भक्तों के संग रहने का महत्व | 2002 | ISKCON Pune | Srila Gopal Krishna Goswami

Srila Gopal Krishna Goswami teaches that true happiness comes from surrendering to Lord Krishna and serving Him through chanting, studying sacred texts, and building temples together. He shares stories of early missionaries who endured hostility while spreading Krishna consciousness, and urges devotees to gather regularly in homes and villages to share these teachings.
Chapters
ओम नमो भगवते वासुदेवाय, ओम नमो भगवते वासुदेवाय, नम भगवते वासुदेवाय। हम भक्तों को पूना में अच्छी शिक्षा मिल रही है और देख सकता हूँ इसका बड़ा अच्छा प्रभाव हो रहा है। क्यूँकी हम सबका लक्ष्य क्या होना चाहिए? दिन रात भगवान का गुणगान करें। भौतिकवादी व्यक्ति सोचते हैं कि अध्यातिक वादी व्यक्ति मुल्क है। सच और इध्यातिकवाली सोचते हैं। भौतिकवादी मुल्क है कोई। 1900 पैसठ में गुरुजी ने 1 लेक्चर दिया था न्यूयॉर्क शहर में, जिसका नाम था हू, वज क्रेजी चैनल अपने अंगरेजी में पढ़ा हो। तो इस लेख में पापाजी कहते हैं कि समाज में 2 प्रकार के भक्त व्यक्ति हैं। भक्त भक्त है। जो भक्त हैं वो सोचते हैं कि भौतिक वाली व्यक्ति जिन्हें ये धुल मनुष्य जीवन प्राप्त हुआ है, वह अपने जीवन का दुरुपयोग कर रहे हैं। उन्हें जवाब निमंत्रण। 2 आइये पूरा मंडल में क्या कहते हैं? व्यस्त है वेरी बिजी बिजी का क्या मतलब सिनेमा देख रहे हैं या क्रिकेट मैच देख रहे हैं। परलारमनहाजीने कहा है हूनाजपूनाानाचपे दाने को फिर से हम चबा रहे हैं। इतनी फिल्में देख ली, संतोष नहीं हो पाये। और हम सोचते हैं अगली फिल्म देखेंगे, वो हमें संतोष करेंगे। इतने क्रिकेट मैच देख लिए संतोष नहीं हो पाए। सोचते ही अगला मैच देखेंगे। इसमें हमें अधिक आनंद आएगा। तो हमारा सारा जीवन बीत जाता है किसी न किसी भौतिक योजना में। और भौतिक वादी व्यक्ति क्या सोचते है की वादी लोग पागल है खेलने घूमने की। वजह ये जवान लड़के लड़कियां भगवान का नाम ले रहे हैं और जीवन का असली आनंद है, वो नहीं उठा पड़े मैं पिछले हफ्ते कैराला में धन भगवान हम जप माला के लिए जाते थे रोड, तो मैंने अनुभव किया ये लोग इतने आश्चर्य होते थे। देख कर के आदमी सड़क में चल रहा है और जॉब कर रहा है हमारे। 1 भक्त मुझे कहते थे कुछ दिन पहले की वो बॉम्बे में, बॉम्बे में लोकल ट्रेन है न, तो व्यक्ति लोकल ट्रेन में दफ्तर जा रहा था, जॉब करते हुए तो जॉब कर रहा था, थैली गले में लगी हुई थी तो पड़ोस के व्यक्ति ने सोचा की उसका हाथ टूट गया तो कहने लगा हा डी जॉब कर रहा था तो उसने कहा मैं है न सिंग चेनिंग नाम of a तो आज कल लोग जा पाना भगवान के नाम का उच्चारन, इसके महत्व की शिक्षा न कोई देता है, न कोई सुनता है, बड़े बड़े धर्म प्रचारक हैं जिनके कार्यक्रमों में हजारों की संख्या में लोग आते हैं। ध्यान से देखो क्या शिक्षा दिया जा रहा है। तो अब यह देखोगे कि कोई खास संदेश नहीं, कृष्णा का नाम नहीं, गीता का नाम नहीं। हमारे विचार से 1 समय में किसी के आश्रम में गया था दिल्ली में, तो उनके वहाँ हमने देखा, उनके आश्रम के बुककेस में रामायण विधी, गीता विधि, भागवत विधिया था। तुम ये शिष्य कहने लगे ये हमारे गुरु जी की रामायण है, गुरु जी की भागवत है, गुरुजी का भागवत गीता है। हमने कहा रमा जी की है, गीता भागवत व्यास जी की है, उन्हे नहीं नहीं, इसमें उनके विचार है। हमने कहा उनके विचार है। तो मान है अपने विचारों के नाम पर। तो अंतरराष्ट कृष्ण भावना में सम में किसी 1 व्यक्ति का विचार नहीं आप कहोगे? क्या तुम लोग स्वामी पपा के विचारों को नहीं प्रकट कर ले। हम कहते हैं नहीं, हम कर रहे हैं। भगवान श्री कृष्ण के संदेश, उनके विचारों को जो हानि परंपरा में महान गुरु आये हैं। सब ने उन्हीं विचारों को आगे प्रस्तुत किया है। इसलिए कहा जाता है अगर यथा रूप संदेश स्वीकार करोगे तो इसका लाभ उठाओ बेटा। तो आप सब का सौभाग्य है की आप इस कौन संस्था से जुड़े हो जहाँ की आपको भगवान का असली दिव्य सन्देश प्राप्त हो रहा है। अपने जीवन को सुखी बनाने के लिए। 2 हफ्ते पहले भक्तों ने नरसिंह ने बनाई थी, यहाँ भी बनाई थी। हम उस समय मायापुर धाम में थे। मायापुर धाम में बहुत ही सुन्दर विग्रह है। भगवान न किया हो वहाँ बहुत सुन्दर कार्यक्रम होता है। भगवान का अभिषेक और अभिषेक 45 घंटे चला था। तो आपके नए बंदर में शायद नरसिंग देवजी की मूर्ति भी होगी तो फलामहागीनेजबनरसिंग देव। भगवान का सोचते हो या चर्चा करते हो तो प्रलाद बना कर भी सोचना पड़ता है। आप भगवान को अपने भक्तों से जुदा कर सकते हो। भगवान नरसिंह देव जी के प्रकट हुए थे किसलिए भक्त प्रलाद की सुरक्षा के लिए है की नहीं। तो प्रलाद महार की बड़ी महत्वपूर्ण शिक्षा है, जिसके विषय में हम सातवें स्कंध में ज्ञान प्राप्त करते हैं। तो प्रलाल मिनाज ने कहा है ना थे विधु विश्नू। आज लोग ये नहीं जानते की असली सुख शांति का क्या हैं। उपाय आप सब जो यहाँ उपस्थित हो, आप जानते हो। इसलिए आप हर रविवार को यहाँ आते हो। पर कई हैं अधिकतर जो व्यक्ति हैं वो नहीं जानते। तो प्लान महज का कहना था प्रो भगवत मिया। उन्होंने कहा कि अध्यात्मिक ज्ञान को भाषा की आयु से अनुकूल करना आरंभ कर देना चाहिए। क्यों आप कहोगे इतनी जल्दी क्यों क्या है जल्दी? क्यूँकि मुन्शी जीवन जो है बहुत ही दुर्लभ है। आज कितने लोग ये मानते हैं कि मनुष्य जीवन दुर्लभ है। आज समाज की स्थिति ऐसी है कि अगर आप लोगों को कहो कि इस अपराध का यह यह परिणाम है तो लोग क्या कहते हैं? ठीक है बदलेंगे लोगों को कहो बस खाना है। जवान के चर्चे के लिए खा लो तो परिणाम यह होगा कि जो पशु आप खाओगे वो आपको कल खिलाएगा कहते हैं। साधारण भाषा में नेल्ले पे देला, सुना, आपने वो इंग्लिश में कहते है। तो ये है नेलेपेदैलाआपहमे आज खाओ। हम आपको कल खाएंगे? तो लोग कहते हैं ही जाएंगे इसमें क्या गर। ये परिणाम भुगतने को तैयार हो। जो ना करो। कौन रोकता है आपको। तो फिलहाल। राज्य का कहना है कि यह 5 साल की आयु से दिविज्ञान अनुकूल करना आरंभ कर देना चाहिए। क्योंकि मनुष्य जीवन जो है बहुत ही दुर्लभ है। आगे कहते हैं हे मूर्ख व्यक्ति इतनी ज्यादा मत करो। सुख की प्राप्ति के लिए। आज आप क्या देखते हो? हम दिन रात प्रयास कर रहे हैं, परीक्षा करे किसलिए किसलिए कौन बतायेगा किसलिए भाई साब? हा हा। बहुत 1 बहुत 1 शुक हम सोचते हैं। बहुत 1 शुक आपको संतुष्ट करेगा। पर शास्त्रों में कथा है, जिस में ये दिखता है। क्या नदियों को अभौतिक कारियों के द्वारा कभी संतोष नहीं कर सकोगे। 1 राजा थे जिनका नाम था मराजयायाती। 10 हजार वर्षों के लिए उन्हें इंडियन तिथि की पूरी सुविधा थी। पूरे 10 हजार। अंत में उन्होंने क्या कहा कि मैं मूर्ख हूँ। मैं हालांकि इतना प्रयास किया, मैं अपने को संतुष्ट नहीं कर पाया। तो प्रदान जी कहते हैं भगवत, अब में हे मूर्ख। व्यक्ति आवश्यकता से अधिक परीक्षा मत करो, जैसे की 2 खाता बिना मांगे, सुख आएगा बिना मांगे और उतना ही जुटना के आपके कर्मों के अनुसार आपको अधिकार है, ज्यादा दें आप दुख की प्रार्थना करते हो। कभी सच बोलिए बोले, हे भगवान, हमारे बाल टूट जाए, टूट जाए, दिवाला उड जाए, सब बीमार हो जाए, बच्चे फेल हो जाए। ध्यान में कभी ऐसे बोलते हो, बोलते हो, हमें कैंसर हो जाए, हार्ट, अटैक हो जाए, हॉस्पिटल आईसी में जाए बोलते हो। आप नहीं। तो फिर बीमार क्यों होते हो? रो पीडा कैश क्यों भुगतना पड़ता है? बिना मागे है की नहीं, बिना मांगे, दुख कष्ट आता है, की नहीं। पाल का कहना है, शोख भी उसी प्रकार बिना मांगे आएगा तुम इतनी चिंता क्यों करते हो? पर उतना ही शोक मिलेगा, जितना की आपका कोटा हो। आपकी इच्छा मर्सिडीज गाड़ी आपकी इच्छा गोरा पाक में बड़ी कोठी आपकी इच्छा है कि हर साल विदेश की यात्रा पर अगर कर्मों में लिखा साइकल कुटिया? और केवल माराष्ट्र की यात्रा, विदेश की यात्रा की वजह तो उतनी यात्रा कर पाओगे। तो इतने ज्यादा परीक्षा करने की आवश्यकता नहीं। 1 बड़े प्रसिद्ध भक्त थे गोविंद दास का विराज। उन्होंने 1 बड़ा प्रसिद्ध भजन लिखा है, जिसे आप वैष्णव लोग जानते हो। बाजा भुरे के नाम से। तो इस भजन को कहते हैं हे मेरा मन, तुम चिंता से भरे हुए हो। आप कहोगे नहीं, नहीं। trefex में देखा जाए, सब चिंता से भरे हो, आप अमेरिका जाओ, जैसे आप जानते हो। भारत से तो ज्यादा धन वाद अच्छी कोठियां हैं। बड़ा मकान है, 3 दिन मोटे हैं, पर इतनी चिंता है कि आप को नींद नहीं आती। इसलिए क्या खाना पड़ता है सोने के लिए नींद की गोली। आप में से कितने लोग भक्तों को नींद की गोली खानी पड़ती है? रोड पर। पश्चिम देश में 20 प्रतिशत से ज्यादा लोग नींद की गोली खाते हैं? छोड़ने के नींद नहीं आती तो इतनी चिंता है। तो गोविंददास कावराजी कहते हैं मेरा मन जो है, चिंता से भरा हुआ है। और अगर तुम चिंता से रहित होना चाहते हो तो क्या करना चाहिए? क्या करना चाहिए? भगवान महाराज नंद के पुत्र की शरण ने विजय। तो हम चरम कैसे ले? साधु संगत के द्वारा भागवत के तीसरे स्कंद में हमें भगवान के पीले देव डिग्री शिक्षा प्राप्त होती है। इतिहास में 2 कपिल देव प्रकट हुए हैं, 1 है प्रमाणिक, 1 धोनी। तो जो प्रमाणिक कपिल देव थे, वो थे देवहूति के पुत्र। इसलिए जब भक्त स्वामी पपाजी ने 1 पुस्तक छापी प्रकाशित की तो उन्होंने उसका नाम रखा चीटिंग। 2 लोड कपिला द सन देवा होती, देवहूती का पुत्र कपिल देव? तो कपिल, देव की माता का नाम था देवो गती। पिता का नाम था। पिता तो घर छोड़ कर चले गए। यह विधिक संस्कृति है। शुरू में बेटी की देखभाल पिता करता है, फिर पति और फिर आगे हो। और समाज में 4 आश्रम हैं, ब्रह्मचारी के, हस्त, वानप्रस्थ और धन्यवाद। तो जब पीला देव प्रकट हुए तो किदामा मुनि ने देवहूती की। देखभाल पुत्र के हाथ छोडकर चले गए। पहाड़ो की ओर तो देवहूती को पता था कि उनके जो बेटे हैं, भगवान के अवतार हैं। उन्हें यह सूचना ब्रह्मा जी ने दे दी थी। जब वह माता के गर्भ में थे तो देवा होती ने अपने बेटे से पूछा बेटा ये बताओ, मैं इस जन्म मृत्यु के बंधन से कैसे मुक्त हो सकती हूँ? उन्होंने कहा आप जो हो, मेरे अध्यात्मिक नेत्र हो। जैसे की आप कैसे देख पाते हो, नेत्रों के कारण हैं की नहीं। आप रोशनी में खड़े हो। पर अगर नेत्र नहीं हैं। तो देख, सकोगे और मान लो। आपके बड़े अच्छे नेत्र हैं। ट्वेंटी फाई ट्वेंटी बड़ी अच्छी नजर है। आपकी और अगर रोशनी नहीं है तो दे सकते हो। रात को कभी पॉवर फेलियर हो जाता है, आँखें हैं और आप 1 दूसरे को देख नहीं सकते है की नहीं। तो देखने के लिए आपको रोशनी भी चाहिए और आँखे भी चाहिए। केवल आंखों से काम नहीं चलेगा, केवल रोशनी देवी काम नहीं चलेगा। तो उसी प्रकार देवा हूती ने कहा आप जो हो मेरे अध्यात्मिक नेत्र हो, आप मुझे शिक्षा। 2। तो बेटे ने ये प्रश्न पूछा। सुना तो बहुत प्रसन्न हुए। जैसे की आप भागवत के प्रथम स्कंध में पढ़ते हो की। जब शुगदेवगोस्वामी से परीक्षित महार ने पूछा 1 बड़ा महत्वपूर्ण प्रश्न? उन्होंने पूछा, जिस व्यक्ति का अंत आने वाला है, उसे क्या करना चाहिए? शुकदेव स्वामी ने क्या कहा? इस प्रश्न का उत्तर पूरे विश्व को लाभ देगा है कि नहीं? वो बड़े खुश हुए। जैसे की आप भक्त जन आप से कोई आता है और पूछता है वाइट यू चंड, हरे कृष्ण। तो आप खुश हो जाते है की नहीं? अगर कोई आके आपसे पूछता है मुझे भी बंदर ले जाओ तो आप खुश हो जाते हो न? अगर कोई आपको कहे मुझे भी 1 गीता लाके 2 आप खुश हो जाते है की नहीं? उसी प्रकार संत महात्मा खुश हो जाते हैं। जब वो देखते हैं की भक्ति का कोई गिराक मिल रहा है। जैसे साधारण भाषा में, अगर आपको कोई गिराक मिले तो आप खुश हो जाते हो, है कि नहीं है, कैसे? ठीक है, गिरा मिलता है तो सोने का, तो कोई गिराक मिले, तो आप खुश हो जाते हो। तुलसी प्रकार जो भक्त जन हैं, वो भक्ती के गिराहों की खोज में और भक्ति के गिराखोंके खोज के लिए कॉलेज में जाते हैं, प्रचार करने के लिए सडकों में जाते है, घर में जाते हैं, गाँव में जाते हैं, बैल गाड़ी में जाते हैं, पद यात्रा करते हैं, तो भगवान ने बड़े प्रसन्न हुए थे माता के प्रश्न को सुन कर, जैसे कि शुकदेव को स्वामी बड़े प्रसन्न हुए थे। प्रेक् महाज के प्रश्न को सुनकर तो बेटे ने कहा माता आप इस जन्म मृत्यु के संघर्ष से छुटकारा पा कर सकते हो भक्ति योग के माध्यम के द्वारा। और उन्होंने कहा की भक्तों की संगत के द्वारा, जब हम भक्ति योग में जुडते हैं तो इसके कारण जो भौतिक इंडिया त्रिप्ती जो भौतिक आकर्षण है वो कम हो जाता है और वो कम हो जाता है। तो इसके द्वारा भक्ति में आगे बढ़ते हो। और ये जो कृष्ण भक्ति का जो साधन है, ये बड़ा सरल साधन है जिसको हर व्यक्ति अपना सकता है केतन महापर्व भगवान है। उन्होंने कहा था विदयाचिजनगिगराम प्रचार विश्व में जितने गांव हैं, गलियां हैं सड़क देश में सब जगह क्या होगा, मैं नाम चल, आज भक्त स्वामी प्रपज के प्रयास के कारण विश्व के हर कोने में लोग कृष्ण भक्ति को अपना रहे हैं। मैं पिछले महीने पाकिस्तान में था, लगभग 1 हफ्ते के ले और वहाँ मुझे 1 उर्दू के बहुत बड़े प्रोफेसर मिले थे। तो उन्होंने कहा की when i read your bagwat get such dep, noleg the never got to men sours? उन्होंने कहा कि जब मैं तुम्हारे भागवतम को पढ़ता हूँ, वो हमारे भागवतम एडिटिंग कर रहे हैं उर्दू में, तो कहते हैं जब मैं भगुतमकोपढता हूँ, फिर मुझे इतना गहरा ज्ञान मिलता है कि मुझे और किसी स्थान से प्राप्त नहीं हुआ। तो उसी प्रकार ग्रंथों का अनुवाद विश्व की लगभग हर भाषा में हो गया है। कोई भाषा शायद नहीं है, 1 भाषा है जिसका नाम है पिजंस, इंग्लिश, आपने, सुना, पिजंस इंग्लिश। ये भाषा को विश्व में कोई 5000 लोग बोलते हैं। बस फिजी के पास 1 आयलैंड वो 1 छोटे से आयलान की मात्र भाषा है। जिसको बोलते हैं उस भाषा में भी कई ग्रंथ का अनुवाद हो गया और 5 लोग भाषा को तो सारे विश्व में 2 ग्रंथ को हरे नाम को अपना रहे हैं क्यूँ? क्योंकि वो देख रहे हैं कि ये जो महा साधन है, इसका हर व्यक्ति उपयोग कर सकता है। तो कपिल देव। भगवान ने कहा कि भक्तों की संगत में आ कर, भक्ति की विडियो का पालन करके भौतिक आकर्षण का जो चस्का है, वो टूट सकता है। देखा जाए भौतिक आकर्षण का चस्का सबको है या नहीं। सच बात है। मुझे वह कह रहा था कि पूना में लोगों को चस्का नहीं है, है जी भौतिक आकर्षण का चस्का अनुकूल करने के लिए आपको कोई स्कूल में नहीं जाना, पड़ता ही जाना पड़ता है। बुरी आदतें जो हैं खुद ही आदमी सीख जाता है। नहीं कोई स्कूल, कॉलेज, गुरु की। तो इस आकर्षण को कैसे तोड़ा जाए। आकर्षण को तोड़ना इतना सरल तो नहीं हैं। भगवान। खुद गीता में कहते है देवी माई, मामा, माया दूर है। पर अगर आप भी आकृषण को तोड़ना चाहते हो, घटाना चाहते हो, समाप्त करना चाहते हो तो भक्तों के संग में भक्तियों का पालन करना आवश्यक है। भक्तों की संगत की आवश्यकता है। ध्रुव। महाराज जंगल में जा रहे थे भगवान को खोजने के लिए। क्यूँ क्यूकि? उनकी सौतेली माँ ने उनका अपमान किया था। वह प्रयास कर रहे थे। पिता की गोद में बैठने के लिए। पिता का आकर्षण था। सौतेली माँ के प्रति। सौतेली। माँ ने कहा है भारत, तुम अपने पिता की गोद में नहीं बैठ सकते। क्यूं? क्यूं? क्यूं? क्यूंकि तुमने दे गर से जन्म नहीं लिया। बाप चुप रहा। इंग्लिश में कहते हैं हेंडपैक्टहजबें जिसमें जिस घर में पत्नी का राज्य चलता है, हिन्दी में। पता नही क्या कहते है। इंग्लिश में कहते हैं हैं पैक। तो वह इतना बड़ा हेंड पैक थे, बिलकुल चुप रहे। जो बेटा था, दुखी हुआ। रोते रोते माँ के पास गया। माँ ने कहा मैं तो तुम्हारा सहयोग नहीं दे सकती। कौन दे सकता है? या सुना जाता है? भगवान दे सकते हैं। भगवान कहाँ प्राप्त होंगे? कहते हैं जंगल में। तो ध्रुव ने निर्णय कर लिया। अब मुझे जंगल में जाना है भगवान को खोजने के लिए। जैसे ही अपने बहल को छोड़ कर जंगल की ओर जा रहे थे, वहाँ कौन पहुँच गए। है ग। नारद मुनि जी ने कहा हे बालक, तुम गुस्से में कहाँ जा रहे हो? मैं जाता हूँ भगवान को खोजने के लिए। कहाँ कहाँ? जंगल में। तो नारद मुनि ने वही कहा जो आपको लोग कहते हैं जब आप मंदिर में आते हो, जब आप मंदिर में आते हैं, आपके रिश्तेदार और मित्र को क्या कहते हैं? क्या कहते हैं? यह कोई उम्र थोड़ी है मंदिर जाने की, कहते है। अगर 20 साल की उम्र में आओ, तो घर वाले कहते हैं अरे भाई, ये उम्र थोड़ी जाने के लिए, 40 साल की उम्र में आओ ये उम्र थोड़ी जाने के लिए। फिर सरकार ने रिटायर कर दिया। 60 साल की उमर में आओ ये थोड़ी उम्र जाने के लिए। भगवान के पास तो क्या है? भगवान के पास जाने के लिए। जब तुम अंधे हो जाओ, बहरे हो जाओ, लंगड़े हो जाओ, गूंगे हो जाओ। जब कोई आपके पास। 1 मिनट बैठना नहीं चाहता जा। जा बंदर है, नहीं खैर। नाद मुनि की इच्छा थी ध्रुव की परीक्षा ले, गुरु का फर्ज है कि शिष्य की परीक्षा ले। तो नारद मुनी ने कहा अरे भाई, ये भगवान को खोजने की आयु थोड़ी है। ये तो खेलने कूदने की आयु है। जाओ खेलो कूदो कहा? भगवान को ढूंढने जा रहे हो। लोगों ने कहा कि अगर आप मेरा सहयोग देना चाहते हो फिर तो मैं से बात करूँ, नहीं तो मुझे छोड़। 2 जब नादरमुनीजीने देखा की ये तो बड़ा दीर्ध है भगवान को खोलने के लिए, तो फिर उन्होंने उन्हें उपाय दिया। क्या था उपाय भगवान के मंत्र का उच्चारन, तो उसी प्रकार हमे दूर हो जाना चाहिए। टमेंट किस के लिए, भागवत प्राप्ति के लिए, भागवत। गीता में बड़ा सरल उदाहरण देते हैं। प्रापाजीबहुत सरल उदाहरण देते थे, जिससे हर व्यक्ति परिचित हो सकता। 1 में चिड़िया के बच्चों को सागर ने छुड़ा लिया। उस पक्षी ने सागर से कहा मेरे बच्चों को लुटा। 2 आपके बच्चों को कोई चुरा ले तो आप कहोगे न मेरे बच्चों को लौटा 2 तो पक्षियों को भी बच्चों से प्रेम रहता है। सागर ने हंस के कहा मैं तुम्हारे बच्चों को नहीं लुटाऊंगा, भूल जाओ ना। तो पक्षी ने क्रोधित होकर कहा तुम नहीं लुटाओगे, मैं तुम्हे सुखा दूंगी। आप 1 छोटी सी चिड़िया के मुँह में कितना पानी आ सकता है। आधा टीस्पून है। अब आधे टीसपून भारत सागर को सुखा देंगे। खैर चिडिया ने निश्चित कर लिया कि मैंने अन्न को वापस प्राप्त करना ही है। तो उसने सागर को सुखाना शुरू कर दिया। इतनी देर में सूचना पहुंच गई गिर्दा के पास। और गुरुता ने आकर कहा, सागर से लौटा लो, इस चिड़िया के बच्चों को मैं तुम्हें सुखा दूंगा। फिर चिड़िया ने सागर ने घबरा कर तो बच्चों को बता दिया। तो उसी प्रकार संतों ने कहा है हमें दे होकर इस भक्तियों के मार्ग में जुड़ना चाहिए। और आप क्या देखते हो? जब जुड़ते हो, कई बार विचलित हो जाते हो, कई बार देखते हो, बड़े उत्साहित हो, कई बार देखते, उत्साह कम है। सच बाद। तो इसके लिए क्या आवश्यकता है? यह आवश्यकता है कि हम भक्ति योग के जो नियम हैं, जो विधियां हैं, उनका हम बकायदा पालन करेंगे। अगर हम भक्ति योग के नियमों का पालन करेंगे, वे हम भगवान के शरणगत हो पाएंगे। तो इसलिए कपिल देव भगवान ने कहा की आपको भक्तों के संग में रहना चाहिए। भागवत चौथे स्कर में आपको नारद मुनि जी की शिक्षा मिलती है। और कई बार हम जब भक्ति में जुड़ते भी हैं। हम कहते है अरे भाई हमारी 3 जिम्मेदारियां हैं, है न? ये जिम्मेदारी है, यह जिम्मेदारी है। आप जैसे रहते हो। आजकल के जमाने में कितने प्रकार का टैक्स सबको भरना पड़ता है। आपने कभी गिनती किए? आजकल गिनती करना बेकार है। आपको बिजली का बिल बनना पड़ता है, बिजली मुफ्त है। यहाँ 1 देश है तुर्कमेनिस्तान वहाँ बिजली मुफ्त है। तो आप को वहाँ जाना। बिजली का बिल बहुत जाता। आपको पानी का बिल भरना पड़ता है, सेल्स टैक्स भरना पड़ता है, इनकम टैक्स भरना पड़ता है। 50 सौ प्रकार के टैक्स आप सबको भरना पड़ता है। इसी प्रकार 33 करोड़ देवता देवियों के प्रति आपका आभार है कितने आपने सब का कर्जा चुकाना है। आपको इंद्र देवता क्या देते हैं बारिश आप तो अभी सागर का पानी आता है, पानी भेज रहे। इंदिरा जी और के पानी का टैक्स था और पानी रोज महंगा होते जा रहा है। मैं पिछले साल वॉशिंगटन में था तो वहाँ 1 आर्टिकल था जिसमें लिखा था कि ए एवरी टाइम ऑफ फ्लश टॉयलेट फ्लश चला का पानी का बिल ता है, 50 सेंट का मतलब की पचीस रुपए। तो आप पानी पीते हो, उसका भी आपको देना पड़ता है। तो इंद्र जी आपको देते हैं पानी सूर्य के देवता, आपको दे दे। सूर्य की रोशनी। आप आजकल सारे विश्व में लोग चिल्ला रहे हैं। यूटिलिटी इलेक्ट्रिक बिल में आप थोड़े महीने थोड़े घंटे बिजली इस्तेमाल करते कितना बिल हर महीना घर में भाई साहब ढाई 3000 अगर मैं आपको बोलू की हमारे दिल्ली मंदिर का कितना आता है तो आपका हार्ट हो जाएगा। साढ़े 6 लाख इलेक्ट्रिक बिल, दिल्ली, मंदर का हो और लेटर इस्तेमाल करते थोड़े घंटे। दिन में तो सूर्य के देवता आपको रोशनी है। इंद्रा जी, आपको हा फिर विवस्वान चन्द्रा जी से आपको अलग अलग सुविधा दे रहे हैं, वायु के देवता वायु दे रहे हैं। इन सब के प्रति आपका कर्जा है। अभी आप कहोगे 33 करोड़ कहा करोड़ पहचाने भी कैसे कितनोंका कर्जा देना तो इसे नारद। मुनि जी ने प्रचेतस को कहा। चौथे स्कंद में जिस प्रकार आप पेड़ के जड़ में पानी डालते हो तो पेड़ में हजारों हजारों पत्ते होते हैं, सब में खुराक पहुँच जाती है कि नहीं? आप अलग अलग पत्तों में जाकर पानी पिलाते हो, 1 ही जगह पिलाते हो न। आपके शरीर में कितने सेल्स हैं? लाखों शरीर के कितने अंग हैं। और जब आपको भूख लगती है तो सिर भी कमजोर है, कमजोर पैर भी कमजोर है की नहीं। तो आप क्या करते हो? थोड़ा प्रसाद हाथ में डालते हो, थोड़ा शेर में डालते हो, थोड़ा पाँव में, थोड़ा कंधों में क्या करते हो? कहाँ हो में पेट में डालने से क्या परिणाम होता है? पूरे शरीर में है, कब आ जाती है? उसी प्रकार मोदी जी ने कहा क्या कृष्णा भक्ति करने से सारे जो हमारी अनेक बहुत जिम्मेदारियां हैं। निस्तार के प्रति, देवताओं के प्रति, समाज के प्रति, सब को आप चुका देते हो किससे 1 कृष्ण भक्ति के द्वारा। तो शास्त्रों का निर्णय ये है की भक्ति योग 1 माध्यम है जिसके द्वारा हम जीवन के लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। ये है गीता का निर्णय, ये हैं भागवत का निर्णय, ये हैं चेतन चरतमीताकानिणणय चेतन में कृष्ण कहते हैं कृष्ण सूर्य, सम माया या अधिकार। यहाँ कृष्ण बताए नहीं माया। अधिकार कहते है। जैसे कि जहाँ सूर्य की रोशनी हो वहाँ अंधेरा पर महसूस होता है। उसी प्रकार जहाँ कृष्ण है वहाँ माया का प्रभाव नहीं रहेगा। तो अभी असली प्रश्न यह है कि कृष्णा हर समय हमारे साथ कैसे रहे? और जैसे आप जानते हो, ये सम्भव है भगवान के दिव्य नामों के उच्चारण के माध्यम के द्वारा। आज सुबह हम भाग बज कर क्लास दे रहे थे? ये तीसरी क्लास है सुबह क्लास के 8 बजे। तो बस भगत क्लास में कहा जा रहा है कि हमें भगवान की पूजा करनी चाहिए उनके दिव्य नाम के उच्चारण के द्वारा। क्यूँकी इस कलयुग में भगवान अवतरित होते हैं? कैसे उनके दिव्य नामों के माध्यम के द्वारा। भौतिबरीव्यक्ति कभी समझ नहीं पाते की आप भगवान के नाम का दिन रात कैसे कर सकते हो? विदेशों में वो कहते हैं जब प्रभु पा जी ने यह हरे कृष्ण दोलन की स्थापना की। विदेशों में तो विदेशी लोग क्या कहने लगे यूँ हरे क्रिष्ण ब्रेनवॉश तुम्हारे कृष्ण। तुम्हारा जो दिमाग है वो धुल गया है। किसी ने जादू कर दिया है। क्या जादू तुम दिन रात या हरे कृष्ण, हरे कृष्ण बोलते रहते हो। सुबह हरे कृष्णा रात को। हरे कृष्ण तो कहते है। कैसे बॉस कैसे सम्भव है? देर पॉसिबल यू टेक दे सेम नेम गेन। अगेन 1 ही नाम का उच्चारण दिनरात करो। क्यूंकी भौतिक समाज में आपका क्या अभ्यास क्या आप आपके टीवी स्टेशन में 1 ही गाना बार बार सुनते हो, 1 ही गाना बार है, 1 सिम, 1 ही सिनेमा सारा साल दिखाते लोग थक जाते हैं। 1 नया नाम का उच्चारण दिन रात कर पाते है, क्यूँ? क्यूँकि भगवान ने इन नामों में पूरी शक्ति डाली है। जैसे आज मैंने देखा आप भक्त हरी नाम का बहुत शौक है। आप लोग तो हरी नाम ही दिन रात करना चाहते हो। हरिदास ठाकुर 1 उदाहरण है जो की रोज 3 लाख बार जाप समाप्त करने से पहले न सोते थे, न खाते थे, न कुछ बोलते भी थे किसी के साथ, तो 3 लाख बार जाप करते थे हमारे परम गुरु भक्त ठाकुर उन्होंने 10 अपना प्रचार का डॉलर शुरू करने से पहले माया बोर्ड में 10 साल के लिए, 1 साल में रह कर 3 लाख बार जाप किया नाम का 10 साल के लिए, फिर वो प्राप्त करके गए 4 दोलन को आगे बढ़ाना। तो आप ये हिंदी नाम का उच्चारण दिन रात कर सकते हो। क्यूँकि इन नामों में और भगवान में अंतर है? नही है तो यह ज्ञान आपको अनुभव करना पड़ेगा। रापा उदाहरण देते थे शहर की बॉटल आपको दिखाएंगे कहेंगे अंदर शहद मीठी है तो विश्वास करना। तो चखना पड़ेगा है की नहीं, देखने से थोड़ी होगा विश्वास। उसी प्रकार आप हरी नाम का उच्चारण करोगे। विराम समझ पाओगे की आप दिन रात करोगे तो थकोगे नहीं, पर हम इतने पतित स्थिति में है दिन रात का तो सपना छोड़ो 2 घंटा भी बड़ी मुसीबत से करते हैं कि नहीं? सच बात है बड़ी मुसीबत से शोला माला का कोटा भी लिया हो, सो माला माला हो गयी। तो ऐसा लगता है बहुत भारी भोजा उठा लिया क्यूंकी हमारा आकष्नहीहैभगवान के नामों के प्रति। तिन जी स्वयं भगवान हैं, प्रकट हुए थे भक्त के रूप में। तूने कहा हे भगवान, हालांकि आपने अपनी पूरी शक्ति दालिया दिवे। नामों में मेरा दुर्भाग्य यह है की आपके नामों के प्रति मेरा आकर्षित दिन नहीं है। इसीलिए जप करते करते आपको नींद आ जाती है। खाना खाने का दिन आती है। कभी अभी देखो प्रवचन के बाद आप सब को प्रसाद खिलाएंगे और देखे की कोई सो रहा है, कोई घर में भी सोता है, प्रचार प्रशार जब टेबल में आता है तो बीमार व्यक्ति भी ठीक हो जाता है। क्यों की प्रसार के प्रति हमारा आकर्षण है। भाई नाम के पति इतना गहरा, आकर्ष हल्का आकर्षण है, वो इतना गहरा नहीं है, हल्का नहीं होता तो आप यहाँ क्यों आते? तो इसलिए कृष्ण दास का राज्य कहते हैं कि जहाँ कृष्ण है वहाँ माया का प्रभाव नहीं, जैसे कि जहाँ रोशनी हैं वहाँ अंधेरे पन का प्रभाव नहीं। तब हमें इस जीवन को ऐसे चलाना है के हर समय कुछ न हो हमारे साथ। और ये सम्भव कैसे है? अगर आप भगवान के नामों का उच्चारण करोगे तो हमारी आप से ये विनती है कि आप चाहे किसी भी आश्रम में हो, चाहे आप जिस हो, वाना परास्त हो, सन्यासी हो, ब्रह्माचारी हो, ग्रामीण हो, छात्र हो, भय हो, सदा हो। आजकल हिंदुस्तान में रोज 12 में पढ़ते ऊँची जाति नीची जाती है। और हम हम तो स्पष्ट कहते हैं। अरे भाई, इस कलयुग में कोई ऊँची जाति का नहीं है, हम सब ओबीसी है। कल शुद्र सम भागवतम का कहना है सहबीसकलिगमेशुद्र विचार के हैं न, ऊँची जाती, नीची जाती, दाइशी से थोड़ी निर्णय होता है। वो तो आपके आश्रम से निर्णय होता है, अपने व्यवहार से तो अपनी बुद्धि से होता है। आचरण तो आजकल सब का 1 प्रकार से है, दुष्ट सभी शुद्र है। तो भागवत। आप का कहना है की कलयुग में दोषी दोषी सब शुद्ध बूंदी के हैं। और अगर हमें अपने स्वार्थ को अपनी असली सुख चाहिए तो क्या है उपाय भगवान के नामों का ऊँचा न और ये हरी नाम का उच्चारण इतना सरल है कोई भी कर सकता है किसी भाषा में भी, मैं सारे विश्व में यात्रा करता हूँ, हर प्रकार के व्यक्ति मिलते हैं, मैं आज तक किसी को नहीं मिला। जिसने कहा आई कैन नॉट प्रणाम, हरे कृष्ण, कोई नहीं मिला, जिसने कहा मैं हरे कृष्ण का उच्चारण नहीं कर सकता, बड़ी सरलता से हर व्यक्ति कर सकता है। और आप सब का सौभाग्य है कि आपका जन्म हुआ। भारत भूमि में, आज हम इच्छा रखते है की हमारा जन्म हो। अमेरिका में कहा गया है कि भारत भूमि में जो जन्म है वो बड़े भाग्यवान हैं, जो देवता हैं देवता वो भी तरस से भारत भूमि में जन्म लेने के लिए। और आप लोग तो भारत भूमि जन अपने ले भी लिया क्यूँ? क्यूँकि यहाँ बचपन से ही आपको कृष्ण और राम की महिमा का ज्ञान मिलता है। और अगर आप इसका लाभ नहीं उठा तो दुर्भाग्यशाली हो, लाभ उठाओगे तो भाग्यशाली बन जाओगे। खैर आप सब जो यहाँ उपस्थित हो, आप आवश्यक ही भाग्यशाली हो। क्यूँकी नेता आप यहाँ क्यों आते है। आपको आर्थिक लालच मिल रहा। आजकल कई स्थान है भारत में, जहाँ आप जाओ तो वो आपको पैसा देंगे। स्थान 1 धर्म है। अगर आप उनके धर्म की लड़की से शादी करो तो आपको 1 लाख रूपए बक्शीसमेलेगे। अगर आप ये करोगे कई जगह 2 लाख मिलता है। पर यहाँ आने के लिए कुछ लाभ नहीं, आर्थिक लाभ आप आ रहे हो। क्यूँ? क्यूंकि आपको कृष्ण भगवान की शिक्षा द्वारा आनंद अनुभव हो रहा है। सब से यही निवेदन है कि जो चेतन महा प्रभु जी का सन्देश है, उसका लाभ उठाओ भगवान श्री कृष्ण का संदेश है। उसका लाभ उठाओ कृष्ण भगवान के सन्देश में दिन है। महाप्रभु जी के संदेश में कोई अंतर नहीं। भगवान ने क्या कहा? हम ने क्या कहा है? पापा जी ने क्या कहा? सुनें तो कृष्ण का गुरु महात्मा है। कहते हैं सुरेंदर टू मी हम भगवान है। सारे विश्व में क कोई भी भक्ति दादा स्वामी की संस्था के नाम से जानता है? कोई नहीं जानता। सब जानते हैं। हर 1 कृष्णा आंदोलन है नहीं। क्यूँ प्रापर जी ने कृष्णा को आगे रखा और अपने आप को पकड़ किया उनके कुछ सेवक के रूप में। तो प्रौपर जी के सन्देश में, कृष्ण भगवान के संदेश में। ये दिन, सन्देश में कोई अंतर नहीं। और वो सन्देश क्या है? भगवान के शरणागत हो जा। अगर हम भगवान के शरणागत नहीं होते होंगे, तो इन दियों की शरण लेनी पड़ेगी। हम कहते है, हम तो बड़े स्वतंत्र हैं। कहाँ हो स्वतंत्र? आपके कितने मालिक हैं? आपके नेत्र? आपके मालिक हैं। नहीं। तो कहते चलो, गन्दी फिल्म में देखो देखने जाते हो। आपके कान के नहीं, हमको बहुत म्यूजिक चाहिए, हमको ले जाओ। यहाँ हम घूमने के लिए। आपको कितनी मालक हैं? कई माल, सब खींचने। आपको कभी खींचते हैं, कभी कान खींच रहे हैं, कभी जीप फीचरी, कभी नाक। तो इन सब मालिकों की सेवा करके और सेवा करने के बाद क्या क्या, कहेंगे, क्या किया तुमने अपने बच्चों को? माता पिता बड़े परिषम से पालते हैं, बड़े बच्चे, क्या कहते हैं? क्या किया? मेरे कहते है। नहीं। तो ये है प्रकृति कलियुग का लक्षण, चाहे कितना भी प्रयास करो, गाँधी जी ने देखो देश के लिए कितनी सेवा की, पर किसी व्यक्ति ने ही चला दी। तो ये है भौतिक समाज का रूप। आप कभी भी किसी को संतोष नहीं कर सकते। कृष्ण भगवान को आप थोड़ी सी, कुछ सेवा भी करोगे, भगवान आपके आभारी हो जाएंगे। और ये सेवा आपके साथ हमेशा रहेगी। और सेवा हम आरम्भ करते हैं किस माध्यम से, इस जीव के माध्यम से। तो हर 1 कृष्ण मंद का जवाब कीजिये। जैसे महा प्रभु ने कहा भक्त कहते हैं सुखे दुखे सुख में, दुख में, हर परिस्थिति में, हरी नाम का जाप करो थाको, वाणी थाको, सदा, हरी बोले थाको हो, वाना प्रस्ता हो, कुछ भी हो, हरि नाम को जप जरूर करो। और यही है सुख का साली। तो संक्षेप में महातब्जी का कहना है, है ना करो, गीता भागवत का अध्ययन करो। हर रविवार को आओ मंदिर जैसे जानती हो, योजनायें हैं, नए, the no vr the न्यू time योजना है नया मंदिर बना, आप सब चाहते हो, नए मंदिर बने, का पूना में या बॉम्बे में पूरा बन जाएगा। सिर्फ इच्छा प्रकट करने से, ये थोड़ी मेहनत करनी पड़ेगी। इच्छा प्रकट करने से नही। भगवान ने अर्जुन को क्या कहा? युद्ध में लड़ो। अर्जुन ने कहा नहीं, नहीं, मैं नहीं, लड़ना चाहता, नही, निमित महात्मा बन के अपना करते हुए करो। तो भगवान वैसे कुछ भी कर सकते है। तो कुछ कठिन नहीं है। और भगवान आप सब को निमित बनाना चाहते हैं। गुना में 1 बड़ा सुन्दर राधा, श्याम सुंदर का मंडल बनाने के लिए। तो आप सब अब सब तैयारी करो, सबको ईंटें उठा कर लानी पड़ेगी करोगे, सीमेंट की बोलिया लानी, पड़ेंगी स्टील लोया उठा कर लाना पड़ेगा करोगे, अगर आप लोया ले, आओगे उठाकर लकड़ी ले, ओगे उठाकर और ईंट ले, आओगे सेमटलिआओगे बाकी तो केशव कर दे। फिर कुछ कठिन नहीं आई? तो भगवान हम सब को माध्यम बना रहे हैं। उनकी सेवा में जुड़ने के लिए। असल में भगवान को किसी की आवश्यकता नहीं। न आपकी, ना हमारी हमें मौका देने, सेवा में जुड़ने के लिए, अपने आप को शुद्ध बनाने के लिए, आपको मौका देने, सेवा में जुड़ने के लिए, अपने आप को शुद्ध बनाने के लिए और अगर हम इसका लाभ उठाए तो वो है भाग्यवान व्यक्ति, तो आप सब जब कीजिए गीता भागवत पढ़िए हर रविवार को आइए आपके पूरा शहर में, कोने कोने में सत्संग कार्यक्रम होते है उनका लाभ उठाइए। आज अपने घर में सत्संग शुरू कीजिए और घर, घर, गाँव, गाँव, गली, गली, जाकर लोगों को क्या कहा है नाम का चेतन महा प्रभु जी ने अपने साथियों को भेजा था प्रचार के लिए, उनमें से 1 जोड़ी थी नित्यनंद की और हरिदास ठाकुर की। तो जब वो नंबर दिन में जा रहे थे घर पर 4 करने के लिए। कई लोग तो उनका स्वागत करके कहते थे आओ आओ, अब आ गए हमारे घर को घर को पवित्र बनाने के लिए। कई कहते थे न, तुम अंदर नहीं आ सकते, कई कहते थे जासूस आ गए हैं देखने के लिए, अंदर क्या है। फिर बाद में आयेंगे चुराने के लिए। तो ये स्वागत किस का किया गया था नंदी भगवान हैं तो प्रचार के दौरान कई बार अपमान भी सहना पड़ता है। तो आपको क्या लेना चाहिए अपमान सहने के लिए और अगर आप को प्राप्त करोगे कृष्ण भक्ति की शिक्षा का अनुकूल करोगे। इस तुमारा आप असली सुख प्राप्त कर सकोगे। तो हरी नाम को जोड़िए जीव के साथ हम भक्तों की भगवान से यही प्रार्थना होनी चाहिए कि हर जन्म में हमें सेवा का मौका मिले। क्यूंकि ये सेवा का मौका ही असली धन है और जो भक्त हैं इसका लाभ उठाते हैं। इस शिक्षा का, अपने जीवन को असली सुख पहुंचाने के लिए इसका लाभ उठाइए। हरे क्रिश्ना हाई, क्रिष्णा हारे, क्रि, कृश्ण हारे हारे हारे हाल नाम ले हाल।
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