Priests lead the Ganga Aarti ceremony at Assi Ghat in Varanasi, chanting mantras and invoking the river goddess and Hindu deities. The call-and-response ritual includes repeated devotional phrases like "जय गंगे माता" and "हरि हरि" as the congregation lights lamps and seeks blessings and purification.
Chapters
प्रेम से गोलियाँ थी बिना मुंह भी आई हाल की तुम्हें वो माता तो पिता तुम्हें वा तुम्हें वो बंदूक चश्मा तुम्हें तुम्हें वो विद्या बगंदर शीतम ये ना नस में इसी को नदी समा बजा नदम हो न गड़ा न तेजी समा सफेद नम हो तुमार तमशो बिना सितारकम् नमामि विक्रिधे शुरुपादा नोदकम् तातारों सर्वभूमि बना रहे दुखा ध्यान सीना हुयो हुयो समान से हम गंगा करण गणमणि यज्ञकार सर्वे भवन तुसुखी महा सर्वे कथन तुनिरात नया सर्वे भक्तारी परन्तु माता जी तुम महा दीपदेव नमस्तु भीम, आयम सुखदायकम्, शत्रुओं के विनाशकायकम्, दीपदेवो समोभूति। आप हरी पुनः, आप हरी पुनः। गंगा का नाम है मन में अपनी। जरामी श्रीशंकर के भाई एक रूपत बता लो जरामी श्रीशंकर के भाई इबन खासिबुद्दीन राजी पाओ साहिब आए इबन खासिबुद्दीन राजी पाओ साहिब आए जैसे अग्नि रखना तू ही कुछ जैसा दूर रखना सरकार में कुछ बंद तू ही चेक कर हम काम करो जय गंगे माता मैया, जय गंगे माता। जो नए युग को पाया था, जो नए मैया को पाया, जो नए युग
को पाया, जो नए एक नहीं था भी ज़रूरी शर्मा कर दिया था मैंने शर्मा कर दिया था यम की खास मिलता तो यम की खास मिलता तो परब नहीं था तो जाने को क्या था आज की बात तुम्हारी जो चलने का था भैया जो चलने का था मात्र भी है दर्जने अपना भी है दर्जने मुझे तुम्हारा
हज़वती कम हो गए, देवी श्रीमती स्वरी हज़वती कम हो गए, देवों अंधकार में परन्तु तन के देवों अंधकार में परन्तु तन के शंकर मोहनी दीवानी दिव्य मणि ममत्रास्ता मामा कर करे देवीश्वरे परे अद्वती कुंडले देवीश्वरे परे अद्वती कुंडले आप लोगों को आपकी मैं डांस करना है, डोनेशन? बोलिए। चार कोलेशन करना है। अगर आप लोगों को आप लोगों को आपकी मैं डांस करना है, तो बोलिए। एक हार हूँ, गुरु में प्यार है पापा, स्नान है पानी। देवी श्री श्री, भगवती तंग सुनके देवी श्री श्री, भगवती तंग सुनके पतितो खारे रे सांड बिगड़ के खंडी लगी रीवा मनित पतितो खारे रे सांड बिगड़ के खंडी लगी रीवा मनित इश्म जननी है मुनि वासने की पति परिवार की विरुवासने की देवी श्री श्री अदवती बन गए देवी श्री श्री अदवती बन गए हराम हरी हराम हरी सभी भक्तगण अपने स्थान
पर खड़े हो जाएं खड़े होकर हाथ
जोड़कर माधव का काज ध्यान देंगे अपने
हर प्रकार के किसी वस्तुओं का आपको
भी एक बार हमला कर देंगे किसी
भी प्रकार की कोई भी आपकी वस्तु ना छूटे इस बात का आप सभी
लोग ध्यान रखेंगे हरे पूर्व खड़े होकर
हाथ जोड़कर एक ब
मदा पारम वाराणसी पुरापादे हर्य वेश्वनाथम हर्य वेश्वनाथम गंगा गंगेति अप्रोयात योजनानाम सतयरबि मोक्षति सर्वभावे भयो पेश्तुलोकम जगत् चदि हरि हियो राजाधिराजाय अप्रतहि बताइने नमो वयम् वये स्रवणाय कुरुमहि समय कामान कामकामाय महियम् कामेश्वरो वये स्रवणो ददा स्यादा सर्वभूमा सर्वायुदा अन्तादार परारगादा वृद्धि प्यारी समुद्र पर्यंताया एकराणिते तदाक्री शास्त्रों को विगदा मरुता परिवेश धारों हर तस्या वजन क्रिये आविरिक्षिदस्य गामबरे विश्वेतीवाहा समातदयदे ओम विश्वदक्षक्षुरुदविश्वदो मुगोविश्वदो बाहरुदविश्वदस्पातो समाव्यात् रावदी गांपत्रे ध्यावा भोवेचनयतेवहि कहा हरि ओम एकनंदाय विद्माई वक्र कुंडाय रीमाई दत्ता दत्ते प्रसोदयाता नाना सुगंधे बुद्धपाणि यथाकालोत्पवानिजा वस्पाज जलिरमया दत्ता क्रिहारा परमेश्वर स्वरी मंत्रपान जले हैं जमर पयामी यानि कानी जबाबानी ज्ञाता ज्ञान कृतानि जा दानि सर्वाणि रस्यन्दिम प्रलक्षिणा मपदे पदे प्रेम त्यागी एकता भैया की