दिवाली के दिन भगवान ने की दिव्य लीलाएं | 15 Nov 2020 | Iskcon Delhi | Srila Gopal Krishna Goswami

In this devotional lecture delivered by Srila Gopal Krishna Goswami at ISKCON Delhi on 15 November 2020, the speaker celebrates Diwali by recounting the divine pastimes (līlā) of Lord Rama and related figures from the Ramayana. He links the festival to the broader theme of the New Year, describing Rama’s exile, his heroic deeds, the return to Ayodhya, and the lighting of lamps that symbolize the triumph of dharma. The talk weaves scriptural citations, moral lessons on self‑effort, humility, and service, and repeatedly urges listeners to engage in bhakti practices such as chanting, studying sacred texts, and distributing spiritual literature. The speaker also references contemporary ISKCON activities—book‑distribution marathons, community service, and the importance of maintaining devotion despite modern challenges—tying them to the timeless message of Rama’s example. Throughout, the narrative is reverent, enthusiastic, and persuasive, aiming to inspire deeper devotion and active participation in Krishna‑conscious service.
Chapters
hreem agate वो आज दीवाली भी है तो कल भी दीवाली मनाई थी। दिवाली के लिए आपको डबल बोनस मिल रहा है। हमारे बुढिया के द्वारा दिवाली कल भी आज है। दिवाली इन आल 2 नो हैप्पी। न्यू र का नया साल आरंभ होता है और जैसे कृष्ण न्यू इयर है कृष्ण तो भगवान राम के विषय में अब भागोदमकेनौवेस्कल में संक्षेप रूप से ज्ञान प्राप्त करते हो। शुकरेगोस्वामी ने कहा अनेक संतों ने भगवान राम के नीना का वर्णन किया है तो मैं केवल संक्षेप में ही की चर्चा करूँगा। और ये वैश्व महात्मा का भाव है कि अगर किसी और सर ने किसी विषय पर चर्चा की है। वो छोटी बात सही करते तो वन राम, उनके भाई लक्ष्मण, भारत ये सब विष्णु है और सब विश्व जाता है और मार अभ्याम को अनेक करते है। सो भगवान राम राज गली में बिठाने वाले थे, उनकी पिता का नाम दर्शक पत्तियां थीं। कई कहते हैं 4 राव वाले कई जगह 4 का। उनकी 4 पत्तियां थी और 1 पत्नी ने उनका सहयोग दिया था। किसी कठिनाई में बड़े भारी हो गए थे और उनहोंने कहा मैं क्या कर सकता हूँ तुम्हारे लिए। खख ने कहा मैं ठीक से पर आपसे मांगूंगी जो पूरा हो जा था। और भगवान राम को राज गली में बिठाने की तैयारी कर रहे थे। और कहीं ने उस समय कहा, आपको याद है आपने, मुझे कहा था मेरी इच्छा को or anything i have examtionformay you dont have a ma bed to ya ने वादा किया था मेरी रिक्वेस्ट को सो, मेरी ये इच्छा है या राम को वनवास तो 14 साल हो के और मेरे बेटे भारत को राजगदीमेंबैठाया जा। अयोध्यावासियों का सबका यही भाव था कि भगवान राम को राज गली और राम सियार थे। और जब कहा बेटे आजकल कोई लीगल लीगल डॉक्यूमेंट के पानी में केवल वचन देना काफी कहीं को बच्चन दिया हुआ था। कुछ भागोगे पूरा करूँ तो भगवान पिता के कहने पर राम का ठीक है। मैं जंगल में जानता हूँ और सीधा विसात में गए गए। भगवान जब प्रकट होते हैं, देवी लीला प्रकट करते हैं, जिसकी तुलना कोई सुधार न व्यक्ति न कर पाया है। सो भगवान वे अनेक दिवाली लाइन पकड़ ली, जनमाकरमचामें प्रगट होना दोनों ही दिव्य है। और भगवान राम ने जब पति सीता के सीता के पिता पति की खोज भगवान राम हो गए और वो भारी धनुष इसे उठाने के लिए कम से कम 300 भगतों की आवश्यकता थी। उसे ऐसा से थोड़ा मारे राम पर सर पे वो तैरने लगे डूबने की जो बनवास में गए, रावण का बज किया, रावण के 10 सिर से रावन से वो जो दूसरों को कष्ट देता है तो उनका बज किया और 14 साल के बाद और या फिर लौटे का अयोध्या जब अयोध्या लौटे और वासियों को सूचना मिल रही थी, मोबाइल अपने घरो को सुझाया था किस के साथ, दीप के साथ। आज हमारे वैश्य के कैलेंडर के अनुसार आज है दिवाली और दिवालिय शुभ अवसर पर दिवाली कम क्यों बनाते है। क्यूंकि जब भगवान राम लौटे थे अपने वासियों ने अपने घरों को सुझाया कैसे दीप है दिवाली और हमारे राम का आश्रम था, इतना सुन्दर था मृतियभीआपसे पूछकर आते थे बनना नहीं चाहे तो मुर्दे को भी कह सकता था ठीक है बाद में आना। अगर यह छूट आपको आज मिल जाए तो सारे समचाार खाली रहेंगे तो राम राज्य आज भी हम राम राज्य की चर्चा करते हैं क्यों? क्योकि राम मनेजर के समय किसी प्रकार का कष्ट था राम मानसिक शारीरिक पूरी प्रजा आज प्रसन्न थे। 1 समय भगवान राम सीता ने अपने सारे गहने ब्राह्मणों को पाट दिया था और भगवान राम ने ब्राह्मणों से पूछा मांगो तुम सब कितनी जमीन चाहिए? राहुल ने कहा हम तो संतुष्ट है कमल का दर्शन लेकर। और उन्होंने कहा उन्होंने उतना ही कहा लिया जिंदगी आवश्यक हो और गहने थे ने स्वीकार किया है कि सारे गाने ना हो वापस कर दिया केवल सीता ने रखे अपने जो भगवा में कहा गया है हालांकि भगवान राम का शासन था, ऐसा था जैसे सदयुगकासा और भगवान राम के शासन पूरी प्रजा अत्यंत प्रसन्न थी क्यूंकि हमारा नाम अपनी उदार को, प्रजा को, अपने उदार जैसे मान रहे थे। तो आज भी हम रामराज्य की चर्चा करते हैं और राजनीतिक लोग भी करते हैं और राम राज्य जब प्राप्त होगा जब हम भगवान का गुणगान करे तो आज दीवाली है जो हमारा नया साल है हम गोडीवैठनोके लिए नया सा गोल पूर्व में आता है और माना जाता है दिवाली इन इंडियन न्यू ईयर और दिवाली लिगेट गुड ओवर ईव और अंत में भगवान राम ने राहुल का वार किया। आज दिवाली का शुभ अवसर है और दिवाली के दिन ये दमन लीला बीती थी। chapter nine ak or to sisucawacakagiha शोदादनदागiनi करमतरा नियुक्त शु मंसू स्वयं जाली 2 स्लोगन पर 1 का चारण करेंगे kdagiadatishusod geni man man swim so यह शोध मंजर मंद स्वयं खुदा नन्द मां खो यशुदा करबंतरोुताशु सयम धीबातेदे, ये ह म र ह c में आज क्लास पूरा में दे रहा था, पिछले साल क्लास ली थी मसान शुरू करने से पहले और आप जानते हो की पिछले साल आम का पूरा कवर पूरे विश्व में मरता में नंबर 1 तो ये जो आज शुरू होगा। और अगर मैं आपको बताऊँगी क्या ोजना है हमस का चेहरा हारता हो जाए तो आज की क्लास पूना के भक्तों के लिए है, खास कर के क्यूंकी वो आज मैनसन शुरू कर रहे हैं और मैनसन करेंगे दिसम्बर के आपकी भक्ति 24 साल पर शुरू कर रहे हैं। सो ये जो डालो लीला है जिसे हम सब परिचित है ये लीला बीती दी किसने आज निवाले के दिन, जुवाले के दिन कई शुभकामनाएं सो सोदापाता कुबकैदाशुकैरा दीदी का बेटा हमारे घर में आकर क्या चुराता है माखन चुरा भगवान के गाँव में 1 नाम माखन चोर भगवान को कभी भी पकड़ नहीं पाया जब पडोसी कहती थी आपका बेटा हमारे घर में आकर बकर चुराता है। पति के बाद 2 लाख गाये हैं, अंदाजा लगा सकते है 2 लाख गाय के लिए कितना बड़ा गोशाला होगा पूरे शहर और इसमें सौ का थी जिनसे सुगंधि दूध निकलता था क्योंकि उन्हें छु घास खिलाया जाता था। और ये जो सुगंधे दूध था शोध ने खास करके रखा था अपने प्रिय बेटे के लिए और उनके मन के अंदर में थोड़ा शक था। शेयर पड़ोस की गोपियों के घर में ज्यादा टेस्टी मखन बन रहा है। जो भगवान सो रहे थे और वादा की इच्छा थी की भगवान के ये मकान वो ही बनाए। हालांकि उनके घर में बहुत नौकर थे, कुल नौकरों की कमी नहीं थी, वो भगवान की सेवा सुधमाता की चिंता थी, इच्छा थी। खुद करे। तो यह कहा जा रहा है जो भगवान सो रहे थे। तो ये बात सका लाभ उठाया। बेटे उठने से पहले मुझे से मखन बनाने 2 भगवान उठ गये, अब उठे तो माता ही है। और जब दूध का मन तू साथ में क्या करी थी। 1 गाना 1 गीत का उच्चारण और उस गीत ने क्या वर्णन था? हाल की दिलाऊंगा तो इस कार में पापा जी समझाते हैं कि अगर हमारी इच्छा है कि हम भक्ति में जुड़े रहे, सदा भगवान का स्मरण करें तो हमें भी भगवान का उच्चारन सदा करते रहना चाहिए। जैसे सुदामा होगे, हम भी गीत बनाए, हमारी लीलाओंका लीलाओं का कोशिश करना चाहिए और आपको गीत बनाने की आवश्यक ने गीत बना दिया है आपके लिए। हे राम बंद है। राम को जब गूडीचबमंदरकी सफाई कर रहे थे अपने भक्तों के साथ, तो कई भक्त जुड़े थे, 6, 500 दूर दूर से पानी आ रहा था और स्वयं जुड़ गए थे। ऐसी होला में बंदर को साफ़ कर रहे थे और सारे भक्त जो थे, केवल हरे कृष्ण बंदर का उच्चालन कर रहे थे, सफाई करते समय सफाई भी कर रहे थे और हर नाम का उचचालनऔरअगरउन्हें और पानी चाहिए था। तो हाथ से निशाना करते थे। तो दूसरे शब्दों में सेवा के साथ बवाल का उचारण भी हो ता है। तो याद आ देखेसभासाकीतीबेटे के लिए बहुत ही मीठा मक्खर बनाया जाय। भगवान के अनेक नाम हैं जिनमें 1 प्रसिद्ध नाम क्या है? मक्खन चोर को चोर बुलाए, लड़ने को तैयार हो जाए। अरे चोर बुला हो क्या हम क्या चोर है भगवान को मक्खन चोर बुलाओ। तो भगवान भी भगविप्रसनहोते सो युशुदमाता की च्छा थी, बेटी जागने से पहले ताजागबखनखिलाऔर साथ में 1 दूसरे चूले में युषुदमाता दूध उबाल ली थी, जिसका अंतिम लक्षण था कि अच्छा मक्खन बनाना तो हमें भी प्रयास करना चाहिए, हम सदा आने का नाम देते रहे, जो भी सेवा हो आपकी पुजारी की सेवा, बारिश होने महिलाओं का चालन करना चाहिए और हम प्रेरणा ले रहे हैं यशोदा माता से जिस प्रकार वो दूध को भी उबाल ली थी, जो भी सेवा करती थी। साथ में बेटे की लीलाओं का। भगवान जब प्रगट होते हैं, जीवी लीला प्रगट कर रहे हैं। सो भगवान उठ गये, भगवान ने देखा की मेरी माता तो याद नहीं है, कहाँ है माता? फिर भगवान जाकर उनकी गोद में बैठ गए, उनके स्तन से दूध पी रहे थे, साथ में चूले में सुदामा दूध बाल रही थी, दूध बाल रही थी, उनका अंतिम लक्षण था ले अच्छा ताजा मक्खल लाने के लिए भगवान ने देख सुन ने देखा यह दूध भर गिर रहा है। तो बेटे को छोड़ कर और दूध को नीचे उठाने के लिए भगवान ने भगवान को गुस्सा आ गया मेरी माँ ने मुझे क्यूँ छोड़ा और वो में क्या किया कंकर से जब लौटी तो उसे देखा यह हर जगह ै और उनका बेटा दिखता नही है तो समझ गई मेरे बेटे की शरारत है। तो उन्होंने कहा ये बेटा बहुत शिताल है पड़ोस की गोपियां भी शिकायत कर दी है बार बार और जैसे मन कहा गोपियाँ शिकायत करती थी और कोई भी भगवान पकड़ नहीं पाया। 1 समय जो गोपियां थी वो पड़ोस की वो जाती थी स्नान करने पानी डालने तो गोपी घर छोडकर दी पानी डालने और भगवान और गोपी का बेटा फोन के मित्र साहब मा क्या करने ने और जो पड़ोसी गोपी थी वो जल्दी वापस लौट गए सोचा देर से आई और परोसी गोपी ने वान को रेन हेडर पकड़ लिया कर तो वो कहने लगे आज मैं तुम्हारी माँ को बताऊँगी कि तुम क्या कर रहे थे तुम्हारी माता के लिए गाया प्रमाण है। तो गोपी 1 हाथ से उन्होंने पकड़वा भगवान को और दाने से पकड़ा था और गोपी का बेटा ने भगवान के हाथ तो उनमें इतना गहरा भाव था आज मैंने पकड़ लिया है वो सोना बाला के घर पहुंचे देखो आज ये प्रभात है। मैंने तुम्हारे बेटे को पकड़ा चोरी करते मेरा बेटा चोरी कर रहा था कर तुम झूठा आरोप लगा रहे हो, मेरा बेटा तो मक्खन खा रहा है और ये जो तुम्हारे हाथ में है ये है तुम्हारा बेटा क्योंकि जब वो घर ले जा रहे थे तो भगवान ने बड़ी चापलूसी के साथ अपनी उंगली को निकाल दिया और बेटे की उँगली को माँ की ऊँगली में जोड़ दिया। वाह में इतना उत्साह था कि वो पहचान नहीं पाये कि उनके बेटे का हाथ था तो भगवान की अनेक लीला है सुभाष किया गया उनके चरणों के निशान निशाना थे पृथ्वी पर और उसके पीछे चलते चलते और पहुँच गए आगे भगवान हैं थोड़ी दूर पर भगवान ने क्या क्या उखल में बैठ गए थे और मक्खन बाट रहे थे किसको को तो साथ साथ चारो तरफ देखे भी थे, कोई शक था की मेरी माता आने वाली है, कोई शक था क्यूँकि माँ उनके पीछे आई तो जब उन्होंने देखा क्यूंकि माँ पीछे हारी है भागे पर भगवान की माँ ने उन्हें पकड़ लिया उस में कहते है योगी भी बड़े बड़े योगी भी भगवान को नहीं पकड़ सकते। माता ने पकड़ लिया और डाटा उनके हाथ 1 छड़ी थी और उन्होंने देखा की मेरा बेटा छड़ी से डर रहा है। उन्होंने छड़ी को तो फेंक दिया और कहा ठीक है उनको थोड़ी हल्की सजा दूंगी उनको बांध देती हूँ रसी के साथ कोई शिकारी नहीं करे। तो माता ने प्रयास किया बेटे को बालने के और पहनी रसी जब जोडी वो रसी के भी छोटी थी किसी से, फिर उन्होंने कई लच्छों को जोड़ा सब के सब अंत में सब 2 उंगली छोटी थी ऐसे चाय का कहना है कि भगवान के छोटे हाथ से। यही नहीं कि भगवान के हाथ भी बड़े होते जा रहे थे, वहा के हाथ तो छोटे ही रहे। 1 छोटी रस्सी से बांध सकते थे। उन्होंने रस्सियों को जोड़ा। सबको जोड़ने के पश्चात भी ने बांधने। पर जो दूसरी गोपियां थी, भगवान की इस लीला को देख रही थी। और वो हसी भी देखो, इशुदवबाता कितनी कमी है। 1 छोटे बच्चे को भी पकड़ नहीं सकते। तो उन्होंने सब रसों को जोर दिया। अपने घर के पड़ोस की रससे। जब वे रसी 2 उंगली छोटी, तो हमारे यहाँ चारों ने इस विषय पर अपनी व्याख्या दी है। दमन लीला के ऊपर कई अचारों ने बड़ी गहराई के साथ इस लीला का वर्णन किया। और इन सब गोपियों का। इन सब चारियों का यही निर्णय है कि 1 उँगली का अर्थ था कि अगर आप भगवान को संभालना चाहते हो, अगर आपको भगवान की कृपा चाहिए तो हमें प्रयास करना पड़ेगा। यह नहीं कि आप के स्वामी के चरम को छू लो और करते रहो। बहुत कार्य की। भगवान की कृपा प्राप्त होगी। तो भगवान की कृपा प्राप्त करने के लिए हमें प्रयास करना पड़ेगा, परिशम करना, पड़ेगा, मेहनत करनी पड़ेगी। और फिर भगवान की कृपा से आप भगवान को प्राप्त कर। सकोगे। समझ, सकोगे और अगर आप बिल्कुल मेहनत नहीं करो और सोचो की भगवान की कृपा प्राप्त होगी। यह 1 बहुत बड़ी भूल है। भगवान क्या कहेगी मैं हम सब धर्म को छोड़कर। मेरी शरण लोगे, तू ही तुम मेरे पास लौट गए। भगवान कहते हैं इस शो के साथ मन मना बाबा बन, भक्त मध्य जी मश्कुर मेरा चिंतन करो, मेरे भक्त बनाओ, मेरी उपासना करो, मेरी सेवा करो। फिर तुम बिना शंका के धाम हो गया। सो भगवान गीता में। ये तो कहा ने कहा जो करना करो और मैं कृपा प्राप्त होगी सो। 1 उम्र का अंश हम प्रयास करे। 2 जैसा की आप सब जुड़े हो। कृष्ण में हमारा क्या है? प्रयास, ध्यान, पूर्वक रोज, जप करना, हमें अच्छी साधना रखना, शास्रों का अध्ययन करना, विनम्रता का भाव अनुकूल करना। महा पूरब ने कहा जिन। सदा हरी का अर्थ है सदा हरी का नाम लेना। सो। आप चाहते हो की सदा कृष्ण का नाम लो, विनम्रता का भाव करना चाहिए, फिर प्राप्त होगा। फिर भी भगवान की कृपा प्राप्त होगी। जैसे इंग्लिश में कहावत है god have to है। भगवान गिर का सहयोग देते हैं, जो स्वयं प्रयास करते हैं। तो अगर हम प्रयास करे या भगवान की गत होना चाहते हैं, भगवान के शुद्ध भक्त बनना चाहते हैं, प्रयास करो। फिर भगवान की कृपा से आप उन्हें समझ पाओगे। अगर आप प्रयास ही नहीं करेंगे तो फिर आपको यह कृपा प्राप्त होगी? तो बचारियोंकनिणहैये था ये 2 उंगलियों के छोटे होने का। भगवान ने देखा मेरी माता इतना प्रयास करती है और उनके शेर माथे में पसीना आ रहा है। और वो फूल प्यारी थे, वो गिर गए। तो भगवान ने क्या कहा? भगवान ने अपनी माँ को बाल दिया। माता ने बाटा सलमनेरे भगवान को मान दिया। भगवान तो मुनि 1 समय गुजर रहे, थे। जब उन्होंने देखा कि कुबेर के पुत्र बनी, वीर खेल रहे हैं मंगरी, गंगा में, लड़कियों के साथ। और ये सब वरूणी शराब के नशे में थे। जब स्त्रियों ने देखा, भगवान को निभाते हुए। स्त्रियों ने तो अपने शरीर को ढक लिया, पर जो कुबेर के पुत्र थे, वो इतने नशे में थे कि वो समझ भी नहीं पाये। यहाँ 1 महान संत स्थित, तो जामुनी ने क्या सोचा। नाथमुनि ने सोचा कि मुझे इनका उद्धार करने 2 नाजमुन ने क्या उन्हें श्राप दिया। तुम बन जाओ। क्या पिड़ और देवताओं के सौ वर्षों के पश्चात तुम्हें भगवान का दर्शन प्राप्त होगा। यह 1 प्रकार से बहुत बड़ा था। भगवान का दर्शन प्राप्त होगा। और न भी बन गये। अर्जुन ब्रिक्स कहा कहा? नंदराज के आंगन में। भगवान को पता था कि उनके प्रिय भक्त या मुनि ने यह वर दिया है कि सौ साल के पश्चात, देवताओं के सौ साल हमारे पृथ्वी के 6 महीने, देवताओं के 12 घंटों के बराबर होते है। उनको क्या बाल दिया था। देवताओं के सौ वर्षों के पश्चात, तुम्हें भगवान के दर्शन प्राप्त हो। तो भगवान को तो मान रहा, बना हुआ था उखल के साथ। और भगवान को याद था। मेरे प्रिय भक्त भूनी ने यह वर दिया है और यह वादा किया है कि मेरा दर्शन पाता। तो भगवान उखल को खींच कर आगे ले गए। यहाँ के 2 पेड़ थे, कल को 2 पेड़ों के बीच में डाल कर खींचने का खींचा, दोनों पेड़ो को दोनों पर क्या हुआ। गिरे बहुत भारी आवाज करके भारी आवाज की रसोई में थी। उन्होंने सुना भारी आवाज भागे भागे। आए क्या गया, क्या गया, क्या दे। 2 पेड़ो को नीचे गिरे हुए और उनके प्रिय बेटा, बिल्कुल, निकट वो सोचने लगे। भगवान की कृपा मेरा बेटा बच गया। गोपियों से। उन्होंने गोपियों ने पूछा कैसे 2 पैर कैसे गिरे? कुल? गोपियों ने कहा, आपके बेटे ने इन 2 पेडों को गिराया है। भेटा बेटेटा, ढाई साल का वो 12 पेड़ को गिरा सकता है। उन्होंने विश्वास किया तो दादा मुनि का अभार प्रकट किया और उन्होंने यह स्वीकार किया की ना नमूनी की कृपा से आज उन्हें क्या प्राप्त हो रहा है, भगवान का दर्षन प्राप्त हो रहा है। यहाँ मुनि की कृपा से और के पश्चात। उन्होंने 1 बड़ी सुन्दर प्राथना की रचना की। आप इस लोग को पहले भी सुन बैठे हो। दामन नीरा के 2 भाग हैं। पहला भाग है सुन माता का प्रयास, बेटे को बांधने के लिए, उसका दूसरा भाग है मन की। तो कुवेर के बेटों ने 1 प्रार्थना की रचना की जो हम पढ़कर सुनाएंगे। ये है अठत्तीसलोकइसेधहाय का। इसके अनुवाद में कहा जा है और क्या कह रहे है। आज से हमारी जो वानी है उसके द्वारा सदा आपका गुणगान हो। अब से तो प्रॉपर है साथ में, ये है भक्ति की विधि। जो व्यक्ति भगवान के शरणागत होना चाहे उन्हें इस प्रकार की इच्छा रखी जाए। क्या हमारी वाणी के 2 वाला सदा भगवान की अनेक लीलाओं का वर्णन हो तो भगवान की लीला है। भगवान के गुण, भगवान विग्रह, इन सब का हम स्मरण कर सकते हैं। और वाणी द्वारा हमें भगवान का उपदेश, गीता का उसकी चर्चा करनी चाहिए। दूसरे शब्दों में, जीप के द्वारा, वाणी के द्वारा कृष्णा कथा करनी चाहिए और कृष्णा कथा करनी चाहिए। हमेशा। और उन्होंने कहा, अब से पहले उन्होंने गलती कर ली थी, पर अब ना जमने की कृपा से उन्हें समझ आ गया है की हमें क्या करना चाहिए? जैसे आप सब इस में जुड़ने से पहले अनेक गलत काम किए होंगे। परिसर में जुड़ने के पश्चात आप जो श्रद्धावान भक्त हैं, उनका प्रयास का रहता है। ऐसे इस लोक में कहा गया हमारी वाणी के द्वारा सदा है। नाम का उच्चारण हो, भगवान के बिना का उच्चारण हो, भगवान के गीता के संदेश का उच्चारण हो, वाली द्वारा भगवान का उच्चारण हो, ये होना चाहिए हमारा भाव जो हर कृष्ण महामंत्र है, इसका उच्चारण 24 घंटे भी करोगे। तो अब से हमारी जो वाणी है, सदा आपका गुणगान करे और जो हमारे कान हैं वो सदा आपके गुणगान, सुने, श्रवन और श्रम कितना बहुत आवश्यक है। अगर हमारे हाल करना चाहते हैं श्रम कितना करोगे, ध्यान से कृषक की चर्चा करोगे, ध्यान से आपके, वाणी द्वारा प्रजाता बचेगा और वाणी द्वारा हृदय की मैल को दूर कर। पाओगे छे बहु ही राम के उच्चारण का, हृदय की मैल दूर हो जाती है। और जो हाथ हैं वो अनेक इंडिया है और सदा कार्य करें आपकी प्रशंसा के लिए। यह उनकी प्रार्थना के द्वारा हमें उदाहरण मिलता है। कैसे हम मन बुद्धि का उपयोग कर सकते हैं? भगवान से। दूसरे शब्दों में मन प्रार्थना क्या थी की हमें सदा, हम सदा भगवान का गुणगान करे, भगवान की लीलाओं की चर्चा करे। और इस प्रकार आप किससे बचोगे। तो ये होना चाहिए हम सब का भाव। और अगर ये भाव रहेगा तो आप भगवान की कृपा से न पाओगे। क्या कहा ा गम्भीर मान हमारी ये इच्छा होनी चाहिए, हम सदा इंडियन का उपयोग भगवान की सेवा में करें। ये है भक्तियोग का निर्णय। तो जैसे मैं कह रहा था भक्तों को पूजा के भक्त आज मसान शुरू कर रहे हैं। और क्या कारण है पापा जी ने इतना बल दिया इस सेवा के ऊपर, क्या क्या प्लीज मी, what you टू? कहोगे क्यूँ कुछ आर्थिक लाभ और नफा होता है। इन ग्रंथों में है दिव्य ज्ञान और अगर समाज में किसी चीज की कमी है तो किस विषय की कमी है दिव्य ज्ञान की कमी के। आज आप देखते रहो की, समाज में अशांति, निराशा, बेचैनी, चिंता, तनाव ये सब तेजी के साथ बढ़ता जा रहा है। और अगर हमें शांति चाहिए, सुख चाहिए तो क्या है उपाय, आध्यात्मिक संदेश? तो इन ग्रंथों में है भगवान की वाणी। और हमारे जो प्रसिद्ध अचार है, उन्होंने सारे के द्वारा भगवान की वाणी को ज्यादा सरल बना दिया है। तो भक्ति श्रधांतजी ने इस सेवा पर बल दिया। और जैसे जानते हो 1920 में भक्ति मिले से कहा। तो उन्होंने क्या कहा? अगर भगवान तुम्हें सुविधा दे तो तुम क्या करना, ग्रंथों को अनुवाद करना और प्रकाशित करना। तो प्रापा जी ने इस आदेश को हृदय में बिठा दिया। और आप जानते हो कितनी कठिनाई के साथ प्रापा जी ने शुरू में प्रॉपर राधा मंदर में निवास कर रहे थे। उनके पास कोई सुविधा नहीं थी। 1 टूटा हुआ टाइपराटर का सहयोग उन्होंने लिया भागवतम का वाद करने के लिए। और कठिन स्थितियों में उन्होंने भाग का अनुवाद किया प्रकाशित हुई थी इन भागों में, और किस प्रकार पर धूप में जाते थे के लिए छोड़ क्लास डब्बे में यात्रा करते थे। क्योंकि उनके बाद धन नीरा परीक्षा की गंधों को प्रकाशित करना फिर खुद जाते थे। गंधों को बांटने के लिए। सो प्रभु जी ने अपने उदहारण से हम भक्तों को ये शिक्षा दी है की हमे भी गंभीरता के साथ इस योजना का पालन करना चाहिए। जो वैशवभग्हैपढ़ादख दुखी है, दुखी का मतलब है, वो देखते हैं दूसरों के कशों को, तो उन्हें क्या वो देखते हैं। इस प्रकार भौधिवालीव्यक्ति प्रयास कर रहे हैं दुखी स्थिति को सुख की स्थिति में बदलने के लिए। दुख होता है और प्रयास करते हैं गोलधार करने के लिए। तो ये जो ग्रंथों की सेवा है। प्रभा जी ने अनेक समय कहा, यह बड़ी महत्वपूर्ण सेवा है। और यह अनुभव की है। जहाँ भक्त बड़े उत्साह से प्रयास करते हैं, भगवान मेरे साथ देते हैं, यह प्रयास करेंगे भगवान को समझ सकेंगे। तो का मैसनप्रपजीमानचारिय को प्रसन्न करने के लिए है। और जो भक्त हैं, प्रयास करते हैं और प्रयास करते हैं। क्या ऐसा देश का पालन करने के लिए। पूजा के भक्तों ने पिछले साल 4 लाख से ज्यादा दबाने थे ये, ये साल भी उनकी बड़ी बहुत बड़ी है। तो हमारे भक्त सारे विश्व में प्रयास कर रहे हैं। इस मैराथन में सहयोग देने के लिए। ये जरूरी है कि समाज की स्थिति बिगड़ गई है। कि वायरस के कारण कइयों को डर है, कइयों को डर है, हम कैसे जायेंगे बाहर और भक्त को बड़ा सावधान रहना पड़ता है। और कई लोग किताब लेना भी चाहे तो किसी चीज को छूने से डरते हैं। तो ये इस साल भी किया जाएगा। शायद आप जानते हो की कुछ उससे पहले श्रीमद भागवत का हुआ था और श्रीमद भागवत में भी बड़ी अच्छी उत्साह के साथ भक्तों ने प्रयास किया था और हजारों से सारे विश्व में बड़े थे। सो ये भी मेरा सर आ गया है और हमें भी प्रयास करना चाहिए। इन गंधों को मारने के लिए। हम सिर्फ गिल को सहयोग देते हैं, स्वयं प्रयास करते है। सो पुरना में भक्तों ने बड़ी अच्छी योजना बनाई है। उनके आप सुनना चाहते हो। इस क्लास मे बोली है। सो सिकटी कांस के पास 30 काउंसलीज है और कुल मिलाकर 2000 से ज्यादा भक्त मेंसन कर रहे हैं और हर डिवोटी का कोटा है 125। वह बिग बुक तो बड़ी अच्छी स्कीम बनाई है उन्होंने। और मेरा तो खयाल है कि वो फिर से कर पाएंगे पिछले साल सो आप भक्त को भी प्रयास करना चाहिए, डरना नहीं चाहिए और सावधान रहना चाहिए के लिए। सावधान नहीं रहे हो। तेरे माँ ने साहू को काम भेजा, घर घर भेजा प्रचार कर निकले कइयों ने स्वागत किया। कहीं ने दरवाजा भी नहीं खोला। कईयों ने उनकी आलोचना की, फिर आओगे तो मारेंगे तुम्हें भी उन्होंने प्रचार गया। जब आप प्रचार करने जाते हो, ये नहीं की हर व्यक्ति आपका साथ देगा, कई साथ देते हैं, विरोध करते हैं, कहते हैं कब आओगे और इस साल को पचीस दिसम्बर को तो हमारे पुकडिविशमिनिरकी 1 योजना है कि जिला वाले पुरुष के सर में 1 बहुत बड़ा करेंगे तो सब भक्तों से निवेदन है यह प्रयास करो। ग्रंथों को मारने के लिए ये देखा गया है की इस स्थिति में भी प्रयास करते हैं, मुद्दा प्राप्त होते है तो आप सब जुडिए और सारे विश्व में लोग मेहरजान कर रहे हैं। 1 हवाई भाग में वो पूरा साल बुक मिल जाती है। यहाँ बड़ा और भगवान उनके माध्यम से कइयों का उद्धार कर रहे हैं। आप के संबंध में मन सुन्दर प्रभु आप के लीडर हैं जो हम प्रयास करें जो पिछले साल आपने किया था। कम से कम कर पाओ और प्रयास करोगे तो सफलता भी संभव है। so there is all in being to the estic make in on us attempt and distrebeu these books or propos presure propasal as long as book distribution goes on i will never what बना वाई सु दी बुक प्रापा, हम कहते हैं प्रावपालबुकपरासर में गर आप प्रवाल की गंध को पढ़ो तो आप क्या देखोगे केवल कृष्ण भगवान का संदेश शोक का उच्चारन भगवान ने किया और में अनुवाद में क्या पढ़ते हो भगवान का ये है कृष्णा के ग्रंथ जिसमें भगवान उपदेश दे रहे हैं भगवान कश्रनगरकेहोनेके लिए सो, दर, ट्राय सब से निवेदन है आप प्रयास कीजिये और पूना में राधे श्याम प्रभु उनके लीडर है और उनकी पर्सनल स्ट्रैटेजी है को बाटने के लिए मन में तो आप सब भी जुड़िए। इस मैराथन में औ और उसके नतीजे से पापा प्रसन्न होंगे। आज आप लोग भागवत से ले रहे हैं और प्रयास होना चाहिए किताबों को बांटे नहीं लोगो में ऐसी प्रेरणा भी दे वो किताबों को पढ़े और अगर पढ़ेंगे तो पूरा लाभ प्राप्त होगा। इन ग्रंथों में इतनी शक्ति है अगर आप केवल उन्हें अपने घर में रखोगे, उसके द्वारा आपको पुण्य होगा। पर अगर आप पढोगे पढोगे तो क्या प्राप्त होगा। असली लाभ प्राप्त हो तो जब हम किताबें पाते हैं हमें यह भी सोचना चाहिए या फिर उनको प्रेरणा देना है न गंध को पढेंगे तो सब तैयार हो मैं सन करने के लिए सब कृष्ण हारे के चहरे रामाराम रे।
More from PRASAD

Rare Pastimes & Timeless Lessons of Guru Mahārāja | Stories Every Disciple Should Hear

ISKCON Legends- pure devotees meet-HH Jayapataka Swami, HH Gopal Krishna Goswami, HH Radhanath Swami

Jagannātha Ratha-yātrā Through Śrīla Prabhupāda's Mercy | 29 April 2006 | Nairobi, Kenya

Lord Jagannātha's Appearance Pastime | 21.07.2019 | ISKCON Calgary | Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī

The Ācārya Teaches by His Own ExampleGuṇḍicā Mārjana by Guru Mahārāja #shorts

Guṇḍicā Mārjana – Lord Jagannātha's Pastime | 21.7.2019 | ISKCON Calgary |Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī

H.H. Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī Mahārāja - Exemplary Sādhana and Deity Worship # shorts

भगवान की कृपा कैसे प्राप्त होगी ? | 11 Jan 2014 | Punjabi Bagh | Srila Gopal Krishna Goswami

Material Education vs Spiritual Education | Srila Gopal Krishna Goswami #shorts

