वैष्णव चरितामृत भाग - 2 | भक्ति विनोद ठाकुर तिरोभाव दिवस विशेष | 21 Jun 2020 | Gopal Krishna Goswami

Gopal Krishna Goswami recounts Bhaktivinoda Thakur's life and teachings, including his struggles against opposing yogis, British arrests, and efforts to establish spiritual practices like tree worship and Bhagavad recitation. The narrative covers his family's hardships, his disciples' organizing efforts, and his vision for spreading Vaishnavism through institutions and representatives.
Chapters
तो जो राजा था उसने बड़ा मार महसूस किया, मेरी ऐसी बेसी हो गई। राजा ने 1 खास यज्ञ कराया जिसमें 30 ब्राहमण थे इस उद्देश्य के साथ कि भक्ति ठाकुर अध्यान हो जाए। और तीसरे दिन जिस दिन भक्त ठाकुर को मरना चाहिए था, राजा का बेटा मर गया, राजा ने गे किया था वक्ती ठाकुर ने उन्हें राजा को चोरी करते पकड़ा और वक्त के समय जंगलपुर मंदिर में जो कमियां थीं वो ठीक समय नहीं लगना, भगवान के बस से ठीक नही पहनाने, जो भी कमियां थीं वो सब सुधार दिया। 1 और योगी सहा जो अपने आप को महा विष्णु का अवतार मानता था, सेना धोनी का, 2 साथी थे shiv जी ब्रहमाजी ने ने कहा मैं महा विष्णु, ये siv है शिवा और कौन ब्रह्मा ये जो महाविष्णु था, अनेक प्रकार की हरकतें कर रहा था, उदाहरण के लिए लोगों की पत्नियों के साथ गल काम, लोगों की बेटियों, बहनों के साथ कल काम और जो अंग्रेज थे वो भी इससे खुश नहीं थे, क्योंकि इसका उद्देश्य ये था मैंने अंग्रेजों को भारत से निकाल देना है और मैं फिर भारत का राज्य करूँगा। तो 2 लोगों ने शिकायत की यह हमारी बेटी के साथ, बहन के साथ, बेटी पत्नी के साथ काम कर रहा है। तो भक्ति ठाकुर को ब्रिटिश सरकार ने भेजा हुआ क्यूंकि वो रेवोलूशन शुरू कर रहा था ब्रिटिश सरकार के अगेंस्ट भारती ठाकुर को पता था कि हिंदू सिपाही इससे डरते हैं, तो अपने साथ सौ मुसलमान सपाइयों को ले आए और गए इस विना, इसके जंगल में इसका स्थान था। तो उन्होंने कहा दान दाता, इसी लीला के 34 अलग अलग वर्जन है। तो ठाकुर भक्त नो पहुँचे उसकी कुटिया में और अपने साथ मुसलमान सिपाहियों को ले आए थे, पता था को हिंदू सफाई हाथ लगाया। तो माँ विश् ने कहा मुझे पता है तुम क्यूँ आए हो, तुम जानते नहीं मैं कौन हूँ, मैं हूँ, मhावisणoमेरा उद्देश्य ये है अंग्रेजों को यहाँ से निकाल देना, मैं शासन करूँगा। और तो भक्त ठाकुर ने कहा उसने कहा मैं हूँ माँ विष्णु ये है शिवा ने हा अगर तुम महा विष्णु हो तो तुम जगनपुरी मंदर में क्यूं नहीं निवास करते? यहाँ जंगल में क्यूँ निवास कर रह हो। जगनपुरी का मंद मंद थोड़ी है, वो तो लकड़ी लकड़ी की मूर्ति है, भगवान थोड़ी है असली भगवान हूँ मैं इधर। और उसने जो भक्ति और ठाकुर ने सुना कि उसने कहा वो लकड़ी की मूर्त लकड़ी है, मूर्ति थोड़ी है, ने ा गिरफ्तार कर लो, वो मुस् सिपाही हो इसलिए लाये क्योंकि उन्हें पता था वो हिंदू सिपाही उन्हें गिरफ्तार नहीं करेगा। तो उन्हें पकड़कर ले गये कछारी और 14 दिन के लिए कई जगह 14 पंद्रह दिन के लिए ये केस का हेयरिंग हुआ, हियरिंग भी अर्चना ठाकुर ने की, इसका इतना प्रभाव था, लाखों शिष्य थे, रोज बड़ा बड़ा मोर्चा होता था छोड़ 2 हमारे गुरु को और उन्हें गिरफ्तार करने के पश्चात भक्त। ठाकुर के जो बच्चे थे, सब बीमार हो गये, ठाकुर के 10 बेटे थे और जिनमें चौथे नंबर पर थे, बक्सी सेना तो ठाकुर ने कहा गिरफ्तार करके उनको ले गए। हालांकि लोगों ने बड़ा बड़ा मोर्चा किया। छोड़ 2 छोड़ 2 ये भगवान है। और उनकी पत्नी और बच्चों ने भी कहा बच्चे बच्चे सब बीमार हो। पत्नी। और बच्चों ने कहा हमें छुड़ा 2 इसे छोड़ 2 क्यूंकि आपने भगवान को गिरफ्तार किया है? ओह हाँ, हम मरने वाले हैं, बच्चे मरने वाले हैं। भक्तिन ठाकुर ने मरने 2 उन्हें जो सचाई है उसकी स्थापना होनी चाहिए। तो 14 दिन के बाद जिस दिन भक्तिन ठाकुर ने अपना जजमेंट देना था, उस दिन उनका पूरा दाया साइड पैरालाइज हो गया, मेर को हाथ नहीं लगा, पैर नहीं था। जब भी वो टरमेन थे, निर्णय लेने के लिए, उन्होंने बड़ी कठिनाई से अपना निर्णय लिया, जिसमें भोगी योगी को सुझा दीजिए। जब वे भोगी योगी से कोर्ट के बाहर ले जा रहे थे, ये ब्रिटिश वकील ने पढ़ा था। ये जो योगी है, ये अपनी ताकत रखते हैं अपने सीके में, तो उन्होंने आकर पीछे से सीखा काट दिया और लोक से बात इस योगी ने क्या क्या आत्म हत्या कर ली और सब समझ गए। बाकी में ठाकुर ने लिखे का 1 पेड़ था जहां लोग मानते थे, यहाँ भूत है और ये पेट की पेड़ की पूजा करते थे। तो ये सोचते थे सब इच्छाएँ पूरी हो जायेंगी। तो भक्त ठाकुर ने 1 प्रसिद्ध लड़की थी जो कि भागवत पढ़ती थी। ठाकुर ने उनके पिता को कहा तुम बैठो इस पेड़ के नीचे और सीमा भागवत पढ़ो। 1 महीने के लिए लोग वहां आते थे, उस पेड़ की पूजा करते थे, सोचते थे कि इच्छाएँ पूरी हो जाएंगी और हो भी जाती थी। पर ठाकुर इससे खुश नहीं थे। तो उन्होंने 1 महीने के लिए 1 ब्राह्मण से भगवत का भगवत का अध्ययन करवाया, जिसके पश्चात में क्या हुआ, क्या हुआ, पेड़ गिर गया। और उसके बाद लोगों की श्रद्धा श्रीमत भगवत में बहुत बढ़ गई। तो भक्ति लोग ठाकुर उनके मन में 1 भाव था क्या शुद्ध संदेश की स्थापना करना और शुभ संदेश का प्रचार एटीन नाइंटी सिक्स। तो एटीन नाइनटी सिक्स में जैसे हमने कहा भक्ति ठाकुर बहुत पड़े लिखे थे। भक्तिन ठाकुर ने 1 ग्रंथ लिखा था टीचिंग ऑन लॉट चेतन्या और भक्ति ठाकुर को की विजनरी से, उन्होंने ये ग्रंथ विश्व के विश्व के प्रसिध महाविद्यालयों में भेजा at ninety six और उन्हें 1 मा विद्यालय था miglunivrsymoni एटी नाइनटी स में भेजा फकीम ठाकुर। उन्होंने 1 पुस्तक छापी जिसमें के सिनेमा प्रबुद्धि के सिद्धांत का वर्णन था। और उन्होंने 1 गंध भेजा। विश्व के अनेक प्रसिद्ध महाविद्यालय में बाकी ठाकुर की इच्छा थी कि आंदोलन आगे बढ़े तुम्हे भगवान से प्रार्थना की थी। कृपा करके मुझे ऐसा कोई प्रतिनिधि भेजो जो कि इस आंदोलन को मेरे बाद आगे ले जा सके। उनकी इच्छा थी विष्णु की किरण उनके घर में प्रकट हो रे विश्णु। तो इस प्रार्थना के उत्तर में भगवान ने किसे भेजा भक्ति से ठाकुर। जब ठाकुर भक्त थे, उन दिनों में मैजिस्टेट के घर के आगे रत रुकता था और बिमला प्रसाद और भक्ति न ठाकुर की पत्नी भागवती दासी ने अपने छोटे बेटे को, जिसका नाम था बिमला प्रसाद। तो बिमल प्रसाद की माता ने बेटे को रखा जगराज के चरणों में और जब रखा था तो 1 हाँ जगनाजी के हाथों से कहाँ गिर गया, गिर गया प्रसाद की से पचान सके। ये है बेटा जो भगवान ने भेजा है इस नोलन को आगे बढ़ाने में भक्त ठाकुर nvdmeंथेवहाजगनादास बाबूजी गो किशोदा बाबाजी इससे महान सं वहाँ रोज भजन करते थे भक्ति नो ठाकुर ये स्वीकार नहीं कर पाए कि जो नंबर देव धाम है यह महा पाप का जन्म का स्थान है। उन्होंने ऐसा सोचा, ये शायर तो सिर्फ सौ साल पुराना नंबर और महा प्रभु पकड़े हुए थे। 500 साल पहले। यह कैसे सम्भव है के महा प्रभु के जन्म का स्थान लोगों ने व्यापार की दृष्टि से उसे ये बना दिया। यह मा प्रापक जन्म स्थान। इसी बहाने ज्यादा लोग आयेंगे सो पहले उन्होंने सरकार से विनती की थी में ट्रांसफर करो कृष्ण नगर जी सरकार ने नहीं तुम नहीं जाते त्याग दे जाने दिया। तो छुट्टी वाले दिन ठाकुर सारे उस इलाके के मैप्स को देखते थे और देखते थे कौन सा स्थान है। उसने अंदाजा लगा लिया था कि इस स्थान में होना चाहिए। तो गए वो इस स्थान में मुसलमान लोग रह रहे थे जस्थान में प्रमुख प्रकट हुए स्थान के ऊपर तुलसी के पौधे से ने तो वर्जिन ठाकुर को लगा यही है उनका जन्म का भक्त। ठाकुर चाहते थे क्यूंकि शिक्षा गुरु जगनदास बाबूजी उनकी राय ली जाए। जगनदास बाबूजी उस समय एक्स वन फोर्टी फोर यर्स के थे 114, 100 और खड़े भी नहीं हो सकते थे उनके शिष्य बिहारी उन्हें टोकरी में उठाते थे। और जब खेतन का समय आता था तो नाचते थे भक्त ठाकुर उनके गुरु को लेकर लाए उधर यह स्थापित करने के लिए। यह स्थान जैसे ही जगनदास बाबुजी वहाँ पहुँचे वहाँ जब जगनदास बाबूजी ने देखा था। ये स्थान फिर ठाकुर ने स्थापित किया, ये है वो। तो भक्त ठाकुर ने संक्षेप में वेदिक धर्म को अपना असली स्थान दिया। उन्होंने यह स्थापित किया कि मीता सबसे ऊँचे ग्रंथ हैं। उन्होंने ये भविष्य बनी थी भविष्य 1 मान संत आयेगा जो की महाप्रभु की भविष्य वली को पूरा करेगा। और उन्होंने महाप्रभु के जन्म के असली स्थान की थी। तो भक्ति नोट ठाकुर 1 रूप से। आप कह सकते हो इस संस्था के संस्थापक है हमारी वाणी नहीं भक्ति ठाकुर के भक्त ठाकुर woclythefounder the krishna contes movement to jante hi propafाundrpरापाजी के से pora credit उन्होंने किसे दिया भक्ति ठाकुर? तो भक्त ठाकुर की इच्छा थी कि उनके प्रकट होने के बाद ये स्थानीय संस्था, उनकी संस्था ठीक हादसों में चले उन्हें भक्ति धानदाजेकोखास शिक्षा दी, ट्रेनिंग दी छोटी आयु से 1 दिन प्रसाद में 1 आम खाली सा भगवान को भोग लगाए बिना जो पिता आए उन्होंने देखा बेटे ने आम खा लिया है। भोग लगाये बिना पिता ने कहा यह ठीक नहीं है। वकतीसिदादाजीने इतना गंभीरता से इसे स्वीकार किया, ये जिंदगी भर उन्होंने कभी आम नहीं कराया। इस प्रकार बाकी ठाकुर के अनेक राज में है। वे बक्ती ठाकुर जी की फिर दिवस पर हमें यह प्रार्थना करनी चाहिए। इ ये जो गुन जिनका नाम भी ने चर्चा किया, ये गुण आप अनुकूल करना चाहते हो। शरणागति ग्रंथ में इन गुणों का वर्णन है। प्रयास करोगे बाकि ठाकुर हो हरे कृष्णा हरे किशना कृष्णा हरे हरे हरे हरे हरे।
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