श्री नरसिम्हा भगवान का प्राकट्य | 29 Apr 2018 | Mayapur | Srila Gopal Krishna Goswami

In this devotional discourse recorded on 29 April 2018 in Mayapur, Srila Gopal Krishna Goswami reflects on the divine manifestation (prākṭya) of Lord Nṛsiṁha, the half‑man, half‑lion incarnation of Vishnu. He recounts scriptural narratives that illustrate how the Supreme can appear in countless forms to protect devotees, citing episodes such as the slaying of Hiranyākṣa, the protection of Prahlāda, and the compassionate intervention of the Lord in the lives of ordinary people. Interwoven with these mythic accounts are contemporary analogies—celebrity worship, materialistic hero worship, and legal disputes over deity images—to highlight the danger of mistaking external symbols for true devotion. The speaker repeatedly emphasizes the principle of niṣkāma‑bhāva (self‑less love) and the importance of bhakti‑yoga, urging listeners to cultivate inner devotion rather than external attachment. He also offers practical guidance on how to integrate the teachings of the Bhagavad‑Gītā, the value of serving the guru, and the protective grace the Lord extends to sincere devotees. Throughout, the tone remains reverent, didactic, and occasionally critical of worldly distractions, concluding with a prayer for the removal of material cravings and the deepening of divine love.
Chapters
o m gan m na माई श्री गोरे न मा, श्री चेतन्य मनोवेश मे न भूत ले स्वयम रूपा कदामयमजातिस्वापदंदि कम बंदे हम, श्री गर शीत पद कम, श्री गुरु, श्री रूपम सग्रजतम सहागनारगुनाततमसजेवम सद वेतम सब धुतम परिजन 7 कृष्ण चेतना देवम, श्री राधा कृष्णा पद सहागनाललिता, श्री विशाकानुतमश हे क्रिष्ण करुणा सिंधु दीन बंधु जगत पते गो पेशा गोपिका कंता राधे वृंदावनेश्वरी बानो सुत देवी हर कप पेपा सिंधु बचा नमो, श्री कृष्ण चेतन्या शिवा गो हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम हरे कृष्णा। अभी आने से पहले हम अंग्रेजी क्लास दे रहे थे, तो आज जैसे बहुत शुभ दिन है और आज के दिन भगवान प्रकट हुए थे किस रूप में? भगवान के रूप में? अगर आप किसी साधारण व्यक्ति को कहो हमारे भगवान, आधे पुरुष, आधे शेर के रूप में दिखते हैं, वो क्या कहेंगे देखो मूर्ख आधे शेर बन सकता है। जहां अमेरिका में नई थी तो 1 कोर्ट केस हुआ था, वो कोर्ट केस में वो दिखा रहे थे, ये जो हरे कृष्ण का सिद्धांत है, this is mitologyयेसब बोगस है, नहीं तो कोर्ट में वो लोग 1 बड़ा फोटो लेकर आये नसंगदेवभगवान का और कहने लगे my load, this is are god men hafaयनसदिसपॉसिबल। उन्होंने कहा भगवान का फोटो कोर्ट में दिखाया, अमेरिका में और सामने की पार्टी ने बोला देखो माई लोड, इसको ये भगवान मानते हैं। आधा पुरुष, आधा पशु, यह सम्भव है। manjuri ज्ञान में है, यस यस। तो भगवान अपने आप को अनेक रूपों में प्रकट कर सकते हैं। अलवेतमेचूते बना दिए अनंत रूप में और वर के रूप में, मासिया के रूप में, तो भगवान के लिए कोई कार्य सम्भव नहीं। तो भगवान क्यो प्रकट हुए भगवान के रूप में? क्यूँकी उनके भक्त ब्रह्मा ने अनेक प्रकार के दे दिए थे। हराने का शिप की इच्छा क्या थी के मुझे कभी मृत के सामने झुकना नहीं। साधारण व्यक्ति से पूछो हराने का शिप का क्या है परिचय? तो आप क्या कहोगे सूर्य भक्त भ नहीं वो भग। उन्होंने भगत का नाटक किया। क्योकि राज ने देखा कि भगवान के द्वार पर भगवान के बड़े निकट संबंध है। तो कुमराज ने कहा कि हमने गलती कर दी, इनको श्राप देकर हमें श्राप वापस लेना चाहते हैं। भगवान ने क्या कहा? मेरी इच्छा थी तुम श्राप 2 क्यूँ की मैं पकड होने वाला हूँ अपनी दिव्य लीना पकड़ करने के लिए। और इसका ये मतलब नहीं आप। 1 दुसरे को श्राप 2 भगवान के शराब 2 god तो जाए को ये छूट दी गई थी। यह 3 बार असुरों के रूप में जन्म ले सकते हो या 7 बार भक्त के रूप में आ जाय। वेजे की इच्छा क्या थी? जल्दी से जल्दी भगवान के दाम लौटना। ये भी तो हो ने स्वीकार किया की हम मशहूर बन जायेंगे। जब हिरानी क्षा का वध हुआ वन के हाथों के द्वारा, तो हिरानी, काशीपुर की माँ, भाभी और भतीजे सब शोक में थे, या की मृत्यु हो गई, माँ बहुत उदास थी, उनकी भाभी उदास थी। फिर हान काशीपुर व गए। काशीपुर ने सिद्धांत सुनाया उन्होंने कहा आप क्यों रो रहे हो? दिमागों का, भाविको का उदास क्यों हो रहे हो? हम सब थोड़े समय के लिए जुड़ते हैं और फिर जुदा हो जाते हैं। और गाने का ने 1 उदाहरण दिया। जैसे 1 रेस में हम सब थोड़ी देर के लिए बैठते हैं, सब अलग अलग स्थान में चले जाते हैं। फिर यहाँ ने कहा हम सब 2 दिन के साथी है ानेकाीफुनहै गीता का जो दूसरा दिया है उसका सिद्धांत दिया। गीता के दुसरे में भगवान शिक्षा देते हैं, जयते या जन्म आत्मा का जन्म होता है। ये सिद्धांत सुनाया किसको अपने भावी माता, भाबी और उन्होंने आगे 1 और कथा सुनाई। 1 राजा था जिसका नाम था मारा, जो युद्ध में मारे गए थे। तो अक्सर नियम ये है की मान लो शाम के समय किसी का ध्यान तो तो अंतिम संस्कार सुबह तक कर देना चाहिए। अगर सुबह मे हो तो शाम तक अंतिम संस्कार हो जाना चाहिए। पर ये जो राजा था इसकी पत्तियां शरीर को अंतिम संस्कार के लिए नहीं जाने दे रही थी, शरीर को पकड़ लिया था, रो रहे थे, वो इतनी जोर से रो रहे थे। क्योंकि जो रोने की आवाज थी वो याम राज के पास पहुँच गए। देव देवताओं के लोगों में यामराजनेएक छोटे बच्चे का रूप ग्रहण किया, छोटे बच्चे तो हर जगह पहुँच जाते हैं। और यामराज ने कहा देखो ये और थे, इतना रो रही है क्यूंकि उनके पति का देहांत हो गया। वो ये सोचती है की हमारे रोने से पति जीवित हो जायेगा तो वो ये नहीं जानते कि उनका जीवन भी तेजी के साथ बीत रहा है। और भैया ने ने 1 और कथा सुनाई 1 समय 1 पक्षी था, पत्नी बच्चों के साथ 1 शिकारी आया होता है। शिकारी बड़े कठोर दिल का था, वो छिड़ी पक्षियों का दुश्मन था, शिकारी ने खाना फेंका, जब पत्नी पक्षी खाने गई, उसे गोली से मार दिया, व अपनी नेट जाल में फंसा लिया। तो जो पक्षी था वो कहने लगा अरे मेरी प्रिय पत्नी मेरे सामने खड़ी है मैं उसको बचा नहीं सकता। और ये सोचते सोचते वो भी फंस गया। तो ये कथा सुनाई। यह बताने के लिए शो करने की कोई आवश्यकता नहीं, हमें ये देख लेना चाहिए। हमारा जीवन भी तेजी से बीत रहा है। का सिद्धांत सुनने के पश्चात, उनकी माता, भाभी और बच्चे आपका अनुभव होगा। कई बार आप इसके भक्तों को निमंतन देते हैं। यहाँ किसी का देहांत हो जाए तो जब जाते हो सब रो रहे हैं, फिर आप प्रचार करते हो दूसरे अध्याय से कम हो जाता है। इसी प्रकार से प्रचार कर तो प्रदात महाराज। भौतिक संसार में हम सब अलग अलग हीरो बनाते हैं। किसी का हीरो है कोई फिल्मी कलाकार, किसी का हीरो है कोई क्रिकेट स्टार। आज कल आपने देखा है इंडिया में युवक हैं, दाढ़ी रखते हैं, हमने देखा नया फैशन तो आपको पता हे फैशन कैसे शुरू हुआ। हमारे क्रिकेट खिलाड़ियों ने दाढ़ी रखना शुरू किया तो क्रिकेट खिलाड़ी ने दाढ़ी रखना शुरू किया। तो हमारे युवकों ने भी शुरू कर दिया। तो भौतिक संसार में हम क्रिकेट स्टार को देवता मानते हैं। फिल्मी कलाकार को, पॉप सिंगर को और जो भक्त हैं, उनके हीरो कौन हैं प्रलाद मराज ध्रुबराज चेतन्य। महाप्रभु जब अपने भक्तों के साथ अध्यात्म चर्चा करते थे तो अक्सर उनका विषय था मा की शिक्षा, प्रधान महाराज शिक्षा में, जीवन में आप क्या देखते हो? जैसे महाराज आपको सुना रहे थे। प्रभात को, अनेक प्रकार के कष्टों को, सेना पर पहाड़ की चोटियों से बेखर झेल, खिलाया झेल, सांपो ने घेरा तो जब भी लाल घबराई नहीं, वो केवल भगवान का चिंतन कर रहे थे। अमर राज ने कहा है कृष्ण अमरीश मराज को भी कठिन स्थिति में थे, वो भगवान का चिंतन कर रहे थे। और भगवत हमें 1 और उदाहरण पड़ते हो। पांचवें स्कंद में जद भारत का जल, भारत 1 समय डाकू लोग थे, उनका अर्पण करने लगे थे के जज भारत घबराए नहीं, भगवान का चिंतन करते गये। क्या हुआ? भगवान ने अपने भक्त की रक्षा की और उस डाकू थे, उनको काट दिया। भगवान अपने भक्तों की रक्षा करते है। प्रलाद भगवान के द्वारा हिराने हुआ। और महाराज ने यही सब डीला सुनाई थी। आपको उसके पश्चात भगवान ने प्रधान से कहा प्राज मेरे कारण तुम्हे इतना कष्ट अनुभव करना पड़ा था। मांगो मेरे से क्या वर चाहिए, ला दे क्या का आप मुझे आकर्षित मत करो। मैं आप से कोई वर मांगना चाहता। और आगे उन्होंने कहा जो सेवक सेवा करता है। इस उम्मीद के साथ कि के बदले में मुझे लाभ मिलेगा। वो कौन है वह पारी अब दुकान में जाते हो, पैसा देते हो। और जो स्वामी अपने शिष्य को, भक्त को ज्ञान देता है। इस भावना के साथ किस के बदले में मुझे कोई लाभ प्राप्त होगा। वो असली स्वामी। तो राज ने कहा मुझे आपसे कुछ नहीं चाहिए, मैं सदा आपका सेवक रहना चाहता हूँ कि निस्काम मुक्ति श्री कामी सकाली अशंता जो की निष्काम भाव से जुडेगा, वह हमेशा शांत रहेगा, जो की इस भाव से जुड़ता है। इसके बदले में मुझे ये लाभ मिलना चाहिए, ये लाभ मिलना चाहिए, ये लाभ मिलना चाहिए। वो सदा शान रहेगा। तो अंतर्राष्ट्रीय कृष्ण भावना संघ के द्वारा हमें निष्काम भाव की शिक्षा दी जाती है। और फिर आगे प्रलाद ने कहा अगर आप मुझे कोई वर देना चाहते हो तो सा वर दीजिये कि मेरे सारा भौतिक आकर्षण मेरे हृदय से सारा भौतिक आकर्षण जाए। तो आज के शुभ अवसर पर हम सब भगवान ऐसी क्या प्रार्थना कर सकते हैं। हम सब का भुत न् हो जाए तो हम कितने भक्त हो। जिनकी इच्छा है की हे ऐसी नष्ट हो जाए। कई बार लोग पूछते हैं बहुत कार्य छोड़ेंगे तो आनंद कहाँ से आएगा? राजा ने कहा लोग यह नहीं जानते की असली आनंद कहाँ से आएगा, माज का क्या उद्देश्य है। निष्काम भाव से। राज ने भगवान से कहा मेरे पिता असुर थे, मेरे पिता ने हर रूप से प्रयास किया मुझे कर्ज देने का, पर आपने मेरी रक्षा की, पर मैं आपसे 1 भीख मांगना चाहता हूँ की आप मेरे पिता का उद्धार कर। 2 वैसे तो उतार हो रहा था। क्यूँकि हिलाने का शिव का पद भगवान की गोद में हुआ। उनके नखरों के द्वारा। प्रदात ने जब भी कहा, मेरे पिता ने अनेक प्रकार के गलत कार्य किए और उनको उद्धार कर। 2 तो भगवान ने क्या कहा प्रदार, तुम्हारे यह कहने की कोई आवश्यकता नहीं। तुम्हारी 21 पीडी तक सबका उधार हो गया है। तो इससे आपको क्या शिक्षा मिलती है? जब आप कृष्ण भक्ति में जुडते हो तो इसके द्वारा आप अपने माँ, बाप, भाई, बहन, रिश्तेदार सबके लिए सबसे उत्तम कार्य कर रहे हो। कभी कभी जब कोई भक्ति में जोड़ता है, माँ बाप कहते हैं हमारा खाना नष्ट हो गया भघबलगया। तुम तो पहले अच्छे थे, बीड़ी पीते थे, जाते थे, भक्ति में जुड़ गए हो। वो ये नहीं जानते की आपकी भक्ति के द्वारा उनको क्या पूरा ये है भक्ति के शक। तो प्रधान महराज का उपदेश बहुत महत्वपूर्ण है। प्रधान राज ने कहा मान लो अगर 1 व्यक्ति सौ साल भी जी, आज तो सौ साल जीना भी असंभव है। बहुत कम लोग सौ साल भी जीते हैं। तो आधा जीवन तो भौतिक वादी का जुड जाता है। सोने में पहले 20 साल बीत जाते हैं, खेलने कूदने में, वे अंतिम 20 साल बीत जाते हैं। पेपर में, ये देखो, आज ये बीमारी है, कल? कौन सी बीमारी हो, डॉक्टर दर्शन बढ़ जाता है। तो वो ने क्या कहा, कितना समय बचा। उन्होंने 5 साल की आयु से ध्यान विज्ञान अनुकुल करना थे। los angeles me to papa ne ha a fait lotnsingedeve after killing heaneasipopetol ba ma डोंट गेट डोंट गिव सच bendecsonanfutur यू मेड मई जॉब बड़ी हार्ड, भगवान ने, हम पापा जी ने हँसते हुए। लेक्चर ने कहा कि हिरानी का, शिव का वध करने के पश्चात भगवान सगदेव ब्रह्मा को क्या कहा? ऐसा वर भविष्य में मत देना। तुमने मेरा कार्य बहुत कठिन बना दिया था। क्योंकि ब्रह्मा ने हर प्रकार का मुझे न दिन में, रात में मरना है सब प्रकार का। तो भगवान जो हैं अपने भक्त, ब्रह्मा के सारे बालों का उन्होंने पालन किया। तो भगवान जो हैं अपने भक्तों के वचन का पालन करते हैं। नरेंद्र मोदी ने कुबेर के को दिया था सौ साल तक क्या बन जाओगे फिर। और उसके पश्चात में भगवान का दर्शन भी मिलेगा। जब भगवान को उनकी माता ने बांधा था, भगवान को, याद था मेरे भक्त याद है, मुनि ने ये कहा है के बने क्या क्या, भगवान ने ऊखल को खींचा, दोनों पेड़ों से निकाले कौन भगवान का, तो हम सबको महराज के उदाहरण, ऐसे डिटर्मिनेशन, ये दिल भाव आना। इस साथ समाप्ति में शुक्र को स्वामी कहते हैं कि जो व्यक्ति ध्यान से प्रधान, महराज की लीला सुनेगा, जो ध्यान से सुनेगा, किस प्रकार भगवान प्रकट हुए दलसिंगरदेवके रूप में, तो उसके हृदय में भगवत प्रेम की भावना बढ़े जो बहुत। तो हम भक्तों को इस विषय में रूचि लेनी चाहिए। और हमें क्या करना चाहिए? कृष्ण कथा में रूचि लेनी, कृष्ण कथा में रूचि लोगे, रूची घटेगी में रूची नहीं लोगे। तो और ये जो आध्यात्मिक विषय है, इसको आप दिन रात भी सुनोगे शुकदेव भगवान की लीला सुनते हो तो राज महराज फाइनल। तो प्रदान महाराज के भाव से हम क्या देखते हैं? प्रदान भाव ने कहा हे भगवान, मुझे अपनी मुक्ति की चिंता नहीं है, मैं तो पहाड़ों में नहीं जाना चाहता, जंगल में नहीं जाना चाहता, क्या चाहते हो? मैं रहना चाहता हूँ जहाँ की आपके पतितों का उधार हो तो प्रधान राज। उनके पिता ने उनको कितनी भारी सजा दी। जब पिता ने देखा ओह मेरे बेटे के प्रचार से ये जो सुर बच्चे हैं, ये भक्त बन रहे हैं को गुस्सा आया। पिता ने कहा मेरा बेटा सबको विश्णु का भग बनाना है तो उसको सजा मिलनी चाहिए। तो प्रधान का भाव क्या था? पतितों का उधार और वहाँ प्रलालमाजकेउफतार थे वह लेबर। तो हमारे में यह भाव होना चाहिए। जब आप प्रचार करते हो, सब प्रचार करते हो, सब लोक डिस्ट्रीब्यूशन करते हो, सब कई लोग सोचते हैं ये बुक डिस्ट्रीब्यूश ग्रंथ का वेतन केवल ब्रह्मचारी के लिए है के लिए नहीं नहीं ये जो प्रचार की सेवा है सबके लिए है, सबको कृपा चाहिए या नहीं चाहिए इसे ब्रह्माचारी लोगो को कृपा चाहिए। तो हम ने देखा है हमारे जो भक्त हैं वो भी बहुत प्रचार कर सकते है। तो हम सब में यह भाव होना चाहिए। जब देखो किस प्रकार भौतिक वादी व्यक्ति दुख की स्थिति को शो किसी बनाने का प्रयास कर रहे हैं तो हमें दुःख होना चाहिए। जैसे की आज के जमाने में आपके बाल सफ़ेद हो रहे हैं तो वो आपके बाल को रन कर देंगे, थोड़ा जवान देखोगे आपकी चीक अन्दर है तो मेक अप कर देंगे। आप थोड़ा जवान आपको सुनने की योग्यता नहीं है, भले हो हो जाएगा चश्मा पहनना अच्छा नहीं लगता तो आप कॉन्टैक्ट लेंस पहनते। तो आजकल के भौतिक समाज में दुख को हम छुपाने का प्रयास करते है और अगर हमें असली सुख तो क्या है यह कृष्ण भक्ति 1 उपाय है। तो आप सब जो की यहाँ उपस्थित हो जिन्होंने भक्ति योग की शिक्षा को स्वीकार किया है। हम राज्य से दिर धोकर विद टर्मिनेशन सेवा में जुड़ना चाहिए और जुड़ोगे तो सफलता प्राप्त करोगे। प्रापा जी कहते थे यू टेक वन स्टेप क्रिश्ना टेक टेन स्टेप तुम 1 कदम उठाओ भगवान की तरह भगवान 10 तो हमें यही प्रार्थना करनी चाहिए भगवान से हमारा बहुतिक आकर्षण नष्ट हो और हम निर होकर भगवान की सेवा में जुड़े पलाधआजकीनसदेव। भगवान की बहुत लाल बाल रे।
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