स्प्राउट - प्रकृति के सबसे प्राणिक भोजन | फायदे और उगाने का सही तरीका | Vegetable Sprouts

A guide to growing vegetable sprouts at home, explaining how they differ from the lentil and moong sprouts most people know. Vegetable sprouts are edible seedlings packed with nutrients and easier to grow than you might think.
वाह सुबह आप ये क्या कर रहे हो?
मैं वेजिटेबल स्प्राउट्स उगा रही हूँ।
वेजिटेबल स्प्राउट्स? ये क्या होता है? मैंने तो बस दाल, मोट और चने के स्प्राउट्स के बारे में सुना है।
तीन साल पहले तक मेरे लिए भी ये बहुत नई चीज़ थी। लेकिन 2018 में मैं अमेरिका के हिपोक्रेटीज़ हेल्थ इंस्टीट्य तीन महीने का कोर्स अटेंड करने गए। ये अमेरिका का एक बहुत प्रेस्टिजियस नैचुरल कैंसर हीलिंग इंस्टीट्यूट है। यहाँ मैंने अपनी आँखों के सामने देखा कैसे यहाँ सिखाई डाइट और जीवन शैली अपना के लोग अपने बड़े-बड़े कैंसर और ट्यूमर को एकदम ठीक कर पा रहे थे। जब मैंने और गहराई म पोषण बैठा होता है और उसी पोषण के कारण लोग अपनी हेल्थ एकदम ठीक कर पा रहे थे। तो मुझे उसी टाइम समझ आ गया था कि इतनी शक्तिशाली चीज के बारे में मुझे आप सबको तो बताना ही होगा। तो इस वीडियो में मैं आपके साथ वेजिटेबल स्प्राउट्स के बारे में सब कुछ शेयर करूँगी। इस वीडियो के पहले पार्ट में आपको ताकत देने से लेकर इम्यूनिटी देने तक ये प्रकृति के दिए सबसे बड़े सुपरफूड क्यों हैं? और इस वीडियो के दूसरे पार्ट में आप सीखेंगे कि इनको बनाने का सही तरीका क्या है, इंडिया में उगाने के लिए बेस्ट वैराइटीज कौनसी हैं और आप इन्हें इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं। लेकिन सबसे प उसके आसपास की नमी की वजह से वो अंकुरित होने लगता है। उसमें से एक छोटी सी तेल निकल आती है। इस बीज को उस तेल के साथ कहते हैं स्प्राउट। हम आज सिर्फ दालों के स्प्राउटों गाना जानते हैं, लेकिन असल में ऐसी बहुत सारी सब्जियों के बीज हैं जिनको आप अंकुरित करके खा सकते हैं। लेकिन इन स्प्र एस यानी स्ट्रेंथ गिविंग यानी ताकत से भरपूर इस मूली के स्प्राउट को देखिए ये छोटा सा स्प्राउट बड़ा होकर एक बड़ी मूली बनता है आप सोचिए इस छोटे से स्प्राउट में इतनी बड़ी मूली बनने की शक्ति बैठी है जब आप इसे खाते हैं आपको क्या लगता है कहाँ जाती है वो सारी शक्ति आपके शरीर में कि स्प्राउट्स एक पूरी उगी सब्जी के मुकाबले 10 से 30 गुना ज़्यादा पोष्टिक होते हैं। दूसरा फायदा, U यानी अनअडल्टरेटेड, यानी एकदम शुद्ध। आजकल हम में से बहुत लोग ऑर्गेनिक फ़ूड ढूंढते हैं, लेकिन या तो वो बहुत महंगा होता है, या फिर भरोसा नहीं हो पाता कि असल में क्या ऑर्ग बिना किसी केमिकल के, बिना किसी पेस्टिसाइड या हर्बिसाइड के। आप भरोसा कर सकते हैं कि ये शुद्ध है, क्योंकि आप इन्हें खुद उगा रहे हैं। तीसरा फायदा पी, यानी प्राणिक, यानी प्राण से भरे। आप एक एक्सपेरिमेंट करके देखिएगा। दो गमले लीजिएगा। एक में डालें कुछ स्प्राउट के दाने और दूसरे में एक हफ्ते बाद क्या होगा? जिस कमले में पका हुआ भोजन डाला था, वो वैसा का वैसा रहेगा। उसमें से कुछ नहीं निकलेगा। लेकिन जिस कमले में आपने स्प्राउट डाला था, उसमें से एक छोटा पौधा निकल आएगा। क्यों? क्योंकि स्प्राउट में प्राण है, जीवन है, और उन बिस्किट्स, चिप्स, नूडल्स जैसी चीजो कितना प्राण, कितनी ऊर्जा बैठी है और जब आप इसे खाते हैं वही जीवन शक्ति आपके शरीर में ट्रांसफर होती है, आपको ऊर्जा से भर देती है, आपके निर्माण और इलाज के लिए इस्तेमाल होती है और अंदर जाके बीमारियों को नष्ट करती है। अगला फायदा E यानी easy इन्हें उगाने के लिए ना आपको चाहिए म चाहिए तो बस कुछ सब्जियों के बीज, एक पतला कॉटन का कपड़ा और पानी। बस आपको बीज पानी में भिगोने हैं, जिसमें लगता है करीब एक मिनट। अगली सुबह उनको पोटली में बांधना है, जिसमें लगता है और एक मिनट। फिर तीन दिन तक रोज पोटली को खोलके बीज को धोना है। धोने में कितनी देर लगती है? एक मिनट तो पांच दिन में आपको टोटल में कितना समय लगा? सिर्फ पांच मिनट। ये सिर्फ उगाने में आसान नहीं, बल्कि पचाने में भी बहुत आसान है। पचाने में आसान कैसे? बहुत लोगों को तो स्प्राउट्स खाके गैस, एसिडिटी और इंडाइजेशन हो जाता है। देखिए, अब ध्यान से सुनिएगा। स्प्राउट दो तरह के होते हैं। एक और दूसरी तरफ है सब्जियों के स्प्राउट। अनाज और दालों के स्प्राउट को पहचानना थोड़ा मुश्किल होता है, और इसलिए इनको खाकर कुछ लोगों को गैस, एसिडिटी, इंडाइजेशन महसूस होती है। ये उनके लिए तो बहुत अच्छे हैं, जिनका डाइजेशन बहुत अच्छा है, जैसे कि बच्चे, एथलीट्स, भाग-दौड़ करन बैठने करने का जीवन जीते हैं, तो आपके लिए ज़्यादा अच्छे हैं सब्जियों के स्प्राउट। इन्हें पहचाना बहुत आसान होता है, और इनको खाकर गैस एसिडिटी इंडाइजेशन का सवाल ही नहीं। लेकिन लास्ट आर क्या है? सोचिए, रीज़नेबल, यानी ये सस्ते होते हैं। स्प्राउट गाने पर एक बीज अपने से 10 से 15 सारे स्प्राउट्स उग जाते हैं। तो आइए अब सीखते हैं इंडिया में उगाने के लिए बेस्ट स्प्राउट्स कौनसे हैं? वैसे तो बहुत सारी सब्जियों के बीज हैं, जिनके आप स्प्राउट उगा सकते हैं। लेकिन बहुत रिसर्च के बाद हमने ये पाया कि इंडिया में उगने वाली चार सबसे बढ़िया वैराइटीज़ हैं: अल यानी मेथी। ये चार ऐसी वैरायटी हैं जो बहुत ही आसानी से, बिना कोई झंझट के भारतीय मौसम में अच्छे से उग जाती हैं। आप सोचेंगे, अरे, लेकिन ये बीज मुझे मिलेंगे कहाँ से? आप इन्हें अमेज़न से आर्डर कर सकते हैं। लेकिन आपके लिए इजी बनाने के लिए ये सीड्स हमने सार्पिक मूवमेंट की वेबस वेबसाइट का लिंक हमने इस वीडियो के नीचे डिस्क्रिप्शन में दे दिया है। और मेथी के बीज तो शायद आपके पास अभी ही अपनी किचन में रखे हों। उनको उगाना तो आप अभी तुरंत शुरू कर सकते हैं। अब सीखते हैं इन्हें उगाते कैसे हैं। स्प्राउट उगाने का पहला स्टेप है भिगोना। दो बड़े चम्मच बीज ल इने रात बर भिगोने के लिए रख दे दूसरा स्टेप है पोटली करना तो अगली सुबा बर्तन में से पानी निकाल दे एक बार बीज को पानी से धो ले और फिर इस तरह का पतला सूती मलमल का कपड़ा ले ये कोई special कपड़ा नहीं है अब इस पोटली को एक कटोरे में रखकर एक प्लेट से ढकते। ये कटोरा आप अपने किचन काउंटर पर रख सकते हो, लेकिन ध्यान रखना कि इस पर धूप नहीं पड़नी चाहिए। धूप में रखने से ये जल सकते हैं। आखरी स्टेप है धोना। अगले तीन दिन तक आपको एक बार सुबह और एक बार शाम अपनी पोटली को खोलकर पानी के नीचे ये हम क्यों करते हैं ताकि इनमें नमी बनी रहे उगने के लिए नमी बहुत जरूरी है बस तीन दिन ऐसे सुबह शाम धोये और चौथे दिन तक आपके स्प्राउट में से ऐसी लंबी टेल निकल आएगी इसका मतलब ये खाने के लिए तैयार है तो देखा आपने कितना आसान है बस भिगोना पोटली करना और धोते जाना चौथे द अलग-अलग बीजों को अंकुरित होने में अलग-अलग समय लगता है, लेकिन चार पांच दिन में सब खाने के लिए तैयार हो जाते हैं। तैयार होने के बाद आप इन्हें कांच के डब्बे में बंद करके फ्रिज में रख सकते हैं। बस ये ध्यान रखें कि फ्रिज में रखने से पहले इन्हें पूरी तरह सुखाना जरूरी है। आप इन्ह आइए अब कुछ बहुत इम्पोर्टेंट अक्सर पूछे जाने वाले सवाल डिस्कस करें। पहला सवाल, इन स्प्राउट को हम इस्तेमाल कैसे करें? सबसे अच्छा है स्प्राउट को अपने सैलेड में डालके खाएं। स्प्राउट को थोड़ा-थोड़ा ऊपर से डालने के बजाय अपने सैलेड का मेन हिस्सा बनाएंगे। एक परफेक्ट सैलेड बनाने के ल जैसे कि खीरा, टमाटर, गाजर, शिमला मिर्च, शुकुंदर गोभी और 30 प्रतिशत हरी पत्तेदार सब्जियाँ, जैसे कि पालक, धनिया, सलाद पत्ता, पत्ता गोभी मेथी। 10 परसेंट टॉपिंग के लिए आप घर पे बनी स्वादिष्ट चटनियाँ डाल सकते हैं और कोई मेवे या घिसा हुआ नारियल। इस सैलेड को अपने किसी भी एक मील से सूप के ऊपर डाल सकते हैं, टिक्की पे लगाकर खा सकते हैं, किसी भी दूसरी चीज़ में डालकर खा सकते हैं। बस ये ध्यान रखिएगा कि इनको ज़्यादा क्वांटिटी में डालना है, कम से कम आधा कप। अगला सवाल, अगर इन स्प्राउट में फुफुंद लग जाती है, तो क्या करें? कुछ लोगों को कभी-कभी ये प्रॉब्लम आ सकत चिंता ना करें, फिर से कोशिश करें। इस बार उनको किसी ऐसी जगह रखें जहाँ थोड़ी हवा चलती रहे। अगर आपकी किचन में खिड़की है, तो उसके पास रख सकते हैं। या फिर स्प्राउट के पास एक छोटा पंखा रखते। फुफुंद या मोल्ड तभी लगती है जब स्प्राउट को अच्छे से हवा नहीं मिल पाती। जैसे ही हवा बढ़ाएंग और यहाँ क्लिक कर कर स्प्राउट से बनी कुछ स्वादिष्ट रेसिपीज जरूर जरूर देखे ताकि आप इन्हें यूज करने के और तरीके सीख सके।










