श्रील रूप गोस्वामी और गौरी दास पंडित तिरोभाव दिवस | 19 Aug 2021 | Surat |Srila Gopal Krishna Goswami

The video is a devotional lecture delivered in Hindi on the occasion of Tirobhava Diwas, focusing on the lives and teachings of Shri Rupa Goswami and Gaura Das Pandit. The speakers emphasize the supremacy of bhakti (devotion) over mere ritualistic actions, explaining concepts such as nishkama karma (self‑less service), the importance of sanga (association with enlightened devotees) and guru guidance, and the pursuit of true happiness through spiritual discipline. Scriptural references from the Bhagavad‑Gita, Bhagavata‑Purana and other Vaishnava texts are woven into the discourse, illustrating how devotion leads to divine realization. Moral conduct, ethical living in the present age (Kali‑yuga), and practical advice for daily practice—such as remembrance, service, and cultivating a compassionate attitude—are presented as essential steps for aspirants. The talk repeatedly uses metaphors (e.g., the weakening elephant, the fish out of water) to illustrate the consequences of neglecting devotion, and concludes with a call for sincere, self‑less devotion and adherence to the teachings of the saints.
Chapters
हर राजहरा जला व हा जलवाला ओिजालावालाभायाररा ग हरि जायगा जब हा हा र गोला झोलगल का मगदीहाबललचा alvaयलव जय भोले चला राधा सिवा शरीर, ये हो पाया राधा व प्यारा करमेका
हे
राम ले रालर हरे रामा रामा रामा ह हाशा रेखा हारे का
रा
हर हर रावानमारबा हर हा रमाला आने से सारे राम
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हारे हारे हारे हारे हारे राम रा हे
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रसो मदीनानगर गर गोकुल राजन कार रस मदिरा आ 2 बजे आया, जब वे गा
रे
गा या भय या भया
को
को बहु बग ग ह हर हर
सब
भक्तों का हार्दिक स्वागत सो। आज 2 महान संतों का तीरbाwहैसंशेेहम उनके विषय में थोड़ी चर्चा करेंगे, उसके पश्चात भगत ओम भगत वासुदेवा से ओम भागते वासुदेवाय सेवा। तो आज कौन सी संतों का तीरभावहैकन बताएगा कौन और mega
a a a a
ud स्वयं पाक रावन राजे बंदे हम पी गड़ो पीरलाबलगमशहमसब पीर पमसगाजजसहागररदल दम दम देवम कम सूत से देवम
धा
कृष्णा पद हे कृष्णा करुणा सिंधु जीन दे
राधे
का सा कि सिंधु by bach jai shri krishna है। हाल सारे कुसंशीभाषमे प्राप्त होता है। 1 है अमीर भाव दूसरा है और शाम भरते हैं। दोनों ही उस को न मनाते हैं। अभी अभी बाव है। जब वह साल प्रकट होता है
और
उनके प्रकट होने के विषय में पढ़ते हैं, तो 7 दिन की ना की बीच चर्चा करते हैं। और त्योवभावकाअर्थ है वो और प्रकट होता है। तो आप पूछोगे जब प्रकट होता है, जब कोई आदमी किसी का ध्यान होता है, उसका तीरभा क्यों करते है? कयोंकि जो संत है, वो अविभावतिवभावकरते है, मार इच्छा के अनुसार। और अगर आप इस पीसी पर अभिभावक है, विभाव है, सेवा के आ जा रहे हैं, तो इसलिए दोनों ही का उत्सा बना दे। आप सब विशाल कैलेंडर है, उसमें यह लिखा, आपको उसके अनुसार उसका पालन करना चाहिए। तो आज है, आप सब रूपस्वामी से परिचित हो। यू वैसे भागते हैं, जो गोरिया वैसा सिद्धांत के अनुसार चलते हैं, उन्हें रूप लुगा कहा जाता है। आपने सुना रूप रोग क्या है? जो कि रूप स्वामी की शिक्षा के आधार पर चलते है। तो हम जो भी उपदेश दे रहे हैं, पापा ने जो भी उद्देश्य दिया, वो है यूपगुस्वामीकी शिक्षा के आधार पर रूपगुस्वामीने क्या शिक्षा दी? उन्होंने कोई नया धर्म पैदा किया, उन्हें वो ही शिक्षा दी जो उन्होंने प्राप्। और इस प्रकार परंपरा को 5 साल पुराना जी तक ले जा सकता है। ये 5 भाई है छोटे भाई और कौन अनुपम और 2 होते हैं। 3 बाल 33 की चर्चा होती है बाकी, 2 बिलकुल चर्चा नहीं होती है। तो ये इनका जन्म हुआ था। ब्राह्मण खानदान है वो करना में और फिर वो बाद में। तो सा दिन भगवत कैसा करते थे। और समाज में उनका इतना आदर था कि दूर दूर से लोग आते थे, उनसे शिक्षा स्वीकार करने के ले और सब उन्हें आदर्श देते थे। तो उन दिनों में बंगाल में मुसलमान राजा आ गया, जिसका नाम था ुेंशाwसेnशाएक समय बड़ा गरीब था तो चापरुसीकरके राजा हुआ और वो राजन धिकारियों में तेज था तो गुसेंशाने सोचा अबादी तो हमारी नाइंटी नाइन प्वॉइंट, नाइन परसेंट हिंदु है और मैं राजा हूँ मुसलमान तो मुझे कोई ऐसा विधि चुनना चाहिए राज्य के लिए जिससे पूरा समाज जाता है। तो उसने लोगों से पूछा आपके समाज में कौन है? फिर सब मानते हैं। और हमने कहा ये लो भाई उनको समाज बहुत आदर देता है क्यूँ? क्यूंकि ये 2 भाई हमेशा समाज के सुधार का कार्य करते हैं। और दिन भर भाग के ध्यान में। तो राजा ने सोचा इन 2 व्यक्तियों को जोड लो अपनी सरकार में, मेरा काम ऐसान हो जायेगा, आज सूचना मिली कि मैं चाहता हूँ तो मेरे राज्य में शासन कर। उन्होंने कहा भाई तो इसमें कोई रुचि नहीं, हम तो सारे ब्रामण है,
रुचि
है केवल भजन में to
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लोग जिम्मेदारी नहीं स्वीकार करोगे ब्राहमणों को बहुत कस जाऊतो ब्राहमण की सुरक्षा के लिए रु होंगे। बाइक तैयार हो गए राजा की नौकरी करने के लिए और 2 का बहुत ऊंचा पर था और ने बहुत अच्छी रकम भी मिली थी, मुसलमान नाम दि raja जाता था दूसरे राज्यों से युद्ध करने के लिए july महाप्रभु की स्वयं भगवान हैं, राम है, वो जानते थे मेरे 2 प्रिय भक्त केली आज बंग्लादेश में है, बांग्लादेश में है, उन्हें मुझे मिला तुम ब्लूपर्स जाओ सूचना मिली कि महा प्लग भरे हैं हम अकेले में, तो वो बड़े समाज को इतना आदर देता था। तो महाप्रगुसेमिले रात के समय को जान। तो bhot strow buntstrooa बड़े साथ प्रणाम किया। उन्होंने कहा कि आप जो हो सबसे दयालु हो, तो रपगुसवमीनेआप लोगों से कहा की मैं ये नौकरी छोडकर आपके साथ चलना चाहता हूँ। भगवान ने कहा आपने थोड़ी देर तैयार और उन्होंने 1 उदाहरण दिया ोगरापाजीइसका उपयोग करते हैं भगुजीताकीभूमिका कैसे पता का उदाहरण था, मैंने कई बार क्लास बिल्कुल ठीक, उन्होंने उदाहरण दिया रिवाइस भी प्रेमी हो तो बड़े, ध्यान से कार्य करेगी तो मन में क्या सोचेगी हमें जाकर प्रेम तो थोड़ी देर हो जाओ, क्या जागा थोड़ी देर के बाद से गए और और जब सरकारी नौकरी थे आगे उनके पास इतने सोने के सिक्के थे, ये पूरी ना भर गये थे, ना भर गई थी किसके साथ, किसके साथ सोने कि पूरी नाक भर गई थी। तो उन्होंने कैसे बांटा उन्हों cाspossmibadiकिे गुलाल जी नहीं होता राज्य के समय राम, सारे, गहने सब मामलों को पालती थी और ब्रामणो ने स्वीकार किया और और फिर लौटा लिया। उन्होंने कहा आपके कृपा के कारण अमध्यनसूचे आज से है वापस तो 40 पर, 25 पर्सेंट का रिश्तेदारों के लिए, वह 25 परसेंट mergence to a sua mili pread और त्याग भी थोड़ी देर बाद उनके 22 और जब राजा को पता लगा कि संसाधन 1 महीने से दरतनहीआया राम थे नबी खान और शकर मरेगा, तो जब उनको पता लगा कि 1 महीने से दफ्तर नहीं आए तो राजा ने डॉक्टर को भेजा देखो क्या इसकी बीमारी है? डॉक्टर वादिया रात के तुम्हे क्या देखा fisbramnउनके साथ बैठकर भागवत का ध्यान है, वो चारो तरफ भागवत तो राजा है का
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वो तो बिल्कुल ठीक है। br br भाई छोड़ो बिल्कुल पोंसफलथानेनौकरी छोड़ दी और तुम ही छोड़ तुम छोड़ोगे मे राजा किसके हाथ छू डोगा, जब कोई रुची नहीं है, नहीं होगा तुम राजा ने क्या कोई जेल में डाल?
2
थोड़ी देर बाद को। 1 पत्र प्राप्त स्वामी ने कहा कि वे तुम्हारी आवश्यकताओं के लिए 10 हजार सोने के सिक्के छुडाया बनिये बाद तुम से सुनातरजेनमेंथा तुम पत्र सनातन जी मैं छोड़। 2 राजा कहना कि गया था
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करने और डूब गया। और दिल ने कहा तुम तो इतने प्रसिद्ध ये का री हो, कैसे छोड बाद छोड़ दिया 10 हजार सोने some booty mhtvpurn ia वृंदावन भेजा कि उन स्थानों को खोज की पर भगवान ने अपने वे वृंदावन जाते वो तुरंत आपके गाइड कह देते हैं ये रिया? ये सब रिसर्च किसने किया था? और भक्ति सम्बंधित और बंध का निर्माण, बंधों का निर्माण में 10 mene इतने ग्रंथ हैं जो आप देखते हो सब निर्बल है। उस में next deबोsnलगोकस्मीनी और ड्रामा और नेकर डिवोशन हिंदी में प्रकाशित हुई थी। भागती सिंधु के नाम पर को रिलीज कर देते हैं। उन्होंने कहा this is a lafofofthecrishnacons moment evryबonyोहमारे। भक्ति के जो कानून है काम, प्राप्त होते हैं इस ग्रंथ, इसलिए सबको बहुत गहरी। उन्होंने कहा भगवान अनेक योनियों में गुजरने के पश्चात उ भाग्यशाली व्यक्ति है जिसे भगदिाबीपह भक्ति का बीज प्राप्त होने का अर्थ है ये ज्ञान। भक्ति योग सबसे आवश्यक है यह ज्ञान कि परंपरा। तो अनेक योनियों में के परचार भक्ति का ज्ञान मिलता है। और यह ज्ञान कैसे मिलता है। 1 है बक साधु के वार को हो जो की या ग्रंथों के दौरान आप वृद्ध बाद से हो। पढ़ कर ये ध्यान मे होती है तो अनेक में भाग्यशाली व्यक्ति है। जैसे क्या प्राप्त होता है भागती।
अब भागते बीज
उपयोग कर दिया गया। बीज का फैला कैसे होगा? ओह, तो अब क्या करोगे? पानी पीना। जैसे बंदे सामने बगीचा में फूल उगते है पानी बुलाते। तो उन्होंने कहा बापू भक्ति का ज्ञान तो तुमने प्राप्त कर लिया पर इसका आपने पूरा लाभ नहीं उठाया। बगदी बीच को उगना चाहिए और कब होगी? जब तुम उसे पानी पिला तो पानी पिलाने की तुलना की जाती है। न। राज महाराज के पिता उन्होंने के अध्यापक से उन्हें बहुत डाँटा। मेरे बेटे को खा विश्णु का ज्ञान है जो मेरा दुश्मन है। तू ठीक से कार्य नहीं कर रहे। तो हमारे कार ने कहा हम लोग br हमें ऐसा दोष मत करो, हम दोस्त है घबराओ मत, हम बेटे को सुधार दे तो दिमाग हमने को बदल लिया है। brenwosदातोेकोgol
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scul me कौन सी देब सबसे महत्वपूर्ण अपराध ने क्या कहा श्रम पा भक्ति का न? तो चेतन मा ने कहा ये जो भक्ति का बीज है, ये लगेगा केवल जवाब सोनम करोगे हो, शोनबकेतरमनहीं करोगे तो बीज नहीं होगा। और अगर आप करोगे ध्यान से करोगे तो जो पूरा लाभ मिला के जनम आवश्यक है। अगर आप चाहते हो भकतीकभीहोगेफिर। आगे उन्होंने कहा भकतीअभीतुम पानी बुलाओ, अपने आप को भक्तों के संग में रखो। उदाहरण दिया जैसे कोठी बनाते है तो आप फेंसिंग दीवार भी बनाते हो। आपके बंदर के क्यूँ को क्यों ना की कल से अन्दर नहीं आ जाए। और जितनी बड़ी कोठी जितनी बड़ी दीवार, उन धनी व्यक्ति है, उतनी दीवार बना है। जो धनी है, उन्हें ज्यादा चिंता रहती है, है कि नहीं? उनको दीवार क्या लेनिकफेंसिंग? तो बाप ने कहा कि हमें भक्तों के संग में रहना चाहिए। क्यूँ के संघ में रहोगे। तो आप ज्ञान सुनते हो, साधु साधु संघ ला।
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आगे उन्होंने रूप को हा कि ये जो सुन्दर बगीचा है, भक्ति का,
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नष्ट हो जाएगा। अगर पागल हाथी को आप बड़ा सुंदर बगीचा बनाते हो तो पागल हाथी आता है। क्या कहता है? तो उन्होंने यह उदाहरण दिया, ये साबित करने के लिए है। क्या भक्त भक्ति के रास्ते में हो कि अगर तुम अपराध भी कर रहे हो। क्या होगा आप भक्त? इसलिए आप सांसो में पढ़ते हो। कई साल में यह कहा जाता है। वैन अपराध से बचो, अपराध से बचो और बड़ा गहरा उदाहरण दिया माता के साथ। मापुबकीबाताथीसचमादा उनके मन में थोड़ा क्रोध रहता था। किसके प्रति है। वो सोचती थी, यह दुविधा छाया जो है, डुपीकेामीहै खेल, 1 बेटे को भगा दिया। अब सब पर दया पर अपराध किया। और क्या था अपराध तो 1 दिन जब भगवान के प्रणाम कर रहे थे और 4 महिमा का की चर्चा हुई थी, प्रणाम कर रहे थे, उस जीवन क्या क्या पीछे से आकर लेकर अपने सिर में लगा दे। मापने देखा माता ने माफी मांगी है। तो फिर उन्होने का अब ने कृष्ण तो यह उद्धरण दिया जाता है कई बार और अनेक और उदाहरण है। तो हमें भक्ति के महा में किससे बचना चाहिए? भगवान तो हर चीज बचेंगे, फिर क्या होगा भक्ति भाव रूप कुस्वामी अनेक ग्रंथ लिखे और ड्रामा और बाबाजी 2 किताबों, बालवाली 2 किताबें और बकी कितने बाप ने आदेश दिया था बंधू का निर्माण करो। तो रूपक स्वामी ये अच्छा बेटी सो। रूप स्वामी वृंदावन में आये तो उन्होंने उन्हें 1 बालक मिला जिसने कहा संत क्या कर रहे हो गुरु पगुसमीनेकहामैं सा उन सार को ढूंढ रहा हूँ। यहाँ मैं भगवान का मंदिर बना था, तो उस बालक यहां 1 पहाड़ की चोटी पर 1 स्थान है, रोज, 1 गाय आदि है, दूर पिला दिए है और ले रोज 1 ही एग्जैट प्रभावित हुए। अगले दिन वो खुद आये देखने के लिए, उन्हें देखा, वह गाय उसी 1 साल में आती थी रोज और उस साल को ऊपर पहुँचकर गायमतरकरतेथीरoज। रुको का इस हाल के पीछे पूरा ध्याद्मिक इतिहास हो गा खोद कर देखते है। अंदर क्या है जब उन्होंने खोदा क्या देखा। बहुत सुन्दर है 500 साल 600 साल पूर्व उत्तर भारत में मुसलमानों का राज्य शुरू हो गया था, और जो मुसलमान थे है उन्होंने सारे हिंदू बंधू को या दिया या पुजारी ने क्या क्या क्या क्या। कई पुजारी तो बिगड़ा को लेकर जयपुर चले गए जयपुर में। उस समय हिंदू राजा का ने खोद कर मुर्दों को छुपा दिया। पर गोपाल को क्या कहा था खोदकर छुपा दिया ा वाल। पर इस साल में कोई प्रसिद्ध का खोला बहुत सुन्दर है गोली मूर्ति और फिर उन जा इसकी स्थापना है। तो राधा गोवटी का मंदिर। आप सब जानते हो कहाँ है और वो मूर्ति जयपुर में, बोले जयपुर में और पापा जी ने कहा है जयपुर में राधा गोजी का मंदिर है, ये इतिहासिक है, उसके ड्राइंग है बड़ी यूनिक है तो रूप स्वामी की प्रेरणा से यह राजा गोविनी बंदर का उसकी स्थापना हुई थी। पहले तो इसकी स्थापना बंदा में हुई थी और पहले वो 7 मंजिल का बंदर 7 अकबर ने कहा जाता है अकबर कैदाबदानातेथेरगुसामी से शिक्षा लेने गए तो अकबर में देर रूपगुसामीकामादा बंधन बनाने के लिए और उसकी 7 राजा हिंदू को वसा को प्यार किया। तो ये राज गोमजी 7 मंजिल का था े तुडवा दिया अब 1 मंजे का है। तो फिर जब पुजाइयो खतरा होने के
का
रूप और सनातन जब राजा के शासन का राज्य कर रहे थे, उनके बाद हर प्रकार की सुविधा थी, जैसे आप को कहा ने की जब उन्होंने सोचा ये नौकरी त्यागी, उनके पास पूरी ना भरी हुई थी सोने के से सो उनके पास किसी चीज की कमी नहीं थी। जब वो वृंदावन का मधुकरी करके मधुकरी मधुमखी फूल फूल पर जाती है, थोड़ा सा मधु लेने जाता है इसे पूरा करेंगे। यह नहीं इतना मांगो की आप घर में ट्रंक भरते जाओ, मांगो जितना आपके पेट में ये साधू तो रूपक सोने की इच्छा थी के मुझे अपने गोंद मूर्त उरगा के लिए खीर बनानी चाहिए। पर उनके पद के पैसे तो थे नहीं जो आता था चंदे में काम जैसे लगते तो मेरे के लिए क्या किया जाए कि बनाया जा। तो जैसे वो निकले घर से 1 बहुत खूबसूरत लड़की आ गयी, चीनी लेकर दूध लेकर भई मेरे ख्याल से तुम अपने विग को अच्छा भोजन खिलाना चाहते हो तो बड़ी खुशी के साथ खीर बनाकर, गोंद हो। तो थोड़ी देर बाद वह आ गए वो भगवान को दिया अपने भाई को अलग अलग साल में 4 करे प्रचार के समय पर को बड़े भाई को फिर से आई कोई सुधार व्यक्ति के हाथ की नहीं है, मेरी इच्छा थी भगवान से की सेवा, मे राधारानी चापलूसी करके तुम्हें यह प्रसाद दे गए है में बिल्कुल नहीं मांगना तो उसके पश्चात कभी कभी नहीं मांग। पूरी को पता लगा की वो गुबारा जो उन्हें दूध है वह भगवान से तो जो भक्त हैं हज करके जिस काम भाव से जुड़े हैं, उनकी क्या इच्छा रहती है वो कुछ नहीं मानते। तो आज की
किया
तो आप सब को, आप सब का दूसरा क्या है। सुधार के बगुस्वामीकीआजएकऔर महान अति के साथी थे और उनका बड़ा स्नेह था, रूप बड़ा था और सन्यास लेने जा रहे थे। तो सन्यास लेने से पहले कई प्रसिद्ध भत्तों को मिले जिनमें 1 से body बोडीज मैं सन्यास लेने जा रहा हूँ, गुरीला नहीं। अब सन्यास कैसे लोगे? सन्यास लोगे तो जी नहीं पाए। गोल की मूर्ती थी। गुदा होने को ले है ये मूर्ति की पूजा करना। वे मुर्दीऔरमेरे में कोई अंतर नहीं है, मुर्द मेरे में कोई अंतर नहीं है और वे नाम में मेरे में कोई अधनी है। इस प्रकार गोरी दास को उन्हें उद्देश दिया और गोरी फोन भक्त थे।
और
भगवान जैसे जनता के साथियों में करा जाता है। तो आज उनका गोणीदासपंदरकी get so sngsipehayeshian bagudmka is a you have so hindi है। सोने में वादी पढ़ेंगे, अनवार पढ़ेंगे, सीधा
संवाददाता बाद भी मनुवाद इस प्रकार है आप बोलिए भगवान की महबूती उ्शुधभक्तोंको होती है। जो भक्त युद्ध की दीदी स्थिति में रहकर धालपुर करते है, वे अक्रषित सुख के दाता और दिव्य लोक के स्वामी हैं, अतएव वे उन्हें नमस्कार कर। वजीर की समर, स्तुति के द्वारा आठवां स्थान और तीसरे अध्याय का ग्यारहवा स्तान है, ातप्रीयइस्प्रकार है। जैसा कि भगवतगीता में कहा गया है, यह भगवान केवल भक्ति से जाने जा सकते हैं। भक्ति मान अभी जानती। यदि कोई सचमुच भगवान को जानना चाहता है तो उसे भक्ति के कार्य में जुट जाना चाहिए। यह कार्य सत्व या शुद्ध सत्व पहले है। भौतिक जगत में सतुपुणीकार्यों की प्रशंसा की जाती है, क्योंकि यह शुद्ध ब्रामण के लक्षण है किन्तु भक्ति के कार्य शुद्ध शत्रु हैं। दूसरे शब्दों में, वे दिव्य पद पर होते हैं। केवल भक्ति से परमेश्वर को समझा जा सकता है। भक्ति को नयशकर्मकहा जाता है किन्तु मात्र भौतिक कार्यों के निशेष से काम नहीं चलता। नेशकर्मअपीचर्चुतभाव वर्जित जब तक कृष्ण भावनामृत के लिए कार्य नहीं किया जाता, तब तक भौतिक कार्य को बंद करना लाभ पर नहीं होगा। नेश कर्मा प्राप्त करने की आशा से अनेक उच्च सन्यासियों ने अपने कार्यकाल बंद कर दिए थे। फिर भी वे असफल रहे और उन पर पर लौट रहे। किन्तु 1 बार भक्ति योग के आध्यात्मिक कार्यों में संलग्न हो जाने पर मनुष्य नीचे नहीं गिरता। अतएव हमारा कृष्णभावना में आंदोलन। हर 1 परनित्य अध्यात्मिक कार्यो में लगाने का 1 प्रयास है, जिससे मनुष्य बहुत ही करणों से छुट जाता है। भक्ति मार्ग के आध्यात्मिक कार्य है सवर्ण विष्णु, स्मरण पाद सेवन, जिनमें से भगवान को समझा जा सकता है। अत एवं जैसा कि यहाँ पर कहा गया है कि सत्व प्रति, लुभ्यायनिशकर्मणे विपश्चिता। उन शुद्ध भक्तों को भगवान की अनुभूति होती है, जो दिव्य भक्ति युग में रहकर कर्म करते हैं। गोपाल तापनीपविशनपंद्रह का कथन है कि भक्ति रसश्यबजनतदहतपाधि, नेरम, अश्ियवाउसमीन, अल्मन एतद निशकर्मययहनिश्कर्म की परिभाषा है। कोई मनुष्य तभी निशबर्ममगर्म करता है, जब वह जीवन में या भावी जीवन में, इस लोक मे या स्व लोक के निशा भाव से कृष्ण भावना कार्यों में पूरी तरह लगा रहता है। अन्य अभिकाशिकासुनि जब मनुष्य सारे पद से मुक्त हो जाता है और गुरु के निर्देश में, भक्ति में रहकर कर्म करता है तो वह पनेश्कर्म के पद पर होता है। ऐस दिव्य भक्ति से भगवान की सेवा होती है। मैं उन्हें नमस्कार करता हूँ।
शुरुभादगीयेशोकआपको खंड में प्राप्त होता है और इस शो का उचारण हो हाथी कर रहा है, हाथी भी कर सकते हैं, हाथी कर रहा है तो भगवान हैं। उनके कई वीर है। विस में सो गिजेनजरजो थे, विश्वा प्राप्त हुआ था। ने आदि का रूप ग्रहण करना हो तो जो दे प्राप्त होता है, उसी प्रकार की बुद्धि प्राप्त हो जाती है। तो विजेंद्र पहाड़ो में गए। पहाड़ यहां की बहुत अच्छी सुविधाएं है। आपस की कल्पना भी नहीं कर सकते बड़ा ऊंचा पर्वत, सुन्दर बगीचे के साथ। और वहाँ magma राज्य है ये हाथी, यहाँ क्यों आए राज्य है? क्या? क्या म, मगर आदि के पाव को पकड़ लिया और आधी हजार सालों के लिए प्रयास करना था, अपने पाँव को बाहर निकाला। r o magar शास तीर है, जानवर किधर थ्वी मगर मच है, जानवर किधर का पानी का। तो मगर आज दिन पे दिन काला पहलवान बन गया। और जो हाथी है दिन पर दिन कमजोर हो। तो प्रॉपर्टी इस विषय में चर्चा करते हैं। उसी प्रकार अगर हम हम सब का स्वाभाविक कर्तव्य। क्या है ये रुपये? दार भगवान के दास है। तो अगर आप दास बनो आध्यात्मिक मार्ग को अपनाओ, फिर आनंद आनंद है। पर अगर आप किसी और मार्ग से प्रयास करोगे, फिर से भोगे मछली को आप जल के बाहर रखोगे, मछली जी पाएगी नहीं, उसी प्रकार हाथी और जल का जानवर है, सौरी पृथ्वी का जानवर है, वो था जल में, तो क्या परिणाम हुआ? वो दिन पर दिन कमजोर होते गया। और जो मगर वो दिन पर दिन। तो उसी प्रकार अगर हम जाति काल में जुड़े और हम शास्त्र के आधार पर पाए गए।
आपका
आज कहते हैं लोग, ये रही जा ते कि असली सुख। तो शास्त्र में जो ज्ञान है, यह आपको असली सुख पहुँचाने। मे सोच थी न। जो व्यक्ति आध्यात्मिक मार्ग में जुड़े है, उनका क्या होता है? शराब आनंद नहीं हो, ते मा है। संक्षेप में 8 लोगों में पूरे वीलिसाहिजेकीकथा दे दिया है। और पहली लाइन में क्या कहते हैं आनन्द बुरी नाम लोगो को क्या मिलेगा? आनंद मिलेगा बढ़ता ही जाएगा। पौधे समाज में वो परमिट है। मान बन जाओ, पानी बना, डाली बन जाओ। तो जो धन कमा रहे हों, जो खुशी है वो बढ़ते जाएंगे। हर व्यक्ति को सम्पति ह को त्यागना पड़ेगा। तो उसे लिए शास्त्र में क्या कहना है कि लोग ये नहीं जानते, असली होगा यह फिलहाल राज। तो जो ध्यात्म चलते हैं, जाने क्या न्हें असली सुख चाहिए। क्या है उपाय हम भगवान के, ये हैं साधु की शिक्षा। कई बार जब हम सुनते हैं तो क्या कह रहे हैं हाँ पर इसका क्या प्रमाण है? पर कल करेंगे? कल आता नहीं और सब से पहले किया जाता है। तो सास को पढ़ने का 1 लाख है। आपकी जो की होती है और आप ध्यान में ज्ञान के रश में ज्ञान को बढ़ाते है
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सेवा पर बदल दिया। क्यों? क्यूंकि इसमे ज्ञान है अध्यावेज्ञानऔर अध्याय ज्ञान के बिना हमारा जीवन अधूरा रहता है। इसलिए धारवी ज्ञान को अनुकूल करना बहुत ही महत्वपूर्ण है। और शासकों का निर्णय क्या है भक्ति योग के माध्यम है जिसके द्वारा आप असली खुशी प्राप्त कर सकते हो। तो ध्यान में सबसे महत्वपूर्ण है से में सारी। वेदिक शास्रों की रचना की थी ने पूछा आपने गुरु से क्या है? कारण है शुल् भक्ति का ज्ञान नहीं दिया। तो ये शुल् भक्ति जो ज्ञान है, उसके द्वारा हमें शिक्षा मिलज्या। तो आती है। कम आती पूर्व जन्म में ही ने श्लोकों का स्मरण किया। क्योकि उन्होने पूर्व जन्म में जो भगवान की शरण गत होने के लिए वो सब सुदियो का उच्चारण करेगा? सासु में लिखा गया है मधु का उच्चारन करो पर अगर लोग है उनका उच्चारन करना ना आसान नहीं है। और चेतन क्या? क्या सारे मंद ने चोर हमने दे दिया है। इसमें विरेंदर ने उन लोगों का उच्चारन किया जो कि उन्होंने पूर की ने इन सोगोकाउजारनकिया जो देवता थे वो देख रहे थे, खेर को देवता देख रहे थे। जिन किस प्रकार अपने पैरों को भगा मंच के मुंह से निकालने का प्रयास कर रहा ै सोच रे a sad vijindaमारमदद जाएगा थे उन के द्वारा उन्हें अंत में वे जिंदगी रचनाओं से भगवान आय के बीच में तो अत्यंत दर्द में था, साल के पाउ मगज के मुँह में था, और उस कठिन स्थिति में भी उसे फल तो भगुरगीतामेभगवान कहते हैं 4 लोग दुखी है। dusra sur ce bagan चारू क्या है पूरी बात कम से कम है और के साथ भाग शुरू हो जाए तो शिव भगत द्वारा हमें ज्ञान प्राप्त हो की में प्राप्त करना है क्या करना चाहिए? तो इस ध्यान में देखते होंगे किस प्रकार की सुरक्षा की फर्म भगवान है। और हम इसे ये शिक्षी करते है कि आपको असली सुख चाहिए, क्या है। 1 तो हमें लाभ उठाना चाहिए और शासन का लाभ उठाना जाए। शाम क्या है भगवान और शासकों को पढ़ना भी चाहिए। sagar plea to a jage can nouns fofoरprincipl हमें गंभीरता से शिक्षा को अपनाना तो question कलियुग में पति पति तब इजी लगता है। लेकिन जब नाम, कला, सेवा, का, रिश्तों पर सुनते हैं तो उतना कटने लगता है। छोटी हो को भी उसके लिए कोई टिकट लेनी पड़ती है, कोई डिग्री नहीं चाहिए आपको आपको बड़े हो तो भी आप चैन कर सकते है। पड़ते क्योंकि भक्ति करनी चाहिए अपराधों से रहे। और अगर अपराधों से रेत करोगे तो उसका पूरा लाभ मिलेगा और हर व्यक्ति अगर प्रयास करे तो कर सकता है। जो अपराध है इतने भारी थोड़ी है जैसे की उसमे क्या भारी है में आदत है, अपराधों की कठिन दिखते हैं। अगर आप जा पाना शुरू करो। वह आपको देवी शक्ति देते हैं जिसके द्वारा आप अपराधों से बच सकते हो। शास्रों में हर समस्या का हल है, हर प्रश्न का उतर है। अगर आप जानना चाहो अपराध देखे से बचना या दूसरे भक्तों के गुणों को देखो। अक्सर हमें आदत है कि लोगो के लुक्स को देखते हैं और और क्या हम सबसे अच्छे हैं। उस बाहर से निकालो और चना के बंदे ने क्या कहा कैसे व्यवहार होना चाहिए आपको दूसरों के साथ? चुना के बंद ने कहा दूसरों के साथ ऐसा व्यवहार करो जैसे आप चाहते हो, दूसरे आपके साथ व्यवहार करे, आप क्या चाहते हो? आपके साथ जज से बात करे तो आप से बात करो, आप चाहे कोई आपकी चापलूसी नही करे तो तुम चापलूसी मत करो। अगर आप से मिठाई के साथ बात करें तो आप लोगों के साथ मिठाई में आप चाहते हो की सब मानदारी से बोले वार कर दूसरों के साथ जैसा तुम चाहते हो वो तुम्हारे साथ के अब ये 7 आपके आज हो चैन छीन होगा है क्यूंकि माँ को पता था की में लोग अपराध करेंगे और अपराध करेंगे और बोलेंगे और सेंसी होना पड़ता है पेड़ से भी अगर आप सेंसी बनना शुरू हो जाओ। माँ लो किसी ने आपकी बेटी कर दि फैला उसमें क्या मान लो किसने कहा यह घटिया है, आप फैल
नहीं
अभी तो धेले पर देला करना। sam sand sand sand
on
yes puce, prs prashno am sorry तो पागलही
हरेविश्भाईआपने शिक्षा जी, हमारे दिल में शिक्षा गुरु
का कितना महत्व होता है। इस तरह से हमे शिक्षा गुरु बहुत भारी शब्द है। के में कहा गया है कि शिक्षक गुरु, शिक्षक गुरु बड़ा बनी है। तो वहा जब शासन और शिक्षा ग्रुप का वर्णन होता है उसका अर्थ है बोल वेरी एडवांस ले। वोट कोई भक्त आपको भक्ति के लाने से योग देता है, आपको गाइडेंस देता है, कोई शिक्षक नहीं बन जाता। और शिक्षा मॉनिटर क्लास में कोई मॉनिटर होता है। अगर आप शिक्षक गुरू बुलाओगे है आपको उस चैनल के कटि में आज भाषा में शिक्षा गुरू आ गया है। o sea दे borges गश
सीधा
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मर मर के शास्त्र में हम देखते हैं कि विश्व की शेर बता, सविशधिकारधिकारक मतलब कि हमारे जज करना है, कि हमें इसका सम करना, इसका स नहीं करना तो उसके ऊपर पूरा कि हमें जर्ज करना भी है। किसी पद को और दर्ज नहीं करना, जर्ज करेंगे तो पड़ा हो। गा मगर खुद की रक्षा के लिए जर्ज भी करना है। तो इसको बैलेंस के से
श्रीमद भगवद चौदेश् में नानी कहते हैं हम 3 प्रकार की संग प्राप्त कर सकते है। 1 है जो आप से अधिक ज्ञान रखते हैं। जब आप उनको मिला तो आपको प्रसन्न हो जाना चाहिए। जिस प्रकार वर्षा के मौसम में वो नाचता है वो बादल को पहली बार देख रहा है। अगर आप को तुम को मिला तो चाहे 1 पल के लिए हो। आपको प्रसन्न हो जाना चाहिए की आप ज्ञान बात करोगे जिसके पालन से लक्ष्य हो। दूसरे प्रकार की संगत है। उनकी बराबर के सहयोग। 2 श्रीमन कुछ भाई से उठाई थी। भगवान ने आज भाइयों से बहुत खुश हूँ। नीचे की की भाइयों में 1 ही प्रकार की इच्छा है। क्या भागवत सेवा। इसलिए मैं खुश हू। प्रापा देश लोग केदार कहते हैं। उसी प्रकार कौन संस्था के हर केंद्र, हर व्यक्ति का भाव ला कि हम वही कार्य करे जो भगवान के प्रति बढ़ा सके। तो दूसरी संगत है उनसे मिले या के बराबर है। उनसे मिल तो क्या प्रसन्न होना चाहिए। क्योंकि हम उनकी संगत में मिलकर बवाल की सेवा बढ़ाते और तीसरे उसकी संगत है। उनके साथ कम भावर न रखे, उनके प्रतिज्ञा
दया
जाते है।
उनकी रक्षा के लिए उस अपराध का
इंटर के कुलों को देखो, अगर को बाद में देख। 1 समय से है। हम पहले अवगुण को देखते है और गुण को छुपा दे देंगे। सारे गुल हवाले में ही है। सारे दोष है। जब तक आपका बन ऐसे करेगा सारे गुण तुम्हार में है तुम वो भगवान की खास कर और उसमें जब तक जो उस लवार आप शांति का वादा नहीं पैदा कर सकते। 1 दूसरे के गुणों को देखे और फुल गिविंग भगवा हो। जब महाराज ने कितना बड़ा बल दिया कि हर प्रकार की सुविधा दी और जाते मांगने के लिए बड़ा सुधा भाग जा, पा प्राप्त हो, जो भक्तों, गुन और प्रयास सब के प्रति सेवा भाव, रखने का सेवा भाव भाव होगे तो आगे बढ रहे है आज जब बुटीक केवल मैं रिजन के महीने में
है,
आगे 11 बजे छुट्टी होती है तो हमे शा मे कुश के पाले में जा रहे हैं और वदपुरी ो शास भगवान है जो व्यक्ति भरता पूर्णिमा के सम में ग्रंथ भगवान को बाहर पड़ता है, देता है भारत है जाने तो हमारे फ्रांस देश 20 तो ट्राई कल आ जाते हैं? नहीं i
हरेड।
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