दामोदर लीला विशेष | 21 Oct 2005 | Srila Gopal Krishna Goswami

Srila Gopal Krishna Goswami explains the Damodara Leela, showing how all deities serve Krishna's will through stories of Brahma, Shiva, and Indra. He teaches that chanting Damodara's name during this month, combined with sincere devotion and daily practice, is how Krishna's grace reaches us.
Chapters
ओम नमो भगवते वासुदेवाय, ओम नमो भगवते वासुदेवाय, नम भगवते वासुदेवाय, हे महाराज, भगवान शिव, भगवान ब्रह्मा तथा भगवान इन्द्र जैसे महान एवं ऊँचे देवता समेत। ये सम्पूर्ण भवन भगवान के वर्ष में है। फिर भी भगवान का 1 दिव्य गुण यह है के वे ने भक्तों के वर्ष में रहते हैं। यही बात इस लीला में किशन द्वारा दिखाई गई है? तो इस लीला का अर्थ क्या है? ये दामदौलीला और कार्य के महीने में हम दाम प्रार्थना का उच्चालन करते हैं। हरी भक्ति विलास में सनातन को स्वामी जी कहते हैं की अगर इस दाम और कार्य के महीने में हम रोज इस दाम का उच्चारण करेंगे जिसके द्वारा हमारा आकर्षण भगवान दामोदर के प्रति बढ़ेगा। भगवान के अनेक नाम हैं जिनमें 1 नाम है दमदौर और इस दामादोर लीला का वर्णन भागवत स्कंद के नौवे दिाय में प्राप्त होता है। इस लोक में प्रकश क्या कह रहे हैं? कह रहे हैं, शुक्रदेव को, स्वामी जी कह रहे हैं, भगवान शिव, ब्रह्मा तथा भगवान इंद्र। इन्हें ऊँचे देवता माना बताया गया है। इस लोक में कितने देवता और देवियां हैं? 33 करोड़ पर सब ऊँचे नहीं है ब्रह्मा जी, शिव जी, इन्द्रा जी, इनको, इन अनेक देवताओं में ऊँचा देवता कहा गया है। खासकर के इस लोक में और कहा गया है कि जो ऊंचे देवता हैं वो भी इस ब्रह्मण के भगवान के वर्ष में है। दूसरे शब्दों में जो ऊंचे देवता हैं वो भी भगवान श्री कृष्ण के वश्व है और इसका प्रमाण आपको भागवत के दसवें सिकंद में प्राप्त होता है। जैसे कि ब्रह्मा जी, ब्रह्मा जी ने 1 समय गोपी वालों को और बच्छड़ों को छुपा दिया था, वो देखना चाहते थे इस बालक में कैसी कितनी सीम शक्ति है और भगवान को पता था कि ब्रह्माजी की चापलूसी है इन वालों को और बच्छड़ों को उन्होंने छुपाया है। किडनैप कर दिया था वो ब्रह्मा जी ने ने सुला दिया जैसे ऑपरेशन के समय डॉक्टर जी आपको क्लोरफार्म देते हैं तो ब्रह्माजी ने क्लोरफार्म देकर उन्हें सुला दिया 1 साल के लिए, पर भगवान ने क्या किया, अपना विस्तार किया और विस्तार करके ब्रह्मा जी समझ पाये की उनकी जो योजना थी वो सफल नहीं हुई। फिर ब्रह्मा जी ने भगवान से माफ़ी मांगी और बड़ी सुन्दर स्तुतियों द्वारा परम भगवान का गुणगान किया और भगवान से प्रार्थना की क्या मुझे भविष्य में जन्म मिले 1 बड़े निमृत रूप में वो जन्म न्हें प्राप्त हुआ किस रूप में हरिदास ठाकुर के रूप में इंद्र जी, इंद्र जी भी कई बार घमंड हो जाते हैं। जब उन्हें पता लगा कि भगवान के प्रया प्रणाम प्रभाव से बृजवास इंद्र यज्ञ रोक दिया है तो ब्रह्मा जी भी क्रोधित हो कर इंदिरा जी बी क्रोधित होकर उन्हों ने बड़ी बड़ी तेजी के साथ वर्षा, भेजी और पानी का हर बूंद जो था 1 खम्बे जितना भारी था और भगवान ने विज की सुरक्षा कैसे की, कैसे की, गोद पर्वत को उठाकर थोड़े ही हफ्तों में आप गोदान पूजा बनाओगे और फिर इंद्र जी ने भी स्वीकार किया। इंद्र जी ने देखा की उनका करो जो था वो सफल नहीं हुआ। इंद्र जी भी भगवान के गत होकर उनसे सवा मांगे। शिव जी, शिव जी के 1 नाम है जिनमें 1 नाम है। आशुतोष आशुतोष का अर्थ है जो की बड़ी सरलता से प्रसन्न होते हैं और बड़ी सरलता से क्रोधित हो जाते हैं। तो शिव जी ने राक्षस को 1 बार दे दिया था कि जहाँ भी वो अपना हाथ रखेंगे, उसके नीचे जो भी होगा वो फट जायेगा। और बेकसूर को जैसे ही प्राप्त हुआ, उसने अपना हाथ फैलाया कहा शिव जी के माथे के ऊपर रखने के लिए। और शिव जी को दौड़ना पड़ा जहाँ वो दौरे का सुर के पीछे पहुँच गया था। अंत में वो श्वेता में पहुँचे। यहाँ के भगवान ने 1 ब्रह्माचारी का रूप धारण किया था। और जब वहाँ ये कसूर पहुंचा, भगवान ने कहा भाई, तुम किसका पीछा कर रहे हो? इतनी तेजी से भाग रहे हो? क्या कह रहा है? मैं शिवजी का पीछा कर रहा हूँ, क्यों? क्यों? क्यों, क्यों पीछा कर रहे हो? उन्होंने मुझे वर दिया है, जहाँ भी मैं हाथ रखूंगा, उसके निचे जो भी है वो फट जाएगा। और मैं अपना हाथ रखना चाहता हूँ। उनके सिर पर। भगवान ने कहा अरे भाई, तुम जानती नहीं, जब से शिव जी का झगड़ा दा दक्शा के साथ उनके वारों में इतनी ताकत नहीं है। तुम पहले आजमा के देखो। तो सही की वर्ड झूठा है या सच्चा झूठा है? तो फिर तुम्हें मारने का अधिकार है। बिना कारण मारोगे तो पाप कमाओगे। तो विकास ने कहा यह बात तो ठीक है। जैसे ही सर ने अपना हाथ फैलाया, अपने सिर पर अभ्यास करने के लिए, वर्ड सच्चा था, झूठा था, क्या हुआ? उनका? जो सिर है वो फट गया। तो इस प्रकार शिव जी भी भगवान के गत है। तो ये जो ऊँचे देवता है ये सब कुछ भगवान के वश हैं। तो उस ऊंचे भगवान, वो भगवान जिसके वर्ष में पूरा मंद है, वो क्या किसी के वर्ष में आ सकता है? क्या आ सकता है? आ सकता है किस के वर्ष में, आपके वर्ष में, हाँ किसके शुद्ध भक्तों के वर्ष में और वो प्रकट होता है इस दामद लीला के द्वारा। तो ये दामद लीला क्या है। दाम लीला प्रकट करने से पहले भगवान अनेक और लीला को प्रकट कर चुके थे। जैसे की पूतना राक्षसी जब आई थी, फिर अगर सूरा का विवाद हो गया था। फिर शकल सूर को भी भगवान ने नीचे गिरा दिया था, चिनार आया था। कंस के आदेश के अनुसार भगवान को भगवान का बंद करने के लिए माता रसोई बना रही थी और अपने बेटे को उन्होंने पास रखा था। तो जैसे ही रसोई बना रही थी वह तेजी से नदी अन्दर तूफान आया कि आप 1 दूसरे को देख भी नहीं सको, वो तूफान जैसे आया इतना इतनी दूर थी कमरे में कितना वतन है। उस समय में भगवान को उठा लिया वहाँ से, और पहले तो माता को पता नहीं लगा। फिर जब माता ने धूल में अपने हाथ को फैलाया अपने बेटे को छूने के लिए देखा, वहाँ तो बेटा है ही नहीं। फिर माता निराश हो गये, बेचैन होने लगे ने क्या किया? भगवान को उठाकर बोले जैसे ऊपर ऊपर हवा ऊपर जाता है। और क्या विचार था ऊपर से फेंक देंगे नीचे। और भगवान ने पहले तो उसे उठाने दिया, फिर जैसे वो ऊपर उठा ले गया। भगवान ने अपना वजन बढ़ाया। इतना वजन बढ़ाया के अंत में ना गिर गया। तो जब ये अद्भुत घटनाएँ बीत गई थी, कभी अगुत घटनाएँ बीत गई थी, तो सुधामाता सोचती थी मेरा कोई देवता तो नहीं है। ये वो छोटे से ही थे, पूतना राक्षसी आई थी, अपने स्तन में झर था, इस विचार के साथ आई थी कि जहर पिला कर उनका वध हो जाए। जब पूतना की यह देख लीला आगा सुरा की ना, तो सोचने लगे की मेरा बेटा दिखता तो नहीं है, नारायण का रूप तो नहीं है ये भगवान की योग माया शक्ति के द्वारा, उनके भाग जो है, यह नहीं समझ सकते की वो सोयम भगवान है क्यूँकी? अगर वो समझ जाए की सोयम भगवान है। फिर वो रास चिंता ही समाप्त हो जाएगी। माता को सदा चिंता थी मेरे को हो तो ही मैं खाऊंगी तो स्वयं भगवान है। भगवान का भूखा रहने का प्रश्न ही नहीं उठता। तो भगवान की योग माया शक्ति के द्वारा माता पिता का रूप धारण करते हैं। ये नहीं समझ पाते कि स्वयं भगवान हैं। तो यशोदा माता है। मथुरी थी और बताने की रस्सी के साथ मक्खन निकाल रही थी। हा जो उन दिनों में हम तो आजकल बड़ा घमंड रखते है की हमारी टेक्नोलॉजी बहुत ऊँची हो गई है। उन दिनों में जो घास था न घास, वो भी अलग अलग सुगंध का मिलता था कलयुग में विश्व के किसी में चले जाओ, आपको 1 ही सुगंध का घास मिलता है, चाहे अमेरिकन घास हो या इंडियन घास हो, उसमे कोई सुगंध है ही नहीं। आरोप 5000 साल पूर्व जब भगवान कृष्ण पृथ्वी पर थे, अलग अलग सुगंध का घास मिलता था, जैसे आजकल लेते अलग अलग सुगन्ध की चंदन वो क्या क्या सुगंध है औरतें फ्रेगनेंस लेती है अलग अलग परफ्यूम अलग अलग फ्रेगरेंस के, तो घास भी होता था अलग अलग सुगंध का और जिस सुगंध का घास गाय खाती थी उसी सुगंध का दूध भी निकलता था। देखो आपको आज कल तो दूध भी निकालता है सारे विश्व में 1 ही सुगंध का है जिस सुगंध का घास खाती थी गाय, उसी सुगंध का दूध भी निकलता था, दूध में भी सुगंध होती थी ये नही की आप को चीनी डालना कुछ शर्म डालना नहीं दूध जो निकलता था, गाय सी सुगन्ध दूध निकालता था। तो यशोदा माता को बकायदा ये शिकायत आ रही थी। क्या आपका बेटा जो है हमारे घर में आकर क्या चुराता है और मक्खन के साथ क्या है? तोयुषोदामाता कहती थी क्या मेरे घर में मक्खन की कमी है? क्या आपके घर में आएगा आपके पास कोई प्रमाण है क्या? क्या खाते हुए, चोरी करते हुए, फिर वो कहती तो तुम छुपा क्यों नहीं देते? तो कहती थी गोपियां हम छुपाते है और वो वहाँ भी पहुँच जाते हैं, हम ऊपर छुपाते हैं, सेल्फ के कोने में, वहाँ भी पहुँच जाते हैं, अंधेरे में भी पहुँच जाते हैं, अंधेरे में कैसे पहुँच जाते हैं। उनके शरीर में जो गिने हैं, उनमे से इतनी रोशनी निकलती है। रात के समय के किसी कोने में भी हम छुपाएंगे वो देख लेते है। माता कहती थी थी नहीं देख सकेंगे रात के समय कहा छुपाया है। पर गोपियों का इतना आकर्षण था भगवान के प्रति। उन्होने कहा नही नही, नही चोरी करने। 2 पर उनके गहने मत निकालना, तो यशोदा माता के मन में 1 और भ्रम पैदा हो गया था। वो सोच रहे थे की मेरे घर में जब मैं मक्खन और दूध बना रही हूँ, वो शायद इतना अच्छा नहीं है, और पड़ोस के घरों में जो मक्खन बन रहा है और वो ज्यादा सुंगंधित है, इसलिए शयन मेरा बेटा वहाँ जाता है चोरी करने के लिए। कई बार बच्चे किसी और के घर में ज्यादा खाते हैं, घर में कम खाते हैं। तो माता पिता को लगता है की खाना ठीक नहीं बन रहा। तो ये सदा माता के मन में यह आ गया था कि पड़ोस की गोपियों के घर में 1 जो दूध है, वो दही है, वो ज्यादा सुंगंधित है और मेरा मेरे घर का दूध और दही इतना सुगंधित नहीं है। इसलिए मेरा बालक पड़ोस के घर में शायद चुराना तो बड़े ध्यान पूर्वक हो कर मनी की रस्सी से मक्खन निकाल रही थी और साथ में कड़ाई में दूध उबल रहा था के घर में हर का किया जाता था कृष्ण की सेवा के लिए। 1 तरफ ऐसी मथानी की रस्सी से भी निकाल रही थी, दूसरी तरफ ऐसी पड़ोस की आग में कड़ाई में दूध उबल रहा था, धूप भी उबल रहा था इस भावना से दूध से पहले, बाद में दही बनायेंगे तो हर कार्य जो है किसके लिए हो रहा था। कृष्णा, क्ले और सा ये शोध महाता उन्होंने 1 गीत की रचना की थी, शी, कम्पोज, पोयम वो गीत की रचना में उन्होंने भगवान श्री कृष्ण की बाल लीला जो बीत गई थी, उसका वर्णन किया था। अब समझे न पूतना की लीला बीत गयी थी, अगर की लीला बीत गयी थी, कर सूर की लीला बीत गयी थी, 3 वर्ष की लीला बीत गई। तो माता ने इन 4 घटनाओं को लेकर 1 सा बना दिया था, 1 तरफ मथनी की रस्सी से ही मक्खन निकाल रही थी, आग में कड़ाही में दूध उबल रहा था और साथ में क्या कर रही थी, क्या कर रही थी है वो गीत गाड़ी थी, वो गीत में क्या था भगवान की लीलाओं का वर्णन तो भगवान करेंगे तो हम भगवान का स्मरन भी कर पाएंगे। प्रलाद महा जी से पूछा गया कि भगवान के शरण कदम कैसे हो सकते है तो भक्ति का उपदेश दिया जो इस प्रकार से है श्रवन कृताम विष्णु स्मरणम कि आप स्वय कितना करोगे, फिर विष्ट स्मरण कर पाओगे मा पूरा भगवान चेतन्या महा प्रभु अपने साथियों के साथ गुंडिचा मंदिर को साफ कर रहे थे और उसमें अनेक भाग जुड़े हुए थे। पानी ला रहे थे, झाड़ू से थे और ये सारे के सारे ये प्रयास करे क्या करे थे। हम भक्तों से क्या सीखना चाहिए की हम अपनी हमें क्या करना चाहिए। महा मंत्र का उच्चारण हमे भगवान की बाल लीला के गीत करने की हम केवल यह महामंत्र का उच्चारन करे निरंतर तो हम भगवान का स्मरण कर पाएंगे। हम सोचते है की 16 माला का जाप करे उसके बाद उच्चारण करना पाप है। पर हमारा प्रयास होना चाहिए की हम सदा दिन रात उच्चारन करते रहे और दिन रात उच्चारण करते रहोगे तो भगवान का स्मरण भी कर पाओगे का स्मरण नहीं कर पाते, क्यूँ? क्यूँकि हम स्मरण नहीं कर पाते, क्यूँ क्यूँ की हम भगवान का उच्चारन जो है बहुत कम मात्रा में कर रहे हैं। 1 तरह से माता को शिकायते आ रही थी पड़ोस की गोपियों से की आप अपने बेटे को संभालो क्यूँ ही संभालते हमारे घर में आ कर पाए। दूसरी तरफ ऐसी माता को लगा की ये कहीं कोई घर से भाग न जाए। तो माता ने कहा निर्णय किया मुझे अपने बेटे को बाद में सी के साथ, बाहर के रखोगे तो साथियों के साथ मिलकर शैतानी निकाल सकेगा, बाहर के रखोगे तो घर छोड़कर भागेगा नहीं, बाहर के रखोगे तो पड़ोस के गोपियों के घर से मक्खी चलाएगा हमारी इज्जत बची रहेगी तुम इन विचारों के साथ। 1 घर में थे भगवान को बांधने के लिए, और उन्होंने देखा की 1 सी सी बांधने गए, हालांकि से काफी बड़ी थी, वह रस्सी से, 1 रस्सी से बांध नहीं पाए, इतनी बड़ी रस्सी है क्यों? 2 उंगली छोटी निकल रही है, घर में, जितनी रसिया थी उसे बस को जोड़ने के साथ ही ये रस्सी है। 2 उंगली छोटी निकाले जो नाता पैलास करे थे बेटे को बांधने के लिए, इस समय जो पड़ोस की गोपियां थी वो सब नाटक देख रही थी। और जब वो देख रहे थे की ये शोला माता सफल नहीं हो रहे बेटे को बांधने के लिए, तो हंसने लगे ये देखो ये शोला कितनी बेकार की है। 1 छोटे बच्चे को भी बांध नहीं सकती। और माता 1 तरफ ऐसी दी थी उनके शरीर से पसीना निकल रहा था उनका। सिर में बाल सजे फूलों के साथ फूल भी नीचे गिरे थे, वो दूसरे से सुना था, आनन्द उठा रहे थे, उन्होंने भगवान की असीम शक्तियों का प्रदर्शन तो देख लिया था। भगवान ने पूतना राक्षसी को मारा चुनाव को मारा, अगर 16 को मारा। भगवान ने अपनी अद्भुत शक्ति का प्रकशन प्रदर्शन दे दिया था। सु 1 प्रदर्शन देख रही है भगवान की असीम शक्ति का। फिर से माता ने जितनी रसिया 2 सब महंगाई पहले तो अपने घर की रस्सियों को जोड़ा और वो सारी की सारी राशि देंगी कम निकली। फिर सौदा। माता ने ब्रज के दूसरे गोपियों के घरों से भी रस्सी मंगा, आप रस्सी 2 आप भी रस्सी, 2 आप भी रस्सी। 2 घर में गोपियां सबने रस्सी दे दी की सी को वो भगवान को नहीं बन पाए, इससे हमें क्या सन्देश म। इससे हमें यह सन्देश मिलता है की अगर आप भगवान को जोड़ना चाहे। भगवान को समझना चाहो तो केवल अपने प्रयास से ही समझ सकते। भगवान की इच्छा बिना आप उनको नहीं समझ सकोगे। यह नही की आप धनी हो, बुद्धिमान हो, ज्ञानी हो, आप सोचो की आप भगवान को आकर्षित कर सकते हो। तो भगवान ने देखा की यशोदा माता ने सब घरों की रस्सियों को जोड़ दिया है। जब भी वो बांध नहीं पा रही, भगवान ने देखा की पड़ोस की गोपियां उन पर हँस रहे हैं। भगवान ने यह भी देखा की सदा माता निराश हो रही है, बेचैन हो रही है, उनके पसीने निकल रहे हैं। तो भगवान ने दया ली अपनी माँ के ऊपर, और भगवान ने क्या उन्हें बांध में दिया। तो ये है वो लीला जहाँ 2 उंगलियां छोटी का अर्थ है महान। संत ने इसकी व्याख्या देते हुए कहा है की 2 उंगलियां छोटे छोटे कम होने का यह अर्थ हैं। 1 अर्थ यह है की अगर आप भगवान को समझने के लिए प्रयास करोगे तो ही भगवान को समझ सकोगे दूसरा है। दूसरी उँगली का अर्थ है की भगवान को समझने के लिए भगवान की कृपा चाहिए। तुम ही आप भगवान को समझ सकोगे। यह नहीं की आप धनी व्यक्ति हो, प्रसिद्ध व्यक्ति हो, संस्कृत के विद्वान हो, तो आवश्यक भगवान की असीम शक्तियों का प्रदर्शन कर सकोगे। नहीं तो भगवान गीता में क्या कहते हैं? यह प्रधान दे। जितनी श्रद्धा से कोई मेरे शरणागत होगा, उतनी मात्रा में मैं उसे बुद्धि दूंगा किसलिए मुझे समझने के लिए 2 छोटे। 1 उंगली का अर्थ है आप मेहनत करोगे, प्रयास करोगे तो भी भगवान को आप समझ पाओगे और दूसरी उंगली का है। भगवान को समझने के लिए हमें भगवान की असीम कृपा की आवश्यकता है। और भगवान की असीम कृपा कैसे प्राप्त होगी? अगर हम प्रयास करेंगे। जैसे सास में वेदी भक्ति का नियम है, वही भक्ति का वर्णन है। तो वेदी भक्ति के नियमों का पालन करोगे तो ही आप भगवान को समझ पाओगे। अगर आप वेदी भक्ति के नियमों का पालन नहीं करेंगे, फिर आप भगवान को नहीं आकर्षित कर सकोगे। तो ये जो लीला है, उसे हम क्या देखते हैं? भगवान जो उँची देता है, ये भगवान के वर्ष में हैं। भगवान किसके वर्ष में? किसी अपने भक्तों के वर्ष में है? भगवान जैसे के चप्पल भी उठाते हैं। अपने सिर में। इस लोक के तातपरीमेपिउदरदेते है। प्रकार ने कहा है मेरी रात को कहा इन 2 सेनाओं के बीच में क्यूँ मैं देखना चाहता हूँ की कौन कौन उपस्थित है युद्ध के मैदान में मेरे से लड़ने के लिए। तो दूसरे शब्दों में भगवान अपने भक्त के आदेश के अनुसार उसके ड्राईवर बन गये। भारत सारथी भगवान के अनेक नाम हैं, जिनमें 1 नाम है। क्या नाम है पर सारी का क्या अर्थ के अपने भाग के रथ को चला रहे थे। आप भौतिक दुनिया में देख सकते हो, क्या? कभी बड़ा आदमी ड्राइवर कर रहा है? और ड्राइवर साहब पीछे बैठे हैं, मालिक पीछे, मालिक ड्राइवरी कर रहा है और नौकर पीछे बैठे हैं। तो भगवान अपने अर्जुन के कहने पर उन्होंने क्या किया? अर्जुन के रथ को ले चला कर कहा 2 सेनाओं के बीच में तो भगवान को आप जीत सकते हो कैसे भक्ति के माध्यम के द्वारा और कोई चारा नहीं है भगवान को करने के लिए अगर आप भगवान को आकश करना चाहते हो तो ये भक्ति 1 माध्यम है तो कार के महीने में हमारा प्रयास रहना चाहिए कि सदा 24 घंटे इस दामो लीला का स स्मरण करे और हमारा प्रयास होना चाहिए की हम दिन रात जितना भी हो सके भगवान की माला करे, भगवान का गुणगान करे, भगवान की लीलाओं का वर्णन करे इस प्रकार से हम करेंगे तो फिर हमारा आकर्षण और भगवान के प्रति बहुत या घटेगा और हमें जैसे 1 रस्सी से निकल रही थी रही थी और मुँह से भगवान की लीला का वर्णन कर रही थी तो इसी प्रकार हमे भी अपने सेवा के साथ जीव के साथ भगवान के गुणों का अनेक गुणों का गुणगान करना चाहिए जो कि हम कर सकते हैं किस माध्यम से इस हरे कृष्ण महा मंत्र के माध्यम से जैसे चैतन्य, महा, प्रभु जी, गुणित मंदिर की सफाई करते हुए जीप के साथ भक्तों के साथ सदा हरी राम का उ्चालनहमेभीउदाहरण लेकर प्रयास करना चाहिए हमारी सेवा के साथ दिन रात महामंदिर का जाप करेंगे और अगर आप जॉब करोगे तो फिर अच्छे भक्ति में आगे बढ़ोगे पापाजी उदाहरण देते थे के जब वो स्कॉटिश कॉलेज कैलकटा में पढाई करते थे तो उनका 1 प्रोफेसर था जो ये कहता था की अगर आप सोचोगे कि जो पास के लिए मार्क्स चाहिए उतने नंबर आये तो फेल भी हो जाओगे जैसे भारत में पास होने के लिए कितने नंबर चाहिए होते 40 पर्सेंट या 33 है थर्टी फाइब तो समझो आपको पास होने के लिए थर्टी फाइव परसेंट मार्क चाहिए तो आप सोचो बस हमको तो थर्टी फाइव परसेंट चाहिए हमने तो खाली पास होने का सर्टिफिकेट चाहिए दिखाने के लिए दुनिया को तो फिर शायद थर्टी फाइव परसेंट भी नहीं मिले पर अगर आप सोचे की मुझे 80 पर्सेंट मार्ग चाहिए तो थर्टी फाइब 40 पर्सेंट मिलने की सम्भावना है तो पापा जी कहते थे की हम अगर सोचेंगे हमने खाली 16 माला करना है और फिर माला को छुपा देना है तो आप 16 माला भी ठीक नहीं करोगे और अगर आपका प्रयास है की आप दिन रात निरंतर जॉब करो फिर आप 16 माला भी अच्छी तरह करोगे हमारा प्रयास का रहना चाहिए की हम दिन रात भगवान का गुणगान करे और इस दमन लीला का हमें स्मरण करना चाहिए हरे कृष्ण हाय क्रिष्णा हा करे किशटाक्िश्णहाले हरे हरे हाल।
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