भक्ति मार्ग सर्वोत्तम क्यों है? | 17 Feb 2024 | Surat | Srila Gopal Krishna Goswami

In this two‑hour devotional discourse recorded in Surat on 17 February 2024, Srila Gopal Krishna Goswami and several participants discuss why the path of bhakti (devotional service) is the supreme means of spiritual progress. The talk weaves together scriptural citations, anecdotes from Hindu epics, and contemporary observations. Key points include: the unparalleled fame and global recognition of the Shri Ram temple as a testament to bhakti’s power; the concept of nama‑rajya (the spiritual kingdom) and its attainable benefits such as inner peace and material well‑being; moral teachings emphasizing truthfulness, control of anger, and humility; critiques of materialism, social inequality, and the importance of simple living; reflections on family life as a venue for devotional practice; and practical guidance for devotees—prayers, rituals, and the role of saints and gurus. The discourse is multilingual, mixing Hindi, Urdu, and occasional English, and is delivered in a conversational, enthusiastic, and devotional tone, aiming to inspire listeners to adopt bhakti as their primary spiritual path.
Chapters
جھڑے راندہ ہوں کوئی ابھی ہاں ہو جھڑے راندہ ہوں کوئی ابھی ہاں ہو جو کی جانا وہ اللہ کو بھی بڑھتا ہوں جیسے ہاں ہوں گے جیسے ہوں گے سوڑھے سوڑھے بھجے گھنٹو گھنٹو
گھنٹو
جہوڑ شاہی مجھے مجھے ڈھونڈ ڈھونڈ جائے خیلی خیلی خیلی خیلی چھوڑی چھوڑی چھوڑی چھوڑی چھوڑی چھوڑی مجھے بہترین بہترین بہترین بہترین بہترین بہترین بہترین مجھے اپنے بہترین بہترین بہترین بہترین بہترین بھائی بھائی بھائی بھائی بھائی بھائی موسیقی موسیقی ہمارے پاس لگتا ہے
ہاں ہاں ہاں ہاں मारा चाहते
है प्रीक समझे इसलिए यहाँ पे जो माला चोलेंगे उसका ट्रांस्लेशन करेंगे
पहले पहले मैं आपना प्रेवजी कोई बचोंगा भाँ पर लेकरना चाहता हूँ फिर ये अच्छास्थान यह है वाल्गे मंगलें बनाने के लिए ہری भवाष्व।
मैं आत्माना गुरुभुजी और देवती मांता जी का धन्यवाद देखते करना चाहता हूँ, जिनों ने बहुत अच्छा स्थान दिया है भवाष्वान का मंदिल बनाने के लिए।
हरी हरी भवाष्व। खेल खेल बस आप इने भी जाओ, आप देखो�
अगर आप केलिया जाएंगे, साऊथ इंडिया जाएंगे, तो हर सरण पर आपको एक चर्च प्राप्त होगा।
कई बार कहते हैं, मंदिल क्यों मनाना हैं।
कई बार कहते हैं लोग के मंदिल क्यों मनाना हैं। इससे अच्छा तो गरीबों को सईयोग करें मंदिर का आवश्यक्ता इसलिए है कि इसका सास्रों में वणन है। मंदिर जाके लोग अपने रिदाई को सुद्ध बना सकते हैं।
तो मंदिरों का वणन सास्रों में दिया गए है। میں کئی سال پہلے middle east میں تھا میں نے دیکھا کہ ہر جگہ ہر دس بیس کھڑم پر ایک مسجد
تھا میں پہلے ڈیڑھ سال پہلے middle east میں تھے کئی سال پہلے middle east میں تھے مالا تو ہر سڑک میں دس بیس کھڑم پر ایک مسجد
تھا میں وہاں سے اسے پوچھا کہ سرکارہ بناتی ہے تو میں نے بھکتوں
سے پوچھا سرکار بناتی ہے مسجد؟ نہیں
مسلمانوں میں رواج ہے کہ اپنی کوٹی بنانے سے پہلے سرکار کی کوٹی بناتے
ہیں تو بھکتوں نے کہا نہیں یہاں رواج ہے مسلمانوں میں کہ اپنی کوٹی بنانے سے پہلے وہ مسجد بناتے ہیں
پھر بھائی بھائی بھائی بھائی بھائی بھائی بھائی بھائی بھائی بھائی بھائی بھائی بھائی بھائی بھائی بھائی بھائی بھائی
आज बहुत सूख दिव हैं आज विश्मदेव का आविर्भाव
पिती हैं विश्मदेव को बारा में से
एक महाजन गिना जाता हैं प्रेमुर्णा करते
हैं विश्मदेव को बारा में से गिना जाता हैं एक विश्मदेव महाजन को बारा में से एक महाजन गिना जाता हैं �
महाजन बारा है वो महाजन के लाएते हैं जो भगवानता संदेश हम तक पहुंचाते हैं। आजकल महाजन एक सर्देन बन गयी है। विश्मदेव को एक वर्त राप थोगा था कि वो अपने मुत्री का समय चूल सकते थे।
विश्मदेव
ने दुर्योधन की सेना में साथ नहीं आता।
जब
भिस्मदेव अपना सरीर कैगने वाले थे तो उनके सामने स्वाइम भगवान थे और सादे देवतार प्रेश्वान थे
जहां अपका मन होगा अच्छे करने में, वहाँ ही चुना था।
हवां कहते हैं कि जहां मनने के समय आपका मन होगा, वो आपको प्लावत होगा।
तो क्या सभागय है, परम भगवान त्वय हूँ, परवर्ष्य हूँ, निमो शुरू के आगे था।
तो युदिश्ट्रिंग भिश्व महराज भी वहाँ थे।
तो भगवान से क्रिष्ण ने युदिश्ट्रिंग को
कहा क्या पूछे गिस्मदेव से विश्मा देव सर से यहां पे लेटे हुने हैं।
वहाँ नहीं कहा युधिस्वीर तो पूछो।
और भगवान ने कहा युधिस्वीर आप प्रस्थ पूछे विश्मा देव।
नहीं कहो गए। वहाँ नहीं कुछ कुछ जवाब दे लिया।
आपको प्रस्थ होगा कि भगवा भगवान अपने भुक्तों की महिमां बढ़ाना चाहते हैं।
भगवान की महिमां बढ़ाना चाहते हैं। भक्त
का प्रयास रहता है कि भगवान की महिमां बढ़ाना चाहते हैं। भगवान का प्रयास होता है कि भक्त की महिमां बढ़ाना चाहते हैं।
जब हिल्दिश्य महारा
जो विदेशित माराच को राजगत्री त्राप्त हो रही थी तो बहुवान के पास त्राप्त ना चाहिए।
तो विदेशित जो भी बने में कई महने साथ पूरे साथ सिख्षा दिये हैं हम सबको।
तो कई साथी महत्बवन सिख्षा उसमें समय त्राप्त होती है
ہمارے بھکتوں کو اپنا
نہ چاہئے یہاں جو سکھشہ ہے وہ سادھان جیون کے لیے ہے اور ہم سبھی بھکتوں کو اس کو اپنا نہ
چاہئے میں کہاں سے کہتا ہوں کہ ہمیں جھوٹ نہیں بولنا چاہیے لیکن لائے
ہمیں तो आज कर ऐसा नियम चल रहा है संसाल में क्या हमें सच नहीं बोलना चाहिए।
तो मुझे देखा भूली बोला।
तो बिश्वदेव ने चाहा जूट मत बोलिये।
तो मुझे समाज में हम देखते हैं कि ना खेले करें।
तो होतिक समाज में हम देखते हैं कि कितना चेस हैं। کیونکہ ہم سب بہت ہی स्विविदावوں کے
پیچھے ہیں और
अध्याद्विक शित्र में हमें सत्य का उच्चारण करना चाहिए सबसे पहला है भगवान की वानी को यथा रुप
सुखार किया जा रहे हैं कही वर्ष्यों ने ईसा भगवान किया है और भावास
पर जोड कई लोग अपने भावात को जोड देते हैं।
तो भवात गीता को च्छापा एक नाम पर भवात गीता ये अर्जुन। ये भाव भाव हैं। वहाँ ने विलिक्ष दिया ना अर्जुन से क्या है। वही भाव होता है।
तो सिर्फ भवापा जी ने भवात गीता ये थालोग च
अगर मैं वैपार हैं, मैंने बोले, मैं तुम्हारे से कोई नफा नहीं रहा था। वो अगर बात हो रहा हैं, मैंने वैपार नहीं ले रहा हूँ। तो अगर मैंने वैपार नहीं ले रहा हूँ, मैंने इसका ज़्यावता रहा हूँ।
हाँ, लेकिन वैपार में ज़्यावता �
گلی ہوئی تو سوکار کرنا چاہیے گلتی ہو
اگر اجازت کی زیون میں تو اسے سوکار کرنا چاہیے وہ نے کہا کھو سے بچو اور وہ نے کہا جھوٹ سے بچیں کھو سے بچیں پہلا تایا جھوٹ سے بچیں دوسرا کھو سے بچیں
کھو وہاں یہ جو مجھے کہہ رہے ہیں
अग्वान देखा घीता के अंदर काम प्रोड लोग हमारे सतुर हैं नदर के
द्वार हैं तो क्रोड दो प्रकार के
होते हैं लोग दो प्रकार के होते हैं क्रोड दो प्रकार के होते हैं
एक है भौतिक क्रोड, एक है आजादिक
क्रोड एक है आजादिक क्रोड, और दू भोतिक ख्रोत तब होता है जब हमें कोई सुलिदा प्राप्त नहीं होता है हमें
बहुते विशाएं हैं कि ये कोई सीवा नहीं है ये वोक्त आपे होते हैं तो हम ख्रोतित बन जाते हैं जब
हमें भोतिक सुलिदा प्राप्त नहीं होती है तब हम ख्रोतित बन जाते हैं कई बार भक्त कहते है माराज एक रोध हमसे नहीं जा रहा है अच्छर तो
प्रैशन बहुत पूछते जाएं मैंने देखा कि लगवर्भ सेम हैं पारी दुनियां पर अच्छर
सभी भक्त इली प्रस्थ पूछते हैं मैंने
देखा कि आप किसी लेश में जा रहा हैं तो भक्त उसने एक प्रशन नहीं होगा क्रोज से कैसे बचा जाएगा।
तो दुनिया में कहीं पे भी चले जाओ सबका एकी प्रशन होगा क्रोज से कैसे बचा जाएगा।
मौने क्रोज से बचना चाहिए।
तो हमें क्रोज से बचना चाहिए।
क्रोज नहीं होगा। क्रोज का परिणा
دوسرا ہے आध्यात्विक क्रोत।
जब हम क्रोदित होते हैं कि कोई भगवान की सवा में अडचन लाता हैं
जब कोई भगवान के भुक्तों के उपर अत्याचा करता है तब हम फ्रोत करते हैं।
कुछ दिनों में आप जैसे नलाज़े का व्यक्ति मना होगी।
कुछ दिनों में आइनी बाही सारीक को हम नित्यादन प्रयोजोसी मना हैं।
जैसे नलाज़े की आइनेक भेवों हैं। उनक जगाई
मदाई कल लिला है वो बहुत ही प्रसिद है।
हिले महाबूर्ण में हिले हैं, हम सब
को बुलाया था, जाओ घर घर पच्यार करने के लिए।
तो कई खेलों में गए, तो में मुझे पच्यार कर दिया।
کئی گھروں پر وہ گئے اور وہ نے پچھال کیا سواگت کیا کئی گھروں
پر اُن کو گالی بھی ملی کہا کہ سادھوں آ گئے ہیں چھوڑا گئے
ہیں سادھوں کے وشکوں میں کہا کہ چھوڑا گئے ہیں سادھوں کے وشک میں
تو یہ پوچھ رہے ہیں مہاں نے پوچھا کہ یہ شہر میں तो नित्यानन्द
भोगों ने पुछा इस सहर में नवधीव में सबसे पतीत व्यक्ति कौन हैं। हारिदास ने नित्यानन्द भोगों ने पुछा उनसे। इन दोनों को पढ़ा था कि चेतने महाम्रुगों परमभवार हैं।
वो है बोला है ये वाही सहर में जो भाई गज्जना हुआ था ब्राह्मान कुटुम में जनंब
लिया था लेकिन आज सबसे बड़े पापी हैं। तो दोनों ने गाली बोलके दित्यान को अलिदास सागूर को भगा दिये।
और धंकी दिया के फिर से इस
लाज़ा में तभी मताना था।
जब
चहिदर महाबोगों को मालुं हुआ तो उन्हें भी कहा आप दोनों वापस जाओ के चार करने के लिए तो जब दोनों वापस गए, तो मधाईन ने एक जोड से बत्तर फैशा नितेनन्पों के उपर और उनके माते के उपर चोड आगे।
तो भवान अद्रियामी ने ले ले पढ़ा रहा तो फेजी जे गए उती सान पर सिर्फे चक्र की दोहरा मधाईन काम भर करने ले गए।
तो भगवान अंतर यामी है जब उन्हें मालू हुआ तो वो तेजी से गए और उसी स्थान पर नामधारी ने दिकरण पभू को पथर माला था अपना सुदर सिन चक्रे लेके।
वैसे तो चेजर महापूर्णे नामधारी सुदर सिन के चेजर में हमें सिख्षा दिया है कि वा
پرتو مہا بھو तो अध्याद्मी क्रोच जो है, जब कोई भगवान की दिन्दा कर रहा हो, भक्तों की दिन्दा कर रहा हो, या अपने कोई प्रिचार के कारिये के लिए अर्चन डा रहा हो, तब ये अध्याद्मी क्रोच होता है।
अनेक कारण हैं।
अनेक कारण हैं सर्व।
हमें
भोतिक क् तब आपको सुवीदा नहीं मिले तो बहुती दोड़ से पछना चाहिए। तो तीसरा उप्देश दिया विश्वदेवने के समानतार के साथ धन का उप्योग करना चाहिए। सभी को अपनी आवश्चक्ता प्राप्त होनी चाहिए। लेकिन आजकर हम समाच में क्या देते
हैं धनी हैं वो और धनी बन दे जाते हैं।
जो धनी विक्ती हैं और धनी बन दे जाते हैं।
ठीक हैं।
सही हैं।
विश्व की 90% सम्पती 10% लोगों के पास हैं।
विश्व की 90% सम्पती 10% लोगों के पास हैं।
तो विश्व की 90% लोगों के पास हैं। یہاں یہ سیدھار تھا کومیونیزم میں پہلے ایک سیدھار تھا کومیونیزم پہلے ایک سیدھار
تھا کومیونیزم کئی دیش کومیونیز تھے سیدھار
سیدھار کیا تھا سب چیز سرکار کی ہے سب کو ہمیں مانیں گے تو
وہ سیدھار تھا کہ سب چیز سرکار کی ہے اور سب کو इक्वली बाटा जाएगा।
कम आजी यह रश्या में गए थे। 1971 में।
जब प्रवापाध जी रश्या में गए थे, 1971 में।
एक बहुत प्रस्टेमन्ट प्रफ़ेसर था। प्रोटकी टाउस्की।
वहाँ एक बहुत प्रस्टेमन्ट प्रफेसर था। चौक्षी। प्रोटकी
तुम कहते हैं कि हर जी से जहार की हैं और हमें बड़ाबर बाड़ना चाहिए हमारे असल में हरी संपती बग़वान की हैं। इसे वाश्य इदार से कोड़े हैं।
उतना हैं स्विधाल किजिए जितना आवश्यक हैं। आगे भरोपा जी ने कहा साधा जीवन। भिश्म देवदेव को बताया के साधा जीवन दिताईं। हमारा सिद्धान्त है साधा जीवन उच्छ विचार। उच्छ विचार का मतलब कि कैसे हम जीवन का लक्ष प्राप्त कर सकें हैं
हमें अल्याद्मिक मात को स्विकार करना चाहिए
हमें अल्याद्मिक मात को स्विकार करना चाहिए
यही है उच्छ विचार बहुती वातार्म में
क्या सिद्धान्त हैं सारा जीवन उच्छ जी उच्छे जीवन और साधा विचार ये रोभिकता
का नियम हैं हम रहेंगे राजा जैसे
हम रहेंगे राजा जैसे चाहिए हमें बिमानी
करनी पड़ें कुछ साप्रुती लगेते हैं चाहिए
हमें कोई बिमानी करनी पड़ें चाप्रूसी करनी पड़ें लेकिन रहेंगे राज
یہ بتائیں گے کہ ہم دماغ سے زیادہ سفل ہیں
ہاں یہ بتائیں گے کہ ہم آپ
سے زیادہ سفل ہیں ہاں یہ دیکھیں گے پانچ سالوں میں کئی اور سال آگے ہم دیکھیں گے دماغ سے بشار ہے وہ ہے کہ وہ ایک جہاں
پاپ ہے तो बहुती जीवन में ये विचार है कि हम बहुती सुविदा जादा से जादा प्राप्त हैं।
जो देटा ना सादा जीवन बिटाई हैं।
बिश्मदेव ने युदिश्वी मार्च को कहा कि सादा जीवन बिटाई हैं।
और अगे कहा कि जो नेटा हैं उजे प्रजागी आव آپ دیکھتے ہو کہ جہاں سے مہاراج ویں کھانا یہ تھا
کہ پرجا اچھا دکھی تھے کیونکہ
وہ نے اپنا کے یویے کو کیونکہ انہوں
نے سبھی پرکاہ کی گھرگیوں کو دھکوا
دیا تھا تو
ساغر سکھ گئے تھے پیڑوں میں پھل نہیں تھے اور جمیل سے اندھ نہیں نکل رہا تھا سبھی پرجا بہت دکھی تھے پرجا
उन्हें सब के लिए कहा, परं बगवान गे नाम का उच्चानन करो। उन्हीं के बादे ही, असके लिए हम रात हो।
लेकिन जब उनके बेटे हुए, तो उन्हें कहा, परं बगवान गे नाम का उच्चानन करो। उसी से सभी सुभिजाए रात होगी।
रोटी,
تو کہا کہ آپ کی ذمہ داری بنتی ہے کہ سبھی کی سبھی آبشکت پر آپ پونہ ہوں۔
آگے وہ نے کہا اگر ہم سنتان پیدا کریں تو یہ بھی بیوائید پتنی کے دوران کرنا چاہیے۔
آگے وہ نے کہا اگر ہم سنتان پیدا کریں تو کبھر بیوائید پتنی سے ہی سنتان پرابتہ کرنا چاہیے۔
और वो इसकतऔऔ प्राक्षिक आजी प्राक्षिक तो हम साधरान जीवन में कैसे पाड़न पाड़न हैं। इस प्रकार विश्वदेव देव पैटे का अनुस्पिक्षान हैं, किस प्रकार हम साधरान जीवन में इसे अपना प्रके हैं।
पर इस प्रकार विश्वदेव देव देव बता है कि किस प्रकार साधरान जीवन में इस किस प्रकार इन नियमों का पालन हमें करना चाहिए समार्थ हैं।
अगर हम
इस नियमों का पालन करें तो भारत का नक्षा ही अलग होगा।
आज
विश्मदेव जी का जर्म दिन है बटे हरियो
बाडोली मंदिल से कौन कौन जुड़े हो रहे हो?
बाडोली मंदिल से कौन कौन जुड़े हाथ उठए? जो जो बाडोली मंदिल से जुड़े हो रहे हो।
सुरा से हाथ बाडोली वाले हाथ उठए?
सुरा से हाथ बाडोली वाले हाथ उठए?
सुरा से हाथ बाडोली आप सब करेंगे वेदों पूछी व हैं कि आप जुड़ी हैं इस मंदिल के साथ।
महाराज जी सबसे विदन्त नहीं करते हैं कि आप सब जुड़ी हैं इस मंदिल के साथ। हर वेवार को मंदिल के अंदर आईए। जैसे भक्तों की संग्या बढ़ेंगी तो भगवान
और किपा करेंगी हैं हम सब भक्ती के रास्ते में आप लोग जुड़े हुए हो तो प्रयास करना हैं कि विचलित
नहीं हो जाएं हम सब भक्ती के रास्ते में आप लोग जुड़े हुए हो तो प्रयास करना हैं कि विचलित
भक्तों की संगे का लाव उठाओ।
चेतन महामुद क्या कहा सादु संग भक्तों की संग का लाव उठाओ। तीन स्रेनी के भक्त होते हैं।
जो हो जो आप हो। हरी हर्यार्य आप से ज़्यादा उठव है।
दूसरा भक्त जो आपके बलाबर है। तीसरा जो आपसे कम ग्याँ हैं नारद मुणी इन सिक्षाओं का मंदन करते हैं भागवतम के चौते स्कंड में तो पहला है कि जब हम हमारे से उपर के भगत, उत्तब भगत से मिलें तो हमें प्रसदन होना चाहिए
बादल देखते हैं बारिश के उठी होगी हैं वो एक
बादल नाँशता है उसी परकार जैसे मो और बादल बारिश के सिजर में बादलों को देखता है तो वो नाँशता है वैसे उत्थब भक्तों को देखते हमें भसन
होना चाहिए हरी बादल दुरू
माराज ने बड़ी तप जिसके कारण भगवान प्रसंद हुए थे।
भगवान ने कहा, जो आप नहीं कारण लेनी तपिश्या से, मांगो मेरे क्या वर्च है।
तो भगवान ने कहा, मैं आपकी तपिश्या से प्रसंद हुँ, मांगो, आपको क्या वर्च हैं।
मैंना मुझे कोई वर्च देना आ� तो
धुरुमारे पे कहा कि अगर आप मुझे वर्ड देना चाहते हैं, ऐसा वर्ड दीजिए कि मुझे हमेशा भक्तों की संग रावतों हो। उत्तब भक्तों का संग रावतों हो।
वर्ड के वर्ड पुछना दाला के चर्चा करते हैं।
और वो भक्त जो हमेशा किर्ष्य करता دوسرا جو بھکر ہمارے سمان ہوتا ہے، اُن سے کیا بیوار ہونا چاہیے؟ اُس سے ہمیں مطرتہ رکھنا چاہیے۔
مطرتہ کا بھاو رکھنا چاہیے۔
ساتھ میں سوچیں کیسے ہم بھگوان کی سیوہ کر سکیں، کیسے بھگوان کی انجلد کو آگے بڑھا سکیں،
उसके पति क्या भाव होना चाहिए।
जब आप अपने से कम घ्याँ के व्यक्ति को मिलो, तो उसके पति क्या भाव होना चाहिए।
दया का भाव।
दया का भाव।
इसके सब्नों में, एभाव के हम कैसे इसका उधार करें।
तुसरे सब्नों में, एभाव के कैसे हम इसका उधा उनको हर पकाद की सुविधा थी रादा रामुदन मंदिर में वो निवास करते थे।
विश्वगे की नाथ लेते हैं। मुझे आपों के लिए विश्वगे के लिए ख्रेज बढ़ाने का प्रहाँत है।
तो मुझे क्या सोचा कि विश्यों में कितना क्लेस है तो मुझे महा पभु के संदेश को लेके उन्हें विश्यों का क्लेस घटाना चाहिए।
पभु
पाजी सत्य साल की उम्मल में जब प्रचार आगर ने अमेरिका दिखले जहाज में उनको दो हार्ट एटे गर रहे है।
ہاں
انہوں نے سوچا شاید مجھے انڈیا واپس آنا ہوگا تو نواز صاحب نے
کہا کہ بھرو بھارت
رگوان سکتے میں آئے توپا جی کے اور کہا توپا جی تمہاری یوجنہ سفر ہوگی توشیف توپا جی نے کسٹ اٹھایا سماج کے سدھہار
کے لیے
आज हम देख सकते हैं बहुत बात की किपा से पूरे विश्व में आज कौने कौने में हरी नाम का उचान हो रहा हैं हर विश्व की वैश्विक बासाओं में हमें भगवाईद गीता और अन्य वैधी ग्रण प्राप्त होती हैं
हम कहेंगे हमें नहीं कोई दया की भावना नहीं سنتوں کی وانی میں بیشواس
رکھنا چاہیے और एसा नहीं कि हर बाद हम भोतिक बुद्धी से ही सोचे
और काल करें तो अंजा शिन्दिया तो अपने चाले साम नामा खेलते हैं। अपने चाले साम नामा खेलते हैं। अपने चाले साम नामा खेलते हैं।
अपने चाले साम नामा खेलते हैं।
अपने चाले साम नामा खेलते हैं। अपने चाले साम नामा खेलते हैं।
अपने चाले साम नामा खे अगर हमारी हरिनाम के पति तुच्ची बड़ेगी तो माया के पति हमारा आकरशन घटेगा। यह सबसे महत्व कोई सेवा है लेकिन
कई बाद वगत्व पुछते हैं हम क्या
सेवा कर सकते हैं हम कहते हैं हरिनाम का उच्छान करूँ और श्रिभाद भागवतं भगवत घीता का अध्यान करो। जैसे हम कहते हैं कि वित्रण करना एक सेवा है और उसको पढ़ना दुसरी सेवा है।
चल पढ़ोगे तो क्या मिलेगा।
शिर्भावपारजी के ग्रंथ पढ़ोगे तो क्या मिलेगा। आपकी बुद्धी ज्यादा तेज हो जाएगी।
अगर
आपकी बुद्धी तेज है तो आप सदर्ता से माया का विरोध कर सकते हैं। तेज चाकू से काटना ज्यादा असान होता है। جو گھٹا چاکو ہے اسے کارنا مشکل ہوتا ہے دیلے کٹتا ہے ہماری بدھی کو تیج بنانا ہے تو اسی برکات چاکو کی طرح ہمیں ہماری بدھی کو بھی تیج بنانا ہے وہ ایک ہی اپا ہے اس کا ایک ہی اپا ہے सरورم کیترم یہ دو سب سے اوجھر ہیں یہ دو سب سے اوجھر
ہیں ہم بھکتی میں آگے بڑھنا چاہتے
ہیں اگر ہم بھکتی میں آگے بڑھنا چاہتے ہیں
आप
सब प्रक्तियों में जूरे हो तो आपका प्रयास होना चाहिए कि आप सब सफलता प्राक्त करें।
हमने
सवागय है कि महान अचारियों की व्याक्या पुछर बहुबाध जी ने अपने मुस्तबों में अंगरे जी में अनुवाद किया और उसके बाद विश्म की सभी बासाओं में भी या पुछर मुस्तबों का अनुवाद हुआ।
नहीं हूँ, आचाड़े को स्वयम पढ़ने में हम कोई सबर नहीं है।
अगर आचाड़े के ہمیں
پڑھنا چاہتے ہیں
ہمیں सरकोपाध जी के पुछतको पढ़ना चाहिए और उसका प्रचार भी करना चाहिए तो आप सब मिलकर प्रयास करोगे जेतने महाँ भूकायी अंधुलत और भी फैलें।
जय शी राव।
जय शी राव।
जब से राम जी का भगत पुला हैं तो जो भगती के प्रती सद्धा बड़ी हैं।
जब से राम जी का भगत पुला हैं तब से लोगों की भगती के प्रती स� श्रीराम जी के मंदिर के उद्धार्डन को सबसे ज़्यादा विश्वो में पसिद्धी मिली हैं।
विश्वो में किसी चीज नहीं था।
विश्वो में कोई भी चीज का इतना पबलिसिटी नहीं मिला जितना राम मंदिर को मिला। ہمیں
کافی
نہیں ہے ۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔
नामराज्य का सुख प्राप्त हुआ था।
जो नामराज्य का सुख पहले प्राप्त हुआ तो वो आज भी प्राप्त हो सकता है।
नामराज्य का जिन्दी का जिन्दी गराज्य था तो वादा वच्छती जिन्दी का जिन्दी था। जिन्दी वो पकड़ गए थे पर उनक
राम जाज़े का वातारान वो सभी लोगों को बहुत ही बसंद था।
पर प्राभूरी कहते हैं कल्यूग में भी
सत्यूग का वातारान पैदा कर सकते हैं। तो हरिराम का पुचारण कीजे जाए देखो तारे को किष्णमतिस और हरिराम का पुचार कीजे। आज हम विश्मदेव की प्राथ्ता कर सकते हैं क्योंकि किरपा प्राथ्तों और उनके उपदेशों का धरता प्रता पालत कर सकते हैं हाई गरिशा! हरे गरिशा!
जिजो मेरे किरपा विश्मदेव पान बना जिकी? जैसे!
जैसे जो सिर्फो पान जिकी?
जैसे!
विश्मदेव क भूर्वान एक या दो प्रस्टा माराज ले सकते हैं ता आपको किसी लोग कोई अच्छा सवाल हो बात उठा के माराज जी से पुछ सकते हैं विशंका हो जीनि पेशन आपको प्रस्टा हैं
भूर्वान जी को ले सकते हैं अलो
प्रगुजी माराज जी बरुती में परिवार के भक्ति में परिवार क्यों बादा बनता है?
परिवार बादा बनता है जब उनकी रूची
नहीं होती है परिवार तब बादा बनता है जब उनको उनकी खुशी कोप्रोमैल होती है उनकी रूची नहीं होती है यह
बात सच है जब हम भक्ति में जूरते हैं तो कई लोग �
کہیں
گے کہ نوکری کرو پیسہ کماؤں یہ کیا ساجوں بن رہے ہوں؟ ان کا
یہ مہا ہے تو ہمیں یہ مطلق کرو کہ آج نہیں
اُن کا کہنا ہے کہ بھگتی کرو لیکن ابھی نہیں، بال میں جب آپ بھڑے ہو جاؤ
تب، ابھی پیسے کماؤں، جب آپ اندے بھڑے لنگڑے ہو جاؤ تب بھگوان کا نام لینا अगर
किसी खादाने में भगत बन जाता है तो उसके दस पेडी तर उसका उदार हो जाता है। सुद्ध भगत है यह कोई नई चीज नहीं है हर भगत की जीवने में होता है। پرلاد مارج کے پتا ہینایا کشبھو نے بھی پرلاد مارج کی بھکتی کا ویلوگ کیا ہے لیکن وہ کافی ڈرڈ تھے بھکتی کرنے کے لیے لیکن وہ کافی
ڈرڈ تھے بھکتی کرنے کے لیے لیکن
وہ کافی ڈرڈ تھے بھکتی کرنے کے
لیے لیکن وہ کافی ڈرڈ تھے بھکتی کرنے کے لیے لیکن وہ کافی ڈرڈ تھے بھکتی کرنے کے لیے لیکن وہ کافی ڈرڈ تھے بھکتی کرنے کے لیے لیکن وہ کافی ڈرڈ تھے بھ रुपगोस्वामे
उब्देशा बुरुत में कहते हैं उच्छाद इससे दहरी हैं कि हमें भगवान की भक्ति उच्छाद पूर्वक करनी चाहिए हैं। और ध्रीड होकर। एक और पेशन माराजी ले सकते हैं माता जी साइड माता जी को बनते हैं। एक माता जी कुछ।
प्रनाम
हैं। माराचिन हम distribution में जाते हैं तो कई लोग पीछते हैं कि आपकी सॉन की बुक्स में प्रिंटे ट्रिक्स क्यों नहीं हैं। घीता प्रेस की बुक में प्रिंट हैं। सब में प्रिंट होते हैं। तो आ�
ہم دان کی دانیں لیں کوئی بار ہمیں کسی بار قیمت نہیں ہوتا وہ شدماں ہیں لیکن یہ عربیہ کی مصنف نہیں ہے
हम جو भगवत गीता देते हैं वो दान में देते हैं अगर किसी के पास कीमत नहीं है लेकिन वो सद्धावान हैं तो थोड़ा कॉं कीमत में भी दे देते हैं अयोध्या के उप्सव में इस कॉं के द्वारा लांको भगवत गीता इस परकार से
वित्रह हो रहे हैं और तुम्हीश
अपने प्रेस्टियों अपने प्रेस्टियों नहीं हैं।
अपने प्रेस्टियों अपने प्रेस्टियों नहीं हैं। अपने प्रेस्टियों अपने प्रेस्टियों नहीं हैं। अपने प्रेस्टियों अपने प्रेस्टियों नहीं हैं।
अपने प्रेस्टियों अपने प्रेस् कुपान कुर्पातर के कृष्ण लोगधाम में पढ़ा रहे हैं और हम सबको बहुत बहुत स्टॉंग आश्राय दे रहे हैं कि कृष्ण को हमारी बिनिकी सुनने भी पड़ेंगे ऐसा आश्राय महाराज दे रहे हैं सबके लिए सबके लिए तो आप सबके लिए कुपातर पात और हरे नाम करते रहो और आते रहो मंदीन की सेवा के लिए अभी आज सुरत से आये हुए विश्वनात गोपिनात प्रभुजी ने आज के प्रस्चात की सेवा की है
अगर विश्वनात गोपिनात से आये आज प्रस्चात उनकी तरफ से स्पॉंटर है प्रिश्टाः प्रिश्टाः प्रिश्टाः हरे हरे हरे आम हरे आम
आम हरे हरे प्रिश्टाः प्रिश्टाः प्रिश्टाः हरे
हरे आम हरे हरे हरे प्रिश्टाः प्रिश्टाः प्रिश्टाः हरे हरे आम हरे आम आम
हरे हरे प्रिश्टाः प्रिश्ट
More from PRASAD

Rare Pastimes & Timeless Lessons of Guru Mahārāja | Stories Every Disciple Should Hear

ISKCON Legends- pure devotees meet-HH Jayapataka Swami, HH Gopal Krishna Goswami, HH Radhanath Swami

Jagannātha Ratha-yātrā Through Śrīla Prabhupāda's Mercy | 29 April 2006 | Nairobi, Kenya

Lord Jagannātha's Appearance Pastime | 21.07.2019 | ISKCON Calgary | Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī

The Ācārya Teaches by His Own ExampleGuṇḍicā Mārjana by Guru Mahārāja #shorts

Guṇḍicā Mārjana – Lord Jagannātha's Pastime | 21.7.2019 | ISKCON Calgary |Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī

H.H. Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī Mahārāja - Exemplary Sādhana and Deity Worship # shorts

भगवान की कृपा कैसे प्राप्त होगी ? | 11 Jan 2014 | Punjabi Bagh | Srila Gopal Krishna Goswami

Material Education vs Spiritual Education | Srila Gopal Krishna Goswami #shorts

