भक्ति मार्ग सर्वोत्तम क्यों है? | 17 Feb 2024 | Surat | Srila Gopal Krishna Goswami

In this Hindi devotional discourse delivered in Surat on 17 February 2024, Srila Gopal Krishna Goswami (Speaker A) expounds why the bhakti (devotional) path is the supreme means of attaining spiritual fulfillment. He draws on Krishna’s teachings, the ideal of Ram Raja Yuga, and the possibility of recreating a Satya‑Yuga atmosphere even in the present age through sincere chanting of Hari/Hari‑Ram and worship of Vishnu. The talk contrasts genuine devotion with material preoccupations, warning against postponing bhakti for career or wealth. He cites the generational merit of devotional actions, recounts historical resistance to bhakti (e.g., opposition faced by Ballal Balk), and urges enthusiastic, heart‑centered practice modeled on the teachings of La Maharaj. Practical aspects such as the distribution of Bhagavad‑Gita copies, donations, and community celebrations (e.g., Ayodhya festival) are highlighted as ways to spread divine grace. Throughout, the speaker emphasizes truthfulness, simplicity, and the transformative power of devotion for individuals, families, and society.
Chapters
y मेरा
ह, हायाजे हे के नारे, ने हारे हरेहरे हाल, हारे सर आप
सभी दोस्तों का हार्दिक स्वागत है थैंक
यू सो सबसे पहले मैं हाथ का नाम है
तो सबसे पहले मैं आपना गुरू जी और देवी माता जी का धन्यवाद करना जिन्होंने बहुत अच्छा स्थान दिया। भगवान का मंदिर बनाने के लिए अगर आप खेलना जाइए साउथ इंडिया चाहिए तो हर सड़क पर आपको 1 च प्राप्त होगा। कई बार कहते है लोग के मंदिर क्यों बनाये इससे अच्छा तो गरीबों को सहयोग करे। मंदिर की आवश्यकता इसलिए है कि इसका सासरो में वर्णन है। मंदिर जाके लोग अपने विदय को शुद्ध बना सकते हैं।
तो
तो मंदिरों का वर्णन 7 शुरू
दिया गया है बैक
में पहले डेढ़ साल पहले मि, कई साल पहले मीडिया लिस्ट में से मारा और हर सड़क में 10 20 कदम पर 1 मस्जिद था।
पूछा सरकार बनाती है तो मैंने भक्तों
से पूछा सरकार बनाती है। 1 मस्जिद थी
नई अपनी कोठी बनाने से पहले हमारे ही कोठी बनाते है।
नहीं यहाँ विवाह है मुसलमानों में के अपनी कोठी बनाने से पहले वो मस्जिद बनाते तो लेकिन हम जो है पहले हमारा मकान बनाओ, बच्चों का मकान बना बनाओ और खर्च करो उसके बाद कुछ बच जाए तो दान
यहां किया जाएगा,
प्रयास किया जायेगा यहाँ पर सुन्दर बुजुर्ग
में
आज बहुत सुख दिन है, आज विष्णुदेव का आवेश भाव पीती है देव को महाजन, विश्वदेव को 12 में से 1 महाजन गिना जाता है
महाजन अधिकारी
महाजन जो है 12 है वो महाजन जगह जो भगवान से हम तक पहुँचा। आज कल महाजन सर्वे बन गई है।
खोल
दे हुआ वो अपने मुतूकासामनेचून सकते
थे,
विश्वदेव ने दुलीदंगीसेना में साथ दिया
और
जब विश्वदेव अपना शरीर काटने वाले थे तो उनके सामने स्वयं भगवान थे और सारे देवता थे और 5 पांडे भी थे।
जहाँ
भगवान के है की जहाँ मंदिर के समय आपका मन होगा वो आपको प्राप्त होगा।
क्या सभा भवन
विश्व का सौभाग्य था जब श्री त्ानवेसी तो साक्षात परम भगवान उपस्थित थे। मा जी सी मदद बीमा से भगवान
ने पूछो जीवन
भगवान श्री कृष्ण ने यदि को कहा की आप पूछे विश्वदेव से के जीवन का क्या परम लक्ष्य होना चाहिए और धर्म के ज्ञान के बारे में पूछे। हाँ विश्वदेव से सर और भगवान ने कहा आपको प्रश्न होगा। भगवान ने खुद भी नहीं पूछ लिया। भगवान अपने भक्तों की महिमा बढ़ाना चाहते है।
भक्त
तो भक्त का प्रयास रहता है की भगवान की महिमा बनाये और भगवान का प्रयास होता है कि भक्त की महिमा बनाए। जो विदेशी महाराज को रात वृद्धि प्राप्त हो रही थी।
तो
भगवान के पास लौटना चाहिए
तो शिक्षा ली है उन को तो कई
सारी मन को शिक्षा उसमें समा प्राप्त होती है।
ये जो शिक्षा है है।
हा जो शिक्षा है वो साधारण जीवन के लिए है और हम सभी भक्तों को इसको अपनाना चाहिए।
झूठ ही बोल रहे।
उन्होंने सबसे पहले कहा कि हमें झूठ नहीं बोलना चाहिए,
सच नहीं बोलना चाहिए।
तो आजकल ऐसा नियम चलता है। संसार में हमें सच नहीं बोलना चाहिए। तो विश्व ने कहा झूठ मत बोलिए तो
मारे समाज।
बहुत समाज में हम देखते हैं कितना तेज है
सुविधा के पीछे, क्यूंकि हम
सब बहुत ही सुविधाओं के पीछे है। और आध्यात्मिक क्षेत्रों में हमें सत्य का उच्चारण करना चाहिए।
सबसे पर जो वाणी को
सबसे पहला है। भगवान की वाणी को यथारूप स्वीकार किया
है, भगवान किया है भाव।
कई लोग अपने भावज को जोड़ देते हैं।
है कोई भाव न।
तो शील भोपा जी ने भगवत गीता यथा दुख छापा। जिस भाव से भगवान ने अर्जुन को बताया था वही भाव शील भोपाजी ने प्रस्तुत किया अपनी गीता। हाँ, लेकिन व्यापार में अगर। हम जब कहते है कि मैं आप से नफा नहीं ले रहा हूँ, वो ठीक बात, व्यापार में थोड़ा बहुत चलता है। लेकिन आजादी जीवन मे जुड ही बोलना चाहिए। गलती गलती हो अगर आजादी जीवन में 2 उसे स्वीकार करना चाहिए। और उन्होंने कहा झूठ से बचे, ऐसे क्रोध से बचे, पहला झूठ से बचे, दूसरा, क्रोध से बचे।
म्हारी
भगवान देखा। गीता के अन्दर जो काम लोग जो है वो हमारे शत्रु हैं। नगर के द्वारा लोग 2 प्रकार के होते है। क्रोध 2 प्रकार के होते है।
1 है क्रोध,
1 है। आधार भी क्रोध और दूसरा है। बहुत क्रोध, बहुत ही क्रोध तब होता है जब हमें कोई सुविधा प्राप्त नहीं हो। जब हमे भौतिक सुविधाएं प्राप्त नहीं होती है तब हम क्रोधित बच जाते हैं। भूत क्रोध से सभी भक्तों को बचना चाहिए। कई बार हम कहते हैं महाराज ये क्रोध हमसे नहीं जा रहा है, अच्छा
है भाई।
दुनिया में अक्सर सभी भक्त ही प्रश्न पूछते है। दुनिया में कहीं भी चले जाओ, सब का यही हुआ। क्रोध से कैसे बचा जाए तो हमें क्रोध से बचना चाहिए।
क्रोध हो का परिणाम भयंकर भी हो
सकता है, क्रोध का परिणाम भयंकर भी हो सकता है।
1 क्रोध होगा व्यक्ति
क्रोधित व्यक्ति किसी के ऊपर अत्याचार भी कर सकता है। दूसरा है, अंधा, दूसरा है आध्यात्मिक क्रोध
हम हे भगवान की जिला में जब
हम क्रोधित होते हैं कि कोई भगवान की सेवा में अर्चन लाता है
और
जब कोई भगवान के भक्तों के ऊपर अतेयाचार करता है, तब हम क्रोध कर?
कुछ दिनों में आप,
कुछ दिनों में ही 22 तारीख को विद्या सी मनाएंगे।
तो गाँव बोला है।
नितारा का जो जगाए बदारकर लिया है वो बहुत ही प्रसिद्ध है। चित्र ने वहाँ भूल ही भक्तों को बुलाया और कहा जाओ गरगर्दपचारकरने जाओ।
जो
स्वागत किया, कई घरों में वो गए और उन प्रचार किया, स्वागत किया,
कई घरमें उनको गाली, कई जगहों पर
उनको गाली भी मिली।
साधु आ रहे हैं, आ गए है
सा कहा के चूल साधू के वेश में।
तो ये पूछने, तुझे ये
वित् से पूछा, इस शहर में, नदी में सबसे पतित व्यक्ति कौन है? हरिदास में दित्या से पूछा पता था
भगवान?
दोनों को मालूम था की चेते महा भगवान है।
भाई दाम में बन रहे हैं।
लोगों ने बताया कि हमारे शहर में 2 भाई हैं, जो ग्राम कूट में जन्म लिया था। लेकिन आज सबसे बड़े पापी है। तो दोनों ने सोचा नितनलकोलिदरसागुने के दोनों भाइयों को प्रचार करे। जब दोनों भाइयों को प् प्रचार करने गए तो वो शराब के नशे में गए तो दोनों ने गाली बोल के ठाकुर को बता दिया और धमकी दिया कि फिर से इस इलाके में कभी बताना
पर जाओ।
जब आप को मालूम हुआ, उन्होंने कहा, आप दोनों वापस जाओ। 4 के जब दोनों वापस गये तो मधाएथेएक जोर से पत्थर फेंका वितरन के ऊपर के माथे के ऊपर छोटा भगवान
यानी है
तो भगवान अंतर्यामी है। जब उन्हें पाला हुआ, वो तेजी से गए और उसी स्थान पर नाम बताने के वितरण लोगों को पत्थर मारता अपना सुगर सिसक रहे थे। ऐसे तो चेक मा भूल हमे हरणादबीसुदीचीन की शिक्षा दी है नम्रता की
महा भू
पर। तो भू इस अवसर पर विरोधित हो
गया है, निंदा कर रहा है। कोई अपने
है तो आध्यात्मिक क्रोध जो है वो जब कोई भगवान की निंदा करता हो, भक्तों की निंदा करता हो या कोई प्रचार के कार्य के अंदर अर्चन, तब आध्यात्मिक क्रोध होता है? अनेक कारण है, अनेक कारण है। तो ऐसा अनेक कारण है। लेकिन हमें बहुत ही क्रोध से बचना चाहिए
ुछ
अब आपको सुविधा नहीं मिले तो बहुत ही क्रूर से बचना चाहिए। तो तीसरा उद्देश दिया विश्वदेव ने के समानता के साथ धन का उपयोग करना चाहिए
को
सभी को अपनी आवश्यकताएं प्राप्त होनी चाहिए क्या? लेकिन आज कल हम समाज में क्या
देखते हैं, धनी और धनी बन जाते हैं।
जो धनी व्यक्ति है और धनी बनते जाते हैं। ठीक है, सही है विश्व की 90 परसेंट सम्पत्ति जो है वो टेन पर्सेंट लोगों के पास है। तो विश्व देव जी ने कहा सबको इक्वली रिस्ट्रियूशन। पहले 1 सिद्धांत था कम्युनिजम, कई देश कम्युनिस्ट थे सबको, तो वो सिद्धांत के सब चीज सरकार की है। और सबको इक्वली बांटा जाएगा या नाइंटी सेंटी। जब प्रोप जी रशिया में गए थे नाइनटीन सेवेंटी वन में, वहाँ पर बहुत फेमस प्रोफेसर था। चोकसी कोटोक्सी लेकर।
काफी गहरा ज्ञान था वैदिक का,
उसको ज्ञान था। वैदिक सा
तुम क्या दे ती है। विधायक में।
भगवान कहते है हर चीज बराबर बढ़ना चाहिए असल में, लेकिन सारी संपत्ति भगवान की उतना स्वीकार कीजिये जितना आवश्यक है। आगे भोपाजी ने कहा साधा। विश्वदेव देव ने बताया कि साझा जीवन
बिताइए
हमारा सिद्धार्थ है। सादा जीवन, उच्च विचार,
मुझे,
आप चाहे किसी भी आश्रम में हो, गरमचारीआश्रममें हो या में, तो भी सादा जीवन बिताने का प्रयास करना चाहिए। जीवन, सादा जीवन, उच्च विचार का क्या, उछ विचार का क्या मतलब?
हाँ
हाँ, उच्च विचार का मतलब क? कैसे हम जीवन का लक्ष्य प्राप्त कर
सकते हैं, हमें करना चाहिए।
हमे आधात्मिक मांग को स्वीकार करना चाहिए।
यह है, यह है उच्च विचार।
बहुत ही बता में क्या सिद्धांत है
जीवन, ऊँचा जीवन और सादा विचार, उच्च
जीवन और सादा विचार ता का नियम है।
हम रहेंगे है। राजा,
हम रहेंगे। राजा जैसे
विमान
चाय, हमें कोई बेपानी करनी, पड़े चापलूसी करनी पड़े। लेकिन लरेंगे राजा जैसे ये बताएंगे ज्यादा सफल है।
हाँ ये बताएं।
हाँ, ये बताएंगे की हम आपसे ज्यादा सफल है,
हम निशार है, वो है कि मोल सा। तो
मोदी जी। यह विचार है कि हम बहुत सुविधा ज्यादा से ज्यादा प्राप्त हो।
सादा जीवन बचाओ।
विश्वदेव ने जिस मार्च को कहा कि सादा जीवन बिताइए और आगे कहा कि जो नेता है उसे प्रजा की सभी आवश्यकता पूर्ण करना चाहिए।
ऐसा है
हर व्यक्ति की आवश्यकता पूरी होनी चाहिए। आप देखते हैं शास्त्र महाराज वेन के समय रजा अत्यंत दुखी थे
को रुकवा दिया था।
क्योंकि उन्होंने सभी प्रकार के रियों को रुकवा दिया था।
जो
जो सागर सुख गए थे, पेड़ों में फल नहीं थे और जमीन से अंदर नहीं निकल रहा।
तो प्रजा
सभी प्रजा बहुत दुखी थे। नहीं। जब उनके बेटे हुए तो उन्होंने कहा परम भगवान के नाम का उपचार करो, उसी से सभी सुझाए, रोटी, कपड़ा, रोटी, कपड़ा, म सब कुछ
जिम्मेदारी बनती है।
तो कहा कि आपकी जिम्मेदारी बनती है कि सभी की सभी आवश्यकता पूर्ण हो
तो द्वारा खाना चाहिए।
आगे उन्होंने कहा अगर हम संतान पैदा करे तो केवल विवाहित पति के पति से ही संतान प्राप्त करना चाहिए।
जीवन कैसे।
इस विश्व ने बताया कि किस प्रकार से आप साधारण जीवन में इसको अपना सकते है। किस प्रकार इन नियमों का पालन नहीं करना चाहिए।
समान अगर ये नियम का पालन करे नक्शा।
या अगर हम इस नियम का पालन करे तो भारत का नक्शा ही अलग होगा। आज विश्व देव जी का जन्मदिन है। बडे हरि, बाडोली, बाडोली मंदिर ऐसी कौम पर जुड़े हैं जो बाडोली मंदिर से
जुड़े हुए
सूरत मैं, गाडी ने,
ओके क्या क्या
महाराज की। सबसे विनती करते हैं कि आप सब जुड़िए इस मंदिर के साथ में गोरा हूँ।
मंदिर में
हर रविवार को मंदिर के अंदर आइए
तूफानी
जैसे भक्तों की संख्या बढ़ेगी। भगवान पिपा करेंगे
जी रहे हो। प्रयास करना है की
हम सब भर्ती के रास्ते में आप लोग जुड़े हुए हो तो प्रयास करना विचलित नहीं होता है। क्षेत्र ने महामुने क्या कहा साधु संग भक्तों की संग का लाभ भरी श्रेणी के भक्त होते हैं, बी श्रेणी के भक्त होते हैं। पहला है जो आपसे ज्यादा उत्तम है के बराबर है। दूसरा वह जो आपके बराबर है। तीसरा जो आपसे कम ज्ञान है। नरेंद्र। मोदी इन शिक्षाओं का वर्णन करते हैं। भागवत के चौतीस खंड में जवाब
न।
तो पहला है कि जब हम हमारे से ऊपर के भक्त उत्तम बक्से मिले तो हमें पसंद न होना चाहिए।
बादल देखता है, ना है।
उसी प्रकार जैसे मोर बादल बारिश के सीजन में बादलों को देखता है तो वो नाचता है। वैसे ही उत्तम भक्तों को देख के हमें पसंद होना चाहिए। दुलूमहाराजाने बड़ी तपस्या की थी, जिसके कारण भगवान प्रसंन हुए थे।
जो क्या।
तो भगवान ने कहा मैं आपकी तपस्या से प्रसन्न हूँ, माँगो आपको क्या चाहिए। तो दुबारा ने कहा कि आप मुझे वर देना चाहते हैं। ऐसा वर दीजिये कि मुझे हमेशा भक्तों की साथ बात करू। उत्तम वक्तों का संग और वो वक्त जो हमेशा कृषि कता की ही चर्चा करें। दूसरा। जो भाव हमारे समान होता है, उसे क्या व्यवहार उनसे क्या व्यवहार होना चाहिए? हमारा मित्र, उसे हमें मित्रता रखना चाहिए। मित्र का भाव है, मित्रता का भाव रखना चाहिए।
हमारे े
साथ में सोचे। कैसे हम भगवान की सेवा कर सके? कैसे भगवान आगे बढ़ा सके?
आप से कम ज्ञान के व्यक्ति को मिले, उसके प्रति क्या भाव होना चाहिए?
जब आप अपने से कम ज्ञान के व्यक्ति को मिले तो उसके प्रति क्या भाव होना चाहिए? दया का भाव
हम कैसे।
दूसरे शब्दों में ये भाव के कैसे हम इसका उद्धार करें। गोपाल जी वृंदावन में दे, उनको हर प्रकार की सुविधा थी, नदादामददमंदिर के वो निवास करते थे। पर पर पपाजी ने क्या सोचा कि विश्व में कितना क्लेश है? तो मुझे महाभोग के संदेश को लेके। उन्हें विश्व का क्लेश घटाना चाहिए। तो पाजी 70 साल की उम्र में, जो 50 साल में अमेरिका, निकले, जहाज में रूम को 2 हार्ड डेटा है। 2 पाजी सोचा की मेरी योजना शायद सफल नहीं होगी। उन्होंने सोचा शायद मुझे इंडिया वापस आना होगा।
र
भगवान सर्दी में आये गोपाल जी के और कहा गोपाल तुम्हारी योजना सफल होगी। शीचोपाजनेकससुठाया समाज के सुधार के लिए। आज हम देख सकते हैं भोपाल की कृपा से पूरे विश्व में आज कौन है, कोने में हरी नाम का उचारण हरा है और हर विश्व की वैश्विक भाषाओं में हमें गीता और अन्य वैदिक प्राप्त होती है। आप कहेंगे, हमारे अंदर तो कोई दया की भावना नहीं है, लेकिन हमें शब्दों की वाणी में विश्वास रखना चाहिए। यह नहीहै। ऐसा नहीं कि हर बार हम बहुत गुद्दी से भी सोचे और काम करे। तो साधु संत करते रहेंगे। तो हरी नाम की महिमा का ज्ञान प्राप्त होने है। हमारा सतत प्रयास होना चाहिए कि हरी नाम के हमारी रूचि बढ़े बढ़े। अगर हमारी हरीराम के प्रति रूचि बढ़ेगी, तो माया के प्रति हमारा आकर्षण। यह सबसे महत्वपूर्ण सेवा है।
कई बार,
कई बार वो पूछते, हम क्या सेवा कर सकते हैं? हम कहते हैं, हरिया का उच्चारण करो और श्रीमद भागवत भवन विता का अध्ययन करो।
1 सेवा है।
जैसे हम कहते हैं कि वितरकन 1 सेवा है और उसको पढ़ना दूसरी सेवा है। सिर्फ भोपाल के ग्रंथ पढोगे। तो क्या मिलेगा?
क्या आपकी बुद्धि तेज हो जाएगी, आपकी
बुद्धि ज्यादा तेज हो जाएगी, तेज है। अगर आपकी बुद्धि तेज है, तो आप सदर माया का विरोध कर सकते हैं।
क्या काटना ज्यादा
तेज, कातू से तेज, चाकू से काटना ज्यादा आसान होता है। जो उनका चाकू है, उसे काटना मुश्किल होता है। धीरे कटता है। तो उसी प्रकार चाकू की कराह में हमारी बुद्धी को भी तेज बनाया है। 1 ही उपाय है, उसका 1 ही उपाय है। सरवर के यह 2 सबसे आवश्यक है। अगर आप भक्ति में आगे बढ़ना चाहते
है, भर्ती से जुड़े हो,
आप सब से जुड़े हो, तो आपका प्रयास होना चाहिए कि आप सब सफलता प्राप्त करे। हमारा सौभाग्य है कि महान आचार्यों की व्याख्या बहुबाली ने अपने पुस्तकों में अंग्रेजी में अनुवाद किया और उसके बाद विश्व की सभी भाषाओं में भी यह पुस्तकों का अनुवाद हुआ।
स्वयं पर खबर है।
अगर आचार्य के ग्रंथों को हम स्वयं पढ़ने जाएंगे तो वो समझ नहीं पाएंगे सिर्फ। बहुपालजीनेअपने पुस्तकों में सदर और शादी भाषा व्याख्या को प्रस्तुत किए है।
पढ़ना चाहिए
हमें सिर गोपाल जी के पुस्तकों को पढ़ना चाहिए और उसका प्रचार भी करना चाहिए। सब मिलकर प्रयास करोगी भूकाआंदो और भी
के प्रति
जब से राम मंदिर बुलाए तब की लोग बस लोगो की भक्ति के प्रति सदा बड़ी है।
सबसे ज्यादा
श्री राम जी के मंदिर के उद्घाटन को सबसे ज्यादा विश्व में प्रसिद्धि मिली है। विश्व में कोई भी चीज का इतना पब्लिसिटी नहीं मिला जितना राम मंदिर को मिला अरे लेकिन जय श्री राम कहना काफी नहीं है। केवल हमें फूल 4 करना
हरे
राम
के की को समझना चाहिए और लाभ
और कृष्ण के इस उपदेश को हमें समझना चाहिए। जो लाभ राज्य का जो सुख पहले प्राप्त हुआ तो वो आ आज भी प्राप्त हो सकता है। राम राज्य का जो वातावरण था वो सभी लोगों को बहुत ही पसंद था है। फर्जी कहते है की कलयुग में भी हम सत्युग का वातावरण पैदा कर सकते हैं। अगर हरी नाम का उच्चारण हो तो हरीराम का उच्चारण कीजिये, जारी दि को तारीख को की 34 और हरीराम का प्रचार कीजिये। आज हम विश्वदेव की प्रार्थना कर सकते हैं। क्यों की कृपा प्राप्त हो और उनके उद्देश्यों का पालन कर सकते हैं। अरे गोवा 1 या 2 प्रश्न माया दे सकते है। आपको किसी को कोई अच्छा सवाल हो बात उठा के माता जी से पूछ सकते है। शंका हो पेश। आपको पता है। प्रभु जी महाराज में परिवार के बाद बनता है, भक्ति में, परिवार को बता
बनता है, परिवार ही हो।
परिवार तब बात करता है जब वो उनकी खुशी कॉम्परोमाइज होती है, उनकी रुची नहीं होती। यह बात सच है की जब हम भक्ति में जुडते हैं तो कई लोग विरोध करते है।
नोकरी करो पैसा का साल कहेंगे नौकरी
कर पैसा कमाओ ये क्या साधु हो।
उनका यह भाव है,
उनका कहना है की भक्ति करो लेकिन अभी नहीं, बाद में जब आप बूढ़े हो जाओ, सब अभी पैसे कमा
बुरे लंगड़े
है। जब आप दे, बूढ़े लंगड़े हो जाओ तब बरबाद का नाम लेना है। अगर किसी खाना में बन जाता है तो उसकी 10 पीढ़ी तक उसका उदार हो जाता है। शुद्ध बात बनता है।
ओके, कोई नई चीज नहीं है, यह
कोई नई चीज नहीं, हर भक्त के जीवन में होता है। पहला, भारत के पिता ही कशिपुने भी बल्लाल बालक की भक्ति का विरोध किया
है,
लेकिन वह काफी थे। डिटरमाइंड से भक्ती करने के लिए
मन में हमें होना चाहिए।
तो इसी प्रकार ला महाराज की तरह हमें भी के मन में होना चाहिए। ूपगुसवामेंउदेश्य कहते हैं उत्साह। इससे हमें भगवान की भक्ति उत्साह पूर्वक करनी चाहिए। औंधरीडहोकरएक और पेशन माता जी दे सकते है, माता की, साइड माता जी, माता जी की। हालांकि हम डिस्कशन में जाते हैं तो कई लोग देखते हैं कि आप किस ऑन की बुक्स में ब्रेंट क्यूँ नहीं है। गीता प्रेस की बुक में सबने प्रिंट होते हैं। तो आप ये प्रिंट क्यों नहीं है
मेरे लिए। मेरा में लाखों
हम जो भगत गीता देते हैं, वो दान में देते हैं। अगर किसी के पास में भी देते हैं, किसी के पास कीमत नहीं है, लेकिन वो श्रद्धा मान है तो थोड़ा कम कीमत में दे देते है। अयोध्या के उत्सव में स्कॉ के द्वारा लाखों बहुत गीता। इस प्रकार ऐसी वितर होगी। धनवाली पेशन बोर्ड ओके हर हाल नामरामारारे।
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