भक्ति में तीव्र प्रगति के लिए ये 4 कार्य | SB 1.2.14 | 23 Feb 2022 | Indore | Gopāl Kṛṣṇa Goswāmī

In this Hindi devotional lecture recorded in Indore on 23 February 2022, Gopal Krishna Goswami expounds on the four essential bhakti‑yoga activities that lead to rapid progress in devotion, as described in Śrīmad‑Bhāgavatam 1.2.14: (1) hearing the holy names and scriptures, (2) chanting (kīrtana) the Lord’s names, (3) constant remembrance (smaraṇa) of Krishna, and (4) worship (pūjana) of the deity. He cites scriptural verses, gives practical examples, and urges listeners to incorporate these practices into daily life—listening to discourses, singing bhajans, meditating on Krishna’s pastimes, and offering service in temples. The talk also contains logistical announcements: a discounted Bhagavad‑Gita on sale, an invitation to attend the evening class, and a reminder that the copies can be gifted. Audience members interject with gratitude, ask how to recognize one’s spiritual stage, and seek guidance on maintaining sincerity. The speaker responds with encouragement to seek guru‑sādhu support, to increase study and service, and to stay focused on the holy name. The overall tone is devotional, instructional, and warmly persuasive, aiming to motivate practitioners to deepen their bhakti through concrete, scripturally‑backed activities while also promoting community participation.
Chapters
हार्दिक स्वागत हम भागते वासु, दिवा भगवती वासु, भागते वासु
से
आज हम आपको जायेगा चौदवार शो करे गए 10 बार भगवान बता बाजी को deoria ambati प
11 गण मनसामनकेध्यान द्वारा भगवान भगवान श्री, भगवान साथ, भक्तों के भक्त के पति ही पति, रक्षक, सुनने, योग्य के योग्य, पूजने के योग्य, पूजा, धन्यवाद, अत मनुष्य को एकाग्रचित होकर उन पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान के विषय में निरंतर श्रवण कीर्तन स्मरण तथा पूजन करना चाहिए, जो भक्तों के रक्षक हैं। कृपया के बाद अत मनुष्य को एकाग्रचित होकर उन पूर्ण पुरुषोतम भगवान के विषय में निरंतर श्रवण कीर्तन स्मरण तथा पूजन करना चाहिए, जो भक्तों के रक्षक है। यदि परम सत्य का साक्षात्कार ही जीवन का परम लक्ष्य है, तो इसे हर सम्भव उपलब्ध साधन से अवश्य करना चाहिए। उपयुक्त, वर्णों तथा आश्रमों में से हर 1 में गुणगान, श्रवण, स्मरण तथा भोजन ये 4 विधियां सामान्य वृत्तियां हैं। इन जीवन सिद्धांतों के बिना कोई रह नहीं सकता। जीवन के कार्य, कला, जीवन के इन्हीं 4 विभिन्न सिद्धांतों में व्यस्त रहने में निहित है। विशेष रूप से आधुनिक समाज में सारे, कार्यक्रम, श्रवण तथा कीर्तन पर ही मुख्यतया आधारित है। कोई भी व्यक्ति, चाहे उसकी सामाजिक हैसियत, कैसी भी क्यों न हो, वह कुछ ही काल में विख्यात हो जाता है। यदि दैनिक समाचार पत्र उसका गुणगान करते हों, चाहे वे गुणगान झूठे हो या सच। कभी कभी किसी दल विशेष के राजनीतिक नेताओं का विज्ञापन समाचार पत्रों में प्रसारित होता है और ऐसे गुणगान की विधि से 1 नगण्य व्यक्ति भी पलक झपकते ही महत्वपूर्ण बन जाता है। किन्तु अयोग्य व्यक्ति के ऐसे झूठे प्रचार से न तो उस व्यक्ति का लाभ होता है, न समाज का। ऐसे प्रचार की सनिक प्रतिक्रिया तो हो सकती है, किन्तु इसका कोई स्थायी प्रभाव नहीं होता। अतः ऐसे कार्य समय का अपर है। गुणगान तो उन पूर्ण गुरुषोकता भगवान का करना चाहिए, जिन्होंने हमारे सामने प्रकट होने वाली प्रत्येक वस्तु की सृष्टि की। हम इसकी विस्तृत व्याख्या श्रीमद भागवतम के जनवाद यस्य वाले प्रथम श्लोक के आरंभ में ही कर चुके हैं। अन्य व्यक्तियों को अन्य व्यक्तियों का गुणगान करने या अन्य व्यक्तियों के विषय में सुनने की प्रवृत्ति को गुणगान के वास्तविक लक्ष्य परमेश्वर की ओर बोलना चाहिए। इससे सुख की प्राप्ति होगी।
या
ा
जय श्री कृष्ण
कि
भासा के रेलवे के प्राप्त होता है। और इस रेबदमसमप thanks for
an e
what s o शिक्षा दे रही है। उस दिन ने कम किया था
परी
ने परीक्षण को शराब प्राप्त हो। शादी के पश्चात मृता अगर प्रेशर
के
थे, तो माता के विस्तार उनकी सुरक्षा
के
राज राज वीसी थे। राज विषिर्हैर राजा भी जब राजा का
है।
आज के जमाने में गाँव में राज देखिए, बडे लड़के ने शराब लिया, शराब क्यों लिया था से जंगल में प्रयास है। पानी ने खोले ने देखा, कोई पानी का सार है, वह मुझे दे देगा। 1 कुटिया में सभी बिजली कमरे बिजली
है।
कुटिया, कूल और निकलते समय उन्होंने देखा, मावा के रूप में पिता के गर्दन में बरवा साफ है। 2 का ये हे और कहा शाद के पश्चात तो 1 रूप हम को लगता है कि उन दिनों में आपके एकसमयसेभीज्यादा दे
साल
में चौबिस हजार लोग और 24 हजार साल में पहुंच गए। घबराने शराब से अक्सर बड़ी गरीब बीमारी है कोई राज नहीं ये संसार
सर
जो पूछा क्या जाऊंगा ये नसबएगान 1 भी बड़े वैज्ञानिक तो उनकी राय से और जिसकी राय से गया में 1 सूजगसमीनामके पुरे पुरे ने ये थी की कहते हैं कि पिछले श्लोक में यह साबित हुआ है कि हमें शूल भर्ती में बनाना चाहिए वह भरती की भर्ती करोगे तो ज्ञान पैदा होगा और अनेक शुरू है 1 बार से भाव से व्यक्ति को रंतरवारकेनाभोंका सुनना चाहिए, भगवान की बालमा का गुणगान करना चाहिए, पानी का स्मरण करना चाहिए।
a
उपासना करनी चाहि थे मैं बोलूंगा जरेली उसका प्रभाव ित नहीं होगा। मेरा बस बोल है तो भगवान है क्या है चाहे न चाहे ठाकुर को 22 बाजारों में और जा रहे थे और हमें याद होना चाहिए भगवान के निवेदन को
गया है
में 2 चीजों से है ये है ा और लाभ सामने कृष्ण पूर्व भगवान के जो नाम है वो क्या है चीनी नाम है है या छूता है वह क्या बोल जाता है सोना तो मार के नाम
भी
ज्ञान से ज्ञान से
है।
कई लोग लोग बने बात है क्या दे रहे है तो भगवान का नाम या जो मिलेगा लाभ उठाएगा वो
जा
रहा है है कर रखे वार के नाम अवि है इसका यह अर्थ है जहा भगवान के नाम का भगवान उपस्थित तो हमारे नाम से जी में राजभर होते है। कैसे आप इन क्लेशों से छुटकारा प्रॉपर? आज हमने देखा होगा कि नकीसानोकडप फैक्ट्री लोगों को लग रहा है। तो आप देख सकते हैं ये क्लेश है जो बढ़ता ही जा रहा है और इस समय ये वायरस निकला था 2000 में अमीर साल पहले वाइस और लाखों लोग साल में जाने गए थे। फिर मेने पापाजीने पढ़ा था नाम तेजी से प्रभाव पड़ रहा था। 1 बार के नाम ये तुमने 4 मोबाइल प्रभाजी ने कहा मुझे वायरस हमें क्या करना चाहिए सो 1 मात्र भाव से हमें क्या करना चाहिए? बाल के नाम को सुना और भाई के नाम में दिन रात लोग
पडोगे
30 बार पढ़ा है और हर बार आप पढ़ोगे और गाय से। तो यआरसतक भगवान भक्तों के सुरक्षित हैं। भक्त उसे कहते हैं जो कि भगवान के संदेश का आदेश लाभ उठाए आगे कहते हैं मवाली महिमा का गुणगान करो गे तो कैसे 20 साल में होगा। जब आप हमारे नाम को सुनोगे तो जीव का किया जाता है तो हमें 1 मात्र भाग से 1 बार भाव क्या करना है। तुम्हारे नाम का ऊँचा है हमने बाल की नावों में इतनी शक्ति है प्रापा प्रापा जी खा हम यह तो बवाल की जो महिमा है बहुत विशाल है और हजारों
ा
पूरा हार सुमन
को
गया है शत्रु के रूप में रखा है या बंदी के रूप में बंद कैसे कर रहे हैं। मा का बंद मन में
ले
वो बजा बंद हो के मन के द्वारा। अब यही सोच हो कि हम जहाँ लाभ कैसे उठाएं ज्यादा घराई के साथ जुड़ेंगे तो हो मन क्या पर अगर भगवान की अलगू जिला वार और उनमें रूचि में आप कहोगे तुम्हारे में तुम लोग बहुत भरी
करते हैं।
प्रसाद भी कहते हैं। आप सबको इन गधों को पढना चाहिए पढ़ोगे तो ज्ञान बढ़ेगा, ज्ञान बढ़ेगा और सकोगे तो सूत को सभी के हैं को सुनना चाहिए और उचारकरनाचाहिभगवन में कितने
हैं
और कितने जी तो 1 जीप संभालना मुश्किल हो जाता है जी में लोगे में कम पढ़ेगा सो हमें
में
मुझे जो लाभ साथी में प्राप्त होता था भगवान का चिंतन करके में
1
लाख साल की थी और 60 हज़ार साल तक चिंतन करने की योग्यता से 10 गुना कम हो गई। और क्या था शोध हुदूद और वाली का उत्पादन करते थे। बंद के उच्चारण से बैसा का साधन था बड़े भाई के और दवाब में साधन किया था। आज बिना भगवान अपने आप को करते हैं। और ये रूप
की
डिस्क्रिपशन पर बनना है। कभी भी यह नहीं सोचा था। कुछ दिन पहले हमने भक्ति सिधांत का अमल भाव बनाया, आप भी बनाया था मारे परम गुरु थे। आप गुरु जी के बारे में कुछ बताइए?
मैं
क्या बोलूं के बारे में जो जो बात है वो क्या चाहता है शर्म किसे रूची? और अगर आप धन से करोगे तो क्या होगा? क्या होगा मेंही कल हम भगवान स्ाब्लिशकरमेतो भगवान ने पलाहसनेकहायेपुल मेरे कारण तुम्हे इतना कर भुगतना पड़ा बालों को वर्ड चाहिए। और प्रधान ने कहा आप मुझे ऐसे बन करो, अगर आप देखना चाहते हो। वे ये वर्ड ली, मेरे हिरदे में तुरंत आई। 2 मिनट यह होली तो भारत आज बीरा के रूप में जाने जा रहा 1 हज़ार का और बोला था के
पास
a, a a a i ना तो नाम के द्वारा आपको करियर में वह लाभ प्राप्त होता है जो कि सती में प्राप्त होता था, भगवान प्राप्त होता था। बड़े बड़े यज्ञ के द्वारा, तो वापस प्राप्त होता था। था वर्ग। तो यह नाम है, उपाय है सो भगवान को, वे जो उस थे, भगवान का रूप है। भगवान जो थे वो विरोध करने लगे। ये राहुल सुमार दावा तो इस कलिमे है। तो अगर आप करोगे तो क्या लाभ होगा?
न
आप करोगे। तो ये विश्व तो भगवान आपको आज के रूप में आते हैं। अगर वो सेवा का तो यह मायावती है, वो विश्वास नहीं करते जिसमें ऊपर से ये तो मुर्गी है पत्थर की ये भगवान थोड़ी है, मुल्क भर भर का भागी है। अपने आपको आज विघा के रूप में है। भगवान में कोई अंतर नहीं। ऐसे कहते है भगवान में अंतर
में।
तो प्रभु ने 4 किया
और
उन्होंने
जो बावली का बहुत विरोध किया उन्हें कहा जाता था सिंगर, गुरू, गुरू और जी विरोध करते थे। तो यहाँ तो कुसमी है हमें और भगवान की उपास्य और करेंगे। क्या लाभ होगा, लाभ होगा की जो आपके हिले हैं वो हिले हैं। धूल और साफ कपड़े से धूल को दूर कर सकते। उनका। उससे बचने का उपाय क्या है? भक्ति योग का। तो भक्ति योग के परम में इतनी शक्ति है। अगर हम धन का लाभ उठाए तो हमारे हृदय में है, सा हो जाएगा। कहा जा रहा है कि व्यक्ति को 4 प्रकार के कार्य करने से और अगर कोई बहुत बड़े भी बनना चाहे तो वो एलवुडाइजफरदर पेपर। वगैरह तो हम इस उद्देश्य का देते हैं। पापाजी ने के अध्ययन पर भी बल या भली कहते थे अगर तुम अध्यन नहीं करोगे और कोई आपसे पूछेगा क्या है संदेश बहुत तो हम सब का प्रयास होना चाहिए। हम क्या करें करें और से करे। और इसके द्वारा आप धार्मिक क्षेत्र में आगे बढ़ते होते है। प्रभा भूत प्रात जो व्यक्ति सजािभागमेंजुडते हैं वो सदा प्रसन् राधा कहते हैं लोग यह नहीं जानते कि असली आनन्द कैसे प्राप्त होगा, आनंद प्राप्त होगा के माध्यम के द्वारा। इन अध्याय में अनेक श्लोक जिनके द्वारा महत्वपूर्ण से स्वागत। यह नहीं माल में बाल दूर होगी नामों का उच्चारण के तो हम सब के क्या प्रयास हो। रूचि बढ़ा की बजे मुझे नकल की, भक्ती की विधि का पालन करना। सबसे पहले वो कहते हैं हमारे में श्रद्धा होनी चाहिए कि हम जीवन के लक्ष्य को प्राप्त करना चाहते हैं। हम हमें ये सोचना चाहिए कि जीवन वाला लक्ष्य है कुछ जो वाला लक्ष्य नही। और जब आपके मन में ये भावना होती है तो भगवान क्या करते हैं? आपको किसी साधु की संगत मे ले आते है जो साधु की संगत है उसके 2 साधन हैं। 1 है भक साधु, दूसरा है ग्रंथ साधु अनेक उदाहरण हैं जिनमें आप देखते हो की गंध के माध्यम से लोग भी गा। तो भगवान जब देखते हैं कि आप में आध्यात्मिक जागृति हो रही है। भगवान क्या मैं भर साधु साधु की सब उनकी आते वो क्या बनता है? देश क्या देश भक्ति वैली का पालन करो। फिर क्या परिणाम होता है? उसे कहते हैं को। 2 से उनका कोई रिश्ता नहीं है जिनकी आवश्यकता नहीं है, पर हम उनको अपनाते हैं। तो ये जो है वो उनको कैसे विरोध करना है के माध्यम से जैसे आप सब का अभ्यास होगा। जब आप जब आप संसद से जुड़े हुए नहीं थे, पुरी आदमी थी, फिर हरि नाम के माध्यम से और भक्ति के माध्यम से क्या लाभ हुआ जो लग जाते है। जैसे की आप अगर बीमार हो तो दवाई लेते हो, दवाई लेने से क्या आताहै? बीमारी दूर होती जा रही है। और ये है आध्यात्मिक और बुझ करने से लाभ वृद्धि हो रही है। और फिर कृष्णा। 1 प्रश्न जो पर पूछते हैं सारे विश्व में, मैंने देखा कि सारे विश्व में भक्तों की सेवा में भक्तपुर, चाहे इंग्लैंड का मेरा पर इन प्रकार के होते हैं। 1 पर भक्तपुर से निशा कैसे आए भक्ति योग में मिश्रा ये भाप की चाहे कुछ भी हो जाए हमें विचलित नहीं होना। भक्त मी कहते हैं भक्ति योग में इतनी शक्ति है। अगर आप आख बंद करके दौड़ोगे तो वो भी आप दुसरे शब्द में मिली शक्ति है। अब थोड़ा सा उसका पूरा लाभ मिलेगा तो आप भक्ति का पालन करो। 1 और लाभ क्या है की निशा बोल महतवपूर्ण है। जैसे की बौधिक स्थिति में आप लोग और कॉलेज में थे। आपका पढाई करेगी करे उसी प्रकार में भक्ति योग में कभी भी जुदा नहीं हो। बहुमजनदरईजनवमृतय के बाहर पश्चात भक्ति का ज्ञान प्राप्त है तो हमारा प्रयास है से के के माध्यम से क्या आप डेवलप करें सरदार पर से अंडर
को
बोलने दूंगा। 1 पक्ष के मुँह में कितना पालि पुरे बड़ा सरल उदाहरण है। प्रॉप उदाहरण का उपयोग करते हैं। जब आप प्रयास करोगे गोhelpसोs भगवान उनका सहयोग देते हैं जो स्वयं प्रयास करते है। अगर आप प्रयास करो और फिर अंत में का तो
हमे
इन 4 चीजों के बल देना चाहे
और
उपासना भगवान के आज मिलगे उपासना और इसके द्वारा है और होकर भक्ती के मन में आगे वर्षा की। भक्ती का मौका अनेक योनियों में प्राप्त होता है और वीर इसी प्रकार की शिक्षा गुरु कृष्ण ने जनवर पश्चात अभाग्यशाली व्यक्ति है जिससे भक्ति का बीज प्राप्त होता है भक्ति का बीज है ये ज्ञान की भक्ति होगी सबसे महत्वपूर्ण कार्य है।
और
आप बीज 1 बीज कैसे उठता है पानी पिलाओगे तो करोगे तो यह भक्ति का बीज जो है अपने आप को भक्तों की संगत में रखो भक्तों की संगत में रखोगे तो क्या लाभ होगा होगा पागल हार्दिक दोगे तो क्या होगा बगीचा परासी तो में हर श्लोक बड़ा महत्वपूर्ण है और हमें हर श्लोक को कंप्रेस करना चाहिए तो यह जो देश या रहा है वह महत्वपूर्ण है। हमें इसका पालन करना चाहिए। और अगर आप 1 कदम लोगे भगवान को समझने में भगवान 10 कदम देंगे व सहयोग करने में हमें बाकी की शिक्षा को गंभीरता से स्वीकार करना चाहे तो गंभीरता से स्वीकार करेंगे बाकी योग के मार्ग में स हुए मैं काफी समय छोड़ का भी परेशन हो। आप पूछ सकते हो
हर कृष्ण
कहा
की हरी नाम और कभी कभी भक्तो का ऐसा स्थिति होता है ऐसी जगह में लग जाता है ऐसा उनका स्थिति रहता है की वहाँ पर कभी भी भक्तों का मिलना मुश्किल।
आज कल इंटरनेट के जमाने में भक्तों का संग प्राप्त करना वो बन गया
है
माध्यम से सुन सकते हो
का
दर्शन प्राप्त कर सकते है। 5 मिनट में पूरे विश्व की यात्रा कर सकते हैं न्यू यॉर्क मंडल की तो अगर आप भक्तों की से दूर भी हो योग से आप सब सुविधाओं का लाभ उठा। yes for gestion किश्चन था की जैसे
की तुम उसके ऊपर कैसे उठे और 24 घंटे में भगवान का संघर्ष कैसे करते हो
भगवान इस्वरन कैसे कर सकते
हो जैसे महाराज हम 24 घंटे में 22 घंटे, 30 घंटे तो माया भी बढ े से तो भगवान के स्मरण
कैसे कर सके 24 घंटे अप चडिंगकरतेहोस कितनी बार चैंटिंग आप करते जाओ और चेनिंग करते जाओगे तो भगवान भी कर पाओगे और जो आपके शत्रु है जीवन के उन से भी बच्चे है यह संभव है बालो को
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what s 10
dhe domat means a shop were you distreb्यूटिंग मागसी ठाकुर ने कहा कोले में दुकान है, उसी प्रकार कोयले खोने में हर साल होना यहाँ के लोगों को आज देखो। इस जो भक्त हैं उन सब का घर बन गया है। वो प्रचार कर रहे है। okay मुझे mikita
okay
it marajirogbadsas that spritual anit एडवांस so what of tere xusilexाitी 2 प्रकार की होती है देखिए की आप क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हो की नहीं। जैसे आपका बुखार होता है तो आप बार बार देखते हो। बुखार कम हो रहा है की मैं चिंता में होती है। ये प्रयास करे भाई भक्ति आगे बढ़ी है, पीछे जा रहे हैं दूसरा चिंता है ये जी क्योंकि भगवान को भूल रहे हैं और बहुत ही दुबारा। खुशी ने कहा मुझे ये प्रशंसा तो है जुड़ा हूँ भक्ति में मुझे चिंता है। उन की जो की दुखी स्थिति को सुखी बनाना जाने की चिंता थी। अब स्वाद की चिंता नहीं थी उनको दूसरों को उधार कैसे किया जाए तो भक्त को 2 प्रकार की चिंता रखी जाए। मैं किसी प्रकार से भक्ति में कमजोर नहीं हो जाऊँ। ये जो भक्ति का बीज इसको मुझे बड़ा करना है और जो ऊँचे की
है
वो भी इस विषय की चिंता करने पापाजी। ठाकुर जी को घर किया वहाँ से आ रहे थे तो उनके भक्तों ने कहा पापा जी अब क्या what you लोड प्रापा fonmायसो के भी चिंता करते शिक्षा दे दे। यहाँ में भी प्रयास करना चाहिए। मैं आगे बोले यस
हरे कृष्ण महाराज जी महाराज मेरा प्रश्न यह है कि जब भी मैं चैटिंग करता हूँ तो जैसे बीड बैग में उंगली डाली चैंटिंग चालू करे तो दुनिया भर के थॉट्स आने लग जाते और बिल्कुल अनकंट्रोल रहते है इच्छा होती है कि और ज्यादा चैंट करे पर थॉट्स इतनी ज्यादा स्ट्रॉन्ग हो जाती है। डिजायर्स आने लगती है और इतनी कुछ देर चैट करने के बाद इतना बोर्ड मैस होता सर बोझ लगने लगता है कि आगे चांट हो ही नहीं पाती बहुत ज्यादा स्ट्रगल करना पड़ता है तो इस से हम ओवर काम कैसे कर सकते है।
बड़ी बड़ी सरलता से आपने मन का दास मत बनो हम बन गए हैं मन के दास अपने मन को पर दिया हुआ है। मन जो सोचता है वो ठीक है बुद्धि जो कहती है वो गलत है। ऐसे सोचते है मन क्या कहेगा आज यही करो कल यह करो आप जब जब करो 1 बार भाव से लोग में कहा जा रहा है तो फिर क्या लाभ होगा उसका असर पड़ेगा dont were रिंग भटकभके
मरे 16 माला सुबह जॉब करने के बाद माला में प्रयास करने के बाद कोई और कार्य से 16 माला हो गया दिन में कोई कार्य साफ़ कर रहा है या कोई कुकिंग कर रहा है उस समय भी भोजन के नाम जप करते करते वो कार्य करना चाहते हैं तो बट वहाँ वो तो जब में ध्यान में रहेगा
ध्यान तो कुकिंग में रहेगा कोलाबा ध्यान से खींचिये बाकी मारा जो आप करो रसोई करते हुए, गाड़ी को साफ़ करते हुए, गाड़ी चलाते हुए करो परोसे गिने नहीं गिनों नहीं गिनो केवल कुल क्वालिटीस वाला माना jenmorebodygodjn more question
इस टाइप के डिवाइसेज उस करना चाहिए जप के
लिए क्या है जैसे ड्राव जैसे मैंने अभी कहा 16 माला पहले ध्यान से करो और फिर बाकी जो माला है भारत 16 तो होगी पर बहुत रहता है कि कन्सल्टेशन के साथ नहीं हुई है। चिंता मत करो, प्रयास जाप करते जाओ, जब बंसेल हो जाएगा। हरीकृश्ण माराजी प्रैक्टिस men परफेक्ट आप पूछिए
हरीकृष्णा
भारत मे प्रश्न था की आप बता रहे थे, लेक्चर में की प्रवपादजी बुक अध्यन के ऊपर जोर देते थे। तो हम रोपात बुक्स के प्रति टेस्ट कैसे डेवलप कर सकते हैं?
किताबों के प्रति प्रेस डेवलप करोगे। जब आप पढ़ोगे केवल पुरसे रुची कैसे बढ़ाए हरीराम में रूची बढ़ेगी। जब आप हरीराम का उच्चालन करोगे, उचाल नहीं करोगे तो रूची नहीं पड़ेगी। उसी प्रकार में अगर आप पढोगे तो रूची बढ़ेगी अगर पढ़ोगे नहीं तो कैसे बढ़ेगी अगर आप दिखाओ रखो किताबों को खोलो नहीं, फिर कैसे होगा? अरे पढ़ना चाह प्रभाजी ने कहा यह तुम किताबों को पढ़ते हो। भगवान बड़े प्रसन्न होते हैं, भगवान कहते हैं ये भगप्रयास कर रहे है मेरे गुणों को, मेरे उपदेश को समझने के लिए मुझे उसकी मदद करने। 2 पीछे
हरी कुशवा ब्रहुजीधगरप्रणाम जी
पु
मजे ग्रहस्त में रहते हुए कैसे हर्षण भगवान का ध्यान बना रहे और कैसे हम कर्म करे, ताकि कर्म का बंधन भी बड़े
कर्म करो कार्य करो। केवल जो शास्त्र पर आधारित है, विलीरमराजनेन पूछा हम जो वरियता आश्रम में हैं, कैसे सफलता प्राप्त कर सकते हैं के अनुसार सो को रोजी कमाने पड़ती है। वो करो तो संतों की संगत में रहो, जिसके द्वारा भी यह सुन सको कि कैसे भक्ति की नियगविदियोका पालन करोगे। तो जब क्षेत्र बबू दक्षिण भारत की यात्रा में थे, सो ब्राहमण कुरमा के घर में गए, कर्म हो। फिर उमर ने कहा मैं गया सास में तंग आ गया हूँ, मुझे अपने साथ ले चलो। नहीं, मेरे साथ नहीं चल। पा को जम करो और सास का अध्ययन करो और ये संदेश दूसरों को ये करोगे, हमेशा मेरे साथ आओगे मैं, हमेशा तुम्हारे साथ। आऊँगा ये है कि बा
अरे हरे कृष्ण पर जी साक्षात गनर। मेरा यह प्रश्न है कि जब मैं चैंटिंग करने बैठती हूँ तो 1 जगह मेरा ध्यान नहीं लगता है और बैठ भी नहीं पाती हूँ। तो मैं खड़े खड़े भी नहीं करती हूँ। लेकिन मन बहुत चलित रहता है और मतलब खुश नही है। मुझे अंदर से खुशी मिलती। मतलब अंदर खुश नहीं रह पाती हूँ तो इसके लिए क्या प्रभु जी खुशी
क्यों नहीं पा पाते?
अंदर से खुश क्यों करती हूँ कि खुश रहो नस्तरों पर में हो, नही पाती हूँ। कुछ मतलब इसलि उधर ध्यान नहीं लगता, ब्रबुजीजैंटिंग में क्या करना,
ध्यान नहीं लगता तो भी बुद्धि का उपयोग कर। 2 आपका मन कैसा है, बड़ी कीमती वस्तु है, जेब में डाल लो, फिर भी बुद्धी करी नहीं टीवी कैमरा दिख रहा है? तो मन कहता है जब मत करो बुद्धी से कहता है जीवन में बाद आ जाएगा,
हर मिश्रजी धन्यवाद प्रणाम महाराज। मेरा यह कोन है कि मेरा नया
भी भक्ति सौरी, फिर से बोला
के बोलो हरे कृष्णा जी धनवाद परिणाम मुझे मेरे लिए नया नया भर्ती में आया हूँ और शुरुआत में मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। पर ऐसा डर लगता है कि कभी संग छूट नहीं जाए। तो उसके लिए क्या करना चाहिए। हमेशा भक्तों का संग बना ले।
अगर आप 2 भक्तों की हो जाते है कौन से शेयर में
यहाँ पर इंदौर में नेता गुरुजी ने है कृष्णा र्जन जिनका संग की मेरे साथ,
अगर आप भक्तों के तो भगवान सहयोग देंगे मान लो। ऐसी स्थिति में हो न किसी एकाध के साथ में कुछ जैसा मैंने कहा द्वारा प्राप्त हो। thing you need to know in my book गंध को ले जाओ भक्षी सिधा ने प्रभा को कहा था अगर कोई नहीं प्रचार के लिए दीवारों को, पर चारा तो भग है, कभी भी अकेला नहीं होता। राम उसके साथ हैं, गंध साथ है। भक्तों के भक्तों से बात कर सकते हैं और इंटरनेट द्वारा सुन सकते हो।
कृष्ण महाराज थैंक यू वेरी फुल क्लास महाराज का शाम को भी बेच होंगे और इस क महाराज सम पर्सनल एसोसिएशन मीडिया शिला प्रभुपाद उसके बारे में थोड़ा नाराज शाम को बताएंगे सब से निवेदन है आप सब शाम को भी आये और महाराज को अभी और कई और लोगों को मिलने का है और
जिस
अनाउंस पारा दिस हे वीर गिविंग बग गीता ऑन डिस्काउंट। सबसे निवेदन करेंगे कि सब बगर गीता नहीं दिन के पास ऑलरेडी हैं वो भी लेकर किसी और को गिफ्ट करने के लिए लेकर जा सकते हैं। उस पर महाराज क चे होगा सो याद रखिये डिस्काउंट रेट पर आज मिले वैसे भी ऑलरेडी डिस् काउंट है आज डिस्काउंट रेट पर कोई जिता होगी महाराज जी से
counawhatdiadकाun
वेर गिविंग फॉर on तो कमली डिस्काउंट दर को इस फॉर
बगल
केशन और फाइन मोल क्वेशन महाराज गीता साइन करके देंगे
जल्दी जल्दी सी ये आखिरी क्वेश्शन हरे कृष्णा प्रभु जी,
धन्यवाद सो रहा हूँ प्रभु जी हम भक्ति में सही डायरेक्शन में जा रहे हैं, हम चार्ज कर रहे हैं, हमें कैसे पता लगेगा की हम किस स्टेज पर आ गए हैं या हम सही
गुरु और साधु का सहयोग ले सकते हो। हमें ये देखना है है रुची बढ़ अध्यन सेवा, मंदरा की सेवा करने की भावना होती है। norman ो hello
yes last weston entesestig टू डू cntigaशls
in tusismetbenation take for the holy name, all these activities can be executed if you all the do chandinginherning everyday chindinganhearing should not become mat
o।
थोड़ा बदा ध्यान से कर रहे हो to fir all be it okay नाwn ले हाल
नारा मार ले।
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