भक्त क्यों करते हैं ग्रंथ वितरण | 28 Feb 2018 | ISKCON Pune | Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Goswāmī

In this devotional discourse delivered by Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Goswāmī at ISKCON Pune, the speaker explains why devotees engage in the massive distribution of sacred books (granth vitran). He begins by highlighting the impressive growth in distribution numbers, noting that over 1.8 lakh books were distributed this year—more than double the previous year’s 1.5 lakh. He cites scriptural authority from the Bhagavata Purana, emphasizing the three qualities (compassion, contentment, and self‑control) required to please the Lord and the importance of preaching (prachara) as a dharma. The talk weaves numerous anecdotes—ranging from early pioneers who faced hardships, to modern examples of devotees distributing books in foreign lands, to personal stories of individuals whose lives transformed after reading the scriptures. The speaker stresses the spiritual benefits of distribution: spreading happiness, removing material cravings, and uplifting society. He acknowledges the challenges of the work (logistics, resistance, personal sacrifice) and urges devotees to adopt a proactive, enthusiastic attitude, likening the effort to guiding a blind person onto the right path. The discourse concludes with a forward‑looking vision: setting higher targets for the next year, expanding distribution to more languages and regions, and encouraging every devotee to view granth vitran as a primary service to Krishna, promising divine blessings for those who commit to it.
Chapters
मेरा का हार। तो अब भक्तों ने बहुत प्रयास किया और आपके कारण, आपका पूरा केंद्र विश्व में कौन से नंबर में आया, इसे नर में आया। तो आप सब ने मिल कर कितने ग्रंथ बाते। पिछले साल के मुकाबले में ये साल डबल था, ट्रिपल था, क्या था, पिछले साल के मुकाबले में कंपैर लास्ट? ye ye sal, no one like atty one thousand ward। महावि this year लास्ट हerनओकेy। ट्वेंटी परसेंट। तो आप भक्तों के प्रयास से आप भक्तों ने मिलकर 1 लाख 80 हजार से ज्यादा बड़े किताब बात हैं? और पिछले साल आप भक्तों ने लगभग डेढ़ लाख बड़ी किताबें छापी थी। हमारे आचार्यो ने प्रचार की सेवा पर बल दिया है। हमारे शास्त्रो में प्रचार की सेवा का गुणगान किया जाता है। उदाहरण के लिए भागवत के चौथे स्कंद में नaरdमuनीपरचेतज को देश देते हैं। नारद कहते हैं dययsauतेशूna कुषादशुजनारदना, अगर तुम भगवान को प्रसन्न करना चाहते हो, अगर तुम भगवान को प्रसन्न करना चाहते हो तो 3 कार्यों की आवश्यकता है। 1 हैं दया, दया की भावना, दूसरा संतोष, ता हर स्थिति में संतोष हो। तीसरा, सर्वे पा मन को वश में रखो और हमारे सामने सादसगनमेंपरलानमहाज का उदाहरण प्राप्त होता है। प्लान महाज का भाग्य था, ज्ञान माता के घर में प्राप्त कर लिया था। पान महाज के पिता ने बहुत प्रयास किया। रात का आकर्षण समाप्त करने के लिए। प्रलाद का आकर्षण किस के पति था। महान के पति और प्रात को अनेक प्रकार के कष्ट स्ितियों में गुजरना पड़ा। अपराध मुहान ने से लिया। वो प्रचार करते गए। उपलाल ने 1 बड़ा सुंदर भाव प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि जब मैं देखता हूँ कि किस प्रकार बज जी दुखी स्थिति को सुख की स्थिति में बदलने का प्रयास करे, मुझे क्या होता है, आज आप क्या करे? समाज में दुख स्थिति को सुख की स्थिति में लाने का प्रयास करें। आपकी है को चश्मा पहन लो, चश्मा पहनना, अच्छा नहीं लगता तो कॉन्टैक्ट लेंस ले लो। 1 जमाना था क्या कहा आपको सुनने में तकलीफ था तो अब हेयरिंग एड पहनते थे, शायद आपने देखा होगा बहुत बड़े हेरिंग रोते थे, तो हर व्यक्ति जान ले तो बह रहा है और आप हेरिंग बन गए है। इन छोटे का आपको पता भी नही लगेगा के आदमी बह रहा है। फिर बाल सफेद हो रहे हैं और आप जवान देखना देखना चाहते हो करा। और इस प्रकार अनेक और सुविधा है आपके चीख में बुढ़ापा नाशआनेआरेहै तो मेकअप कर लो। तो बौधिक समाज में अमीर स्थापित करने का प्रयास करते हैं। कि सुखी सुख है। 1 दुसरे को मिलते है तो क्या कहते हो का कसा और दूसरे को क्या कहता है चांगला पर ना आप चांगले हो, न वो जागा। तो ये है, ये है बौद्धिक जीवन का लक्षण। नया साल शुरू होने शुरू होता है। 2018 जब शुरू हुआ और 2017 की समाप्ति में आपने 1 दूसरे को क्या कहा? happy न्यू नया साल मुबारक हो। इसका अर्थ क्या है? आप पूरा साल बताओ। सुख के साथ सुख का अर्थ है आपकी भौतिक इच्छाएँ पूरी हो जाए। और अंत में आप क्या देखते हो? हालांकि, लोगों ने आपको 2017 16 पंद्रह 14 हर साल कहा कि सार हो सुख से मनाओ, परिणाम क्या था। ये सार है जेल खाना, जिस में हर व्यक्ति कष्ट में है, आप बड़े राष्ट्रपति बन जाओ, अरे पति व्यपारी बन जाओ। क्या आप मृत्यु से बच सकोगे? तो आज लोग अज्ञानता में हैं, हम यहाँ फर्ज है उनके ज्ञानता को दूर करें। क्षेत्र महाप्रभु जी जो स्वयं भगवान है, उन्होंने भी 4 के कार्य पर बल दिया। और आप जानते हो इस प्रकार ने पति जगाय मलाई का उद्धार किया। और चेतन मा ने क्या कहा जाये गत 1 दिन क्षेत्र महाप्रभु में हाय राज ठाकुर और भगवान नेतिननंदा को बुलाया और कहा हे हइराजहेनितिनंदा, घर घर जाओ और लोगों को देख। 2 क्या बोलो, कृष्ण, कृष्ण बोलो और महा प्रभु के आदेश के अनुसार आगे माँ प्रभु ने कहा जाओ बोलो शाम को लौट कर। मुझे बताओ कि प्रचार किया, प्री पूछते थे, कैसा था प्रचार और हमारी संस्था में 1 न्यूजलेटर छापी जाती है, जिसमे हर मंदिर जो प्रचार करता है, प्रचार की रिपोर्ट देता है। और हमारे जो 4 हैं। उदाहरण के लिए, ठाकुर भक्ति विनोद, जिन्होंने 1 रूप से शुद्ध संदेह की स्थापना की, उन्होंने एईटी नाइनटी सिक्स में एटी नाइनटी सिक्स, वही साल है जबकि प्रापा जी प्रकट हुए थे, पृथ्वी पर 1 ग्रंथ लिखा था चेतन महाप्रभु जी की शिक्षा के ऊपर, क्योंकि उन्होंने सारे विश्व में भेजा और उनके प्रतिनिधि भक्ति श्धातजीनेस्वयं इस सेवा पर बल दिया। और उन्होंने प्रापा जी को क्या आदेश दिया। 1935 में भक्ती सिधांत जी हजारों भक्तों के साथ वृंदा में ब्रज मंडल कर रहे थे, उपराबाजी उनको मिले राधा कोन के तट पर भाकीसिलादाजी ने 1 कागज पेंसिल लेकर में दंगा की तस्वीर बनाई और कहा अगर भगवान हमें सुविधा दे तो क्या करो, क्या करो, गंद को बाटो पकाशित करो बाटो। तो प्रापा जी ने अपने गुरु महाज के आदेश को बड़ी गंभीरता से स्वीकार किया जैसे मान पुरी के विशय में आप पढ़ते हो। भगवान ने उन्हें आदेश दिया लाओ चंदन मेरे लिए 2000 मिल की यात्रा, कठिन स्थिति में उन्होंन प्रकार को उनके गुरु ने आदेश दिया था। तुम पड़े लिखे युवक हो, अच्छी अंग्रेजी बोलते हो, ले जाओ। खेती ने देश को कहा पश्चिम देशो में और 40 साल के प्रयास के पश्चात 70 साल की आयु में ₹40 के साथ प्रापर जी गए। पश्चिम देशों में केवल 1 ही कारण गुरु का देश था और अमेरिका जा के पापा जी ने भक्तों को कहा डिस्ट्रीब्यूट बुक तो अमेरिकन भग सोचने लगे कौन लेगा इन किताबों को, यहाँ तो जीजसकाइसकाराज्य है यहाँ इस का नाम भी बहुत कम लोगों ने सुना था पर उनमें ये शारदा थी ये भाव था अगर पापा ने बोला है तो हमें करना ही चाहिए। तो 1 दिन 1 अमेरिकन भाग कहनाम करने के बाद मंद लौट रहे थे रास्ते में उन्होंने 1 पेट्रोल पम्प में रुककर $10 का पेट्रोल दादा गड़े हुए और फिर उस भाग के मन में 1 भावना, 1 प्रश्न, 1 विचार आया। मैं ये पेट्रोल बम का मालिक पैसे की 1 किताब हमारे bola, i have this nice book, i can give this to you in to ten। डॉलर्स और के मालिक ने देखा, तब अच्छी लगी के भक्तों ने कहा, अगर हम 1 किताब ऐसे बाट सकते हैं तो और साधारण से भी प्रयास करें। तो अस्तेस्तेवोप्रयास खोजे गए। और आज सारे विश्व में लाखों किताबें बढ़ गई है। और इनका उद्देश्य क्या है? लोगों को सुख देना, ज्ञान, दा को दूर करना। आज अगर आप हो। आपके। पूरे शहर में भक्तों की संख्या बढ़ गई है। मुझे याद है जब हम नाइनटी टू में आये थे, पूना मुश्किल से 5 या 10 भगत थे। आज हजारों भक्त हैं, पूनम दिल्ली में हजारा, उसका कारण है इन ग्रंथों का प्रभाव। यह नहीं की आपने इस मेराथन में 1 लाख 80 हजार बड़ी किताबें बांटी, तो जनवरी के महीने में 1 लाख 80 हजार भाग आ जायेंगे। आपके पास कहेंगे चलो हम बग्स बनना चाहते हैं। यह नहीं, पर प्रॉपर जो ग्रंथ हैं। is a time bom किसी व इसका प्रभाव आ सकता है। मैं 1 घटना जानता हूँ, यहाँ किसी ने 10 या पंद्रह साल पहले 1 किताब ली थी, 10 से पंद्रह साल। उसने किताब को खोला भी नहीं। और फिर वो दफ्तर में कुछ लफड़ा हुआ छुट्टी हो गई। दुखी था। उसने देखा उसके घर में 1 गीता पढ़ी है, क्योंकि उसने लगभग पंद्रह साल पहले खरीदी थी। पढ़ना शुरू किया और बल ने भक्त हैं। अगर आप भक्तों से पूछो। खासकर के विदेशों में की। अब कैसे जुड़े भक्ति में कम से कम 60 प्रतिशत लोग मंगे। ग्रंथों के प्राची ने भूत परिषम के साथ इन ग्रंथों की रचना की। तो रात को सो जाते हो, सोते हो नहीं सोते। उनका बहुत छोटा धंधा था। क्या चीज के पत्तों के प्याले बना वह 50 परिषद सेवा में देते थे। गंगा नदी की और शाह रात हर जोर जोर से करते थे। ये भूखे व्यक्ति को लगता है, भूत सवार हो गया है। न सोता है, न हमें सोने देता है। तो भगवान के जो भक्त हैं, वो चाहते हैं कि सब सुखी बने। तो ये जो ग्रंथों की की सेवा है। इस सब सेवा में सबसे सेवा रात के 10, 11 बजे जाग जाते थे और सारी रात जल का अनुवाद कर रहे थे। अंतिम नानी सेवंटी सेवन में प्रॉपर हुए थे। नवम्बर में पिछले 6 साल महीने का स्वास्थ कमजोर था। जब भी उन्होंने जनता का अनुवाद बंद नही किया, क्यूँ प्रॉपर के मन में 1 ही भावना लोग ग्रंथो को पढ़ेंगे और जीवन को सुधारेंगे। तो ये जो ग्रंथों के विजन की सेवा है, यह बड़ी महत्वपूर्ण सेवा है। भगवान कृष्ण, देव, जिनका, उदेश्य और भागवत के 5 कर्मी प्राप्त करते हो, उन्होंने 1 बड़ा सुन्दर उदाहरण दिया है। भगवान विष्णदेव कहते हैं 1 बुद्धिमान व्यक्ति जब कोई अंधे व्यक्ति को गलत रास्ते में जाते हुए देखता है, तो क्या करता है? क्या करता है? उसके हाथ के पकड़ कर सीधे रास्ते में जोर देता है, तो उन्होंने यह उदाहरण दिया है। ये है भक्त का भाव। तो ये ग्रंथों के विजन की जो सेवा है, इसका मेन उद्देश्य क्या है? लोगो को सुखी बनाना। आज हम सोचते हैं यह बड़ी मोटर खरीद ले, बड़ी कोठी बना ले तो हम क्या है स सफल है। बरसी धनी करोड़पति व्यक्ति कौन हैं जिन्होंने हरी नाम को स्वीकार किया है। तो आप सब पूराशहर के असली रईस व्यक्ति हो। आपने हर नाम को स्वीकार किया है। ये असली धर्म बोलेगा कोठी बना, लो कोठी आपके साथ जाएगी, ऊपर हाई नाम जाएगा। तो भक्तों का बहुत बहुत अभार। भगवान गीता के 18 दहाई में कहते हैं सब भक्तों में सबसे प्रिय कौन है, कौन है? कई बार भाग से पूछते हैं कोई शौर्कट नहीं आपकी संस्था में 1 शौरकटहैं प्रचारक बना हो तो ये जो प्रचार की सेवा है, ये कठिन सेवा है? कठिन क्यों है, क्यूँ है प्रचार करते हो थोड़ी की हर व्यक्ति कहेगा मुझे गीत 2 आप शाम के समय शराब की दुकान के आगे खड़े होकर देखो कितनी भीड़ होती है सब शराब पीना चाहता है। तो कई बार सोचते हैं हम 4 ले जाएंगे जैसे हम घर से निकले हैं लोगो को लाइन में आ जाना चाहिए। हमें गिरा 2 राज ठाकुर प्रचार कर रहे थे, बंगाल घर घर जा रहे थे, कहीं उनका बड़े उत्साह से स्वागत किया संत महात्मा हमारे घर में आ गए कृपा बोली आपका क्या है? हरिराज ने कहा we जात जरूर करेंगे, कई घर में गए लोग, वो nमाiपगलहोभेपागल बना, ने के लि जाओ जाओ जाओ, कई घरों में गये, लोगों ने कहा लगता है ये जासूस हैं सन्यासी के कपड़े में, हमारे घर में देखने के लिए क्या है लिए तो कई घरों में गये, लोगों ने कहा जब हम आए थे शिवा जनमन में कि आपने, हमें आने आने नहीं दिया हम तुम्हे आने नहीं देंगे। तो दूसरे शब्दों में राज का कईयो ने प्रशंसा की, कईयों ने तो इसी प्रकार हम जब प्रचार में जाते हैं, कई लोग साथ देते हैं, कई साथ नहीं देते पर हवा कर्तव्य क्या बनता है क्यूंकि भगवान की इच्छा है, हमारे चाइयों की इच्छा है, प्रौपजयकीइच्छा है, प्रपज प्रतिनिधि की इच्छा है। हमें प्रयास करना चाहिए। तो आप भक्तों में यह भाव होना चाहिए जो लाभ, जो न, जो सुख शांति हमें प्राप्त होती है। हम दूसरों को भी दें वो कैसे संभव होगा धन के माध्यम से। तो यह कंस की सेवा बहुत महत्वपूर्ण सेवा है। अगर आप किसी को सुखी देखना चाहते हो तो 1 ही उपाय है क्या इतना भक्ति तो खास करके उन भक्तों का भार जो मैराथन में गये थे और उन भक्तों का भार जिन्होंने परे किया इन गधों को बांटने के लिए और आज आपके प्रयास से आप लोग 1 लाख 80 हजार किताबें लग बड़ी बात है तो आप अंदाजा लगा सकते हो कि लोग ये लोग पढ़ेंगे और कई बार हमारे मन में विचार आता है कोई को पढ़ना नहीं है लोग पढते हैं और पापा जी चाहते थे हमारे जो भक्त हैं गंध को पढे और बातें प्रापा ने कहा कोई आप से पूछेगा इस गर्त में क्या है न वो ठीक देखेगा तो आप भक्तों को, गंद को पढना भी बकायदा कितने भक्त हो, गंद को रोज पढ़ते हो, कम से कम अब ईमानदार तो हो। सब ने हाथ नहीं उठाया है। तो जो पढते हैं, उन्हें पढ़ते रहना चाहिए, उसे नहीं पढ़ते, उन्हें पढना। ग्रंथो को पढ़ोगे। तो आपकी बुद्धि तेज होगी। जिस प्रकार चाकू के साथ आप किसी चीज सब्जी को आसानी से काट सकते हो, तेज बुद्धि के साथ जो भौतिक आकर्षण, जो आपको विचलित करने का प्रयास करता है, उसे आप काट सकोगे। तो आप सब से निवेदन हैं। दंत को पढिए। और हमारे मन में ये भाव नहीं होना चाहिए कि लोगों का कलियुग में रुचि नहीं है। इस कलियुग में भी लाखों लोग असली ज्ञान की खोज में है। और मेरे खयाल से पूरे भारत में कम से कम 10 12 लाख बड़ी किताबें बंटीं हैं। आपके मन के महीने में आपके दिल्ली मंडल में 4 लाख 20 हजार किताबें बाती, बॉम्बे में बॉम्बे ने लगभग 1 लाख 90 हजार आपके पूजा में सब सिर की गिनती करोगे। मेरे अंदाजे से 10 12 लाख तो बनेगा तो मतलब की 10 12 लाख लोग पढ़ेंगे और होंगे। तो आप का क्या विचार है। यह अच्छी सेवा है, शान सेवा या कठिन कठिन है पर इतनी कठिन में नहीं। और भौतिक समाज में अगर कठिन स्थान में नौकरी हो तो ज्यादा सरकार मिलती है। जो कूले के माइन में काम करते हैं उनको आपको फैक्ट्री वालों से ज्यादा शंका मिलती है। तो आपको ज्यादा कृपा मिलती है। और proबrजीनेyeकha rong as book distrbution gold on dit mt की जब तक गंध का वेतन होगा मैं हमेशा जीवित रहूंगा क्योंकि गतों के द्वारा मैं प्रचार कर रहा हूँ। और प्रापा जी ने ये भी कहा to plis me इन डू wa मुझे करना चाहते हो। पापाजी प्लैनेट पर थे, पृथ्वी पर उनका उत्साह बढ़ता था, जब वो देखते थे, उनको सूचना आती थी इतने ग्रंथ और आपको खुशियों की जानकार। ट्रफल के ग्रंथ लगभग 80 से अधिक भाषा में अनुवाद हो चुके हैं और सारे विश्व में लोग इन घंटों को पढ़ रहे थे। मैं जुलाई के महीने में चाइना में था। वे 1 डॉक्टर ली हैं जो भक्त हैं। सोलामलाकरते है ने अपने दफ्तर में ले गए। उनके दफ्तर में पूरा चाइनीज भागवतम का शेर था और उन्होंने कहा कि मैं अपने सब मरीजों को सिखाता हूँ। तो बजे ग्रंथों का बड़ा गहरा प्रभाव पड़ रहा है और हमारे 1 भक्त हैं मधुर सेविता प्रभु, मधुर सेवित प्रभु। जी। बी सी के चेयरमैन हैं, इटली में रहते हैं और वो ग्रंथों को उनकी यह इच्छा रहती है। हमेशा ऐसी गीता बताए कि विश्व में किसी ने देखी नहीं हो। तो कोई 4 साल पहले उन्होंने 1 बड़ी गीता छापी थी। आपने देखा कि ने वो $600 के बीच $600 कितने रुपए हुए, 40 हजार विकेट हमने गीत को प्रधान मंत्री को दी भी। अब वो 1 गीता बनाते है जो की विश्व की सबसे यूनीक गीता होगी। व गीता की छपाई की कीमत है। सवा करोड़ रुपए 1 ही कॉपी? ऊंचाई में अभी सीलिंग से जमीन तक और लंबाई में यहाँ ये दीवार से लेकर कम से कम 2 खंबे आगे दर और ये किताब बनाने में 8 महीने लगेंगे तो ये विश्व की सबसे बड़ी गिनीज बुक में यह रिकॉर्ड जाएगी। इतिहास में इतनी बड़ी गीता, इतना बड़ा धार्मिक किसी ने नहीं छापा। 1 कुरान छापी थे राजा ने और वो भी गीता के मुकाबले में चौथे हिस्से के बराबर होगी तो इस का, उन के भक्तों का यही प्रभाव रहता है की भगवान का गुणगान बढ़ते जाए तो आप सब भक्तों का बहुत बहुत शुक्रिया हरे कृष्ण मेरे ख्याल से आप भक्तों को इनाम दिया जायेगा, छुट्टी भेज दी जाएगी और आपको असली आशीर्वाद परम भगवान दे रहे हैं। भगवान कहते हैं ये भक्त मुझे खुश करने के लिए पूरा महीना गया घर घर इसका मैं आभारी हूँ और भगवान को पसंद करने का सबसे सरल साधन क्या है असल में हिंदुस्तान में 2 है ये हम भक्तो में प्रचार का उत्साह गत महीने में बढ़ जाता है की 11 महीने हम जरा हो जाते हैं। हम में यह उत्साह पूरे साल के लिए रहना। हमारे वाईशिषयकाप्रबुषर पूर्ण में आये थे और आपको ये सूचना दे रहे थे तो प्रचार का उत्साह हमेशा रहना चाहिए। मैं 1 छोटे शहर में था जोधपुर मुझे 1 भक्त मोटर मिलने जा रहा था। मैंने देखा यह भग जो था मोटर चला रहा था और अपने साथ उसने किताबों का कई किताबें रखी थीं और रेड लाइट में गाड़ियां रुकती हैं। उस साथ के मोटर वाले को कहता था मेरे साथ में 20 मिनट के सफर में 2 या 3 गीता बाद कई भक्त हैं जो अपने साथ छोटी किताबें हमेशा रखते हैं बादे तो आप सब भी ये है आपका प्रचार का हथियार इन ग्रंथ आप इतना अच्छा प्रचार नहीं कर सकते पर हमारे ग्रंथो के माध्यम से लोगों को ज्ञान दे रहे तो आप सब में ये भाव होना चाहिए। अगले साल मेरे में क्या होनी चाहिए योजना का वेतन बढ़ाए या घटाए, ये निर्बल हैं आपके उत्साह प्रयास। तो अगले साल का क्या टारगेट है आपका 3 ये साल 8 में जे कौल किन किन भक्तों ने मैराथन किया अच्छा और अगले साल को ने मैराथन में सेवा नहीं की यह साल शो अगले साल क्या भाव होना चाहिए। अब सब जुड़ने को तैयार हो अगले साल पक्का अभी हर समय के 4 बीमार हो जाओगे सब जुड़ोगे okay hi krishna okay it s already eight forty so हमारे मार्क मंडलों में मार जिस में गये हैं जिले में में इसका हमेशा सारे इंडिया के प्रथम पर हर साल ह जी ने दिया हमारे और आप ने हार से हम लोग से हम भी गोला के पास ये साल करेगे पका के आपको मैरतनसेपहलेयाद hc।
More from PRASAD

Rare Pastimes & Timeless Lessons of Guru Mahārāja | Stories Every Disciple Should Hear

ISKCON Legends- pure devotees meet-HH Jayapataka Swami, HH Gopal Krishna Goswami, HH Radhanath Swami

Jagannātha Ratha-yātrā Through Śrīla Prabhupāda's Mercy | 29 April 2006 | Nairobi, Kenya

Lord Jagannātha's Appearance Pastime | 21.07.2019 | ISKCON Calgary | Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī

The Ācārya Teaches by His Own ExampleGuṇḍicā Mārjana by Guru Mahārāja #shorts

Guṇḍicā Mārjana – Lord Jagannātha's Pastime | 21.7.2019 | ISKCON Calgary |Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī

H.H. Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī Mahārāja - Exemplary Sādhana and Deity Worship # shorts

भगवान की कृपा कैसे प्राप्त होगी ? | 11 Jan 2014 | Punjabi Bagh | Srila Gopal Krishna Goswami

Material Education vs Spiritual Education | Srila Gopal Krishna Goswami #shorts

