अक्षय तृतीया और चंदन यात्रा का महत्व | 26 Apr 2020 | ISKCON Delhi | Srila Gopal Krishna Goswami

The recording captures a devotional discourse delivered by Srila Gopal Krishna Goswami (with interjections from another participant) at ISKCON Delhi on 26 April 2020. The speaker weaves together the theological significance of Akshaya Tritiya and the associated Chandan Yatra, recounts scriptural anecdotes (Krishna’s pastimes, Sudama, Duryodhana, Durvasa, etc.), and emphasizes the necessity of self‑sacrifice, humility and unwavering service (seva) in bhakti. He describes how divine instructions can appear in dreams, the ritual of applying sandalwood paste to deities, and the institutional responsibilities of temple priests and administrators, urging adherence to established rules while maintaining a spirit of compassion. The talk repeatedly stresses that true devotion is not motivated by honor or material reward, but by a self‑less desire to serve the Lord, even under difficult circumstances. The discourse also touches on practical concerns of modern devotees – balancing work, family, and spiritual practice, the protective power of chanting the holy name, and the challenges of maintaining discipline within a growing ISKCON community.
Chapters
ओम लू भगवते वाह, सुदेवा ओम भगते वासुदेवा, ओम भगवते वासुदेव। home ga
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जय श्री कृष्णा चेतन हरेक सक्षिता बहुत ही शुभ अवसर है और पापा जी ने अक्षय सीता कुछ खास विचार नहीं दिया है। अक्षय तृतीया है अक्षय जो सेवा को दान 2 उसका आपको हजारों को लाभ मिलता है। और अक्सर भारत में अक्षर प्रीत के दिन अनेक सौदे शादियां वगैरह होती है तो अक्षर पीते के दिन अनेक शो लीला में बीती हैं से उनकी चर्चा करेंगे। वह बाइसशोंकीदृष्टि से सबसे प्रसिद्ध यह है कि आज के दिन इन चंदन याद आलस आरंभ हुआ था और आज के दिन मदनपुरी के द्वारा ये चन्दन यात्रा का अवसर न हुआ। सा और नहीं पूरी की कथा हर साल आप 38 साल में सुनते हो। अभी वह वाले दिन, चीरवा वाले दिन और आज के दिन चंदना हाथ पर अनेक और भी लीलाएं हैं जिनका सम्बंध लांच के दिन के साथ संक्षेप में हम उनकी चर्चा करेंगे। और फिर ने आदीकथाकीहरचालकरेगे तो ब्रह्मा जी के द्वारा शीशी का निर्माण भी हुआ था। आज के दिन यम कली के पश्चात आज के दिन सद्दन शुरू हुआ और धरमशशतिवगाढमहुद आज के दिन और युवातो की अवधि पहले 100 साल थी। आज के दिन से सती में 1 लाख साल हो गयी। इस युग में लोगों के 1 लाख साल की थी लगभग सेती युग में, 10 गुना कम युग में और 10 गुना कम प्रखर युग में और 10 गुना काम और आज के दिन velाशीनेगनेशजी को कहा। तुम महाभारत को लिखो व्यासदेव ने उड़ा महाभारत का संदेश मन में बिठा लिया था। उन्हें 1 सेकेंडरी की जरुरत थी। जो की डिक्टेशन को लेगी तो गणेश ने कहा मैं डिटेशन लूँगा, पर 1 शर्त पर आप ने बिल्कुल नहीं रोकना, आप डिक्टेशन देना रोकोगे तो मैं लिखना बंद कर दूंगा। सो से ने कहा तुमको लिखना भी है, क्या लिख रहे हो, उसको समझना भी है। उन्होंने बीच में 800 बड़े कठिन स्लोक डाल दिए जिनके लिए गनेश को रुकना पड़ा सोचने के लिए जो में लिख रहा हूँ। इसका क्या अर्थ है? इतनी देर में देव ने पूरा माह बाद, आज के दिन बाद देश बड़ी अच्छी सेक्रेटरी थे, लिखते लिखते, लिखते, लिखते बिल्कुल रुके नहीं, ये आज के दिन और आज के दिन न परशुराम प्रकट हुए थे। कुवेर कुदेरता का खजांची बनाया था, आज के दिन की जो खजांची की पोजिशन आज के दिन से देनीचेकुएलको, आज के दिन खजांची बनाया था। और आज के दिन जली सम्राज को आयक्षाकेपत्र प्राप्त हुआ। देश जा रहे थे जंगल में, वनवास में अपने भाइयों के साथ और जो उस समय के ऋषि मुनि थे। उन्होंने कहा हम भी आपके साथ चलेंगे, ये आपके साथ चलेंगे। तो हमें कृष्ण कथा सुनने को मिलने लगा। ये आप कृष्ण कथा के अलावा किसी और रूचि में लेते। वह देश का मैं तुम सबकी देखभाल कैसे करूँगा, तुम सब हजारों शिवनी जाओगे, आप की देखभाल कौन करेगा। निदेशक ने सूर्य के देवता की पूजा की और सूर्य के सूर्य के देवता ने कहा मैं तुम्हें खास सुविधा दूंगा, अक्षय पत्र, आम सुना अक्षय पर इस इस काम में बहुत फेमस है। उन्होंने कहा, मैं तुम्हें खास अक्षय पर दूंगा, जिसके द्वारा जितने लोगों को खिलाना खिला सकते हो। पर केवल 1 ही शर्त कि तुम्हे जोपवदीकेदुपैर के भोजन खाने से पहले खिलाना है। सो यूनि की तपस्या से सूर्य के देवता बड़े प्रसन्न थे, उन्होंने उन्हें अक्षय पद से दे दिया। 1 समय दुरुभारसमूनी आये थे 10 हजार शेषों के साथ, दुर्योधन के घर, दुर्योधन ने उनकी बच्ची अच्छी तरह देखभाल की। दुर्योधन राजनीतिक कार्य में बड़े होशियार थे। तो फिर जो देखभाल करने के बाद राजा ने पूछा तुम्हे कुछ सेवा कर सकते हो? आपके बदले में, आप इसकी खातर करो। वो भी पूछता है आपने है न, हम भी कुछ कर सकते हैं आपके लिए। तो दुर्योधन ने कहा जिस प्रकार आज आपने मेरे घर को पवित्र किया है, भाई की भाई के घर को हमेशा बना लो। बड़े प्रेम से कहा। और आप तो जानते हो कितना श्नेता उनका जन ने आर रूप से प्रयास किया था की किसी प्रकार से पान भाइयों को बंद हो जाए, उनके घर में रखा लेक लेक। का की नया घर है, और उसको आग लगा दिया, और विदुर के कहने पर वो भाग गए और बचा लिया। तो दुर्योधन के मन में यही भाग था किसी न किसी प्रकार से इन भाइयों का बदल जाए। तो दुर्योधन के कहने पर संबनी पहुँचे देश के घर में सुपर के समय जबकि पति ने अपना प्रसाद खा लिया था और जब बनी पहुँचे देश ने उनका बड़ा स्वागत किया। कहा जाता है की आपके घर में कोई शत्रु भी आये तो इसकी हमें क्या करना चाहिए। व आदर के साथ स्वागत करना चाहि। प्रापा जी की इच्छा थी कि जो भी व्यक्ति आये हमारे बड़े मंत्र में सब को बिठा कर कर प्रसाद खिलाया जाए के पति मंदिर में जैसे हर यात्री को भोजन खिलाते हैं। हम वृंदावन बॉम्बे बड़े मंत्र में गर्म गर्म प्रशाल खिलाना चाहिए। जब वे घर में दुर्वा सुमनी पहुँचे। सुने क्या मंत्र दिया प्रशाद खाइए। निवास ने कहा ठीक है, हम दोपहर का स्नान करने 2 लौट कर खाते हैं और उनके भाई गए स्नान करने के लिए परशातियारकरो बड़ी श्रद्धा से, शरद से प्रसन्न होते है। रोकती ने कहा मैं कुछ तैयार नहीं कर सकती, अब तो मैंने का प्रसाद खा लिया है, अब तो दरबार से मनी को कल तक देखना पड़ेगा और उन्हें ये पसंद नहीं आएगा तो 2 परी घबरा गये। अब यहाँ में श्राप दे दे तो है सुख और दुःख में 1 ही व्यक्ति के पास न करता है किस की भगवान ने देखा की द्रोपती चिंता में है, द्रोपदी भगवान से प्राथना की बचाओ तो भगवान आ गये द्रोपदी मुझे कुछ खाने के लिए दीजिये भूख लगी है, रूपी कुछ हनी कल मिलेगा आज तक कुछ है न? घर में प्रसाद खा लिया। भगवान ने कहा नहीं मुझे देखने। 2 उसको भगवान बड़े ध्यान से ढूंढ रहे थे, कुछ खाने के लिए रहे थे, तो उन्होंने देखा 1 बर्तन के नीचे 1 चावल का दाना, सब्जी के दाने में सब्जी के टुकड़े से ढका हुआ था। भगवान के बा रोबरी तुम हो, कुछ नहीं, खाने के लिए देखो
ना।
भगवान ने खाना। जैसे भगवान ने खाया पिसी जितने ब्राह्मण थे सबको ऐसा लगा पेड़ बहुत भर गया है, पर जब भर जाता है तो क्या होता है, अच्छी होती हैं। सारे ब्राहमी जो थे सबको अचकी होने लगी और दरवाजा मुनि। सायं ब्राहमण आश्चर्य हो गए। दरवाजा मुनी हुशियार है, उन्हें अभ्यास हो गया था। अमरेश समय दरवाजे मनी ने मंत्र दिया था। परिशानकेले दुर्वासा ने कहा मैं आ जाऊँ रुपया का स्नान करके और तोड़ने का समय आ गया था। और दुर्वासा नहीं लौटे। अमीश मराज चिंता मे क्या किया जाए। ब्राहमणों की सलाह ली। ब्राहमणों ने कहा आप जल्द पी लो, जल्द पीना 1 रूप से वर्त से टूटता है और नहीं भी टूटता है। तो उन्होंने ब्रावो की सलाह लेकर जल पिया तो मोनी के पास योगिक शक्तियां थी। समझ गए कि अमरीश ने जल पी लिया है। उनकी राह देख कर बिना उन्होंने सोचा अमरीश को सबक सिखाया जाए सीके से बड़ा भयंकर राक्षस पैदा कर दी। घबराई। जिस प्रकार आप जद भारत की कथा में देखते हो, जब डाकू तैयार हो गए थे, उनका बस करने। जब भी जल भारत घबराये, बिना भगवान का चिंतन करते से मना कृष्ण होगे, रा प्रसिद श्लोक है। भगवान का चिंतन करते रहे। भगवान ने क्या किया, अपने सुदर्शन चक्र के द्वारा का पीछा करवाया और जामी भागे। दुर्वा से क्राउड का पीछा कर रहा था। अंत में भगवान के बारे भगवान ने कहा मैं भी कुछ माफ़ नहीं कर सकता, अमृत से माफी मांगो। सो दुर्वास मुरी अभियान था। जब उन्होंने देखा एकदम थोड़ी देर पहले 1 को भूख लग रही थी और अब ऐसा लगता है की हमने ज्यादा खा लिया कोई भगवान के लीला है यहाँ तो के साथ चलो, यहाँ से भागो, तो भगवान ने हम सन से कहा जाओ बोलो दरवाजा को आओ प्रशाद खाने प्रात। या रहे दरवाजा को बढ़ाने भीमसेन गए, दरवाजा बनी प्रशात आओ तुम्हार कई संत बैठे थे। उन्होंने कहा अरे वो वो तो सब भाग गए यहाँ से, आपके आने से थोड़ी देर। पहले भगवान ने क्या किया। अन्य भाइयों की ये जो अक्षय पत्र है ये प्राप्त हुआ था सूर्य के देवता के द्वारा। आज के दिन तो आज के दिन यह अक्षय पत्र वी प्राउट। आज के दिन कई घटनाएं बीती हैं और क्या और कई पॉइंट्स हैं। आज के दिन सुदामा ब्राह्मण जो है वो कथा जानते हो उनकी चर्चा करेंगे। बाद में सुदामा ब्राहमण गये थे। द्वार का मे भगवान को मिले, भगवान को मिले कौन सी दें आज यह भी बड़ी सुन्दर करता है। सुदामा ब्राह्मण भगवान के बचपन के मित्र थे। ब्राह्मण जो है हर टीम में संतोष रहता है। मैं सुधा सुधारण सिर समाज में 1 दूसरे को दोष देते रहे थे। तुमने यह किया तुम्हारे कार मुझे यह कष्ट हो जाए। ब्राह्मण खुद स्वीकार करता है। मेरे पापों का परिणाम है किस को दोष दे रहा सुदामा ब्राह्मण हर सिटी में बिल्कुल संतुष्ट था और भौतिक मिर्ची से बहुत गरीब था। रहने के लिए 1 छोटा मकान, छोटा, कमरा और पहनने के लिए 1 फटी हुई धोती। बाज आ के बाद कितनी धोती आय, कितनी है आपके पास 1 ही फटी धोती थी उनकी पत्नी 1 पुरानी सारी बात। पति को पता था कि में पति का 1 धनी दोस्त है। पत्नी बार बार कहती थी के धनी मित्र को क्यों नहीं मिल के आते दावा थियार थे, मिलने को कुछ दावा त्यार थे। इस दिशा से मेरे बचपन के मित्र को मिलूंगा वो जानते थे। ये बड़े खास पत्नी का अलग भाव था। पत्नी का यह भाव था। शायद मेरा पति अपने धनी मित्र को मिलेगा धनी। मित्र कुछ आर्थिक सहयोग दे देगा, कोई ठेका दे देगा, कोई सुविधा दे देगा। उनका यह था ठीक है, कहते मैं ज्यादा हूँ मिलने, पर घर में कुछ है देने के लिए खाली जाना अच्छा नहीं, दिखता नहीं, ये लगभग हर समाज और धन में वाज या मिलने जाओ। किसी संत को कुछ साथ लेकर जाओ में कोई भी आता है, फूल या कुछ लेके आता है। सो पत्नी ने देखा, घर में कुछ भी नहीं था, इतने गरीब से तो पड़ोस के मकानों से प्रोससे थोड़ा चानऊूठीकौवाछूड़ा। उन्होंने इकट्ठा करके 1 कपड़े में बांध कर दे दिया। तो सुदामा जी गए, पहुंच गए। द्वार का। इतनी लंबी यात्रा की द्वारका पहुँच कर उस महल में पहुँचे जहाँ कि भगवान के साथ भगवान के हजारों महल थे। द्वार में और हर महल सजा था, गेनो के साथ, हर मोतियो के साथ 1 मनी गये थे। भगवान अपनी अद्भुत लीला कैसे करते, इतनी पत्तियां है अपना विस्टार करते। उन्होंने देखा की हर महल में भगवान से अलग लीला के साथ तो भगवान को युद्ध पहुँच गए ह। भगवान के महल में। भगवान दूर में बैठे थे। वे साथ। उन्होंने दूर से देखा, मेरा बचपन का मित्र आ रहा है। तुरंत ही वहां से उठ कर गए। बचपन के मित्र को मिले बजन के मित्र को गले लगाया। चरण धोये भगवान ने तुम्हारे ये बताया का आदर कैसे किया जाता? और दोनों ने बचपन के लीला का समर्थन किया। दोनों के गुरु से शादी बनी, मोली किस प्रकार उनके गुरु ने उन्हें कठिन सेवाएँ मिली थी। और बचपन की लीला उनका
थे।
और थोड़ी देर बाद दामाद निकले कहाँ जाने के लिए, घर लौटने के लिए मै रास्ते में वो सोच रहे थे। मैंने तो कुछ माना ही, पती को क्या कहूँगा मैं आई दूर से पती ने बार बार कहा कि जा मिलो। और से पहले भगवान ने पूछा सुदामा, जो तुम लाये मेरे लिए राम बड़े रहा था, उन्हें पता था यह चूरा क्या? भगवान ने धनी छोटा दोपहर। भगवान क्या कहते हैं, जिस में पत्रम, पुष्पम, फलम, प्रेम के साथ, भक्ति के साथ, अगर तुम जल्दी मुझे अर्पण करोगे, मैं स्वीकार कर लूंगा भगवान किस चीज के भूखे हैं, केवल प्रेम के प्रेम और भक्ति सिदार। छोटे से कपड़े में cura खोल या भगवान ने जाना था बहुत है। भगवान संतुष्ट हो गए किसके साथ थोड़े ही पोर के साथ मुझे संतुष्ट हो गए। तो भगवान को प्रसन्न करना कठिन नहीं है। केवल प्रेम और भक्ति की आवश्यकता सुशिदावरामणहचले घर की ओर। और आज से में यही सोचते थे। मैं धूल से आया, मैंने कुछ महंगा भी नहीं मेरे मित्र से में पत्नी को क्या कहूँ। यही भावना गीता में क्या है। 4 वन से 4 मिली सानी विश्व गया, वन में, हरे के हित में विराजमान, हूँ, स्मरण, अपहरम दोनो की योग्यता है, वे से आती है, जिन में योग्यता है। भगवान का स्मरण करने की कोई योग्यता आती है भगवान से जो भगवान को भूलना चाहे, वो सुविधा भी आती है। याल के वासना में भगवान भूलना चाहते हैं। बहुत ही साल हो गया है आपके स्मार्टफोन्स में। अब हर चीज का दर्शन हो। सके तो छूट है, बबाल छूट दि तो सुना, राम तो कुछ नहीं माना। भगवान समझ गए थे। क्या है उनकी इच्छा जाओ घर पहुँचे, उन्हें क्या लेगा? क्या देखा उनका टूटा घर आपका, गड़ी का घर उसके पोस्ट के सामने महल था। उनका टूटा वा घर है। 1 कमरे का महल बन गया है। महल में अनेक सेवक है और महल सजा हुआ है। उनकी पत्नी उठे कपड़ों की जगह अच्छी सारी से सजी हुई है। वे समझ गए ये घटना कैसे किसी के पास 1 घटना बीती है। उनके बस की कृपा से तो आज के दिन सुदामा ग्रामर मिले थे, किससे अपने आज के आज के दिन में अनेक लाइन लेती है। आगे आज के दिन जो बाकी मिहाई मंदर है, विंदावन में वो भगवान के चरणों का दर्शन देता है। और आज के दिन परवपा जी ने लीग और डिवोटीज की स्थापना की थी। आज के दिन विदेश जाने से पहले प्रभाजी ने अत्यंत प्रयास किया था। कृष्णा भक्ति की स्थापना के प्रावकिगरुमणाज ने 19, 21 में आदेश दिया था। ले जाओ महाप्रभु के संदेश को देश में नाइंटीन फिफ्टी। वन में ब्रॉपाजी ने वनप्रस्थ स्वीकार किया, हां से स्वीकार किया और उसके पश्चात प्रयास किया। संस्था की स्थापना करे आपकी दिली छिपीवाड़ा में पापा ने काफी समय काटा और झांसी में उन्होंने 12 कमरे किराए पर ले लिए थे। और वहाँ प्रोपर्ली ने 1 संस्था की रजिस्ट्रेशन की। लीगआउडिबोटीज। लीग आव डिबोटीज का उद्देश्य यही था जो इस्कॉन का है। और आज के दिन अक्षय के पापाजी ने झांसी में गडोली की स्थापना की थी। तो प्राबाजी को विश्वास था कि उनका लक्ष्य अंत में प्राप्त हो रहा है। हालांकि प्रापाजी को कई समस्यों का सामना करना पड़ा। रहने का स्थान नहीं था। रहने के लिए धन ही धन और ग्रंथों के प्रकाशन का धनी था। जब भी वो प्रयास करते गए, उन्होंने विश्वास था क्योंकि गुरु की कृपा से और उनहोंने लीगऑडेबोडीजकी स्थापना की जान। ली। डेबoडीकेशादवअमेरिका अमेरिका में 1 दिन वियॉकमें बैठे थे। 1 बेंच में सो अमेरिका में तो कोई भेदभाव नहीं होता। 1 अमेरिकन आयलान के साथ बैठने के लिए अमेरिका ने प्रॉपर से पूछा आप क्या करते हो? अंग्रेजी में क्या क्या आपका धंदा? प्रापर ने कहा मेरा धंधा है, भगवान का प्रचार करना, मेरे मंदिर हैं, दिखे नहीं हैं, ग्रंथ है, वो देखने नहीं और सब के साथ देखेंगे ग्रंथ भी पकड़ हो जाएंगे को पूरा विश्वास था। 1 दिन अनेक मंदर खोलेंगे, 11 दिन अनेक ग्रंथ प्रकाशित होंगे, उनका विश्वास है। लीग डिवोटीज स्थापना हुई थी। का। आज के दिन कहा जानती हैं तो आज के दिन कई घटनाएं लिखी और आज के दिन मदन पुरी ने क्या आरम्भ किया था। चंदन या चंदन याद का उत्स वैश् भाग है। हर जगह मनाते हैं। आज हमारे मन में गाना, इसका इतिहास क्या है। वन पूरी बहुत ही ऊँची कोटी के भक्त है। वो उसका कल्पना करना कठिन है। दिन रात भगवान का स्मरण करते रहते थे। कभी किसी से कुछ मांगते नहीं, वह कभी नहीं मांगते। किसी ने खाना दिया, खाने को खाते थे, नहीं तो भूखा रहते थे, कभी अच्छा होना। मा पूरी गोवा परिकम लगभग रोज करते थे। वह दिन उन्होंने वरदान पर प्रेग्राम किया, गोरा प्रेग्राम करके विश्राम कर रहे थे। कहा गोविंद खून, गोविंद खुन बड़ा यदि आर्थिक स्थान है। इंद्र ने भगवान का मजे किया। सो गोविंद्र कुल में भी श्रम कर रहे थे। गोविंद्र कुल की परिक्रम करो, जो उस स्थान पर आते है। पांडा के यह पूरी की बैठक हुई। सो 1 बहुत ही खुबसूरत। ग्वाला 1 मटके में दूध लेकर वहाँ पहुँचा और उस ग्वाले ने कहा, मुझे लगता है तुम भूखे हो, सके हो, यह दूध पियो मैं लौटता हूँ। मटका लेने। मानपुर ने पूछा, आपको कैसे पता कि मैं बूकआउतमेरेगाँव की ओर से जा रही थी? पानी लेने कुंए से और तुम्हारे चेहरे को देखकर समझ गए। क्या भूखे हो, मेरे गाँव में किसी को भूखा रहने की अधिक अधिकार नहीं है। दूध पीजिये में लौटता हूँ। मान पूरे दूध को पी लिया। वो ना देख रहे थे। कब लौटेगा 1 सरल बालक मरका लेने के लिये थोड़ी देर के लिए नहीं लौटा। मधुपुरी को हल्की सी नींद ले। नींद में मानुपुर ने उसी बालक का दर्शन दिया, जिस बालक ने उन्हें दूध बचाया था। जब दूध बुझाया था। मानो पूरी उनकी खूबसूरती को देखकर, उनके मधुर कंठ को सुनकर इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने सोचा, मैंने कभी इतना सुन्दर बालक नहीं देखा। तुम्हारी पूरी कुमार की नींद आ गयी। वो ही बाल है, जिससे उसे दूध दिया था। वहाँ प्रकट हुए और बालक ने कहा, फल पूरी, मैं तुम्हारी भक्ति से बहुत ही खुश हूँ और मैं चाहता हूँ कि मेरी सेवा करो। मुझे मुसलमानों के हतेप्यार से बचाने के लिए मुझे दबा दिया था। इस स्थान पर वहाँ मुझे बहुत गर्मी लगती है। तुम जाकर खोदो मुझे वहाँ से निकालो और मेरी स्थापना करो। उस समय इतिहास में मुसलमानों का शासन था। और खास करके जो प्रसिद्ध हिंदू, मंडल से सिर, सब को यहाँ उखाड़ दिया। या पुजारियों ने मूर्तियों को छुपा कर भाग गए। यहाँ वो मूर्तियों को उठा कर जयपुर ले गए। इसलिए अगर आप जयपुर जाओ तो अनेक प्राचीन मंदिर है और जयपुर का 1 नाम है गुप्त, वृंदावन छुपाव वृंदावन। महज। पुरी ने अगले दिन गाँव वालों को उठाया और सपने की चर्चा के सपने लेने कर लिया। चलो हमें खोदकर देखना चाहिए। क्या है ये सच है। झूठ जब खोला तो देखा उसी स्थान पर, वहीं इसी स्थान पर वही मूर्ति प्राप्त हुई। और इससे पहले जब मानव जवरी को पता लगा कि वो बालक जिसने उन्हें दूध दिया था, वही बालक था। जिसने सपने में आदेश दिया। मानपुरी बड़े शर्मिंदा हो गए। शर्मिंदा के से उन्होंने भगवान से सेवा ले ली। जब उन्हें पता लगा कि वो बालक जिसने ने मटके में लाकर दूध दिया था, वही बालक भगवान है, तो वो आश्चर्य हो गए। 1 रूप से प्रशन, 1 रूप से दुखी प्रशन, इस दृष्टि से भगवान का दर्शन प्राप्त किया। अगर आपको पता लगता है आप किसको मिले हो, तो भगवान तो प्रशन नहीं होता। दुख भगवान ऐसी सेवा लेने हैं। भगवान को अपना ऑर्डर सप्लाई नहीं बनाता।
यह चाहिए
भक्ति की भुख मांगता है, भक्ति की भीख मांगता है। तुम पूरी शर्मिंदा हो गयी। मैंने भगवान जी से भर ली। जब खोलने पर उन्होंने देखा, उसी स्थान पर मूर्ति है। वो मूर्ति इतनी भारी थी कि 1 आदमी से उठाई ले गई। कई भक्त जुड़े उ, सब से जुड़कर मूर्ती को बाहर निकाला। माँ ने कहा क अभिषेक किया पानी से और सबने ने किया। हमें यहाँ 1 मंदिर बनाना चाहिए भगवान के लिए, तो सबने लिए मंदिर की तैयारी की, तो 2 दिनों में तू, 2 दिन में तैयारी हो गयी। मंडी और सारे बृजबासी जुड़ गए। इससे प्राचीन समय में ये भाव होता था कि जो पृथ्वी है, गाय है, सब है, इन सब के असली स्वामी कौन है? परम भगवान प्रान में की स्थापना की में प्रभा ने पदान को क्या नाम दिया श्री श्री पेरिस। ईश्वर समंदर के असली मालिक पापाजी ने लंदन में की क्या, नाम दिया श्री श्री लंदन शुराने लंदन के स्वामी। आप कह सकते हो शीशीरालपरदसादी पूरे दिल्ली के स्वामी पर अभी कई और घुड़कियां भी हो गयी है, तो भक्तों के सहयोग से अभिषेक का प्रबंध हुआ। 2 दिन में सब ने तैयारी कर ली थी। 1 बड़ा पत्ता लेकर ऑल्टर बनाया और भगवान की गागीशेकसाजकेभगवान को पंचे कमिया के साथ अभी ने किया ी और 900 नोटों में पानी लाए, भगवान का अभिषेक करने और बुरे उषा से सुपराजा बोनल बनाया। हर गुजबाजी जुड़े सेवा में और 2 दिन के अंदर भगवान की स्थापना कर। और पुजारी कितने थे। 1 ही पुजारी आनंदपुरी, आनंदपुरी अकेले पुजारी थे, उनका उदाहरण हमें हमारे पुजारी, उनको देना चाहिए। मानपुरी सारा दिन अकेला सेवा करते थे। भोग बनाना, भगवान का विषय करना, अभिषेके बाद भूख बनाना, 7 आरतियों को दिन में करना, रात को भगवान को सुनाना, जब पर्दे बंद कर दिया। 9 बजे तो भगवान को सुलाया जाता है, अंत के 4 जब भगवान को जगाते मंगल दिया साढ़े 6 बजे पहले मंत्र के साथ जगाया जाता है। और पूरी भगवान को सुलाने के बाद क्या करते थे, थोड़ा सा दूध पी, आज को भगवान खुद दूर पिला दे, दूध पीते, बस ये भी भगवान की खुराक आदर, पुरी की खुराक शाह कुछ नहीं खाना और रात को थोड़ा दूर पीना, सोने से पहले। इस प्रकार 23 साल के लिये गोपाल, का, विग्रह की पूजा होती गई। 1 त्या ने मंदिर भी बना लिया था, 2 साल बाद भगवान ने महापुरी को सपने में 1 और आदेश दिया। भगवान ने कहा महान पुरी, मैच सेवा से बहुत ही प्रसन्न हूँ। पर मुझे अभी भी गर्मी लग रही है। मैं चाहता हूँ तो मेरे लिए चंदन लेकर आओ। जगतपुरी से चंदन जो है केवल गर्मी में लगाया जाता है। सर्दी में ने अपने देखा होगा। गर्मी के मौसम में पापाजी को चन्दन लगाते, ाकुरजी को लगा दे और सर्दी में बंद कर देते हैं। तुम चंदन पुरी को भगवान ने देखा जा। बहुत कठिन आदेश दिया। मदनपुरी थे कहाँ घोर दाल में पहुंचना था कहाँ। जगनलपुरीरपुरी ने ये नहीं कहा। वो डी के टिकट में गे, ये नहीं कहा। गाड़ी गाड़ी की टिकट मिलेगी नहीं, उन्हीने का पल की। मुझे उठाकर, कोई ले जाएगा नहीं। उन्होंने इस आदेश पर स्वीकार कर लिया। और क्या आदेश है 2000 मील की यात्रा करो, इतनी लम्बी यात्रा। तो भगवान भक्तों को कई बार थोड़ी कठिन परीक्षा लेते हैं। और भगवान देखते हैं ये भक्त हैं। कितना दिल है। आजकल क्या भाव है। इंग्लिश में कहते हैं कम्फर्ट जोन हम करेंगे, सेवा, हमें सुविधा भी चाहिए। साथ में सुविधा दोगे, सेवा करेंगे और सुविधा नहीं दोगे। तो फिर सेवा असंभव है। पर भगवान मान पुरी ने वैसे तो नहीं किया। भगवान ने कहा मझे चन्दन ला के 2 जगनपुरी से वो एकदम तैयार हो गए, उन्हें कुछ पूछा नहीं। और उन दिनों में जो चुंगियां थी, वह हर चुंगी में मुसलमान अधिकारी था। तो जाना और आना दोनों ही बहुत कठिन था। तो वाधरकुरीकेकहने पर आनंद। पुरी ने उसी समय जो बंगाली पुजारी आये थे, उनको शिक्षा दी, शिक्षा दिया, उनको ठाकुरजी की, देखभाल की। विदाई सोपकर। वो चले गए। तो पुरी से भगवान परीक्षा ले रहे थे। परीक्षा कैसी थी? 1 बड़ा कठिन कार्य दिया तो हमें भी सेवा के मामले में जुड़ना चाहिए। बड़े दीर्ध हो कर और हमारी भी परीक्षा ली जाती है। कई बार भगवान कठिन स्थिति में डाल दे। जैसे देखा जाए। आज की स्थिति भी काफी कठिन है। भगवान की कृपा से रहने के लिए, खाने के लिए तो अच्छा स्थान है, पर प्रचार की दृष्टि से अधिक समस्याएं हैं। हमें हिम्मत ही आना चाहिए। हमारे मन में यही भाव होना चाहिए कि हमने उत्साहित होकर सेवा करनी है। रूप क्या कहते हैं कुछ शेर ब्रोवरदेनासंगति थे। तो हमें जब चैलेंजिंग के साइनमेंट दिया जाए तो कठिन है हमें यही सोचा किसी और को को भेज देते हे। क्यो भेज हो किसी और को? 2 ये कठिन सेवा? अगर कठिन सेवा मिले? तो भगवान व पुरी चले रमना जा रहे थे। जगना पुरी रास्ते में ये ऐतिहासिक मंदर कौन सा मंदिर गोपीनाथ का कहा जाता है। ये बड़ा प्राचीन मंदिर है। वो यहाँ के जो मूर्तियाँ हैं, भगवान ने खुद बुलाई थी अपने हाथों से। भवन राम में। तो ये जो मंदिर है शुरू से सा किसके लिए ठाकुर जी के ऊपर, वो बहुत ऊँचे सांस में। किसी में ज्यादा योग्यता हो, हम उनसे सीखते हैं। उसी प्रकार अन्य क्षेत्र में कोई नया आदमी जुड़ता है। क्या कहते हो तो मान पूरी के मन में भाव सा की अगर मुझे किसी प्रकार से यह तेज करने का मौका मिल जाएगा। जो खीर बनती है तो मैं आपने ठाकुर जी के वैसे बना सकू। ये था उनका। तो ने लोगों से पूछा आप लोग क्या बनाते हो, क्या भोग लगाते हो? और उस मंडल में जो भोग लगाया जाता था को क्या कहते थे। अमृत अकेली अमृत बन। तो ये था मालनपुर। उन्हें भी यह पता लगा भूख लग रहा था। मानपुर की इच्छा हुई कि वह बहुत चकलीफहमिले नियम। ये है जो भोग तैयार कर रहे हो। आपके मन में यह भाव होना चाहिए। भोग में भगवान के लिए बना हो तो भूख लग जाए। फिर हमें ना चाहिए। यह नहीं हमारे चस्के बन रहा है। मन से तुलसी, ग सब भावनी होती है। मन में भाव बोध बन रहा है। भगवान बलेगा भगवान खायेंगे। फिर पंद्रह मिनट बाद पूरी शर्मिंदा और वो छोड़कर चले गए। जाल में हैनाम करे जो उस मंडल में पुजारी है, उसे रात को सपना आया और भगवान ने कहा मैंने 1 खीर का प्यारा मेरे भग के लिए चुना कर छुपाया है। और शाम को बाला खील के प्यारे भगवान को चढ़ा दे। तुझे पुजारी को यह सपना या यह कैसे संभव है। भगवान ने 1 ही का प्याला चुरा कर छुपा दिए। पास सच है। और फिर आदेश के अनुसार मान गए। पुरी से मिले वो कहा क्या भाग्य है तुम्हारा? तुम्हारी प्रशंसा के लिए। भगवान ने ये खीर अपान छुड़ाया गया। पुरी बड़े खुश हुए, ये थी उनकी इच्छा नाचने लगे, छोटे छोटे टुकड़ों में तोड़ दिया, डोना हो सकते थे। पुरी के मन में 1 भय पैदा हो गया। पुरी ने कहा अब तो सब को पता लग गया है की भगवान ने मेरी खुशी के लिए चुराया था। अब लोग मेरी प्रशंसा करेंगे, मेरा गुणगान करेंगे, मुझे आदर देंगे, मेरी खुश हामल करेंगे। मुझे आदर है और इतना नाम मिलेगा तो खतरनाक स्थिति। हम ऐसे नाम के लिए तरसते हैं वाले नहीं नहीं, हम तो तरसते हैं, हमारा नाम लेना चाहिए, हमारा गुणगान होना चाहिए, हमें प्रतिष्ठा मिलनी चाहिए, हमारे जैसा कोई बग्धी और सबको हमारे हमें आदर जब लैम पाई। पहले मुझे आना चाहिए। मेरे दूसरों को तो हम अपने मन में सोचते रहते हैं। इतना आदर नहीं मिला। ये कम और मिलना चाहिए। पीओके संग त्याग देंगे धन गीचा त्याग देंगे मान प्रतिष् ा। ये बड़ा कठिन है? इसको त्याग ना असली त्याग है किस का आधा नीचे नीचे माल पूरी क्या घबराए, वो घबरा गए। अब मुझे इतना आदर मिलेगा, लोग मेरी प्रशंसा करेंगे, लोग गये, मैं कितना भक्त हूँ, मेरे ले। भगवान ने ये सब चुराया मान, पुरे डर जाए तो बहुत ज्यादा होगा। मुझे भागना चाहिए। पुरी नमुना छोड़कर भाग गये। इस से नहीं भागे कि कोई और कारण है। वो प्रतिष्ठा नहीं चाहते थे, वो अपना गुणगान नहीं चाहते थे। तुम्हारे वश संतो ने कई बार कहा मेरा नाम ही मत लो। न मिलाओगे तो तुम्हारे सारे गोल समाप्त हो जायेंगे। तो नाम हिला लो। हम जब भक्ति में जुड़ते हैं, हम 4 नेवा के विषय में सुनते हैं, नस नाम अपराध के विषय में सुनते हैं। हमें यह भी विचार करना चाहे। हमें सचमुच चना का भाव अनुकूल करना है। जब तक हम इस भाव को अनुकूल नहीं करे, म्हारे मन में यही रहेगा। पूछा हम इतने अच्छे भागते हैं, उत्तम कोटी के भगत हैं। हमें इतना आदर मिलना चाहिए, हमें इज्जत मिलनी चाहिए। कई बार लोग दान देते हैं, और हम उनका इतने गहराई से बाहर नहीं कर पाते। कुछ हो जाते हैं इतना दान दिया जरूरी वहाँ पानी में कहना पड़ता है, प्रयास तो कर रहे है, तो खान कर के जो भक्त हैं, जो जिक्र, उनको यह समझना चाहिए। यह प्राण प्रतिष्ठा आदर, ये सब झेल है हमारे लिए। जितना यह मान की इच्छा रखोगे, उतना ही भक्ति में उससे आगे बढ़ोगे और रामचंद्र पूरी चंद्रपुरी का भाव देखो। उनको डर था की सब मेरे को आने देंगे, सब प्रशंसा करेंगे, सब में कुमार करेंगे, चल भाग में लोग। तो हमे ये भाव हृदय में बिठाना है। इसलिए लगभग हर लक्षर में, हर्ष लोग के साथ प्रेम है। आप ना छेना पड़ते है, क्यूँ इतना महत्वपूर्ण है, और इतना कठिन भी है। 1 रूप से हम बाहर से हम नमस्कार कर देंगे। हिंद में हम आदर चाहते हैं। वो ये भाव को निकालना है। और हमारे अनेक संत उन्होंने अपने उदाहरण से दिखाया है। कैसे निकालना चाहिए। मानपुर में, पास पहुँच गए जगतपुरी और जगतपुरी में। जब पहुँचे ने राजा से कहा कि गोपाल प्रकट हुए थे। और राजा ने चंद टी, टू पाउंड और 8 कैंप पर 1 सेवा का प्रबंध किया, साथ में पत्र भी दे दिया। ये जो चन्दन है, ये हमने दान में दिया है। आज भी विदेशी भक्त जाते हैं, कुछ खरीदकर वो पत्र लेते हैं। मंदिर से दान मे ला, तो मरा अंदर पुरी चले कहा है गोदान वापस लौटने के लिए। रास्ते में, वो फिर से उतरे रुके कहा रेमुना में। और 1 रात के रुके थे उ। और उस रात को भगवान ने सपने में 1 और आलेख दिया। भगवान लगा मेरे में और गोपीनाथ में कोई अंतर नहीं। और ये जो चंदन तुम लाये हो। मेरे शरीर को ठंडा करने के लिए। यही चंदन लगाओ किस के विग्रह में, गोपीनाथ के विग्राह में और इसमें में कोई अंतर नहीं है। हमें यह नहीं देखना चाहिए। हमारी मूर्तियां अच्छी है, बाकी मुद्दों की मूर्तियां सब बेकार की है। भगवान अपने आप को आर्च विग्रह के रूप में प्रकट करते हैं। और सब आज ग्राहक हो। भगवान के समान मानना चाहिए। तो पूरी सुबह पुजारियों को उठाकर। हा, भगवान ने सपने में क्या कहा? यही चन्द्र क्या करें? यही चंद जो नहीं करता किया था गोपीनाथ की विगरा में, तो जब यह सूचना पुजारियों को दी गयी, बड़े खुश हो गये। और बाद पुरी ने खुद अपने हाथों से 2 पुजारियों को सिखाया कि चंदन कैसे लगाया जाता है। भगवान के विराने और 3 हफ्ते के लिए रोज ये चंदन याता उत्सव मारे भाशा किया जाता है। 3 हफ्ते के लिए। आज पहला दिन। तो ये चन्दनिया उत्सव शुरू हुआ था आनंदपुरी के द्वारा। आनंदपुरी मोदी उचपुरीेबरसे। वेदाचार्य ने भी। उनसे दीक्षा ली थी। तो माल ने पूरी भगवान ने 3 बार सपने में आदेश दिया की नहीं साफ हो गए, हमे भी सपने में आदेश मिलना चाहिए, हम उसका पालन करे क्या करना? चाह ने कहा, शुद्ध बाग बन जाओगे। जब सब आदेश आदेश का पालन करो नहीं तो मानिक प्रतिनिधि द्वारा संदेश में उसका पालन करो। तो इस घटना से हम यह भी देख रहे हैं के मदनपुरी ने बिना हहिजकेअनेगुरुअपने भगवान के आदेश का पालन किया, कहा गया जाओ जाओ और वो तुरंत किया रहे तो हमें उसी प्रकार का भाव रखना जाए। कभी कभी सेवा के दौरान सुविधा होती है, कभी कभी नहीं होती। पर हमें हर स्थिति में तैयार रहना चाहिए सेवा करने के लिए। अगर हम इस निष्काम भाव से कार्य करें। बिना शंका के भगवान कि हम लौट सकोगे। जब भगवान ने परीक्षा तो ले ली, जब भगवान ने देखा कि कुई ने सफलता से पास हो गए हैं, चंदन खता कर लिया है। भगवान ने कहा, बस और परीक्षा की आवश्यकता नहीं, क्योंकि उन्हें पता था कि मुसलमान चंगी वाले थे। उन्होंने कहा, वो पार्ट होते हैं और परीक्षा नहीं ली तो उसी प्रकार हमारा भाव होना चाहिए। चाहे कठिन स्थिति भी हो। हम उषा से तैयार करें और सदा विनम्रता का भाव रखना चाहिए। और इस आज के दिन 1 और शुभ कार्य रात जगनपुरी में बनती है। जगना सुमदर हर साल नया राज्य बनता तो आज के दिन नया रात कब बनाना शुरू कर दे। आज के दिन ये साल करने की मालूम नहीं और अक्सर आज के दिन दिन ध्याता उत्सव भी शुरू होता है। तो आज बड़ा शुभ दिन है और हम बैठ की दृष्टि से ये जो चंदन सव है ये सब से प्रसिद्ध है हम। हम उत्सव को इससे नहीं मनाते की कोई मिले हमारे मन में 1 ही भाव रहता है। हम भी में आगे लोग मनाते हैं। बालिक शो के लिए, भक्ति तो बनाते हैं हमारे ना होने के लिए। और हम सब का भाव क्या होना चाहिए। समंदर से भगवान की सेवा करे ले लीलाएं बीती हैं और हमें इनका स्मारण करना चाहिए। विजेता स्मरण करेंगे पद आया से बचेंगे श्रवण कितना विश् स्पन भारत के मध्य प्रदेश संख्या हमने और चरदनीताकाउससाह हर साल हर मंदिर में बनाया जाता है। वृंदावन में खास करके बड़े गुस्सा से हर साल मनाया जाता है। इस साल। पता नहीं शायद थोड़े स्माल स्केल में हो। ये बड़ा प्राचीन उत्सव है। तो भगवान के शरीर को ठंडा करने के लिए हम चंदन बनाते हैं, चंदनिय बनाते हैं न सब इस सेवा में जुडी है। चन्नी मतलब क्या है। अब चंदन की पेस्ट बनाने में भी थोड़ी मेहनत करो। ये चन्दन यात्रा लगाने चंदन लगाने आ जाओ। चन्दन को पैदा करने में मेहनत कर। यह सी प्रसाद खाने से पहुँच जाते हैं। जब उनको कहा जाता है सब्जी का 22 चूले में पास नहीं, वो नहीं करेंगे, आप आरती करने आ जायेंगे। सुझाव को कहा जाता है आरदी करना है तो किचन में सब बर्तन भी साफ करो और झाड़ू भी। 2 फिर हम भाग जाते हैं तो ये अधूरी सेवा है। हमें पूरी सेवा करनी चाहिए और चुत सेवा भी करनी चाहिए। फिर आप भक्ति मिलता, आपको पूरा लाभ मिलता है। जब हम आदि भक्ति करते हैं, वह जो हमें सुविधा लगती है, तो उसका फिर पूरा लाभ नहीं मिलता। तो बदनपुर उदाहरण लेकर हमें इस प्रकार का भाव अनुकूल करना चाहिए। विनम्र के भाव से हम सेवा करे और बिना कुछ उम्मीद किए वह में किसी प्रकार आदर अपना आदर और आदर नहीं चाहिए। हम केवल सेवा करना चाहते हैं। यह भाव रहेगा। मेरा भगवान के शरणागत हो सकोगे और भगवान के धाम लौट सकोगे। हरे कृष्णा freson laate in yeh। जल्दी जल्दी
तो रूपा आपको सुबह से कुछ होना चाहिए कभी अगर से, त तो सपने में बहुत है, लेकिन बाकी सपने में भगवान को सपना। और ये जैसे हमारे संस्था का, जो कि भगवान के
हमारे बड़ा अच्छा प्रश्न है। अगर अगर भगवान सब में आये, ये सबसे बेहतर है। और अगर आप कृष्ण रात को पढ़ रहे हो, भगवान अगर नहीं भी आये, आपको वही लाभ मिलेगा। अगर आप भगवान की लीला का स्मरण करो।
गे है।
अगर आप कृष्ण बुक पढ़ रहे हो की लीलाओं का परिचय बढ़ा रहे हो। अगर आप पढे हो, पढ़े हो, मानो, भगवान सपने में है, ये पढ़ने में स्मरण करने में आंसर नहीं है। समझ गए मतलब कि अगर आप बढ़ते हो, रोज रात को, कृष्णा बो मान लो, आपको क्रेडिट उसी का मिल रहा है? जैसे भगवान सबने में आए। जैसे कि जब वेसवादेव उन्हें ये वर्ड प्राप्त हुआ था, वो चुन सकते थे। अपने त्याग का समय। जब विश्वदेव श्री त्याग रहे थे, तो परम भगवान देवता समूह उपस्थित थे कि नहीं। तो भगवान प्रपाती कहते हैं प्रथम स्तन में अगर हम सोचें, हमारे शरीर त्यागने के समय भगवान खुद आयेंगे। यह सम्भव नहीं हो। पर अगर आप मंगर हो, गीता पढ़ रहे हो, भागवत दम पड़ रहे हो, मृत्यु के समय आपको वो ही लाभ मिलेगा जो कि विश्वदेव को प्राप्त हुआ था। आप समझे वो ही लाभ। मेरा नाम, आपसे पूछे, भगवान का उपस्थित होंगे। आपके खयाल से। श्री त्यागने के समय बुद्धिमान कोई जॉब कर रहा है, भगुदमकरकेभगदम पड़ रहा है। आपको वो ही लाभ मिलेगा जिस की भगवान आपके समक्ष है। ओके वेरी गुड हैब्रिट। yes a very good question। आप में कितने भक्त हो, जो कि सोने से पहले कृष्णा बुक पढ़ते मैं से बचने के लिए यह बड़ा अच्छा उपाय है।
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आप संतों की सेवा करो भगवान के प्रचार में और संतों को संतों के आदेश का पालन करो। संतोक आदेश क्या है cेnटrीबीहमबलसेवा करते करते
के हतु साइट हो जाते है, पूछ जाता है तो हम बनाने के लिए क्या करे से किया साइट
लेवी हो जाते है। डिस्करेज क्या है? अगर हमारे मन में कठिन स्थिति में सेवा का भाव है तो डिस्केट करते होंगे किसी होते हैं हमें आदर नहीं मिलता जो हम सोचते ह, हमें उतना मान नहीं मिलता, हमें सुविधा नहीं मिलती। अगर कठिन सेवा में, इस कठिन स्थिति में सेवा करना पड़े तो इसमें क्या नुकसान उतना ही ज्यादा लाभ मिलेगा। आपको अगर कोई आपके रोल में वे भाव रख रहा है तो भी आपका कुछ निस्तानी नुकसान रहेगा। वो गल भाव रख रहा है। आपके प्रति भक्ति में हम कभी हारते नहीं हो
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दिलाकर आपको लगता है कि वहाँ पर बहुत ज्यादा सेवाएं आप अपने अधिकारियों से चर्चा कर सकते हो। मुझे थोड़ा ज्यादा समय चाहिए जॉब के लिए थोड़ी कम सेवा चाहिए। हम यह नहीं कहते कि जबरदस्ती सबको यही करना पड़ रहा है, अगर कोई समस्या है तो तुम्हे अपने अधिकारी हमसे चर्चा कर सकते हो।
तो पूजा स्टार कैसे बचे और हमेशा
कैसे लगे रस बच सकते हो। प्रयास करने पर प्रयास नहीं करोगे तो कैसे बचोगे? भगवान गीता मे क्या कहते है जो प्रयास करने में, इस सेवा के लिए उन्हें कुछ कमी भी हो में दूर कर देता हूँ। भगवान कमी दूर करने को तैयार हैं, हमें तैयार होना चाहिए कमी को दूर करने के लिए। वही समझा क्या है हम तैयार नहीं है समझे दूर करने के लिए। हमें खुद भी इत्यादी
नेक्स्ट है की जैसे हम स्वामी आने से हमारी पुलिस और यहाँ पर आने के बाद वो कुछ ने के लिए नहीं आता था। धीरे धीरे कुछ व्यक्त टूटता है। 2 हम तो व्यक्त होते है तो उसका उसका गुरु हो जाता क्या करें, क्या
कहते थे है हाँ जीत संभव है प्रयास सबोतदाप्रयास प्रयास करने से प्राप्त हो सकती है। प्रयास करो, गुरु साधु, शास्ता का सहयोग लो, बिना शंका के आप सुबुद्ध प्राप्त कर सकते हो। अनेक उदाहरण हैं जिन के द्वारा आप देख सकते हो, रोटी ग्रास से बोल जा रहे हैं, ठीक शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। ये क्या होना था। आप देख सकते हो अपनी आँखों से कि अलग अलग। इस प्रकार अलग अलग स्पीड में आगे बढ़ रहे हैं। जितने कि सब 1 स्पीड में जा रहे हैं। कई की गाड़ी तेज जा रही है, कहीं आस ते जा रहे हैं? आप खुद देख सकते हो। हाँ पूछो
मोदी कैसे बरमा सेवा है जब सारी सेवा के ही
यह बात जरूर है। ये बात जरूर है। यह भौतिक समाज में रहना इतना आसान नहीं है। अगर आपको पैसे कमाने हैं, बच्चों को पालना है और काफी मेहनत करनी पड़ती है। प्रश्न क्या था कि बोधी बता का सारी जुबनसेै, इसलिए कहते हैं ब्रह्मचारी रह सकते थे। वो सबसे बेहतर उनके जीवन में जाओगे प्रधान बना। जैसे कहते हैं अत्यंत प्रयास करना पड़ता। इसके लिए पापाजी ने कहा चारों आश्रम में ब्रह्मचारी आश्रम सबसे बेहतर और सरल है भक्ति के वीडियो का पालन करने के लिए। अगर आप ऐसी स्थिति में आप पहले जुड़ चुके हो तो आतंकवाद में में ब्रेस्ट पर वार्गेय इधर
की। आपके धराधाम से प्रकट हो जाने के बाद हम सभी आपके की सी सी के में रखे सेवा करे, उसकी चिंता
मत करो, गे उसकी चिंता मत करो, भगवान करे।
जैसे जैसे जबवीसदासमहाराज आपसे मिलते थे तो वो बोलते थे की मेरे शिष्यों का ध्यान रखना, आप इनके शरण में जाना का पालन कर तो इस काम में तो उसे साइकिल में सब सुनते है की स और नरसी और जैसे वे सुने स्टार्टिंग से और फिर उसकी फोटो
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तो
ndersansnginenglis me late बकती लेट जुडो न जुड़ने से ज्यादा बेहतर है मक्सी में इतनी सकती है। अब किसी उम्र में भी जुड़ो आपको उसका लाभ पहुँच सकता है। हमने देखा है कई लोग 4 साल की उम्र में जुड़ते हैं और अच्छे बन जाते है ऐसा कोई नियम नहीं है आप पूरी उम्र में जुड़ोगे पचीस साल की उम्र में 25 साल के वन में जुड़ना में बेस्ट है अगर आप बचपन से ही जुड़ और कई बार देखा जाता है जो बचपन में भी जुड़ते हैं वो भी ठीक नहीं भरते है। भगवन हम देखा कई बच्चे जो बचपन से जुड़ते हैं वे कम में लेते वो कही है जो 25 साल की उम्र में जुड़ते हैं और हीरा बन जाते हैं तो उम्र का इतना प्रभाव नहीं पड़ता है ये
बल की क्या हुआ
अगर नियम तो टूट गए हैं और फिर से वह निर्णय करता कभी मैंने नहीं तो भी गलती नहीं करनी तो फिर आप धाम जा सकते हो में एग्जैक्ट ली क्या लाभ होगा वो बोलना मुश्कुल है। और अगर भगवान जब देखते हैं कि 1 बार गलती की है। अब डिटरमिन सेवा कर रहा है। फिर भगवान भी माफ कर देते हैं।
ह सफलता, तब
सौरी,
सफलता तभी
है। दूसरे शब्दों में लोग सोचते हैं जब तुम निकम्मे हो या हम्बल बन जाओ। और जब सफल हो तो गमन। जैसे कि यह अवंती ब्राहमण की कथा है। वंती ब्राहमण के बाद पहले बहुत धन था, सब कुछ हाथ से खो गया तो उनको ताना मारने लगे। सब कुछ खो दिया है। भगवान का नाम ले रहे हो, सब कुछ सहा तो भगवान नाम नहीं ले रहे है। असली परीक्षा जब है सब कुछ है, जब आप हम्बल हो, जवाब के बाद कुछ है ही नहीं, फिर भी उनका वैल्यू है। प्रसीपल, जवाब के बाद है, पुजीशन है सब कुछ। जब हम्बल हो रहे हो, वो है असमी इतिहास ठीक है। ye agdo question the stop नहीं सोरी
पचीस उसी समझें तो कई बार कुछ कहते है की जब हमारी शिक्षा होनी थी तो गुरु जब आप की दिक्षा महाराज तो ये आपके यूनिवर्स के लिए स्पेसिफिक
बाहुबजी ने नहीं किया था। हर कोपरजिसमानाकरली है पर प्रोपजीनेकाीडू बेटर तो आई डू द सेम प्रावली करोगे। अच्छा है तो यह नहीं कि अगर किसी हालत में भी करता है। krotothtisthe best हम कैरेंस करो और करेंगे पूरा लाभ मिलेगा a question
यस सुपयदिकईकर्मचार दूसरे बंदे में
क्यूँ नहीं है। पर थोड़ी निर्भर गुरु भाई, हम अगर प्रॉपर्ली के शिक्षा का पालन करे और मंदिर के अधिकारी शिक्षा के आधार पर चला रहे हैं। कुछ फर्क नहीं पड़ता है लास press
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महाराज 1 प्रेरणा के साथ अस्पताल में, और दूसरा है कि ये केवल 1 और दूसरा इस
inspiration mens im listing to my mind mange ko ko inspiration is mental diciplinins there to show yes, what we have? टू डू वी डोंट से आप मंदिर में आ जाओ करो मंदिर में नियम है इसका पालन सबको करना पड़ता है चाहे बड़ा डिवोटी हो या nem बेनेफिट जैसे सड़क में गाड़ी चलाते हो यह थोड़ी की जिस डायरेक्शन में चलाना चबाओ नियम के अनुसार चलाना पड़ता है आप के लिए नौकरी करते हो नियम के अनुसार नौकरी करना, तो आप भक्ती करते हो उसके लिए नियम है। महाराज
कुछ समय पहले महाराज वाली के कुछ केस बनावे तो उन 20 में कई लोग प्रश्न पूछने के प्रश्न प्रश्न स्टेड लोग को
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पूछ रहे हैं क्या न ब्रह्मचारी पल जोन टेम्पल इस अंडर दर महाराज देर इस नो असिसटेंट ऑफ़
गॉड ब्रदर
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the adadewodiscoari association talks about six races, one is rally mine, but who does more advanced to are more advanc? एक्टिंग प्रॉपरली और यू थिंक में हंकार वगैरह जा रहा है, पूछो को मिलते हो यह मत पूछो तुमने सुना मैंने कल क्या, क्या चमत्कार किया यह पूछो आपको में क्या कमियां दिखती हैं, वो मुझे सुधारना चाहिए महाराज ररशदकेमहलमें जो आता था पहले, वो पूछते थे नोट हव you पूछे प्रोग्रेस जर्नी ब्रेक गॉड ावासेदमेनीटाइम हम केवल सुनना चाहते हैं, वे कहेंगे ओ जी के बाद जाओ 2 बाबा टोक हम जायेंगे, हमें चाहिए तारीफ okay yes we stop के यस अच्छा डेजी से तो क्या है हमारा डेजिग्नेशन, हमारा डेजिगनेशन है पाए ये लेकर चलोगे तो कभी उदास नहीं होंगे। अगर ये सोचोगे नहीं मुझे तो ऊँचा पर्ची है, जिसमें ज्यादा पॉवर हो। मैं ज्यादा लोगों को पर हुक्म चलाना चाहता हूँ तो हमेशा दुखी रहोगे, बस सबका दास उन दास दास दास खुश रहोगे, फिर हर सीपी ने खुश रहोगे। ok thank u yes
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इनक्लूड होता है की हमे बेकार नहीं रहना चाहिए। जन बेन is devnwoksof नहीं आप देखोगे कहीं क्या अगर आप व्यस्त रहोगे तो आपका मन फिर रहेगा आप बेकार रहोगे और काफी बीमार किसका बंडारा हो जाता है श्रोता लोग जल्द विचार आएंगे आप सोच क्या करो अभी क्या करू was last
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todas sit in the ations so? how should be
s con? we dont compromise on the basic instructions for available? but canhalykisnawe don⁇t come mind? braplikeebrail e open the first temple people to follow for rules we, then the cave on swami wondestofollosome rule so now we have soda rules for everyone i started you hamari family in like ou you home for family in applied and e ru that they helps me a disipranlife if ar ar benifit thats like you re fallon a heldydititswere your better man taking the rutweenswontheldy diet okay to stop her thank you wodvunsicrishna ccatrीteकीहई क्रिश्ना हा ि हाल हहहह हाल।
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