पानीहाटी चिड़ा दही महोत्सव | 04 June 2020 | Iskcon Delhi | Srila Gopal Krishna Goswami

The video presents a devotional discourse centered on the Panihati Chida‑Dahi festival celebrated at ISKCON Delhi. The speakers recount the origins of the festival, the ritual of preparing and distributing poha, curd (dahi) and rabri as prasad, and the role of the saint Ragunath Dasa (Ragunath Das) in establishing and sustaining the celebration. Through a series of conversational exchanges, the talk highlights Ragunath Dasa’s self‑less service—renouncing material comforts, offering his own resources, and encouraging devotees to serve the divine without expectation of reward. The discourse also weaves in scriptural references, anecdotes about other devotees (e.g., Nanda Maharaj, Radharani), and practical guidance for participants. Intermittent, fragmented English dialogue appears but does not alter the core devotional message. The overall tone is reverent, instructional, and enthusiastic, aiming to inspire listeners to partake in the festival and adopt a life of devotion and service.
Chapters
मन म भगत वासुदेव
ओम मो भगत
वासुदेव म म भगते वासुदेवा home jan timrndsajanask cेतनियamaनवसा साबित न भूत रे स्वयं रूपाकदामयमदादिसुवम बंदे हम श्री गुरु श्ीतापदकsrगुमsnा श्वीरुपम सगजतमसहगनारगुना तन दा कम व सद वेतन सबधुतमिजनासायतम कृष्णा चेतना देव श्री राधा कृष्णा पता सहागनानलतश्रीविशाक हे कृष्णा करुणा सिंधु दीन बंधु जगत्पते गोपसा गोपिका राधा कंचन गोरा गी राधे बिंदा वनेश्वर विश्वान सुने देवे ncc shrikrishna chetanya and she s gadaha हे
1
तो जैसे आप जानते हो बहुत ही शो अवसर है आज के
दिन ये पानी हदी उत्सव हुआ था और इस कोण के लगभग हर केंद्र में उत्सव मनाया जाता है। और मेरे ख्याल से आज की क्लास के बाद अब पौवकआओगे रबड़ी के साथ।
तो इस लीला का वर्णन चेतन, अंत
लीला ध्यान में है, लीला की चर्चा करेंगे, संक्षेप में
भी किरा अच्छा हो। बेचा मदे चला हो
गये,
चले आज आप
के
सुनकर हो गए, तुम बच्चा बनाओ, मेरे सभी शियों को बना
जो
6 गो स्वामी थे, जिनके विश्व में पढ़ते हैं। और गोस्वामी उन्हें कहा जाता है जो
कि गोपियों को सहयोग देते हैं।
राधा रानी की सेवा में, तो रगनादाजकोस्वामी छे में सबसे पहले गोस्वामी हैं जो
चेतना महा उनका जन्म बहुत ही धनी खानदान में हुआ था।
वो स्वामी का अर्थ है जिसका मन और इंडिया में
पूरा हुआ शो।
आजकल तो आप देखिये भारत में वो
शो में 1 जाल बन गई है
बड़ी सेगरपीएंगेगोलस्वामी बुलाएंगे मी का अर्थ है इसका मन बुद्धि पूरा हुआ। शो। तो गुना का जन्म हुआ था बहुत धनी खानदान में।
कहा जाता है कि आज की तुलना
में उनके पिता और चाचा अरबपति होंगे।
उनके पिता का नाम
और न के चाचा या नाम था।
दोनों भाइयों में
1 ही उल्लास की 1 ही बेटा था। और माता पिता की इच्छा थी की
बेटा
कार में आगे बढ़े। पर दाल की शुरू से ही रूची थी ्यात्मिक विश्व में। और हालांकि माता पिता ने बहुत प्रयास किया कि उनका भौतिक आकर्शन पड़े पर रगुनादालसने किसी प्रकार इसे ने किया।
छोडिआयमेंही उन्हें हरीदास ठाकुर की संगत भी प्राप्त हुई थी।
और है बड़ा गहरा प्रभाव था तो पिता और चाचा थे,
वो धनी कैसे बने? वो जमींदार थे।
और उन दिनों में मुसलमानों का शासन था भारत में, और क्यूंकि ये जो
राजा था वो था मुसलमान। तुर्क राजा ने कर इकट्ठा करने की जिम्मेदारी
लगना के पिता और चाचा को दी थी।
ना दाल के पिता ने हर प्रकार
का सुख दिया बेटे को। कहा जाता है कि इंद्र
महल मे इतना खबसूरत नहीं था। इतना खबसूरत दिनका
और उस समय की सबसे खूबसूरत लड़की से उनके माता पिता ने विवाह करवा दिया। इस भाव के साथ ये सजीव प्रति पेज हो जाएंगे। लगने दाद कोई रूची नहीं थी और वो हर मौके का लाभ उठाते थे, या करने के लिए, वहाँ प्रभु को जाकर मिलने के लिए, वसनों की संगत प्राप्त करने के लिए। तो यह सो उनके पिता
चौकीदार रखे
हुए थे, जैसे आपके चौकीदार उन्हें बड़ा चौकीदार रखे थे इनका इन पर पूरी नजर रखने के लिए। और माँ ने कहा माँ ने देखा कि बेटे का बड़ा गहरा प्रश्न है भक्ति के प्रति।
माता ने पाती से कहा हमारे बेटे को हमें बांध देना चाहिए। रस के साथ बार बार यह भाग जाता है। रस के साथ भाग बाँधोगे तो भाग नहीं सकेगा।
पिता ने कहा जब
हम उनको खुबसूरत पत्नी के द्वारा बांध नहीं सकते।
अब रस्सी से कैसे बांध है? हमने उनको हर प्रकार की सुविधा दी है, फिर पत्नी दी हैं।
जब भी उनने बांध नहीं पा रही
तो
रस्सी से कैसे बांध पाओगे। तो
गा बहुत देर।
कार्य में भी बहुत तेज है।
मुसलमान शासन था तो जो चौधरी था चौधरी कहा जाता था उन्हें जो कि राजा का प्रतिनिधि हो और जिसकी जिम्मेदारी हो प्रजा से टैक्स क्लिक करना कर। जैसे आज भी हम लोग कर देते हैं। प्राचीन सिमी का वाल था 25 पर्सेंट
कर, जो इकट्ठा होता था,
जो इंस्पेक्टर
करता था, का उसे दिया जाता था। बाकी 75 पर्सेंट।
सरकार को तो 1 मुसलमान चौधरी था।
उसने देखा कि गोदान और हैरान
हैं,
उनके साथ बेईमानी कर ली है। मुसलमानों का शासन था।
तो वो पहुंच गए लगना के घर में। लगना के पिता और चाचा को विसार करने के लिए, तो इन्हें सूचना मिल गई। पहले ये पुलिस वाले आ रहे हैं। तो रगना के पिता और चाचा घर छोड़कर भाग गए हवा।
तो जब
ये पुलिस मैन, जब चौधरी के प्रतिनिधि पहुंचे पता लगा चाचा और पिता तो है ही नहीं, तो उन्होंने
रंगनाथ को गिरफ्तार कर लिया।
रंगना घर नहीं था, गिरफ्तार करके
चौधरी
अपने स्थान मिलेंगे जेल में रखेंगे। रोहित।
शादी
बताओ कहाँ है तुम्हारे पिता? चाचा नहीं बताओगे तो हम तुम्हे सजा
देंगे बड़ी भारी
रघुनाथ, गुल घबराए नहीं।
इन धमकियों से।
उन्हें पूरा विश्वास था के जमाने के विश्वास है, सुरक्षा करेंगे।
तो कई दिन बीत गए।
चौरी पूछता था, कहाँ हैं?
कहाँ हैं तुम्हारे चाचा और पिता? फिर रगुनाथ बड़ी हुशार के साथ मेरे पिता और चाचा पर आप तो भाइयों के समान हो, आप तीनों भाइयों के समान हो। और कभी कभी भाइयों में झगड़ा होता
है,
फिर शराबी हो जाती है।
तो इस समय आप लोग झगड़ रहे हो। जब आप मिलोगे तो मुझे पूरा विश्वास
है आप आप भाइयों में 1 मात्र भाव आ जाएगा। तू चली
रघुनाथ को मारने ही वाला
था, तो उन्होंने यह मधुर शब्द सुने। रघुनाथ के द्वारा उनका हृदय बिलकुल नरम हो गया और रंगनाथ को चौधरी ने गले लगाया होगा। तुम मेरे बेटे जैसे हो, तुम क्यूँ
नहीं
किसी प्रकार से मेरा सुला करा। 2 मेरे पिता और चाचा से रगुनाथ ने बंद किया। उसके चाचा का
मिलन हुआ
चौधरी सी और सेटलमेंट हो गया था शांति से। इस प्रकार रगुनाथ जी रघुनाथ उनका भाव होता सेवा में और माँ को बुरी कहा घर में रहो थोड़ी देर। औ और रगण दास
शुरू से यह नाम में जुड़े हुए थे दिन रात सास में हरी दास की संगत पापी
थी और गुना दास वन में यही था कि कब मैं माह पपू के साथ जुडूंगा और कई बार वो घर से भागे, जो भी भागते थे, पिता
के प्रति दीदी जा कर वापस घर ले आते थे।
इस प्रकार की घटना कई बार घी।
पानी हाटी 1 स्थान है। यहाँ के कैरकरा से ज्यादा दूर नहीं है।
माना जाता है की 10 किलोमीटर पानी
भी 10 पंद्रह किलोमीटर दूर है।
हाँ 18
कला की निकट है।
18 पंद्रह के क्या क्या के निकट हैं। और हमारे वैश्व सिद्धांत में
अनेक उत्सव
हैं जो मनाते हैं, जिनमें 1 है। तो भगवान नितिनंदागंगाकीतत पर
1 पत्थर पर बैठे थे।
अपने भक्तों के साथ, भगवान ने नंदा
के चेहरे से हजारों।
सूर्यों की रोशनी प्रगट हो रही थी। वहाँ भगवान नंदा अपने साथियों के साथ
हई नाम कितन कर रहे थे।
कई और माँ ने भगवान खुद बैठे थे, कहा खुद बैठे थे।
1 पत्थर के ऊपर रगुनादाजपीछे से आये
और आदर के कारण और शर्म के
कारण मुझे जिनंदा के पास नहीं गए।
वो भगवान िनंदा के पीछे थोड़ी दूरी पर खड़े रहे और उन्होंने दूर से
प्रणाम किया
किसे ते
जब उन्होंने प्रणाम
किया भगवान के साथियों के नितनंदारगुनाथतुम्हे प्रणाम
कर रहा है, प्रणाम कर रहा है। रगनाथ इधर है, वो तो चोर है, चोर है, क्यों उसके पास इतना धन है?
वो चोर है। और उसे यहाँ लेकर आओ उनके भक्त
लेकर आये।
रघुनाथ को समक्ष नंदा ने अपने पाँव
को
रगुनाथ के सिर पर रखा और कहा
मैं चाहता हूँ की तुम 1 बहुत बड़े उत्सव का प्रबंध करो और
उत्सव में मेरे जो भक्त हैं, जिस लोक आपको पढ़ कर सुनाया था उत्सव
करो, उसमें मेरे सारे साथियों को धनी
पोहा खिलाओ और जबरवीणणदासने सुना की भगवान
नितिनंदाउन्हें सेवा दे रहे है जिसके द्वारा वो अपने धन का उपयोग कर सके।
भगवान की सेवा में मोद ही प्रसन्न हो गए तो
नितिनंदानेकहा 1 बड़े उत्सव का प्रबंध करो और मेरे जितने साथी
है सबको
दई और
कहा पोहा प्राइस खिलाओ सो
का आदेश है छूरा और पोहा खिलाने के लिए।
2 छोटे बॉर्डर, क्या, छोटे बहुत ही खुश हो गए और गाने तुरंत ही सब भक्तों को बुलाया और कहा
1 बड़ा उत्सव बनाने।
शहर शहर के पड़ोस में जितनी भी दई थी, बाजार में जितने में रबड़ी थी, बाजार में जितना भी खीर था, बाजार में जो भी था सब उनके भाग लेकर खरीद कर। बाजार से दूर दूर तक सूचना पहुंच गयी। भगवान नंदा उनके साथियों के लिए उन्होंने बहुत बड़े उत्सव का प्रबंध किया है। तो दूर दूर से भक्त आये, दूर दूर से और इस उत्सव परेशान दूर से भागता और ऊपर 1 प्लेटफार्म था जिसमें भगवान तना बैठे थे, अपने
सीनियर
भक्तों के साथ बाकी सब बैठ गए। गंगा के तट पर तो जितना जितनी
सुविधा थी, बाजार में सब वो खरीद कर ले आये।
और फिर भी उन्होंने देखा और भी कमी है जैसे आप लोग परीक्षा में जाते हो।
देखते है की नारियल वाले वहाँ पहुँच
जाते हैं, भगवान पर पहुँच जाते हैं,
देखा बहुत बड़े
उत्सव का प्रबंध किया है, तो सारे व्यापारी आ गए अपना समान लेकर। किसी के बाद दही था, खेला था, छीनी थी दूध और बड़े बड़े बर्तनों में इन्हें उबाला जा रहा था और थोड़ी देर में ही सब तैयार हो गया तो भगवान इत्यनंदनने 20 भक्तों को
जोड़ा
इस प्रसाधन को बाँटने के लिए जैसे आप लोग प्रसाद खिलाते हो तो लाइन में बिठाते हो लोगो को आगे जाकर। इसी प्रकार भगवान ने सारे भक्तों को
लाइन में बिठा दिया जितना समान था
पड़ोस की दुकानों में वो पड़ोस के
शहरों में सब खरीद ले, अलग बना
दे ये मीना के पास पैसे की कमी नहीं थी और सबको जो 20 भक्त थे उन्हें जिम्मेदारी दी विशाल बाटने के लिए और न खुद सबको प्रसाद खिला रहे थे हर 2 डोना दिया जा रहा था था, चूरा, दही
सबको बांट रहे थे यहां भगवान नीतिन ने
1 और दिवेलीलापगड़की उनकी इच्छा थी की माँ प्रभु यहाँ आये तो 1 तरफ
से भी भक्तों ने सब भक्तों को प्रसाद बांटा फिर भगवान ने अपनी दिव्य शक्ति से कितने महाप्रभू को बुला दिया
और ये दर्शन केवल भगवान के चुने भक्तों को मिला जैसे जब वहाँ उपस्थित थे रथयात्रा में जगनाथपुर में तो जब उन्होंने देखा मनाजपदपूजा का व्यवहार व्यवहार इतने धनी राजा है वो जब भी झाड़ू
दे रहे हैं सड़क को साफ करने
के लिए, रथयात्रा से पहले तुम्हा बबूने
खास नीला वहाँ पर बुने रातयात्रा के
समय हर रात के साथ 8 किरतन जोड़ी थी और वहाँ प्रभु
में उपस्थित
थे 4 कृति मन्नी थे रथ के आगे, 1 बार
तो महा प्रभु अपने प्रभु उपस्थित थे साढ़े 8 कितनमनदिमें पर
केवल चुने भक्तों को ही दिव्य नेत्र दिए थे जिनके द्वारा वो महा प्रभु की लीला को देख सके इनमें 1 थे महाराज और महा प्रभु को दिया
वो बड़े पसंद थे उनकी तू। उसी प्रकार भगवान नीतिनंदनेअपनीदिवी शक्ति के द्वारा खेतिया महाप्रभु को भी पकड़ कर ले
आये और महा प्रभु नीति
खास नीला
चल रही थी महाप्रभु और भगवान थे
नंदा हर भक्त की थाली में में
कुशा रहे थे और हर भक्त के पते में पते से भगवान थे नंदा 1 मोर 1 चमच ले रहे थे प्रसाद और महा प्रभु के मुँह में डाल रहे थे महाप्रभु के मुँह में डाल रहे थे तो महा प्रभु को बड़ा आनंद आता था और महा प्रभु
क्या कर रहे थे वो भी हर
पत्ते से 1 मोर प्रशाद लेकर भगवान नितेनंदाके मुह में डाल लेते तो 1
तरह से भगवान इतेनंदा हर पते से
मोर लेकर प्रशाद लेकर महा प्रभु मुंह में डाल लेते और महा प्रभु वो
हर भक्त की थाली से 1 लेकर
नंदा के मुँह में डाल रहे थे वहाँ लोगो को बड़ा आनंद आया इस
उत्सव को देखकर और यह दिव्य लीला जिसमें नीति नंदा जी वहाँ प्रभु के
मुँह में प्रसाद डाल रहे हैं महा प्रभु नीतिनंदाकेमुँह में प्रसाद खिला रहे हैं
यह लीला का दर्शन केवल चुने हुए भक्तों को मिला।
सबको जी बहुत ही प्रसन्न थे इसी इलाके का तो ये पानी हाथी में ये उत्सव हुआ था और जो इतने
भक्त आ गए थे ऊपर का प्लेटफार्म
भरा हुआ था उसके पास जो वो
नीचे पुल सब सब भर गया था
इतनी भीड़ हो गई थी और फिर
बैठने का स्थान था, खड़ा खड़ा होने
का स्थान नहीं था।
भक्त गंगा में बैठ गंगा के जल
में बैठकर खाने लगे।
इस प्रकार यह उत्सव रगनदाजकीप्रेरणा से ये उत्सव।
उनके आर्थिक सहयोग से यह उत्सव हुआ था। और नितिन महा प्रभु बड़े प्रसन्न थे। इस उत्सव के साथ रगुणादासहोमहाँ प्रभु ने कहा तुम शिक्षा ग्रहण करो कैसे डालर महा प्रभु के 2 सेकेटरी हमेशा होते थे गोविंद और शुरु दादर, तो कहा जाता है रगुनादशरुभदातो, उन्होंने अध्यात्मिक शिक्षा न की थी। शुरु दामना
रगुनादास
की रूची थी
वहाँ
रहने में और इस उत्सव के पश्चात नाराज गए। राग बंद के घर में राग बंदन शादी थे। वहाँ उन्होंने राग पंदित द्वारा बहुत ही सुन्दर प्रशाद बनाया, खाया रागादि कहा जाता है बहुत ही एक्सपर्ट थे प्रसाद बनाने में, जैसे राधारानी को मुनि द्वारा यह प्राप्त हुआ था।
जब भी वो बनायेंगे प्रशाद ऐसा लगेगा
जैसे स्वर्ग में बनाये रागांने बहुत ही अच्छा प्रसाद बनाया था।
तो लगना दास
घर छोड़कर चले गए। उनके गुरु उनके खदाने गुरु थे।
खानदानी गुरु जी चाय
चाया ने के माता पिता से कहा की
आपके बेटे को मेरे साथ भेज।
2 वो तो खानदान के गुरु से माता पिता नहीं नहीं कह सके तो
रवीना दास
घर से निकल गए, वो जो चौकीदार थे उन्हें भी पता नहीं कहाँ गए। रविादास में चले कहाँ पहुँचने के लिए
जगनाथपुर
उत्सव आने वाला था और उन्हें पता था कि सारे भक्त वहाँ पहुँचे। उनके पिता ने हर रूप से प्रयास
किया
दाज ढूंढ ले, शिव
में भेजा
अपने नौकरों को भी वो ढूंढ नहीं पाये।
12 दिन की सफर, 12 दिन का
सफलता, रघुदास के स्थान में पानी हाथी से जगनपुरी और रघुनाथ में इतनी गहरी भावना थी की वो अकेले चलते गए। छुपछुपकर पे पहुँचे जगनपुर 12 दिन के
दौरान यात्रा में केवल 3 बार रगुनादास
ने प्रसाद ग्रहण किया, बाकी समय कुछ रगीनादासकेपिताजी उनको अंत में सूचना मिली की रगुनादास है। पुरी में माँ प्रभु के पास तो
रवीना
माता पिता ने धन भेजा रात को वो धन पहले तो उपयोग किया वहाँ प्रभु महीने में भंडारा बनाने, फिर उन्होंने ये लेना भी बंद कर दिया। माँ प्रभु ने जब देखा की रगुनाथ ने अपने माता पिता से विदा लेना बंद कर दिया। वो बड़े प्रसन्न हो बड़े त्यागी थे और समझदार जो जगना पुरी में वह खड़े होकर भीख मांगते थे, लोगों से दे दिया, उठाते थे, कुछ नहीं दिया मांगते मांगते नहीं
तो 1 दिन रगना
दास को शिक्षा दे रहे थे दाम
रगना दास की इच्छा थी कि महाप्रभु से पूछा जाए क्या है मेरा कर्तव्य? what is my ड्यूटी? क्या कर्तव्य मुझे करना चाहिए। रविदास को महाप्रभु ने
सौप दिया था। रघना दास कभी भी महा प्रभु से
डायरेक्टली कुछ क्वेश्चन नहीं पूछते थे। तो माँ दास ने
दादर से पूछा
ने पूछा मुझे ये बताओ वहाँ क्या कर्तव्य होना चाहिए? what in my duty? यह था
सुर दाम ने कहा कि रघुनाथ जानना चाहते हैं, मेरा क्या कर्तव्य है।
आप लोगों ने कहा मैंने शुरू दमदरकेजुमदामें
सोपा हुआ है और तुम्हे ये प्रश्न शुभ दादर से सुनना चाहिए।
इसका उत्तर क्यूंकि तुम मेरे पास आ गए हो?
प्रश्न पूछने के लिए मैं जवाब देता हूँ। तुम लोगों ने क्या कहा, बड़ा प्रभावशाली संदेश है हम सब के लिए ने
कहा, भौतिक भौतिक, वादी व्यक्तियों के समान चर्चा मत करो। do not talk like people in general? what they have to say? you should not deny paldablefodnosol dress were nit। तो दास का प्रश्न क्या था? शुभ दामदार से, आप महाप्रभु से पूछिए, मेरा क्या कर्तव्य होना चाहिए? ये प्रश्न हम सब को पूछना चाहिए। चाहे आप किसी आस में हो। क्या है हमारा कर्तव्य? महा? प्रभु ने उत्तर कहा, वैसे तुम्हें शिक्षा शुभकामना से लेनी चाहिए। क्यूंकि तुम मेरे पास आये हो? मैं आज उत्तर दे दूंगा।
तो उन्होंने क्या कहा?
भौतिक व्यक्ति के समान भौतिक, कार्य में, भौतिक, परचलता में उसे बचे
और प्रजल्प
से क्या होता है। प्रजल्प कहते है,
यह मांग रहा, पर
से आध्यात्मिक जीवन नष्ट हो जाता है। और फिर जल करोगे। तो क्या करने का आदेश है। कृष्ण कथा, कृष्ण कथा करोगे, कृष्ण कथा सुनोगे तो चीरतदर्रप्राप्त होगा। और अगर हम जल्पा करेंगे समय पर जल्पा में बितायेंगे।
तो ये जो भक्ति का बीज है, वो उगेगा नहीं। वो न सुनाएगा कहते है।
तो हाँ कह रहे हैं, बौदिकवादियोंके समान प्रजल्प में रूचि मत लो। आगे क्या, कहा? और साधा प्रसाद खाओ ले। माँ ने कहा, क्यूंकि क्या था
का
प्रश था, मुझे बताइए मेरा क्या कर्तव्य होना चाहिए। उन्होंने घर त्याग दिया था, धन था,
उसे त्याग दिया था। वो पूछे क्या कर्तव्य होना चाहिए? तो सबसे पहले माँ ने कहा जरा से बचो, फिर साधा भोजन खाओ, साधा
भोजन खाओगे तो दिया, पर वर्ष ज्यादा आसानी से कर।
सकोगे
कहते हैं, वहाँ से वे जो
में दारा पसेाजीवनीआरोवश, रखोगे तो बेली और जेनेटल्स को भी कंट्रोल कर सकोगे।
और अगर हम जीप पर विश नहीं किया,
जीप पर विश नहीं किया तो और जल को वश बनाना न होता। गंगा देश साधा पर, साधा परशान खाओ
और ज्यादा अच्छे वस्त्र मत पहनो
खैर आप कुल सादा वस्त्र पहनते ज्यादा
महंगा
बस, कई बार आप साधु को देखते हो।
4 चर अनगुडी साथ
कपड़े वगैरा पर
सदा
प्रभु को मिले व नासी में शंकर के घर में, तो उस मे स्नातक स्वामी ने 1 बहुत महंगी चादर उड़ी हुई थी, क्योंकि जब वो छुप छुप कर रहे थे, माँ को मिलने के लिए रास्ते में रुके।
श्रीकांत के घर में श्रीकांत वैसे उनका
रिश्तेदार था, जिसको मुसलमान राजा ने भेजा था।
घोड़े खरीद कर लाने के लिए।
3 लाख सोने के सिक्के थे। जेब में।
शिखा ने देखा सुना, क्योंकि 1 समय लगभग प्रधानमंत्री जैसे था।
राजा के शासन में भी फटे कपड़े
दाढ़ी वगैरह पहने, वह दाढ़ी
फटे कपड़े पहने, ये क्या है उन्हे 1 महंगी चादर दे दी उडने के लिए। जब साधन माँ पर पहुँचे में उन्होंने
महंगी चालल उड़ी हुई थी। और
तो माँ को देखा तो मुझे
घूर कर देख रहे थे। सनातन समझ गए, माँ भी बहुत खुश
नहीं है, ये महंगी चाल से तो गए। गंगा के तट पर। 1 बंगला साधु था, फटे कम्बल के साथ
मैं आपको मेरा महंगी महंगी चादर देना चाहता हूँ, आपकी फटी चादर मुझे मिल सकती है,
क्या?
क्या तुम इतनी महंगी चादर दोगे।
मुझे नहीं, नहीं, नहीं, नहीं, मैं गंभीर हो।
वहाँ पर भू ने देखा की सनातन फटी चादर पहन रहा है। महंगी चादर की वजह।
तो उन्होंने कहा 1 अच्छा डॉक्टर मरीज
का इलाज करके जो मरीज बीमारी का
कारण है वो रहने नहीं दे देता।
उन्होंने कहा तुमने घर सब त्यागा है भक्ति पर जुड़ने के लिए ये शोभा
नहीं देगा, जो महंगे वस्त्र पहनो।
तो यहाँ माँ आप कह रहे हैं
कृष्ण कथा में रूचि लो और
सारे
कपड़े पहनो सादा भोजन खाओ और सादे बस आगे क्या कहते है?
do not expect one offer, all respect
to everyone, always can the holy name
of god krishna and midinominendesevis to ratan krishna
ये हैं शिक्षा के किसी श्लोक का सन्देश।
आप लोगो ने आगे क्या कहा आदर मत उम्मीद करो लोग किसी से ये नहीं सोचे की मुझे आदर मिलना चाहिए और इस बंद में मुझे पूरा आदर नहीं मिल रहा।
मैं जाऊँगा दूसरे मन में हमारे मन में ये भाव नहीं होना। के प्रॉपर ऑनर आई वन स्टो ने
क्या कहा हमारे मन देना। अगर तुम चाहते हो कि हरी का नाम सदा तुम्हारे जीव वाली द्वारा उच्चारन
हो तो ये विनम्र का भाव बहुत ही महत्वपूर्ण है।
तो यहाँ माँ रगुनदा से कह रहे हैं किसी से आदर की उम्मीद मत करो और सबको आदर। 2 सबको आदर। 2 ये नहीं कि ठीक है, हम आदर देंगे। अगर तुम दोगे तो तुम करोगे।
तो हम भी वैसा करेंगे।
यहाँ कह रहे हैं नहीं तुम परवाह मत करो, दूसरे व्यकी तुम्हें आदर दे या नहीं। तुम अपनी तरफ से आदर।
2 और आगे क्या कहा सदा, हरी
का नाम लो, ये है शासन का निर्णय, है ना ना, ना के सेवन
सेवन सेवक हो ा।
ये कलियुग का धर्म क्या है। कृते तो मिशन
के धरम सतयुग में
साधन था, चिंतन साधन था, या गया, साधन था। आज की उपासना वह लाभ प्राप्त हो सकता है। इस माध्यम से ये महा प्रभु कह रहे।
महा प्रभु प्रकट हुए थे, इसलिए हर
नाम के प्रचार के महा प्रभु अपने
प्रचार से पूरे दक्षिण भारत की प्रजा को वैसा बना दिया था।
और माँ बहू क्या देखा, क्या दाग चाय को। माँ बहू ने कहा आदर की उम्मीद, मत रखो, सबको आदर। 2 सदा हरी का नाम लो और मंद वाला क्या है मंद वाला
करो। वहाँ पर ने कहा मैंने तो संक्षेप में तुम्हें समझा दिया है, क्या है?
क्या आवश्यक है? क्या है तुम्हारा कर, आरोप और गहराई के साथ। अगर तुम्हे इस विषय को समझना है तो सरदार के पास जाओ। हाँ पर बोले क्यूँ की देखभाल की दीदी दामन। को
ने पूछा क्या है मेरा कर्तव्य
के कैसे स्रुभदामलर के द्वारा? माँ बाबू ने कहा तुम्हें उत्तर देना चाहिए, स्रुभदमलरसेतमरे पास आये हो। मैं संक्षेप में दे देता हूँ। और संक्षेप में देने के बाद उन्होंने
क्या क्या कहा डीटेल
स्रुवदामलर।
उन्होंने के मेन पॉइंट्स दे दिये और
कहा आगे
मा प्रभु मोदी प्रसन हुए थे रगुणादास की सेवा के द्वारा और माँ प्रभु को किसी भक्त ने 1
गोरदानशीला दी थी और गोदान शीला दी
थी और 1 हार दिया था शिलाओं का तो माँ बाबू इतने प्रसन्न थे गंगा की सेवा से गोदान शीला किसको
दे दिया भेट के रूप में।
माँ ने खुद कहा कैसे इस गोदान शीला की सेवा करनी चाहिए थे के
त्याग से
आर्थिक सुख त्यागा हर प्रकार की सुविधा दिया के जो पैसे उनके
घर वाले भेजते थे वो भी लेना बंद कर दिया। जो जगनपुरी मंदिर में जब चावल साफ़
करते हैं, जो कचड़ा है वो बाहर
फेंकते हैं, वो कचड़े को लेकर उन्होंने
अपना प्रसाद बना ले थे और हर प्रकार की सुविधा उन्होंने तैयार की और माँ प्रभु से विज्ञान प्राप्त किया तो रगनादकोस्वामी को गोरा शीला प्राप्त वहाँ प्रभु ने भी के रूप में दी तो गोवर्धन रगना पहुँच गए गोदान
रूप और
सनातन से मिलकर कृष्ण कथा करते दिन
में 20 से 22 दिन में 22
घंटे वह इनाम का उच्चारन करते थे,
22 घंटे सोते थे, 1 घंटा या
डेढ़ घंटा बस खाते थे, क्या थोड़ी सी लसी बस 22 घंटे दिन में क्या है। दूर दूर तक सूचना फैल गई की
रगना दास
में बहुत ऊँचा संत आया है तो हजारों लोग कम से कम
2000 लोग रोज आते थे रगना दास
का
गुना दास हर व्यक्ति जो अंदर
आता था, सबको पहले प्रणाम करते थे
तो दिन में 20 से 22 घंटे
हरे नाम का उचारण 2000 से ज्यादा ठंडा बाद वो उन अतिथियों अतिथियों को
करते थे जो हारे थे गोदान का
दर्शन देने के लिए, रवीना का दर्शन करने और
खुद जॉब करते थे दिन
रात और खाने के लिए क्या थोड़ी
सी लसी, बस, थोड़ी सी सी ई
और और सनाथ के साथ बैठ कर सारा दिन कृष्णा का था, मेरी
1 दिन रगना
बहुत गर्म मौसम था, उरादकुलमेंअपना भजन कर रहे थे और राज रानी ने देखा। राधा रानी ने देखा बहुत गर्मी है, कई रगुणादासजॉब कर रहे हैं। इतनी गर्मी में रानी पीछे से आई, अपने साड़ी को छात्र के रूप में रखा रगुणादासकी सुरक्षा। उसी समय वहाँ से सनातन को स्वामी सनातर ने देखा
राधा रानी रघुनाथ की
सेवा करनी है, उन्होंने अपनी साड़ी का छाता बना दिया है। रगुनाथ को धूप से उन्होंने को कहा
तुम राजरानी से सेवा ले रहे हो।
उन्हें डाटा जो उत्तम भक्त है, वो केवल सेवा करना चाहते है, लेना नहीं चाहते और उसके पश्चात ये भजन कुटी जो आप देखते हो।
रालकुरमेंयेनिवार शुरू हुआ तो रंगना दास ने पानी हदी का उत्सव
का प्रबंध किया था।
उन्होंने अपने धन का उपयोग किया
इस उत्सव को सफल बनाने में। और उन्होंने अपने धन को बाटा ब्राहमणो को
पानी ही उत्सव
पश्चात। बोरा के घर में गए हों सोने के कोइन दिए उन्हें बोला सब को बाटने के लिए। तो रगदाजकीप्रेरणा से नीतिन नंदा जी के आने से यह उत्सव आज हुआ तो
कहा गया है अगर आपको नितिन नंदजी की कृपा चाहिए। अगर आप इस पानी हदी उत्सव में नाचो गाओ विशाका करो जो अर्चन है। आपकी भक्ति के रास्ते में यह अर्चन
क्या होगा, यह अर्चन दूर हो जाएंगे। जिन भक्तों की इच्छा है कि नितिन की कृपा प्राप्त हो, उन्हें बड़े उत्साह के साथ इस विचार को तैयार करने में सहयोग देना चाहिए और बांटने में सहयोग देना चाहिए और इस उत्सव को सफल बनाने में सहयोग देना चाहिए।
रवीना स्वामी की पानी हदी उत्सव की और इस्कोन के हर मंदिर में मनाया जाता है।
मंदिर है जहाँ की ये मनाया नहीं जाता जो आपके नदी में भी मनाया जायेगा।
वो पानी ने उत्सव के साथ जुड़ी
हुई है रगना दास की मेरा रगना दास के मन में सदा 1 ही भाव था बचपन से वो भाव क्या था भगवान की सेवा और इस सत्ता में जो भी सेवा करेंगे भाग लेंगे, उनको निति नंदा की कृपा प्राप्त होगी। और नितिनंदारप्रसन थे रविदास है और
इतना
वर्ष था वह अपने चिंतन से महा
प्रभु को मिले
और महा प्रभु को भी हरेक भक भक की थाली से प्रसाद मनतेना ने सबको खिलाया माँ प्रभु ने सबको
किसे खिलाया में इस लीला
का स्मरण करना चाहिए और इस लीला
का
विचार करना चाहिए। उत्सव में बहुत खूबसूरत खुशाल बनाकर सबको खिलाना चाहिए।
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so, when you see that people at to traced to fold ego anger greed bride real causes, the trace the holy name is week the wor you ll impलasadnaओके महाराज है, कई बार प्रशासन
की
नहीं, पर भगवान को भोग लगा रहे हो और फिर खिला रहे हो। ठीक है, जैसे रात के समय अलवेदाचायानेआयदा ठाकुर को हो। बड़ा बनारा, खिलाया महिला से कहा मुझे
खिला रहे हो, आपकी समाज में बसती हो जाएगी।
4 ने कहा, आपको खिलाना हजार, ग्राम को खिलाने का बड़ा बुरा है, थैंक्यू नहीं, कुशाल के रूप में भोग लगा के खाटोकेलगवाला
को।
वहाँ प्रभु ने रघुनाथ को शुरु दादर की जिम्मेदारी में छोड़ा था। उन्होंने कहा, शुरू दमदर, तुम्हारी देखभाल, करेगा
को देगा, सुरु दामर को जिम्मेदारी दी दी रघुनाथ को ट्रेनिंग देने के लिए।
इसलिए जब
रंगना के प्रश्न थे, पहले उन्होंने शुभ दाम से पूछा।
उन्होंने कहा, आप मेरी तरफ से पूछिये।
ये प्रश्न। माँ ने कहा, उतर शुभदा देना चाहिए,
तुम मेरे पास आये हो।
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that and if you have some good qualities you mentaining krishna will help to mental, we may have no qualification, visansilyandever krishna will help ok shop ओके
हो जाते हैं। अगर हम विलियम का पालन नहीं करे, अगर हम नियमों का पालन करें। भगवान गारंटी देते हैं, नहीं,
कुछ लाते हैं, तो पूरा विश्वास होता है, ठीक
नहीं निकलेगा 1 महीने में वापस कर
के कृश्णा गारंटी देते हैं, बोल रे नहीं
vishwas se change my round bagan last question i have to go?
इंटरनेट के भी बहुत अच्छा बना,
उनकी
तुलना हम नहीं कर सकते।
तो इस स है तो आपको स्वीकार
कर या
मर जाया की जो पत्नी
थी, उनमें प्रशाद खास योग्यता।
थी
1 घंटे में 80 सियो
तो
हम पर से माँ पर वो खाते थे थोडा जैसे उनकी पत्नी ने भंडारा बनाया था जो इस पर मोगल की माँ पर वो खरे गिरते थे। 11 चम्मच
खा की अच्छा खाना स्वादिष्ट खाना
के थे वही तो मैंने कहा
वो गैर करते थे बिल्कुल नाम के
वास्ते यह नहीं की जैसे जब दक्षिण भारत की यात्रा से पहले माँ पर
गए थे
ने लगभग 80 चीजों का भंडारा बनाया था वहाँ पर वो कितना खरे थे। 1 ही समझ थोड़ी ओपरेट कर दे
रहे है आप
थोड़ा थोड़ा सा के
आहार और नेता पर घूमते विजय प्राप्त
कर सकते हैं क्यूँ नहीं कर सकते है आप हल अन्था पर विजय प्राप्त कर सकते हो केवल आपके प्रयास की कमी है प्यास और दृढ़ भाव ये रखोगे तो हर कमजोरी वा
h krishna hare riskisnaकरिश्ना हाने हाहेहरल हम ले जाले।
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