स्वच्छ हृदय अभियान, गीता जयंती महोत्सव | 21 Dec 2015 | Punjabi Bagh | Gopal Kṛṣṇa Goswami

In this hour‑long devotional discourse, Gopal Krishna Goswami links the Swachh Hṛday (Clean Heart) campaign with the spiritual teachings of the Bhagavad Gītā during the Gītā Jayanti celebration held on 21 December 2015 at Punjabi Bagh. The speaker repeatedly emphasizes the need for inner purity, describing the ‘clean heart’ as the foundation for ethical conduct, self‑realisation and societal harmony. He interprets key Gītā concepts—bhakti (devotion), jñāna (knowledge), karma (action) and dharma (righteous duty)—and shows how daily recitation, chanting of the Hare Krishna mantra, and selfless service translate these teachings into concrete social action. Throughout the talk, he addresses contemporary concerns such as materialism, economic disparity, and moral decline, urging listeners to adopt a disciplined spiritual routine, support community welfare, and spread the message of the Gītā. The discourse is interspersed with anecdotes, scriptural citations, and calls for collective participation in the Swachh Hṛday movement.
Chapters
हाइ हाइ कृष्णा हाइ हाइ कृष्णा हाइ हाइ हाइ कृष्णा हाइ हाइ हाइ कृष्णा हाइ हाइ हाए हाए हाए हाए हाए हा आपके हरयाना के मुक्ष मंत्री आ रहे थे तो घीदा की चर्चा होड़ी तो उन्होंने ये साब हरयाना के हर्टरेश्टिक में थीने जो कुछ साब किया है घीदा के हर्टरेश्टिक में नहीं क्या था वो मुझे कहा रहे थे कि हर्याना के हर्टरेश्टिक में بہت بڑا انتر آس پر اتصال کرنا ہے کلوڑ شہر میں پھر اسمانی بطکوں کے ساتھ کیتا ہے کیتا کا ایک سندش ہے کہ پورے ماں اور سماج پہ لے کر اور جیسے اتصال سے آپ ہاتھوں نے آج کیتا کے شکلوکوں کا اچھان لیا آج آپ نے پورے ساتوں شکلوکوں کا اچھان لیا اسی اتصال تھے ہمیں کیتا کو देखिन बारत्वी यात्र में ते सुष्वी यात्र मंदने में भी पहुंचे जानकी एक ब्राह्मण जो की अन्पड़ी है रोज इंगिस्तान में बैट रोज जीता के साथ और स्लोगों का उचानन करो अच्छे वो उचानन करता था इतनी आनन में होगा था वो सारे इश्ट्रियों कोंके की राक्षियों सप्रत हो देते हैं तो क्योंकि वो अनपड़ था कहीं स्लोगों का उचानन ठीक करता था कहीं होगा था और उसके स्लोगों क کیونکہ یہ گروہ کا آدھیش تھا اور روڑ اس کا فاضل کرلاتا تھا کئی لوگ ہستے تھے اس کے اوپر کہ میری وہ دلوں پر چاند کرلاتا تھا اور جس دن ہمارے روڑ جب وہاں پہنچے اُنہوں نے دیکھا یہ برامن روڑ کسی سامنے بیٹھ کر اچھا ہندوز اچھتا زیادہ تھا لیکن آخری وردے جنسوں سے پانی کرتے ہیں، آنسوں کے وردے پھر گھنٹی کے لیے کچھ مقابلہ کرتے ہیں اور ہاں کی وہ تیم جاننے میں بھی کر رہا تھا کیسے ہندوز بھی نہیں سمجھا رہا تھا کئیش لوگوں کا تو جب ہندوز بھی ایسا آنے خاص طریقے میں دیکھتا ہوں کہ بھائی بھائی بھائی ہمیں بھاگتی کرنی کے لئے اُن کے عریش گھروں سا اُن کے پاڑھ دس سال نہیں پڑھتے ہیں بھائی بھائی کہ میں اپنے ساتھ دیکھتا ہوں اور پھر یہ ہانسوں گہتے ہیں میں چھے دن ہمارا بھگوں نے اُسے پھلے لگایا اور گہا تو وہ گیتہ کی آس پر سمجھ گئے ہوں مارک راپا یہ سمجھاتے ہیں कि ये ब्रामिन खड़ा घ्यान पड़ था तुझे गुरु के आदेश का पालन कर रहा था तो क्या उपड़ी ख्यान हुआ उसे स्वयं भगवान का दारिशन प्राप कर। तुझे कहता है मैरे क्यों सनाई ये जेपिने चत्रविता में तुझे सनाथ भगवाती जी रचना करत اگر ہم نیتہ روشت رہیں گے تو کس کا گیان بڑھے گا؟ گیان بڑھے گا تو میں نیتہ سے بتوں گا۔ نیتہ کا جو سنتیش ہے یہ اتیس شاہدی کا سنتیش ہے۔ تو وہاں نیتہ میں کہتے ہیں جو کھانے ہاں میں شہاشت ہوں उजीदा के टार्गे नियाने में भगवान क्या कहते हैं सर्मा धर्माँ परिटर्जा आमेकां संत्रों सुदर्पाप्रिवर्भौं सुदर्पाप्रिवर्भौं सुदर्पाप्रिवर्भौं सुदर्पाप्रिवर्भौं सुदर्पाप्रिवर्भौं सुदर्पाप्रिवर् मेरा भग बनो मेरी शर्ण में आओ तो आप पूछो के अगला भगवान की शर्ण में जाने का प्रयास करें हमें क्या मिलेगा भगवान क्या कहते हैं क्या मिलेगा کہتے ہیں کہ तमये विश्व में आओगे मैं तुम्हारी सुराच्च करना तुम बड़ाओ मैं अगर हमारे में निमंत अधेर हैं मेना भक्त बनो मुझे नमस्कार करो मुझे प्रनाम करो मेरी पास न करो तो आप पूछोगे अगर हम ये सब करें हमारे भगव बनें उनकी शर बिना शंकर की कहा आओगे? मिलधान आओगे? बिना शंकर की कहा आओगे? मिलधान आओगे? बिना शंकर की कहा आओगे? मिलधान आओगे? मिलधान आओगे? मिलधान आओगे? मिलधान आओगे? मिलधान आओगे? मिलधान आओगे? मिलधान आओगे? मिलधान आओगे? भवान कह मिलध रहे हैं मेरा चिन्तन करो मिला भग बनो और बिन शंका कहें तो मेरे धाम में आओ भवान के धाम में नाम क्या आये संक्सियर में भवान कुछ नहीं बता और यो बादीग चगते नाम क्या है कुण्द चगत कुण्द चगत और ब्रकुंद चगत में अंतर हैं अ سکھی سکھ اور بہت ایک جگہ جس کا نام میں کھند ہے لگت یہاں آپ کیا دیکھتے ہو؟ خلیش کی خلیش خشک ہے ایک سمجھ آتی ہے ہم ہلکن کا پریاز کرتے ہیں پھر بھی سمجھ آنے جاتی ہے ہم سوچیں کہ یہ سمجھ ہم ہلک جائے تو سکھ ہوئے گا اس میں کوئی سمجھ نہیں ہے तो बोधी तुनसार जैसे अपड़ते हैं और प्रापर देखें रग्नमें जीव चील खारा है जिसमें हम सब कैदी हैं बड़न भगवान अफथारित होते हैं किस लिए हमारे हुँ धार के लिए और अफथारित जे नहीं अपने प्रतिदीजियों को भी बेचते हैं तर्दु یہ گیتا کا اکدیش ہے تو گیتا کا جو اکدیش ہے یہ سنادھا اکدیش ہے ایک گروپ سے ہم کہہ رہے ہیں گیتا جنتی آئے بخارت نجار صاحب اور پھر وہ بھگوانی گیتا کا اکدیش کر رہے ہیں کسے؟ بھگوانی گیتا کی چودھے دنیا میں بخارت یہ بھی کہتے ہیں کہ یہ جان میں نے دیا تھا سب سے پہلے کتنے سوئے کے دیوتا थाकि समय में जो राजा होते थे उन्हें राज रिशी कहा जाता था क्योंकि उन्हें शास्त्म की कर देते हैं तो उन्हें पूरा अध्याबने ज्ञान नहीं था जो बगवती की ज्ञान हैं ये राज रिशी की लिए हैं और समय के साथ ज्ञान खो गया था तो बगवान ने फ अच्छे वो मांद्यम क्यों बनाया काभली के लोगों को सुनेनासी नहीं थे वो तो क्रियासार शुनूर थे क्योंकि उनमें एक मौन था दुमान के मित्र थे और पक्त थे इसलिए बहुमान ने कहा जिन्ज्ञान के दिवियर रसे को समझ सकों तो घीता का अगर अ जैसे भगवाद घीता यत्ररूप काई बाद लोग पूछते हैं यत्रूप का क्या आरथ प्राभाजी बुमि कामयोगी हमें सिख्षाने से जी की यत्ररूप की स्थिवनन हुला है क्योंकि ये सदेश को सौप पदिशर प्रस्थूत किया है जिन भावना से भगवाद ने تو گیتہ کے دوارہ آگے پرم بہمان کا گیان ملتا ہے پرم بہمان کون ہے؟ شریف بہمان مباچہ کیا کارن ہے کہ یہ رکھ سکتے ہوئے آدمی لوگ پڑھنے کے لئے یہ گیان تو پانچ رہا سال پہ وہ بہمان نے کروشیہ دے گی وہی تو بھوم میں نہیں آتا اور آپ کو جان کر خوشی ہوگی کہ اُسی ستھاں گہاں کی بہمان نے तो हमारे मंदर था पिंगोली मार्केट में प्रापा जी को मिलने कहने आते सारे विश्व में कृष्णा भक्ती की स्थावना किये बारे में कृरुशे लेन नाम ने पुछती क्या। मैं आ जाता प्रापा जी के साथ, उन्हें प्रापा जी साथ, मुझे पर फून भी कृरुशे लेन रश्ण में जुधाना जी ने कई साल लिखा है ब्रह्म प्रापतरोड एक लिया लिए पिर अंत में ये पापा जी जोधिस सर्मेट है जोधिस सर्मेट वो स्थान है तो ये माना जाते हैं कि बहुबान है कि तगवते शुबा ले जो पापा जी ने कहा कि जोधिस सर्मेट पिरिष्णा और यह जो उपदेश है कि आज भी हमने पर दाओ गया सकते हैं। यह नहीं सोचने के आवशक्त है। यह तो बहुत प्राचीन संदेश है। हदने की मिल्स्टा कोई स्थान नहीं है। हमने देश में। हमने हिंदु भाई बहन रही हैं। अपसोस की बात है। कहें ब کھلپنا کسی کی اس کا کیا پرمان ہے یہ واضح نہیں ہے یہ جو گیتہ کا سمدیش ہے یہ سنادھن سمدیش ہے اور یہ سمدیش ہے کہ کے پتیوں کے گھڑھار سے فائیتنا یا ساندھنا گھڑھیں شہدہ پلوسنا ڈھرما سندھنا ڈھرما سندھنا ڈھرما سندھنا ڈھرما سندھنا ڈھرما سندھنا ڈھرما ڈھرما سندھنا ڈھرما سندھنا ڈھرما سندھنا ڈھرما سندھنا ڈھرما س جیتے کے سمجھ پر پالت کریں گے تو ہم شادی کا نیمت بیٹھا سکیں گے آج ہم دیکھ رہے ہو سماج میں سماج میں کچھ کچھ پڑھتے جا رہا ہے لوگوں کا چھڑی تک پڑھتے جا رہا ہے کیا تھا لیکن کیونکہ اصل کیان کی کمی ہے ہمارے پالک پڑھن پڑھنی کہتے تھے اگر اس بیشتر میں کسی جی کی کمی ہے देवरे ज्ञान की जंगे जाये लाजर विदिया लाजर विदिया लाजर विदिया लाजर विदिया लाजर विदिया लाजर � सब पर निर्णे हैं कृष्णातियों भगवानत्में हम आपो करते हैं। क्यूंकि ये सदे भगवान बार प्राप्त हो रहा है इसलिए इसमें कोई अपूर्था नहीं, कोई कमी नहीं, कोई लोगिष्ण नहीं। आगे दूसरे अधिराइव हैं। भगवान हमें सिख्ष ये दूसरा दियाय है सबसे महत्वूरना दियाय है क्यों? यहां हम सूचना विल्ती है यहां मिलता है आपके आसते स्वरूप के विश्व में हम सब जानना चाहते हैं हम कौन हैं क्या नहीं हमारा असती स्वरूप क्या है हम आग्याता में क्या सोचते हैं देहे को सत्योष करना इंदिया तुप्ती का विश्व है। वज़्वन से हमें मुड़ी आददी जाती हैं। यह सिख्षा भी जासी है। इंदिया तुप्ती कैसे बड़ा है। जो पाँचा वहाँ भी जाते हैं सिख्षा मंती हैं। वो भी इस विश्व करिक होती है। पर हरुगी का हम भवान कहत बगवान उधरान देते हैं जैसे कमल गफूर चल में हैं पर चल तो एक शुदार देते हैं बगवान उधरान देते हैं जिस पर हम अपने प्राने वस्तव को तियाग कर नहीं वस्तव करहें करते हैं इसे पर करेंगे आत्मां एक देखो तियाग तरफर में था अलगे बुलियाजी में अलगे लेगा तो जब भी आप कहते हैं और ये मैं हूँ जब मैं चोड़ा था ये मैं हूँ जब मैं 20 साथ था ये मैं हूँ जब मैं 40 साथ था तो मैं क्या है आप किश्री का कौन साथ है तो मैं हूँ हूँ ये ज्यान बोसता है आत्म अनीक स्रूपं द्वार भगवानें सिख्षा देवनें आत्मा जूवियें आगे भगवान कर्म यूग का संधान देवनें कि आप आजी करो तो भगवानी कुछी करे हैं हम कहते हैं कर्मा नहीं है बातिका रस्ते अपना कर्तुवे कर रहो पर आगे भगवान जाने के देवने कैसे लो मुझे लो पर अगर आप भोगता मनना चाते हो ता कोई तो परिणाव भोगेना पड़ेगा भोगता कौन है घीदा में बहुत क्या कहते हैं भोगता नामने के तो बोलते हैं सूरत वो भोगता नाम के आत्वा मंग स्वांतिन परिणाव हसी भोगता कौन है प तो गीता का संग्रित, गीता पढ़ोगे तो ये भी सिख्षा मिलेगी कि आप किदी जीज़े मालिक नहीं हो। मालिक कौन हैं? अच्छी वोक्ता हैं, कमाल। तो इस चेतना के साथ रहोके तो शानती का जीवन मिता होगे। आज हमारे क्या चेतना है? कि हमें और, और, और, और आज मुझे भलो दब के आर्विश्णव में कहते हैं भूके वेट्ती को आप संग्रिज कर सकते हो क्रिशा देकर यहां से वेट्ती को संग्रिज कर सकते हैं वो जल देकर क्रोड़े प्याकी भी संग्रिज हो जाता है पर लाद शीव टेट्री को संत्यस्ट कर सकते हों। काभी हैं। मुझे गीदा हों कहते हैं। लाश्ट एंग्रेल ब्रीद। अर्थी हाइवेल ब्रीदिंग के लिए है। इनके प्रभाव में आओगे बेना शंका के जो भमान कहा रहे हैं हम नहीं कहर रहे हैं हम जो लगों को यह कहर रहे हैं जो भमान हैं पर देखोगे ये काम क्रोवन्तोप का क्या अपरी नाम है। जब काम क्रोवन्तोप के प्रभाद में हो, तम्हार प्रकार के दिलेंगे के प्रिकेटानी में जुड़ते हैं। ये क्या अपरी नाम है। अगर घर्गों में पैसे खाना बड़ता हैं। बगवान हमें कह रहे हैं بھٹی کے دوالہ ہی تو مجھے جان سکتے ہو جیسے کی ہم نے یہ انفرد برامن کی تصویر سنائے کے یہ برامن انفرد تھا کرنا بھی تیار کا نہیں تھا تو مجھے یہ مچارن کرنا بھی نہیں جان سا تھا جب یہ بھگوان نے اسے درشن دیا بھگوان نے یہ دیکھتے کتنی بڑی تارین ہیں اس وقت کے بعد وہ کتنے دھان سے اُٹھان کر دائے ۔ ۔ ۔ ۔ ۔ ۔ ۔ ۔ ۔ ۔ ۔ ۔ ۔ ۔ ۔ ۔ ۔ ۔ ۔ ۔ ۔ ۔ ۔ ۔ ۔ ۔ ۔ ۔ ۔ ۔ ۔ अगर तो वे एक दोधी का पता भी आतना करोगे तो उससे मैं क्या करना हूँगा प्रेमण भक्ति का भाव। तो अच्छी प्रेशन ये है प्रेमण भक्ति का भाव कैसे अरुपूल किया जाएं जीता होगे वो एक एराई के साथ सिक्षा काफ करोगे शोक से कैस اور یہ نے پوچھا یہ بتائیں یہ کیا کارد ہے جانتے ہوئے بھی ہم کتنا پڑھتے ہیں बहमाने क्या कहता थामः इश्वर्व क्रोडे लाजेवन्समन्त क्रोड की खर्म लाजेवन्समन्त लाजेवन्समन्त लाजेवन्समन्त लाजेवन्समन्त लाजेवन्समन्त लाजेवन्समन् तर्वाल से कहा क्या आप सब तर्वाल लेकर चलोगे तर्वाल से कोई पर चलाओगे इसका ये अर्थ है घ्यान अनुकूर करो घ्यान पार्थ होगा तो अभी समझ सकोगे ये क्या कार्य करना चाहिए क्या नहीं जितने महा रभुरे सनातें गुरुस्वामी को जो भक्ति के लिए अनुखूल है वो सिकार करो जो प्रतिकुल हो जो सिखार लो तो क्या अनुखूल है जो भहमें घीता में प्राफ़ सकता है तैसे भवान कहते हैं घीता में देखी क्या तपस्या है देखी देखी एक तपस्या है देखी देखी एक तपस्या है � जैसे ये देह का उप्योक होना चाहिए। जैसे आप सब के बारे में इतना हैं। इतने संग उप्योक करों क्या। भगवान सुनर विद्राध देख रहे हैं। पनो रुपी लेकने करें नहीं। सुनर विद्राध। जीव है। जीव का उप्योक किस खाले के करना चाहिए� जो ये भोग लाए तो लगाए बेडा खायें वो केवल पाप खा देते हैं तो खाओ तो केवल शिक्षनपुषाद आखे देखे दें मत तो तो केवल शिक्षनपुषाद खा देते हैं तो खाओ तो तो शिक्षनपुषाद खा देते हैं जी तो बड़ा भगवाण तो बंगा आज बुद्धे दगा तो हाथ लूट गया शुरू है पर लोग बुद्धे दगा कोई सोरते हैं ये पैटेज हैं क्योंकि आजकल जप माना के लिवाज नहीं हो गया ये तो प्रापधी प्रिपाय है कि आज आप बुद्धे दगा हो अब जालों लोग में देखते हैं दो लोगे पर चादी काने दें आज जालो लोग क्या ना पुलो तो यहांने नाम का है जात कर नहीं सुछीर द्वारा बगवान के नामा का उच्छानन करो पिष्ण कसा का उच्छानन करो और पहलो द्वारा क्या करो हमेश्मराय पहलो तोनो बगवान के मने सवी जाते करो तो अब ये लुक्षि मुष्मन है। तो जाएदा कोई प्योकर भमार्वी मंदर पहुँचने के लिए चाहिए मोटर हो, मोटर साइकल हो, प्यादर हो, भीया मेंडर हो प्यादर वाला भमार्वी मंदर पहुँचने के लिए अगर इस मराज हातों से क्या कर देते थे भमार के मं� चेतने चेतने में तो मैं पढ़ते रहता था माया पता पूर्दा की पुरिशा के राजा थे परिशा के राजा थे परिशा राजा थे के थे परिशा के राजा थे परि आतों ते क्या करनते हैं? मंदेत के साथ जानते हैं. जानते हैं, साथ जानते हैं, बर्चन बाते हैं. यह नहीं है, जैसे बुर्जवान में आप ख्याने के लोग मैं आपको कैबरी उठाने के लोग अच्छा भाव है तो हातन द्वारा अमेश मनात कर दे देनें बगवान के लिए परतता और दाग से द्वारा सुक देते जो फूर बगवान को आश्रण किया जाता हैं दूसरे शब्दों में च्रीन तो क्यों करों बगवान के सेवं से तो आप पूछ सकते हो पहु� तरह का एक बाज़र करेंगे तो घहर का फिर्षक होंगे तो बहुत इच जिम्दाने तो भी निभाव भगवान यीनी के लिए जीतव में जीतव में वो भगवान क्या कहेंगे अपना कर्तविया करो सत्या के रूप में बगवान यीनी के लिए तिशा का तसमात्रमेश क مہدر بودھی کو اڑکل کرتے ہوئے ہیں کہ کیا کرو کہنے لے ہیں جیت میں رہو گیتوں میں مہمہ کیا کہتے ہیں یا کروشی یا نیسانی لیکن تو روشی پیدا ہوتی ہے یا تو بس بھی پہنچے کرتے ہوئے ہمار کہتے ہیں جو کاریاں کر رہے ہو میں لے کر لو کرو پھر اس لکھ کے ساتھ کس کے نتیجے سے ہمیں کس کی ضرورت نہیں ہے؟ یوں بھی کھاتے ہو کہیں پڑھتا ہو کہوں کہ میں پڑھتا ہوں جو دان دیتے ہو دان ہمیں ہمیں ٹھیک ستان پر دینا چاہئے یہ نہیں کہ کہ ہمیں ٹھیک ستان پر دینا چاہئے یہ نہیں کہ ہمیں ٹھیک अले गंग उठार के तो हम चाहते ستان پر دینا چاہئے یہ نہیں کہ हैं अले गंग उठार के तो हम चाहते हैं दान दे रहे हैं तो वैसे सान में तो हम जानकी हैं भगवान का उपदेश राप सो भगवान से उपदेश रहे हैं भगवान के से दान दो मुझे बुजे दो बगवान दूसरे शब्दों में घ सहते हैं तब ये दीख परेंद देखा हैं अगर हमें यहाँ चाहिए तो क्या करों किती प्रति निरी से थी इश्टा कर लो जिस व्यक्ति में मन और इजव को पश्च नहीं किया हो और भादोगीता के यहां नहीं सोपता महादियों भी कह रहे हैं मन के विश्व पर विश्व � चंचलाई वराख। एकृष्ण ये बन तो बोधी चंचल है। वाहिर को वश्वे लायना जारा है साहर है। आज तो मुझे नहीं महयं कर सकती है तो भगवान ने क्या कहा तो बड़ी लगा चंचल है भगवान ने क्या कहा भगवान ने कहा भगवान ने कहा चंचल मन है तो अधिआतमकी वो नसबभव है नहीं भगवान ने कहा चंचल मन स्थिर्� जैसे कि मंगलाती में आना, क्लास गाना, जाप करना, चानियों का पालन करना इन सब की उत्योग से आत का चंचल मन स्थिर्व बन सकता है अच्छी का बढ़ाई की नहीं है अरे वाहवाहवाहवाहवाहवाहवाहवाहवाहवाहवाहवाहवाहवाहवाहवाहवाहवाहवाहवाह भर्तियों के विद्यों को पालां करो भी चलचल मन आपका मिट्र बन जाएगा मन जो वश्वे नहीं हो वो शत्रु माना जाता है मन जो वश्वे हो उसे बंदु माना जाता है बहुत मन चटे के लिए क्या कहते हैं मन को बंदु बनाओ शत्रु नहीं जो संभव है भर्तियों क हम सब को क्या रिणडे लेना चाहिए हैं साल में एक दिन आएंगे घीता चाहिएंगे वाले देन बड़े उत्सा के साथ जितार करेंगे तभी लोक्षनी आगे करेंगे रामकृष्ना उच्छानन करेंगे आमरस्तार का खोड़ा हो गया है यह भाव होना चाहिए हमें यह � घीता के अदहार पर घीता में हर प्रशन का उतर है हर समसा का हड है जैसे सब को आर्थिक होना की चाहिए है क्यों नहीं बुर्ण वेश्व की प्रजार आर्थिक लाब के पीछे हैं लग्मान कहते हैं अगर आर्थिक लाब विदेव तो कैसे मिलेगा जीसे देप में लग्मान پرشاہ کے باقی ہوتی ہے پھر بیانگے کرو گے بیانگے نہیں اور بیانگے کار دے یہ موقع ہے دھرم کے نیموں کا موقع ہے اگر آپ بیانگے نہیں کرو گے تو سماج میں کیا پرینام ہوگا؟ جیسے آج آپ دیکھ رہے ہو آوجتیں کم ہوتے جانے ہیں بجاڑ میں مکہیں ہیں یا چیزیں سستی ہوئی ہیں؟ ابھی سبجی پھال وغیرہ زیادہ پہنگے ہیں یا سستے ہوئے ہیں؟ نہیں ہوئے इसलिए मैं भी हो रहे हूँ। इंग्रिश में एक वाविंड पर कहेंगे, कहेंगे, कहेंगे, लोग प्रिवाण और सप्लाहिएं। बान जा रहे हैं सब पैसी का। दिन पर दिन एक कम क्यों होते जा रहे हैं। ये बेसी वर्ताव का पोजा हो रहे हैं। तो अगर हम गीला के کام کے پرواہوں سے ہوئی تھی تو کیتہ کا جان ہمیں ایک نرنے تو آج کی نرنے یہ لینا چاہے کہ ہم کیتہ کو روز پڑھیں گے اور جب پڑھو گے شلوک کے ساتھ پھرپہ کرکے تھاکریہ میں سمجھنا جیسے کئی کروپت سمجھایا ہے تھاکریہ بڑا پہنچکون ہے کیونکہ تھاکریہ میں کروپت سمجھاتے ہیں 1977 میں करें जो मुझे कहा की गीता पैसी गीता किती संस्थियादिये तोनों भी वैशी गीता क्यों भी चाहते हैं नहीं हमें प्रामपार से पूचा शाप सकते हैं कवड़ हैं नहीं कवड़ ही चाहते थें कि वो अपना अस्थी गीता का संजान हो जाये कि वो सं� तो जो नहीं पढ़ते खास है के वो से नहीं पढ़ना है तो आज जीने में हमें ये मेंने तो लेना चाहिए हैं स्यांगीदा का एक स्लोग साथ पढ़के साथ रोज पढ़ना हैं सब के पास भगवागीदा है हैं राजवागीदा यह था लोग किंटी के पास हैं तो एक दिवने के लिए जाएंगे आप साब एक लोग प्राकर चेदा लोग छोड़ी हैं त्यार हो कौन कौन त्यार हो पिछने साथ ये नहीं जाएंगे कि उस साथ में कौन बनाएंगे तो एक लोग गीता रोज पढ़ोंगे चीने की आपके बाद पढ़ें घीता का जो अदेश है समेश है तो इसका भी आप पाड़ें करें। भावान कह रहे हैं भाथी योग और भाथी योग आगर पोड़ा हैं तो इसके साथ श्रावनम। नार्द मुरी ने पलाद महाज को नार्द लागियर भाथी का क्यार � प्रेम और भक्ति के साथ जल्दिया अर्पण करते हैं इसने साथ मुझे प्रेम और भक्ति का भाव अनुकुल हो सकता है अगर हम महामान तक वर्चान करें हली करी नामर विवाक्रिशनामता भवान करी अगर में उतारी लोते हैं विवाक्रिशनामता तो ही नाम क ये देखी मेरां दूर होती है। आजकल हमारे पुदानों पीटाई का नोगन ने स्वज्ट कर। हमारा नोगन ने स्वज्ट थिर देखी। थिर देखो साओ। तो मैल को दूर तरना है। बहारा तर मुझे सडगों पर साथ पर लगे रही है। तो आप कह� पूछी लोगी होती हैं, चूड़ी लोगी होती हैं तो आप हिर्णे को श्वद बनाईंगे तो तो अस्पी परिवर्थन प्राप्स होगा तो यह आपका च्रित्र बनेगा तो यह समार्ग का सुधार होगा देश का सुधार होगा स्वज़ा का सुधार होगा तो यह आप क्या है वो? जो इसके पर चाहते हैं जग्यें दान तुपस चाहते हैं जग्यें दान तुपस चाहते हैं जग्यें दान तुपस चाहते हैं जग्यें दान तुपस चाहते हैं जग्यें दान तुपस चाहते हैं जग्यें दान तुपस चाहते हैं जग्यें दान तुपस चाह यह नहीं करना चाहिए साथ इसको मैं नहीं आता हूँ। मैं अच्छा वोही लड़ी जोडते हैं जो भगवान के पीव बनना चाहते हैं। भगवान के पीव बनने के लिए भगवान ने क्या शौर्ट कर दिया है। सोड़ा बास चाहते हैं। मुख डिस्टूस। मुख जहर में जाकर सलेज दो डि अब देपी में में देखते हो आपके इसायी भाई में घर जर आते हैं न भाईबल देखते हैं कोई ही नहीं देखते कि हिदू का घर है और सीख का घर है तो यह देखते हों कि मातर घर है तो चेतन भाव रोगों ने भी यही कहा था हरी दासमा ने देना दागो धार घर जाओ पड़े संदेश दो बोलो कृष्णा वाजव कृष्णा कृष्णा की सिक्षा लो रोगों को ये सिक्षा लो कि कृष्णा बक्वाल ने आपके आस्भी खराण है और आस्भी धान है तो हर सब अपके हाथ करदे हैं अधिक से अधिक बातने के लिए जा बातने के लिए भुता होता होता होता होता होता होता होता होता होता होता होता होता होता होता होता होता होता होता होता होता होता होता होता होता होता होता हो दूसरे क्योंकि या ज्यान लागे तो भाम्या आकर गंध काम करने तो कि क्या इच्छा होगे कि कुनें की कामों में जोड़े जाएगे आज आप देखते हों अन्देव जेती को गंध रासे में चलते हों देखते हों तो आप क्या करते हों हाथ पकड़कर सी रासे में जोड़ कि प्रशाप्या प्रशाप्या प्रशाप्या प्रशाप्या प्रशाप्या प्रशाप्या प्रशाप्या प्रशाप्या प्रशाप्या प्रशाप्या प्रशाप्या प्रशाप्या प्रशाप्या प्रशाप्या प्रशाप्या प्रशाप्या प्रशाप्या प्रशाप्या प्रश और उप्रा इन गंधां में क्या है देव्या की आणण। तो आप सब चुड़े होगे हो, आपका मैननथान चुड़ो हो गया कि होगा भी पंद से। इस सबे, आप मैं देखा हूँ कौन से बहुत मैननथान के सेवा में चुड़े होगे। जो चुड़े हैं उनसे निवेधनी प्रियास करो प्रियास करो प्रियास करो प्रियास करो प्रियास करो प्रियास करो प्रियास करो प्रियास करो प्रियास करो प्रियास करो प्रियास करो प्रियास करो प्रियास करो प्रियास करो प्रियास करो प्रियास करो आप से यी ने विनने आप सब प्रचार की से होगे प्रिकुरिये और हर साल आप से योग देते हैं को पीछे साल आप के स्थिगोग से मनने सवधोला की लभा देते हैं और उससे पीछे साल मैं कौन सवधोला की लभा देता हूँ? पीछे की चार साल मुझे प्रियार से दो से जाना, दो लाइन से जाना गीता बढ़ रही हैं। और अनीग उध्धारन हैं, जब से आप देखते हो, कैसे गीता के अनियंद से लोगों के थीमन परता है। कए उध्धारन हैं, जब व्यक्ति ने कहा मैं हास्मा हाते करने वाला था, कड़े वो गीता करते ह पीजी ने असली ज्यान आज एक बड़े पुस्तिन भुयश्णों कवी ने कहा है मुनुश्य जर्मा पाया मुनुश्य जर्मा प्राप कर लिया मैंने जहांदर पीशना आये पा लिया आंदर पीशना की पूजाने की जहांदर पीशना सून्या पीशना की जहांदर पीशना � پھر ہم ان کو عمرت دے رہے ہیں تو آپ کہو کہ صحیح تو ہیں جو کہتے ہیں ہمیں جہد پینے دو پھر کئی ہیں جو کہتے ہیں ہمیں عمرت بھی دے رہے ہیں کچھ دن ہمارے پرسوں ہمارے دنی کے ساتھ یہاں ہمیں بھوکت پینے ڈر رہے تھے ہمیں سٹوپ لائٹ میں ڈر رہے تھے اور ایک دن پینے تو اینڈ موٹر ہماری پیچھا کر رہی تھی ہم بھی سوچ رہے تھے کہ اینڈ پیچھا کیوں کر رہی ہے پھر پھائل میں اس نے ہمارے پاس پہنچ رہی ہے تو ہم پہچھے کہا تھے کہ آپ کی موٹر کو پہنچنا چاہتے ہیں کہ یہ کھانسے ملتے ہیں तो खयी लोग आपकी लाह देख रहे हैं कोई दीता पढ़ना नहीं चाहता नहीं है अजारों भग पढ़ना चाहते हैं अगर कोई पढ़ना नहीं चाहता था आपको यहाँ होते हैं आजारों भग पढ़ते हैं आजारों भग पढ़ते हैं और ये भग कैसे मनें इन ग आप जब ग्रंत देते हो आपको भी किसी ने ग्रंत दिया था न पहले एक समझ है आप बहुत बहुत पहले जोड़े थे ग्रंतों के माद्यों से तो आप भी किसी ने ग्रंत दिया आपने पढ़ा आपने निर्णे किया आपने सेवा करेते हैं तो इसी वकाल लाभव लो प्रेशच के जिए ये साब भी नाई लागी दाखों बारे में हरी बोल हरी बॉल हरी बॉल हरी बॉल हरी बॉल हरी बॉल हरी बॉल हरी बॉल हरी बॉल लावा लावा लावा
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