अद्वैत आचार्य आविर्भाव दिवस विशेष | 16 Feb 2024 | ISKCON VESU | Srila Gopal Krishna Goswami

The video records a devotional gathering held on Advaita Acharya Avirbhav Diwas at the ISKCON Vesu temple, featuring Srila Gopal Krishna Goswami. The session combines a historical overview of Advaita Acharya and other venerable Vaishnava figures with a lively Q&A segment where devotees raise practical and theological questions. Topics discussed include the symbolic difference between milk and curd, the meaning and power of the name “Hari,” how chanting “Hari Ram” can deepen interest, the importance of regular temple attendance and service, distinctions between Vaishnava and Mayavadi doctrines, and concrete devotional practices such as reading scriptures, performing tapas, and maintaining nama‑sankirtana. Throughout, the speakers stress reverence for Lord Krishna, the superiority of the Gaudiya Vaishnava tradition, and encourage participants to intensify their devotional life.
Chapters
ज
गंगा दिया,
4 गंगिया बचा e const hi खuशूआपकेेेमैं बहुत खुश हूँ आपकी सेंटर में आने से, मै पिछले साल आया था,
मैं पिछले साल भी आया
था कि भक्त सभा में, जो इस मंदिर से सम्बंधित है, कितने भक्त हैं
इस सभा में, जो इस मंदिर से सम्बंधित है, वैसु कितने वैसु में आते?
बाकी टूरेजहैसूरद, बागी सूरेजहैसूबाकी, tori,
बाकी कूलिज सूरज, से, बाकी टूरिस्ट सर, बाकी सूरज से,
to g
तो आज बहुत ही शु s
जैसे आप जानते हो क्या है
जैसे आप लोग जानते हो बहुत सूती है क्यूँ है क्यूँ की आज
अदविताचादेदीका अभी बहुत और हम चर्चा करेंगे आगे चल जाएगा,
पहले भी तार के बारे में चर्चा करेंगे उसे चौथे चौथे केंटो का 33 का 18
कौन है अजी टाचारी कौन है स्वयं महा, स्वयं
भगवान, स्वयं महा विश्णु भगवान।
भगवान पकड़ होने से पहले हम सनातन साथियों को पहले भेज देता है भगवान
अगर ने से पहले अपने सनातन साथियों को पहले से भेज देते।
भगवान बड़े भाई पकड़ हो चुके थे,
जैसे भगवान विष्ण भगत हुए उससे पहले उनके बड़े भाई के माता पिता भगत हो गए। स्वयं भगवान है, चेतन है, महाभुस्वयमभगवान है
चेतन राधा कृष्ण आ गया राधा प्रगट हुए चेतन रूप में, राधा कृष्ण प्रगट
हुए, चेतन है महा भू के रूप
में और
और लोग उनके साथ साथ
1 पाना है ठाकुर के बगल में, अबसार में
1 और 1 पान के सब दयालु होता है
के द्वारा आगे रखे
आपका उदार हुआ है पति तो
का उद
वो सदा आनंद में दिव्या विवि, सनातन आनंद मिस आप कृपा कीजिये अदविता जो सीता के प्रति है तो
अे हुए थे भगवान के मान और
क्या साथ है, अधवेताचाजीजीभगर हुए थे महाभोकेपचास
साल फोटो देखते हो साथ, तो जब
आप पंचतोडा फोटो देखते हो तो अधवेकाचाजीको देखते हो गाड़ी के साथ,
वो आल है आप लोग बड़े
बड़े है वहा
से
चहिते क्यू
पति तो का उधार अलविदा अलवेदधानक्यू है। उनके धन में कोई अंतर नहीं है,
अदवेनामकयूकआत्मा में कोई अंतर नहीं है। और उनके नाम के पीछे आचार्य है। क्योंकि आचार्य अपने उदाहरण द्वारा 4 करते है। अगले पाच के शांति
shab
e अजय काचाजीदसकातोकेसाथ शादी पुर गये आप लोग साथी पुल कौन हे यहाँ से
बंदर है, तारीफ है।
वह 1 बंदी ने शां ती फूट जिनकी उपासना अजय काचा की
सारा दिन ही नाम करते थे
थे अगली ताजा हरिदास ठाकुर सारा दिन भागवत पढ़ते थे और हरीराम करते थे।
उन्होंने देखा की बोल बिगड़ तो दोनों
ने देखा कि समाज की स्थिति बहुत
बिगड़ गई है, लोग अधर का प्रचार
कर रहे हैं, अधर्म का प्रचार होगा है
भगवान से बहुत गहराई के साथ प्रार्थना की।
तो जब दोनों ने देखा तो उन्होंने भगवान से बहुत गहराई से प्रार्थना की
भगवान
तो अगले ताजा भगवान आप हो, आप प्रगट होंगे तो भी अधर्म रुक सकता है।
और
अगले ताचारीीबहुतपवित्र भाव के थे।
3 3 लाख नाम जप करते थे।
वैसे तो मा जी का अवतार माना जाता है। दोनों का आपको प्रकट होना चाहिए
उनके
तो उनकी प्राथना से चतर वहा भू पकड हुए है।
बंदे का नाम क्या था।
अजेता और उनकी पत्नी का नाम था सीता है नाचरितीकोमालूम चेतन को स्वयं भगवान है। पर तु उनको पूरा आदर दे ही दे दे। भगवान जैसे
पूरा आदर दिया और क्या
है अधि दाचरीजचेमहाबोको पूरा आदर दिया। लेकिन महा प्रभु जो जाए अधविदाचारियो को भगवान समझते हैं। बोल आदर दे और महा अलविरा बहुत लेकिन अलविदा महा को भगवान समझते थे। दोनों का 1 दूसरे के प्रति गहरा प्रेम तो
कैसे हे महाबली डांटे अधि
चर्चा चाहती थी कि कैसे महाबली मुझे डांटे
मायावती विधान।
तो अधविताचरजीनेमायावदी सिद्धांत का प्रचार शुरू किया।
मयावती मतलब भगवान मिला जा रहा है।
मायावादी मतलब तो सोचिये की भगवान मिला का है।
कई बार पूछते है मायावादी का क्या है दे माया कई बार आप भक्तों
से पूछते हैं कि मायावती का क्या बताते हैं।
जो माया है वो माया माया भी है और उनका भगवान
मायावादी माया में भी है। लेकिन वो भगवान के रूप को स्वीकार नहीं करते।
तो
मायावदी सुविधा चौधवी मायावादी श्रद्धान का प्रचार शुरू कर दिया।
अरे वो क्या साथी है। माया
ने जब सुना तो वह बू के साथ 4 तुने ने देखा, लोग
कहते हैं वह बदल रहे हैं, उन्होंने
देखा की अधुरिताच्ासेके भाव बदल रहे हैं।
तो तुमने सुना गया। बेचारे मायावदी ने को।
आप ने सुना है कि वो मायावादी है।
और
विद्या ने कहा हाँ मैंने तो यही सुना है। महावर ने बहुत जोर से साथ प्रेम से अगले राज को मारा। थैंक यू वॉंटेड खुश हुए और कहने लगे थैंक यू ही मैं चाहता था।
आप मुझे इतना आदर देते हो, भगवान चाहता था मुझे डा।
अधि ने कहा मैं यही चाहता था कि आप मुझे डाट हो, स्वयं भगवान है।
पुरी बोली ऊँतीबूलीकेहरसे मधुर जी की जो
गुरु थे उनका नाम है माधुरी जी
बहुत अच्छी कोटी के ा 24 घंटे भगवान के नामों का उचारण करते, बदले
ली जी 24 घंटे भगवान के नामों का उच्चारण करते है।
और खा ले,
खाने को दे और खाते थे। तभी जब कोई खाने को दे बता उपवास करते थे, भूखा लेते हमारे कोई। माधुरी ने पूरी जी बड़े कृषि।
4 भगवान ने पूरी स्थापना यहाँ हुई है। तो वह उठा
1 बार भगवान को सपना आया। माधुरी बुधि जी को सपना आया और भगवान ने कहा सपने में कि मुझे यहाँ स्थापना की है और पूजा भी छोड़ के चला गया है। आप मुझे वहां से बाहर निकाल के मुझे स्थापना कीजिये।
मुसलमान
उस समय सरमामा और मुसलमानों ने अनेक प्रसिद्ध मंदिर तोड़ दिए, कई पुजारी
मूर्ति लेकर जयपुर चले गए, कई ने छुपा ली रात
तो कई पुजारी, कुछ मूर्तियों को जयपुर ले गए और कइयों को मूर्तियों को जमीन के नीचे छुपा।
जयपुर को गुप्त में लाल कहा जाता
है और इसलिए जयपुर के अंदर गुप्त नाम कहा जाता है।
उसको तो गोपाल की थापना।
तो उन्होंने फिर गोपाल की स्थापना की।
मगर पूरी मेरी स्थापना की है। मुझे अपने भी गर्मी लग रही है।
तो माधवेंद्र फिर भगवान सपने में आये है। स्थापना के बाद और कहा कि मुझे अभी भी गर्मी लगी है तो कुछ आदेश दिया, मुझे मेरे लिए चंदन लेके आओ
ालेपुझािको
माधवेंद्र पूरे जिले में भगवान की सेवा 2 गौरी पुजारी को दीक्षा देकर सोंपा और वो चले चंदन पूरी यात्रा उन्होंने की पूरी यात्रा उन्होंने पैदल किया। माधुरी बुरी बहुत सकोड़ी और ऐसे में शांति बोल में पुरी अगले चाचाजी से मिले थे। और अगले काचारी जी ने महधविदरबुरी से बड़े भाव से
साथी है, महा बहू
के साथ, सनातन साथी है। अरे ताचा आज अधवेताचाभीजीका भी भाव बढ डे है।
बड़े केक बनाना चाहिए,
आज का बड्डे केक बनाना चाहिए। हम बम में, दिल्ली मंदिरों में, स बाचालकेरसेअभिभाव के दिन बडे केक बनाते हैं।
भगवान
हमें अदवेताचालेजिसे प्रार्थना करना चाहिए। आज के वो हमें कृपा करे ताकि हम भगवान के सरनागत हो सके।
भगवान के आधा पिता गुरू थे, अगली
भगवान के माता पिता के भी थे।
भगवान से पीड़ित हैं।
जब भगवान भगत हुए तो अपनी माँ के सर से दूर नहीं पी रहे
थे,
इसलिए नहीं पी रहे है के उन्होंने रिक्शा नहीं लिया और फिर माता पिता ने दिखा लिया। तो राजा
भक्त है
आदि कई सारे भक्त जो है उसमें प्रसिद्ध थे। वासु वासु राजा के अनेक भक्त थे। उसमें से 1 के वासुदेव
वो है। महा भर्ती
वो हैं। महा विश्व के अवतार ने हमें भर्ती का संदेश दिया
है।
अभी हम बाल slok पढ़े
आपके द्वारा स्मार्टफोन किसके पास है smartphon में obaa
कितने भक्तों ने बोला स्मार्टफोन
बोल के
फोर थर्टी, फोर थर्टी, फोर थर्टी,
थ i बार में शिक्षा प्राप्त है।
श्रीमद भागवत अब से हमें बहुत महत्वपूर्ण शिक्षा प्राप्त होती है।
आप चेतकी कथा सुनते है और चौथे
स्तर से आप बच्चे का की कथा सुनते हो। 10 2 थे। महाराज बची ही के
े हम में खाए रुची लेते थे।
आज वो राजा थे
े श्री भगवान।
अनुवादन
ध्यान से सुनिए फोर प्वाइंट थर्टी।
रचेताओं के कार्यकला अनुवाद श्री भगवान ने कहा हे राजू, मैं तु तुम लोगों के परस्पर, मित्रता पूर्ण संबंध से अत्यधिक प्रसन्न हूँ। तुम सभी 1 ही कार्य भक्ति में लगे हो। मैं तुम लोगों की मित्रता से इतना अधिक प्रसन्न हूँ कि मैं तुम्हारा कल्याण चाहता हूँ। अब तुम जो वर चाहो मांग सकते हो। क्योंकि राजा प्राचीन, वहीद के पुत्र मिलकर कृष्ण भक्ति कर रहे थे। अतः भगवान उनसे अत्यधिक प्रसन्न थे। राजा प्राचीन, वहिसदने सभी पुत्र, राजा प्राचीन वहिषद सभी पुत्र पृथक पुथक छील थे, किंतु भगवान की भक्ति करने में वे सभी 1 थे। परमेशुर को गशत करने के लिए जीवों में एकता का प्रयास वास्तविक एकता है। भी में ऐसी एकता संभार नहीं है, भले ही आधिकारिक रूप से लोग 1 मत बोले, किन्तु उनके अलग अलग स्वार्थ होते हैं। उदाहरण के तौर पर, संयुक्त राष्ट्र संघ ने सभी राष्ट्रों की अपनी अपनी आकांक्षाएं होती है, अत उन्हें 1 वक्त नहीं किया जा सकता। इस संसार में जीवों के बीच विविधता इतनी खबर है कि कृष्ण भावदाबुरसंघम में भी कभी कभी भिन्न मतों एवं विचारों के कारण सदस्यों में विरोध पाया जाता है। वस्तुत कृष्ण भक्ति में वे नहीं रह सकता। वहाँ 1 मात्र उद्देश्य है। यथा शक्ति श्री कृष्ण की सेवा करना। यदि सेवा को लेकर कोई मतभेद होता है तो उसे अधार्मिक समझना चाहिए। जो भगवत भक्ति में लगे हुए हैं, वे किसी भी परिस्थिति में विलग नहीं हो सकते। इससे भगवान अत्यंत प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों को कोई भी वर्ग प्रदान करने के लिए तैयार रहते हैं। हम देख सकते हैं कि भगवान राजा, प्राचीन परिषद के सभी पुत्रों को वर देने के लिए तुरंत भगवान तैयार हो जाते हैं। तो उसका अखबार फिर से दोहराता है।
आप
श्री भगवान ने कहा ले। श्री भगवान ने कहा मारेगा राजू। हे मैं, तुम लोगो के लोग परस्पर मित्रता पूर्ण संबंधों से, सम्बंधों से अत्यधिक प्रसन्न हूँ। तुम सभी से 1 ही कार्य वृद्धि में लगे हो। मैं तुम लोगों की मित्रता से इतना अधिक प्रसन्न हूँ की मैं तुम्हारा कल्याण चाहता हूँ। अब त तुम जो वर चाहो मार सकते हो। राजा का नाम था प्राचीन परिसर। उनके 10 बेटे थे और ै और उन्होंने सब्जी के लिए बहुत तपस्या की।
10 हजार सालो के लिए पानी में,
उन्होंने 10 हजार सालों तक पानी में देकर भगवान का चिंतन किया।
पर भगवान है।
परम भगवान प्रसन्न होते है। जब हम तपस्या करते हैं, तपस्या बिना जीवन रहा है, तपस्या के बिना जीवन अधूरा है।
कई धर्म प्रचारक हैं।
ऐसे कई धर्म प्रचारक हैं जो बड़ा बड़ा उपदेश देंगे, लेकिन तपस्या की चर्चा नहीं करेंगे।
तपस्या
तो सचिन के 10 पुत्रों ने तपस्या की थी। इसलिए भगवान पसंद होंगे।
भगवान को पसंद करना है,
भगवान को पसंद करना है। तो हमें तपस्या करनी।
छोड़
तपस्या का यह अर्थ नहीं है। क्या घर छोड बार हो, लेकिन बहुत ही गदर। जो भूख है उससे बचो
फेमस है।
बहु भगवान ने कहा मैं आप दसों भाइयों की सेवा से बहुत प्रसन्न हूँ। इस्कॉन भी 1 संस्था है जिसमें अलग अलग भक्त उपस्थित है। और कई बार भक्तों का अलग अलग विचार भी होता है।
हमारा भाव क्या?
लेकिन हमारा भाव यह रहना चाहिए कि 1 साथ उनके भगवान की सेवा करें। भाव सदा मित्रता का भाव होना चाहिए।
इंमेकहावहै united and form 2 बाज 1 उदारण देते थे।
यूनाइटेड वी स्टैंड एंड डिवाइडेड रिफॉर्म। आप लोगो ने कहा सुना है तो बता यह बहुत ही प्रसिद्ध बस है। हम सबको 1 साथ आगे बढ़ना चाहिए।
आधार जीवन में
आध्यात्मिक जीवन में नमरता बहुत महत्वपूर्ण है।
महिमा के
आप शास्त्र में हरी नाम की महिमा के विषय में बढ़ते
केवल 8 लोग लिए
चेतन महाभू हमने केवल 8 लोग दिए हैं। जिसको हम सिस्ट से कम के नाम से जानते हैं। पहले लोग में भगवान देते हैं। हरी नाम का क्या लाभ है? जैसे सुना। तो दरपर हरीराम के उचारण से हमारा मेल होता है। हमारे हृदय में काम करो। लोग बंद मसले का प्रभाव है।
ो करना, यह उपाय है।
अगर पैर दूर करना है तो हरी राम उपाय है।
तो आगे कैसे है खान से असली आनंद में प्राप्त कर।
आगे कहते है कि हरिराम के उचारण से असकी आनद प्राप्त होता है।
आनंद पू
वो कहते है कि आपने पूरी सख्ती लाल दी, अपने नामों में।
पर हमारी समस्या क्या है हमारी।
लेकिन हमारी समस्या है कि हमारी हरिनाम के उच्चारण में रुचि नहीं है।
भगवान के नाम में है चीन, मे
लु को स्वामी जी बताते हैं भगवान के नाम जो चीनी जैसे मीठे है
लीला
लीला, उनकी लीलाएं भी बैठी है।
पर हम महसूस नहीं होता।
लेकिन हमको यह महसूस नहीं हो रहा है।
ू क्यों क्यों, क्यों नहीं हो रहा है? कौन उत्तर देगा, कौन उत्तर देगा, इसमें विलय ारी है।
क्यूंकि हमें और विद्या की बीमारी है। ये सच है, यह सच बात है
करेंगे।
लेकिन अगर हम जब करेंगे तो 1 और विद्या की बीमारी दूर हो जाएगी।
भाग को कैसे भक्तीमे?
जो भक्त जुड़ता है उसका भाव होता है कि वे हरीदानकानिरंतर
क्या चाहते हैं।
आप लोग अगर बीमार हो तो आप क्या चाहते हैं की बीमारी जल्दी दूर हो जाए या नहीं। ना बनाएं जैसे आप व्यापार करते हो तो आप चाहते हो की आप नफा बनाएंगे। कौन
हमें यह धन कमाना है तो
ये और प्रसिद्ध है। अंग्रेजी भाषा में कैसे भी कृपया को
धन कमाना है का भाव है शो का स्मरण करना।
और अगर आपका भाव है कि आप का नाम का उचारण करो तो हमें इस लोक के संदेश को आत्मसात करना। पहले करोबारी। फार्मर स्टिकल के बिजनेस में थे तो
उन्होंने वाद में 1 डेकटॉनिकबुलाया था तो
अलाहाबाद में उन्होंने 1 बना गुरु भाई
थे उनकी दुकान में तो उनकी दुकान
में उनके गुरु भैया है।
हमें नया टॉनिक बनाया है
उनके गुरुभाई ने भोपाल जी को बताया कि आपने दुक बनाया है सब चीज प्राप्त करने के लिए टॉनिक टॉनिक बनाये है।
टॉनिक बनाये गुरु भाई अरे बाबू तो
उनके गुरु भाई ने कहा अरे बाबू मुझे ऐसा टॉनिक 2 जिससे मुझे बहुत प्रेम प्राप्त हो।
फॉर्मिला मुझे पता है दवा
भहुपाजीनेउततर दिया की फॉर्मिला मुझे मालूम है लेकिन वो दवाई अभी तैयार नहीं हुई है।
क्या है फॉर्मिला?
तो जब उनके पिता ने पूछा रूपाजी को क्या है वो फॉर्मिला तो प्रपात सूरी चे 10 लोग कंकर सुनाए
वो
कहते है के बाद हमें भक्ति लता
भी प्राप्त होता है भी हो गया
भीड़ को उगेगा कहते हैं बीच टॉमनेप्राप्तकरलिय सब्जी। लेकिन ये भी उगेगा कैसे कैसे होगा, कैसे होगा, कौन देगा, कब उगेगा, कब होेगा
श्रमण किलक मुझे पानी पिला या
बाबू को पानी पिलाएगी तुलना की जाती
है
और पानी पिलाने की तुलना श्रवण की तन से की जाती है। हो और भक्ति का सुन्दर बगीचा नष्ट भी हो सकता है। कैसे कैसे नष्ट होगा पागल बगीचे के अंदर अगर पाला छोड़ दिया जाए तो
भक्त भक्ति का बगीचा
परा भक्ति का बगीचा बहुत सुन्दर है लेकिन यह नष्ट हो सकता है। वैसा पदार्थ के कारण।
अपराध
तो सास के अंदर वैश्ना पदार्थ बचने से अनेक सारे श्लोकों से हमें उद्देश्य प्राप्त होता
की चर्चा कर रहे थे।
कुछ समय पहले हम अपने अधवेतआचरितीकी चर्चा कर रहे थे। थोड़ा तो अधवेतआचारय के प्रति सच्ची माँ का का थोड़ा क्रोध था तो सचिव माता सोचती थी। हमेशा बड़ा बेटा विश्वरूप घर छोड़ के चला गया और अब दूसरा बेटा भी उसी रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।
ये सब है।
तो बात हमेशा सोचती थी कि सब कुछ हो रहा है। अधित आचार्य के उद्देश्य के कारण सचिव माता के दय में थोड़ा सा लोड था। अधित आचार्य के प्रति भर थे
आप पर दया हो अभी मादा दया के
तो सभी भक्त कहते थे चित्र महाभुज भगवान आप सभी के ऊपर दया करते लेकिन आपकी बा के ऊपर क्यो उपकार नहीं करते हो
खुले कौन हो गया है कौन नहीं है?
तो चंदन खुले रूप से उपदेश दिया।
वर्षा आती है, पत्थर बी आती है, सागर में
जिस प्रकार से वर्षा आती है तो वो सागर में भी पानी बरसाता है, पत्थर में भी बरसाता है और जमीन पर भी बरसात। तो महा भूल देवी कोई भेदभाव नहीं रहता। तो सभी वक्त इसलिए कहते हैं कि आप भी अपनी माँ के ऊपर भी दया की
मां के ऊपर दया ही है।
कहते थे आप अपने माँ के ऊपर दया दी।
भगवान ने उसे अपराध किया है।
तो चेतना कर दिया भक्त को माँ ने अपराध किया है। और अपराध से जब बचेंगे तभी वो अपराध क्या था। तो सचिव माता के दर जो अधविकाचयारीके प्रति कुरू था की डबल परसनालिटी का
आदमी है सा कुछ करता कुछ और
कुछ है काचारी करता कुछ है।
भगवान ने अपना मेरा प्रणाम कर रहे
थे 1 दिन शेर दी किया था वहाँ भू को प्रणाम कर रहे थे
था
तो सच्ची माता ने उस मौके मौके का फायदा उठा के अदित्री चंदू की धूल अपने सर पर ले ली। जब चेतना वहाँ ने देखा अपनी मा को धूल लेते हुए तो बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने क हा मेरी माँ वैसा अपराध से मुक्त हो गए।
अपराध होते हैं तो अपराध जो है
वो कई प्रकार के होते हैं या अपराध अलीना के प्रति अपराध। हर मंदिर में हम 10 नाम अपराध का दूर उच्चारण सुनते हैं।
ये 10 राम पाल केवल नई नहीं है, नरेगा पुराने सब के लिए है।
10 नाम पाने और पुराने सभी लोकों
ऐसा होना चाहिए जब से बचे हमारा
संबंध व हमारा स्वभाव है वह समाज में होना चाहिए कि रेस और ईसा से बचे रेस और ईशा ही हमारे
कैसे बचोगे।
तो आप ईसा से कैसे बचोगे? जब आध्यामिक ज्ञान होता है
बदल दिया
था और बना चित बहुत बड़े मायावादी सार भष्टाचारियों को बदल दिया था और 1 वैष्णव बना लिया था। पति का नाम था मोगा साह चाचरे बेटी थी जिसके पति का नाम था अमोह
क्रोध
अमोह के रे प्रति 1 क्रोध था
महाभाव कौन है वो नहीं
समझ पाया कि महाभाग कौन है
को दिया था के लिए 1 समय साल
में वह कर दिया था शाह के लिए
वो माँ को वो केवल थोड़ा ही खाते है।
तो माँ के भक्त जो है वो बहुत माँ ऑफर करते थे लेकिन थोड़ा ही खाते थे।
क्या हुआ अंदर क्या क्या है भगवान की
तो 1 बार साफ पटना हि घर में देख लिया भगवान के प्लेस में क्या क्या है क्या क्या रसोई बनाई है वो देख रहा था वो सब वहाँ जो ऑफर
देखो सन्यास लिया है। खाते।
तो अमुक ने ऐसा कमेंट किया कि देखो ये सियासिया, लेकिन कितना खाते हैं, जरा सो से भी ज्यादा खाते हैं। इतना सारा ने देखा, इस अपदा के कारण मो को कोर्ट की बीमारी हो
गयी
और महाप्रभू अमोगा को देखने गये। क्यूंकि महाभवसपाचे जो के बहुत मत भूलिए चाहते। शो में महा बबू चाहते थे, वो नहीं चाहते थे। शोक में आये साल तो जब तक विजय अन्दर देश रहेगा तब तक भगवत प्रेम प्राप्त नहीं होगा।
या
तो भौतिक समाज में ईशा और द्वेश बहुत ही कॉमन है। सच बात है
शिया कॉमन है जीवन में ये शत्रु है,
आजाद भी जीवन में शत्रु है। इस फ्रिज हम तो सभी भक्तों को ईशा और बेस से बचने का प्रयास करना चाहिए ा
अगर हम ध्यान बढ़ते अपराध होता है।
शुरू में अगर उसके ऊपर ध्यान नहीं दिया जाए तो वो अपराध बढ़ता रहता है।
जी कहते थे
दऊपाजीकैतेथे वी शुड लाइक अ भी नोट क्या अंदर है?
मधु
क्या अंतर है? मधु मक्खी और मक्खी के अंदर दोनों में क्या अंतर है?
1 गनधेसथानमेंरना पसंद करती है और दूसरा
जो मक्खी होती है वो गंदे स्थानों में रहना पसंद और मधु मक्खी साफ स्थान है।
तो
पा जी हमें मधु मक्खी की तरह होना चाहिए, मक्खी की तरह नहीं।
गुणों को देखोगे
हम अगर दूसरे भक्तों के गुणों को देखेंगे तो मित्रता का भाव बढ़ेगा
भाव बढ़ेगा और अगर भक्तों
के प्रति इशा का भाव रखेंगे तो हमारे अंदर शत्रुता का भाव बढ़ेगा में
है। अंत में वो क्या है जो भक्ति के लिए अनुकूल है। और जो प्रतिकुल है, उसे
तो स्कूल संस्थान में भक्तों के अलग अलग विचार हो सकते हैं। लेकिन अंत में हमें वही करना चाहिए जो भक्ति के लिए प्रतिकूल है और अनुकूल है। और प्रतिकूल को हमें उसको ठुकरा देना चा
होना।
तो चेतन वह को बार सनातन गोस्वामी को शिक्षा दे रहे थे कि भगवान को कैसे सन्नाटा हुआ।
क्या
चेतन ने कहा जो अनुकूल है भर्ती के लिए शिकार करो, पति को उसको दिया तो हम सबको विलास करना चाहिए। हम सब एकता के साथ आगे बढ़े। अलग अलग दल नहीं बनाना है तो हमें सबको प्रयास करना है।
संस्थान के प्रचार में बढ़िया आज कॉमफर्ट
आजकल ये फेस है कम्फर्ट जोन है कम्फोर्ट जोन आप लोग सुना है सर
हम
यहाँ पर सब सुन भरते हैं।
सुना कोबोल
लोगो ने सुना
करेंगे, हमारे
खेल पर आप सेवा करेंगे लेके।
सर से अमर हो जिसका भाग से मर्जी का पालन होता है। इसका भाव से भक्ति का
भरती है, है निष्टा? भाव से शुभ भक्ति का पाला
भाग्यशाली हो, आप के साथ जुड़े हो, आप
सब बहुत भाग्यशाली हो, कि आप सब स्कॉर्ट के साथ जुड़े हो भागसाली। इस कॉल के अंदर आपको सही संदेश प्राप्त होता है।
ग्राउंड संदेश में
नकली बना भी संदेश नहीं।
को 1 पत्र में लिखा था कि जब तक किसी के नहीं हो
भाग बात पता लिखा था कि जब तक किसी के ऊँचे संस्कार नहीं होते तब तक वह कृष्ण भक्ति में नहीं आ सकता।
जो है वो कैसे संस्कार हैं।
तो स्कॉट में जो भी भक्त जुड रहे हैं उन सभी के अच्छे संस्कार
है, सुन्दर बन रहे है।
आज 2 पार्टी की कृपा से हर जगह पर बंधी है।
सूरत में आये थे तब
2 पाल जी भी सूरत शहर में आए थे और माता जी कहते नाइनटीन सेवंटी फाइव में वो भी आये थे जसपति के साथ। उस समय सूरज में 1 भी भक्त नहीं था।
पूरे में प्रो पार्टी आये थे सूरज
में तो विदेशी भक्तों के साथ 4 के द्वारा पूरे शहर में क्रांति हो गयी थी।
का लाभ हम आज भी उठा रहे
तो उसका लाभ आज भी हम उठा हो। जो बीच प्रोपटी सूरज में चला कर उसका लाभ आज हम उठा रहे
है। बगुल बीता हुआ है 60 करोड़ की 50 और 1 भाषा बोले।
आज इस गौ के 400 केंद्र है 60 करोड़ भगुलगीताबाटीगईहै अरी वो
ध्यान देगा, हरीराम को ध्यान से
मिलेगा, साथ मे कहते है जितना भरी राम के ऊपर जब करोगे हरीराम का तो जल्दी पकती
हो सारे भीतर को पढ़ो और साथ
में सब गीता को पढ़ो, भाग को पढ़ो।
हमें पढ़ना
हमें पुस्तकों का वितरण करना है, लेकिन साथ में इसको पढ़ना भी चाहिए।
केवल करना, केवल वितरा करना हमारा कर्तव्य नहीं है।
तो उसको पढ़ना भ
भाव को और
प्रयास करो के गमला भाव को अनुकूल
करने से
हमें पेड़ से भी ज्यादा, सब घास से भी ज्यादा पति बनना
है सबको आज
सभी को आज दी, बिना किसी आदर की अपेक्षा की
भाव बढ़ेगा।
इस प्रकार से मित्रता का भाव भक्तों में बढ़ेगा और भगवान श्री कृष्ण की कृपा प्राप्त है।
यहाँ अच्छा मदर बनाना है।
आप सबकी योजना है। यहाँ पर बहुत अच्छा मंदिर बनाना है। इस सर्च बार में आपको मंदिर बनाना है। आपके आप में से कितने कितने इच्छा है, कि मंदिर बनाना है। आप भूल
रही हैं।
मंदिर बनाने के लिए। भगवान की कृपा चाहिए। घास का पत्ता भी नहीं हिलता। भगवान की इच्छा के बिना बाबा
को भरा मिला।
तो जब चेतना महा हो गये है। गोस्वामि को घटना में भेजा तो बहुत जिम्मेदारी दी। 3 जिम्मेदारी पहली जिम्मेदारी ग्रंथों की रचना करना है और दूसरा उन स्थानों को खु योजना जहाँ पर भगवान ने अपने जिला की और तीसरा मंदिरों का नेपाल
योजना।
अगर आप सब 1 साथ आगे बढ़ेंगे तो मंदिर की योजना जल्दी शुरू हो जाएगी। यह बहुत आवश्यक है। हम 1 साथ कार्य करें। कम्मुनिटी हर सभा में, हर मंदिर में अरे जल्दी
को थोड़ा समय छूड़ा है।
महाराज जी ने थोड़ा समय छोड़ा है। आपको कोई प्रश्न है तो हाथ उठा
के प्र, कोई शंका है, कोई कोई सका मैं आपके रहा हूँ जी के रूप में।
महाराज बता आज यहाँ पर आये है। 1 जी बी सी के रूप में, कोई सत्ता है, कोई प्रश्न है तो आप माला को पूछ सकते हैं। माताजी को पूछा है। माइक दीदी बोली जोर से बोली, माई
बेबी,
मार की कोटी का नाम मारी छपडी। बच्चे ने उससे पूछा क श्दाशिवजोसुनाथा कि दूध और दही का अंतर है? श्री कृष्ण ने तो नही हो पाया का प्लस दी कभी सी और भगवान कृष्ण के अंदर दूध दही कितना अंतर है। तो वो थोड़ा समझाइए वो क पर बहार है। परम भगवान तो भगवान कृष्ण दूर से
दही बना सकते है, दही दूध नहीं
बना, आप दूध से दही बना सकते हैं लेकिन दही से दूध नहीं बना सकते। और और कोई प्रश्न है कोई जी हरी जी महाराज यह है कि ऊपर की ग्रुप सबसे आसान कैसे प्राप्त कर सकते है? रहुपालजीकीगु आसानी से कैसे प्राप्त हो? बहुत सरल है। बहुत स चैन रीडएनपीहैपपीनी माला कीजिए पुस्तक पढ़िए और कुछ रहिए।
और ये हरी नाम क्या है?
ना सर मार्ग है, हरीरा को पूछा
है सरनभादकईगईना
कलयुग के अंदर भगवान प्रगंडुदेवक नामों के द्वारा जो भी आती हो हर रविवा को रात
की आवश्यकता है।
मंदिर में सभी भक्तों को मंदिर में रेगुलर आना चाहिए।
सेवा,
सेवा भाव के साथ एनी पेशन माताजी न पेश गुरुवार के कोली कोली प्रणाम गुरुवरण है। हमारी रूचि कैसे बढ़ सकती है? चाहिए
कैसे बुरा।
यही हमारा उद्देश्य होना चाहिए कि हरीरा में रूचि कैसे बढ़ाए
बा
और हरीराम में रूचि कैसे बनेगी। हरी राम का उच्चारण करने से न
करोगे
आप उच्चारण करेंगे हरी राम का ताप की रूची हरीराम में बढ़ेगी और वे मर सकते हैं सभी में ऐसी भगवान। कई साल में भगवान शंकर, भगवान संकराचार्य का प्रकट हुए तो हम की सप्रदाय के लोग भगवान संक्रचारिऔरउलसको मायावती क्यों बोला उसमें पैसों पर तो मेरा ही है बताया शंकर जो है वो शंकराचारी के रूप में आये। अब तो को हम मायावाद भूलेंगे तो सुनकर भगवान का अपराध होगा महा रिश्ता।
फिर भी भगवान के
तो स्वीजी ने स्वयं पर को मंत्र दिया था
लोगो में द्वारा
स्वयं जी ने स्वयं भागवत में कई स्लोगन के द्वारा स्थापित किया कि भगवान श्री कृष्ण स्वयं भगवान है। पद
के लिए जल्द से जल्द आपने मन लगा।
आप सभी भक्तों का कुखोआवार और सब प्रयास कीजिये की जल्दी से जल्दी मंदी का कालिया संपन हो जाए। नेक कृष्णा हम लोग बड़े बड़े सौभाग्यशाली हैं।
संदेश इस प्रकार
है क्या अपराध।
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