भगवद गीता पढ़ना जरूरी क्यों? | 26 Dec 2020 | ISKCON Chandigarh | Srila Gopal Krishna Goswami

यह वीडियो ISKCON चंडीगढ़ के श्री गोपाल कृष्ण गोस्वामी द्वारा दिया गया एक व्याख्यान है, जिसमें वे भगवद गीता को पढ़ने के महत्व पर प्रकाश डालते हैं। वे गीता को केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन के सभी पहलुओं—व्यक्तिगत विकास, सामाजिक सुधार, नैतिक दिशा, और आध्यात्मिक शांति—के लिए एक व्यावहारिक मार्गदर्शक के रूप में प्रस्तुत करते हैं। व्याख्यान में गीता के मुख्य सिद्धांत जैसे धर्म, कर्मयोग, भक्तियोग, और आत्म-नियंत्रण की चर्चा की गई है, साथ ही यह बताया गया है कि इन सिद्धांतों को आधुनिक जीवन, शिक्षा, करियर, और सामाजिक समस्याओं में कैसे लागू किया जा सकता है। वक्ता गीता के विभिन्न अध्यायों और श्लोकों का उल्लेख करते हुए यह तर्क देते हैं कि गीता का अध्ययन न केवल व्यक्तिगत आध्यात्मिक उन्नति के लिए आवश्यक है, बल्कि यह समाज में नैतिक मूल्यों को पुनर्स्थापित करने और सामूहिक कल्याण को बढ़ावा देने में भी सहायक है। अंत में, वे श्रोताओं को गीता का नियमित अध्ययन करने, उसके संदेश को जीवन में उतारने, और इसे भविष्य की पीढ़ियों तक पहुँचाने के लिए प्रेरित करते हैं।
Chapters
आप सब भक्तों का हार्दिक स्वागत सका अभी बची है। कल बड़ा स्टूडें था क्या दाता राम ने सोचा कि गीता के सम्बन्ध में चर्चा की है। गीता का 1 और नाम है ये तो परेशान हमारे विधिक शास्त्र कितने महान हैं, कोई देरी डिटेल। अगर आप पढ़ना चाहो तो पढने प्रयास जीवन में थोड़ा आगे बढ़वा। गीता में क्या है मेरी सासों का सार गीता पढ लिया था और थी ये समझो। अमिशारेशासर और महावर में। अब गीता के से गीता का जो संदेश है, पूरे भारत समाज के लिए है। हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि गीत हिंदु भी आज के वतन में हम बहुत ही ज्ञान में बहुत रूचि देते हैं, प्रयास करते हैं। 1 देवी टोल क्यों हम सोते हैं। इसके कारण अच्छी नौकरी प्राप्त होगी, धन, कमाएंगे और ज्यादा इजिप्तकी सुविधा प्राप्त, ई पर ध्यान में ज्ञान देना यह समाज बुरा रहता है। तो भवन गीता में वो ज्ञान है जो कि आप किसी पारशााजियारीमें काम नहीं कर सकते। यह गीता केवल अपर लोग मिले है। जब अंग्रेजो का राज था, जो ने अपने स्कॉलर्स, जब मुसलमानों का राज्य था, ने बड़े ब्रूट तरीके से लोगों के जो इंग्लिश है वो ज्यादा होशियार है। मो तुन्ने कॉलेज को भेजा है। उन्होंने सर्किल भाषा से और फिर विलिकशासानवान किया और जनवाद द्वारा ये साबित किया। ये जो बेरिक साहित्य है, यह कल्पना है मitोलजी इसमें कुछ दम नहीं। हमारे हिंदू भाई बहन कहने लगे हाँ पी एच जी का है तो सच ही होगा। और इसे कई लोग मेरे से। पर जी ने भगवन गीता को प्रकाशित किया किस नाम से कई बार लोग पूछते हैं क्या कारण है, भूमि समझाते हैं, उसी विचारधारा से स्वीकार करना चाहिए। भाव से भगवान ने भी स्वीकार किया और भगवान क्या कहते है चौथे अध्याय में ईद का इतिहास और ज्ञान भगवान कहते हैं। एवम पर ये ज्ञान मैंने सबसे पहले दिया था किसे किसे सूर्य के सा ये क्या नाम था ने ज्ञान आया मानो शाह और बड़े समय के साथ हो गया था। भगवान ने कहा ज्ञान तुम्हें दे रहा हूँ क्यों हो। इसलिए विज्ञान के दिवस को समझ पाओगे तो ये आवश्यक है कि अगर आप गीता का संबध चाहो तो आपको ये संदेश कहाँ से प्राप्त करना चाहिए। इसी भक्त के द्वारा जैसे कि ाभालीअनुवान उसका अनुवाद विश्व की लगभग प्रेसभाषा में हुआ और लोग पढ़ रहे हैं। क्यू सी संदेश है तो भगत की तरह जो ज्ञान है हमें आज वैज्ञानिक व सहयोग से प्राप्त ह। अगर गीता की चौथी हार में ये ज्ञान प्राप्त करना है जो किसी आत्ञानीवयक्ति के द्वारा प्राप्त करना गीता में है। क्या रामुजी कहते थे। 1 भगवान कृष्ण 1 ग्रंथ बगल गीता 1 मंत्र या क्या कहा ठीक है वन गॉड कृष्णा वंस केप्चर बगल गीता वन मंत्र गीता में है के दम भोर संदेश है जिसके न से अब जीवन बुकी हम सब सुख चाहते सच बात है से पूछा सच बता happy क्या जवाब मिलेगा और बढ़ती जा रही है, करती जा रही है 1 बार सा होता है अगला वाइज जाता और स्पीड जैसे अभी जो नया वायरल स, उनकी स्पीड है। सैनी टाइम तो कई बार जो हम परचार करते हैं, गीत में कहते हैं बहुत 1 जीवन के 2 लाख से दिए हैं, 1 ही दुख कष्ट सा थोड़ी सब सूरत हमेशा रहते आपके कंठ में दम है, समय के साथ देखे जाते है, कपूर शरीर बदसूरत बन जाता है और और शक्तिवाद शरीर कमजोर बन जाता है। हमें सूचना देती है। चानी पाते 1 बार 1 मुखी को मृति का नोटिस होगा। तुम फील नही, कहा यमराज का हिसाब yamraj मेरे हा कि तुम मुझे मृत के द्वार में ले जा रहे हो, सूचना 2 नोटिस, 2 के 2 से 2 महीने बाद मृत्यु आएगी भवन राम के राज्य के समय वहीं प्रजा को छूट थी, वो खोज चुन सकते थे। उन के मृत्यु का समय अभी छूट, आज राजी छूट देंगे आपको सारे समान कार्ड बंद। आज तो सुनने में कार्ड का बड़ा अच्छा बिजनेस है। यह सुविधा दी जाए तो कोई चुनेगा नहीं। समय राम राज्य के समय लोगों को और खुद ही चुन दे। तो इस वकील ने कहा यमराज, आप कैसे? यमराज ने पूछा हमारे सेल में कितने बाल हैं? गंजाबनगाहूँामराज ने पूछा 30 साल पहले कितने बाल थे, पर पूरा आज में हिलाई नहीं सकता। 3 साल पहले कितने पहलवान था, का पहलवान था। यम ने कहा आज मारे पार पैर में कितनी शकती है है। आज मैं चल नहीं सहता। मुझे तीसरे पा। यमराज ने कहा तुम्हारे बाल सफेद हो। फिर तुम गंजा बन गए, हाथ, कमजोर होते गए, अंग कमजोर होते गए तो कमजोर होते गया और तुम तुम्हें नोटिस मैंने। तुम्हे इतने नोटिस दिए, तुमने उनको पार के फेंक दिया। तो उसी प्रकार हम सबको रोज नोटिस मिल रहा है। क्या नोटिस आप हमारी जिंदगी में 1 दिन कम बज गया है। हम क्या सोचते है? ठीक है दूसरा हमारे से मैं जन्म मोदज्ांतामेपरबशांत। गुरु। ज्ञान तो हम सब जन्म ने दे। अंधेरे मन में आज सब जो स्कोर के साथ जुड़े हो, बड़े भाग्यशाली हो क्योकि आँख को शुद्ध भक्ति का संदेश दिया जा रहा है जो गीता का निर्णय है। भक्त भगवान कहते है तुम मुझे समझना चाहते हो तो 1 ही बचा है। भक्ति हो भगत। 1 शिक्षा यह है ये ईश्वर कौन है, ज्ञान है सब भगवान 1 है। किसी मां वीजा प्राप्त होगा। परम भगवान है भगवान, ईश्वर, पर्व, कृष्ण, अनार, राधे, गोविंदा का वर्णन है। और ईश्वर ही बरमेश्वर है। अर्जुन ने कहा परम धाम न, मेरा ही नहीं राधा, सी देवर व्यासा सबका है। गीता के हर शो के साथ क्या लिखा है भगवान भगवान बोल रहे है। तो भगवान ने ज्ञान दिया अर्जुन को और 1 विषय सी स्थापना होती है। फिर गीता के दूसरे रिहाई में हमें ये शिक्षा अपराध होती है। क्या हो कौन? अब जानते है आप कौन हो? 1 भारत में कई कई प्रकार के स्टॉल है। 1 है बिग तो उनके क्या, उनके क्या वो आपको बता रहे हैं। पीले में क्या है कोई से पीजे चाय जूट मानू तो कई लोग जाते हैं, उनके पास जाना चाहते हैं, पिछले जाना याद है। इस प्रकार आपको यह पूछा अब हैं। कौन समय के बड़े प्रसिध राजा के राज्य शासन थे। सवाल में उन्हें बड़ा विद्वान माना जाता था। जो उन्होंने कहा के में हम ये जानते हैं, कौन ये में है? तो आप बताइए हम हैं। कौन? कौन हो आप का संदेश? भगवान कहते हैं जिस प्रकार अपने पुराने बर्तनो त्याग कर नए वर्ष स्वीकार करते हो, उसी प्रकार यह आत्मा 1 थे को त्याग कर। निक के अनुसार मृत्यु जब आती है, जब निर्णय कर लिया है। रावणा ने। अब तुम्हे कहाँ कहाँ दे, मानव योगी में, योलीमेंकरोड़पती के घर में, भिखारी के घर में वे निर्णय हो जाता है। यमराज लोन की सेना के द्वारा इस वृक्ष इस व्यक्ति को अब यहाँ पहुँचना है। ये है उनकी सजा और भगवत। उनके 21 पांचवे स्थान को पढ़ो। वह 21 अध्याय है। किस प्रकार व्यक्ति को पापों के लिए परिणाम करना पड़ता है? जब निर्णय हो जाता है, यह बात है। तो भाग के में, बड़े के नाई के साथ आप पढ़ते हो। आत्मा। यूज देखा जाए। भारत में लगभग अधिकतर लोगों को ज्ञान ने आत्मा के विश्व में है की नहीं सुद्दे विदेशी में भी ज्ञान है। क्यूँकी बाइकों में भी राज कहते हैं आत्मा के विश्व में है क्यू? नहीं दे? विदेशी में भी ज्ञान है। क्यूँकि बाइकों में भी राज कहते हैं पानी नहीं मिलेगा, आप स्वीकार करोगे। तो इस प्रकार वर्षा चाहिए। तो क्या कात के महीने में आप बॉक्सर ने शायद गोल किया था कितने भक्तों ने किया था। नहीं। तो अब हमारे की गोल लीला से परिचित हो गए। रन बनाने के साथ थे। उनके बाद 9 लाख गाएं थीं और न गाय किसाब थे। गा के ले इतनी बड़ी खेती होगी, अंदाजा नहीं लगा सकते। भारत की ये जो आज ही किताब है? ख। तो मरा सलाद। आइए इंद्री खुशी की वर्षा के देवता हैं, देवता देव है। जैसे हमारे देश में प्रधानमंत्री का कैबिनेट है। और हर देश में सब भगवान को भी कैबिनेट है की जिम्मेदारी है। तो क्या कर रहे हो? पिताजी। पिताजी ने नहीं दिया सोचा कि छोटा बेटा क्या समझेगा, फिर क्या वज है? तीसरी बार जवाब दे दिया मेरे मेरे से क्या छिपा रहे हो? बेटा किसान है न मजे वर्षा, वर्षा प्राप्त हो सकती है। तो प्रकृति भगवान के इशारे बहुत जल्दी है। कम बहार ये सब बातें भगवान में फिर का है। समय राइट, समय जो है, भगवान का भी है। और समय क्या करता है? हर चीज को को नष्ट कर देता है। आगे है करवाना। आप अगर विलेक साहित्य की शिक्षा लाभ उठाओ। आप भी समझ जाओगे। हमें मेकर में कार्य नहीं करना चाहते। वे कार्य बोला तो शासन हो। बेग गीता द्वारा। आप समझ सकते हो क्या अनुकूल है और क्या प्रतिकूल है। तो गीता के तीसरे और पांचवे जाए में भगवान भगवान ने कहा जब मैंने श्रृष्टि का निर्माण किया, मैंने प्रजा को कहा खुशी प्रात कर हुए। ये के द्वारा योग विषय में आप विधिक साथ में पढ़ते हो, यह बहुत आवश्यक है। उधारण के लिए। गीता के पांचवे राव अध्याय में भगवान कहते है 3 चीजों को न दे क्या आया वो दिया गया ये है जो धर्म के प्रचारक है वो यगेकेविज्यादा चर्चा नहीं कर क्यूं नहीं करते डर रहता है की चर्चा करेंगे लोग मेरी गए सो मीडिया ने भारत से जा संदेश दे रहे हो तो इस युग में क्या है उनका तो भगवान ने कहा सृष्टि का निर्माण हुआ था ने लोगों को कहा अगर तुम्हें खुशी चाहिए तो क्या है ये करो तो भगवान ये नहीं कहते कुछ कार्य मत करो। भगवान यही कहते हैं करो विशासपरअधारित और 1 उदाहरण देते हैं खबर को भू जल में होते हुए जल को छूता नहीं और उनके 2 से तो गीता के सबले मन को स्थिर बनाता है। आज हम सब को मन की चिंता है कि आर्यो ने क्या कहा मन को वश में लाना वायु को वर्ष बनाने से भी ज्यादा कर संदेश पढोगे तो शान हो जाएगा तरह संदेश है नेस भाव से हमें हर कार्य करना चाहिए। भगवान जी संदेश दे रहे हैं पूरे मानव समाज के लिए मानव समाज हमें भूलनी चाहिए मनुष्य जीवन प्राप्त होता है हमें इसका सदुपयोग करना चाहिए। और वो क्या है भगवान की शिक्षा का लाभ बगल गीत में भगवान की वाली की भगवान है। इसलिए इस अंत में इस देश में कोई न कोई कमी नहीं है और बगल गीत में है संदेश है हमारे सर सब ही है और ये सनातन है ये नही सो आज जन को थाने में वह क्या कहते है जन्म कर्म च में मेरा प्रकट अप्रकट होना दोनो ही दिव्यम है। दिव्यम का अर्थ है बहुत ही गुन के पार। जैसे कि भगवान प्रकट हुए, कैसे प्रकट हुए देव रूप में माता माता पिता को यकीन दिलाना चाहते थे घबराओ बाज और और भगवान क्यों प्रकट हो भगवान की वारी ये नहीं कि कोई व्यक्ति अपने इक्षा के अनुसार शिक्षा दे गए। आज आप देखते हो अनेक धरम बचा पर ध्यान से देखोगे तो देखोगे बहुत कम आपको असली संदेश दे रहे हैं क्यों हो जाते हैं यहाँ हम लोग बात चलते है तो ज्ञान है तो पर्व भगवान द्वारा आता है वे कोई दोश नहीं, कोई दोष नहीं, कोई कमी नहीं। गीता का ज्ञान है सनातन मुझे ज्ञान हर वद्धि बढ़ सकता है। आपको खुशियों की लगभग हर प्रसिद्ध भाषा में और गीता प्रकाशित हुई है और गीत के हर व्यक्ति शुखवारकातकररहा है। कैसा असली शो, शांति हम सब माने समय निराश हैं बेचैन हैं नाव में है में गीता का संदेश समझ के पालन पालन कर ले। ये निराश गुम जाए। पर भगवान क्या कहते है जो करो मेरे लिए करो यार करोशी कौन थे वान जैसे हमने पहले कहा था भगवान यह कहते कुछ करो मत और कहते हैं कि रोजी जो गर ये है गीता का अर्जुन। अज्ञानता की स्थिति में थे। सच बात है अर्जुन ने भगवान को क्या कहा मुझे ये नहीं समझ आ रहा क्या है मेरा कर्तव्य। भगवान कह रहे थे लड़ो तुम हो वहाँ कर्तव्य होता है ने कहा कैसे मैं के साथ दूर से। अर्जुन ने कहा मैं हूँ और आपसे ये भी मान हूँ हमने ज्ञान दीजिये फिर गीता का ज्ञान देना आराम करते हैं। हे अर्जुन क्या तुम ये ज्ञान दूर हो गई है। हम सब कई बार समझ नहीं सकते। क्या हमें करना चाहा? नहीं, सच बात है। जैसे अर्जुन धान की स्थिति में थे, अर्जुन कंफ्यूज हो गए थे। हम सब रहते हैं, भगवान बन जाएंगे। हम तो ड्वांसफर्ट नहीं है। वो क्या है? उपाय उपाय है गीता द्वारा दिया गया गीता पढ़ते हो। अब भी देखा होगा। 5 लोग के साथ कातप्रयभीहैहैन वो थापरिया, क्या है जो हमारे अचारियों का निर्णय है समझ मे उसे सरल लू में प्रस्तुत किया गया है। और वो है कोई श्लोक को आसानी से सिखा रहा है। जैसे आप पढ़ाई करते हो, स्कूल जाते हो। आज कल तो स्कूलों से भी छुट्टी बनी हुई है। मैंने कई विद्यार्थि से पूछा बच्चा यह पहले अच्छा था, सी है और जो पढ़ना नहीं चाहते हैं। अब ज्यादा अच्छा है, खेलने का ज्यादा समय मिलता है तो तुम भी संदेश है। जीता के द्वारा अज्ञानता दूर होती है। और भगवान ने ने पूछा जाता दूर हो गयी है। हाँ अब मैं आपके आदेश के अनुसार की पढोगे समझ पाओगे क्या होना सा आपका पद है। भगवान क्या कहते हैं? अजी भोक्ता कौन है? 5 वे दहाई में भगवान कहते हैं भोक्ता भूत आप भोक्ता। जो व्यक्ति यह समझ जाए भगवान माने जो वीर है हैं, उनकी सेवा, उनका उपयोग होने से ऋषिकेश की सेवा में आपके पास है का योग। भगवान के आज इस काम के कई मंदिर हैं जिनकी मूर्तियों के दर्शन अपने स्मार्टफोन में पाप कर सकते हैं। न मैंने सुना कि आप के राज माद्री अभी उनका दर्शन भी आप बात कर सकते हैं। बैठे बैठे नेत्र द्वारा, क्या देखा वाणी वाणी द्वारा, हमारे खान द्वारा, तो ई इंडियम का उपयोग अगर आप हमारी सेवा, ये है सफलता तो ज्ञान में हम समझ नहीं सकते। जो ज्ञान प्रयास करे समय पर भगवान कहते हैं। 4 स्वीटी के व्यक्ति मेरे ही शरण में आते हैं। तुम्हारे चाहते हो जाते है मान। 4 धर्मज पर आप चलदीगमजुलावासियों को लंच नहीं चाहिए चाहिए, दंश चाहिए। ठीक है। फिर ज्ञान यानी और रोगी पड़े अच्छे संस्कार हो जो आपकी स्थिति में हो और भगवान की शरण देते हो, अगर पाप का संस्कार हो, इतिहास हो तो वो सीधे भी भगवान सवार नहीं करते। आपने देखा होगा कई बार जब कुल, दुखी रोगी पीड़ित होता है, भगवान का भाग भर जाता है कि नहीं? भगवान की जरुरत है। और कई स्थिति में भगवान को और दूर से भगवान कहते है। 4 बड़ी शर में आते हैं सब के सब, पूरी आत्मा है, कम है े विज्ञान के आधार पर ईद पढोगे ये पीड़ा और गीता सुनोगे तो समझोगे भक्ति है। गीता राज। यही सन्देश शिवा भगवत में भी प्राप्त होता है। हम लोग भी क्या भक्त तो वन है जो करो मेरी खुशी। गीता के संदेश के द्वारा हमारे ज्ञान दूर होगी। और गीता के नाम में क्या कहते है राजा विलिया जो ज्ञान है सबसे बेहतर पुन ज्ञान है। आप कहोगे? हमने तो सोचा था। जो हमारे 5 साल में मिलता है, वो है सबसे बेहतर पूनग्यानजोहार्बल जाएगा या एमआईटी में आएगा, वो है आपको s department in is universi, see what have? कोई जवाब नहीं दे पाया 1 समय में टाइम फोर यूनिवर्स का उनसे पूछा मैंने ऑर्गेनाइजर से हमने डिपार्टमेंट उ्होंने प्रीटी, थ्री हंड्रेड तोमैंने पूछा एनी डिपार्टमेंट जल्दी। वर तो आज मयूर सोचते हैं, सब ज्ञान जरूरी है। अक्सर लोगो में रिलीजन इज लास्ट, वह आरडी है। तो बगकीतकेदोा अर्जून प्रेशर पूछिए। कई बार गीता पढ़ते हैं। कहते हैं जो अज्जू ने प्रश्न पूछा, वह प्रेशर मांगे मुझे भगवान के सनातन साथी है। भगवान ने उन्हें यहाँ तक की स्थिति के द्वारा ये भगवान सारे थे। गीता का संदेश दिया जाए। इसलिए मानवता के सुधार के गीत सन्देश हमें बड़े ध्यान से समाज। जैसे हम कह रहे थे, तातप्रियभीबहुत महत्वपूर्ण है तात प्रिय में संत की। व्याख्या। भगवान ऐसे कह रहे हैं क्या? भगवान ने कहा हे सर, वहाँ में सब धर्मों को छोड़ कर। मेरी शरर में आओ। भगवान की शरमाने का अर्थ क्या है? क्या है? कौन बताएगा उनके शिक्षा का पालन है। ऐसे तो हम सब के पास है। उनका आचरण देते हो। माल की शिक्षा से बोल अलग है। कुछ लेना मतलब की। उनकी शिक्षा का पालन। यह नहीं शिक्षा है। उसको अपना और उनकी शिक्षा क्या है? मेरे में शिक्षा का पालन करोगे तो क्या लाभ होगा? क्या नाम होगा? गान। कहते हैं धाम में आओगे, वह सूचा माँ सूचा। आप का अर्थ क्या है? घबराओ मत। भगवान गौधन परवल के बीज वासियों उनके चेहरे को देख रहे थे। बच्चा इतना भारी पहाड़ उठा रहा है। किसी की पवार गिर जाए, ृहोजाभगवाननेकया का नोट बनी भार नीचे नहीं गिरेगा और न की ऊँचाई तथा किसी बूची यहाँ से लेके आकाश था। इतना, ये थी उनकी ऊँचाई। 1 छोटा बालक उठा रहा था। मैं जोर खुली तो भगवान कहते हैं मा डोन वरी इफ यू मी आई। वो तो हमारी समस्या क्या है। जिस मात्रा में हम चलते हैं, वहाँ हमें क्या शिक्षा मिलती है। फॉर्ड घरवाले दीदी, छोटी उम्र में तो बता दिया। धर्म करना ही भरती करना है। तो बुरी बोल ना क्या कर रहे है? दुनिया तो भगवान देखते हैं समय हमारे बोली को। सन्यास। सन्यास का अर्थ है। भारत में तो हर व्यक्ति कम सन्यासी बुला रहे थे। सन्यास का अर्थ सिविल डे। बहुत का तो 1 भारतीय व्यक्ति था। पर स्वामी जी। now i script is said, you should give sans olytanolman। हमारे शास्त्र में लिखा है कि सन्यास के गुणों को ले जाए। तो पापा ने कहा devnaशioनwlपाबाजी की मर्जी लगभग 70 पर था और ये जंगल साल 30 फेंक था। उसने कहा प्रभा से ये जो, ये जो खास है, बुरों के लिए होना चाहे। पापा ने उससे पूछा और यू मी। उसने कहा वन डे। पापा ने कहा तो मुझे कह सकते हो गैरी के साथ ये तुम्हारी मृत्यु मेरे से पहले नहीं होगी। हम सब बुरे हैं, सोचते हैं, जवान हैं, उडावेवालेछुपाने की कोशिश करते हैं। इसे ब्यूटी ब्यूटी पाउडर और गोले में गए है। अपने में खो गए। आप छुपाना चाहते हैं, आप भी ठीक से हैं। आप का ही है। हम प्रयास करते हैं। जितना हो सके राहुल बनके छुपाने के लिए छुपा सकते हो। ज्यादा देर नही। तो जो बुद्धिमान व्यक्ति है वो कहता है? जेंजवरीसटपमकशोक है का खतरा, आम सा। कई बार आप देखते हो लोग गाय मोटर का एक्सिडेंट 1 दम हो जाता है। तो ये बहुत जीवन में अगर हमें सुख चाहिए। क्या है उपाय प्रशन? जो व्यक्ति शिक्षक को अपनाए वो ज्यादा आनंद में होगा और न बाद। यह नहीं, हमारे पास यह नहीं है। उसके बाद नई मोटर है। हम पुराने बाजार में जा रहे हैं, हम नमन करते रहते है। और क्या ये जो नई मोटर का पेट मिला है, यह हमें ही नहीं बलिक व्यक्ति का जीवन ऐसे ही ब्यस्त हो जाता है। सोचना क्या नहीं अपराध कर सकता। अपराध और आध्यात्मिक देश से हमें ये हमने इतना समय वेश कर दिया है। बहुत धिकारने। इसे हमें 1 पल कभी नहीं करना चाहिए। क्या कहना चाहिए और पद का उपयोग करना चाहिए। न। तो गीता का सदेश है, ऐसी ही शांति और खुशी का सदेश। गीता के अठारहवें दहाई में भगवान दीन परकार की खुशियों का वर्णन करते हैं। क्या है दीदी सातवें राज्य सिह का लक्षण? क्या है शादी खुशी का लक्षण? शुरू में करवा, बाद में मीठा, जिसके द्वारा शुरू कहा जाता है, सो हमारा कर। गीता बड़ो अरे भाई की दवाई जाके, आप सादे संग रहो। फिर आपको ये प्रेरणा मिलती है। चलो ट्राई तो करने 2 प्रभाजी कहते थे, अच्छा नही लगे तो छोड़ देना। ट्राई। तो हम ट्राई करते हैं, थोड़ी ही देर के बाद अब क्या देखे? इसके जान लेने से, मन से हो रहा है, मंशा हो रहा है। पौधे की छाई हमारी परिष में आ रही है। और आप असी आनन अनुभव करते हैं। अगर असीन नहीं होता। लोग गीत पड़ते असी आनंद प्राप्त नहीं होता। लोग हरिनाम जाती, कुछ लाभ हैं। इसी लिए करते हैं जैसे लोग। भारत में कई के धरम को बदलते हैं। पैसे के बल पर। आप जानते है, यह सब जानते हैं। और कई मुसलमान लोग भी। पैसे के दम पर अगर कोई हिंदू लड़की, मुसलमान लड़के, शाली 10 लाख बुला है तो साथी कुछ गया जिसके ऊपर इसके आत्मा का 11 बजे वैसे देखा जाए। आज के बादल में नौकरी करना, धर्म नौकरी करना, बिजनेस करना काकी संघर्ष का काम है, है कि नहीं? और होता जा रहा है। और ये परिय सात्विक सुख नहीं कराएगा। आत्मा पुस्कार का ज्ञान हो, वो है सात्विक और राज में और बाद में भी है। बाद में जब आप कार्य में जुड़े हो, फिर उसे बड़ा आनंद आता है। और समय की बात क्या देखते हो कि उनका परिराम हो। ऐसे अनेक बीमारियाँ हैं। इसका मूल कारण क्या है? मूली आदतें जो भक्त स्कोर के साथ जुड़ते हैं, उन्हें 4 नियम विद्या समय से अगर हम इन नियमों का पालन करें। आप कई बीमारियों से द्वारा कई साल में ला कॉर्न को सिखाया जा रहा है और आज हजारों की संख्या में गीता को पढ़ रहे हैं। गीता में हैं हर प्रशन, हर समस्या। तो गीता द्वारा मन को आप वश में ना, नहीं तो मन को वश में लाना। ऐसानामे अर्जुन ने क्या कहा बना? हे कृष्ण। मन को वश में लाना। वायु से भी ज्यादा वायु वायु नाम क्या करे। भगवान ने भरती की विधियों का पालन करोगे। यही चर्जलवंद क्या हो जाएगा, स्टेल हो जाएगा, वन स्टेर हो जाएगा। क्या आप इतनी आसानी से आकर्षित नहीं होगे? तो गीता का संदेश हमें माने गुरु द्वारा प्राप्त करना चाहिए। और गीता का संदेश ध्यान से भरना चाहिए ने वहां पर पूजा भारत की यात्रा में थे। 1 मंदिर में गए। बड़ा प्रसिद्ध ऐतिहासिक मंदिर है रंग में। वहाँ उन्होंने देखा 1 वामन, जो कि अनवर था, रोज 1 साल में गीता को सामने रखता था, प्रयास करता था, उचारण करने के लिए, न थी, न ठीक विचारण कर पाता था। और कई लोग हँसे थे। बाद में पता था ब्रामण दिखावा तो महा बबू ने और महा बबू ने देखा माँ बबू थोर द ज य है। शुरुआती के महा गुरु ने कहा हे ब्रामण, तुम गीता को पढ़ रहे हो न। क्या है कारण? राहुल ने कहा मैं हूँ उनपर मेरे गुरु ने आदेश दिया था 18 आधा का ध्यान करने की। और मेर को समझ में नहीं आता हूँ न। भगवान कितने दयालु है। भर के रथ को चला रहे हैं सेना के बीच। तो यह देखकर, भगवान की विनता देकर। इस वोटर आंसू निकल रहे हैं। उस ब्रामण तुरंत गले लगा लिया और कहा तो असल में गीता के सदेश को माँ से अपने साथ। 4 महीने रखे कितने रोज गीता का संदेश समझाते थे। तो पापाजी कहते हैं। पर पड़े इस ग्रामीण ने, इस ब्राहमण ने गुरु के संदेश अनीश का पालन किया। वन में क्या परिणाम हुआ? भगवान का दर्जा भी प्रांत हो गया। तो भगवान ने उसे ले। तो गीता का सन्देश हम सबको पढना जाए। यही नहीं गायेंगे जैसे दिया और थोड़ा पढ़ो, 1, 200, 3 सो जितना पढ़ोगे आपका इनका है। आगे, जब गीता आप पढ़ते हो, आपको ऐसा लगेगा, यह भगवान कालेज मेरे लिए है, यह मेरी समस्या है, जो गीता का संदेश है। और आगे भी मे। हम लोग ग्रंथों का वेतन करते हैं। ग्रंथों का अध्ययन ना चाह। हम यह नहीं कहते। केवल बालों और पढो मत पड़ोगे आपका ज्ञान हो जो भारत को प्रात हुई। तो प्रपने लिखा था महात्मा गांधी को। आप गीता के प्रचार रखो। गीता का ज्ञान स्कूलों में देना शुरू करो। आज आप देख रहे हो 5 सालो में बहुत बुरी स्थिति है। सच बात है। खाजे पंजाब माना है कि वो कजमेशेबोलिगपोले है। बुरी स्थिति है। बच्चों को छोटी से शुरू की की आदत पड़ रही है। पर अगर आप भीतर सब अभी ऐसी 10 बैड ये ठीक नहीं है। आप से बचो तो गीत और भक्ति पति करने के लिए कोई बैंक मैनेज की जरूरी नहीं। बैंक मैने आप दे सकते हो, नहीं तो भी नो प्रॉब्लम। भगवान क्या कहते है पत्र पुलिस तो मुझे पत्र तुलसी का पता पुल्स, फलम, फ्रांस का पानी, वो भी नहीं कहते। सादा पानी मिलोगे अर्पन करोगे। मैं इसे और प्रेम प्रेम और भक्ति का भाव कैसे प्राप्त होगा? भगवान कहते हैं तो मुझे बता भी। 2 आजकल कई लोग कहते हैं भगवान ने ज्यादा क्यों मांगते हो, खुद खाएंगे सोने की तारीफ है। और भगवान में भगवान देखते क्या दे रहे हो, देखते हैं क्या रख रहे हो। 5 का डोनेशन दिया होना अच्छी बात है। वही देखते है कितने सौ करोड़ मगर गीता का संदेह हमें स्वीकार करना चाहिए और गीता में है शांति का संदेश। आज शांति क्या है। हर व्यक्ति यह दावा करता है की मेरा धन नहीं है, मेरा लड़का मेरा है स्वीकार करें। पर अब भगवान जी के सर में तो भगवान करे है। प्रेम भक्ति के साथ यह प्रेम भक्ति प्राप्त होगी कैसे? जैसे आपको हरी नाम से जोड़ा जाता है तो हरी नाम से क्यों जोड़ा जाता है। क्योंकि सास ने ये निर्णय है। जब प्रेम ने पूछा ये बताओ में लोगों का उदाहरण कैसे होगा? हे राजा सच बात है, स्मार्टफोन है स्मार्टफोन का कर सकते हैं और भी कर सकते है। हमारे 1 भक्त हैं जो काम करते है नाइंटी, फाइव, परसेंट, ऑफ, इंटरनेट इस लोग इस्तेमाल करते हैं। तो हम आज स्मार्टफोन्स द्वारा आप ग्रंथों को भी ला सकते हो। मूर्तियों को डीडी, बिठा और इतर उपयोग करना। तो भगवान कह रहे हैं प्रेम और भक्ति की 22 प्रेम गुनेसर वो मेरे नाम है। तो ये हर 1 महामंत्र कहा से आ रहा है? हमार नाम जा रहा और हमें नाम स्वीकार करना चाहिए का उपयोग करने और इसके उच्चारण से क्या लाभ होता है? के दरपन हिदेकी मेल का क्रोध लो वो मन बसिया यह जो महल है, यह महल दूर हो तो आप सब से निवेदन है। गीता को पड़ी है मेरे नाम। विजया और भक्ति की विडियो का पालन करना शुरू में थोड़ा कठिन दिखता है। कई बार आप करोगे बगल के संघ में रहोगे तो यही सरल हो जाएगी। और भगवत गीता का जैसा देश है, उसका हाल भी लाभ उठा सकता है, पढ़ सकता है और है शादी का मानो। हमने कई लोगों को जोड़ा है। अगर गीता के साथ कई सारे बड़े भारी बड़े डॉक्टर वगैरह जब उन्होंने गीता रोज पढ़ना शुरू किया, भगवान एकदम शांत होगा। पहले कुल शान था, चिंता थी। जब गीता संदेश पढ़ते हैं तो क्या लगता है ये संदेश हमारे सुधार है। भगवान कहते हैं प्रेम और भक्ति के साथ। तो प्रेम भक्ति तो है, हमारे में है, आपके खेल में है है या नहीं? वो कह रहा था यहाँ भक्त ते है। प्रेम और भक्ति अनुकूल करने का प्रयास कर रहे हो। जो मार्ग आपको दिया गया है वो मार्ग है जिसके आप प्रेम और भक्ति हाथ बाबाजी। ने ने पत्र में कहा राउंड रिपोर्ट for princi यू गो बैक टू गॉड डेफिनिटली, भगवान के धन लौटना चाहते हो, वायरस थोड़ा कीमत भरना पड़ेगा कई बार लोग कहते हैं स्वामी जी आशीर्वाद हो हम को इतना आशीर्वाद के अंधे आशीरवाद देंगे, भगवान हो जा। क्या कहते है जदी, यह बहुत सरल है। तो साला के साथ ने की दूर होगी वाली नाराबारेआरे।
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