1st Disappearance day Celebration of H.H. Gopal Krishna Goswami Maharaj || Day-2 || Evening session

The video records the evening session of the first‑year Disappearance Day celebration for His Holiness Gopal Krishna Goswami Maharaj. The program opens with extensive call‑and‑response kirtan, where multiple speakers (A‑H) chant traditional Hare Krishna, Hare Rama, and related mantras in rapid succession. Interspersed with the chanting are brief spoken interludes that introduce the occasion, invoke the guru’s name, and praise the divine. The bulk of the spoken content is a long, informal narrative delivered mainly in Hindi with occasional English, recounting personal experiences of a devotee who witnessed the arrival of senior guru Shila Bhagwatpada (referred to as “Shila Gurudev”) at an airport, the ensuing crowd‑welcoming kirtan, and the subsequent travel to various ISKCON centres (Delhi, Vṛndāvana, Phoenix temple). The speaker describes the early confusion about bhakti practices, the instruction to engage in Prabhupada‑book distribution, logistical details of traveling with books, interactions with other senior devotees, and the emotional impact of serving the guru. The narrative also touches on the guru’s expectations, the devotee’s feelings of inadequacy, and the eventual acceptance of service as a means of spiritual growth. The recording concludes with additional chants and a brief thank‑you from a speaker identified as H, who mixes English and Hindi while acknowledging the participants and the event’s continuation.
Chapters
कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम रे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण रकिषनाकृष्णाकृष्ण हरे रामा रे राम राम राम हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे कृष्णा हर हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे प्रभु प्रभु
प्रभु
पर प्रभु प्रभु भगत भगवत भगवन हरि बोलोरिबोररिबोल ग री बोल रे बो गरी बो गरी बो नेता ररिबोलरीबोल हरि बोल गौररीबोगौररी बो गरीबो लरीबोगौररिो मेरे ब
नाम
विष्णु पादाय श्रीमते गोपाल कृष्ण गोस्वामी प्रभु पदस्य साहि 4 कितान साधु भगवत दाते नमों विष्णुपाद कृष्णा पुष्य श्रीमद् भक्ति विधान स्वामी तिन नमस्ते सारस्वत देव गौर वाणी पोचरी निर्विशेष शनवादपासदेशतार जशीकृषnacतनहuनित दि गो भक्त हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे
हरे कृष्णा
हरे क्रष्ण कृष्णा कृष्णा हरे हरे
हरे रामा हरे रामा
रामा रामा हरे हरे हरे कृष्ण
हरे कृष्ण कृष्णा कृष्णा हरे हरे
हरे रामा हरे रामा
रामा रामा हरे हरे
हरे
कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे
हरे रामा हरे रामा
रामा रामा हरे हरे
हरे कृष्णा
हरे कृष्णा हरे हरे
हर रामा रामा
रामा हरे
हरे कृष्ण
हरे कृष्ण कृष्णा कृष्णा हरे हरे
हरे रामा हरे रामा
रामा रामा हरे हरे
क
हरे कृष्ण हरे हरे हरे रामा हरे रामा रामा रामा हर
हरे कृष्णा हरे कृषना कृष्णा कृष्णा हरे हरे
हरे रामा हरे रामा
रामा रामा हरे हरे
हरे कृष्ण हरे कृषनकृष्णा कृष्णा हरे हरे
रे रामा हरे रामा
रामा
हरे कृष्णा हरे कृष न कृष्णा कृष्णा हरे हरे
हरे रामा रे रामा
रामा रामा हरे हरे
हरे कृष्ण हरे क रे हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे
हरे रामा
हरे रामा रामा रामा हरे हरे
हरे
कहरे रामा रामा रामा
हरे कृष्णा हरे
कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रामा रे
रामा रामा रामा हरे हरे
हरे
कृष्ण रे
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्णा हरे हरे रामा रामा रामा रामा हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रामा हरे रामा रामा
रामा हरे रामा रामा
हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम रे राम राम राम हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे
राम राम राम
जय राधे शाम राधे श्याम राधे श्याम जय राधे श्याम जय कृष्ण बलराम कृष्ण बोले राम कृष्ण बलराम जो बल रा जायो वृंदावन धाम वन्दावन था वृन्दावन धाम जाय वृंदावन धाम हरी बोला बोर
ddbohelopamand
herigisnathank you thank you prbosebrahmacaris from is of kailas and pnjabibagahari सो wer gonna start early looks like many are still not here about we are here so we will start so look up robo he is not here i just now coming and goroda probo will take your a spot okay after this is gorudaprabosomoka probo used to also personal servant of guru marige remember when i move to delhi that was ninety seven many years many sago श्री हरि प्रभु आफ्टर गरुड प्रबु
here krishn शिला भगवत्पाद महाराज की आवाज नहीं आ रहे, शीले भगवतपाद महाराज के केवल पचीस प्रतिशत आ रहे हैं शीला भगवत पान महाराज के शीला गुरुदेव की अरे कृष्णा
तो
जब भी शीला गुरुदेव भगवत पार के ऊपर चर्चा का समय आता है तो ऐसा लगता है कि सागर के समान उनका गुण है। तो उनके गुण के बारे में बताना अत्यंत कठिन है? तो थोड़ा हम लोग कनेक्ट करने की कोशिश करेंगे। जब पहली बार शीला भगवत्पाद मारीशस आने वाले थे उस समय के बाद है वह नाइनटीन नाइनटी वन के बाद चल रहा था, उस समय इतना इंट्रोडक्शन नहीं हुआ था कृष्णा कांशस से। तो किसी ने बताया कि बहुत बडे गुरुजी आ रहे हैं तो बहुत बड़े गुरुजी का नाम सुन कर के थोडा कान अच्छा तो पक्का हो जाता है की बे कोई लोग आ रहे हैं। तो वहाँ मेरे को बाइक में बैठा कर वहां ले गए थे कहाँ इस कौन जो फिनिक्स टेम्पल जहाँ पर मैंने ज्वाइन किया था। तो वहाँ वेट करके बस यही ध्यान में चल रहा था कि क्या नेक्ट चीज क्या होना है। तो वहाँ कीर्तन के साथ महाराज का स्वागत वो लोग करने वाले थे शुरू कर दिए थे। तो 1 आ करके कहते हैं कि हम लोग एयरपोर्ट जा रहे हैं, आप भी आओ साथ में है, ठीक है जी चलते एयरपोर्ट एयरपोर्ट में जाने के बाद वहाँ पर इतने धूम धाम इतना कीर्तन चल रहा था धूम धाम इसलिए मैं बोल रहा हूँ। उस समय किर्तन का परिभाषा नहीं जानते थे, धूम धाम कुछ चल रहा था, मृदंग करताल चल रहा था। तो उस ध्वनी में मेरे को ऐसा लगा कि ये पहली बार इतना रोचक और इतना उत्साह के साथ लोग को ही गा रहे हैं। इंतज़ार करते करते कि बरे गुरुजी आ रहे हैं, भरे गुरुजी आ रहे हैं। तो हम सोच में पढ़ रहे है की बड़े गुरुजी कुछ बरे होंगे, कुछ लंबे होंगे, चौरे होंगे। इस प्रकार के मेरे मन में चल रहा था और इस तरह के जो विजन चल रहा था मेरे मन में भी इंतजार कर रहा था, आई वाज ड्रेस पैंट पैंट इन शर्ट। तो मैं देख रहा था, लोग जम कर रहे थे किर्तन चल रहा था, माला लेकर के खड़े हुए थे। तो जब शिला गुरुदेव है भगवा एयरपोर्ट पर पहुंचते हैं और दरवाजे से बाहर आते हैं। तो मैंने पहला चीज क्या देखा कि सब लोग वहाँ रोड के ऊपर ही लेट गए। तो मेरे को समझ मे ही लोग लेट क्यों गए प्रणाम अब सबको जब लेते देखा तो मेरे को भी लेना लेट गए, मैंने भी लेट गया और पता भी नहीं चल रहा था कि ये ले करके क्या कर रहे हैं। कुछ कुछ बोल रहे थे, तुम से कुछ बोलने में भी कुछ बोलूं बरे गुरु जी आये हैं, बड़े गुरुजी आये हैं। अब जब खड़े हुए 1 दुसरे के चेहरे में देख रहा था की उनके चेहरे में इतना रौनक था, इनके चेहरे में रौनक है, मेरे चेहरे में रोनक क्यों नहीं है, तुमने पूछा की आप इतना खुश क्यों देख रहे हो। कहते हैं बरे गुरुजी आये है। अब ये देख कर के दूर से शिला भगवत पर मारा जा रहे थे। उस समय इतना टेक्निकल थी, उनको पता नहीं था कि शुद्ध भक्त क्या होता है, उसके अन्दर जो ओड़ा होता है वो कैसा होता है। लेकिन उनको देखकर ऐसा लगा कि यह कोई साधारण व्यक्ति नहीं है जैसे आते हैं। काफी लोग घेरे हुए थे, वरिष्ठ उनके शिष्य थे, सब घेरे हुए थे तो चल करके आ रहे थे। दोनों तरफ उनके शिक्षक थे। कुछ पंक्तियों को वो लोग गुरुदेव के ऊपर फेंक रहे थे, मतलब अर्पित कर रहे थे और कोई माला भी पहना रहे थे। शीला गुरुदेव भगता बीच में आ करके रोकते हैं। जहाँ पर मैं खड़ा हुआ था। मेरे सामने। कई लोग खड़े हुए थे। तो रुक कर के कहते हैं। फ्रेंस में कहते हैं महाराज जी जो पहली बार मेरे सुना 1 इंडियन आए हुए हैं, वो फ्रेंश भाषा बोल रहा है। तो मेरे को लगा तो वो फ्रेंश बोल रहा है। फ्रेंच में क्या कहा उन्होंने कि तुम शिला प्रपात की संस्था में अपने जीवन को दे डिकेड क्यों नहीं करते हो। समझ में नहीं आया हमको आश्चर्य चकित हो गया। बोला क्या समझ में नहीं आ रहा था, शब्द तो आ रहा था कान में लेकिन समझ में नहीं आया। बाद में जब शिक्षा ने कहा उनके की शिला गुरुदेव ने तुमको क्या तुमको समझ में आया। मैंने कहा सुना तो है लेकिन समझ में नहीं आया कि अपने जीवन को 7 करो वो कुछ समय लगा। 3 हफ्ता 4 हफ्ता लगा किस प्रकार से मंदिर आना, मंदिर में अपना समय बिताना और उसी में 3 महीने के बाद आई जॉइन स कौन फिनिकस जॉइनिंग इस्कॉन फिनिक्स इन मारिशस महाराज जी का वो बात है। क्योंकि पहले तो समझ में नहीं रहा था। जब समझा कि बड़े गुरु ने कहा कि अपने जीवन को सना गति कर लो तो मैं सोचने लग जाता था कि उनको क्या चीज पसंद है। भाई 1 बड़े व्यक्ति को प्रश्न करना है तो बहुत ही पापड़ बेलना पड़ता है। क्या करूँ ऐसे की वो पसंद हो। तो उनके लेकर में मैंने सुना कि वो बुक्स के ऊपर बहुत ही जोर लगाते थे। डिस्ट्रीब्यूट प्रपात बुक्स डिस्ट्रब्यूट प्रपात बुक्स तो हमको पता भी नही था। जॉन मेरे को कुछ किताब दे दिए गए थे कि सब लोग बुक डिस्ट्रिब्यूशन करने जा रहे हैं। तुम भी बुक डिस्ट्रीब्यूशन करने के लिए जाओ। तो वहाँ बुक डिस्टीब्यूशन ने शुरू किया और महाराज जी को हम उस समय चिट्ठी लिखते थे। महाराज जी ने कहा था डिस्ट्रिब्यूट बुक। महाराज जी को पता चला कि बुक डिस्ट्रीब्यूशन में काफी अच्छे और जो राघव पंडित राघव पंडित जिसको राधा गुलकंद महाराज कहते हैं हम दोनो चट्टे पडते थे ही वो टुगेदर सो बुक डिस्ट्रीब्यूशन टुगेदर ये बात हुआ वहाँ पर नाइनटी फोर राधा गोलोक महाराज आ गए थे। भारत तो मैं अकेला पड़ गया था। अकेला पड़ने के कारण मन नहीं लग तो महाराज जी को चिट्ठी लिखते थे कि महाराज जी मन नहीं लग रहा है क्या करें महाराज जी ने 1 शब्द है जो आज भी जब जितने समय मैं ने राज्य का सेवा किया। ये तो पक्का माजी बोलेंगे कि जो अथॉरिटी बोल लेता है उसको ही तुमने करना है, अपने मनमानी नहीं करना है। तो वहाँ मना होता था कि नहीं जाना है, नहीं जाना है। फाइनली नाइनटीन नाइनटी फोर आई गो तो चांस टिकट व पंसद एंड इन इंडिया जो पहला जो दर्शन किए थे राधा रास बिहारी जी का दर्शन किया। महाराज जी ने कहा दर्शन करने के बाद सीधा दिल्ली आना तो मेरे और ऐसे मैंने मारा को कहा। महाराज जी कैन आई हाव विजिट तो वृंदावन रोज। हम लोग कृष्ण बुक पढ़ते थे और वृंदावन जा सा मन नहीं मान रहा था। मा कहते हैं यस यू कैन गो तो वृंदावन ओननीfोथ्रीदेज 3 दिन के लिए ही जाना। वहाँ पे। अब मैं 3 दिन का मतलब क्या है। माज कहते हैं वहाँ 3 दिन से ज्यादा नहीं रहना है। वहाँ होने के बाद जब दिल्ली पेन पेंपर उस समय इस वाज जस्ट शैद छोटा सा 1 टेम्परेरी शैद था जहाँ पर राधा पार्थ साथी को वाशिप किए जा रहे थे महाराज जी चाहते थे कि वहाँ मंदिर का निर्माण हो और भव्य मंदिर बने। महाराज जी का जब पहली बार मिले वहाँ पर दिल्ली टेम्पल ने पूछा व सर्विस 2 यू डू क्या सेवा तुम करते हो तो अंदर से थोड़ा सा हिज की चापन अंदर से थोड़ा सा घबराहत क्योंकि इतना सेवा नहीं आता था। हमने कह दिया कि महाराज हम केवल बुक डिस्ट्रीब्यूशन करते है और ये सुन कर के महाराज जी बहुत ही प्रसन्न हुए। ओह रियली यू तो बुक डिस्टब्यूशन तो उस समय की बात है, बताए गए है की 1 छोटा सा बस जाया करता था सी पी कनक प्लेस पे और वहाँ उन लोगों के साथ जाने लगे बात वहाँ पर बना नहीं क्यूंकि जो लोग बुक डिस्ट्रीब्यूशन के नाम से जाते थे बुक डिस्ट्रिब्यूशन होता नहीं था केवल पराफिनालिया डिस्ट्रीब्यूट होता था तो उस समय जा कर के वहाँ फिर हम सोच में पड़ जाते थे कि करे तो क्या करे तो हम और राघव पंडित राधा ग्लो करना महाराज जी है हम दोनो मिल कर के 1 बैग में बुक्स डाल कर के हम लोग शॉप शॉप जा करके डिस्ट्रीब्यूट करते थे। कुछ कम समय में काफी बुक्स डिस्ट्रीब्यूट हो गया था जो महाराज जी के कान पर और महाराज ने बुलाया हम लोगों को कहते हैं आई हर्ड यू बिंग दुइंग बुक डिस्ट्रब्यूशन गुरुदेव। महाराज ने हर 1 चीज पूछा कैसे तुम लोग करते हो क्या क्या बोलते हो, कहाँ कहाँ जाते हो तो हमने कहा महाराज। हम लोग शॉप शॉप पे जाते हैं और वहाँ जाकर बुक डिस्ट्रब्यूशन करते हैं तो तुरंत उस समय बल बदरा प्रभु सब जानते होंगे। उस समय बी बी 3 साल को बुला कर कहते हैं इन दोनों लड़के को केवल और केवल बुक डिस्ट्रीब्यूशन के लिए ही भेजना है। अब हमने देखा महाराज कितना प्रसन्न हो जाते बुक डिस्टीब्यूशन से तो हमने सोचा क्या चीज और करें महाराज जी की प्रसन्नता के लिए। तो फर्स्ट टाइम इन द हिस्ट्री ऑफ डेली ट्रैवलिंग संकीर्तन पाती शुरू हुआ। पुराना 1 बस था। उस बस को लेकर हमलोग ट्रैवलिंग संकीर्तन जाते थे। ट्रैवलिंग, संकेतन, पाती सब डिटेल में नहीं जाऊंगा। महाराज जी ने कहा कि लंबे समय के लिए मत जाना क्योंकि आप लोग नए हो, मरिसेये हो, हिन्दी नहीं आता है। कई चीज कहा। महाराजजी ने लिमिट योर जुरेन तो हम लोग जब गए थे, वहाँ इतना बुक्स हमने पैक किया था। बलबडरावकहतेहैं यू क्रेजी 2 साल का जो बुक्स वितरण बिक्री होता है। तुम 1 बार ले जाना चाहते हो। 10 दिन के लिए मत ले जाओ। इतना ज्यादा और हुआ वही। महाराज जी ने कहा 10 दिन में आ जाना वापस तो 10 दिन में वापस आए। महाराज ने कहा आई नो इट इज वेरी डिकलदिस्टिब्यूट बुक या वेरी डिफिकल् दिस्ट्रीब्यूटबुक। फिर उन्होंने कहा फिर कहा महाराज जी हम लोग इसलिए नहीं आये कि हम लोग को दिक्कतें हुए वहाँ पर हम लोग इसलिए वापस आए क्योंकि बुक्स खत्म हो गया था। जब महाराज ने सुना बुक्स खत्म हो गया। महाराज इतने रौनक था उनके चेहरे पर मीन वो कभी भूल नहीं सकता। मैं इतना सुन्दर दिखता था। महाराज और महाराज जी बुलाते हैं किसको कहते हैं इन लड़के को 3 दिन छुट्टी देना। चौथे दिन वापस ट्रैवलिंग संकीर्तन में उनको भेजना। तो इस प्रकार से ट्रैवलिंग संकेतन महाराज जी को बहुत प्रिय थे। ये चीज हुआ 11 महाराज जी का पर्सनल जो सर्वे था वो रात रात गायब हो गए थे, कौन गायब हो गए थे। महाराज जी का जो सर्वे था और वहाँ ट्िकालगयाप्रभु को प्रेसिजन के रूप में रखे गए थे। कहा गया है कि 1 महाराज का असिस्टेंट को ढूंढना है। तो नोटिस बोर्ड में हमने लिख लिया था कि 2 विलिंग तो सर्व शिला भगवतपाद, महाराज दोज हू वांट तो सर्व भागवत। महाराज कैन कम एंड गियर नाम तो कोई आयन ही। महाराज जी की सेवा के लिए आश्चर्य चकित हो गया। ट्रक ट्रिकल बुबू ने कहा कहा कि मैं खुद जाकर के मैं चूस करूँगा कि कौन मारा जी का सेवक बनेंगे। एंड आवर स्कैयर मेरे मन में लग रहा था, नोतीसबोरमैंनेदेखा पीछे पीछे सेवेंटी टीम र्मचारी था। उस समय मैं पीछे पीछे छुप रहा था। तो ट्रिक लगा बाबू ने सीधा उंगली दिखाया हूँ। अब पीछे मूड के देखा तो कोई था नहीं पीछे। तो मेरे ऊपर तो मैंने बता दिया मैं आम नोट क्वालीफाइ मैं नहीं कर पाऊंगा। माजी का सेवा में कैसे करूंगा। मैं कभी किया ही नहीं। एक्सपीरियंस है बाद में बात करना। महाराज जी के पास जा कर के आप क्या करो। मिलो महाराज जी से मिल लो। महाराज जी के पास आये। राजा कमिन अंदर गए प्रणाम के जैसे we you in cusinasmysevnmy is what, i am i तो एक्ट्रेस मई फीलिंग im नोट qवालिफाi पहली बार मैंने बोला महाराज आप इतने बड़े हैं, इतने बड़े गुरु हैं, इतना प्रचार कर रहे हैं। मैं कैसे सेवा करूँ? तो महाराज ने बुलाया हमको नजदीक थोड़ा सा घबराहत हो रहा था। उन्होंने कहा डोंट वरी आम द, मोस्ट सिम्पल सन्यासी वुद ever seen wilinसकॉनइसकॉन के अन्दर सबसे जो हम सबसे जो सरल सन्यासी में ही हो तुम घबराओ मत और महाराज जी को देख कर के फिर और कुछ तो बोल नहीं पाया महाराज के इस प्रकार से शिला गुरुदेव भगवतपाद जो हैं उनका उनके अन्दर 1 जो योग्यता है जो मैंने 1 चीज में हरदम कहता था लोगों से कि मैंने 6 गोस्वामी को तो देखा नहीं शुरू सनातन भतरगुनाशुजीवा गोपाल दास शगुन लेकिन 1 गोस्वामी को मैंने देखा मेरे को महसूस हुआ कि वो गोस्वामी वो लोग कैसे थे तो है gopal krishna selabaguatbdmarg
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prabuhsakavi is a poet he ont any poems specially im reading mostly every they in marisuswathsup group very good poet so next is prabin then sri hari prob guru the propos service guromarsmanymany years in us in canada you tables with us also i will only called who was her harina
harykshnahregusna thank you maharaj give me some opportunity to speak actually i m no thinking to speak may be i may only licen because only five mint सो i⁇msjstw जून जुलाई प्लानिंग हु गुरु महाराज प्लानिंग तो कम no gurumaralwiज planing to june after new ratra new every new or second set this is fixed neritya गुरु महराज आर कमिंग this is fix day to come america and this time we are mostly north america group, who any planing to come gorumara dusting have our diwali we dont know before what gorumara coming misting diwali we seleबरating this one बीफोर गुरुमाराज कमिंग to before we making plan, then six weeks with guru maharaj after guru mata left then the saperasionalso this thing for as diwali celebran this thing gol stil am to thousand for to two thousand and twenty tri कंटिन्यू and twenty three also i m coming kartik i think i m do something, then he ne se gorumara i my best time spend with vrindavan with guru marg im dealing what story first time when i met to gurumarाज i m a joining merton and this time actually i a hotel industrial so some how i m a joining active hospital i⁇mknogoholdstory hospital have some union problem, then i one day come to tempulansgurumal is giving class after det i जाइनिंग coming star next to temple im navel full time divoti temple im a star next to temple and always come to helping सो somehow something hain politics two thousand and to two thousand and the whos the टेंपल प्रेसिडें ही ओडिया इम फ्रॉम ओडिशा they thinking i supporting him then big problem give us so some how i left after twenty years after twenty years in first time talk to bn mini muharat the accident twenty years i got no speak this so i talking about a suci in much gorumara when coming america veristictsucian moci new york new york no have facility gorumara no so many have a disapulgुrmaरaज mostly stain raधagोवinde टेmपलऔरnराधागोविं dिcaपुl his house stay then he sold house and left after the everybody decide to may be better gorumara sting the hotel so the two thousand and nineteen happen, then this year as a holiday in room pool so next to temple another one hotel book there rom janadar maharaj and guru maharaj other jgnatpeaprobu everybody of seprate rom then when guru maharaj cam guru before set up lt ltr propos table set up everything and guru marrage win came inside room he takes ser he planning to put dites der and preosokaproboalso helping im in the airport preosocaprbo helping there then gorumara see the bathroom lit coming frond hor have alter and he s angry he know want to stay there he know want to open आलसो dites and dites total on pak traveling russia to traveling and ditisanpekhe no one to open deti because bathrom lit coming then bathrom क्लोज वी पुटिंग the र टावल आलसो puting this towel this is towel muc somehow the next day morning we प्रीपेयरिंग फॉर gorumara डीटी service गो टू dounstertemple set of table देन he did service there सो this marc grumastic only bathrum lit coming how much is serious he not open also did so many thing happen for me and गुरु mhaराजjnadomharag now this ting may and guru mahar guru and disap relation my n guru maa relation ava father and son rela anything in my life in every single thing i m discuss with guru maharaj and guru maharaj is best and best time giving something have in my life also some problem the somebody some puting aligation me guru maharaj three time or my purpose per the court give to witness somebody spoke isis you folsoligasnputing me three time coming to new cot ad jumnorsn।
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