In this Hindi devotional lecture, Srila Gopal Krishna Goswami recounts the Govardhan Leela as described in the Bhagavata Purana. He narrates how Lord Krishna, observing the plight of the farmers of Vrindavan, persuaded them to worship the Govardhan Hill instead of the rain‑god Indra. When Indra, angered, sent a massive deluge, Krishna lifted the entire Govardhan Hill with his little finger, providing shelter to the villagers, cattle, and crops for seven days. The speaker emphasizes the moral lessons of the episode: the supremacy of divine grace over material reliance, the importance of sincere devotion (bhakti) over ritualistic worship, and the futility of seeking security through worldly means. He draws parallels to contemporary concerns such as water scarcity and the dependence of farmers on divine mercy, urging listeners to place their trust in God’s compassion. The lecture interweaves scriptural references, symbolic interpretations of the hill, and practical advice for cultivating humility and devotion in daily life.
Chapters
भगवान की लीला भगवान के दोनो के पार है तो परम भगवान है धरमवीर साहब में में अब भगवान की अदभुत मिलाओ के विषय में ज्ञान प्राप्त करते हैं। पापाजी की पालने की इच्छा थी की लोगों को प्रमाणिक देश दिया जाए। इसलिए वो मेरा पहुँचे वाला आरम्भ किया जो की है कृशणबुरकेद्वारा तो राय किसान थे, उनके पास 2 बार गाय थी और गायों में कई गायें थी जो की सुलगन आज के में सुगंध डालना चाहे को अलग में डालना पड़ता और वो समय जो खुद ही ने घास खिलाया जाता है और दूर निकल तो की तैयारी कर रे थे। ये है हिंदू भगवान की पसंद ने देवताओं और अलग अलग देवता के पास अलग अलग जारी सौपी गयी है। वर्षा के देता है। इन जी में भगवान कहते है आम की प्राप्ति होती है, वर्षा के कारण वर्षा की प्राप्ति होती है। कब आज समाज में पानी की कमी है। कू छोड़ दिया भगवान जी? तो भगवान ने देखा उनके पिता किसान ये की तैयारी करने है और भगवान जब देखते है यहाँ माना जाता है गौर की हम कितनी सुभावशालीभरते है। भगवान से की हो जाते हैं। इसलिए दिया है क्या लोग जीरे है। मेरे चुप के कारण। भगवान चाहते थे। मन टूटे तो ने पूछा पिता तुम क्या कर रहे हो? ये की तैयारी किसी पिता ने जवाब दे दिया। पिता ने सोचा ये छोटा बेटा क्या समझ पाएगा और फिर फिर से पूछा फिर भी उत्तर नहीं मित्र से कोई उपाया नहीं जाता है। अब बताइए क्या है ये तैयारी किस ले कर रहे हो? भला किसके ले बना रहे हो और गो। इन में हम सब किसान हैं, हमारी सफलता निर्भर है। जिंदगी कृपा के ऊपर किसान निर्भर हैं। वर्षा पर बारिश नहीं आएगी तो फसल गल समय में बारिश आ जाए। वो भी खतरनाक है। तो हम किसान हैं? इन की कृपा से ही जल की प्राप्ति होगी और उसके आधार पर ही कार्य की कोई आवश्यकता नहीं आपके। कर्मों के अनुसार सुख दुख लिखा है, उदा को प्राप्त हो जाएगी तो हमारी भी होती है, कोई आवश्यक नहीं है। यह है भूल। 2 किसे किसे राम को, गाय माता को और घोल पर्वत को गोलन पर्वत भगवान में कोई अंतर नहीं दी और कुछ न समे। गोलन पर्वत था, उसकी इतनी ऊँचाई थी आकाश तक। आज गोलन परोस को देखते हो। वही सरलता से ये छोटा हो गया है, छोटा होने जा रहा है। और 5000 साल पूर्व इतना ऊँचा था की ऊँचाई कहाँ तक पहुँच गयी थी। आकाश तक आकाश को छूती थी। तुम ने कहा ये तिहार किया किसको 2 भावना को, गाय वादा को बेटे के कहने पर किया और सलाना यज्ञ जो किया जाता था। हर साल आज लेदवासियों में इतना मान गया है। तुम भूल गए है, सोचते है छोटे लड़के उन्होंने मुझे सबक सिखाने। 2 सबक सबक सिखा में क्या क्या जाओ। ब्रज के ऊपर वर्षा को घेरना चाहिए, सब डुबा हो। बड़ा भयंकर खतरनाक विचार था सब को डुबा, 2 का भी बिल को डुबा देंगे। जो भक्त है सुकर उसका 1 ही रहता है। और कौन है वो पर हम भगवान को सुख प्राप्त हो तो भगवान की असीम कृपा से प्राप्त हो रहा है। बहुत दिवाली सोचेगा रे मेरे परिजन का परिक्राम है, भग सोचता है, भगवान की असीम कृपा है। ये सफलता प्राप्त हुई है। अगर कोई कैश आ क्या सोचता है। मुझे तो और गहरा कष्ट आना चाहिए था, पर भगवान जी के पास बहुत कम संख्या में प्राप्त हो। समुद्र का बादल आये, तुम आगे जाओ, तुम्हारे पीछे, ये वादा के ऊपर बैठ कर आता हूँ बैठकर यात्रा करते थे, इतनी घबरा गए, भगवान के चेहरे पर देखने लगे, भगवान समझ गये, क्या वो धन परबत उठा दिया। जब आप वजन उठाते हो, 2 हाथ से उठाते हो, कई बार हो। और ये तेजी से गिर रही थी। भगवान उनके मन में सदा 1 ही भाग रहा था। माँ की प्रशंसा उचित है बड़े भगाओ मैं दुसरकी सुरक्षा का मन में घोलने महान पर्वत को वाया के छोटी उगली के नाक पर देख रहे थे, मा ने कहा सब वाले गोपिया सब ये छाता के अंदर आ जाओ, छोटा ज्यादा रही है, बहुत बड़ा जादा। सारे डर था के ये पहाड़ गिर न जाए। आखिर भगवान की आयु क्या थी, भगवान घबराओ माँ ये ये बर्बर मेरे हाथों से नहीं गिरेगा बड़ी तेजी से बारिश बारिश थी, बहुत तेजी से और भगवान के द्वारा जैसे ही बारिश गिरती थी, भगवान उसे 1 मिनट में सुखा देते थे जैसे आप कटका ले गए, फर्श को साफ़ करते हो बारिश बरस रही है और जैसे ही छुरी भी भगवान उसे सुखा देती है। और 7 दिन के लिए लगातार इंदर ने समुद्र बादलों के माध्यम से वर्षा भेजी और 1 बूद पानी भी भगवान तुरंत सुख देते थे ने स्वीकार किया की मेरी योजना सफल नहीं हुई है। और 7 दिन के लिए जब कि छाता के नीचे थे, सारे बिल बाजी भगवान के मधुर चेहरे को देख रहे थे और क्यूंकी वो भगवान के चेहरे को देख रहे थे। उन्हें न भूख लगी, न प्यास लगे या कोई तुकावनमिलीक हाँ मगर 2 दिन घंटे खड़े हो जाओ, थक जाते है या नहीं, हाँ या ना से योगी भी बन जाओ। अभी 45 महीने में थक जाओगे। ये बाजी 7 दिन 7 खड़े थे और पवार के चेहरे को देख रहे थे। इसके कारण न न भूख लगी, न प्यास लगी, न किसी प्रकार की थकावट मसूस है। इससे हमें 1 सन्देश मिलता है। समाज में हम सब भूखे हैं और प्याज से है किसके लिए हमें बहुत 1 सुख चाहिए, हमें इंडिया सिटी की सुविधा चाहिए, सोते हैं यह अगले कदम वस्तु प्राप्त हो जाए तो हम संतोष होगा और चाहे आपको कितनी भी समता प्राप्त हो जाए, चाहे आप बच्चों के सबसे धनी सेल भी बन जाओ, चाहे आप भी डायमंड का सबसे बड़ी पारी में मत जाओ, आप अपने आप को बहुत के द्वारा कभी नहीं कर पाओगे। तो उसी प्रकार अगर हम भगवान का उच्चारण करे तो हम भी बहुत ही भूख, बहुत ही त्याग, बहुत ही थकावट से बच सके। इंद्र ने देखा की योजना असफल हुई है और वे इंद्र ने क्या किया। शराबी गाय के साथ फृथीपरआयगेदूरसी इसी भगवत में कहा गया है यही 2000 पर्वत भगवान के रूप में मनेगा मैं हूँ गोवरधन मेरे गोदान में कोई अंतर नहीं। इसलिए के महाप्रभु ने हमें शिक्षा दी है की हमे किसी हालत में पत्थर पर पानी रखना चाहिए, कभी पानी रखते थे और भगवान में भाग है ये आज कम करके आई हो। भगवान की अलेमी 1 दिया है 2000 मिला और भौतिवादी को कहोगे भगवान ने ये महान पेड़ को उठाया, परवल को उठाया छोड़ी देखो उठा सकता है। इतने बड़े पर्वत को भगवान के नाम में गाँव में किया की वो उनका भगवान जो से 1 गुण है क्या 1 गुण में क्या है भगवान तो आप गिर राज पूजा करते है, राज है भगवान में कोई अंतर नहीं ये मत सोचो इधर सादा पत्थर है यह भगवान के रूप में और भगवान भी हमने आप लोग को की कथा वो भी संक्षेप में सुनाया है। भागवत में यह तथा द्वारा की रचना की गयी है। मैं केवल साल रुपमें प्रस्तुत किया करिहा। हारे हह हा ले।