शरणागति के 6 लक्षण | गौर कथा | CC M 22.100 | 20 Mar 2022 | Delhi | Srila Gopal Krishna Goswami

The recording captures a devotional gathering in Delhi led by Srila Gopal Krishna Goswami. After an opening that asks participants to silence mobile phones, the session moves into kirtans and chants, establishing a reverent atmosphere. The core lecture systematically presents the six characteristics (lākṣaṇas) of sharaṇāgati—complete surrender to Lord Krishna—detailing acceptance of Krishna as sole protector, unwavering faith, recognizing Krishna as personal master, total self‑surrender, humility, and alignment with Krishna’s will. Throughout, the speaker stresses bhakti as the means to attain surrender, the essential role of guru‑sanga, and moral conduct, including avoidance of sin and compassion toward suffering (e.g., Bangladesh, Ukraine‑Russia conflict). In a later segment, speakers discuss the guru‑shishya relationship, emphasizing that the bond is mental rather than physical, and differentiate between personal instructions from the guru and broader lecture teachings. They also urge understanding devotional directives through a scriptural lens. The talk intersperses chants, audience interjections, and occasional fragmented English, but the central message remains the importance of sincere surrender to Krishna for protection, guidance, and ultimate liberation.
Chapters
हरे मिश्रा सुबह भक्तो संगरोध है। कृपया अपने अपने मोबाइल से बंद करें इस सेल मोड पे रखे और बच्चों
को भी शांत बनाये रखे, स्वयं भी शांति बनाए रखे। वेश onsletrasesie करताल बजा रही है गाय
रा दमा हवा जायरा दमा हवा हर गो जाना वाला बा गोप जाना वाला बा जायरा दमा हवा जायरा दम हवा
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न ी बन जा
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गा
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बोला
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krishna काला ना राधा ना
हर कृष्णा
कृष्णा रे हरे रामा रामा रामा रामा
हर
कृषणा हर किनारे कि
किशन किशन
रे हरे हरे राम हरे राम राम राम रे हर
हरे
हरे कृष्णा णाकिश्णाकेशारे हरे हरे रामा रामा मारे हर हर
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हर राह
हर के हरे हरे रामा रे रामा रामा रामा रे हर
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हरे हरे राम हरे राम राम राम
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राम
राम
ह हरे रामा रामा रामा रामा र 4 हरे हरे रामा रामा हमारा मार
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los सब भक्तों का हार्दिक स्वागत तो आज हम पढ़ेंगे में so is is sex hundred from twenty second chapter, mujer goliasiasamclp to a will be like any mon।
अनुकूल यस्य संकल्प स्यवधनमव्रक्षय सभी कि विश्व
सो
दोत्रत्वेवरणम त था
आत्म
धाशरणददीमगुईयस संगं को सर हम बच्चे सभी विश्वास वरण
तथा
नीचे पर ाशरणका स् संगनपाादपुयस्यवजनम रक्षित सदी विश्वास रोकतक्लेवरनंथा
भगा पंड।
ये
हे शदिधाशरनादरासरे
हुल ाम रीवा होते
हे, ये माताजी
हम भूल हो साधो होलतेरला।
आज से ये राज
श्रद्धा धनवाद, भक्ति विधारक षीलपोपालकीनबूली स्या सेवा के लिए
जो
भी सहायक हैं, उसे संकल्पना स्वीकार करना राभिहोयस्यास्या। जो भगवत सेवा में बाधा डालने वाली
है,
वर्जन भुगुरत्यानरक्षिश्यती करेंगे। विश्वास विश्वास रोप तृत्व संरक्षण की तरफ जिसे पिता अति स्वामी जापान, वर्णम स्वीकार करना राधा। साथी मन सेवा कूर्म समर्थन पढिए
था
विद रखा विधा स प्रकार की शरणागति
ही
समर्पण की प्रक्रिया मे बात बताए। शरणागती के सब विवाह ये है
भक्ति
के अनुकूल बातों को विकार करना, प्रतिकूल बातों का अविष्कार करना, कृष्ण व संरक्षण पर पूर्व निश्वास होना, भगवान को संरक्षण या स्वामी के रूप में स्वीकार करना, पूर्ण आत्म, समर्पण तथा दी तब पर भ्यान को रक्षण करे पूर्ण शरणागत व्यक्ति में निम्नलिखित संरक्षण पाए जाते है। पैला भक्त भगवान की सेवा के अनुकूल हर भाव को स्वीकार करता है। दूसरा, उसे भगवान की सेवा के प्रतिकूल हर बात का बरिशाल करना चाहिए। यदि त्याग कहलाता है। तीसरा भक्त को दृढ़ विश्वास होना चाहिए कि कृष्ण उसकी पूरी तरह से रक्षा करेंगे। उनके अतिरिक्त वास्तव में अन्य कोई सुरक्षा प्रदान नहीं कर सक। इस तरह से आश्वस्त होना श्रद्धा के रहता है। यह श्रद्धा उस में विशेष वादी की श्रद्धा से भिन्न है, जो जन्म ृत्यु के चक्र से छूटने के लिए ब्रह्म तेज विलीन होना चाहता है। भक्त तो सदा भगवान की सेवा करना चाहता है। इस तरह कृष्ण अपने भक्तों पर दयालु होते हैं और भक्ति के मार्ग पर आने वाली बाधाओं से उनकी रक्षा करते हैं। चौथा भक्त को चाहिए कि कृष्ण को अपने परम, पालक तथा स्वामी के रूप में स्वीकार करे। उसे यह नहीं सोचना चाहिए कि उसकी रक्षा इसी देवता द्वारा की जा रही है। उसे कृष्ण को अपने 1 मात्र रक्षक माने हुए, मानते हुए उन्हीं पर आश्रित रहना चाहिए। भक्त को यह दृढ़ विश्वास होना चाहिए कि तीनों लोगों में कृष्ण के अतिरिक्त उसका अन्य रक्षक का पालक नहीं है। पांचवा आत्म समर्पण का अर्थ है यह भनक रखना कि मनुष्य के कर्म तथा इच्छाएं स्वतंत्र नहीं है। भक्त तो पूर्ण गया कृष्ण आशिक है और जैसा कृष्ण चाहते है, उसी तरह वह कर्म करता है तथा सोचता है। छटा भक्त विनीत तथा दीन होता है। भगवान कृष्ण मतापिता के पंद्रह वेद के पत्र वे में जलते हैं। सर वस्यजामरेशटमसमहो
मे
दी जा। हम में हर 1 के हृदय में आसीन हो और मुझसे ही स्मृति, प्यान तथा विस्मृति उत्पन्न होती है। सारे वेदों के द्वारा मुझे ही जाना जाता है में वेदांत करना चरिता और मैं वेदों का ग्याता हूँ। हर 1 के हृदय में स्थित रहकर कृष्ण जीवक स्थिति के अनुसार भिन्न भिन्न आचरण करते हैं। जीव स्थिति यह है कि उसे या तो माया के संरक्षण में रहना होता है। यह कृष्ण के निजी संरक्षण के अंतर्गत रहना होता है। जब जीव पूर्ण तया शरणागत होता है, तब वह कृष्ण के प्रत्यक्ष संरक्षण में रहता है और कृष्ण उसे सारी भूत भी प्रदान करते हैं, जिससे मात्र साक्षात्कार की दिशा में प्रगति कर सके। किंतु अभा पर माया के संरक्षण में होने के कारण कृष्ण के साथ अपने सम्बंध को अधिकार दे भूलता जाता है। कभी कभी पूछा जाता है कि कृष्ण किस तरह विस्मरण तैनाते है। कृष्ण अपने भक्त के भी कारियों को बुलवा देते हैं और माया के माध्यम द्वारा भक्तों की भागवत बत्ती को बुलवा देते हैं। यही अपोहन
megan
शलाका
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है। शासा,
eraveahycrisa hi we need one ingenier a peace, sonay bin। अगर सुनाई नहीं दे तो वो इशारा कर दे रहा तो विश में हमने चर्चा की थी। पूणमकेदिनमाोकीइंदी दिलाया है कि आप दिन रात चर्चा कर सकते हो। गोगे कल भगवान, इस श्लोक में यह कहा जा रहा है?
कृपया सबसे रो आप सब अपने अपने मोबाइल बंद कर दें। इस रखिंकबचमेंबाधा ही है। कृपया से दे, श
शिक्षा है, गीता की शिक्षा है, कोई अंत नहीं। यह भगवान कह रहे हैं, भगवान न होना चाहे और क्या लक्षण होने चाहिए। सबसे पहले क्या दे, अनुकूल प्रतिकुल जा शास्र में यह ज्ञान प्राप्त करते है। स्वामी जी क्या कहते हैं? सबसे पहले वो कहते हैं कि धान क्षेत्र में ढूढ़ने के साथ हमें ऑनलाइन और सो ने ज्ञान दिया था। स्वामी 2 भाई थे, उनका 1 और भाई ा श्री राम था। और ये जो गोस्वामी है उन्हें मंजाया का अवतार माना जाता है। मंजारी किसे कहते है? कि उपयोग सहयोग देती है। वन सेवा। ये चिर मिले थे। हम अकेली में हवा के केली है, बंगाल बांग्लादेश में रहे थे। हम नौकरी नहीं करना चाहते, वापस नहीं जाना चाहते।
जाओ।
वहाँ पर ने साथ हा कि जाओ द्वारा मेरा भूमिका में प्रॉपर उदाहरण लेते हैं। 1 विवाहित प्रेमी हो तुम बड़े ध्यान से करे करेंगे राय के द्वारा क्या सोचेगी वो कब जाकर प्रेमी से मिल सकती। तो प्रभु जी ने ये जो उदाहरण दिया है, यह कहाँ से लिया है आप लोगों को माँ प्रबु शिक्षा दे रहे थे। उन्होंने कहा रूप उन्होंने कह रहे थे नहीं, हम नौकरी छोड़ना चाहते है आपके साथ क्रोध आना चाहते हैं? नहीं थोड़ी देर। और फिर बाद में लोग नौकरी से
आगे
ही ने 10 दिन के लिए प्रयाग में पकी की, फिर ली। उन्होंने कहा कि प्रबंधन भी भगवान गुरु भाग्यशाली क्या मिलता है
और
gegacevljubशो के माध्यम से खेते की जिम्मेदाए दूर होती है। मां तो हम सब ने कोरिया में गुजर चुके हैं। पर ने कहा था कि आप कृष्ण भक्ति में नहीं जुड़ोगे, जब तक आपके बड़े ऊंचे संस्कार नहीं हो, जब तक आपके अच्छे संस्कार नहीं हो, आप कृष्ण भक्त के नाम जुड़ सकते हैं। तो आप सब जो जुड़े भक्त मैं आप सबका भाग गया है, आपने भक्ति की है और अब मौका मिला है। मात तो अनेक यूनियम, साव युनि, पक्षी की यूनीहैपुशुकीयनि और मानव युनियन कितनी है। सो माँ बाबू ने ये बताया की मनुष्य जीवन बड़ा विधान सभा में क्या कहा विधानसभा सभा में कहा गया अरधातोब्रह्माअभ मानव धेप्रापहाहैज तो भक्ति प्राप्त होती है। साधु संगत के द्वारा इस में भक्ति की चर्चा करते हुए क्या कहा उकदम भक्त संगत में रहकर भक्ति का ज्ञान मिलता है तो साधु संघ साधु संग में रहोगे। तो आपको भी वे ज्ञान शास्त्र में सालुस गहरा वर्नन है। और क्या कारण है कि आप साधुसंग में रहोगे तो का ज्ञान मिलेगा। ये तो भक्त की शिक्षा में रहोगे। फिर आपको प्रेरणा मिलेगी क्या क्या शिक्षा दी और आगे स्नादागुसवामीस्नात गोस्वामी में
और
भाई बाल रूप गसामीनेअपनीसरकारी नौकरी से आगे उनके पास इतने सोने के सिक्के थे के पूरी नाव भर गई थी अंदाजा लगाओ और उन्होंने 50 प्रतिशत और थोडा तो वृंदावन जाओ भक्ती सम्बंधित गंध की रचना ो मनु का निर्माण स्वामी जेल में थे मैं जेल में क्यों नहीं रहा था क्योंकि उन्होंने इनकार कर दिया था शा की नौकरी का आयोजन करने के लिए निकल गए थे को ज्ञान दिया। to jo ia, ia अंतर है कोई तो सनादंगोस्वामी को तो सुनाधगोस्वामी जाये थे टगनपुरीकलनेलिए पुरी जा सुनाधंगुस्वामी जाये थे पुरी और रास्ते में उन्हें जारखंड जंगल से गुजर रहे थे में उन्हें बस की बीमारी हो गई इन्फेक्शन पकड़ा और उनका पूरा शरीर भर गया था इसके साथ मुंशियों के साथ ऊपर हो थे। मेरे शरीर बिल्कुल निकम्मा हो गया है पस से भरा हुआ है और इतनी बदली थी कि सब उनसे दूर भाग कर रहे सनागoसवामीक्या सोचते थे सामी सोच रे जगरपुरारेाmi पहुंचे पुरी भगवान अंतर्यामी है वो सब समझ लेता था मुझे मिलने के लिए कुसे देखा गया का कमाल हो गया है तो क्या सोच रहा था कि वो आत्महत्या कर लेगा सो ये जो शरीर है, यह तुम्हारा नहीं है, ये जो शरीर है, यह मेरा है और मैंने इस देह का उपयोग करना है। कृष्ण भक्ति की साफ के है और ज्ञान ये है तुम्हारा नहीं मेरा है और इसके द्वारा पापा जी कहते हैं कि यह हो रहा था कि है इसका हमें सदा उपयोग करना चाहिए लिए भगवान के फेवर में आत्महत्या कर लूंगा इस में क्या है वहाँ पर देश के द्वारा हमें क्या दिखाया है कि हमें यह नहीं सोचना चाहिए क्या सोचना चाहिए शरीर है किसका तो जैतरा बहुत थे सनातन के भाग से और सनातन स्वामी थे पुरी में और समिता बहुत तेज धूप थी और सारा स्वामी चलते देखा से यहां की गर्म मट्टी हो गर्म मरी हो नदी के किनारे चले और जो sk
a
पुजारी पूरी छू देगा। तो साध स्लाधसानमेंपहुँचे ने पूछा तो कौन सी सड़क से तुम थे में आया था सड़क में भगवान ने कहा
तुम
उस सड़क में चल पाये पर जल जाना चाहि सुना था वो के बदन को छू e हुए थे सनातन को को गले लगाये थे और सनातन समय आए थे है झारखंड के द्वारा वो मिलने गए का सुनादनसुनादनके शरीर को गले लगा लिया सुनाद ने श्री को गले लगाया तो सुना नहीं मुझे मत छू मेरा ली बस से गंदा है और मैं इस तुम्हारे शरीर को छू रहा हूँ इसलिए मैं आपको पवित्र बनाने का में सुना न किया था और बैल के सामने प्यास लगी थी वो कैसे घर गए वो प्यारा में झूठा पानी था उन्होंने तो भगवान अपने मकसद को देते वो सेवा तो चेतन रूप का सार है क्या जो 6 विभाग है सबसे पहले क्या कहते कि आप स्वीकार करो को के अनुकूल है तो क्या अनुकूल है क्या प्रतिकुल है वो आप सांसों की शिक्षा द्वारा सबसे हो और इस प्रकार साधारण जीवन में अरे अगर कोई वस्तु आपके श्वास के लिए ठीक नहीं हो स्वीकार करते हो तो कूल है जो प्रतिकूल है कहते हैं हथियार सभी भक्ति इन शेखायोंेद्वारा जो भक्ति है उन है और भक्ति भर्ती कैसे हैं में क्या होना चाहिए वो साइड होना चाहे क्यूँ नही हम साधारण हैभगवान की सेवा का मौका मिले सही होना चाहिए। सो चेत जाते थे रोज इलाज को और सनातन को मिलने के सनातन का क्या दोष था उन्हें नौकरी की थी इस कारण हिंदू समाज से पार कर लिया था वो मुसलमान माँ बापू ने कई है अचार का अचार है कई हैं जो प्रचार करते हैं और पचाने दोने गुणों को प्राप्त करते हैं। तो प्रभु जी इस कतार कहते हैं यह होना चाहिए भक्का अचार भी अचार है तो पुचारनीआपकेपुचार का नहीं पड़ेगा और अगर अचार और चाय फिर उसका प्रभाव रहा तो चेतन बाबुर ने कहा चाहे है पचाने पुचा दोनो है चेतन भाभर ने कहा था कि भक्ति का बीज है ह पर वो नष्ट हो सकते है कैसे वैशन अपराध है भक्ति के बीच है से बढेगा वैशणअपराध करेंगे तो क्या तो वो नहीं रोकेगा शास्त्र ने आप और 1 समय छेद गंगा के पास जा रहे थे स्नान करने और उन्हें 1 बावणमिला श्रीवासांगन में कर रहे थे तो सिर्फ जो भाग जात थी तो 1 ब्रामण था जिसको रोबिया शिवा हुए तो वो महा मिले। उन्होंने कहा अपने जनू को मैं कर आया था। तुम्हारे कतर बनने के धरने के लिए मुझे रोक दिया। अपने तुम्हें श्राप देता हूँ। तुम्हे कभी भी भौतिक शोक नहीं मिलेगा। शुक्र तो वन अपराध का परिणाम है। इसलिए भगवान की माता जी उनके में थोड़ा सा रोड था किस के प्रति था, उन्हें शक था मेरे बड़े बेटे का हो। वे विचारों को बदल दिया। अधवेताैडुबलूसे दाल तो वाह प्रभु। तो ऐसे दयालु है कृष्ण प्रभु, प्रभु सब पर दया। तुम सबको दया दे रहे हो। अभी माँ को नहीं देते माँ क्या मां ने क्या किया है अपराध माँ माँ ने कहा अपराध किया भगवान की मां है। तो ये था 1 समय जब मा उस समय माँ ने पीछे से चरणों की धूल ले ली, जब भगवान ने देखा के धूल रहे कहा अब मेरी माता को भगवत प्रेम प्राप्त हुआ तो महाभबुइसबयानउद्धारण से ये बता रहे थे कि क्या हमारी जो माता है उनको भी यह छूट नहीं है पर में वैशणब्राज से बचा जाए। हम लोग सुबह 10 नाम प्रोध वर्णन करते है। इसलिए हमें याद रहे हमने इन अपराधों से बचना है। अगर वैशन प्रयास करोगे को संबो पाएगा सो चे पापा ने ऊपर साधन को बड़े और कैसे बिलकुल साला जीवन चेतन है सोयम भगवान चेतन और गान जो है क्या नी पर क्या क्या उनके विश्वने को सफल बनाए तो बहुत ही महत्वपूर्ण है। तो भगवान की लीला है क्या अद्भुत है सो भगवान मानता है उनके विषय में आप ज्ञान काम प्राप्त कर सकते हो। कुछ ही देर आपने बहुत ही महत्वपूर्ण शिक्षा दी और उन्होंने हमें आगे दिया है ऐसे स्वामी भाई इतने की रचना की। अगर पढ़ने पढ़ने को जाए तो भी बहुत ही कम पढ़ पाओगे। तो छे से ने पूरे भारत की यात्रा लगाकर गहिरा को जाएगा सो और उनके क्या भविष्य बनी थी पृथ्वी या पीसी के हर कोने में नाम प्रयास है, नाम है हर कोने में तो चेतन स्वयं भगवान है और उनकी क्या इच्छा थी और वह सुखी मन शिक्षक में पढ़ते हो कि में उनकी हर चिंता थी कैसे पति उधार होगा? और उन्होंने पूछा यह बताइए कैसे लोग नरक में जाने से बच सकते के पांचवें स्कंद में आप क्या पढ़ते हो नरकों के बारे में?
और
लोग बचें नरक जाने है ने पूछा कैसे ये कैसे रोक सकते हैं बड़ा दुख दुखी दूसरे को दुखी देकर वो भी दुखी हो जाता है। तो उसमें प्राचीन में से पहले कैसे हम रोक सकते हैं लोगों को नरक जाने से। क्योंकि जो भक्त है वो जानता है कि असली सुख प्राप्त होगा कैसे हम आगे हो जाए तो भक्त है क्या प्रयास करता है सबको ये ज्ञान का प्रयास तो आज का, आज मिल का आकर्षण था उसके सबसे छोटे बेटे की तरह। और क्या नाम दिया था प्राचीन समय में बच्चों को भगवान के नाम दिए जाते थे आज भी वो राज है और आज मे अपने पत्नी उसे संतोष करने के लिए किया हर प्रकार का पाप का, यह उन्हें करना पड़ा यामा पाप का भोजन बहुत बढ़ गया है। ो अब क्या क्या ये होने या दूतों को भेजा। आज मेर को नरक में लाने के लिए सुझाव या बड़े भयंकर रूप में अपने सबसे छोटे बेटे को पुकारा। जो पास खेल रहा था वो जैसे पुकारा का परिणाम पुरुष लूत ने यम दूतों को की, आत्मा को बुझाने से रोक गया और वो आश्चर्य हो गए थे कि क्या कारण है। आज पहली बार मुझे भेजा था किसी को बुलाने के लिए, सुधार के लिए ने रोक लिया है। तो यमराज मराज ने क्या का वो व्यक्त छूना जिनकी वाणी से नाम नहीं निकलता है, जिनकी वाणी से नाम निकलता है, का उसको नहीं छोड़ना। इसमें आप क्या देख? इनाम तो आई नाम जो है, ये इस खलीबगका उपाय कली कली नाम होता। चेतना अग्रसर हुए थे इसलिए नाम का 4 करे और उनकी भविष्यवाणी को पापाजी ने बना लिया है। पापाजी जब पहली बार 1922 में मैंने अपने गुरु को गुरु बना रहे हैं, उनको देखते ही पहचान लिया। ये है वो युवा जो कि इस संदेश को शुदिहरकोलेमेंबुचाएगा, विश्वास गंभीर पान किया, सो रूप है। हम कहते है की भगवान के जो नाम हैं, चीनी जैसे भगवान है वो भी मेरे हैं, भगवान के गुण है, वो भी मीट है, पर हमारी जी में क्या है, अवधिया की मार है। इसलिए हमें मिला पर महसूस तो ध्यान से हई नाम लोगे तो क्या लाभ होगा, क्या लाभ होगा ये जो मैन है और आप फिर से चेतन क्या है और इस मैल को दूर करने का क्या उपाय है। परिणाम सो गोस्वामी ने ये साबित गोस्वामी थे अपने रहने के लिए रोज शाम को अलग अलग पेड़ों के और भगवान की खुशी के लिए क्या क्या सुन्दर महल बना, सुन्दर मंदिर बनाये। तो ये जो प्रसिद्ध मंदर है सबने किसे वहाँ प्रभु के आदेश दिया था और देश के अनुसार ये मंदिर बनाये। to chat चेतन रूप में शिक्षा दिया। पापा जी ने अपने अनुमान में में ये शिक्षा दिए कैसे वेरी सिम्बल फॉर्म और हर व्यक्ति इसका लाभ उठा। चेतन भाव पूरे 5 महत्वपूर्ण पर बल दिया। सबसे पहले उन्होंने कहा हमें सालुसनमेलेसालुसन अनेक रूपों में प्रगट होता। अब आपसे उत्तम भक्तों की संगत मे सकते है समानता के भक्तों के साथ और कम से कम याद रखें जब आपको उत्तम भक्तों की संगत मिले हमें प्रसन्न हो जाना चाहिए। क्यूंकि हमे ऐसा ज्ञान मिलेगा जिसके पालन से हम भक्ति में आगे बढ। जब अपने समानता के साथ व्यक्ति को मिला क्या होना चाहिए? अपने से कम ज्ञान के भक्त को मिला क्या होना चाहिए? अपने की भावना हो। तो चेतन मा ने कहा साल संग में रहोगे, साधु संग में रहोगे तो क्या प्राप्त होगा? असली ज्ञान प्राप्त होगा। शास्रों को क्या है प्रमाण से ब ये बताइए कि खलेगा में लोगों का उधार कैसे होगा? और कलिग में 2 दोष है। vishnu का साधन था san वही लाभ करने में प्राप्त हो सकता है किसके द्वारा चेतन रूप और इसके दौरान आपको असली संदेश मेरा नाम कहा और श्रीमद भगवत भागवत गज्न बड़ी कठिनाई से क्यूँ क्यूंकि इन गंध में है विज्ञान और जिवविज्ञान के सहयोग से अपने आप को आगे प्रभाव से बचा। श्रीमद भागवतम का आदि है और आगे भगवान के पूजा करना, इसे पूजा करना ध्यान से और भगवान अपने आप को आज दिया के रूप में अंतर है, कोई अंतर नहीं है और कोई अंतर नहीं है पूरी की पूरी ही चखने के लिए। और बिना चले गए। भगवान ने कहा कि भगवान ने के के प्याले को छुड़ाकर छुपा दिया और पुजारी को आदेश दिया ही पीछे का प्यारा न छिपाया है ब जाकर सो भगवान अपने भक्तों के लिए क्या करते और चोर भगवान के छुड़ाकर छुपाकर छुड़ाकर छुपा दिया ा तो चेतन में शिक्षा दे रे है हर लाभ उठा सकता है। और उन्होंने माय वालियों को बचाएंगे उन्होंने पूरे बाल में छा गया बुला उनके प्रभाव से है पूरे विश्व मे चेतना अपने भक्त की महिमा बढ़ाने के लिए क्या किया यह बताना चाहते है की मेरा जो भक्त है आज सी साउंड माइंड लगभग से राम सो cेतnbस्वयं भगवान है द्वारा। but my name as a ke nam he bhot meta भी met जो गुण हैं वो भी मीठे पर मेरे जी में क्या बीमारी है, इसलिए मुझे सो आप पूछोगे कोई उपाय है तो क्या है? उपाय क्या कहते हैं कहते हैं der hokar nam lo या उपदेश रucलेनीा और लोगे तो क्या शो बना है श्री शास्त्रा के जो श्लोक हैं, उनमें बड़े स्पष्ट रूप में आम्बेजिक साहित्य के निर्णय को so she is the supreme lord। हम आप लोगों की जो उमदेशहैजिलाहै, उसके में रुची देने और माई नाम जो है यही 1 उपाय है वाई नाम के विषय में जiताउdहोगे cm to tte nheoochanthesame take so i am in ruchi कई बार में रूची कैसे बढेगी में रूची, बोलेगी, कैसे शासन में रूची कैसे बढेगी और साल में हो उत्तम भक्त की संगत प्राप्त करोगे तो जीवन को प्राप्त हो तो उसमे को शिक्षा दी और ये ध्यान मे ज्ञान प्राप्त होता है कैसे? तो हमें शूल भक्तों की संगत में रहना चाहिए। उत्तम वक्त मिले तो आप अपने आप को भक्ति के कमान में आगे बढ़ सकते हैं। गुरु महा को मजा मनाज कश देना पड़ था सो भगवान ने मेरे कारण तुम्हें कह देना पड़ा था? क्या मुझे कोई वर्ड देना चाहते हो? ये वर्ड दीजिये या उस भक्त की भक्त की? मिलेगी तो मुझे वो ज्ञान प्राप्त होगा जिसके पालन से भगवान क्या मांगा? भगवान ने कहा मांगो, क्या मुझे वर्ज देना चाहते हो? क्या वर दीजिये उत्तम तो भक्त का मन बहुत ही पुराने हैं kis और
सब
सबसे ज्यादा प्रतीत कौन है? कौन है? ये है भग का भाव है मैं हूं सबसे भक्त किसी को कैसे गोस्वामी जब जा रहे थे, वो यह नहीं चाहते थे उनका शरीर पर से भरा हुआ है कि किसी जगनपुरी पुजारी तो उन्होंने क्या किया? और बग का भाव ये है किसके लिए है? मैं इसका istemal करूंगा। ye भाव hota this body belongs to the long to me and do not use this body for us, it please a long। सो ये विचार, ये भाव कैसे प्राप्त होता है, विभाव प्राप्त होता अगर आप भक्तों के संघ में रहे। बकरी भक्तों के संग में रहना। इस बेडी ंपॉर्टenट भगवान सो अपराधों से हमें बचना है। अपराध अपराध अपराध का बड़ा परिणाम। इससे आप अनेक उधारण करते हो। इस विषय पर अपराध से बचना चाहता ह। r shasan ban bhot mahtwapurn book as cat e books sense please on to understand men given understanding i really book papa pura 2 महीने के अंदर पापा जी बाल थे ये बंद, कम्पोज करके प्रेस छापे 2 mahine me now we should go home in this क्या करना चाहिए? चाहे अनेक भगवान मिला है और भगवान ने ऐसे सारी इस फिल्म क्या करो सो आज कथा में आप पढ़ते हो नन के नाम से 4 के द्वारा कैसे anti tan करोगे, उतना ही राम को 3 है अपराध कर रहे हो। और कई बार लोग जुड़ते हैं और साथ में सुरा वगैरह फिर आप भक्तों के संग में रहोगे और ज्ञान प्राप्त करोगे। तो फिर आप आप क्या देखोगे कि इतने ध्यान से करोगे के साथ आपके बेहतर बनेगा। तो दवा पहले स्टेज में है प्रांत और नाम को दूसरे स्टेज में क्या आप के बाल ध्यान है और अपराध से बचना चाह प्रयास और सबसे सुविधा नाम क्या है? अपराध बचे हुए तो हमारा प्रयास होना चाहिए क्या ह नाम, भाव और शुद्ध नाम का काम अपने आप को बड़े ध्यान से, इन अपराधों से बच के क्या करे और ऐसे करोगे तो भी मेरा हिजीकीसजाएग और
budi jab
क्या क्या बढ़ेगा wo to chat g n i तो ये हम सबको आdesisi r name ke dwara so we should the holy name and the holy name is coming from a i नाम कहाँ से आ ा है? nam सो आप लोगों का आदेश है कि माई नाम का चालन करे और भारी नाम का प्रचार कर। सका क्या prinam सो we should मेडी in the instruction people get प्रॉपर अकेले प्रचार करे आपके दिल में तो उन में कोई भी था। 1 भक्त बनाया था। 4 फिर भगत ने प्रचार को बुलाया, तो हम जितना प्रयास करेंगे, उसी के अनुसार हमें देते है ये ब। i ma mason won the mata so will stop it this point and take on question
a
सर
2 प्रश्न है कि क्या 1 विषय ये जान सकता है कि अपने गुरुजी बत्ती को कितना समर्पित रहे हैं और समर्थन की भावना
कैसे बढ़ा सकता है? भावना बढ़ेगी, जब आप शिक्षा का पालन करो, जो वाणी है, उसका पालन करना, बगरा वाणी का पालन कर। बाबाजी कहते हैं 3 प्रकार के शिष्य होते हैं। ऊंचे शीनिंग अच्छे से हो है। वो जानता है, क्या है गुरु की इच्छा उसका पालन करता है, उसे शेन फिश है। जिसे जो जानता है, यह है गुरु का दे, उसका पालन कर रहा है। उसे चाहे, गुरु कुछ भी करे, वो करेगा वही। ये हमारे ऊपर निर्बल रहता है। यहाँ तक पहुँचना चाहते हो। cisce
मेरा उस की, हम अपराध करने की प्रवृति को कैसे खत्म करें? और जो अपराध करते है उनके लिए प्रयास किस तरीके से करें
सर उपाय है और ओर अपराध मत करो जो होगे जो हो गए, जो गलतियां हो गई हो गई। और मत करो जब आप लेते हो कहते हो अब पॉइंट्स को रिप्ली नहीं करना पापा जी 1 समय पहले शिक्षा ले ले नो worsening प्रात हुई को समझ गए। यह गलत क्या है? तो उन्होंने अब से हम केवल वाणी का उपयोग करेंगे ं में कार्य चुके हैं। आज से हम तो भगवान को बताएंगे हम इतिहास होरहा था तो भक्ति करेंगे। तो फिर
कुछ
जोर से
मेरा प्रश्न था कि आप के है आपने उस दिन 2 उदाहरण दिए। माधवी का 22 मतलब शुद्ध इससे लोरिफकशननही। लेकिन अभी हम देखते हैं कि जब हम सी टेक्निकल के बाहर जाते हैं तो थोड़ा सा बीजिंग होता है, तब मतलब यह होता है कि उसका गौरी करने लगता है कि मैंने इतने बरस बनाए तैने जुड़े। लेकिन आप अपने लेक्सस में कहते हैं कि प्रपात की बुक्स और कृष्ण की कृपा से होता है, तो उस बात को कैसे हमेशा ये स्माल में रखे की ये पाक और लोगपाल कृष्णकी कपास से होता है।
how do in no olesmrsiopatan prison? when we prीsपीkेtरिजल्ट? प्रभाजी ने सारे विशु में प्रचार किया और जब बलराम कहते थे प्रभा जी, आप की केपर से बिना प्रचार हो रहा है, प्रबल कहते थे न is by the modi guru to credit wine
man was some time here and asin services that a intevitaliseof specialized in me so that is that it s propetigwiththe genlhasofroolis so it s situation, we have set services overtime become
we should be cured body, she never field current in has to face challenge challenges are an opportunity for the increases defenses on krishna would discussing principle comfort thing so when even thing is you mike blanc, then the lord is not please we should be as chalanges puri in two thousand
t बहुत बहुत सुन्दर, बहुत बहुत धन्यवाद। मारे जैसे श्लोक से विशवासो भगवान हमारी रक्षा करते हैं, इससे हमारी आत्मा शरीर दोनों की रक्षा होती है। और जिस प्रकार हमारे बंग्लादेश, हमारे भक्तों पर धतयाचारहोरहेहै उनके प्रति घटनाएं हो रही हैं, तो उन भक्तों में हम क्या कर को लाभ ले, ये कार वाले भक्तों की बहुत अत्याचार हो रहा है। तो कैसे सामने बाल वाली रक्षा कर रही
है बांग्लादेश पूछ पग जो है ये उम्मीद नहीं करता या कोई संकट नहीं आएगा कोई कठिनाई का सामना नहीं कर पड़ा भक्त, यही सोचता है। बहुत कष्ट कष्ट क्लेश के है। और इसलिए पढाइयों का भी सामना करने से डरता नहीं है। हिंदी बनाने क्या कहती है, बलुसंदतहाशहभगवान आप मेरे कशों को बढ़ाओ कोई ऐसा कहता है, क कारण है सब कर बढ़ते हैं, ज्यादा गहराई से चिंतन करते हो और जितना की se so kharab soteotioscatof challenges actually pro was coming to the left of new york going and the modes, wore pink bra please come to the wire take look at me, please dont take away in priplytostruggle for krishna so happy an e o pgt comfort
महाराज जी, कई बार हम लोग को इन प्रश्नों का सामना करना पड़ता है कि आप लोगों को केवल भगवान श्रीकृष्ण का प्रेम वाला, भक्ति वाला स्वरूप है, उसी की उपासना करते हो। भगवान श्रीकृष्ण का जो चक्र धारण करने वाला रूप है, आप उसकी उपासना नहीं करते। आप लोग प्रेम की बातें करते हैं, लेकिन जहां पर रक्षा की बात आती है वहां उठाना पड़ता है। आपके पास साफ्ट में हार शब्द नहीं उठाते तो ऐसी ही चीजों को हम कैसे काउनट्रैक्ट करे या फिर कैसे आंसर करे दे।
हम सुरक्षा करते हैं के वी हैव
मि
durga a lot is always protecting body, hespul fatter the lot dus। 1 समय 1 धार्मिक राजा था उसका प्रधान मंत्री प्रधान मंत्री जो भी होता था वो कहता था भगवान की कृपा है। फिर 1 दिन उसके 2 उंगलियां कट गई ग 2 उंगलियां क्यों कर गई है? भगवान विश्वास है, प्रधानमंत्री करते है, गुस्सा हो गया राजा के शिकार कर रहे हैं। क्या हुआ शोर आज को पकड़ लिया डाकू ने उनको भोग लगाये थे उनको अर्पित दुगा के में उन्होंने देखा की इसकी 2 उंगलियां मिसिंग है, मैं सुनूंगा तो छोड़ 2 इसको हम इसको हम नहीं स तो राजा भागा भागा गया जाकर बोला छोड़ 2 राजकुमार को भगवान जो करते हैं अपनी भलाई पर मुझे ये बताओ मैंने। भगवान ने मुझे ऐसी प्रेरणा क्यों दी तुम में जेल में डालो तो प्रधान जेल में नहीं डालते मैं भी आपके साथ ज्यादा शिकार कर पकड़े गए
की
मेरी सारी उंगलियां है, सो बस हैव दिस कॉनफिडेंस? lodutidasfora benefit in you chai principles as one of them a fait cristian will protect you and fit for a benefit। he won a।
काफी सारा ज्ञान लेते हैं, क्लास ट्रेन
करते हैं, पर जिसे क्लास से जाते
हैं तो जान वापस भूल जाते तो ज्ञान खेलता नहीं है मैं तो इसलिए
शासन में कहा गया है रोज भगत सुनो ये कहा गया साले रोल, क्यूंकि भगवान मन में है, हम भूल जाते हैं से पूछा जाए 24 घंटे पहले क्या कर रहे थे आपको बड़े ध्यान से सोचना पड़ेगा वेरीपोर sind every day, here every day
at a o। भारत की
क्या
फ्री के जो
लोग
उसे कैसे, हम 2 लोग पहुंचे इसके लिए कुछ आसान रास्ता बता दे
जो जो सान ने दिया उसे ज्यादा
क्या
है
क्या करे क्या करे पर गई डिस्काउंट डिस्काउंट भी प्रभा जी ने पूरा discount guru हेलो हरे हरे कष्ण
गुरु महाराज जी अभी कुछ समय पहले कश्मीरी 2 1990 घटना हुई थी अक्टूबर बहुत ही ज्यादा ज्यादा बर्बरता उनके पर इतना जादा अटैक हुआ था, बहुत ही दुखद घटना हुई थी जो हम लोग मूवियों को दिखाया भी गया, इतना बहुत ज्यादा ही उसके साथ अत्याचार हुआ था। तो ऐसे अत्याचारों, ऐसे अत्याचार जो हुए थे और इनको तो उनके लिए हमारा क्या कंट्रीब्यूशन होना चाहिए जो कश्मीरी पंडित पर जो अत्याचार व
उनकी मदद कर सके समय उक्रेन और रशिया का यूज हो रहा है तो हजारों लोग पहुंच रहे है हमारे जो मंडल पोल लाजे शाद जिंदा हो सके हम लोग भी पैक तरीके से सहयोग देते। हैं इन दान का सामना करने गे
thank you for
क sorry
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लeजिem गुरु है जो जेसे
की आपके खिलाफ जो पास बताया जिसमे की वो मेरे योग से न जाकर के जो हर सा रहे तो इससे से की वो जो बार से इतना डिब्बे दे तो मारे
हम एक्टर हैं
तो मछली खाते हैं तो ऐसे ही कुछ देख के हम इतना उनकी विभिन्न
को अीशिटनहीपेकिसकी किसकी देता
तो उसको हम इस ज्ञान
like sanatan gosms the divinity
in the price of jagannath, we do prosan e a a e a in any bran पचाना चाहिए bk me no one should suffer चाय वाली सड़क किसी वैन case that should be har mol sumas man treble me going to travel him no dead for that ok
सो मच मच से, गुरु शिष्य का सम्बंध मन से है, और वो शरीर के होने
हमें सब समझना चाहिए शास्त्र की दृष्टी से, और शास्त्र में ऐसे उपदेश प्राप्त करते हो और अब भक्ती करते जाओ उन के द्वारा। you better undestenpvisadin warcianfaver and you to mikey feel the connection को
धन्यवाद। मेरा पस्त है कि गुरु 1 सिसको व्यक्तिगत कुछ आदेश देते हैं और दूसरा स्तर के प्रवचन में भी गुरु स्टेसन दोनों में क्या
presnal instructions and instructions for lectures on of the devotes differe
गुरु जी कल इंस्ट्रक्शन दे पर्सनल इंस्ट्रक्शन और दूसरा है कि जैसे इस तरह के लेटर्स, मूवी, कैसे इंस्ट्रक्शनस मिलते है तो दोनों में क्या
अक्सर गुरु का जो इंस्ट्रक्शन है वो 1 बराबर कहा जाता है, चाहे शिष्य हो, चाहे पावे में हो या अगर, कोई जो प्रिंसिपल इंस्ट्रक्शंस है जान में सेव insect
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