किसी भी कीमत पर भक्ति नहीं छोड़ें | 04 Jun 2023 | Ghaziabad | Srila Gopal Krishna Goswami

The recording captures a devotional gathering led by Srila Gopal Krishna Goswami in Ghaziabad on 4 June 2023. The session opens with collective chanting of Hare Krishna and Hare Rama, interspersed with call‑and‑response chants from the congregation. The speaker repeatedly exhorts the audience not to abandon bhakti under any circumstances and stresses that devotion must be maintained even when faced with difficulty. Practical temple matters are discussed: a “silent mode” for meditation, distribution of spiritual books, and the need to organize the mandir’s activities so that worshippers can sit, chant, and serve without disturbance. The discourse moves into social teaching, contrasting caste (jati) with guna (qualities) and urging an inclusive view where spiritual merit, not birth, determines worth. Several mythic narratives are narrated – a king who summons ministers and brahmins, the appearance of divine forms such as Neel Matal, Vidyapati, and Lalita, and the celebration of a deity’s birthday. Additional sections describe the ritual creation of a deity statue (munti) requiring a 21‑day isolation, the role of Vishwakarma as a divine architect, community resource mobilization through taxi earnings and government pension to fund mandir activities, compassionate care for ill devotees (including cancer and ICU needs), and the observance of a pilgrimage called Sanala Yatra. The speaker also reflects on the ideal of Ram Rajya, describing it as a time of true happiness and social harmony. Throughout, the tone remains devotional, persuasive, and instructional, encouraging disciplined service, love (prema), and sincere worship as the path to spiritual progress.
Chapters
سوال کس کو سوالی مراج آ چکے ہیں ہم سب پہ کرپا پر سامنے گے دیئے گے بھگو مراج کا جوڑ سے مہامتر مولد کی سواقت کریں گے
ساتھ
ہی ہم سواقت کرتے ہیں ہمارے بیچ میں سری باہر کرشن پریہ پوروزی کا سور سے हरे کृष्णा महमत बोलेंगे हरे कृष्णा हरे कृष्णा भरे भरे भरे भरे भरे भरे भरे भरे भरे भरे भरे भरे भरे भरे भरे भरे भरे
भरे भरे भरे भरे भरे भरे भरे भरे �
وہی پہ بیٹھنے کا بیعاس کریے کیونکہ مندے کا چھوڑا ہو رہا ہے گروہ آتے آتے وہ کہتے ہیں کہ پھر کہاں بیٹھیں گے جلدی مندے بنانا ہے گروہ آج گروہ بتائیں گے آپ میں سے کتنے لوگ چاہتے ہیں کہ لڑکے بڑھنے پہ بیٹھتے ہیں گروہ آتے ہیں اسی لئے اس میں سے یہاں ہی مندے بڑھنے پہ بیٹھیں گے آپ لوگوں کے صحیحوں سے تو آپ سب سے نمیدن ہے کہ silent mode میں خود بھی بچوں کو بھی آؤ اور دوسرا بچہ کونسا مولا آئے اس کو کرنے کا احسان ہے اور جنہیں کوئی درس راحت ہی آتا ہے تو وہ لے کر احسان کرتے رہے ہیں اونچہ ہاتھ جو بھی نمیدن کریں کہ وہ بڑھ کر کے آئے اور پھر درس کر کے جائیں تاکہ disturbance نہ ہو ماراج بھلے ماراج بھلے ماراج
بھلے ماراج بھلے ماراج بھلے ماراج ماراج بھلے
ماراج بھلے ماراج بھلے ماراج بھلے ماراج بھلے ماراج بھلے ماراج بھلے ماراج بھلے
ماراج بھلے ماراج بھلے ماراج بھلے ماراج
بھلے ماراج بھلے हाई
कृष्णा। बढ़्धवर्षि नहीं है। इसे चाहते हैं जैसे मैं घरातू चाहते हैं। جائے ناں تک ڈھاؤں گے بھی ہاں
جائے ناں تک ڈھاؤں
گے گھوپی
جانا والا بھاگ گھوپی جانا والا بھاگ
جھٹا جھٹا جھٹا جھٹا جھٹا جھٹا جھٹا جھٹا جھٹا جھٹا جھٹا جھٹا موسیقی سیدھے سلطان صلی اللہ علیہ وسلم صلی اللہ علیہ وسلم
جو حیدر صلی اللہ علیہ وآلہ
ہے ہاں ہاں ہاں ہاں ہائے کشنان
ہمارے کشنا پیچھے سے دوہر سندھر آواز نہیں آ جائے گی یعنی آپ لوگ اتنا موت ہانے کریں گے اتنا اچھا آواز آ جائے گا بلکہ سانتی بنائے رکھیں بلکہ سانتی رکھیں یہ ستاچار نہیں ہے جو ہماراں بول رہے ہیں آپ لوگ اپنی کاثہ سلوک کریں ستاچار ہوتے رکھیں بلکہ بلکہ ओम्योंमर्देवास्तेवाया ओम्योंमर्देवास्तेवाया
ओम्योंमर्देवास्तेवाया ओम्योंमर्देवास्तेवाया ओम्योंमर्देवास्तेवाया ओम्योंमर्देवास्तेवाया
ओम्योंमर्देवास्तेवाया ओम्योंमर्देवास्तेवाया अन्देयां स्री दोभु स्री उठावादान स्री उठावादान स्री उठावादान स्री उठावादान स्री उठावादान स्री उठावादान स्री उठावादान स्री उठावादान स्री उठावादान स्री उठावादान स्री उठावादान ओपेश्ट ओपिपातांता सहारा खालता मुष्टे तप्पांचन ओडांधी खारे लिलावनेश्वरी विश्वसमानुस्द्रेधेधी प्रणमांधी धरित्विये वानचात्रत्वरुवेश्टा विवासिंदुभरेयोचा पतिथाना पावने प्रोवेश्वरेयोदनोमना �
हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे
हरे राम हरे राम राम राम हरे
हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा कृष्णा تو یہ ह جو مریعہ ہے ایک روک سے بہت چھوڑا مریعہ ہے، کچھ بات ہے؟ اور اس بات کیا کہتے ہیں کہ اس کی وجہ سے پھر بھی مشکلوں میں جوائیں کیا، پلان بنایا تھا، سردہ دھائی بڑا ہے، سردہ کے سارے پھولی مہر جو میں ہمیں ہمیں ہمیں ہمیں ہمیں ہمیں ہمیں ہمیں ہمیں ہمیں ہمیں ہمیں ہمیں ہمیں ہمیں ہمیں ہمیں ہمیں ہمیں ہمیں ہمیں ہمیں ہمیں ہمیں ہمیں ہمیں ہمیں ہمیں ہمیں ہمیں ہمیں ہمیں ہمیں ہمیں ہمیں ہمیں ہمیں ہمیں ہمیں ہمیں ہمیں ہمیں ہمیں ہمیں ہمیں ہمیں ہمیں ہمیں ہمیں ہمیں ہمیں ہمیں
ہم جس کی کتابیں باندھتے ہیں یہ
نتیجہ کیا ہے؟ یہ نتیجہ ہے کہ آپ دیکھ رہے ہیں بھکتوں کی تنکیاں اور مندر میں بھکتیں جاتے ہیں یہ ہواشہ نہیں ہے کہ آج ہزار کتاب بانڈھو گے کل ہزار میں بھکتا جائیں
گے یہ جانتے ہیں کہ یہ ضروری نہیں ہے کہ آپ بانڈھو گے کل ہزار بھکتا جائیں گے مندر میں
سیڑی ڈیس پلانڈ ہے اور آہستہ آہستہ وقتوں کی سنگھہ بڑھتی جائے گی۔
آہستہ آہستہ وقتوں کی سنگھہ بڑھتی جائے گی۔
وہ آج نان یاترہ ہے، پڑھیں گھم سے دیکھا جائے، بھگوان کا جنم دن ہے۔
آج نان یاترہ ہے، پڑھیں گھم سے دیکھا جائے، بھگوان کا جنم دن ہے۔
हम सداरे भगतों के लिए बोदे केक बनाते हैं, भगवान के लिए भूल गया हैं। आज है भगवान का जनम दिन।
आज है भगवान का जनम दिन।
भगवान केक बनाया हैं। तो भगवान का जनम दिन। अभी हम को नहीं दूपों में प्रकर करते हैं। मैं एक हैं चाहिए भगवान अपने अपको अनेक रूपों में प्रकत करते हैं, में एक है जगना जी का रूप।
भगवान अपने अपको कई रूपों प्रकत करते हैं, उसमें से एक है जगना जी।
जगना जी प्रकत करते हैं, जरनाजी
इस्तुत्वी प्रगट हुए थे सत्यों में। आजी के तितियों जरनाजी इस्तुत्वी प्रगट हुए थे।
एक प्राजिनी सबर में एक राजा थे, उनका राम था जिन्डर चोड़े.
एक महां राजा थे जिन गे नाम था इन्दृ दूरी।
इन्दृ दूरी नाम क्या? मुझे द्धानी मुझे बात करते थे उनके मन में एकी भाव रहता था भवान
की समभाव इन्दुं के बहुती उच विचार के थे उनके मन में एकी भाव रहता था कि भवान के बढ़ने के
�
बगवान की सहनारत कैसे हो?
और उनके ने कोई कोई भाव नहीं था।
और उनका कोई भाव नहीं था।
जब समाज के नेता धार्मिक विचार के हो तो पुरा समाज सुखी रह जाया है।
जब समाज के नेता धार्मिक विचार का हो तो समाज सुखी हो जाता है।
यो पूरा समास दुखी बतता है।
जो नेता भोती कायों में जुड़ जाता है, तो पूरा समास दुखी हो जाता है।
आज भी हम राम राज्या के चर्चा करते हैं। क्यों? राम राज्या के समय माल रहे हैं। केवल असली सूखता है।
रामराज के समय में हम देखते हैं कि समार्ज में असली सूखता है। सब अनना है जी।
सब प्रदार की आवशक्ता था आपके लिए। और मिर्ति के समय में भी आपको चुन सकते हैं।
मिर्ति के समय में भी आप चुन सकते हैं, मनना हैं जी।
आ�
آج اگر یہی چونکشا سب کو مل جائے آج کے سانے میں آپ نہیں چونکشا سمجھ سکتی کہ سمجھ سکتی کہ سمجھ سکتی کہ سمجھ سکتی کہ سمجھ سکتی کہ سمجھ سکتی کہ سمجھ
سکتی کہ سمجھ سمجھ سکتی کہ سمجھ
سکتی کہ سمجھ سکتی کہ سمجھ سمجھ
سکتی کہ سمجھ سکتی کہ سمجھ سکتی
کہ سمجھ سکتی کہ سمجھ سکتی کہ
سمجھ سکتی کہ سمجھ سکتی کہ س
بھرام راجے کے سمیں جو ہیں بھرامان،
بھرامان ہیں شاہدی شاہدی شاہدی مراج جنگلہ ان کے محل میں بیٹھے تھے شاہدے ان بھراموں کے ساتھ ایک بھرامن ان
کے محل میں آیا जब माराजि निगन अपने महाज़ में बैटे के ब्राह्मनों के साथ उसने भी विशेश ब्राह्मन आये।
ये राजा तुमारे राज्या में एक पूधी प्रेम्वेव। तुमारे राज्या में भगवान स्वयम प्रकट हुए ही। क्या क्या है उनका नाम नील मातर।
उनका नाम नील मातर।
वो इतने कप्सूरत है वो इतने कप्सूरत है कि एक बारा आप देखोगे तो वो दिल करेगा आप देखे रहो।
एक बारा आप उनका दर्शन कर लोगे तो आपका दिल करेगा तेंता ही रह जाएगा।
वो ये कह अपने मंत्रियों को बुलाया और ब्राम्यों को बुलाया।
राजा अपने मंत्री और सारे ब्राम्यों को बुलाया।
एक नील मालों नाम के तो भवान परकट हुए। आप मेंसे किसी ने सुना है नाम नील मालों।
तो राजा अपने मंत्री और ब्राम्यों को बताया कि भवा
अपनोंने बहुत बर्शना हैं इसमें हमने कहा हमने देर नाम सनना हैं राजाना नहीं होगा हमने जाहें ब्राम्यों को पाड़ दिया नोहर्ण साथ इश्वेर को सब होगा सब जाओ घाय घर जाओ और पूछो निर्मालव भवान का रूप मैंने देखा हैं।
भी महराजी इंदुने सारे बनामों को चालो दिशाओं में भेज़ते हैं इस वेश नौर्ट साउस में और बोले जाओ घाय में ढूल के आओ पूछो कहां है निर्मालव।
پیچھے
سے بہت آواز آ رہی ہے پیچھے سے بہت ڈسپلین دیکھ رہے ہیں آپ ڈسپلین دیکھ رہے ہیں آپ ڈسپلین دیکھ رہے ہیں بھگوان دو روح میں
پرکت ہوتے ہیں हमार का रूप बनाया जाता है सास्त्रों की अधार पर एक
रूप भगवान के सास्त्रों की अधार पर बनाया जाता है और दूसरे होते हैं
स्वें भुव भगवान जो स्वें प्रकत होते
हैं
भारत में
बहुत सारे प्रसिद मुर्तियां हैं जो की सेल्प मेनिफेस्टियों हैं, स्वें भू हैं।
नीर मानव जो थी भवाईन ने खुद अपने आपको पकड़ के आजा ये शुरू के लिए।
सारे ब्रामन नाजा के पास आये और
बोले हम घर घर गये लेकिन किसी
ने नील मालों का नाम भी नहीं सुनाये। सारे ब्राह्मन लोड गये। एक नहीं लोडा। इसका नाम था विद्यापती विद्यापरी।
विद्यापरी देखा मैं नहीं लोडना मैं अपने राजा को कुछ नहीं कर सक।
विद्यापरी बोले कि मैं तब तक नहीं लोड़ूंगा जब तक मैं इस घमर का पता नहीं लगा
विद्यापती जंगल में रह रहे थे वहाँ एक भक्त खान्दान था विद्यापती
जंगल में रह रहे थे वहाँ एक बहुत महान भक्त रहते थे जिनका नाम था विश्वासु और पुत्री का नाम
था लडिता विश्वासु जो उसे नीची जाती
कहते थे विश्वासु थे
जाती का काम
होता है जानवरों के देवा करना।
बिल्कुल नीची जाती करते हैं। उसकी बेटी लडिता में ब्रामन के गुन थे।
हम बेटी को पहचानते हैं गुनों के अधार पर।
यह नहीं किया जाता है आप उच्छी जाती के हो और निच्छी जाती के हो।
भगवान भवागीता में हम बोलते हैं चतल मर्णवाया सिस्टम तो गुनों के आधार पर वरे व्यक्ति को पहचाना जाता है, लिदायत के लिए जाता है कि आप उच्छी जाती के हो या न
आज
हमारे देश में सब जगड़ा करते हैं तुम नीची जाती के में उची जाती माँ।
लोग लडते हैं नीची जाती में नाम निकाने के लिए।
विद्यापती
लालिता दोनों
निर्णे की है कि
हम सादी कर रहे हैं। विद्या पती यह नहीं देखे कि यह
नीची जाती का है उन्होंने लगता के अंदर मैं बुन देखे की तो इसके अंदर उची जाती का बुन है तो
विद्या पती यह नहीं देखे कि यह नरिदा के पितार है रोज रात को जाते हैं तो कई बाद एक है जोझ रात इन बाद जोड़ते हैं।
तो पित्यापती देखें कि लगता है कि जो पिता विश्वासन है वो रोज रात को कहीं जाते हैं और बहुत देर रात में आते हैं।
और वो जो आते हैं तो विश्वासन है कहीं जो पड़ी सुनंद आते हैं।
सुन
اپنی پتہ نے کہا کہ میرے
پتہ کہاں جاتے ہیں؟ پتہ نے کہا
کہ میرے پتہ نے کہا کہ میرے پتہ نے کھاسا دے جائے کسی کو بات بتانا میں کہاں جاؤں گی؟ پاپا
نے مجھے بتا دیا ہے کہ بہت سکھ آدھے سے کسی کو نہیں بتانا میں کہاں جاؤں گی؟ میں نہیں بتاؤں گی.
تو پھر پتی نے کہا آگے میں اپنے آدھے ہوں، میں نے کہا کیا
چھوٹا؟ پتی کا پتی بلیک میل کرنے لے گی، بولے آگے کر میں تمہارے پتی ہوں، میرے آدھے سفال کرو۔
تو پتی نے کہا جنگل کے کونے میں ایک سویم پکڑ ہوئی موٹی ہے جن کا نام ہے نیل مادب اور میرے پتا اس بھگوڑا کی پوجا کرتے ہیں اور بڑے سدالنوں سے پوجا کرتے ہیں मैं महनी रहा था कि विद्यापती कोई स्थान में लेके जा रहे हैं।
तो वोनों ने निवेन कर कि विद्यापती कोई स्थान में लेके जा रहे हैं। तो वोनों ने निवेन कर कि विद्यापती कोई स्थान में लेके जा रहे हैं।
तो वोनों ने निवेन कर कि विद् आंग पर पटी लगाओंगा वाले आँखो और मोचे पर पटी खोड़ोंगा।
तो हमें बोला विश्वासने की एक सर्थ है जिस सर्थ मैं तुमको ले के जाओंगा। क्या है वो सर्थ तुम्हारे आँख पर काला पटी माल दोगा और जब वो स्थां में पहुंचाएंगे त और
एक चोड़े में कपड़े में ग्रेंग स्थाना नहीं प्रिवारात में फिक ले जा रहे थे इस मालोड़ा से इस हमें के साथ हوں گئے گے और उनको रादा आप दरशा नहीं, आप सो जागेगा।
तो लगिता ने एक चलाकी की एक फोटली में कुछ आनास दे दिए उन्हें पती को ताकि वो रास्ते में गिराते ले जाएंगे जिससे बात में वो पौधा मन जाएगा और जबी बात में जाना � जैसे उस स्थांपे विश्वासों के साथ विद्यापती पहुँचें तो विश्वासों ने विद्यापती का आथ से फ़टी अलगे।
और विद्यापती को भवान का दिविजर्शन प्राप्थ हुआ। विद्यापती नहीं था भवान का ये रूम देखा। विद्यामती बहुत बेहोष हो गए।
अब विद्यामती जब भगवान कहते बिरूप देके तो देखते ही बेहोष हो गए।
इतने सुन्दर लूप कभी उसने कलपना में नहीं की थी।
इतना सुनदर लूप तुम्हें तो कलपना में भी नहीं देख सकता।
वह विद्यामती विजयपती मुझे प्रभावित कुए विजयपती ने देखा वहाँ पहुंचने पर विश्वासू एकड़म सेवा में है भागा थोड़े सेवा में चुड़ गए।
विद्यापति देखे कि विश्वभासु चेहें वो सेवा में बिल्कुल ब्यस्त हो गए। भागा थोड़े सेवा में बिल्कुल ब्यस्त हो गए।
विश्वभासु चेहें वो सेवा में बिल्कुल ब्यस्त हो गए।
विश्वभास
उन पेड़ों जे फल निकाल कर
भगवान को भोग लगा रहे हैं।
और वहाँ एक चोटा तलाब भी था। वहाँ ये जल को लेकर भगवान का
अबिश्चेव कर रहे हैं।
पत्सं पुत्वं फलं सोयं। जैसे
भगवाद बताते है भगवाद घितान पत्ता भी आर्पिर करोगे तुम्हें प्रसंद हो जाएं।
विश्वासूर वो क्या आर्पिर कर रहा था। फूल जंगल से प्राप्त हो देते हैं। बादल जो जंगल में मिलते हैं।
और विश्वार्स क्या करते थे, फूल चलाते थे, कौन फूल जंगल से प्रात होता था, भल जो जंगल से प्रात होता था।
वहाँ विश्वार्स बेद्यापती ने देखा, एक छोड़े तलाब के एक गिनारे पर एक पेड़ था, पेड़ में एक पक्षी बैटे हुई थी। گیر گئی تلاب میں اور جیسے وہ
تلاب میں گئی تراندہ دیوی روپ پرات کر لیا۔
آپ نے کوئی سنائی دے رہا ہے؟
سمجھنے بھی آرہا ہے؟
अगर इस पक्षी को ये भी रूप प्राप्स हो सकता है मैं भी क्यों नहीं इस तदाब में आत्मात्या कर लूँ। मुझे भी विवी रूप प्राप्थ हो जाएगा।
तो विद्यापती सोचे हमाईद्र जब इस पक्षी को विवी रूप प्राप्थ हो गया तो क्यों मैं भी अभी सुसाइट कर लेता हूँ जर में पूठके ताकि इसके पर संग्राव से नहीं क्या था, सूर सूर साथ चालो जी आज मंगार तुम क्राओ मैंने हैं।
यह मुझे इसनी बुड़ा इसके, आज बाता नहीं बुड़ा है।
यह आजी प्रताओ बात सकता है।
आजु प्रताओ डियों। जो महाराज बोलने होई बुड़ा नीर
मादव
को ढूनने के लिए आप तो मैं नीर मादव को ढून लिया जाके ये सूष्णन दो नाजा को।
तो महां से आकास्वानी विजैसुं के मंभे ये विचार आये कि मैं आत्मत्या करन। आकास्वानी विजैसुं के मंभे ये विचार आये कि मैं
आत्मत्या करन। आकास विश्वन सुपासन आर्थिक कोई सुलिदा नहीं थी फिर उसे फ़न दोड़ कर भगवान
को भोग बगा रहा था और फिर उसे फूल करकर भगवान के हाल बना
रहा था और उसके बारे से जल
से लाविश्वन कर रहा था और हमें
इसे सीखना चाहिए ہمیں یہ سننا چاہیے
کہ بھگوان کی سیوار ہم کسی بھی روپے میں کر سکتے ہیں یہ نہیں
کہ بڑا محل ہونا چاہیے یا چاندی کی ریلی ہونا چاہیے سونے کی تھالی
ہونا چاہیے प्रेम
और भक्ति कैसे अनुकुल होगी आप कैसे अनुकुल करोगे आप सबके हिदे में प्रेम और भक्ति है आप
सबके हिदे में प्रेम और भक्ति है ہاں یا نام؟ ہاں یا نام؟ کسی کے اندر نہیں ہے
पर हाम प्राभात के करिपासे उस माह में जुड़े हैं इस में प्रेम और बक्ति दूना ही प्राप्त हो जाएगी।
दूना दूना है कि अभी हमारे लिदे में भलाई नहीं है लेकिन प्राभात के करिपासे जिस से हम जुड़े हुए हैं तो एक लिद
प्रेमा भक्ती को अनुकूल
करना हमारा सबसे बड़ा लगता है। चेतन महापूर्षन आधानियोसामी उसे चदेश भी बता रहे हैं कि जो भक्ति के अनुपूल है उसको फ्रीकार करो और जो प्रतिकूल
है तो उसको चदेश रहे हैं। जो भी कीमत भरनी पड़े भरो तो खिरमभक्सी को हाँ से मत करने लगते हैं।
जो भी कीम
विश्वासों सहाँ उसके मन में भया आ गया।
विश्वासों के मन में भया आ गया।
विश्वासों के मन में भया आ गया। विश्वासों के मन में भया आ गया। विश्वासों के मन में भया आ गया। विश्वासों के मन में भया आ गया।
विश्वासों विश्वासू भया है कि अब ये विज्ञापत्य देनी के मन में मातर भया आ गया� को देख लिया है और जैसे ये राजा को सोचना देखा तो मैं तो सेवा नहीं कर पाओ, मेरी सेवा चुछ जाएगी।
विश्वासू साहता उसा गरीब जानवों के देखबाल कर रहा था, वो और वो बावान के �
विश्वासों बहुत करीट थे वो जानवरों भी देखमा करते थे क्योंकि करीट थे इसलिए बहुत समख करीदे से पढ़ा थे।
मुझे भाय था अगर किसी परतार से राशा को पता लग जाये राजा तो एक मिनट में मुझे निकाल लेगा भर्वान के लिए भैल बना लेगा।
विश्वासों
के मनने ये भैल था।
अगर
मैं इसको सेवा दूँगा तो मेरी सेवा छोड़ जाएगे। وہ بھائی ہمیں رکھنا نہیں چاہیے، ہمیں بشواث ہونا چاہیے جو بھاگاں کے چاہے وہی پرابت ہونا چاہیے۔ ہمیں ایس پر کا بھائی نہیں رکھنا چاہیے۔ ہمارے مند میں پورا بھاب رہنا چاہیے، بشواث رہنا چاہیے۔ اگر ہم سچے دل سے سیوا کریں گے हमारे अनदे भाव होनी चाहिए है
कि भैनी होनी चाहिए है, ये भाव होनी चाहिए है कि मैं सच्चे दिल से भगवान की सेवा करूँगा तो मेरी सेवा धन्टी हुए। राके कृष्णा मारेगे और मारे कृष्णा था।
भगवान बचाना चाहिए कोई नहीं मार सकता وہاں ویڈیا پتی جو بیشماس گوھر نے رسی سے بان لیا تھا وہ جا لے جائے گا یہ میرے پتی ہیں وہ چھوڑ دو ویڈیا کے نمیدگی پسچا بیشماس گوھر نے ویڈیا پتی میں چھوڑ
دیا तो विद्यापती
लोटा राजा के महाल में तो इसना प्रसंद था कुछी में नाशा था।
और विद्यापती पिर राजा के महाल में पहुंचे और वो इतने प्रसंद ही भी खुशी में नाचते हुए गए थे वहाँ।
जिवराजान को पता लगा नीर मादव पोच लिया है तो वो अपनी सेना को लेकर उसी स्थान पर पहुँँचे जहां की नीर मादव प्रकट पहुँँचे थे।
और जब महराज हेंदुर को पता च
नीर मादव है नीर मादव है नीर मादव है नीर मादव है नीर मादव है नीर मादव है नीर मादव है नीर मादव है नीर मादव है नीर मादव मादव है नीर मादव है नीर मादव है नीर मादव है नीर मादव
है नीर मादव है नीर मादव है
नीर मादव ये है नीर माद सूचना पहुँच करते हैं। भवान कह रहे हैं ये राजा आप सब मुझे जीन मानव के रूप में नहीं देख सकोगें। आप सब मुझे देख सकोगें। जारू ब्रह्मा के रूप में।
तो महाँ पर आकास्वानी हुई। जैसे सबने सोचा हैं कि मेरे बाते � اب تم مجھے نیل آدم کے روپ میں درسن نہیں کر سکو گے درسن کرو گے تو اب ڈانو ڈانو کے روپ میں درسن کرو گے ۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔ अब तुम जाओ एक बहुत ही बड़ा निसाल तालुब्रम लक्डी का तुपड़ा तहटा होगा आएगा जिसके चर्णों भगवाद के चर्ण चिन होगे उसका तुम मेरा विव्या बता लेगा।
इस प्रे को में महल में ले जाओ, जहांकी हम स्कल्प्रे को बुला कर भगवान का रूम बनाएंगे।
और राजा में महत्रियों को सेनाओं को ले कर गए गए, उठाओं इसको ले के चलो महल में, और भी इसका में भगवान का हुटी बनाओं था।
तो राजा की सेनाओं ने भ
सेधानों نے पहत प्रयास के लिए एक सेंटिमीटर भी तुपड़ी का तुपड़ा तो उसको हिला नहीं पाए।
राजा फिर निराश हो गया। फिर निराश हो गया। क्यों? मुझे पहुंचा भगवान थे ये नहीं था अब वो कहने लगा अब ये सुष्णा भी नहीं था पहले जब
उन्होंने सुनना था तो भगवान है और आये तो भगवान नहीं थे अब उन्होंने सुनना था अगर उन्होंने सुनना था कि उन्होंने लगवी का कुड़ा लेकर फिर सत्यमें बागीने आगराशनाने
में सूचने देते हैं। हे राजा अगर तुम चाहते हों कि आप भवागर्णूप बन रहे हैं तो तुम इनके भक्तों में यहां लाओ आपकी सेहना नहीं हो क्या मेरे यहां पती नहीं बन रहे हैं इन लोगों बलाओ पर
एकड़ाम बना तो आकास्मानी हुए कि ए नाचन यदि तुम मुझे मेरा मुण्टी बनाना चाहते हो तो तुम इनके भक्तों को लेकर के आओ तुमने सेना को लेकर के नहीं इनका भक्त है बिद्यापति और विश्वास जब ये लेकर आएंगे तो फिर तुम मेरा मुण्टी बनाता हो।
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भक्तियां मां भक्तियां मां भक्तियां मां
भक्तियां मां भक्तियां मां भक्तियां मां भक्तियां मां भक्तियां मां भक्तियां मां भक्तियां मां भक्तियां मां भक्तियां मां भक्तियां मां भक्तियां भक्तियां मां भक्तियां मां भक्तियां तो जो
ग्यान आपको प्राप्त मां भक्तिया हो रहा है उसको भत्तियोग बढ़ा जाना है। भत्तियोग का मत्तर है कि आप अपने मन और हिन्द्योग को भगवान गुरु रुप से संगर्भी करते हैं।
जो राजा ने विजेपति अपिर्भाद को मंदल लिया आओ जल्दी इस बा� और उन्हें
आथे एक सेकेंड में उन्हें उठा लेगा।
उन्हें भवान के सेवा की थी उन्हें भवान के अभाई थी। अगर वोड को एक बड़े निराथ में मिठाग रहे साथ में किरतन करते रहे
पहुंचे राजा के महल में पहुंचे राजा
के महल में पहुंचे राजा के महल में पहुंचे राजा के महल में पहुंचे राजा के महल में पहुंचे राजा के महल में पहुंचे सिल्पकार राजा के महल में सिल्पकार सिल्पकार सिल्पकार सिल्पकार सिल्पकार सिल्पकार सिल्पकार सिल्पकार सिल्पकार सिल्पकार सिल्पकार सिल्पकार सिल्पकार सिल्पकार सिल्पकार सिल्पकार सिल्पकार सिल्पकार सिल्पकार सिल्पकार सिल्पका तो हमें कहा हाँ भी चक्री हो जा जा था। इस साथ 14 स्काप्टर आयें और सब के साथ वैसे बोलते हैं तो इनकी बिल्कुल बिल्कुल progress नहीं कर पाए تو
جب وہ لکڑی آیا محل میں تو چودھر جو سیپ کار تھے جو مرتی بناتے ہیں وہ آئے لیکن جب اپنا چینی اور ہتھوڑی اسے مارتے تھے چینی سے اس لکڑی پہ چینی کھوڑ جاتا تھا اس طرح سے چودھر کے چودھر سیپ کار فیل ہو گئے راجہ ہو
گئے پھر دھکی ہو گیا پھر دھکی ہو گیا راجہ پھر ایک بڑا بیٹی آیا پھر دھڑی کی تھی اور اس
باپ میں ایک بہت بڑا بیٹی آیا
मुड़ा विक्ति कौन था विश्व कर्मा थे। बहुत बड़े आर्किटेक हैं।
विश्कर्मा चेने वो बहुत बड़े आर्किटेक हैं। विश्कर्मा
चेने वो बहुत बड़े आर्खिटेक हैं।
विश्कर्मा चेने वो बहुत बड़े आर्खिटेक हैं।
विश्कर्मा चेने
वो बहुत बड़े आर्खिटेक हैं।
विश मैं तमारे लिए भवान न रूप बना दूँगा पर एक शर्प पर 21 दिन के लिए आपको मुझे अकेला छोड़ देना चाहिए तो किसी को अंदर नहीं आना चाहिए।
तो वो जब आये बुड़ा भित्ति तुनने बोला कि मैं तुम्हारे लिए बगवान को मुर्थी बनाओंगा लेकिन मेरे एक सत है। सत कहेंके 21 दिन के लिए मुझे अकिला छोड़ना पड़ेगा और उस बीच मुझे कोई रोके टोके नहीं है।
अगर तुम बीच में आ
और फिर उस महल कप्स में टिक टिक की आवाज सुरू हो रहे थे।
जब हम मुंबे का मंदल बना रहे थे, आप एसे कितने भक्तों ने आदराज़ वाई का मंदल लेका हैं।
आप एसे कितने लोग आदराज़ वाई का मंदल लेके हैं इसमाल।
एक महल मुंबे का मंदल। तो �
तो
भगतों में पूछा
प्रोभात से प्रोभात नहीं कर रहे हैं।
No, this is Ketan for my ears.
नहीं, ये मेरे लिए केटन है।
क्योंकि मैं केटे कर रहा था, वो मेरे लिए वो बना रहे था। That is Ketan. मैं कहीं नहीं हूँ। तो ये देखा जो टेक्टिक आवाज आ रही थी वो एकदम बंद हो गया
है तो जब टिक्टिक आवाज आ रही थी तो सब सोच रहे थी चलो के तर नोटी मंगा रही थी अच्छान से आवाज आ रही बंद हो गयी
थी बारा तीरा देन मील गई थे
बारा तीरा देन मील गई थे
महराज नहीं देखा टिक टिक टिक तो आवाज ही नहीं आगे।
तो बारा त्यार दिर के बाद महराज की टिक टिक टिक तो आवाज नहीं आगे।
तो जो राजा थे वो घबड़ा गए। कहीं एक बिश्व कमा बहर तो नहीं गया।
और नासे घबड़ा गए कहीं ऐसा तो नह
आपको कुछ नहीं करना चाहिए। अप अंदर आओगे वो प्रकट हो जाओंगे।
मंक्रियों में कहा है कि हे राजन हमें कुछ आपको कुछ नहीं करना चाहिए क्योंकि उसने कहा था कि तुम बीच में आओगे तो वो प्रकट हो जाओंगा।
ये पत्ली का क्या नाम गुर्लीचा। नहीं आपको एक्ज़म जा राजा की जो
राणी थी राणी कुण्डी चाहो बड़ी नहीं आपको जाके थोड़ देखना चाहें कहीं हमारा पिया नहीं।
राजा एकदम से कोई खाया नहीं पिया नहीं।
क्योंकि एक दिन सोचने में खाया है ना कुछ पिया है।
राजा नहीं। एकदम दर्वाजा खोल मैंने गलती की है, मैं जल्दी अंदर आ गया, इसके कारण विश्वभर्मा आ प्रतक हो गया।
वो
शोक में थे। वहाँ पहुचे नादमुरी नहीं कहा अब एसी में आगे से निर्मान पगड़ोगे नरुब्रमान के
लिए तो फिर नाराथ जियों में बताते हैं कि आग इस जुम में आज से भग्वान नहीं पादल के नहीं इस दालों ब्रह्म के रुप के रुप के
रुप के रुप के रुप के रुप के रुप के रुप के रुप के
रुप के रुप के रुप के रुप
के रुप के रुप के रु तो
भवान पिर उनको बता है राजा को कि नहीं नहीं तुमने कोई गलती नहीं की ये मेरी इच्छा थी कि मैं इस रूम में प्रकत हूँ तुमको इस रूम में दर्शन देना चाहता हूँ।
तो ये संचेर में कहता है भवान प्रकत हुए कैसे है तो प्रकत हुए कैसे है दर्� प्रभात
प्रभात प्रभात प्रभात
प्रभात प्रभात प्रभात प्रभात प्रभात प्रभात जो
भी दिखता है उसी पे ध्यान लगा। प्रवपात प्रभात बोले की जो भी दिखता है उसी पे ध्यान लगा।
प्रवपात प्रभात चुड़ी आयू से बहुत चुड़ी आयू से अध्यातम में बहुत कम आयू
से प्रवपात बहुत बच्चम से ही बहुत ही उच्ची अवस्था में थे।
� पिता के साथ क्यालकड़ा की त्रैम समझते हो बस जैसे उतने याता कर
रहे थे क्यालकड़ा में प्रौपाजी रोने
लगे।
प्रौपाजी रोने लगे।
क्यों? उनकी इच्छा थी मेरा रत्यात्रा की योजना करने के लिए।
अब उनकी इच्छा थी कि मेरा रत्यात्रा करोंगे।
मैं इसे मेरा रत नहीं बना सकता।
इतना महेगा रत नहीं बना सकता। तो प्रोपात को पिताजी को बोली कि मैं इतना महेगा रत नहीं बना सकता। मैं प्रोपात को बोली कि मेरे पिताजी
को बोली कि मेरे पिताजी को बोली कि मेरे पिताजी
को बोली कि मेरे पिताजी को बोली कि मेरे पिताजी को
बोली कि मेरे प तो मुझे पूछा प्रभा की बेदारे आप बेटा रोडा क्यों है।
प्रभा को पुछा कि आपके बेटा रोग क्यों है।
प्रभा को पुछा कि आपके बेटा रोग क्यों है।
تو پتا جی اُن کے بتایا کہ کیوں ہو رہا ہے؟ اُس کو مہاں
نے کہا وہ لورڈ نے کہا میرے پاس ایک اکسٹرڈ ہے پرانا رس ہے وہ لے لوں تم تو اُس لورڈ
نے بتایا کہ دیکھو میرے پاس ایک اکسٹرڈ رس لکھا ہوا ہے تم اس
کو لے لوں سچتی تھی مجھ نے مجھے پیش دیا پروپا جی کے پیدا
کو آہ وہ بہت کم پیسے میں پروپا جی کے پیدا کو پیش کیا
چھوڑا رہا بھائی نے رسیدہ کرنا اور
پھر پروپا جی اُس کے رسیدہ کر
سکی जगना जी का आगर्शन था जगना जी के परती।
पहले
बार जगना जी की उत्पात्रा काम की थी। आप भी एक घथा जानते हो। बजार से एक मूर्थी का रूप लेका आ गई थी।
आप सब जानते हैं कि जो मान्ती मातर थी वो बजार से एक मूर्थी लेका आ गई थी।
प्रभाजी देखते हैं, प्रणाम किया, पूचा कहां से लाई हो ये।
मातर जी बताएं कि मैं एक इंडियन स्टोर में गई थी।
मुझे वहाँ से करी थी।
और वहाँ से मैं करी थी।
जो पापा रभी थी। और भी मुर्थियां थी।
रभाद बोले और भी मुर्थियां थी वहाँ पे।
मालती वापर गए।
मालती मतलब वापिस गए।
मुझे देखा कि विगाल में थीन बासकर थी एक ज तो जाके देखे रहे
हैं इस दुकान में किती बासकेट थी, एक जगनाद की, एक बदेव की, एक सुभध्रा की।
आप फिर क्या बड़ेव लेगा, थीने बड़ेव लेगा थीने बड़ेव लेगा थीने बड़ेव लेगा थीने बड़ेव लेगा थीने बड़ेव लेगा थ
अभी प्रोपा जी करने को तीनों मुर्थी ले कर गये और प्रोपा जी उससे प्रभचन दिये और बताये कि ये परम भगवान हैं।
परम भगवान हैं तो प्रोपा जी ने प्रिप्रिकाना किया स्याद्रा के योजन करो।
और फिर प्रोपा जी ने आलेज़ दिया किया स् एक प्रभाद के शिष्यते जायनांद प्रभूम।
नाम सुने आपको। बहुत
इस्ट्रन भक्त थे।
کینسر کی بیماری تھی اور کینسر امریکہ میں اگر آپ کے پاس دھن نہیں ہے تو زرگار آپ کو مخصوص دوائی
دیتی ہے تو جاہنمدہ
کو اس پر کہہ رہتے ہیں کہ یہ پینشن ملتی تھی کیونکہ اس کے بعد तो उनको
जैना प्रोखो एक पैंसन मिलता था सरकार से क्योंकि वो निर्मने क्या वो तुसको धरी भी रेखा से बीचे के थे इसलिए उनको सरकार में पैंसन बेटन मिलता
था तो यो पैंसन वो मंदर को चलाने के लिए और रत बनाने के लिए वो टेक्सी की रार को टेक्सी चला जा रहा था।
तो वो जहनंप्रभु उस बैसे को मंदे चलाने के लिए एक्स्टा और भी काय करते रार को टेक्सी चला जा रहा था।
तो टेक्सी की आंग्ण सरकार से उसके विमाने के लिए पूरा पैसा खरर देता
रहती आता और टेक्सी से जो आमदनी होती थी और सर्गार के दरब से जो बिमाई के पैसा मिलता था उस सारे पैसे को वो मंदिल चलाने और रत वनाने में खर्चा कर देती हैं।
इस बकार पहले रत यात्रा हुई।
आज है सनाल यात्रा।
भगवान सनाल कर रहे है। آج بھرمان کا جناب دن بھی ہے، کیوں بولتے ہیں میں نہیں کوئی جانتا ہے
ہیپی برڈے میلانی جانتے ہیں ساڈھاتے ہیں؟ کلے کریشنا ڈھویو مارے مارے پھولو مارے مارے پھولو
आज आपको बहुत ज्यादा आपिशेख कर लिया है आज आपको बहुत ज्यादा आपिशेख कर लिया है आपको सूचना दे रहा हूँ भगवान को जुकां हो
गया आज आपको सूचना दे रहा हूँ बगवान को जुकां हो गया आज आपको
सूचना दे रहा हूँ बगवान क आज
उनको जुखाम लगया है।
अपनी वन को सेक्लूरियर में जाना पड़ेगा।
आप उनको आई-सी में जाना पड़ेगा।
सेक्लूरियर में जाना पड़ेगा।
मतलब बहुत ही सुरक्षित जगह पर उनको जाना पड़ेगा।
अपने पास आई-सी हो करेंगे वो बहुत
विकुप्रेट करने के लिए विकुप्रेट
करने के
लिए विकुप्रेट करने के लिए विकुप्रेट करने
के लिए विकुप्रेट करने के लिए विकुप्रेट विकुप्रेट भर्वान करने के लिए विकुप्रेट के अभिशेख में जुखां भी हो गया भर्वान करने को और जो रंग है भर्वान का के लिए वो भी फेड हो गया है।
तो भर्वान विकुप को जुखां भी हो गया है अभिशेख के कारण और जो उनका रंग है वो भी उतर गया है फेड हो गया है।
जो भगत हैं वो भर्वान के र हाइ के लिए जगनात पूर्दा पाराम कौन से रूम में हैं।
आज आप देखते हैं जगनात पूर्दा पाराम कौन से रूम में हैं। दर्शन अभी होगा महराज। दर्शन होगा वाला है। गजवेश।
आज इन समय में एक बत से जोगी अब ये ब्रजमन्तर नहीं आ था आप पर दर्शे नहीं लिए ये जो मुझे राजा कुला था।
भगते आये थे राजा के बुलाने पर भगवान बदर्शन करने के लिए।
पर ये जो भगते हैं पहुँच इमान नरस हैं पर में तो आये था किसी ने बता था कि इसके प्रती
वो भक्ष थे बहुत हिमांदार थे लेकिन उनका जो आकरसन था वो गनेश जी के परती था।
वो वो मैंने कहा, मैं मां आओंगा केवल अगर आँगा गनेश के परती में पकर करोगे।
तो जब राजा ने उनको आमतित किया तो वो बताये कि मैं आओंगा वहाँ
पे लेकिन त प्रिष्णमानाम को किस रूप में प्रकर किया जाता है गनेश के रूप में।
तो आज हम देखते हैं कि भवान प्रस्णान के पसार गनेश के रूप में प्रकर चाहते हैं।
भवान जगनाजी परमभवान हैं।
जगनाजी हैं वो परमभवान हैं।
श्रेजविक मुबारा व
भगते
पूरी में जिनका नाम था घीता पांड़ा, साला देन घीता पढ़ते रहते थे। पतनी थी तीन बच्चे थे।
पतनी थी और तीन बच्चे भी थे।
वो सबका अपकी देख मारा भवानी करते थे।
तो वो देख मारा उन्हों लोग पढ़वान नहीं करते थे।
भवानी करते थे। मुझे पतनी कह रहे थे। जाओ भेक मांगो पैसे लाओ नहीं तो भु� तो
वो गीता पंड़ा कहते हैं, नहीं, भवान हमारे रख्षा करेंगे, क्योंकि भवान गीता बोलते हैं, जो मेरी भर्ती करते हैं, मैं उसकी रख्षा करता हूँ।
एक दिन वीडिया पांजा की पासीं चिंदा में थी कौन वीडिया में पासीं भी बंगने नहीं चाहता उपर देखते हैं बारेश आ रही है कैसे हम जी रहेंगे पुछी पत्ती छिंता में थी, एक से तो कहती थी यहाँ पत्ती बाहा नहीं जा रहा, मीक मामी है, बोले बारेश आ रही है, कैसे हम जीएंगे।
तो उनकी पत्ती जो थी गीता पढ़ना की, बहुत जिनतित हो गई, कि देखो मेरा पत्ती बाहा जाता नहीं है, मीक मामी के लि� जो भाई आये।
हम
आपके पती के जो दोस्त हैं और आपके लिए कुछ को भार ले के आये। तो पत्नी ने कहा कि तीक है मैं अपने पत्ती, पती को जगाओं।
वो ने कहा नहीं, नहीं, नहीं, उनको विश्राम करने दो। सुभां कहा देना।
सुभां उनको कहा देना।
सुभां जब भाई पत्ती ने कहा एंगीदा पांड़ा मैं दो दोस्ट आये थे
आप पुडाने ने गीता पंड़ा की पती गीता पंड़ा से बताई के आपके दो दोस्त आये थे रापने और एक उसको बहार देखे गए। जो एक साल चलेगा इतना वो बहार देखे गए।
यह गीता पंड़ा ने देखा यह श्रूप पंड़ा, वो ही निशानी थी, पती न विदा बानने के लिए विदा बानने के लिए विदा बानने के लिए विदा बानने के लिए विदा बानने के लिए विदा बानने लिए विदा बानने के � तो
गीता प्रण्डा ने कहा पत्नी से निशानी देखा निशानी क्या था है जब गीता प्रण्डा जो उनको बता रहे थे अपने पत्नी को कि भवान हमारी रक्षा करेंगे तो उनकी पत्नी बिरोड करती थी तो नाकुन मार दे थी उसलोग पे कुछ
समझ गया है क्या अच्छी क सुरक्षा है।
तो गीता पढ़ना ने कहा कि देखो हमारे जगनाची अच्छी सुरक्षा करते हैं सारा तोभा हमें राज में देखने कर गया है।
जगनाची जगनाची अच्छी अच्छी दयालू हैं।
जगनाची अच्छी अच्छी दयालू हैं।
महाँ भगूने जाएगर जाओ प्रचार करो और वापस आने के जाएगती प्रिवध रत्यात्रा के समझे।
तो चत्र महाप्रभूदने दिखाएगर जाओ और सबको प्रचार करो और वापस आने के ज़्योरत में रत्यात्रा में आने के ज़्योरत में।
और ये वहाई था। जो उडिसा का राजा है जालू देकर पूरे सरको साथ करता था।
और जो रत्यात्रा के साहे में तो उडिसा के राजा थे वो जालू लेकर रत के आगे सरको साथ करते हैं।
सोने के जालू से पूरे मार को साथ किया जाता था। महाराज पुर्शोधम सगाई हो गई थी कांची के राजा के बेटी के साथ।
एवार महाराज पुर्शोधम जो उरीशा के राजा थे वो कांची के राजा के पुत्री के साथ उनका विवा होने कर सभी जोग था।
कांची के राजा के बेटी थी महाराज पुर्शोधम राजा तो सगाई हो गई थी और कांची के राजा ने निमंदन देते वे सूचना दी।
तो कांची के राजा ने निमंदन देते वे सूचना दी।
तो चांची के राजा के मंती ने देखा ये पुष्वसं ये तो चाड़ो देखा है। तो कांची के राजा ने निमंदन कांची
राजा देते वे सू के जो मंतरी आया यहाँ में पुरी में तो देखा कि नहीं ये तो राजा पुरसोतम तो भंगी का काम कर रहा है वो
भिठारू लगा रहा है मेरे राजा की बेटी भंगी से शाली कुछ नहीं रहे
गए अब मेरे राजा की बेटी इस भंगी के सालता नहीं रहे
वोने यूज
किया यूज में हार गया यूज हार
है तो पिरुदमराज आये भगवाण के पारे मैं तो लड़ा था आपकी स्वर्ध करें आपकी मिर्मा को पढ़ाने तो भगवाण ने कहा तुम चाओ फिर से यूज करने और मैं आउंगा विर्भाई के पारे तो राजा की तो
प्रसुत्र माराज गए भगवान के पास रोते वें बोले मैं तो आपकी ख्याती को बढ़ाने के लिए आपकी प्रसुत्र तक ले मैं लागने गया तो मैं हाल गया तो भी भगवान बोले दुबाराज जाओ لڑنے جاؤ اور میں آؤں گا اپنے بھائی کے ساتھ لڑائی کروں
گا یہ زیادہ لمبی کا تھا بیچ میں کٹنگ مجھے مجھا نہیں ہے بیچ میں کٹنگ مجھا نہیں ہے اگلی بات
اور بہت سار سے گرما جس کو سنائیں گے اس وقت مجھے مجھا نہیں ہے अभी आती मिच नहीं कर सकते हैं।
जग नाँ सुभध बादराब की। जग नाँ सुभध बादराब की।
जग नाँ सुभध बादराब की। जग नाँ सुभध बादराब की।
जग नाँ सुभध बादराब की। जग नाँ सुभध बादराब की।
जग تو بہت नाँ सुभध بہت دھنیوان کرتے ہیں ہم گروہ مہاراج کا گروہ مہاراج اتنے سندھر آواز میں اتنے سندھر پتھر سنائے اور کتنا آپ مہوں کو اچھا لگا ابھی بھاری بول بول کے آپ کو بتائیں گے बाद دھنیوان کی روپے
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