पुस्तक वितरण की महिमा | 17 Dec 2006 | Srila Gopal Krishna Goswami

श्री गोपाल कृष्ण गोस्वामी इस प्रवचन में पुस्तक वितरण (विशेषकर भगवद‑गीता और श्रीमद् भागवत) की महिमा को उजागर करते हैं। वे बताते हैं कि जो भक्त शास्त्रों का प्रचार करता है वह भगवान कृष्ण का सबसे प्रिय भक्त माना जाता है। प्रवचन में कई वास्तविक जीवन की कहानियाँ सुनाई गईं—एक रोगी जिसने कीड़े‑कीड़े से ग्रस्त शरीर को ठीक किया, एक युवक जो घमण्ड से बचने के लिये निरंतर नाम‑जाप करता है, एक समुद्री चालक जिसने ऑस्ट्रेलिया‑लंदन‑मॉस्को तक गीता वितरित की, तथा एक व्यक्ति जिसकी माँ ने छह साल पहले गीता खरीदी थी और बाद में वह स्वयं पढ़कर गहन परिवर्तन अनुभव करता है। वक्ता यह भी रेखांकित करते हैं कि पुस्तक वितरण का प्रभाव तुरंत नहीं दिखता, परन्तु दीर्घकालिक रूप से समाज में आध्यात्मिक जागरूकता और नैतिक सुधार लाता है। वे सभी भक्तों से निरंतर नाम‑जाप, शास्त्रों का प्रचार, और वर्ष‑भर पुस्तक वितरण करने का आग्रह करते हैं, साथ ही एक नए बड़े मंदिर के निर्माण के लिए सामूहिक सहयोग की आवश्यकता पर बल देते हैं। अंत में, वे भक्तों को विनम्रता बनाए रखने, अहंकार से बचने, और कर्तव्य को आनंद के साथ पूरा करने की प्रेरणा देते हैं।
Chapters
ओम नमो भगवते वासुदेवाय, ओम नमो भगवते वासुदेवाय नम भगवते। वासुदेवाय जी ने इस विषय पर बल दिया क्यूँ की भगवान श्री कृष्ण भी कहते है सब भक्तों में सबसे प्रिय कौन है जो मेरा प्रचार करता है के मृत में कथा पढते हो की के महा भक्त हैं जिनका नाम था वासुदेव और विप्र, उस भक्त को को पूरे शरीर में था और कीड़े थे, कीड़े नीचे गिरते थे, उठाकर कीड़ों को वहाँ शरीर में जोर देता था को, मिले और महा ने उन्हें गले लगाया गले लगने के बाद जो कोढ़ की बीमारी थी तुरंत समाप्त हो गयी। 1 खुबसूरत युवक बन गया, उसके मन में घबराहट हो गयी, इतना खुबसूरत बन जाऊ को अक्सर हो जब कोई धनी हो, ज्ञानी हो, पढ़ा लिखा हो तो घमंडी हो जाता है। शरीर से इतनी बदबू आ रही थी की अगर वो सड़क के बाई तरफ चल रहे थे तो सब लोग दायने तरफ हो जाते थे। अब महाप्रभु जी की इसी कृपा से वो 1 खुबसूरत युवक बन गया तो को डर था की मैं घमंडी बन जाओ। तो ने महा प्रभु जी से पूछा की मैं इस स्थिति में कैसे जी? तो महाप्रभु ने कहा सदा हाई नाम का जाप करो और सदा हर नाम की महिमा का प्रचार करो। और अगर तुम इन 2 कार्यों के 2 कार्यों को निभाओगे तो सदा नम्रता के साथ जी पाओगे। तो पापाजी तातरी कहते हैं इसी प्रकार इस संस्था के सब भक्तों का उधर हुआ है। जैसे का उधर हुआ तो हम सब भक्तों को क्या करना चाहिए, सदा हरी नाम का जाप करना चाहिए वो ही नाम की महिमा का प्रचार इन ग्रंथों में आपको क्या प्राप्त होता है? हर नाम की महिमा का है की नहीं? पिछले हफ्ते 2 हफ्ते पहले भाग को मैने पूछा की आप भाग कैसे बने? तो कहा था की पिछले साल 1 ली की दुकान में खरीदी 2 रूपये में में वो गीता को घर ले गया, पढ़ना शुरू किया और पढ़ने के साथ उसे ये लगा की भगवान जो पेश है मेरे लिए है खास कर के शुरू किया, भक्तों की संगत का लाभ उठाना शुरू किया और आज बड़ा अच्छा भक्त बन गए कैसे गीता जो की की सिराजी परिक्रम करते थे पर उनको मिलने गये। राकुल ने कहा भगवान तुमको ध्यान दे तो जन को प्रकाशित करना और ना प्रकाशित करने का लाभ केवल जब है आगे करने का क्या लाभ। जो जी ने 1 मृदंग की तस्वीर खींची और कहा ये जो की सेवा है, ये क्या है जाओ आज जाती है का अर्थ है बड़ा दंगा, थोड़ी दूर तक की जाएगी और इन ग्रंथों को जब आप बाटते हो इनकी आवाज कहाँ से कहाँ जा सकती है। 1 समय 1 रुसी भक्त था जो की पानी के जहाज में नौकरी कर रहा था तो उसका पानी का जहाज ऑस्ट्रेलिया पहुँचा। जब ऑस्ट्रेलिया पहुंचा तो जब जहाज कहा जाता है तो सारे सेलर घूमने निकलते हैं। बाहर उसने 1 भाग गीता खरीदी ऑस्ट्रेलिया में सेवा से निकला और आगे आया। लंदन जब लंदन आया रास्ते में 2 हफ्ते के लिए गीत गया, लंदन में भक्तों को मिलने हो, फिर वहाँ लंदन में से और किताबें खरीदी जहाँ लंदन ऐसी गया कहाँ मोस्को और जाते जाते और किताबें पड़ी मोस्का पहुँच कर। तो वो कहाँ थी ऑस्ट्रिया में का असर कम पड़ा कहीं हज़ारों मील र तो आज जब ये गंध को बाटते हो ये नहीं की इसका असर एकदम काली पड़ेगा 1 व्यक्ति विदेश में भक्त बना था तो मैंने उसे पूछा भक्त कैसे बने? तो उसने कहा की मेरी माता ने 6 साल पहले 1 भगवत गीता खरीदी थी और खरीद कर अलमारी में रख दिया, कभी खोला भी नहीं 6 साल के लिए 6 साल बाद 1 दिन बेटा निराश था। जब व्यक्ति निराश हो तो कई बार भगवान के सत होने का प्रयास करता है, कुछ अपनी माँ की, कई को बाहर निकाला, किसी से प्रभावित नहीं हुआ। फिर उसे भागवत गीता दिखी, उसने भागवत गीता पढ़ना शुरू किया। भागवत गीता से इतना प्रभावित हुआ की हम ही शुरू कर दिया गया। भागवत गीता। कब खरीदी थी कितने साल पहले 6 साल बाद तो जब आप इन ग्रंथों का का वितरण करते हो तो ये मत सोचिएगा कि का असर कल ही दिखना चाहिए, कुछ पता नहीं कहाँ से कहाँ इसका प्रभाव होगा। और जब आप 1 बात हो तो अक्सर कम से कम 65 लोग उसे पढते हैं। तो ये जो ग्रंथों की सेवा है और खास कर के गीता जयंती के उपलक्ष इस काम के भक्त अधिक प्रयास करते हैं। इन को बाटनिकल क्यूँ क्यूँकि की इच्छा थी की पूरा मानव समाज सुधार को सुधरे जैसे की आज के लोक में कुंती देवी जी कहती हैं की हम सदा आपके चरणों में रहना चाहते हैं। यह उपदेश हमें आगे लोगो को देना है और ये केवल सम्भव हो पायेगा का वितरण कर पूना के हर साल जुड़ते हो बड़े उत्साह के साथ हमारा उत्साह सारा साल रहना चाहिए। हम देखते है की 1 महीने उत्साहित हो जाते हैं, बाकी 11 महीने भी सो जाते हैं। तो मेरा यह निवेदन है सारा सारा साल अखबार पढ़ते हैं, मेकिन पढ़ते है देखते है तो सारा साल उन्हें दिव्य ज्ञान भी देना चाहिए और जब भी मौका मिले इसका हमें लाभ उठाना चाहिए। आप सब भक्तों का बहुत बहुत शुक्रिया जैसे भीमा पर कह रहे थे यह बहुत ही आवश्यक सेवा है और हर साल इसका लाभ उठाते हो और निवेदन यही है की आप लाभ उठाते जाओ और सारा साल का वितरण करो। इतने लोग हैं आपके पूरे जिनके पास कोई ज्ञान नहीं और हमने देखा है बुक डिस्ट्रिब्यूशन में की आप नए लोगों के पास जाओ। वो में राधे शाम को कह रहा था 2 हफ्ते पहले की दिल्ली में 2 भक्त थे जो की 1 व्यक्ति के पास मिलने गए, जिसका स्कॉन सी कोई परिचय नहीं था से परिचय था उठना बैठना कुछ नहीं था और उन्होंने गीता की महिमा का प्रचार किया। उस व्यक्ति ने पहली मीटिंग में ही 27 हजार गीता खरीद ली। सताईस हजार गीता 1 ही व्यक्ति ने तो मैं कह रहा हूँ कई व्यक्ति हैं जिनको आप जाओ वो गीता की महिमा का प्रचार करो उनको उपदेश। किस प्रकार समाज आज बिगड़ रहा है। समाज को सुधारने के लिए इस ज्ञान की आवश्यकता है। कई लोग जुड़ेंगे पापा जी ने कहा था क भारत में सबसे ज्यादा वितरण हो सकता है, पूरे विश्व में, उन दिनों में, अमेरिका में सबसे ऊँचा था, भारत में बहुत छोटा था। पर आज हम देख सकते हैं की अगर प्रयास करे तो वितरण के अनेक साधन हैं। व ये निर्भर है भक्तों को इसका लाभ उठाने का, साथ साथ भक्तों का बहुत बहुत शुक्रिया और जैसे जानते हो नई मंदर की योजना भी तैयार हो रही है, नए मंदिर का प्राप्त कर लिया है। ये जो मंदिर है यहाँ भक्तों को छोटा है की बढ़ा है, छोटा है आपको और बड़ा मंदर चाहिए, सबको चाहिए कि थोड़े लोगो को सबको तो बनने के योग दोगे कि सी ऊपर उठाने में की उसे आगे भी बढ़ेगे, हाँ ऊपर उठाने के आगे भी बढ़ेंगे सब तो बहुत ही जल्द शुरू होने जा रहा है जिसमे आप सबको जोड़ना पड़ेगा। अगर आप पूरा शहर में सुन्दर हो और पूरा प्रयास किया जा रहा है सुन्दर मंदर बनाने के लिए जिसमें अनेक प्रकार की सुविधाएं होंगी जिनका आप सब लाभ उठा सकते हैं। इस में आज हम चर्चा करेंगे पर अगर आपको ये बंदर चाहिए तो सबको जोड़ना पड़ेगा, नए बनाने भर सबको और सब मिल कर कार्य करेंगे तो हर कार्य संभव हो पायेगा। जैसे कृष्ण जी कहते है की कृपा ऐसी असम्भव कार्य भी सम्भव हो जाता है, कठिन कार्य सरल हो जाता है, उनकी कृपा के बिना सरल कार्य भी कठिन हो जाता है। तो अगर आप की इच्छा है की गुणता, बिहारी, भगवान सबके लिए सुन्दर स्थान बनाया जाए तो आप सब को इस सेवा में जोड़ना पड़ेगा और आप सब को इस सेवा के लिए उत्साहित होना पड़ेगा। अगर मिलकर कार्य करेंगे तो मुझे पूरा विश्वास है की थोड़े समय में ही आप सुन्दर मंदिर की स्थापना यहाँ कर पाओगे। hi krishna krishna hinksnाकरिश्णा ने हारे हमारा, हाल हाल।
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