यह व्याख्यान वैदिक शास्त्रों के आधार पर भगवान के अवतारों, विशेष रूप से भगवान राम के प्रकट होने की कालक्रमिकता, और महाराज दशरथ के राजरिषि रूप में शासकत्व को समझाता है। वक्ता बताता है कि रामचन्द्र जी लगभग 20 लाख वर्ष पूर्व सतयुग में प्रकट हुए थे, जिसका उद्देश्य धर्म की स्थापना था। दशरथ को सम्पूर्ण पृथ्वी के राजरिषि के रूप में वर्णित किया गया है, जिन्होंने 60,000 वर्षों तक शासन किया, जिससे समाज में सुख, कृषि समृद्धि और धार्मिक कर्तव्य पूर्ण हुए। आगे, वैदिक सिद्धांतों के अनुसार राजरिषि (राजा‑ऋषि) का आदर्श मॉडल प्रस्तुत किया गया है और इसे आधुनिक लोकतांत्रिक प्रणाली से तुलना की गई है, जिसे वक्ता ‘दुष्टों की सरकार’ के रूप में आलोचना करता है। व्याख्यान में निरंतर भगवान के नाम का उच्चारण (नामसंकिरण) के आध्यात्मिक लाभ, भागवत और भगवद् गीता के उद्धरण, तथा सामाजिक कल्याण में राजरिषि की भूमिका पर बल दिया गया है। अंत में, श्रोताओं को भगवान की लीला, उपदेश और स्मरण में गहराई से डूबने का आह्वान किया गया है।
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भगवान के अवतारों के विषय में हम ज्ञान शास्त्र से प्राप्त करते हैं। आज के ज़माने में अनेक व्यक्ति ये दावा करते हैं कि वो भगवान के अवतार है। वह हम केवल उनको मान स्वीकार करते हैं। जिनके विषय में शास्त्र में मान और शास् कहा गया है कि भगवान के अवतारों के अनेक विभाग हैं पुरुष, अवतार, लीला, अवतार, गुना होता, मन, योगा, अवतार, तार और यहाँ भगवान स्वयं अपसारित हुए हैं। उन्होंने आपका को प्रकट किया है रामचन्द्र जी के रूप में। जैसे आपने तातपरिवसुनाराबाजी स्पष्ट समझाते हैं कि ये जो है रामचंद्र जीवन के भाई, ये सब है विष्णु तातार भगवान स्वयं उपतारित हुए हैं। रामचन्द्र जी के तो परम भगवान अलग अलग समय में उपचारित होते हैं। भगवान ने कहा है की अलग अलग समय में मैं अपसारित होता हूँ और किसलिए मैं अपसारित होता हूँ धर्म के लियो की स्थापना करने के लिए। तो भगवान राम चन्द्र जी आज के दिन प्रकट हुए थे कब युग के आर में हमारे वैदिक शासन के अनुसार 4 युग है सतयुग के योग, दवा, प्रयोग और कल। तो सतयुग चला था लगभग 12 लाख सालों के लिए, तो भगवान राम इस प्रीति पर आये थे, प्रकट हुए थे लगभग 20 लाख साल पूर्व और आज भी हम उनकी लीलाओं की चर्चा कर रहे है क्यूंकि सोय भगवान है और उनकी जो लीला है वो भी देव हैं। जैसे हम भगवान के नामो का उच्चालन करते हैं दिन रात। तो बहुत बार व्यक्ति कई बार सोचते हैं की किसी ने कोई चमत्कार कर दिया है मन की दवाई कर दी है जिसके द्वारा हम बार बार उसी नाम का उच्चालन करते है पर वो भूल जाते है की भगवान ने अभी पूरी शक्ति डाली है नामों में। इस कारण भगवान के नाम का उच्चालनदिनरात कर सकते हो और जी उसी प्रकार भगवान की लीलाओं, का की चर्चा, भगवान की लीला की चर्चा दिन रात कर सकते हो। जो भागवत का संदेश आप सुनते हो में भगवान की लीला और देश के विषय में पढ़ते हो। ये नहीं की आप पहली बार सुन रहे हो, आप बचपन से सुनते आ रहे हो जब भी इनके द्वारा आनंद आता क्यूँ? क्यूँकि ये है भगवान की दिव्य लीला और हम सब का प्रयास रहना चाहिए कि हम भगवान की लीलाओं में और गहराई के साथ डूबे। जैसे की भगवत गीता के अंत में। भगवान कहते हैं सदा मेरा चिंतन करो, मेरा स्मरण करो। उसका अर्थ है कि हम भगवान की लीलाओं का, भगवान के उपदेशों का, भगवान के दिव्य रूप का, इन सब विषयों का स्मरण करे जो भगवान राम स्वयं भगवान है। पिता का नाम था महाराज दशरथ। महाराज दशरथ ने पूरे पृथ्वी पर राज्य किया था 60 हजार सालो के लि, आज तो छोटे छोटे देश हैं, है न? और पापा जी कहते थे के दिन पर दिन यूनाइटेड नेशन में झंडा बढ़ते जाता है, मतलब जैसे 1 देश स्वतंत्र होता है तो उनका झंडा भी उधर लगाते हैं। तो आज के ज़माने में छोटे छोटे देश हैं, छोटे छोटे राज्य हैं। तो प्राचीन समय में 1 राजा थे पूरे पृथ्वी के और महाराज दस्त का शासन था, उन्होंने राज्य किया था पुरे पृथ्वी पर, 60 हजार सालो के लिए, और महाराज दश्त जो थे वो भी स्वयं उचेकोटकेभग थे। वाल्मिकी जी ने कहा की महाराज दर्शन थे राज ऋषि, राज ऋषि का मतलब राजा भी थे और साथ में रिषि भी, साथ में संत ही जब राजा संत हो तो समाज सुखी रहता है और जब राजा या नेता दुष्ट व्यक्ति का, दुष्ट स्वभाव का हो, जो समाज दुखी रहता है। आज कल आप समाज में क्या देखते हो जो हमारे राजनीतिक नेता हैं, न राजा है, न रिषी है। इसलिए समाज की जो प्रजा है, अत्यंत दुखी है। वेदिक सवास्थ के अनुसार समाज को चलाने के लिए नेता को राज रिषि होना चाहिए। आजकल तो हमारा सिस्टम है डेमोक्रेसी प्रजा तंत्र, पर प्रापर कहते थे हिंदी में तो शायद ठीक नहीं बनेगा। प्रॉपर जी अंग्रेजी में कहते थे दिस डेमोक्रेसी इस ऐक्चवली डीन क्रेजी प्रिय प्रजा तंत्र। ये है 1 रूप से दुष्टों की सरकार आप किसी प्रकार से जप का तो कुछ करो चापलुची करके इलेक्शन में जीत जाओ और फिर 5 साल बाद 3 साल बाद फिर से चुनाव में लड़ो को अरबो जानते हो। खर्च होते इस कार्य में, पर वेदिक साहित्य के अनुसार राजा को भगवान का प्रतिनिधि होना चाहिए एवं परंपरा प्रमिमान, राजस्व, विदु ये जो दिव्य ज्ञान है, भगवत गीता का यह ज्ञान आ रहा था राजाओं की परंपरा द्वारा, और ये राजा जो थे, राजरिषी थे और इसलिए समाज में किसी प्रकार की कमी नहीं, किसी प्रकार की आवश्यकता की कमी नहीं। जैसे आप भागवत में पढते हो की 1 समय बीच में 1 दुष्ट विचार के राजा आ गए थे जिनका नाम था महाराज वेना, जिसका ये परिणाम हुआ की समाज में, समाज में उन्होंने सब इत्यादि रुकवा दिया और अंत में समाज की जो आवश्यक थी, लगभग सब समाप्त हो गयी। फिर जब उनके बेटे राजा बने, उन्होंने पहला आदेश यह दिया प्रजा को भगवान का गुणगान करो जिसके साथ हर प्रकार की आवश्यकता भी प्राप्त होने लगे। भागवत गीता में भगवान कहते हैं अनाज भूतनी, सम्भव, अन की प्राप्ति होती है, वर्षा के कारण और वर्षा की प्राप्ति होती है। यज्ञ धर्म नियमों के पालन के द्वारा, तो क्यूँकी राज रिशि थे, इसलिए समाज की जो प्रजा भी थी, अत्यंत सुखी थी, वो कृषि प्रकार की कमी नहीं। क हाल हाल ले, लाल नाम रहल ह ले।