भक्ति मार्ग में सफलता के 3 रहस्य | SB 3.27.5 | 2 July 2022 | Mira Road | Śrīla Gopāl Kṛṣṇa Goswāmī

Śrīla Gopāl Kṛṣṇa Goswāmī teaches three secrets for progress in devotion: pure selfless devotion to Krishna, constant association with a guru and fellow devotees, and regularly hearing and chanting Krishna's names. The speaker stresses controlling the mind and ego through sincere service and humility.
Chapters
hi krishna svr
god
god gराwd om n momeasemme i was on the bord आता एवम साने पीतम सम शतम पाती भक्ति गीना tiranaga asam i want to on light bktigina ta sa ti n na निय si
धीरेधीरे मनcेतनावसतत असताबतिलोगोकेपकी
योग
से रेल अत्यंत गंदे बिना आसंदी के चला नए बहुत लादे बस बसने वाले रुका जी के द्वारा छ जीवन का कर्तव्य है कि बहुत सुख सुखों के प्रति सब अपनी विशेष चेतना को अत्यंत गंभीर भर्ती में लगा दे। इस प्रकार उसका मन पता चेतना पूरी तरह में हो जाए। पर इस लोक में पी पी डी अति नहीं से समझाई गई है। प्रकृति द्वारा अदा किए जाने का कारण मनुश्य का यह सोचना है कि बाद स्वयं होगा। करता या समस्त जीवों का यह नित्य विचार रोग के चिंतन का परिणाम जबमनेश्यरयह सोचता है कि बात देश, समाज या किसी या मानवता का सको मित्र है और सब 2 राष्ट्रीय जुटती एवं भरमातवालीकारयों ने अपने को लगता है तो यह सब मात्र के प्रति अधिक एकान्त है। ऐसा सरकार के राष्ट्रीय देवता या नान वादी सब की सेवा नहीं करता। कि जो की सेवा है, यह है कि तुबद्य्चीइसे नहीं समझ पाता। क्यूंकि प्रकृति के मायाजाल से रस में संस्तुति की गई है कि मनुष्य भगवान की सेवा न करे। सा हुआ कि मनुष्य अपने को विदेशी यह लोग न समझे। इसके सभी इसका भान होना चाहिए कि वाजदी को भगवान कृष्ण ने यही भक्ति काम कर। मनुष्य को इन इन किसानों के प्रति पूर्ण रूप स से आज वो जाना चाहिए। किशनसकॉमीविशनों होता है और कुछ ही मंत्र है। इसे इन सिद्धांतों को मंतिवकोसबझना चाहिए चाहिए कि अन्यों को विश्वास दिला दे और क्रृश्णबंधीका? जैसे ही मनुष्य अपने को वनुमान की ऐसी गंभीर बस्ती में लगा लेता है, बी के ऊपर जरूरी ही स्वामिक दिखाने के निचे स्वाभाविक रूप से हो जाता है, जाती है। यह अनासबतीहोरातजब कह जाती है। बहुत ही सोम पर में ही रहने की जाए। जब मनुष्य उस संमत्ति में लगाया जाता है, लग जाता है तो यह योजना चुका नियंत्रण है। जो विवि मे इंदियों आवश्यक है, जो इंद्रिय, क्योंकि इंद्रियो सदर सक्रिय रहता है, अगर ही जीत सके आपको भगवान की सेवा में लगाना चाहिए। क्योंकि मनुश्य की सक्रियता तो रोक नहीं सकता। यदि किसी भी ढंग से कोई उनकी सत्यता को रोकना चाहे तो प्रयास असफल रहता है। नाम तक की परम योगी का मित्र तो अपनी विंतियों को 2 से बस में करने का प्रयत्न का प्रयत्न कर रहे थे। मना के सौंदे ये शिकार हो गए। ऐसे ही अनेक उदाहरण हैं। जब तक मनुष्य का मन तथा चेतना भक्ति में पूरी तरह संदमन नहीं होता, तब तक मन के इन वृत्ति की कामनाओं में लगे रहने की संभावना बन रही है। इस रूप में यह अत्यंत महत्वपूर्ण बात इंगित की गई है। यहाँ यह है कि सतत सान प्रगति मनसे, असल, अर्थात सहित संस्थान में अनुरध है। क्यूंकि हम अनादिकाल से प्रकृति के संघर्ष, प्रकृति के संघर्ष में रहे हैं? अत हम इस जन प्रकृति के प्रति अनुरध आगेो श्वर के जन स्टेट करना होगा। सर बड़े मन वश मनुष्य को विश्व के जन में रना होता है। अभी सब कुछ की हो े इस तरह को
me gan janana smsignam सरेksणaisare s, n pati to s को आप भगवदम के किस स्कनमेंप्राप्त करते हो? discal wllvtlजोbeta किस उनके बहू को पता था कि मेरा बेटा भगवान कसा और इसलिए उन्होंने उनसे ने प्रश्न पूछा। अगर हमें प्रश्न पूछना काम पूछना चाहिए जो भगत अल्पज्ञानी है। 1 बार स्वयं या देने की। आप किसी को भी पकड़कर से किया। इसी प्रकार भागवत में आप पढते प्रश्न उत्तर क्वेश्चन। आंसर भगवान के भक्त प्रश्न पूछते हैं? भगवान उत्तर देते है। क्योंकि बयान भगवान के द्वारा प्राप्त हो रहा वहाँ हमारी पूरी श्रद्धा है। या तो यहाँ क्या कहा जा रहा ह ने पिछले 3 ध्याय पूछा प्रश्न। उन्होंने कहा कि मेरे मुझे ज्ञान दीजिए, जिसके द्वारा यह बहुत हि, आकर्षण न झा। श्रीवर द्वारा शुद्ध भक्ति का ज्ञान प्रावधान और शुल् बक्की 1 उपाय है जिसके द्वारा आप जीवन के लक्ष्य को प्राप्त कर और देव से बेटे ने पूछा। माँ ने बेटे से पूछा तुम मेरे अज्ञानता को दूर करो। मां बेटे से पू। बेटी ने कहा कि यह भक्ति योग का पालन करोगे। भक्तों के संग में बहुत से है और समान है। तो बिल भगवान और हर दिन ज्ञान दे रहे हैं। श्रीमन भगवत प्रथम स्कंध से लेकर बारहवें स्कंध तक, आप किस विषय की चर्चा सुनते हो? शुद्ध भक्ति ही शुद्ध भक्ति शुद्ध भक्ति का अर्थ के निश्काम भाव से सेवा मिजोकृष्णबक्तनेस काम उकतीबुदधिसीधीगामी। भगवान कृष्ण के जो भगत हैं, खास करके 19 काम भाव से सेवा कर रहे हैं। सदा शांत रहेंगे और जो की बौधिक इच्छा को भी पूरा करना चाहते हैं। सदा शांत है। तो भगवान के पीरा ने कहा मा। अब भक्तियों के लिए। माता ने आगे पूछा भक्तियों को कैसे किया जाए? का का पालन होता है कैसे? कैसे भक्तों के संग में रहेगा? साधु संगत साल हमारे साधु भक्तों की संगत में रहने के लिए और कपिरदेभगवानकहते हैं? भक्तों की संगत में रहोगे तो भक्ति क्या होगा? हो जाएगा। आपका अनुभव होगा कि जब आप भक्तों की संगत में रहते हैं, वो भक्त सा हो जाता। और अगर आप भक्तों से जुदा रहो तो आप बेचैन हो जाते हैं, निराश हो जाते है। तो यहाँ तो भक्तों के संग मे भक्ति की विधि को तो आगे के अध्याय में यह से बार बार आप भगवत संधि देते हो। तो वो पूछ आप लोग 1 ही विषय की चर्चा रोज, आपके पास टी नहीं मान। उत्तर क्या है? कहते हैं reपiटiशonreपिटेशन सरी to d्ैवlपॉntoकविcय में बिठाना बार बार, इसलिए कहा गया ध्यान से हर रोज सुनोगे तो क्या होगा? तो यह हर व्यक्ति का कर्तव्य यह है कि ऐसे कार्य में जुड़े जिसके द्वारा peas dur ho ye smv भोती ने पूछा तो क्या कहा? भक्तों के संग में भक्ति करोगे। तो आप भक्ति योग में आगे बढ क? और उन्नत भक्तों की संगत में रहोगे तो क्या आपको असली ज्ञान मिलेगा? बड़ी गैरी उठा। तो भगवान ने कहा mere कarntuesaaनभकत की रहेंगे तो यामी ज्ञान बढ़ेगा उसे ज्ञान करे। तो यह है हर जीव आत्मा का कर्तव्य क्या है कि वो शूर्भभक्ति में जुड़े और भक्तियों का पालन करे। विराग और मन और चेता को पूरा वर्ष बना। मन जो है आपका शत्रु भी बन सकता है। और shatru the main friend, जब मन भगवान के आदेश के अनुसार कार्य करता है, मन है और शत्रु से मन, तो यहाँ कहा जा रहा है कि उस व्यक्ति का मन पहुंचे पूरा हमें बस बनाना है। भक्तियों के मार्ग में मन बोलेनिया को सुधाना, bctioकीmdमeमनमुिय को शिल बनाना, bctiganopurpotiicaton बनाने का प्रयास कर रहे ह। मारे जो जो बता उसे हम मुक्त होना चाहते हैं। तो हमें क्या करना है? चेतना को स्कूल बनाना है, इसलिए मां ने है और गैरी a a a a a var man can importent so, we have to put a consens, how you do that? आप ने 2 दिन पहले गुनiजमारजनकिया था, किया था सबने gnicाराजाइंदर पत्नी का नाम, तो गुणी मार्जन में भक्त को क्या निर्णय किया इस मंदर को हमने cetnmaocodप्रयास थे, वो खुद है, गंदगी है उसे जोड़ दे थे और चेतन मा अलग अलग वक्त के पास जाते थे, देखते थे कितना कचरा इसे जोड़ा है और क्या देखा गया है। i ma खेले,
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कम था मा मा भगु हर भग के बस गये, देखा कितना कचरा खट्टा किया, जब वो देखते थे कि किसी ने सेवा ठीक नहीं किया। जो व्यक्ति जो भाग सर सफल हुए थे, कहते थे क्या इनको दिखा, क्या, क्या, जो घटना, मूल उद्देश्य क्या था स, hi fi buka तो आपको चाहे कितना भी अच्छा परेशा आएगा भक्ति की महिमा, हर नाम महिमा, शास्त्री महिमा, कैसे प्रशंसा, प्रशंसा, सफल जब होगी, क्या य प्रयास से है, फिर भगवान को और गहराई से समझ के रूप भी कहते हैं। भगवान के जो नाम है, चीनी जैसे मीठे है, भगवान के जो गुण हैं, चीनी जैसे मीठे है, भगवान की जो लीला है, वो भी मिली है। ganne भगु कब दिया था 5 साल पहले, भगवान ने कहा शिष्ट निर्माण हो, जो मैंने किया, जितना प्राचीन ज्ञान हम आज भी पढ़ रहे हैं। या तो यहां कहा जा रहा है हर व्यक्ति का कर्तव्य क्या है? वो अभी बहुत कूल डूड को ये कैसे संभव हो सकता है? भक्ति की नीमा प्रभा जी, कहरहे व्यक्ति को 3 भावों का विचार करना चाहिए। 1 है 1 है कि हमारे हृदय धीर भाव होना चाहिए कि कृष्ण भगवान कौन है, असली में है, भगवान क्या है? अगर आप भक्त भगवान का जी के वामी है। अगर आप यह स्वीकार कर परम भगवान जी के सवामी क्या क्या? हम भगवान से जुड़े तो हमे क्या भगवान रे हैं? रोमान है, असली भोगता है और हमारे असली मित्र हैं। असली मित्र कौन है बाजी yorevrevrwelvis vis मैं हू, मैं जानता हूँ कि तुम्हारे लिए क्या क्या है माता। पर ये जो सत्य है, इसे तो यहाँ कहा जा रहा है कि जो भक्त है, उसे यह समझना चाहिए क्या? कृपया भगवान की ग ये नहीं कि आप का है, ये तो भगवान है। पर इस्तेमाल करो विरोध के कार्य। तो अगर आप विश्वास करोगे, पर भगवान जी मुक्त हैं, फिर आपकी इच्छा होती है कि हर कार्य का उपयोग किया जाए। इसलिए वन सेवा में, भगवान की सेवा में कार्य करोगे। तो यहाँ भक्ति के सिद्धांत क्या हैं कि भगवान जो हैं असली भक्त है और परम भगवान का चिंतन करो। भगवान ने कहा क्या करो? चिंतन करना कठिन है कि थोड़ा कठिन है, पर प्रयास करोगे तो सवाल हो जाता। तो an a, a, a a क्या करो कि बुर हो भारी बारिश में भी और कोई काम तो भगवान के भक्त अनेक जो 1 राजा थे, जो राजा थे, पर धार्मिक राजा थे और a bae a मे नहीं दर्शन। task e e, sunयasiomुझे, se dur, e ink hide me,
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e chehra, bilo puri तो हर रात के साथ साथ के हर 2 तुम अंदाजा लगा सकते हो कि तना ऊंचा जोर से तो चेतन साल के करते थे और अपने अनेक लीला को पकड़े devi देवी लीला केवल भगवान के भगत और big data on the a raja, the urja आजकल जो हमारे राजनीतिक नेता हैं, में कोई भक्ति भाव होता है, भाव होता लूटो प्राचीन समय में जो राजनीतिक कार्य करते थे, उनकी क्या तो देर में साथ के धरमनडियमें साल के, दरमननीखोती साल के naca ा के इच्छा के अधीन दे मैं आपको का दर्शन। कुछ ही देर एसभकोfुवilaदीजिसके द्वारा महा पू की मधुर लीला का दर्शन प्राप्त और ये दर्शन call sat a
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puja puja पूजा ने व्रत यात्रा शुरू होने से पहले पूरे रास्ते को या के धोया धोया और खुद और ये राजा सड़क साफ कर रहा है जंग राज्य की प्रशंसा के लिए भगवान हो और उन्होंने 1 खास जिसके द्वारा क्या के द्वारा, उन्हें तो भगवान की भगवान का परम पर भगवान के अनेक नाम हैं, जिनमें 1 नाम है भगवान आध्यात्मिक तपस्या के द्वारा में जिला ज्ञान देखे हैं। तो चेतन बहुत ही प्रसन्न हुए। इस राजा की विनम्रता देख राजा के जिला छोड़ बड़ा मी है और उसके मन में कोई कहानी है, वहां कार नहीं है। उनको तो इसे हम यह सीखते हैं कि अगर हम विनम्रता से भाई नाम का उच्चारण करेंगे, वो क्या प्राप्त होगा उनका दर्शन प्राप्त ना to me har vयctiकotenceजo a crisnisabestfrend apke nek mit honge to सब मे सब से कौन सा मिला है। वो आपके शुभ चिंतक हैं। कई बार हम गीता के उपदेश को है, तुम्हारे संदेश दे दिया है कि दिव्यज्ञान है, इसमें किसी प्रकार का दोष नहीं, इसलिए हमें पूरी श्रद्धा के साथ है। राम शासन यहाँ जी समझा रहे है। ki riragaviraga raga आप इंडियन का उपयोग अगर आपके पास कुछ है,
आप बोलो
की मैं बड़ी बिल्ली को त्याग रहा हूँ। जब आपके पास मौका है और आप स्पर्श करते हो? नहीं, हमारा सबसे प्रथम लक्ष् य है। हमारे हाल क्षेत्र में उनती करे, तो फिर अगर हम को त्याग दे पड़े हमें त्याग के स्वामी को उद्देश दिया भगवान के शरनागत होने के लिए। उन्होंने क्या कहा? सबसे पहले जो की भक्ति के लिए अनुकूल है, उसे इतिहास हो और जो प्रतिकूल है उसे उसे क्या करो। या तो हम ये प्रयास है, जो अनुकूल है, को क्या lok maksnaमेmnतुमसदा या करो वन के साफ गे, ये सम्भव है, यह संभव है, सम्भव है। प्रयास करोगे तो मन पर विजय प्राप्त करना या भक्ति योग में आगे बढ़ने। मे वर्णन किया राज राजा थे
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a, a, a, a, a, a, a, a mi, a, a, a, a, a y bol, gy क्यों कि कौन अपने सवाल पूछा, मंजू रे सीधी में क्या करूँ, यह जो है, उसे तोड़ने का समय आ गया है। करूंगा फोर्टी दिन की तुम जल्द pीलोक्यूँकिजलद पीना 1 का मतलब तो ज्यादा जो उन्होंने जल्द पिया to gov इस व्यक्ति ने मेरी बिना स्वीकार कर लिया, उन्होंने खाली उनको श्राप देने का mesmraजघबराईनी जब उन्होंने देखा कि दुर्वा, यह कैसी शक्ति है, उठाया व एकदम उन्हों देखा कि राक्षस पाया, और वो राक्षस पीछा कर रहा था किसका aमेshmराजनeक्या किया, क्या किया? भaanwio पीछा कर रहा था किस का पहुंचे शिव जी के जी ने कहा मै तो या है, मैं सुरक्षा सब जगह भाग किसी को अंत में तो गो इंडिया का उपयोग किस ो में बाल्य ने कहा क्या कि हमे मन बुधि का क्या कहना है? भक्ति और साधन है। इसके पालन से आप प्यार। तो श्रीमन भगतन सुनोगे तो ज्ञान, बढेगा, भगवद पढ़ोगे ज्ञान, श्रीमन भगत उदेश्य सुनाओगे तो ज्ञान, श्रीमन भगत का हमें देश अध्यन करना है। और श्रीमन भक्तों का अध्ययन करेंगे क्या वे ज्ञान तो इस लोक में ओरेंज लोगों में, इस अध्याय में कपिल शिक्षा दे? आप 1 विषय चर्चा होती है, कैसे बोल रहे? मूल उद्देश्य क्या है? सर्व हमारा प्रयास क्या होना चाहिए? हमारे और शुद्ध हृदय को क्या बनाये बनाये, शुद्धि को क्या बनायें? ये संभव है। और भगवान अपने आप को अनेक रूपों में पकड़ करते हैं। आप उनकी सेवा में जुड़ सकते हैं। तो हम इस रोग में भगवान के पीले देव। कहते हैं कि हर व्यक्ति का ये प्रथम कर्तव्य है। हर जो भक्ति योग में जुड़ोगे तो क्या लाभ होगा? benefit आपकी इंदिया शुद्ध बने जैसा कि कैचराखोता है आपको तो आप देख सकते हो और कचरा होता है? आप को बुखार है। बहुत अच्छा प्रसाद दिया, पर आपको टेस्ट, आएगा बुखार चले जाए, वो बिमारी दूर हो जाए। तो वो ठेस इसी प्रकार हम सब अज्ञानता में है, अज्ञानता में जनम लिया है, ज्ञान में पढ़ रहे हैं। और अक्सर प्रजा का ज्ञान जीवन जो भगवान गुरु और जो व्यक्ति भक्ति योग से जुड़ता है, उसके लिए क्या असंभव है? संभव है कि मनबुदिंधिया को शूल बनाना। अब गीता के तीसरे अध्याय में क्या कारण है कि जाने भी हम कल का है। अब जाने का ह शास्र के विपरीत है, इसे बचा है। वो हमारी इंडिया क्या बन जाती है? हमारी कॉमिंग जो इंडिया जैसे करना है। तो अर्जुन ने कहा जो ज्ञान ही। अर्जुन ने कहा कि जो शत्रु है, आदमी जीवन का कहा है। मन बुद्धि और न हमें कौन है, पता क्या है? उपाय उपाय क्या है? a agar ap जन की तलवार से jan की talwar, जान अध्हालविज्ञान के प्रयास से आप इसका इसलिए अध्हालविज्ञान अनुकूल करना, वेरी इम्पार्टेंट शिप भगवान के पीला देव माता को ज्ञान दे रहे हैं। उनके बाद ने पूछा था यह बता कि परा से बच सको तो का पकयोगसाधनहैभक्ति प्राप्त होता है कैसे? इसलिए हमें उसे पूरा धाम और अगर हम प्रयास करेंगे ो ban जो व्यक्ति प्रयास करते हैं, मुझे समझने के लिए, वे कुछ कमी भी दूर के अब 1 कदम उठा, 10 कदम ए तो हम सब का प्रयास का रमनेश्कामभाव से है, भगवान की सेवा में के द्वारा ब्रह्मा भूत a real prpridrndkisn is real enjoy, हमारे मन में ये बैन रहता है ha m swami apko क्या sochna, who is real priterandwhois enjoy this injoy practice। लोग, तो इस अध्याय में भगवान के क्या क्या भक्ति योग इम्पोर्टेंट भक्ति कैसे प्राप्त होता है के संघ में और हमारा बहुत चेतना जो है इसको हमने श्री बनाना है। sa a question
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इस जड़ता को जनता कैसे बढ़ाये जिससे
हमलोग हमारी बक्तियोकेनियमों का पालन करो और प्रयास करो आप को कुछ भी भी हो, भगवान पूरा कर दे। god is very help, हमारी समस्या ये है कि हम उनका सहयोग लेने को तैयार नहीं है। इसलिए ा शासन को पढ़ो, शासन को पढ़ोगे तो ज्ञान, बढ़ेगा और प्रॉपली ने इन पार्क इन लोगों को समझना बोले सान कर दिया है। पहले तो 4 का टीका प्रॉपली ने यही को सरल भाषा में bdaa a key erboeeea
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