भक्ति विनोद ठाकुर और गदाधर पंडित तिरोभाव दिवस | 21.06.2020 | Delhi | Srila Gopal Krishna Goswami

In this segment of the Tirobhav Diwas lecture, the speaker reflects on the hardships of contemporary life—particularly the COVID‑19 pandemic, mental‑health crises, and the lure of material success—while urging listeners to rely on the divine facilities granted by God. He stresses that every comfort and opportunity is a blessing from the Supreme and should be used for devotional service. The talk warns against self‑destructive actions such as suicide, describing them as leading to further suffering, and highlights the importance of chanting the holy name of Krishna, remembering the teachings of Bhakti Vinod Thakur and Gadadhar Pandit, and maintaining humility. The speaker also critiques superficial pursuits of fame and wealth, emphasizing that true fulfillment comes from sincere service to the deity, as exemplified by the long‑standing caretakers of the deity’s image. Throughout, he calls for collective compassion, urging the community to support each other spiritually during challenging times.
Chapters
ओम नमो भगते वासुवा भगते वासुदेवा ओम भगसेवासुवा omiaaa बन्दे हम श्री गुरु श्री रुपम सलाना जम से हम वेतमसवहुसमpaसैस श्री राधा कृष्णा पधान सागनललेजाशिवशाक हे कृष्णा करना सिंधू लीना। wncaकaपस kupa ya shri kishna chetan shri। जैसे आप जानते हो आज बहुत ही शुभ दिन है न सर ठाकुर जी का तिरोभाव और साथ में फिलहाल पंडित जी का सिर। तो पहले हम भक्ति ठाकुर जी का प्रणाम मंत्र का उच्चारण कर सकते हैं नमो भक्त धाया सचिन नाम शक्ति सुर पाया। who would look or over miespecwutobesiness is in to such in and the buctirodwotransdendal energy chitinamapois sick followr on the goisomes एल बाई कहा जा रहा है कि हम ने ठाकुर को प्रणाम करते हैं जो कि बड़े ऊँचे कोटी के वेस्टन हैं और जो लोग के स्वामी की शिक्षा के आधार पर चार्ज कर रहे हैं। ठाकुर जी के में बोध को चेक करने के लिए 1 ग्रंथ हुआ था इसका नाम गोसवामी जिसमें कहा गया था गोस्वामी थे और सातवे कौन है ठाकुर के होने के गलत हाथों में आ गया था और लोग कृष्ण बकरी भगवान के नाम पर सहारयापनप्रकटकले और सहारिया व्यवहार में लड़कियों के साथ खेलना और हिंदु समाज में वैसा का स्थान इतना गिर गया था कि कोई अपने आप को बुलाने से मादा, किसी को बोलो तुम वैठना हो क्या उस से जा कर। समाज सान बहुत गिर गया था ठाकुर और है तो सीधा वहाँ धान सहायं के हाथ में था, भगवान ने भक्त ठाकुर को भेजा इस दान को ठीक रूप से ठाकुर का जन्म हुआ था एटी थर्टीएट बंगाल में 1 बड़े धनी खानदान, छोटी आयु में ही उन्होंने अच्छा ज्ञान प्राप्त कर लिया था अनेक भाषाओं में उनका ज्ञान पड़ गया था और उन्होंने क्योंकि धनी खान में जन्म लिया था इसलिए बोले अच्छे से शिक्षा प्राप्त हुई और छोटी आयु ही अंग्रेजी, उल्लू सब भाषाएँ सीख ली थी सी ठाकुर छोटी आवाज है अंगेजी भाषा में, और उन्होंने अंग्रेजी सरकार में उन्हें बेसिक जिम्मेदारी की नौकरी मिली उन दिनों में बेसिक मेरेसे संक्षेप में भरती और ठाकुर जी की जिला में चर्चा करेंगे माफी में भी ठाकुर जी का जो 1 ग्रंथ है बड़ा महत्वपूर्ण है उस आपको सुनाई दे रहा है की मे बोल सुनाई दे रहा है, मैं बैठ गया था, सुनाई दे रहा है। तो उन दिनों में अंग्रेज सरकार का राज्य था और सबसे ऊँचा बल जो भारतीयों को मिलता था ना डेस्क, मैने भक्तिन और ठाकुर बहुल मेंती, और उन्हें ये पद प्राप्त हुआ था और उन्होंने अपने जीवन में लगभग सौ ग्रंथों की रचना की अंग्रेजी भाषा में, बंगला भाषा में, ओड़िया भाषा में, ऑनलाइन भाषा में। और उन्होंने चेन महाप्रभुजी कर संदेश था उसकी क्यूंकि पुरे लिखे थे, उन्होंने बाइबल को भी अच्छी तरह पढ़ लिया था और उन्होंने ग्राम में कहा था जिसमें बाइबल की ट्रेन कम्बांडमेंट्स की चर्चा की थी। और जब वो ग्रंथ प्रकाशित हुआ तो कई बड़े अंग्रेज ही में अंग्रेजों ने कहा we want study the bible for book परसन ठाकुर ने बाइबल के कोटेशन को लेकर भागवत की, बिजली से समझा उन दिन में अंग्रेजों का ये ये भारतीय लिटरेचर है, उसका कोई वैल्यू नहीं है। हमारे पूरी अलमारी की किताबें भारत के 1 ग्रंथ के बराबर है। ठाकुर के मन में यह भाव कि वो स्थापित करें। ये जो बिलिक्स शिक्षा है, ये कोई कल्पना नहीं है। मईथोलेजीनहींहै ये वासफीताहैतोनोंने पहले क्रिश्न बाइबल को पढ़ा अनेक और वे सभा के पड़ा और इसके द्वारा लोग उनमें विश्वास पड़ गया। विश्वास पड़ा। दोनों ने भारत इत्यादि चेतन चतमीदाऔरयेपागा। उन्होंने यह स्थापित किया कि भागवत हम और चेतन चौतलवीदामें सबसे उत्तम ज्ञान है, सबसे ऊचा गया। तो ठाकुर जैसे हमने कहा भी ब्रिटिश सरकार के समय वो बन गए थे और उनका क्या काम था, उनका काम था जज का। आज भी भारत में ब्रिटिश सिस्टम है। शहर मे मैजिस्टेट होते है तो वही पोजिशन की वकील था और मैजिस्टेट के रूप में वो इतने तेज थे कि जो केस अंग्रेज वकील को 6 घंटे लगते थे सुनकर समान करने में उन्हें 5 मिनट लगे। तो 1 दिन में 30 से 35 कोर्ट के केस भक्ति ठाकुर सुन कर निर्णय दे देते थे। जिसके कारण जो वकील हैं उनके हृदय में इस हुए। देखा की ये इतना तेज है, हमें लगता है 6 घंटे केस करने में, ये 5 में केस को निपटा देता है। तो वो इतनी इतना आदर था उनका कि ब्रिटिश सरकार ने 1 स्पेशल रेलवे लाइन लगा दी उनके घर से कचारी दल जैसे आपने देखा नवदीप जाओ तो वकील ठाकुर के आगे को लाइन जाती है। स्पेशल रेलवे लाइन लगा दे जल्दी जा सके और बिना ठाकुर पूरा समय अपना भगवान की सेवा में लगा रहे थे ने सौ ग्रंथो की रजा की और सुबह से रात तक जुड़े रहते थे वान की सेवा में। उदाहरण के लिए अगर आप उनका शेड्यूल सुनोगे आपमें ये प्रेरणा आनी चाहिए। हम भी इसी प्रकार के शरीरों है जी कह रहे थे बस को सुबह के 5 बजे से लेकर रात के 10 बजे तक क्या करना चाहिए। फिर सेवा के नजर वो भगवत तंत्र भूल गए। भक्ति ठाकुर का उदाहरण देखो उन्होंने भी उदाहरण दिया। उदाहरण के लिए 8 से 10 रात को 2 घंटे से विश्राम करते थे, जाते देख कोर्ट चेहरे से आते थे। 2 घंटे विश्राम बस। फिर रात के 10 बजे से सुबह के 4 बजे तक ग्रंथों को लिखते थे पर भी यही करते थे। प्राजी अक्सर सारे 9 विश्राम करते थे, फिर 12 बजे 1 बजे जाकर सुबह 56 बजे तक अनुवाद करते थे ले जाते थे। तो बकी ठाकुर 10 बजे से रात के 4 बजे तक सुबह के 4 बजे दिखते थे। 4 से साढ़े 4 विश्राम करते है। आप को चाहिए आप लोगो को प्रयास करना चाहिए इस की नकल करने के लिए नहीं। ये सबसे अच्छा प्रेजेंट होगा भक्ति और ठाकुर जी के लिए। तो 4 से साढ़े 4 विश्राम करते थे साढ़े 4 से 7 जापा करते थे। जब 4 साढ़े 4 से 7 ढाई घंटे। वे 7 से साढ़े 7 लोगों को पत्र लिखते थे। आज के पास डेटा, फोन, कम्प्यूटर सब है कोई सुविधा नहीं थी लिखना पड़ता था सो साथ से साढ़े साथ क्रास साढे 7 से साढे 9 कुछ शास से पढ़ते थे रोज सारे रोड पड़ते परावा ने कई दवा में कहा red my prime book myself every day। फिर सारे 9 से 10 स्नान करना कुशा दम खाना ओ, उनकी खुराक आप खुराक सुनना चाहते हैं, उनकी है, मंदिर का खर्चा काफी बढ़ जाएगा, इस खुराक को आपने अपना लिया। उनकी क्या थी खुराक आधा लीटर मिल्क फल और केवल 2 चपा दे का चलेगा। शदी में लीटर, मिल्क फ्रूट, एन टू चबा लें। बस फिर 10 बजे जाते थे कचहरी कचहरी में, 10 से 1 बजे तक रहते थे। और जैसे मैंने कहा, वो इतने तेज थे, इतने प्रेसर थे कि 5 मिनट में कॉम्प्लीकेटेड से कॉम्प्लिकेटेड कोर्स पचाने this manas geli 5 मिनट में। तो इसलिए 1 दिन में 25 से 30 केसेस को समाप्त करते थे, डिस्पोस करते थे दोनो किसी वकील को इंडिया में 1 के स्कूल म करने के लिए 20 साल तक करते हैं। भक्त ठाकुर 5 मिनट में केस खत्म करते थे और फिर 1 से 2 घर आते थे प्रशाद खरने के लिए, फिर 2 ऐसी 5, वहाँपर कचेरी में सिकसनशेपमें 5 से 7 ट्रांसलेट करते थे संस्कृत किताबों को बंगला भाषा में बस 500, 7 और 7 से 8 प्रसादम स्नान और शाम की खुराक सुनोगे आधा लीटर। मिनट थोडा सा चावल और 2 छुपाते तो अच्छी लगी। खुराक हम इंटरव्यूस कर सकते हैं। भक्ति लो डायट, ये था उनकी खुराक। तो भक्ति नोट ठाकुर ने ग्रंथों को नवाज किया, उन्होंने यह स्थापित किया जेतना महाप्रभु का असली सिद्धांत क्या है ये जो सहज है पद जिसका प्रचार हो रहा था, ये बनावटी प्रचार है। उन्होंने ये एक्सपोज किया और उन्होंने अपने गलत के अनुमान में यथारूप संदेश को भक्ति। नोट ठाकुर में ये भी उनके भविष्य वाली थी, उनके भविष्य वाली थी के भविष्य में। 1 महारथी आयेगा कौन महारथी महारथी मतलब की जो कि चमत्कार कर सकता है। ये महारत ही होगा जो कि हर नाम को दुनिया के कोने को मिल जाएगा के महा प्रभु जी की बानी थी नगरादि, भगवान बनी थी कोने कोने में, यह नाम पहुंचा हमारे चारियों को पूरा विश्वास था, वानी तो बरती ठाकुर के भविष्य वाली थी। 1 महान राति आयेगा जो विश्व के हर कोने में है नाम को पुंचाएेगा और दूसरी भविष वाली थी जो विश्व के कोने कोने में फ्रांस, अमेरिका रशिया जापान, हर देश में वैसे भक्त क्या करते वैसे व भक्त होएंगे, यहाँ की हरी नाम का उच्चारण होगा और मायापुर धाम में सारे विश्व से लोग आयेंगे। बंगला भक्तों के साथ मिलकर मे नाम का, ये थी संक्षेप में भक्त ठाकुर के ठाकुर जब अंग्रेजी सरकार के राज्य में थे तो सरकार ने उन्हें कई कठिन कार्य भी हुए। उदाहरण के लिए 1 दिनारी नको सौपी थी जगनपुरी बंदर का ठीक निर्माण करने के लिए आज भी सरकार शासन करती है। जगनपुरी मंदिर का सो जो राजा था ओडिशा का, उसने चापलूसी करके एटी फोर थाउजन्ड रुपीज मंदिर के खजाने से चुरा लिया था। जब ठाकुर बक्सी को पता लगा। for those रूप, राजा ने गोल कर दिया, सजा दी, तुम भरो ये भूख लगा भगवान का इस वैल्यू के बदले में राजा था, बड़ा मान, महसूस किया, मेरी ऐसी बेस्ती हो गयी। राजा ने 1 खास यज्ञ कराया जिसमें 30 ब्राहमण थे। इस उद्देश्य के साथ की भक्ति ठाकुर हल्दियान हो जाए। और तीसरे दिन थी तीसरे दिन जिस दिन भक्त ठाकुर को मरना चाहिए था, राजा का बेटा मर गया, राजा ने ये किया था वकील ठाकुर ने उन्हें राजा को चोरी करते पकड़ा और भक्ति के समय जगनपुरी मंदिर में जो कमियां थी वो ठीक समय नहीं लगना, भगवान के बस से ठीक न फैलाने, जो भी कमियां थीं वो सब सुधार दिया। 1 और योगी सहुआन जो अपने आप को महा विष्णु का अवतार मानता था, इस सेना जोगी का के 2 साथी से शिव जी, ब्रह्मा जी से कहा मैं विsणyesivहैsiva कौन ब्रह्मा ये जो महा विश्णु था, अनेक प्रकार की हरकतें कर रहा था, उदाहरण के लिए लोगों की पत्नियों के साथ गल, काम लोगों के बेटियों, बहनों के साथ गलाम और जो अंग्रेज थे वो भी इससे खुश नहीं थे, क्योंकि इसका उद्देश्य ये था मैंने अंग्रेजों को भारत से निकाल देना है और मैं फिर भारत का राज्य करूँगा सो, वो लोगों ने शिकायत की यह हमारी बेटी के साथ, बहन के साथ, बेटे, पत्नी के साथ काम कर रहे है। तो भरत ठाकुर को ब्रिटिश सरकार ने भेजा हुआ क्यूंकि वो रेवोलूशन शुरू कर रहा था। ब्रिटिश सरकार के अगेंस्ट भक्तिन ठाकुर को पता था कि हिंदू सिपाही इससे डरते हैं, तो अपने साथ सौ मुसलमान सिपाईयों को ले आए और वो इस जंगल में इसका स्थान था। तो उन्होंने कहा किराना दादा इसी नीला के 34 अलग अलग वर्जन हैं, सो ठाकुर भक्त पहुचे उसकी कुटिया में और अपने साथ मुसलमान सिपाईयों को ले आए थे, उन्हें पता था को हिंदू सिपाई हाथ नहीं लगाया। तो मा विष्णु ने कहा मुझे पता है तुम क्यों आये हो? तुम जानते नहीं, मैं कौन हूँ, मैं हूँ महा विश्णु और मेरा उद्देश्य यह है अंग्रेजों को यहाँ से निकाल देना, उनके में शासन करूँगा। तो ठाकुर ने कहा उसने कहा मैं हूँ माँ विष्णु ये है, शिव है। तो अगर तुम महा विष्णु हो तो तुम जगनपुरी मंद में क्यो नहीं निवास करते? यहाँ जंगल में क्यों निवास कर रहे हो? और जगनाजपुरीकामंदरवो मंदर थोड़ी है, वो तो लकड़ी लकड़ी की मूर्ति है, भगवान थोड़ी है असली भगवान हूँ मैं इधर। और उसने जो भक्त ठाकुर ने सुना कि उसने कहा वो वो लकड़ी की मुर्जर लकड़ी है, मूर्ति थोड़ी है, उन्हें गिरफ्तार कर लो, वो मुस्ल सिपाही हो इसलिए लाये क्योकि। उन्हें पता था वो हिंदू सिपाही उन्हें गिरफ्तार नहीं करेगा। तो उन्हें पकड़कर ले गए। कुली व 14 दिन के लिए, कई जगह 14 पंद्रह दिन के लिए ये केस की हियरिंग हुआ, ठाकुर ने इसका इतना प्रभाव था, लाखों शिष्य थे, गुरु बड़ा बड़ा मोर्चा होता था। छोड़ 2 हमारे गुरु को और उन्हें गिरफ्तार करने के पश्चात भक्तिन। ठाकुर के जो बच्चे थे, सब बीमार हो गए, भक्तिन ठाकुर के 10 बेटे थे और जिनमें चौथे नंबर पर 6 बकरी। तो भगतिन ठाकुर ने कहा इसे गुस्सा करके इनको ले गए। हालांकि लोगों ने बड़ा बड़ा मोर्चा किया। छोड़ 2 छोड़ 2 ये भगवान हैं। और उनकी पत्नी और बच्चों ने भी कहा बच्चे सब बीमार हो गए। पत्नी और बच्चों ने कहा हमें चुड़ा 2 इसे छोड़ 2 क्यूंकि आपने भगवान को गिरफ्तार किया है? और हाँ मरने वाले हैं, बच्चे मरने वाले हैं। ठाकुर मरने 2 उन्हें जो सच्चाई है उसकी साधना होनी चाहिए। तो 14 जुन के बाद जिस दिन भक्ति ठाकुर ने अपना जजमेंट देना था, उस दिन उनका पूरा दाया साइड पैरलाइज हो गया। मेर को हाथ नहीं रहा था, पर नहीं रहा था। जब भी वो टरमेन थे निणय देने के लिए। और ने बड़ी कठिनाई से अपना निर्णय लिया, जिसमें भोगी योगी को सुझा दीजिए, या वे भोगी योगी से कोर्ट के बाहर ले जा रहे थे। ये ब्रिटिश वकील ने पढ़ा था। ये जो योगी है यह अपनी ताकत रखते हैं। अपने सीके में। तो उन्होंने आकर पीछे से सीखा काट दिया और रुख से बाल योगी ने क्या क्या आत्मा हत्या कर ली और सब समझ गए। भी ठाकुर ने लिखिया 1 पेड़ था, क्या लोग मानते थे यहाँ भूत है। और ये पेट की पेड़ की पूजा करते थे। तो ये सोचते थे सब इच्छाएँ पूरी हो जायेंगी। भक्तराज ठाकुर ने 1 प्रसिद्ध लड़की थी जो कि भगवत पड़ती थी। कि ठाकुर ने उनके पिता को कहा तुम बैठो इस पेड़ के नीचे और सीमा भगवत पड़ो 1 महीने के लिए लोग वहां आते थे, उस पेड़ की पूजा करते थे, सोचते थे की इच्छाएँ पूरी हो जायेंगी, हो भी जाती थी, पर ठाकुर कुछ नहीं। तो 1 महीने के लिए 1 ब्राह्मण से भगवन का भगवत का अध्ययन करवाया जिसके पश्चात में क्या हुआ, क्या हुआ, पेड़ गिर गया और उसके बाद लोगों की श्रदा श्रीमत भगवत में बोल पड़े। तो भक्ति लोग ठाकुर उनके मन में 1 ही भाव स्थान क्या, शुद्ध संदेश की स्थापना करना और शुभ संदेश का प्रचार एटीन नाइन्टी सिक्स ए टी नाइंटी सिक्स के साल के केश नहीं लग रहे है। तो आईटी नाइनटी से में जैसे हमने कहा ठाकुर बहुत पढ़े लिखे थे। ठाकुर ने 1 ग्रंथ लिखा था टीचिंग ऑन लोड चेतन्या और भक्ति ठाकुर को की रिजनल। उन्होंने ग्रंथ विश्व के विश्व के प्रश्न महा विद्यालयों में भेजा एटी नाइनटी से और उन्हें 1 मा विद्यालय था। mिglयनिरस्ीmonti एटी नाइनटी सिक्स में भेजा फकीम ठाकुर। उन्होंने 1 पुस्तक छापी जिसमें चेतना के सिद्धांत का वर्णन था, और उन्होंने ग्रां भेजा विश्व के अनेक प्रसिद्ध महा विद्यालय में इनमें 1 था। कौन सा पाठशाला ये मुझे पता है। क्योंकि जब हमारा मंत्र खुला में तुम्हारा डिबोडीदेजनारदन, उन्होंने लाइन में जाकर, उन्होंने लाइमैन में जाकर उग्र को प्राप्त किया था। भक्तिन ठाकुर भक्त ठाकुर की इच्छा थी कि ये आंदोलन आगे बढ़े, तुमने भगवान से प्रार्थना की थी कृपा करके मुझे ऐसा कोई पतिनिधि भेजो जो की इस आंदोलन को मेरे बाद आगे ले जा सके। उनकी इच्छा थी विष्णु की किरण उनके घर में प्रकट हो। रेयर विष्णु। तो इस प्रार्थना के उत्तर में भगवान ने किसे भेजा भक्ति से ही ठाकुर जब ठाकुर भक्त थे। न दिन हमें मैजिस्टेट के घर के आगे नत रुकता था। और बिमला प्रसाद और भक्ति ठाकुर की पत्नी भागवती दासी ने अपने छोटे बेटे को, जिसका नाम था बिमला प्रसाद, ले गये। ओ एम सौरी छोटा बाल था। हम लोग 1 बाल या 1 चीटी को भी सही सकते। पर हिलाने का की पूजा तो से उठाने गया था। उनके शरीर में, करोड़ो चिटियां चल रही थी। बिल्कुल स्टेबल सो बिमल प्रसाद की माता ने बेटे को रखा जगनाजीके चरणों में, और जब रखा था तो ये हार जगना जी के हाथों से कहाँ गिर गया। तो इसे उपचान सके। ये है वो बेटा यो भगवान ने भेजा है इस अनोलन को आगे बढ़ाना के। भक्त ठाकुर महा जगनदास बाबाजी बाबाजी इससे महान सं महा रोज भजन करते थे। भक्तिनों ठाकुर ये स्वीकार नहीं कर पाए कि जो नवल धाम है ये महा पाप का जन्म का स्थान है। उन्होंने ऐसा सोचा, ये शायर तो सिर्फ सौ साल पुराना नंबर है। और महा प्रभु। पर 500 साल पहले ये कैसे सम्भव है कि महा प्रभु के जन्म का सार लोगों ने उसे ये बना लिया। यह माप का जन्म स्थान जो इसी बहाने ज्यादा लोग हैंगे, ज्यादा अच्छा सो पहले उन्होंने भी सरकार से की थी, में ट्रांसफर करो कृष्ण नगर सरकार न जाने दिया। तो छुट्टी वाले दिन मैं ठाकुर सारे उस लायेंगे मैप्स को देखते थे। और देखते थे कौन सा स्थान है। उन्होंने अंदाजा लगा लिया था की इस खान में होना चाहिए। तो गये वो स धान में मुसलमान लोग रह रहे थे। जिस थान मे प्रकट हुए स्थान के ऊपर तुलसी के पौधे से न। तो ठाकुर को लगा यही है उनका जन्म कर। भक्त ठाकुर चाहते थे क्यूँकी शिक्षा गुरु जगनदास बाबू जी, उनकी राय ली जाए। जगनादास बाबू जी। उस समय एक्स वन फॉर्टी फॉर यर्स के थे 114, और खड़े भी नहीं हो सकते थे उनके शिष्य बिहारी उन्हें टोकरी में उठाते थे। और और जब किरसन का समय आता था तो नाचते थे गुरु उधर ये स्थापित करने के लिए। जैसे ही लगना बबली वहाँ पहुँचे। वहाँ जब जगनादास बाबूजी ने देखा, यह स्थान ने कहा, ये यह स्थान फिर ठाकुर ने स्थापित किया, ये है। तो भक्तिन ठाकुर ने संक्षेप में बिलिक धर्म को अपना असली स्थान दिया। उन्होंने यह स्थापित किया कि भगवान बच्चे इतने मीता सबसे ऊँचे ग्रंथ है। उन्होंने ये भविष्य बनी थी भविष्य में 1 मां संत आयेगा जो की महाप्रभु के भविष्य वाले को पूरा कराया। और उन्होंने महाप्रभु के जन्म के 80 स्थान की। तो भक्ति नोट ठाकुर 1 रूप से। आप कह सकते हो इस संस्था के संस्थापक है ये हमारी वाणी नहीं, ये प्रापा दिवाली है प्रावाद ठाकुर के विवाह in a takorswotuleto founder the crisnacontesmovement। हम तो जानते हैं प्रापा फाउंडर, तो पापा जी की विनम्रता से पूरा क्रेडिट उन्होंने किसे दिया भक्तिन ठाकुर। तो भक्त ठाकुर की इच्छा थी कि उनके प्रकट होने के बाद ये स्थानीय संस्था, उनकी संस्था ठीक हाथों में चले तो भक्ति सिद्धा को खास शिक्षा दी, ट्रेनिंग दी, छोटी आयु से 1 दिन मलापुसारमें 1 आम खाली आशा। भगवान को भोग लगाए बिना जो पिता आए उन्होंने देखा बेटे ने आम खा लिया है। भोग लगाए बिना पिता ने कहा यह ठीक नहीं है। तो बाकी सिधादाजीनेइतना गंभीरता से इसे स्वीकार किया की जिंदगी भर उन्होंने कभी आम नहीं खाया। जब कोई शिष्य भेर के रूप में देते थे भक्ती से, राधाजी क्या कहते थे बचपन में उपराध किया है मैं आम। तो भक्ति रोज ठाकुर महान संघ से। और उन्होंने अनेक लेख भी दिए है। खास करके भक्ति से। धानाजी दीक्षा का समय आया। भक्ति ठाकुर उनके शिक्षक गुरु, शिक्षक गुरू, दीक्षा गुरु संत के विश्व में चर्चा करते हैं। वो आजकल के शिक्षक गुरू, शिक्षक गुरु का अर्थ नहीं है। आज तो कोई भी आपको परीक्षा करवा दे, आप के हैं। हमारे शिक्षक गुरु में शिक्षा गुरु का अलग अर्थ है। यह हमारा बना उठी अर्थ है। जो आपको शिक्षा दे, परिचय करवाए वो शिक्षा गुरु नहीं बनता। शिक्षा गुरु के कहा गया है। वही तालीम होने क गुण होने चाहिए जो की गुरु में भक्ति जीत है। शिक्षा स्वीकार की जगनलाल बाबू जी ऐसी। इसलिए हमारी में अब जागना दाल बाबूजी की फोटो देखते हो। विपिन सो भक्ति ठाकुर ने कहा तुम जाओ दीक्षा लेने घोर किशोर दास बाबाजी से गौर किशोर बाबू जी बहुत ही ऊँची कुटी के सम थे, दिन रात हर नाम का उच्चारन करते रहते थे और भक्ति के अलावा विभाग रहते थे। कहाँ इसी कमरे में, इसी कमरे में नहीं, टॉयलेट के अंदर की टॉयलेट खासकर के भारत के पब्लिक टॉयलेट बिल्कुल बदबू से भरे होते, सुवागतो गोल का इतना लगाव सा। हाइनेस, वो चाहते नहीं थे कोई भी आकर उन्हें किसी प्रकार से डिस्टर्ब करे वो चाहते थे। विदाउट इंटरप्शन वो जॉब कर सके और और चुनो ठाकुर को, उनसे तो छप गए, बना प्रसाद के पास प्रसाद गए वो के। उन्होंने कहा मैं तुम्हे दीक्षा नहीं दे सकता, क्यों तुम इतने पढ़े लिखे हो? बाकी जी अपने समय के बड़े प्रसि लेखक थे और एस्टोन और गोल के श्रोता साबली नाम देखने की भी योग्यता नहीं थी। तुम्हे कहा तुम इतने पढ़े लिखे हो, बयान पढ़ हो, मैं कैसे तुम्हें शिक्षा दे सकू? तो ने इनकार कर दे। तो वो जीत करते गए। तो गोल बाबाजी ने कहा ठीक है मुझे महाप्रभु से पूछने 2 मैं तुम्हे दे सकता हूँ। तो वह पूछा प्रभु वो भूल गया। ठाकुर ने बेटे से हा अगर तुम्हे गोल के श्रद्धा नहीं स्वीकार करता। तुम लौटकर वापस मत आना इधर। फिर गोकश्दारबाबजी कहा आप मुझे दिक्षा नहीं दोगे, मैंने आत्महत्या कर रही है। जब मोनो ने देखा दीर्ध है भाव भक्त नो ठाकुर ने शिक्षा दी अपने बेटे को, वो छोटी आयु में 1 कुरमा ब्रहम शालीग्राम दिया था पूजा करने के लिए। और उनकी विश वाली थी। जो बोल बैठे हैं कि 1 संत प्रकट होगा क्योंकि हरी नाम का प्रचार करेगा खुद से। तो भक्त ठाकुर जी ने अनेक नाम में लिखे हैं। खास कर के उनके 1 ग्रंथ है शरणागर्दी, शरना, गद्दी, गाल क्या है को सुरेंदर सो। इस शरणागति के विषय पर के बच्चों को हमें उचार देना चाहिए। you should always bsrvyourmind cendingkrिsna⁇s gori वो कहते हैं सबसे पहले तुम अपने मन को दीन रखो। जॉबरसल्v किस विषय में ध्यान पूर्वक है नाम का। वो कहते हैं मन के द्वारा निरंतर भगवान का समर्थन करो। taकorprforming krishna sciltnyouwillgive masti over the mind को कई बार भक्त दे मन मना कृष्णा, मन गवसमे कैसे लाया जाए? तो यहाँ आपको भक्त ठाकुर उपाय दे रहे हैं। क्या कह रहे हैं कृष्णा का किर्तन करोगे तुम मन को वश में ला सकोगे। भगवती भगवान कहते हैं भक्तियों की विधियों के पालन से मन को वश में ला सकते हो। तो चंचल मन वर्ष में आ सकता है। ठाकुर बक्ती किस शब्द में? किस माध्यम से कृष्णा का केस। इसलिए कहा जाता है चेंजिंग इन मोशन इम्पोर्टेंट। by channing crishnaienyou will be able to give a falls prime अहंकार अहंकार लाभधारी है या नुकसान का है, असली, अहंकार है जब अभी तो भगवान की जिन पर नकली अहंकार अपने शत्रु है, का क्रोध, लो, वो ये सब अपने शत्रु है। गीता में क्या कहते है 3 द्वार 3 मार्ग है, कौन है एंगल तो आंका जो है, ये हमारा शत्रु है। हंकार के कारण हम कई बार अच्छा आदेश दिया जाए तो भी स्वीकार नहीं करते। तो ये हंकार तो हमें नष्ट करना है। कैसे नष्ट करोगे राम के जाब के उचारन पर always think yourself we, wotlefdestitut low in more humblinsoinstre स्लो का संदेश लगभग शीकशास्रकेतीसरे श्लोक के बराबर कहा जा रहा है। हम अपने आप को ये सोचो कि आप गुटलेस हो, वे कम में हो, कोई कदर नही है। आपके गधे जैसे हो। यहाँ कह रहे हैं अपने आप को सोचो कि तुम्हारी कोई कदर नहीं है, बोतले जस्ट। तो ये सोचना तो बड़ा उत्तम भाव है। माँ बाबू ने तो कहा। मेरे गुरु ने सोचा कि जब माँ माँ प्रभु वासी में मिले प्रकाश भक्तों के साथ, उन्होंने तो कहा की मेरे गुरु ने देखा और कहा तुम्हार में कोई योग्यता नहीं है। रोनी ने मैंने कहा। गुरु ने कहा कि तुम में कोई योग्यता नहीं है, यह तुम्हारे योग्य हो या भक्ति, ठाकुर रहे। हं झूठे आंका ो सोचो कि तुम बिल्कुल तुछ हो, घास से भी ज्यादा पति। जैसे माँ बाबु ने कहा हिना ना, रो में मने मन देना कि ये है उनका आगे क्या करते हैं हम practice for gives like the three, कुछ lit, practis for givens like the tree, क्षमा की भावना रखो पेड़ के जैसे चेतना क्या कहा अगर आप चाहते हो, ठीक है, ठीक है, अगर आप चाहते हो की ये हार नाम, ठीक है, ठीक है। हर नाम का जाप सदा हो चाहते हैं। आपको पेड़ से भी ज्यादा, पेड़ से भी ज्यादा प्रतीत, मानो, ये कह रहे है क्या? think you dstitutloestॉn, अगर आप इस भावना से इनाम करोगे, ये मेरे लिए जितना पति कोई व्यक्ति नहीं है ये समाज में, इस में तो भक्ति में कृपा हो सोच रहे है। मैं सबसे प्रसिद्ध भक्त हूँ। इस मंडल में सब लोगों का मुल्क पाना मुझे पहचानने पर रहे है, तो हम आगे नहीं बढ़। सके भक्त क्या कह रहे है? always वoरtlesसिट्यूट lower mo, हमबल ट्रीन gives श्यामा की भावना होनी चाहिए। क्षमा की भावना भक्त जो है किसी को शत्रु नहीं मानता, जिस के द्वारा सजा प्राप्त हो, हम उनको दुश्मन नहीं मानते। युधेशरकुुमे सब दुर्योधन के देश राज्य के रिश्तेदार मारे गए थे, और अगर चाहते तो वो सजा दे सकते थे। उल्टा उन्होंने इतनी अच्छी सुविधा दी, उन्हें सोचने लगे, अब अंत में मैं राजा बन गया हूँ। तो भग में शमा की भावना होनी चाहिए, ये नहीं तुमने क्या कहते हैं वकील ठाकुर, क्षमा की भावना रखो, किसी के प्रति हिमसा का भाव मत रखो वाले भगवा में जन बाल की कथा पढ़ रहे हो, उनका बड़ा अच्छा उदाहरण है। पैर रखने से पहले यह देखते थे कि छुट्टी भी नीचे नहीं हो। तो बंकिन ठाकुर कह रहे है हिंसा किसी को कैश दे? 2 आजकल हेमसा शब्द तो बड़ा फैशनेबल बन गया है, पर जो मोर्डन बुद्धि से है वो क्या नहीं खाते? बुद्धा जी ने तो कहा था, हिंसा किसी चीटी को भी कष्ट दे। 2 बस है वो जबान के हर चीज खाते है। और यहाँ कहा जा है, हर भक्त में श्रमा की भावना होनी चाहिए। आगे। so you live you should never give exit। जिंदगी में किसी को कुछ मत। 2 हम सोचते हैं, कभी हमारे इस कार्य के द्वारा पडोसी पर क्या असर पड़ेगा, यही देखना है। हमारे सौहाद क्या है? what s good for me who के was गुड देवर। पर ठाकुर भक्त कह रहे हैं कि सबके प्रति मित्रता का भाव रखो, और किसी को कष्ट मत? 2 जैसे की आप आश्रम में जाते हो तो इतनी आवाज मत करो, आपके पडोसी जो सो रहे हैं, वो ध्यान देना चाहिए की मेरे पडोसी को भी नहीं करो, वो कह रहे हैं किसी को चिंता मत। 2 और दूसरों की खुशी, पहले सोचो अपनी खुशी अंश में हमारा क्या सिद्धांत है? मारे खुशी पहले तुम्हारी खुशी बात है, ठाकुर कह रहे है, पहले दूसरों की खुशी का सोचो, बाद में अपनी खुशी का सोचा। इसी विषय पर बक्षी ठाकुर आगे कैसे है, thedwicotswenyo become a person, god, so posisi, all these call you give the desiverfamin। ऑनर आगे बक्सिनऔरठाकुर कह रहे हैं, नाम, प्रतिष्ठा आदर ये भावना छोड़ो आप पहले सुन, बैठे पूरा विश्वास है। और क्योंकि भक्ति और ठाकुर जी का बक्स उनके लेख से महत्वपूर्ण संदेश सुना, तो भक्त ठाकुर कहते हैं, the name famous, fame av coro winomrbnamake or hard hamblyouherever, there s almost every day in the lecture milityiakeeospecial, advancment, bkilesangmakohad mb, the movement, had a back stone, proud nam loge। भाई का नाम लेने से जो कड़क ह्रदय है, वो विनंर हो जाएगा। आगे। इस प्रकार बाकी वनोद ठाकुर के अनेक जन है। तो आज वह ठाकुर जी का फिर बात सीधी है। हमें उनसे भीख मांगनी चाहिए की हमे उनकी कृपा प्राप्त हो की आप भक्ति में आगे बढ़ सके और भक्त ठाकुर जी ने भक्ति सीधा सावदी ठाकुर, इन अच्छाइयो ने हर प्रश्न का उत्तर दिया है, हर सफलता का हल दिया है। केवल अगर। हम उनकी शिक्षा के आधार पर चले जीवन को सपुर बना सकते हैं। वे बाकी ठाकुर जी, फिर दिवस पर हमें यह प्रार्थना करनी चाहिए। ये जो गुन जिनका, ये गुण आप अनुकूल करना चाहते हो, शरणागति ग्रंथ में क इन गुणों का वर्णन है। पर प्रयास करोगे भक्त ठाकुर के सहयोग देगे भक्त ठाकुर आल्सो और रिटारमेंट के बाद भक्त ठाकुर करा गए। हर घर में गये 11 रुपए, मांगने के लिए 1 रुपए और 1 अखबार थी बंगाल के आज भी धार पत्रिका उसके मालिक शुरू से रहे हैं। तो उन्होंने लिखा ये बक्ती ठाकुर, रिचार्ड डिस्टिक मेजर स्ट्रेट। it s going house to house beging people for donation, he was asking one rupee fmemryhinduhome। तो अखबार में लिखा था जो भक्त ठाकुर, तुम्हारे घर में आयेंगे 1 रुपए मांगेंगे मंदिर बनाने के लिए ध्रू देना हचकनरतोभक्तीठाकुर को 7 गो स्वामी भी बुलाया जाता है। और आज कृष्ण भक्ति का नक्शा है, नक्शा, बना है प्रपाजीकेप्रयास से भक्ती सिनालजीकीकृपा। ऐसी भक्ति भक्ति और ठाकुर के विजन से भक्ति ठाकुर की विजन थी कृष्ण भक्ति फैलेगी हर जगह जो उन्होंने अपने बेटे को दी, भक्ति स्ीधाननजीने, ब्रिज को ट्रांसिट किया, वो प्रबल को आदेश दिया, जो हमने किया है, इसे ले जाओ। तो इन 3 महान संतों के अत्यंत प्रयास है। कृष्ण भक्ति विदेश में पहुँचा है, दुनिया के हर कोने में पहुँचा है। और जो व्यक्ति जीवन को सफल बनाना चाहे उन्हें शिक्षा का लाभ उठाना चाहिए। भक्त ठाकुर जी नों आज गदादरपददेतकाभीत्रभव है दादर पंदित, कहा जाता है कि माई से 1 साल बड़े थे और गिदादरपं्देत हमेशा वहाँ प्रभु के साथ रहते थे। कहा जाता है कि राधा रानी की इच्छा थी कि मुझे ऐसा जन्म मिले, ताकि मैं सदा हूँ उनको 1 मेल का रूप मिला गदाधर के रूप में दाद के मन में लगातार। 1 ही भाव था वहाँ प्रभु की और कोई भाव नहीं था। 1 समय शिव सागर में किर्तन कर रहे थे, जैसे कीर्तन कर रहे थे वहाँ प्रभु का जो रंग है ब्लैक एस बन गया और सो जादातर मुर्सी है टूर गोपिनाजकीजहाँ वो सेवा कर टूट गोपिनरकल रोज हार बनाते थे रोज जब बूढ़ी उम्र आई तो खड़े होकर हार नहीं सके, बुरी उम्र हो गयी थी तो क्या किया बैठ गई तो इस भावना से गंगा भक्त आसानी से उनको हार चढा सके गोपाल की जो मूर्ति है 1 ही मूर्ति है और में भगवान बैठे हुए देखते है हम। question a yes my i took those to worsen from sharnagat when i todmisuojustsan mela in e book you s folose हेलो ye hundred rupees of that time sound rupees of today sochna k ropa ak रुपए वो समय का 1 रूप प्रवाल हाउस हाउस जाते थे प्रापात बैक मैगजीन बाटने के लिए कॉफी हाउस वह भी जाते थे थे क्या? जो लोग बैठकर कॉफी पी रहे होते थे उनके साथ बैठ जाते थे, कॉफी नहीं पीते थे 1 किताब। तो भगवद के सेट्स होस, कैंटो जेली की रेइबरेरीमें जाकर। बांटें न तो यह नही की हम प्रचार में जायेंगे, केवल मोटर की सुविधा हो, ड्राइवर हो। जो जो सुविधा भगवान देते हैं उसी का लाभ उठाते हैं। कभी कभी भगवान आपको ज्यादा सुविधा दे देंगे, कभी कभी कम तो ये नहीं कम। मिली तो हम गये और प्रचार नहीं हो सकेगा। हमें सोच लेना न वी हैव बिग, चैलेंज, सो, मस्त जैसे कुंती देवी कहती हैं भगवान मेरे कृष्ण को बढ़ाओ कितना बढ़ाते हो उतनी। ज्यादा ही मैं आपके चैनल का स्मरण करती हूँ और जितना ज्यादा चलन का स्मरण करूँगी उतनी जल्दी से छुटकारा मिलेगा। आजकल बड़ा चैलेंजिंग समय है। 1 तरफ से वाइरस। यह नहीं कहना वाइरस की बिजी हो गई। हमने घर में बैठना है, हमें प्रचार के माध्यम से करुणा की बीमारी को नष्ट करना प। किसके साथ है की सास ली और सी है तो लोग सोसाइड क्यों कर रहे हैं? 1 दिन हमने सोचा था, हम बड़ा कलाकार बन जाए, नाम कमा ले तो हम खुश हो जायेंगे, कलाकार बन गये, धन भी कमा लिया। फिर भी हम देख रहे हैं वो ही निराशा जो पहले थे। हम मूर्ख का व्यक्त रूप में दान करते हैं। सुसर करना महा पाप है। शायद आप खुश हों या ने रात महत्या करना सास के विपरित है। जो आत्म हत्या करता है, उसको भूत की भूत प्राप्त होगा। भूत की स्थिति क्यूँ जो कोटा है आपका सजा का सुख दुःख का में भूलना पड़ेगा बगल अपना एकाउंट चुका रहे हो, बच्चे बाद में बदला। जिस व्यक्ति को ज्ञान है वो सुसरे का नहीं सोच रहा। तो आप तो आपकी बात कर रहे हो ओके विदेशो में यहाँ की आर्थिक स्थिति या भारत से ज्यादा अच्छी है। हम लोग आत्महत्या करते हैं सवीरनबड़ीहाईसुरेल अमेरिका wanwaanji खाना बनाने के तो बस के कारण न तो वो बिना दीदी का पूरा इतिहास है। मैं नहीं जानता, पर जानते हैं कि गधा पंजाब सेवा में ओ माँ ने भी अपने शरीर को कहा जाता है। उस मूर्ति पर पकड किया और गदाधर क्यों किया। कई साल के लि उस मूर्ति की सेवा कर रहे थे। वहाँ प्रभु के लिए आर बी बनाने मे for any other question dns so my s स m sorry किसी का friend किसी किसी और के गलत विचार है, पर किससे बचो वो संघर्ष से यह कैसे? we dont go there thats not go to association on one who don god s whats them praocrasionata these people, who are teticiingtemay stop going to going pleas to them? बोलो उनको बार बार गुरु साधु सास निंदा करते हो, इसे बक्ती में नुकसान आएगा। okay what finely fogadstopnoyes year question why not in the class online est? other moti online on divoti? what your question सो मे log on the last line sad भी हव, you can the holy name follow the standers, then he was always feel as is a guru is next you propysadnhevafelld for a minute that my gurubalidmen guru for five times in is lie when he was mentally thinking i do this to please a book that is important turken हाय krsna करिश्णा हारे हारे हारे ल नाम राहालेहाले।
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