श्रील सनातन गोस्वामी तिरोभाव | 07 Jul 2007 | New Delhi | Srila Gopal Krishna Goswami Maharaja

The lecture delivered by Srila Gopal Krishna Goswami Maharaja in New Delhi on 7 July 2007 commemorates the Tirobhav (death‑anniversary) of Srila Sanatan Goswami, one of the six principal disciples of Srila Chaitanya Mahaprabhu. The speaker explains why only the Tirobhav, not the Avirbhava (birth‑anniversary), is observed for Sanatan Goswami, linking it to the tradition that his disappearance signified continued service to the Lord in another realm. He recounts Sanatan’s lineage, his birth in a Saraswati‑family in Kanhatka, his brothers Rupagruhaswami and Anupam, and his early devotion to the Bhagavata. The narrative moves through Sanatan’s spiritual activities in Bengal, his interactions with the Muslim ruler Nawab Hussain Shah, the political intrigue that led to his imprisonment, the redistribution of his wealth, and his eventual escape. The talk details his establishment of numerous temples (e.g., Rada Govinda, Rupa Goswami’s temple) across Bengal and later in Vrindavan, his composition of devotional scriptures, and his emphasis on bhakti, service, and detachment. The speaker also outlines practical observances for devotees: the observance of Chaturmas, dietary restrictions during specific months, the importance of regular Bhagavata reading, and the role of communal worship. Throughout, the lecture blends historical anecdotes, devotional reverence, and instructional guidance, portraying Sanatan Goswami as a model of unwavering devotion and practical wisdom for contemporary Vaishnavas.
Chapters
तो आज है सनातन्गो स्वामी जी का तिरभाव देवस सनातन्गो स्वामी जी के विशे में कहा गया है क्योंकि उनके अविरभाव देवस को हम नहीं मनाते क्योंकि ठीक रूप से किसी को पता नहीं کی اُن کا عویر بھاو دن کون سا شد یہ کارن ہے کیونکہ سناتن کو سومی جی کے وشے میں کے بل اُن کا خیدر بھاو مناتے ہیں اور عویر بھاو نہیں مناتے ہیں تو دوسرے شبزوں میں صرف سال میں ایک دن آپ اُن کا گنگان کر سکتے ہو اکثر کئی سنتوں کے وشے میں ہم اُن کی مہیمہ کا گنگان अविरभावाले दिन बे करते हैं और तीरभावाले दिन बे करते हैं पर सनातन को स्वाभीजी के विशे में उनका अविरभाव हम नहीं मनाते हैं तो केवल तीरभाव मनाते हैं तो हम वैश्णवा अचारियों के अविरभाव और तीरभाव दोनों ही मनाते हैं अविरभाव स वो तिरभाव का अर्थ है जब वो अप्रकट हो जाते हैं तो भावतिक स्थीती में जब जस दिन कोई व्यक्ति मरता है या अप्रकट होता है उस दिन हम शोक करते हैं आन्सु बहाते हैं पर वैश्णा के विशे में हम अविरभाव और तिरभाव दोनों को ही बड़े उच्� کیونکہ वैश्णों का ये विचार है कि कोई महान संत करके तीरभाव हो भी तो वो किसी और स्थान में भगवान के सेवा कर रहा है तो आप जैसे जानते हो केतने महार परभुजी के अनेक सिश्र थे जिन में से थे बृन्दावन के छेगव स्वामी शीनेवाद अचार्ये � शी शी गध सद गो स्वामि अश्टका में बड़े सुन्दर रचनाओं द्वाला बड़े सुन्दर आठ रचनाएं हैं जिल में उन्होंने छे गो स्वामियों का गुन्गान किया है तो सनातन गो स्वामि वैसे कहा जाता है इच्छे गो स्वामियों में सबसे बड़े थे और � उनके दो भाई थे सर्णार रुपग्रुष्वामी और अनुपम और कहा जाता है कि वो रुपग्रुष्वामी से पान्च साल बड़े थे आयों में इनका जनम हुआ था एक सारस्वत खांदान में जो की थे कनाठका के पर निवास कर रहे थे बंगाल में और उनके लिष्टदारों में थे राजा जो की एक समय खरनातका के राजा थे जियोग स्वामी जी ने इस विश्य के रच्णा की है और अनुपम रूपा और सनातन उनका सारा दिन केवल एक ही कारिया था भागवत का दिहन कृष्णा लीला का वर्णन और जब वो छोटे थे सनातन्ग स्वामी ने छोटे पन्त से ही भागवत का बड़े गहराई से अध्यान आरम कर दिया था एक समय उन्हें एक सपना आया था जिसमें एक ब्रामिन लड़के ने उन्हें एक भागवतम दिया था पढ़ने के लिए प पुश्पे जैसे वो अपनी पूजा कर रहे थे तो एक ब्रामिन लड़का आया वहाँ भागवतम ग्रंत को लेकर उस ब्रामिन लड़के ने कहा आप इस भागवतम को पढ़िये तो उस दिन से बड़े घहराही से सनातम कुस्वामी भागवत को पढ़ते थे उन्होंने बड� उन्होंने कहा कृष्णा लिला स्थावा में ओ भगवत तुमी हो मेरे साथी तुमी हो मेरे मित्र और तुमी हो मेरे गुरू तुमी हो मेरे गुरू आप हो मेरी सबसे बड़ी संपती और मेरी सुरक्षा करने के लिए और ये मेरा सभाग्या है कि मुझे आपको पढ़ने का स्वभाग्या मौका मिल रहा है। तो मैं आपको प्रनाम करता हूँ। सनातन गुस्वामी शुरु से ही भागवत को पढ़ते थे। हला कि वो थे बंगाल में। उस समय जैसे आप जानते हो बंगला देश नहीं था। तो बंगाल काफी बड़ा था। इसलि تیز کے ستھاں پرابت ہوں گے جہاں کی ہمارے اچاریوں کی سمادھی ہے اور جہاں کی چیتنہ مہا پربو جی اور ان کے بھکتوں نے اپنی دیوی لیلہ پرکت کی تھی اس لیے اس کون بنگلہ دیش میں اس کون کے لگ بھگ چالیس مندر ہیں کیونکہ جتنے بھی تیز کے ستھاں تھے جہاں کی بھی مہا پربو جی نے دیوی لیلہ پرکت کی یا جہاں مہا سنتوں کی سمادھی ہے اس کا انہیں ہر ستھان میں مندر کھولا ہوا ہے تو چالیس سے ادھک مندر ہیں اس کا انہیں بنگلہ دیشن میں کبھی یادتہ لے جانے چاہیے بہت سو کی وہاں تو جو سناتھ انگل سوامی ان کے بھائی تھے بنگال میں رہ رہے تھے اور وہاں کی جو جنگلیں ہیں بند انہوں نے وہی نام دے دیئے تھے जो की बृन्दावन के बनों का नाम है मदुवान और जो खुन्ड हैं उनको नाम देते उन्होंने नाम दे दिया रादखुन्ड और शामखुन्ड तो शुरू से ही उनकी लीला रूची थी केवल अध्यात्मिक कारियों में और पूरा समाज उन्हें बहुत आदर देता था کہا جاتا ہے کیوں خاص کر کے سناتنگ سوامی پورے سماج کو مارک درست دیتے تھے کسانوں کو کہتے تھے فصل کیسے وڑھاؤ اور کہا جاتا ہے کہ اگر کچھ لوگوں کی انبن بھی ہوتی تھی تو ان کے پاس آتے تھے حل کرنے کے لئے تو اُس سمیں لگ وگ پانچ سو سال پور وگ کی بات ہے کہ مصر بنگال میں مسلمانوں کا راجہ آرم ہوا تو ایسے کہا جاتا ہے کہ اندازے سے سناتنگ سومی جی پرکت ہوئے تھے فورٹین ایٹی ایٹ میں اور کیونکہ بالکل ٹھیک روپ سے پتہ نہیں کونسے دن اس لیے ان کا عبید بھارتی تھی نہیں مناتے تو اس وقت بنگال کے راجہ تھے نواب حسین شاہ اصل میں یہ نواب حسین شاہ ایک سمیں ایک مہان بہشنواز سنت سبودی روئے کے گھر میں نوکر تھے پھر چھاپلوسی کر کے راجہ بن گئے اور جب راجہ بنے اس سمیں پرجا تھی لگ بگ ہندو آج اگر آپ بنگال میں جاؤ تو مسلمانوں کی عبادت لگ بگ تیس پرتیشت پر پہنچ گئی ہے पहले उसमें मुश्कल से 0.1% भी नहीं थी तो राजा उश्यार था राज्यतिक कारियों में उसकी इच्छा थी कि कोई ऐसे व्यक्ती को दी जाएं जिम्मदारी शासन करने की जिसमें इस प्रजा की श्रदा हो तो पहले उनने सूषना भेजी रूप और सनातन यंदो भाईयो کہ میں چاہتا ہوں کہ تم لگاؤ میرا شاصن کرو ان کا نام تھا امر دیو اور سنتوش دیو تو ان دو بھائیوں نے انکار کر دیا انہوں نے کہا کہ ہمیں راجلتکاری میں کوئی روچی نہیں ہمیں تو روچی ہے کرشنا بھاجن میں پھر راجہ نے کہا نہیں میرا حکم ہے کہ تم یہ جبیداری اٹھاؤ پھر جبدستی ان دو بھائیوں کو جھوڑا گیا سرکار کی سیوہ میں روچی نہیں تھی اور روپا گسوہمی کو انہوں نے بنایا Finance Minister اور سنارتن گسوہمی کو بنایا پردہان منطری اور پھر کیونکہ انہیں نے مسلمان راجے کی سیوہ آنم کی تو انہیں مسلمان نام بھی سکار کرنے پڑے تھوڑی دیر بعد روپا گسوامی نے سنا نوکری تیاغ دی تھی ایک سمیں روپا گسوامی اور سنادھن گسوامی دونوں بھائیوں نے کئی پتھر ڈالے تھے چیتنہ مہا پربو جی کو جس میں وہ کہہ رہے تھے کہ ہم جب جست یہ نوکری کر رہے ہیں پر ہماری اچھا ہے کہ ہم آپ کے ساتھ آ کر یاترہ کریں पर सुच्छेतन महा प्रभुदी नोने फत्र में उसमें कहा एस समय मठ छोड़ो और वोनोंने वो प्रसिद उध्धारन दिया जो उध्धारन प्रावपा जी घीता की भुमीका में देते हैं उध्धारन ये था उन्होंने कहा कि जिस प्रकार एक विवाहवेच स्तुरी का अ� پر من میں کیا سوچے گی کہ میں جا سکتی ہوں پریمی کو ملنے تو اسی پرکار چیتن مہارببو سندیش دے رہے تھے کہ نکلی کر لو پر من میں کیا سوچتے رہو اصلی پریمی کے بشے میں جیسے کہ بھگوان نے گیتہ میں کہا ہے کیا تس ماں تھرویش کلیش مہمانس مارا یود چاہتے ہیں من اور بدھی کو مجھے عرپن کرتے ہوئے تم اس یود میں لڑو स्तुरुपक स्वामी जी समझ गए तो फिर छेतने महाप्रभू एक समय जहाँ आ रहे थे बृन्दावन की ओर जारखन से जारखन है बिहार में शायद और महाप्रभू जारखन से बिहार आ रहे थे जारखन से बृन्दावन तो रास्तेने मुड कर राम अकेली चले गए बं� یہ دو بھائی رہ رہے تھے تو چیتن مہا پرابو جی کے ساتھی تھے وہ آشکریہ ہو گئے تھے کہ مہا پرابو جی نکلے تھے برندہ ہون کی اور اور پیچھے مڑ کر بھنگار چلے جا رہے ہیں پھر مہا پرابو جی مڑ کر گئے کیسے لیے ان دو بھائیوں کو اپنا درشن دینے کے لئے اور پھر مہا پرابو جی نے ان دو بھائیوں کو اپنا درشن دیا اور تھوڑی دیر بعد रुपा कुस्वामी ने नौकरी त्यागी और सनातन्गो स्वामी वापस लौटे सनातन्गो स्वामी के उपर और भी जिम्मदारी राजा ने सोप दी जोनके भाई जो काम रुपा कुस्वामी कर रहे थे वो और प्रदान भंती का भी ये जो राजा था इसने युद किया था उरिशा के राजा के साथ उरिशा के राजा का नाम था उससे में महराज पता पर उद्रा जो की बहुत उच्छे कोटी के भाग थे और कई लेखोने ने कहा है की यो राजा ने कई हिंदू मंद्धों को नश्च कर दिया था उरिशा में तो सनातन को स्वामी को अच्छा नहीं � उनकी च्छभी यही थी कि वो जड़ें काम में किन के साथ? चेतन महा पभुजी के साथ तो सनासंग स्वामी ने राजा को सूचना भेडी कि मैं बिमार हूँ और क्या कर रहे थे वो? ब्राम्णों के साथ बैठ कर भाग्वत का अध्यान कर रहे थे تو نواب حسین شاہ نے سندیج بھیجا لوٹو اپنی جمہداری کا پالن کرنے کے لیے سنادھ انکل سواوی نے کی روچی نہیں تھی اور سنادھ راجہ نے اپنے ڈاکٹر کو بھیجا یہ دیکھنے کے لیے کہ کیا بیماری ہے سنادھ انکل آج کل اگر کوئی اپنے گھر میں آنا چاہے तो घंटी बजाता है और आप पूछते हो कौन है हना पर उन देन में येश्वी रश्यत नहीं थी तो डॉक्टर साहब सीधा अंदर आ गए जब अंदर आ ये तो उन्होंने क्या देखा सनातन कुल स्वामी पंदितों के साथ बैट कर क्या कर रहे हैं भागवत का अध तो जब राजा को ये सूचना मिली कि सनातन का स्वाश ठीक है और वो केवल शास्मों का अध्यान कर रहे हैं पंदितों के साथ तो उन्होंने कहा कि यहां तुम अपनी जिम्मालारी में वापस लोटो नहीं तो मैं तुम्हें जेल खाने भेर दूंगा राजा थे कुछ جب روپہ کسومی نے اپنی سرکاری نوکری تھیا گی ان کے پاس اتنے سونے کے سکھے تھے کہ انہوں نے آدھی سمپدی تو باٹی پچاس پتیشد بھرامنوں کی سیوہ میں پچیس پتیشد انہوں نے باٹا رشتہ داروں کو اور پچیس پتیشد انہوں نے رکھا کچھ بھرامنوں کے ساتھ بھوش کی آمشکتوں کے لیے تو سناتن گسومی جب جیل میں تھے انہوں نے جیلر کیہدی کو کہا جیلر کو کیا کہتے ہیں جیلر جو جیل کے سپاہی ہوتے ہیں انہوں نے کہا کہ مجھے چھوڑ دو میں مکہ جانا چاہتا ہوں اس نے کہا بھائی آپ تو اتنے بڑے کیہدی ہو آپ کو چھوڑوں گا تو راجہ تاں مجھے جندہ نہیں چھوڑے گا خیر اسی سمیں سناتن گسومی کو پتہ آ گیا تھا بھائی کا کہ میں نے تھوڑی رقم یہاں چھوڑی ہے دس ہزار سونے کے سکے تو پھر اون سونے کو سکوں کو لے کر اور ان کے دوارہ سناتن نکلے جیل سے اور राषने में वो रुके एक रात के लिए क्योंकि छुप छुप कर वो जा रहे थे तो वो छुप छुप कर जा रहे थे तो राषने में वो रुके और मिले एक रात के लिए रुके कहाँ एक गैस्ट हाऊस गैस्ट हाऊस में सीज के सान में नहीं गैस्ट हाऊस सराई सराई में � तो उनके साथ उनका नौकर था जिनका नाम था ईशान जिसने आठ सोने के सिक्के अपने पास रखे थे तो उस सराय का जो मालिक था बड़े साध्धानी से सेवा कर रहा था आगे बीचे दौड़ रहा था तो सुनातन को सभी के साथ राजनितिक अभ्यास था वो समझ गए क آپ کی کوئی خاص خاطر کرے آپ بھی شک کرتے ہو شاید اس کو کچھ چاہیے ہوگا تو سناتھر نے اپنے سیوکھ سے پوچھا تم کچھ سمپتی تو نہیں اٹھا رہے اپنے ساتھ تو ایشان نے کہا میرے پاس ساتھ سونے کے سکھے ہیں تھے آٹھ تو سناتھر نے کہا کہ تم موت کو کیوں ساتھ لے جا رہے ہو کیونکہ دھن ہو تو کوئی لوٹے گا مارے گا سناتھ نے وہ ساتھ سکھے لے کر وہ سرائے کے مالک کو دے دیا سرائے کے مالک کے پاس ایک جوشی تھا کیونکہ ہر یاتری جب آتا تھا وہ اندازہ لگا لیتا تھا یہ دھنی ہے گریب ہے کتنی سمپتی ہے تو اس نے سرائے کے مالک کو کہا تھا یہ تو بڑا دھنی یاتری ہے اس کے پاس آٹھ سونے کے سکھے ہیں تو بڑے دھیان سے ان کی دیکھ وال کی جا رہی تھی تو سناتا نے سرائے کے مالے کو سونے کے سکے دی اور کہا آپ اسے لیجئے اس نے کہا نہیں نہیں تم مجھے شرمندہ کر رہے ہو میں جو تمہیں آج رات کو مارنے والا تھا اسے انہیں کسی کے لینے کرے ہیں خیر سناتا نے کہا کہ آپ نہیں لوگے تو کوئی اور مجھے مارے گا یہ لینے کرے تو آپ ہی لے رہا ہو سناتا کو سوامی جا رہے تھے بنارس کی اور راستے میں وہ رکھے ان کے رشتدار شریکاند کے گھر میں شریکاند دھنی بیگتی تھا جس کے پاس تین ہجار سونے کے سکھے تھے وہ آیا تھا مسلمان راجہ کے لئے گھڑوں کو خریدنے کے لئے اس نے جب سناسن کو دیکھا دھاڑی بھڑا گئی ہوئی اور جالیں پھٹے ہوئے کپڑوں کے ساتھ उन्हें उन्हें निमंतर दिया वह रहने के लिए पर सनातन की कोई रूची नहीं थी फिर सनातन महाप्रभुजी को मिले एक वर्णासी में तो सनातन गोस्वामी ने महाप्रभुजी से बड़ी घहरी सिख्षा प्राप्त की और चेतन महाप्रभुजी उन्हें छार मूल सेवा उन स्थानों की स्थापना करो जहां कि चेतिन महा प्रभुजी ने अपनी दिव्य लीला प्रकट की है जहां कि भावान कृषिन ने अपनी दिव्य लीला प्रकट की है आज तो आप ब्रज में जाते हो कहते हो हाँ यहां यह लीला भावान कृषिन ने प्रकट اُنہوں نے یہ ستھاپنا کی ہے بڑے دھیان سے کھوچ کیا ریسرچ क کیا کہ کس کے ستھان میں چیتنِ مہا پرابو جی نے کونسی لیلہ پرکھڑی تھی کریشن بھگوان نے کونسی لیلہ پرکھڑی تھی پھر مہا پرابو جی نے اُنہیں آدیس دیا کہ بھگوان کے آرچہ بگھرہ کی ستھاپنا کرو آج آپ برنداون میں جاتے ہیں آپ کہتے ہیں پانچ ہیڑار مندر ہیں اُدھر ہے کی نہیں پھر سب سے پہلے مندر کس نے ستھاپنا کی اِن غوثومیوں نے گو سو میں سے پہلے جو مندر تھے انہیں مسلمان راجوں نے نشک کر دیا تھا کیونکہ اتھر بھارت میں تو مسلمانوں کا اشاصن تھا تو انہیں برنداون کے کئی مندروں کو نشک کر دیا تھا پھر این آچھے بگڑا کی ستھاپناک کس نے کی گو سو میں نے خاص کر کے چیز سناتن گو سو میں نے چیز رادہ مدن مہن مندر کی ستھاپناک کی اور یہ کاثم آپ کو سنائیں گے تھوڑی دیویں پھر آگے उनने कहा कि भाँ भक्ति के नियमों के ओपर ग्रंतों की रचना करने के लिए और इसलिए उनने अनेक ग्रंतों की रचना की जिसमें आपको भक्ति के विशे में ज्यान प्राप्त होता है पर आगे उनने कहा कि भक्ति समंदित भक्ति समंदित सिख् کہ مسلمان راجہ اکبر بھی گئے تھے برنداون میں ان کا درشن لینے کے لئے تو سناتنگو سوامی نے ہمیں انیک پرسید گرنس دیئے ہیں ہری بکتی ویلاج جن کا ونن بار بار سنتے ہو اور انیک اور گرنسوں کی رشتہ انہوں نے کی ہے تو سناتنگو سوامی برنداون میں جا کر سارا جیون بٹا رہے تھے مدوکری کر کے اندازہ لگاؤ ایک سمیں روپگو سوامی کے پاس اتنا دھن تھا کہ ایک پوری ناں بھڑ گئی تھی سونے کے سکوں کے ساتھ تاب اندازہ لگا سکتے ہو کہ اگر روپگو سوامی جو کھزان منتری تھے ان کے پاس اتنی دھن تھا تو پردان منتری کے پاس کتنا دھن ہوگا وہ نے سب کچھ بھرامنوں کو باد دیا और रगुनादाज को स्वामी जो भी इनके साथी थे जो है करोर पिती पिता के पुत्र थे उन्होंने भी सब कुछ त्याकर गए ब्रिंदावन में और ब्रिंदावन में वो कैसे रहते थे मधू करी करके मधू करी का अर्थ है जैसे एक मधू मखी एक फूल से दूसरे तो ये मदु करी करके घर घर जाकर भीक मांगते थे और थोड़ा सा ही खाते थे तो सनातन गुर्स्वामी जब बृन्दावन में और मत्थरा में मदु करी कर रहे थे तो इसके दुरान एक चोबी नाम के खांदान के घर में वो गए जिनके पास एक भावती सुन्दर विग्र जिनका नाम था मदन मोहन तो ये चोवे खांदान ब्राम्णों का खांदान था सनार्दन्गो स्वामी ने जैसे उस विग्रह का दर्शन लिया इतने आकरशित हो गए और उनकी च्छा यही थी कि धिन रात इस विग्रह का स्मनन करते रहें पर विग्रह तो उनका नहीं था चो और चोबे खानदान की जो पतनी थी उनका एक पुत्र था जनका नाम था सनातन तो वो अपने पुत्र को और मदनमोन विग्रा को एक समान दोनों को सेवा करती थी और सनातन इतने प्रभावित हो गए थे आकिरशित हो गए थे इस विग्रा की ख़प्सूर्ती से कि उनकी इच ये विख्रा मुझे प्राप्त हो सकता है। उन्हें कहा नहीं ये तो हमारा बेटा है। फिर सनातन ने कुछ खानदान के धर्मपती से कहा कि आपको बेड़े जैसे तो पूछते हो अच्छा है पर आपको भगवान ये तो आपके इश्टदेव हैं इनकी आपको खास पूजा क مردن مہن کا درشن لینے کے لئے ایک دن مردن مہن ویگراں نے سپنے میں کہا چوبے خاندان کی پتنی سے سریمتی چوبے سے کہ یہ جو سناتن آتا ہے روج آپ کے گھر میں اس کی بڑی اچھا ہے کہ میں اس کے گھر میں رہوں تو آپ مجھے دے دو انہیں تو اگلے دن جب سناتن کو سومی آئے तो श्रीमती चोबी ने कहा आप इस विग्राह को ले जाओ। क्योंकि भगवान ने सपने में आदेश दिया था। तो सनातन के पासे कोई रहने का ठीकाना नहीं था। जमना किनारे एक पेड के नीचे रह रहे थे। तो उन्होंने अपने कमरे के परोस में एक कुटिया बना� سناتن جب مدو کر کر کے رہ رہے تھے تو بہت سادا جیون تھا مٹی سے بناتے تھے کچھ اور سوکھی چپاٹی بھوگ میں عرپن کرتے تھے ایک دن وگرہ نے کہا کہ سناتن کچھ اور کھلاو مجھے جا روج سوکھی چپاٹی نمک ایسا کھلاتے ہو اور سناتن کو سوچنا ملی کہ ان کا بھائی آنے والا ہے انہیں ملنے کے لیے سناسن کے ہردے میں اچھا پرکت ہوئی کہ جب میرے بھائی آئیں گے مجھے انہیں کوئی کھیر کچھ اچھا بھوجن کھلانا چاہیے تو سوویدہ تو تھی نہیں حالانکہ ایک سمیں کے پاس اتنا دھن تھا اب وہ رہ رہے تھے ایک گریب برامن کے روپ میں برج میں تو ایک رادرانی جی نے ایک خوبصورت لڑکی کا روپ گرہن کر کے چینی دودھ اور سب سبیرہ لے گئے اور سناتن کو دیا اور کہا کہ کھاؤ یہ روپ گرہن کر دیا تو سناتن سمجھ گئے جب روپ گرہن نے بڑی اچھی کھیر بنائی تھی تو سناتن سمجھ گئے یہ کھیر کیسے بنی ہے کیونکہ روپ گرہن راجرانی نے لڑکی کا روپ گرہن کر کے ये सब सुविदा दी थी तो उन्हें अपने भाई को डाटा तो उन्हें भाइवाण से सेवा ले लिए तो सनातन को स्वामी अपने मिग्शा की पूजा कर रहे थे पर उनकी मन में इच्छा थे कि एक मंदर बढ़ाया जाये इनके लिए पर कोई सुविदा तो थी नहीं एक व مہنگے گہنے وغیرہ تو اس کی ہردے میں چندہ تھی کہ اندھیرہ آنا تھا کہ ہم یہاں فز گئے تو ڈاکو آئیں گے رات کو سب لوٹ لیں گے تو وہ دیکھ رہا تھا کوئی چاروں طرف کوئی بیگتی ہے جیسے آپ کبھی اندھیرے میں ہوئے اکانت کے ستان میں تو آپ ڈھونڈتے ہو کوئی ساتھی مل سکتا ہے یہاں تھوڑے دور میں دیکھا کہ ایک کٹیاں میں تھوڑی روشنی دکھ رہی ہے تو وہ گئے وہاں وہاں سناتھن کو سوامی اپنا بھجن کر رہے تھے اور پھروس کی کٹیاں میں تھے اُن کی وگڑا مدن مہن کی پوجا تھا تو اس پیکو اس ویپاری نے کہا میری سمجھیا ہے کہ میری نام فز گئی ہے میری نام گہنوں سے بڑھی ہوئی ہے مجھے ڈیرے کوئی ڈاکو نہیں آ جائے رات کو لوٹنے کے لئے تو سناتھن نے اُنہیں بھیجیا اپنے وگڑا کے پاس پوچھا کہ تو بکھانی ویپاری نے پوجا کی کہ میری ناو اگر نکل جائے کسی پکار سے تو جیسے وہ لوٹرائی تھا بہت تیجی سے لہر آئی تو ناو جو پھسی ہوئی تھی وہاں سے ہلنے لگ گئی پھر اس ویپاری نے یہ پراتنا کی تھی کہ اگر میری ناو نکل جائے یہاں سے تو جو میں پیسہ کماؤں گا وہ لا کر میں آپ کی سیوہ میں عرطن کروں گا تو ویپاری ایماندار تھا تاہا گراہ جا کر اس نے بہت پیسہ کم آیا مال بیج کر تو وہ دھن لے کر آیا اور اس نے ارپن کیا سناتن جی کو پر سناتن گو سومی نے کہا اسی دھن سے تم اس مندر بناو مدد مہن کے لئے تو پھر انہوں نے مدد مہن کا مندر بنایا اور پھر تھوڑی دیر بعد راد رانی جی کی موردی کو وہاں ساتھ میں جوڑا گیا تھا تو سناتن گو سومی نے अनेग ग्रंतों की रचना की और रोज हो गोवरदान का परिक्राम करते थे बुरी आयू में भी गोवरदान का परिक्राम करते थे 1108 बार गोवरदान को प्रनाम करते थे और जो भी वैश्णवा आता था उन्हें मिलने के लिए उसे भी वो प्रनाम करते थे तो बुड़े हो रहे थे सनातन को स्वामी तो गोवरदा ने कहा भगवान कृशे ने कहा आप तुम बुड़े हो रहे हो परिकाम करना बन कर दो आप तमारे बचका नहीं तुम 24 कलो मीटर की परिकाम करो रोज पर सनातन ने कहा नहीं मैं परिकाम बन नहीं कर सकत भगवान भगतों की सेवा करते हैं ये जो भगवान के नेक नामों में एक नाम है भगता मत साथ भगतों के बड़े प्रेमी हैं भग प्रयास करते हैं भगवान को प्रसन करने के लिए भगवान प्रयास करते हैं भगतों को प्रसन करने के लिए तो भगवान ने एक और दि� پھگل گیا بنسی کی بنسی کو سن کر وہ اس پہاڑ کے پھگل بھی گیا پتھر وہ اس پتھر میں بھگوان کے چین کملوں کی نشانی بھی ہے تو پھر بھگوان نے کہا سناتن سے کہ اگر تم اس پتھر کی پریکرام کرو گے روج تو یہ مانا جائے گا کہ تم گوہران کی پریکرام کر رہے ہو چار بار اگر اس پتھر کی پریکرام کرو گے تو یہ مانا جائے گا کہ آپ گوھر دان کی پریکرام کر رہے ہو کہ سناتھن گوڑے ہو گئے تھے بہت ہی کتنائی سے گوھر دان کی پریکرام کر رہے تھے چالے سے ادھے سالوں کے لیے سناتھن نے برچ کی پریکرام کی بکہیدہ اور برچ کے ہر ستھان میں گئے اور برچ کے لوگوں کو اپدیش دیتے تھے وہاں انہیں انہیں گھنٹوں کی رچنا کی اور ان ستھانوں کو کھوجا جہاں کی چیتنیا مہا پربو جی نے اپنی دیوی لیلہ پکڑ کی تھی بھاگو آنکیشن نے اپنی دیوی لیلہ پکڑ کی تھی تو چیتنیا مہا پربو جی نے سناتن گو سومی جی کو بہت ہی مہتر پونٹ سکھشہ دی ہے جس کے وشہ میں آپ چیتنیا چھترمی تکی مدی لیلہ کے 22 ادھیہ میں پرات کرتے ہو ایسے تھا چیتنیا مہا پربو جی نے دھکتی سمبندت سکھشہ دی تھی دونوں بھائیوں کو रुपा को और सनातन को महाप्रभुजी ने कहा किस परकार भज्जीव अनेक यून्यों में गुजरने के परसाथ वो भाग्यवशाली व्यक्ति है जैसे भख्ति का ज्यान प्राप्त होता है ब्रह्मन्द न ब्रह्मीते कोनो भगवानो जी गुरुष्ण कृपपायत भख्ति شرونم اور کسلنم کے مادیم سے پانی پلاؤ گے اور آگے چیتن مہا پرابو جی نے کہا ہاں کی اگر آپ اپنے آپ کو مایا کے پروبھار سے بچانا چاہتے ہیں تو کیا کرنا چاہیے سادو سنگت میں رکھنا چاہیے اور پھر انہوں نے آگے سکشا دی کس پرکار ہمیں بھگوان کے شرنکت ہونے کے چھے نیم ہیں ان کے بشے میں انہوں نے کہا جو بھکتی کے لئے انکول ہے سرکار کرو جو بھکتی کے لئے پرتکول ہے اسے تیاگو تو سناتن گو سومی ویسے منجاری کے آواتار ہیں اور منجاری انہیں کہا جاتا ہے جو کی گوپیوں کا سعیوگ دیتی ہیں رادر رانی جی کی سیوہ میں سناتن گو سومی جی نے ہمیں انہیں پرسد گرند دیئے ہیں ان کے بھائی روپ اور سناتن کے ساتھ रुपा और जीवा गुष्वामी और जीवा गुष्वामी के प्रयाज से रादा दामनर मंदर की स्थापना हुई रादा गोविन जी मंदर की स्थापना हुई रुपा गुष्वामी जी की प्रयाज से और फिर रादा गोविन विगरह को ले गए थे कहां जैपुर में जब म کیونکہ وہاں انیک بگراہ ہیں جن کی ستھاپنا ہمارے اچاریوں نے کی تھی پھر مسلمانوں کے ہتھیچار سے بچانے کے لئے وہاں لے گئے تھے جائی پور میں کیونکہ اس وقت وہاں ہندو راجہ تھا تو ہم ہمیں آج اِس شب آفسر پر سناتنگو سومی جی ایسے کہنے کے لئے تو بہت کچھ ہے چیتن اے چتر مریتوں کی انیک لیلوں کا وڑنن ہے چیتن اے مہا پھربو جی نے کہا کہ میرے سب سشیوں میں سب سے پریہ سشے ہے میرا سناتن گو سوامی سناتن اور روپا نے ایک ادھیادمک سکھشہ پرات کی تھی سارو ممہ بھٹچاریہ کے بھائی ان کا نام تھا بچہ اسپتی ان سے اور پھر کئی کہتے ہیں کہ انہوں نے دکشہ بھی ان سے لی تھی اور پھر انہوں نے سکھشہ لی تھی چیتنہ مہا پربو جی سے تو سناتن گو سوامی جی نے ہمیں انیک گرانتی ہیں جن کے بشر میں ہمیں भक्ति का घ्यान प्राप्त होता है तो इस शुब असर पर हमें क्या करना चाहिए उनके चलन कमल में प्रनाम करते हुए उनसे भीक माँगनी चाहिए क्या क्यूंकि हमें क्रिपा प्राप्त हो जिसके द्वारा हम भक्ति के मार्ग में आगे बड़ सकें ये जो हमने शीरी कृष सुरुभदाम्लर, शेगवस्वामी सब मेरे पर क्रिपा की जिये कि मैं भक्ति के मारग में भक्ति के मारग के द्वारा परण भगवान पेशन के समर्पन हो सकूं। इस परिगार हमें भी सनातन गवस्वामी की भीक माँगनी चाहें कि हम उनकी क्रिपा से भक्ति में आगे बन उन नियोंमा का पालन करना चाहिए भक्ति में आगे बढ़ने के लिए तो आज जैसे आप जानते हो वियास देव जी का भी अविर्भाव देवस है वैसे तो भारत में इसे गुरु पुर्णमा के रूप में मनाते हैं पर हमारे इसकान में और हमारी वर्ष्ण और संप्रदाय तो उनकी माता का नाम था सप्यावती पिता का नाम था प्राश्य मुनी और वियासदेव जी को भगवान का अवतार माना जाता है भगवान वियासदेव जी के रूमें पकट हुए थे किस लिए धखती सम्मिंदद सिख्षा हमें देने के लिए और वियासदेव जी ने हमें य उन्हें पहले एक वेद की रचना की थी फिर उसका विभाग चार भागों में हुआ फिर कई उपन शास का वर्णन किया पर इस सब शास्तों का वर्णन करने के पश्चार भी वियासदेव को क्या मसूस हो रहा था कि मेरे काम एक कोई थूटी रह गई है तो सारस्वधी न کہ میں نے ان سب گرنتوں کی رچنا کی جب بھی مجھے ایسے محسوس ہو رہا ہے کہ میرا کام ادھرہ رہ گیا ہے جیسے وہ یہ وچار کر رہے تھے وہاں پہنچیں نارد مونی جی اُن کے گروہ وہ نارد مونی نے کہا کہ اس ریلاشا کا کیا کارن ہے کیونکہ تم نے وہ گرنت نہیں پرستد کیا जिसमें केवल शुद्ध भक्ती का ज्यान प्राप्त हो सकता है और फिर उन्होंने हमें क्या दिया श्रीमात भगवतम निगामक पग्रोर गलीतम फलम जिसे वेदिक साहित्य का सबसे ठकावा फल माना जाता है और जिसमें केवल शुद्ध भक्ती का ज्यान है और हमने आपको स श्रीमाद भागवत की प्रसंसा की और कहा ये असनी संपती है इसलिए हमारे वैश्णों संप्रदाय में भागवतम का ध्यन रोज किया जाता है और कहा गया है भागवतमे ही नस्तप्रेश्वद्रेश्व निर्त्यं भागवत सेवया भागवत यृत्रमश्लोके भाक्ति भा� तो उसके हिदे में भाक्ती भावना आवश्यकी उत्पन होगी और जो मया रूपी विचार हैं वो नश्ठ होंगे इसलिए हमें भागवतम को दिहान से सुनना चाहिए और अगर आप ऐसी स्थीती में हो कि आप रोज मंदर नहीं आ सकते तो घर में भागवतम को पढ़िये और तो आपकी अग्यानता दूर होगी और अध्यात्मिक ज्यान आपका बड़ेगा तो आज व्यासदेव जी का अवेभावतीती हैं तो व्यासदेव जी के चलन कमलों में प्रणाम करते हूँ उनसे भी हम भीक मांगते हैं क्या कि हमें उनकी कृपा प्राप्त हो कि हम धन मन धन से ابھی کھتا نہیں ہوا بھائی آج یہ چتر مچھے کا بھی کیا ہے پہلا دن ہے چتر مچھے کے چاند مہینے کا چتر مچھے ہوتا ہے اور یہ آرام ہو رہا ہے آج چتر مچھے کے ساتھ تو ویسے تو پراچین سمیں میں سنت مہاتمہ جو ہے یاثرہ کرتے تھے سارے سال पर चतिरमस्या चार महीने के लिए एक खासके पारिश के मौसमें एक स्थान में रहकर वो भगवान का भजन करते थे। जैसे आप नारद मुनी जी के विशेमे में पढ़ते हो कि चतिरमस्या के समें उनकी माता को मौका मिलता था संतों के सेवा करने के लिए जिसके कारण नार اُنہوں بھی سنتوں کی سنگت پرابت ہوتی تھی اُن کے دوارہ اُبدیش سننے کا موقع ملتا تھا تو چار مہینے چتر مصر کے وہ پہلا چتر مصر شروع ہو رہا ہے آج سے تو پہلا مہینہ چتر مصر کا شروعن کا مہینہ جو کی آج سے آگے ایک مہینے تک چلے گا جس میں ہم ساگ یا گھاں ساگ یا ہرے پتے کی سبجی نہیں کھاتے फिर अगला महीना है बद्रा का महीना, वो अगले महीना, आगेस से सब्टेमबर चलेगा, जिसमें हम धाई नहीं खाते, और फिर अगला महीना है आश्वीना, जिसमें हम एक महीने के लिए दूद नहीं पियेंगे, और फिर आता है खार्थिक का महीना, जिसमें हम उरे डाल न جیون سمرپن کیا ہے بھگوان کے سیوہ میں وہ تو اتنا دھیان نہیں دیتے پھر یہ جو چار نیم ہیں اس کا تو ہم پالن کرتے ہیں اور کہا ہے شاستر میں کہ جو بھیکتی چتر مچھے کے سمیں تپسیاں نہیں بڑھائے تو وہ بھیکتی جو ہے نرک میں جاتا ہے تو چتر مچھے کے سمیں ہمیں تپسیاں بڑھا دینی چاہئے جو بیٹی سولہ مہمہ کریں وہ بھی سولہ مہمہ بھی تپسیا ہے سولہ مہمہ کا جہاں بچہ نہ کریں تھوڑا زیادہ کرسکتے تو زیادہ بھی کرسکتے تو اچھا ہے اور شاستیوں کا دھیان بڑھا دوں پرچار بڑھا دوں ویسے تو شاستیوں میں کچھ تھوڑا ورنن ہے اور گہری تپسیا کا وہ کرنا عموشک نہیں ہے تو اگر آپ چاہو تو میں پڑھ کر سنا دوں کھا گیا ہے اگر آپ نمک نہیں کھاؤں تو آپ کا کھنٹ سے زیادہ میٹھا ہو جاتا ہے پھر کچھ تیل نہیں کھاؤں تو کہا جاتا ہے کہ آئیوں بڑھ جاتی ہے اور تیل کا مساج میں لوں تو آپ کا شریعت زیادہ خوبصورت ہو جاتا ہے اور تیل کے بغیر کھانا اور جو پھول بھگوان کو بھوگ نہیں لگے ہو وہ نہیں پہنا چاہیئے اور کچھا کھانا کھاؤ تو اچھا ہے ایسے شاستر میں انہیک نیم دی گئے ہیں چتر مسئلے میں جیسے بھگوان کے چھلن کملوں کو چھو بھگوان کے مندر کو آکر ساف کرو بھگوان کے مندر کا پریکام کرو بھگوان کا گنگان کرو مندر میں بیٹھ کر کرتن کرو جو کرتن کے بھگت ہیں اگر وہ مندر میں کرتن کریں تھیک سمجھو زیادہ ادھر لاب ملتا ہے اور چھتر مچھل کے سمیں کہا جاتا ہے شاستوں کو اور دھیان سے پڑھو بھگوان وشنوں کی سیوہ کرو ہو سکتا ہے تو دو تین بجا کھانے کے جگہ ایک دفعہ کھاسکتے ہیں کئی بھاگتے ہیں اچھا سر مچھا کے سامنے دو تین بار کھانے کے بجائے دن میں ایک بار کھاتے ہیں اور اگر آپ چاہو تو ایک ہی دفعہ کھاؤ شام کے سامنے یا دپیار کے سامنے اور روز ناند کرو ساڑھا پتے میں کھاؤ تھالی میں کھانے کے بجائے سے ایسے انیک نیم ہیں پر جو بھاگ جنہوں نے جیون سمرپن کیا ہے بھگوان کے سیوہ میں جو بکیدہ سولہ مالہ کا جاب کر رہے ہیں چار نیم کا پالن کر رہے ہیں بھاگوت گیتہ کا ادھیان کر رہے ہیں تو وہ تو پھر سارا سال ہی چطر مسجد کا پالن کر رہے ہیں یہ نہیں کہ ہم چطر مسجد کے سامنے نیموں کا پالن کر رہے ہیں اور باقی سامنے نہیں کر رہے ہیں تو اصلی سمرپن ہے سارا سال یہ چار مہینے جو ہیں اگر آپ یہ چار مہینوں میں تھوڑی تپسیاں بڑھا دو जा बड़ा दो शास्तों का ध्यन बड़ा दो तो ये अच्छा दाएगा प्रचार बड़ा दो तो ये चान महीने जो माने जाते हैं सबसे शुब भगवान के चर्णों में समर्पन करने के लिए तो आज इसका पहला दिन है हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे कृष्णा प्रेश्टा प्रेश्टा आने आने आने आने
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