वैष्णव चरितामृत भाग -1 | भक्ति विनोद ठाकुर तिरोभाव दिवस विशेष | 21 Jun 2020 | Gopal Krishna Goswami

यह व्याख्यान भक्ति विनोद ठाकुर (भक्ति विनोद ठाकुर) के जीवन, शैक्षणिक पृष्ठभूमि, ब्रिटिश प्रशासन में उनके कार्य, और वैदिक‑गौड़ीय वैष्णव सिद्धान्तों के प्रति उनके समर्पण का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करता है। वक्ता बताते हैं कि ठाकुर एक धनी बंगाली परिवार में जन्मे, बचपन से ही कई भाषाओं (हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, बंगाली, ओड़िया) में निपुण हो गए और बाइबिल व वैदिक ग्रंथों का तुलनात्मक अध्ययन किया। उन्होंने लगभग सौ ग्रंथ रचे, जिनमें बाइबिल के आदेशों की व्याख्या, भागवत‑चैतन्य‑चौविधि पर प्रकाशन, तथा शुद्ध वैदिक शिक्षाओं की रक्षा के लिए ‘सहज’ प्रथा के विरुद्ध लेखन शामिल है। ब्रिटिश राज में वे जिला प्रबंधक‑जज के रूप में कार्यरत थे, जहाँ वे मामलों को अत्यंत शीघ्र (5‑10 मिनट) निपटाते थे, जिससे उनकी न्यायिक कुशलता की प्रशंसा हुई। उनके दैनिक अनुशासन में सुबह 5 बजे से लेकर रात 10 बजे तक का विस्तृत समय‑सारिणी शामिल है, जिसमें दो घंटे विश्राम, शास्त्र लेखन, अनुवाद, और सेवा कार्य सम्मिलित हैं। व्याख्यान में उनके भविष्यवाणी का उल्लेख है कि भविष्य में एक महान महारथी आएगा जो हरि नाम को विश्व के कोने‑कोने में प्रसारित करेगा। अंत में, जगन्नाथपुर मंदिर के पुनर्निर्माण में उनके योगदान और सामाजिक सुधारों की भी चर्चा की गई है।
Chapters
ओम नमो भगवते वासुदेव, भवते वासुवा भगत वासु। पहले हम भक्ति ने ठाकुर जी का प्रणाम मंसा का उच्चालन कर सकते हैं। नाम भक्ति धाया सचिन नंद नाम ने शक्ति सुर पाया, बड़े थे। तो कहा जा रहा है कि हम आखिर ठाकुर को प्रणाम करते हैं जो कि बड़े ऊँचे कूटी के वेश्म है और जो रूप की शिक्षा के आधार पर विचार कर। भक्ति ठाकुर जी के विश्व में बहुत कुछ चेक करने के लिए 1 ग्रंथ प्रकाशित हुआ था इसका नाम सहमत गोसवमी जिसमें कहा गया था वंदावन गोस्वामी थे और साथी कौन है भागी नोटा छेतने महाप्रभु जी के प्रकट होने के पश्चात जो उनका प्रवित सिद्धांत था वो गलत हाथों में आ गया था और लोग कृष्ण बकरी भगवान के नाम पर सहजपन प्रकट कर लेते है। और शहाजयापन व्यवहार में लड़कियों के साथ खेलना और हिंदु समाज में वैसा का स्थान इतना गिर गया था कि कोई अपने आप को वेषणा बुलाने से शर्मा दाता, किसी को बोलो तो वैष्णा और क्या हम नीचे सो वैसा से शांत कर स। स्थान बहुत गिर गया था और 3 ठाकुर पक होए थे। एजी में रेशा सिधान महा सहयाग के हाथ में आ गया था। भगवान ने भक्त ठाकुर को भेजा इस धान को ठीक रूप से की स्थापना करने ठाकुर का जन्म हुआ था एटीन थर्टीएट में, बंगाल में 1 बड़े धनी खानदान छोटी आयु में ही उन्होंने अच्छा ज्ञान प्राप्त कर लिया था अनेक भाषाओं में उनका ज्ञान पढ़ गया था और उन्होंने क्योंकि धनी खानदान में जन्म लिया था इसलिए उन्हें अच्छे 5 शाम से शिक्षा प्राप्त हुई और छोटी आई अंग्रेजी, उर्दू सब भाषाएं सीख ले लिए सीन ठाकुर छोटी आवाज अंग्रेजी भाषी बोलते थे और उन्होंने अंग्रेजी सरकार ने उन्हें बेसिक मैरिज की जिम्मेदारी की नौकरी मिले उन दिनों में बेसिक मेडशेडहमसंक्शेप में भारतीय ठाकुर जी की जिला में चर्चा करेंगे अगर समाप्ति में मदीना ठाकुर जी का जो 1 ग्रंथ है शरणागति उसमे उन्होंने बड़ा महत्वपूर्ण संदेश दिया उस संदेश की चर्चा करेंगे तो उन दिनों में अंग्रेज सरकार का राज्य था और सबसे ऊँचा बल जो भारतीयों को मिलता था वसा डिस्टिक अति नो ठाकुर बोल में और उन्हें ये पद प्राप्त हुआ था और उन्होंने अपने जीवन में लगभग सौ ग्रंतों की रचना की अंग्रेजी भाषा में, बंगला भाषा में, ओड़िया भाषा में, उन्होंने भाषा में और उन्होंने चीफ ने महाप्रभुजी का शुद्ध संदेश था उसकी था क्यूंकि वो बहुत पढ़े लिखे थे, उन्होंने बाइबल को भी अच्छी तरह पढ़ लिया था और उन्होंने 1 ग्रंथ लिखा था जिसमें उन्होंने बाइबल की ट्रेन कंमांडमेंट्स की चर्चा की थी और जब वो ग्रंथ प्रकाशित हुआ तो कई बड़े अंग्रेज में अंग्रेजों के राजा ने कहा on to study the bible wi for book ठाकुर ने बाइबल के कोटेशन को लेकर भागवत की, लिजी से समझाया उन दिन में अंग्रेजों का ये ये भारतीय लेटरेचर है इसका कोई वैल्यू नहीं है हमारे पूरी अलमारी की किताबें भारत के 1 ग्रंथ के बराबर है वर्जिन ठाकुर के मन में यह भाव था कि वो स्थापित करे ये जो वेदिक शिक्षा है ये कोई कल्पना नहीं है, माइथोलोजी नहीं है, यह वास्तविकता है, सच है। तो उन्होंने पहले क्रिश्न बाइबल को पढ़ा, अनेक और रेशनल सभा के ग्रंथों को पढ़ा। और इसके द्वारा लोग उनमें विश्वास बढ़ गया और विश्वास बढ़ा। दोनों ने भागवतम इत्यादि चेतनचवीताभीुचगा। उन्होंने यह स्थापित किया कि भागवत और चेतन चौतवीदामेंसबसे उत्तम ज्ञान है। सब से पूछा गया तो लगभगतीन ठाकुर जैसे हमने कहा भी ब्रिटिश सरकार के समय वो बन गए थे। डिस्टिक मेनेजर और डिस्टिक मैनेजेट में। उनका क्या काम था। उनका काम था जज का और मैनजेर के रूप में। वो इतने तेज थे कि जो केस 1 अंग्रेज वकील को 6 घंटे लगते थे। सुनकर समानके उन्हें 5 मिनट लगते है। तो 1 दिन में 30 से 35 कोर्ट के केस भारतीय ठाकुर सुनकर निर्णय दे देते थे। जिसके कारण जो जू से वकील हैं। उनके हृदय में इंशा हुई। देखा कि ये इतना तेज है, हमें लगता है 6 घंटे केस करने में, ये 5 दिन में केस को निपटा देता है। तो वो इतनी इतना आदर था उनका। ब्रिटिश सरकार ने 1 स्पेशल रेलवे लाइन लगा दी। उनके घर से। कचहरी जैसे आपने देखा ना देब जाओ तो ठाकुर के आगे वो लाइन जाती है। स्पेशल रेलवे लाइन लगा दे। ये जल्दी जल्दी जाता। और जिन ठाकुर पूरा समय अपना भगवान की सेवा में लगा रहे थे। उन्होंने सौ ग्रंथो की रचना की और सुबह से रात तक जुड़े रहते थे भगवान की सेवा में। उदाहरण के लिए अगर आप उनका सेल्यूल सुनोगे तो आपमें ये प्रेरणा आनी चाहिए। हम भी इसी प्रकार के शैल्यू करें। पुछलेदवारकोआपने काल दी थी, जिसके प्रापर कह रहे थे। भक्त को सुबह के 5 बजे से लेकर रात के 10 बजे तक क्या करना चाहिए। सेवा भूल गए। ठाकुर का उदाहरण देखो। उन्होंने भी यह उदाहरण दिया। उदाहरण के लिए 8 से 10 रात को 2 घंटे से विश्राम करते थे। जाते देख कोर्ट चहरे से आते थे। 2 घंटे विश्राम बस 8 से 10, फिर रात के 10 बजे से सुबह के 4 बजे तक ग्रंथों को लिखते थे। प्रात भी यही करते थे। प्रा पाजी अक्सर 9 साढे 9 विश्राम करते थे। वे 12 बजे 1 बजे जाकर सुबह 56 बजे तक अनुवाद करते थे, ले जाते थे। तो भी ठाकुर 10 बजे से रात के 4 बजे तक सुबह के 4 बजे लिखते थे। 4 से साढ़े 4 विश्राम करते थे। आप लिखना चाहिए, आप लोगो को प्रयास करना चाहिए। इस जल की नकल करने के लिए। नहीं। ये सबसे अच्छा प्रेजेंट होगा। भक्ति और ठाकुर जी के लिए। तो 4 से साढ़े 4 विश्राम कर देते हैं। साढ़े 4 से 7 जापा करते थे। जब 4 साढ़े 4 से 7 ढाई घंटे। वे 7 से साढ़े 7 लोगों को पत्र लिखते थे। आज दाल के बाद डेटा, फोन, कम्प्यूटर सब है। पोनल में कोई सुविधा नहीं थी। आज से लिखना पड़ता था तो साथ से सारे। कॉसपोनेंससाढ़े 7 से साढ़े 9। कुछ शास पढ़ते थे। रोज सारे रोड परतेरे। शास ाबा ने कई दवा में कहा, i need my crine books, myself every day, फिर सारे 9 से 10 स्नान करना पुशादम खाना nke kurakआपखुडाक सुनना चाहते हैं उनकी हाँ बंदर का खर्चा काफी बढ़ जाएगा अगर इस खुराक को आपने अपना लिया उनकी क्या सी खुराक आधा लीटर मिल्क फल और केवल 2 छिपा दिए हाँ चलेगा में लिटर फ्रूट एंड टू चबा दे बस फिर 10 बजे जाते थे कचहरी कचहरी में 10 से 1 बजे तक रहते थे और जैसे मैंने कहा वो इतने तेज थे, इतने पवित्र थे कि 5 मिनट में कॉम्प्लीकेटेड से कॉम्प्लिकेटे कोर्स वो पहचाने थे दिस मैनेज गल्ती हो जा ने 5 मिनट में तो इसलिए 1 दिन में 25 से 30 केसेस को समाप्त करते थे, डिस्पोज करते थे अगर बोलो किसी वकील को इंडिया में 1 केस को समाप्त करने के लिए 20 साल तक करते है भक्तिन ठाकुर 5 मिनट में केस खत्म करते ते और फिर 1 से 2 घर आते थे प्रसाद खाने के लिए और फिर 2 से 5 वापस के चेरी में संशेपमेंऔरफिर 5 से 7 ट्रांसलेट करते थे संस्कृत किताबों को बंगला बाजार में बस 5000 और 60 से 8 प्रसादम स्नान और शाम की खुराक सुनोगे आधा लीटर मिलत थोड़ा सा चावल व 2 चपाती तो अच्छी लगी खुला हम लोग इंटरड्यूस कर सकते हैं भक्ति नो डायट तो ये था उनकी खुडाल तो भक्ति नो ठाकुर ने ग्रंथों का निवास किया उन्होंने यह स्थापित किया जेतने महाप्रभु का असली सिद्धांत क्या है ये जो सहज पर जिसका प्रचार हो रहा था ये बनावटी प्रचार है उन्होंने ये पोज किया और उन्होंने अपने ग्रंथों के अनुमान में शुद्ध यथारूप संदेश को प्रस्तुत का तो बाकी न ठाकुर में ये भी उनकी भविष्यवाणी थी वाली थी कि भविष्य में 1 महारथी आयेगा कौन महारथी महारथी मतलब की जो कि चमत्कार कर सकता है ये महारथी होगा जो की हरी नाम को दुनिया के कोने कोने में ले जाएगा चेतन महाप्रभु जी की विश्वानी थी राम भगवान की बनी थी विश्व के कोने कोने में हरी नाम पहुंचेगा और मायापुर धाम में सारे विश्व से लोग आयेंगे बंगला भक्तों के साथ मिलकर मे नाम का ये भी संक्षेप में भक्तिन ठाकुर की ठाकुर जब अंग्रेजी सरकार के राज्य में थे तो सरकार ने उन्हें कई कठिन कार्य मिले उदाहरण के लिए 1 जितारी उनको सौपी थी जगनातपुरी मंदिर का ठीक निर्माण करने के लिए आज भी सरकार शासन करती है जगनपुर मंदा तो जो राजा था ओडिशा का, उसने चापलूसी करके एटी फोर थाउजन्ड रुपीज मंदिर के खजाने से चुरा लिया था जब ठाकुर बक्शी को पता लगा रefoरtाजndरूपए राजा ने गोल मार कर दिया उनको सजा दी तुम भर भूख लगा भगवान का इस वैल्यू के तो जो राजा था उसने बड़ा मार महसूस किया मेरी ऐसी बेसी हो गई राजा ने 1 खास यज्ञ कराया जिसमें 30 ब्राहमण थे इस उद्देश्य के साथ की भक्ति ठाकुर हल्दियान हो जाए और तीसरे दिन हाय kृsणhkशnाक्रिशणा हारे हारे हाल।
More from PRASAD

Rare Pastimes & Timeless Lessons of Guru Mahārāja | Stories Every Disciple Should Hear

ISKCON Legends- pure devotees meet-HH Jayapataka Swami, HH Gopal Krishna Goswami, HH Radhanath Swami

Jagannātha Ratha-yātrā Through Śrīla Prabhupāda's Mercy | 29 April 2006 | Nairobi, Kenya

Lord Jagannātha's Appearance Pastime | 21.07.2019 | ISKCON Calgary | Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī

The Ācārya Teaches by His Own ExampleGuṇḍicā Mārjana by Guru Mahārāja #shorts

Guṇḍicā Mārjana – Lord Jagannātha's Pastime | 21.7.2019 | ISKCON Calgary |Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī

H.H. Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī Mahārāja - Exemplary Sādhana and Deity Worship # shorts

भगवान की कृपा कैसे प्राप्त होगी ? | 11 Jan 2014 | Punjabi Bagh | Srila Gopal Krishna Goswami

Material Education vs Spiritual Education | Srila Gopal Krishna Goswami #shorts

