अयोध्या राजा श्री राम विग्रह स्थापना कथा | 21 Jan 2024 | Juhu | Srila Gopal Krishna Goswami

In this Hindi devotional lecture recorded at Juhu on 21 January 2024, Srila Gopal Krishna Goswami leads a satsang that explores the theological, practical, and social dimensions of Ram‑consciousness within the Gaudiya Vaishnava tradition. The discourse begins with a reminder that a stone idol of Lord Ram is no different from the divine form itself and should be worshipped with the same reverence. The speaker celebrates the growing “Ram‑consciousness” in India, urging listeners to translate that awareness into moral improvement rather than mere name‑calling. A central discussion examines the meaning of “Ram” in the Hare Krishna Mahā‑mantra, concluding that both Lord Rama and Balarama are valid referents and that the mantra’s power lies in sincere chanting. Throughout, Srila Goswami stresses the necessity of studying scriptures, following guru‑instruction, and applying Ram’s teachings to eradicate bad habits and foster an “spiritual revolution.” Practical encouragement is offered through analogies such as the English proverb “try, try, try and you will succeed,” urging persistent effort in bhakti practice. The session includes a participant’s question about the liberation potential of the Mahā‑mantra and the role of the name “Ram” within it, which is addressed by reaffirming the mantra’s sufficiency for spiritual progress. The lecture concludes with calls to continual chanting, service, and inner purification as the true celebration of Lord Ram.
Chapters
जो एकादशी के जानते हैं, हम प्रॉपरली हमेशा से पढते हैं। भारत में राम जी मैंने सोचा की आज हम आपको आमशंद्रजीकीलेना होगा। उपदेश है, भगवत है ा की अगर तुम मुझे पसंद करना चाहते हो। और यहाँ पढ़ते हो हो थी, सा हो ही थी। उसी समय क्रिश्ना पोस वगर प्रिंट हुई थी। वो मजसिक तरीके से बल्कि 10 कॉपी एडवांस में आ गई। प्रभाजी ने पहले 1 कॉपी ली, फिर कहा 10 रुपए की कॉपी है। अरे कृष्ण सबको भक्त को कॉपी लेनी चाहिए। और 10 कॉपी प्रबल ने अपनी कॉपी भी। बेचे ने कहा एडवांस कॉपी लाए थे, तो अपनी कॉपी पर लोग पड़े तो पापा की उनके गुरु की अरे भगवान आपको सुविधा दे क्यूँ आप में में 1 किताब बात हो? सम्भव लन्दन में पड़ोगे 1 रशियन शेर ने ऑस्ट्रेलिया में 1 किताब प्राप्त की,
1 रशियन सैनिक थे सेलर थे वो। और उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में किताब प्राप्त की? प्रपात की।
विश्व में सडकों पर जाते हैं करने के लिए।
भक्त जो हैं सारे विश्व में सडकों पर जाते हैं।
पुस्तक वितरण करने के लिए गया, ऑस्ट्रेलिया से उसे किताब में पड़ी, और वे
ऑस्ट्रेलिया से उनको जो बुक मिली व भक्त को तो उन्होंने किताबें पढ़ी।
वो इंग्लैंड के रास्ते में इंग्लैंड पहुंचे
गए, और वो ऑस्ट्रेलिया से इंग्लैंड जा रहे थे, तो जाते हुए उन्होंने जो पुस्तकें मिली थी वो पढ ली, और इंग्लैंड पहुंचते ही इस्कॉन के मंदिर गए और वहां से और पुस्तकें खरीदी
रशिया पहुंचे भक्त बन गए।
और जब रशिया पहुँचे तब वो भक्त बन गए।
अंदाजा लगाओ कि दूर पहुँची है।
अंदाजा लगाइए की कैसे, उस तक कहाँ कहाँ तक पहुँचे
और मॉस्को तक सुनाई दे रहा था।
ऑस्ट्रेलिया में मृदंग बजा पुस्तक वितरण का और मॉस्को तक आवाज पहुंची।
तो आप कहोगे आज की टेक्नोलॉजी में हम दुनिया के किसी कोने में पहुँच सकते हैं?
आप कहोगे आज की टेक्नोलॉजी से हम दुनिया में किसी भी कोने में पहुंच सकते हैं।
टेक्नोलॉजी नहीं थी और चमत्कार था। यह है ग्रंथों का प्रभाव।
उस समय यह टेक्नोलॉजी नहीं थी, बट ये चमत्कार है, ये ग्रंथों का प्रभाव है।
सो आप सब ने मसान किया था फाइनल को,
आप सभी ने 3 लाख 36 हजार गीता बाटी है। जूम में
तो आज 11 11 बजे यह प्रोग्राम आराम होगा। सब जिन्होंने गर्द बांटी है उन्हें इस कल में है। तो आज कल भारत में क्या क्या चेतना है। ram lipid सोचा कि राम जी की हिंदुस्तान में है सो राम, ये कौन है मैं जो जो टीवी प्रोग्राम आ रहा है वो भी मैं देखता हूँ, थोड़ा जारी बोल रहे हैं। वो ये स्वीकार करने की राम भागपर भगवान है, भगवान के अवसर है। भगवान राम भगवान के अवसार नहीं है, वो स्वयं राम है, पर मंगवाया है। और भगवान राम पकड़ हुए थे उनके 3 भाइयों के साथ, कौन से, वो लक्ष्मण। उनके पिता थे। लव के अनेक पतिया।
भगवान
के पास कैसे प्लीज जो न हो रह भगवान प्रकट क्यों होते हैं। देवता ब्रह्मा जी भगवान को प्रकट हो तो भगवान के अवतार के विषय में ज्ञान है। शास्त्रों में,
तो भगवान क्यों प्रकट होते हैं। जब देवता भगवान से प्रार्थना करते हैं उनकी रक्षा करने के लिए, तब वे प्रकट होते हैं। जैसे ब्रह्मा जी और अन्य सभी देवता गए थे और प्रार्थना की थी तो भगवान कृष्ण प्रकट हुए थे।
शासन है।
और भगवान का जो प्रामाणिक वर्णन है वो हम शास्त्रों में पाते हैं।
हॉलीवुड का नाम था अमिता।
हॉलीवुड में 1 मूवी बनी थी जिसका नाम था अवतार। बहुत बड़ी हिट हुई थी मूवी।
और उस मूवी में असली अवतार नहीं था।
वो मूवी में असली अवतार का वर्णन नहीं था। तो
भगवान राम स्वयं भगवान है, भगवान
राम स्वयं भगवान हैं।
नंबर सविता में भी विजय की स्थापना है।
ब्रह्म संविदा में भी यह वर्णन किया गया है।
भगवान राम प्रकट हुए थे।
युग में भगवान राम प्रकट हुए थे। त्रेता युग में भगवान कृष्ण प्रकट हुए थे। द्वापर युग में चेतना महा प्रभु प्रकट हुए थे। कलयुग में
राम
कृष्ण के म यही राम प्रकट हुए। कृष्ण के रूप में, उनके भाई
वो प्रकट हुए बाल राम के रूप में
और उनके भाई लक्ष्मण प्रकट हुए बलराम
के रूप में लक्ष्मण के रूप में प्रकट हुए थे। वो छोटे भाई थे।
जब लक्ष्मण जी के रूप में प्रकट हुए थे, वो छोटे भाई थे,
उनके भाई राम होती
और कई बार लक्ष्मण और राम में थोड़ी मिस अंडरस्टैंडिंग होती थी।
लक्ष्मण ने कहा अगली बार मेरी तुम्हारा बड़ा भाई बन रहा है, छोटे भाई के नाते तो मुझे डांटते रहे।
लक्ष्मण जी ने राम से कहा कि अगली बार मैं आपका बड़ा भाई बन के आऊंगा मैं छोटा हूँ इसलिए आप मुझे डांटते रहते हूँ।
तो अयोध्या और प्रसिद्ध राजधानी थी।
अयोध्या बहुत प्रसिद्ध राजधानी थी और
थे कि वो अपने बौधिक जिम्मेदारियों को त्याग है। रिवाइज में के बाप राजा की नेता बेटे को उन में वासा के पश्चाद अपने बेटे को जिम्मेदारी दे।
ते थे तो उस समय अयोध्या में अयोध्या राजधानी थी। और ये रिवाज था उस सम्यवैदिक कल्चर का कि जो पिता है वो अपने राज्य, अपने बेटे को राज्य सौप के वो वनवास लेते थे। रिटायरमेंट होता है
पूरी प्रजा बहुत दे
भगवान राम को पूरी प्रजा स्नेह करती थी।
और भगवान जब प्रकट होते हैं, दिव्य लीला प्रकट करते है, भगवान जब प्रकट
होते हैं तो दिव्य लीला प्रकट करते हैं।
1 व्यक्ति को कहते हम भगवान है।
आजकल आप देखते हो कोई कहता है की हम भगवान हैं, अनेक व्यक्ति भगवान कैसे कह सकते है, भगवान कैसे कह सकते हैं।
जिसमें 6 प्रकार के गुण हो असीम
मात्रा में, जिसमे 6 प्रकार के गुण हो, पूरी असीम मात्रा, असीम मात्रा में।
यह क्या है प्रकार के गुण
क्या हैं के प्रकार के गुण
सबसे धनी,
सबसे धनी,
कभी कभी भारत धानीसा धनी हो तो
आप समाचार में पढ़ते हो, कभी कभी अदानी सबसे धनी हो गया, कभी अम्बानी सबसे धनी हो गया। आप कितने भी धनी हो, कोई दूसरा व्यक्ति आपसे धनी हो सकता है, लेकिन भगवान से ज्यादा धनी कोई नहीं हो
सकता,
वो सबसे वीर है, भगवान सबसे
ज्यादा शक्तिशाली हैं, वीर है। छोटी आयु में ही भगवान ने अनेक असुरों का बंद कर दिया था।
तो भगवान जो है सबसे भगवान है।
भगवान जो हैं वो हर समय भगवान
है, है सबसे भगवान है। ये सबसे खूबसूरत है,
भगवान सबसे खूबसूरत है।
कृष्ण इज आल, अट्रैक्टिव रोबत कहते थे, रोबर्ट कैदे थे?
कृष्ण इज ऑल, अट्रेक्टिव गॉड इज मोस्ट
ब्यटीफुल, गॉड इज मोर मोस्ट ब्यूटिफुल हम जो शरीर के प्रति आकर्षित होते हैं, पुरी की सी पुरुष का ये
नकली है।
हम भौतिक संसार में जो भौतिक शरीर के प्रति आसक्त सख्त होते हैं, स्त्री के शरीर के प्रति वो नकली आकर्षण है।
1 कथा है लिक्विड ब्यूटी।
1 कथा है लिक्विड ब्यूटी
बड़ा धनी राजा था।
1 बहुत धनी राजा था, स्त्री को देखा, उसने 1 खूबसूरत स्त्री को देखा,
देखा विवाह करना चाहता हूँ।
राजा ने स्त्री से कहा मैं तुम्हारे साथ विवाह करना चाहता हूँ। यह स्त्री अध्यात्मिक भाव की थी, उसे
पता था ये राजा प्रति आकर्षित है।
उसे पता था की राजा मेरी शारीरिक खूबसूरती के प्रति आसक्त है।
से शिक्षा देने।
2 तो उन्होंने सोचा कि मुझे राजा को शिक्षा देने।
2 अपने बदसूरत बनाने का है।
उन्होंने बहुत सारी जुलाब की गोलियां खाईं अपने शरीर को बदसूरत बनाने के लिए,
15 दिन के लिए, पंद्रह दिन के
लिए, पंद्रह दिन के ले गई।
जिस साल में उन्हें राजा से मिलना था।
राजा उनको बचा, फिर वो गई जिस स्थान पर उन्हें राजा से मिलना था। राजा उन्हें पहचान भी नहीं सका। राजा था राजा और कहीं देख रहा था, राजा रहा देख रहा था,
वो
लड़की आई, वो खूबसूरत लड़की आएगी। राजा ने उस स्त्री से पूछा जो बदसूरत दिख रही थी। तुमने खूबसूरत लड़की को देखा क्या? उसने कहा हाँ मैं वो लड़की हूँ।
2 हफ्ते पहले
तो राजा बोलता है, तुम तो इतनी खूबसूरत थी, अभी कैसे इतनी बदसूरत हो गयी
को बाल्टियों में रखा है आपके?
तो स्त्री ने कहा मैंने अपनी असली खूबसूरती को बाल्टियों में रखा है, आपके लिए
क्या है? असली
राजा भी देखना चाहता था की क्या है असली सूरत हर भगवान जो है वो सबसे खूबसूरत हैं, सबसे और सबसे प्रसिद्ध है दुनिया के किसी कोने
में जाओ,
अब दुनिया के किसी कोने में भी जाओ। पूछो भगवान कौन है? तो लोगों को पता है।
और राम के पूरी राजधानी सज गई। और
तो हमने देखा कि विराग में भी भगवान सर्वश्रेष्ठ हैं। और जैसा भगवान रामचंद्र के लीला में सब अयोध्यावासी देख रहे थे कि अभी हमारे कल, हमारे प्रभु का राज्य अभिषेक होगा,
पूरे शहर में उत्सव हो, पूरे
शहर में उत्सव हो रहा था। 3 पत्निया दशरत महाराज की 3 पत्नियां
थी, बाबाजी, तो और 1 पत्नी ने सहयोग दिया था, पति कठिनाई में थे,
उनकी 1 पत्नी, कैकई ने सहयोग दिया था। जब दशरत महाराज कठिनाई में थे, क्या
कर सकता हूँ, तुमने मेरी जान बचाई है, क्या मांगना चाहते हो?
दशरथ महाराज ने कहा कैकई से तुमने मेरी जान बचाई है, मैं तुम्हारे लिए क्या कर सकता हूँ। मांगो कई बड़ी होशियार थी, कई बड़ी होशियार थी।
मैं जब ठीक समय आएगा जब आप से यह वर मांगूंगा।
केकई ने कहा जब ठीक समय आएगा तब मैं आपसे वर मांगूंगी
द। तुम्हें याद है तुमने वादा किया था की मेरी इच्छा को।
केकई ने कहा, महाराज दशरत से आपको याद है कि आपने कहा था आप मेरी इच्छा पूरी करोगे।
वहाँ 1 बार बच्चा दे दिया, किसी हालत में उससे पीछे नहीं हट रहा। आज के बाद में आप कितने भी लीगल है फाइल करो मैं नहीं जाता है।
तो वैदिक समय में कोई भी व्यक्ति वचन देता था तो किसी भी कीमत पर उसका पालन करता था। आज के समय में आप कितने भी लीगल डॉक्यूमेंट साइन कर लो तो भी कोई परवाह नहीं करता।
तो हमे याद है बोलो मांगो मुझे क्या माँगना चाहती हूँ।
दशत महाराज ने कहा कि हाँ मुझे याद है मांगो, तुम क्या माँगना चाहते हो।
मैं चाहती हूँ कि तुम मेरे बेटे भरत को राज करी। 2 राम को 14 साल के लिए भेज।
2 वनवास में कई ने कहा, महाराज शरद से मैं चाहती हूँ कि आप मेरे पुत्र भरत को राज्य दे दे और राम को 14 साल के लिए वनवास में भेज दें। राम दशरत महाराज को ऑलमोस्ट हार्ट अटैक हो गया। ये सुनकर क्योंकि राम उन्हें बड़े प्रिय थे।
ये कैसे कह सकती हो, हमने बेटे को भेज। 2 वनवास में दशरत।
महाराज ने कहा तुम ये कैसे कह सकती हो। मैं अपने बेटे को वनवास में भेज
दूं वाला किया है। तो पीछे।
केकई ने कहा, तुमने वादा किया है, तुम पीछे नहीं हट सकते।
राम को बुलाया।
दशरत। महाराज ने राम को बुलाया और हा और कहा
14 साल के लिए जाओ की इच्छा है, वो भारत को। राजा।
दशरत ने राम से कहा, बेटा, तुम 14 साल के लिए वनवास में जाओ, यह कैकई की इच्छा है।
और और बिल्कुल 1 सेकंड में स्वीकार कर लिया।
राम ने 1 सेकेंड में स्वीकार कर लिया।
ओके पिता गोविंग।
राम ने कहा, ओके पिताजी, मैं जाता हूँ।
राम ने यह नहीं कहा जा, मुझे आज गली में देखना चाहती है, सब कुछ तैयार हो गया है। अब कैसे हैं ये लोग। तुरंत और का पालन किया।
राम ने ये नहीं कहा कि सब तैयार हो चुका है। अयोध्या की जनता चाहती है कि मैं राजा, राजा बनूं और सब तैयारी हो गई है। और आप मुझे ये कह रहे हो। भगवान राम ने अपने सर्वश्रेष्ट वैराग्य को प्रकट करते हुए कहा कि जो आपकी इच्छा है वो मैं पूरी करूंगा।
तो भगवान है। सब कुलों को 1 साथ प्राप्त करते हैं।
भगवान जो हैं इन सब गुणों को असीम कृपा में 1 साथ प्रकट करते हैं।
बलिक समाज में धनी पहलवान व्यक्ति नहीं होगा।
भौतिक समाज में आप देखते हैं जो सबसे धनी व्यक्ति होगा लेकिन वो सबसे बड़ा पहलवान नहीं होगा,
होगा तो धन
नहीं होगा, पहलवान होगा तो धनी नहीं
होगा
और सबसे खूबसूरत नहीं होगा ही होगा, सबसे वैरागी नहीं होगा। भगवान में। ये सारे 6 के 6 गुण 80 मात्र में है। इसलिए हम उन्हें भगवान बुलाते हैं।
तो बहुत ही धन वो वो धनुष इतनी भारी थी कि 300 आदमियों को उठाना पड़ता था, 300 ने राजा आये ने धनुष को तोड़ने का प्रयास किया और कोई भी सफल नहीं हुआ और फिर हम जी आए और हम जहाज को तोड़ दिया जैसे 1 व्यक्ति 1 घंटे को भगवान ने शुरू से हुविलापगड़कीभगवान ने चूढ़िआयुमें गोधन पर्स को उठाया और कोई साधारण बच्चे के लिए तो इसके लिए भगवान मान से ने भी अपना साज बूझकर रूप पकड़ किया और 1 दिन भगवान भगवान ने निवेश में में ज्ञान हो भगवान lifboyxempyबuकु और भगवान जैश्रीराम कहते हैं अच्छा है, शिक्षा है उसका।
भगवान गए
और जाने से पहले 1 नदी के पार जाना चाहते थे तो पानी था, 3 के मानकों के साथ कापने लगा वो समझे जो व्यक्ति था से, तो दूसरी तरफ जानेंगे भवन राम की अनेक दिलाये हैं और आप पढ़ते हो कि भवन चले अयोध्या से शीला देवी ने कहा मैं भी चलूंगी साथ, तुम साथ कैसे चलोगे खाना में पले हो और ऊ और लक्ष्मण लक्ष्मण ने भी कहा मैं भी चलूंगा मैं और लक्ष्मण घर से निकले भारत को राजगरी प्राप्त हुई थी पर भर लेना था बड़े के साथ जैसे खाली ले बाली जो गाय के बालो को भी बुलाते थे, क्यूँकि था राम घर बॉयल कर लेते। तो जब भगवान लौटे में 14 साल के बाद भक्तों ने, यूलिया वासियों ने वह गाय से उनका स्वागत किया और हर घर में दीप जलाये, हजारों की संख्या में जैसे मैंने सुना कि प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें भारत में करना चाहिए, हर घर के सामने ली सो, दीपा में हम सुनते हैं रामराज्य की चर्चा, लोग कहते हैं पॉलिटिशन हे राम, वोट 2 हम राम राज्य देंगे, पर राम राज्य लोग सुखी कीमत है। लोग सुखी थे क्यूंकि समाज में किसी प्रकार का कश नहीं, समाज में अरे देवरी, बोली, गादी देवि, मन के द्वारा कष्ट, प्रकृति द्वारा कष्ट, दूसरे व्यक्ति के द्वारा कष्ट, पर ऑल द स्टोरी।
आज हम समाज में देखते हैं कि 3 प्रकार के कष्ट हैं, अध्यात्मिक गाधी, बहुत ही गाधी देविक, अपने मन और शरीर द्वारा कष्ट, दूसरे व्यक्तियों द्वारा कष्ट और प्रकृति द्वारा कष्ट।
बनता।
हूँ के समय कोई किसी प्रकार का कष्ट नहीं था, कोई चिंता नहीं, कोई तनाव नहीं।
भगवान राम के समय हम देखते हैं कि किसी प्रकार का कोई कष्ट नहीं था, कोई चिंता नहीं थी, कोई तनाव
नहीं था, केवल हर व्यक्ति भगवान का
उपासक था, हर व्यक्ति भगवान का उपासक था।
और खुशखबरी मिले के समय भी आप खुद सुन सकते थे।
और खुशखबरी है कि मृत्यु का समय भी आप खुद सुन सकते हो, कौन
सकते थे,
सुन सकते थे।
अगर यह छूट आपको आज दे दे, सारे शमशान घाट बंद हो जायेंगे।
अगर ये छूट आपको आज दे दे, तो सारे शमशान घाट बंद हो जायेंगे।
क्यूंकि कोई कहेगा ही नहीं, मैं मृत्यु के लिए तैयार हूँ, कोई कहेगा ही
नहीं कि मैं मृत्यु के लिए तैयार हूँ।
कि काला हो।
हर व्यक्ति कहेगा कल आओ कलाओ 1
समय 1 वकील था, ने बुलाया
1 समय 1 व्यक्ति था। जिसको यमराज ने बुलाया नरक में आओ भेजा, उसे यमराज ने यमदूतों को भेजा था, उसको लाने के लिए
तुम्हें पहले नोटिस देना चाहिए।
सो यमराज से। वकील ने कहा कि तुम ऐसे मुझे कैसे बुला सकते हो? तुम्हें तो मुझे पहले नोटिस देना चाहिए।
लोग ऐसे काम करते हैं, नोटिस नहीं होगा तो यह काम कर जाएगा, कोई नोटिस नहीं भेजा। तो ऐसे कैसे अपने प्रतिनिधि को सकते हो।
वकील लोग ऐसे ही काम करते हैं कि नोटिस पहले भेजो, फिर काम होगा। तो आप। यमराज जी से कह रहे थे आपने तो कोई नोटिस भेजा ने और सीधा यमदूतों को भेज दिया,
तुम्हारे
है।
तो यमराज ने कहा कि तुम्हारी आँखें जिसमें दृष्टि तेज थी, अभी, वो कैसी
है, मैं लगभग अंधा हूँ, अभी तो
मैं अंधा हूँ, लगभग अंधा हूँ, लगभग अंधा हूँ,
30 साल पहले तुम्हारी आँखें
कैसी थी, 30 साल पहले तुम्हारी आँखें
कैसी थी, बाज जैसे ट्वेंटी ट्वेंटी, एकदम बाज जैसे थी, ट्वेंटी बाई, ट्वेंटी ट्वेंटी
बाई, ट्वेंटी विजन
तो कितने बाल हैं?
तुम्हारे कितने बाल हैं। तुम्हारे सिर में। वकील ने कहा अभी तो में टकला ओगे हूँ, हरे कृष्ण का हो,
चला
होना है,
टकला होना हरे कृष्ण वालों
के लिए अच्छा है, कोई बल नहीं
हो, जिसके कोई बाल नहीं।
40 बाल थे।
यमराज ने कहा 40 साल पहले कितने बाल थे, पूरे बाल थे, किसने कहा
पूरे बाल थे, तुम्हारे पैरों में कितनी
ताकत है, आज तुम्हारे पैरों में कितनी ताकत है, बिलकुल नहीं, बोले, बिल्कुल नहीं, मैं विल चेयर पे हूँ।
और 30 साल पहले की है, 30
साल पहले कितनी ताकत थी।
मैं इंडिया टीम में था, मैं इंडिया टीम में था।
वकील ने कहा कि मैं इंडिया की ओलंपिक टीम में था।
कमजोर होते गए, का कमजोर होते गए, पैर कमजोर होते गए, तुम सोचो मैंने नोटिस नहीं लिया, इसी नोटिस पढ़ाई।
यमराज ने कहा तुम्हारी आँखें कमजोर होती गई, बाल झड़ते गई, टांगे कमजोर होती गई। और तुम कहते हो की मैंने नोटिस नहीं भेजा, इतनी नोटिस भेजी, तुमने पड़ी
नहीं
तो हमें सूजा मिलती है। को उफा में शाप दिया, था, के पश्चात जाएगी गंभीरता से इसे दिया, और से पूछा ने वाला आने वाला है, क्या करना चाहिए।
परीक्षित महाराज को ब्राह्मण का श्राप जब मिला तो उन्हें ये सूचना मिली कि 7 दिन बाद उनकी मृत्यु हो जाएगी, परीक्षित महाराज ने बड़ी गंभीरता से लिया और ब्राह्मणों से पूछा कि मृत्यु के समय व्यक्ति को क्या करना चाहिए?
तो हमे भी रोज नोटिस मिलता है,
हमे भी रोज नोटिस मिलता है,
कभी दांत में दर्द है, कभी सिर में दर्द है, कभी मांगे है, कभी चल नहीं सकते, सब मॉर्निंग को इगनोर करते
है, हमे भी बहुत सारे नोटिस मिलते हैं, कभी दांत में दर्द है, कभी सिर में दर्द है, कभी माइग्रेन है, कभी चल नहीं सकते, लेकिन हम इन सारे नोटिस को इगनोर करते है, आज
है कल ठीक हो जाएगा, हम सोचते
हैं की आज दर्द है, कल ठीक
हो जाएगा, सो राजसे, मृत का समय भी न सकते, राम राज्य के समय
मृत्यु का समय भी खुद चुन सकते
थे, वो जा
राजा भी चुन लेते थे।
तो राम राज जो सड़क है, उनको वन राम स्वयं साफ करवाते थे।
राम राज्य के समय जो अयोध्या की सड़कें हैं, वो स्वयं भगवान राम साफ करवाते थे।
सम हाथ के सून से गिरता था। उससे अयोध्या की सड़कों को रोज साफ किया जाता था
और अयोध्या की सड़कों को रोज सुगंधे जल्द से साफ किया जाता था। हाथी के शूल से शावर कराते।
हालांकि वो करता था। हमाज में ऐसा वातवरण था। यह सत्य योग है।
भगवान राम के समय। हालांकि वह त्रेता युग था, लेकिन समाज में ऐसा वातावरण था कि जैसा वह
सत्य योग है, भगवान राम की है। 1 घर में 1 ब्राहमण था, जिसने 1 महीने के लिए कुछ नहीं खाया, क्योंकि वो उसका नियम था। मैं रोज राम जी का दर्शन लूँगा, फिर खाऊंगा।
भगवान राम की अनेक लीलाएं हैं। 1 लीला है, 1 ब्राह्मण था, उसने 1 महीने के लिए कुछ नहीं खाया था। क्योंकि उसने ऐसा व्रतपाल व्रत रखा था कि जब तक मैं भगवान राम का दर्शन नहीं लूंगा, तब तक कुछ नहीं खाऊंगा।
यात्रा करके लौटे ने कहा, ये
रामजी जब यात्रा से लौटे तो लक्ष्मण ने कहा, ये ब्राह्मण हैं, आपके बिना, आपके दर्शन किये, बिना कुछ नहीं खाता।
राम ने अपनी मूर्ति रखी थी, अलमारी में, उस मूर्ति को निकाल कर उस ब्राह्मण को दिया।
राम ने अपने अलमारी में 1 मूर्ति रखी थी अपने और वो निकाल के
उस ब्राह्मण को दिए और ब्राहमण ये मूर्ति लो, इसकी पूजा करो। इस मूर्ति में कोई अंतर नहीं।
भगवान श्री राम ने ब्राह्मण से कहा, यह मूर्ति लो, इसकी पूजा करो मेरे में। और इस मूर्ति में कोई भेद नहीं है।
जो भगवान के रूप में प्रकट होते
हैं, भगवान अर्चा विग्रह के रूप में प्रकट होते हैं।
हमें यह नहीं सोचना चाहिए, यह पत्थर की मूर्ति है।
हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि यह पत्थर की मूर्ति है।
वह बड़ी खुशी की बात है कि राम चेतना बढ़ी है इस देश में।
बड़ी खुशी की बात है कि राम चेतना बढ़ रही है इस देश में।
पर राम के इतना बढ़ेगी तो हमारे हृदय को शूल बनाएंगे।
राम चेतना बढ़ेगी तो हमारे हृदय को शुद्ध बनाएंगे।
अगर हम राम जी के संदेश उपदेश का लाभ नहीं उठा, केवल नाम का ज्यादा शोभा।
अगर हम भगवान राम के उपदेश और संदेश का पालन नहीं करेंगे तो सिर्फ राम कहना उतना? शोभा नहीं देता।
तो क्या हरे कृष्ण महामंत्र, राम भी आता है।
आप हरे कृष्ण महामंत्र जब करते हो, उसमें राम भी आता है।
तो 1 समय चर्चा कर रहे थे ये राम के क्या मतलब बाल राम या भगवान।
1 बार प्रहपाजी के 2 विदेशी भक्त चर्चा कर रहे थे कि हरे कृष्ण मंत्र में राम का क्या अर्थ है? बलराम के भगवान राम
का मींस बलराम।
1 ने कहा, इसका अर्थ है राम और 1 ने कहा, इसका अर्थ है बलराम। वो प्रपात के पास गए, दोनों प्रापत के पास गए। हा, बहुत राइट ब्रवपादने, हा, दोनों सही हैं।
तो राम नाम हो। हमें सासों की शिक्षा का लाभ उठा रहा जाए।
हमें शास्त्रों की शिक्षा का लाभ उठाना चाहिए।
अगर हम कोई बुरी आदतों को रखेंगे वो गलत काम करते जाएंगे, राम चेतना
उठा और अगर हम बुरी आदतें, रखेंगे और गलत काम करते जाएंगे तो हम राम चेतना का लाभ नहीं उठा रहे।
सच बात सच बात है, हमें आध्यात्मिक क्रांति लाने की आवश्यकता है।
हमें अध्यात्मिक क्रांति लाने की आवश्यकता है।
लोग को शिक्षा। 2 की। राम जी की चेतना का अर्थ है यहाँ के संदेश का उठा, आप लोगों को संदेश।
2 ये प्रचार करो की राम चेतना का मतलब है रामजी का संदेश और शिक्षा का पालन करना,
वो है। असली राम का उत्सव वो है।
असली राम का उत्सव, हरे कृष्ण
धन्यवाद, गुरु महाराज। 1 प्रश्न है। जैसे आपने बताया हरे कृष्ण महा मंत्र में राम भी आता है। तो 2 अर्थ हैं रामचन्द्र, भगवान और बलराम। तो मैं चेतना चरित्र में पढ़ रहा था। अंत लीला और अध्याय। 3, श्लोक नंबर जो है 200 संतावन तीसवे प्रसंग में बताया गया था कि जब माया देवी नवाचार हरिदास के पास आती है तो बोलते हैं कि मैं राम का नाम तो जब करती थी तो मुझे इससे मुक्ति मिल जाती है। लेकिन अभी मुझे हरे कृष्ण महामंत्र दीजिये दिक्षा कीजिए तो इसमें राम जो है उसमें मुक्ति मिल जाती है। लेकिन वो हरे कृष्ण महामंत्र से दिक्षा होना चाहती थी इसमें और इसमें प्रुपाजीतात्वार में भी लिखते हैं कि ये सफिसिएंट नहीं है, आध्यात्मिक के लिए, आध्यात्मिकता मतलब पूर्णता नहीं है। भगवान राम नाम में। तो इस तरह से प्रपात समझा रहे। महामंत्र जो है वो पूरी तरह से प्रेम दान करने वाला है। तो मैं समझ नहीं पाया थोड़ा सा
है
तो निष्कर्ष, यह निकलता है। प्रोप जी कह रहे हैं कि हरे कृष्ण मंत्र जप करो और कोई प्रश्न है हरेक महाराज महाराज।
हम जब जैसे भगवान को देखते हैं कि भगवान ने जैसे आदेश था, दशरत महाराज का, तुरंत पालन किया। तो हम हमारे जीवन में देखते हैं कि वरिष्ठों का, आदत आदेश पालन करने का, किसी भक्तों का प्रश्न करने का, लेकिन कुछ हमारे बहुत ही कमियों की वजह से हम पालन नहीं कर पाते, बहुत ही कमियों की वजह से हम उनको प्लीज नहीं कर पाते, खुश नहीं कर पाते। तो काला दृश्य हम देखते हैं कि हमारा उत्साह, उनको प्रसन्न करने का, वो चला जाता है, डाउन हो जाता है। और फिर हम सोचते है, ठीक है,
वो छोड़ देते है।
उस समय पी, फिर उनको में कहावत है,
इंग्लिश में कहावत है ट्राय ट्राय ट्राय यू विल सक्सीड द लास्ट,
अभ्यास
करते जाओ, अंत में सफलता प्राप्त होगी। अगर आपको लगता है कि कठिन है? और ये अच्छा भाव है, अच्छा भाव है, गुरु करना चाहते हो तो प्यास करते जाओ। भगवान गीता में कहते हैं सदा से मेरी सेवा करते हैं, कमी दूर कर ले जाओ,
आप प्रयास करते रहिए, वरिष्ठों को, गुरु को प्रसन्न करने का, ये बहुत अच्छा भाव है। और भगवान कहते हैं जो श्रद्धालु होता है, उनमें कमियां भी होती है। तो मैं उनकी कमियों को दूर कर देता हूँ।
हाई कृष्ण
के
रामा रामा, रे।
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