की रोशनी का उपयोग युद्ध के घावों को ठीक करने के लिए तो डॉक्टर घाव पे दवाई लगाने की बजाय उसपे कई घंटे सूर्य की किडनी लगने देते थे। सूर्य का उपयोग किटानुओं से बचाने के लिए नैचुरल एंटीसेप्टिक के रूप में किया जाता था। ग्रीस में हीलियोथेरेपी करी जाती थी, यानी सूर्य का उपयोग और शद्दी के रूप में करना। पूरे यॉर्प में हीलियोथेरेप अल्सर्स, एनीमिया पूरी तरह ठीक हो जाती थी। इटली में सनलिट हॉस्पिटल रूम्स बनाए गए, जिन पेशेंट्स को सूर्य की रोशनी वाले कमरों में रखा जाता था, वो बहुत जल्दी ठीक हो जाते थे। उन पेशेंट्स की तुलना में जिनको सूर्य नहीं मिलता था, दुनिया भर में सूर्य की रोशनी का उपयोग अशद्दी के क्योंकि लाइफस्टाइल मेडिसिन के बारे में आपको बताने में किसी का प्रॉफिट नहीं है और इसलिए इसको मेडिकल ट्रेनिंग का हिस्सा नहीं बनाया जाता। लेकिन अगर हम इसे लेना सीख जाएं, तो ये किसी भी डिवाइस से ज़्यादा इफेक्टिव है। तो आइए जानें कैसे सूर्य की रोशनी लेनी है। इस वीडियो में ह मतलब हर रोज करीब 30 मिनट के लिए अपने पूरे शरीर को सूर्य की रोशनी दिखाना। देखिए, रोज जो हम पानी से स्नान करते हैं, वो सिर्फ एक प्रकार का स्नान है। ये सिर्फ आपके बाहरी शरीर को साफ करता है, लेकिन सूर्य की रोशनी आपके अंदर के शरीर को साफ करती है। जब हमारी रसोई में गेहूँ या चावल पे कीड सूर्य में रखने से वो शुद्ध हो जाते हैं। क्यों? क्योंकि सूर्य की रोशनी एक नैचुरल डिसइंफेक्टेंट है, एंटीसेप्टिक है। जब सूर्य की रोशनी हमारे अंगों के अंदर तक पहुंचती है, तो वहाँ से खराब किटानों, बैक्टीरिया, मोल्ड, वायरस, फंगस को नष्ट करती है। सूर्य स्नान से हमारा अंदर का उस समय रोशनी आपकी स्किन के अंदर जाकर आपकी आर्टरीज़ में चल रहे खून तक पहुंचती है और खून का दौरा बढ़ाती है। जो खून पहले बिल्कुल गंदा और गाढ़ा हो गया था, उसे मोशन में लाती है। जब खून का दौरा बढ़ता है, तो ऑटोमैटिकली अंदर जमे टॉक्सिन या गंदगी का दौरा भी बढ़ सूर्यस्नान के बाद अक्सर लोगों का यूरिन पहले से ज़्यादा पीला हो जाता है। ये शरीर में से ज़्यादा गंदगी निकलने की निशानी है, और जो शरीर अंदर से बिल्कुल साफ हो, उसमें कोई बीमारी हो ही नहीं सकती। सूर्यस्नान हमारी स्किन के लिए भी बहुत जरूरी है। सूर्यस्नान से हमारी स्किन साफ रहती तो अंदर से गंदगी बाहर नहीं निकल पाती, अंदर ही जमने लगती है और बहुत सारी बीमारियों को जन्म देती है। जब हम इन पोर्स को सूर्य की हल्की गर्मी देते हैं, तो ये पोर्स खुल जाते हैं और अंदर जमी गंदगी बाहर निकलती है। अगर आप सूर्यस्नान यानी सनबेधिंग को 16 घंटे उपवास, एनिमा, ठंडी कुछ ही महीनों में जड़ से ठीक हो जाएंगे, चाहे वो सुराइसिस हो या एक्जीमा। आजकल हर चीज में मिलावट है, पानी में मिलावट है, खाने में मिलावट है, हवा में मिलावट है, लेकिन सूर्य की रोशनी अभी भी एक ऐसा सोर्स ऑफ एनर्जी है, जिसमें कोई भी मिलावट नहीं है, बिल्कुल शुद्ध है। तो आइए सूर्यस सूर्यस्नान कहाँ करें? कोई ऐसी जगह जहाँ सूर्य की रोशनी आप तक सीधा-सीधा पहुँचे। बालकनी, वेरांडा, छत, पार्क, बीच, कहीं भी। सूर्यस्नान कब करें? या तो सुबह या फिर शाम। ध्यान रखें, आपको सूर्य की रोशनी चाहिए, गर्मी नहीं। सुबह या शाम सूर्यस्नान के लिए सबसे अच्छा समय है, क्योंक दोपहर की कड़कती धूप में सूर्यस्नान नहीं करना, वो फायदा की जगह नुकसान करेगा। सिर्फ सुबह या शाम को ही करें। सूर्यस्नान कितनी देर करें? करीब 30 मिनट। पहले 15 मिनट सामने के पूरे शरीर को रोशनी दें और अगले 15 मिनट अपने पीछे के पूरे शरीर को। जैसे ही पसीना आना शुरू होता है, सूर्यस्नान सूर्यस्थान करते समय क्या पहनें? कम से कम कपड़े पहनें ताकि रोशनी सीधा आपके स्किन को मिल सके। पहनने ही हैं तो पतले सफेद कपड़े पहनें, मोटे या फिर पॉलिएस्टर या सिंथेटिक के कपड़े पहनकर सूर्यस्थान करने का कोई फायदा नहीं। और हाँ, ग्लास या कांच के आगे कमरे में बैठकर सनबेधिंग ना करें, उससे फुल स्पेक्ट्रम सनलाइट मिले। सूर्यस्थान करते समय सूर्यदेव को धन्यवाद बोले। वो ही हैं जो हमारा इलाज करने की शक्ति भेज रहे हैं। वो नहीं होंगे धरती पे तो कुछ भी नहीं होगेगा, कोई पेड़, कोई फल, कोई सब्जी नहीं होगेगी। वो ही हैं जो एनर्जी भेजते हैं। सूर्य हमें बस देते ही रहते हैं और लेकिन चिंता ना करें। सुबह और शाम की धूप बहुत हल्की होती है, जिससे इतनी टैनिंग नहीं होती। आपको फिर भी दिक्कत हो, तो अपना सर कपड़े से ढक लें और बाकी शरीर को रोशनी दिखाएं। याद रखें कि सनस्क्रीन कभी ना इस्तेमाल करें। सनस्क्रीन स्किन पर लगाने वाली सबसे जहरीली चीजों में से एक है सूर्य के बाहरी दबाव के कारण ये केमिकल त्वचा के गहराई तक अंदर जाते हैं। वो सूर्य नहीं जो हमें कैंसर देते हैं, लेकिन सनस्क्रीन में मौजूद वो सारे केमिकल हैं जो हमें कैंसर देते हैं। तेज दोपहर की धूप से बचने के लिए टोपी या कपड़ों का उपयोग कीजिए। अपने सर को कपड़े से ढक लें। अप लेकिन ये डर कहां से आया? ये कॉस्मेटिक और फार्मसूटिकल कमपनी हैं जो समाज में ये डर को डालती हैं यदि हम सूरे से डरेंगे नहीं तो उनका प्रड़क्ट कैसे खरीदेंगे? हमारे पूर्वज ये कोई चीज नहीं खुली हवा में सूर्य नमस्कार करें ताकि आपको एक बार में दो-दो फायदे मिलें धूप का भी और एक्सरसाइज का भी सूर्य की रोशनी को अपने घर और ऑफिस में प्रवेश करने दें अपने खिड़कियाँ खोलिए अपने पर्दे खोलिए आपका घर का एनवायरनमेंट एकदम से बहुत पॉजिटिव हो जाएगा सनलाइट और मेंटल हेल्थ का बहु आपको काम करने की एनर्जी महसूस होगी। आप अपने काम या पढ़ाई में ज़्यादा अच्छे से ध्यान लगा पाएंगे। चलिए आगे बढ़ते हैं। सनलाइट का सबसे ज़रूरी फायदा हमारी हड्डियों के लिए होता है। जब हमारे शरीर को सूर्य की रोशनी नहीं मिलती, तो हमारी हड्डियाँ खोखली, हॉलो हो जाती हैं और कमजोर होने यानी मजबूत होती है। अगर आपके घुटनों में दर्द रहता है, तो अपने पूरे शरीर के साथ साथ अपने घुटनों को भी धूप दिखाएं और कुछ ही दिनों में आपको फर्क महसूस होने लगेगा। अगर आपके शरीर का कोई भी हिस्सा डीजेनरेट हो गया है, तो सूर्य स्नान करने से वो रीजेनरेट यानी उसमें जान वापस आ ज पीट का दर्ध चला जाएगा. जो काम महंगे महंगे टैबलेट नहीं कर पाती, वो आपकी सूर्य की रोष्णी कर देती है. कोई सप्लिमेंट या गोली लेने की जरूरत नहीं है. दुनिया में ऐसी कोई गोली नहीं है, जो आपके शरीर में वाइटमिन डी की कमी पूरी कर सके. सूर्य की रोष्णी एक ऐसी चीज नहीं है, जो आप एक कैप्स सूर्यस्नान करते समय अपने पेट को जरूर धूप दिखाएं। ऐसा करने से आपकी जटहर अग्नि, यानी खाने को पचाने वाली शक्ति बढ़ जाएगी। आपका खाना जल्दी पचने लगेगा। अगर आप रोज सूर्यस्नान के साथ-साथ अपना डाइट भी चेंज करें, तो सारे स्टमक रिलेटेड डिजीज़, एसिडिटी, आईबीएस, अल्सर्स जड़ स और वो है सूर्य दर्शन यानी सन गेजिंग सन गेजिंग एक ऐसी प्राक्टिस है जो बहुत पहले से चली आ रही है सन गेजिंग का मतलब है रोजाना लगभग पंद्रा मिनट के लिए हलके सूरज को देखना मा प्रकृती की शरीर को दी गई सबसे खास देन हमारा ब्रेन है प्रकृती ने इस ब्रेन को जन्म से ही इनफाइनाइट शक्ती देके भेजा है दो से तीन परसेंट उपयोग कर पाते हैं। हमारे ब्रेन में इतनी शक्ति है, लेकिन क्योंकि इसको सूर्य की रोशनी नहीं मिल पाती, वो शक्तियाँ इस्तेमाल में नहीं आ पाती। सूर्य की रोशनी ब्रेन के लिए इलेक्ट्रिसिटी पावर सप्लाई जैसी है। अगर ब्रेन को ये इलेक्ट्रिसिटी मिल जाए, तो ये चमत्कार कर सकता ह हमारी आँखों के थ्रू, हमारी आँखें हमारे ब्रेन का ही एक हिस्सा है। मेडिकल डॉक्टर भी बताते हैं, it is an extended part of the brain, window of the brain। अगर सूर्य की रोशनी ब्रेन तक पहुँच गई, तो आपकी सोई हुई शक्तियाँ धीरे-धीरे एक्टिवेट होंगी। और यही कहा गया है गायत्री मंत्र में, सदी मही दियो योना प्रचोदया का मतलब, हे सूर तो सन्गेजिंग कैसे करें? आपको आँखों से सूर्य को देखना हैं. पहुत आसान है. जिस तरह आप टीवी का दर्शन करते हैं, उसी तरह अब आपको सन का दर्शन करना है. चाहे तो बीच में आखें जफका भी सकते हैं. सन्गेजिंग के समय चश्मे या कॉंटाक्ट लेंस नहीं पहनने. सन्गेजिंग कब करें? केवल सुरक्षित समय में. सु First hour of the sun और the last hour of the sun। इस समय पे कोई ultraviolet rays नहीं होती। दोपहर में जब सूर्य बहुत strong हो, तब sun gazing बिल्कुल नहीं करनी। Sun gazing कितनी देर करें? करीब 15 से 20 minute। कुछ समय बाद आप महसूस करेंगे कि आपकी thoughts, आपके विचार जा रहे हैं। अगर किसी दिन सुबह आपकी sun gazing miss हो जाए, तो आप शाम को कर सकते हैं। यदि संभव हो, तो संगेजिंग के समय सीधा खड़े रहें, नंगे पैर जमीन पर। इसको अर्थिंग कहते हैं। वर्षों की धूप उस जमीन में फंसी होती है, जो आपके पैरों के थ्रू पूरे शरीर में ट्रांसफर होती है। संगेजिंग का पहला बेनिफिट होगा आपकी आँखों पे। आपकी आँखों की दृष्टि बढ़ जाएगी। आप टेस्ट बदलने होंगे। आप पुराने चश्मों के साथ जारी ना रखें। Cataracts, nearsightedness, farsightedness, देखने की मुश्किल, migraine सब कुछ गायब हो जाएगा। आजकल scientists के द्वारा इतनी सारी किताबें लिखी गई हैं Better eyesight without glasses, reading without glasses। हमारे वेदों में एक पूरी उपनिषद है, जिसका नाम है चक्षु उपनिषद। इसमें बताया है कि चक्षु के रोगों को दूर करने तीन महीने जब आप लगातार संगेजिंग करते रहेंगे, तो दूसरा फायदा ये होगा कि आपकी कंसंट्रेशन, यानी ध्यान लगाने की क्षमता बहुत बढ़ जाएगी। जो सूर्य से फोटॉन्स करके एनर्जी आती है, वो एनर्जी आपकी आँख से आपके ब्रेन तक पहुँचेगी और आपकी ब्रेन सेल्स, न्यूरॉन्स को एक्टिवेट करेगी। सादा स्थिर होगा। फिर क्या होगा? सूर्य की ऊर्जा आपके पीनियल ग्लैंड को मिलेगी, जिसको हम थर्ड आई, तीसरी आँख भी कहते हैं। और तीसरी आँख के अंदर हमारी इंट्यूशन पावर होती है। तो सनगेजिंग करने से आपकी तीसरी आँख खुलती है और इंट्यूशन बढ़ जाएगी। ये जो सूर्य है, ये लाइट है। आप हमेशा पॉजिटिव महसूस करेंगे, नेगेटिविटी जाने लगेगी, आपके मानसिक स्वास्थ्य में बदलाव आने लगेगा। देखिए, सूर्य की रोशनी एनर्जी है, हमारा भोजन है। जब हम खाने के बारे में सोचते हैं, हमारे दिमाग में सिर्फ फल, सब्जियाँ और अनाज आता है, है ना? लेकिन थोड़ी और गहराई में सोचिए, हम सनलाइट जो हम आमतौर पर खाना खाते हैं, वो एनर्जी का सेकेंडरी सोर्स है। एनर्जी का ओरिजिनल सोर्स तो सनलाइट खुद है। जब हम कोई भी फल या सब्जी को खाते हैं, सनलाइट ही तो है जो हमारे अंदर उसके थ्रू जाती है और हमें जीवन देती है। तो सनगेजिंग करने से आपको एनर्जी का सबसे ओरिजिनल फॉर्म तो जब आप तीन महीने तक रोजाना संगेजिंग करते रहेंगे और जैसे आप सूर्य से अधिक एनर्जी लेते रहेंगे, वैसे-वैसे आपकी भूख कम होती रहेगी क्योंकि अब सामान्य भोजन के बदले आपको सूर्य से भोजन प्राप्त हो रहा है। 16 घंटे उपवास जिसकी बात हमने पिछली वीडियोस में की थी, वो बहुत आसान हो जैसे ही आप सूर्य के साथ रिष्टा जोडेंगे, आपकी जिन्दगी बदल जाएगी.










