माधवेन्द्रपुरी कथा, भगवान क्यों बने भक्त के लिए चोर | 7 March 2020 | Kharghar |Gopal Krishna Goswami

In this devotional discourse, Gopal Krishna Goswami recounts the Madhavendrapuri episode, focusing on a devoted saint (referred to as Malanpur, Manpur, or similar) whose life is wholly dedicated to the worship of Lord Gopinath. The saint lives in constant contemplation, subsisting on minimal food, and receives a divine vision instructing him to locate a hidden idol of Gopinath that had been concealed under bushes during the period of Muslim rule to protect it from desecration. Guided by repeated dreams, the saint, along with fellow devotees, retrieves the idol, performs elaborate purification, abhisheka (ritual bathing), and installs it with offerings of milk, water, chandan (sandalwood), and a massive quantity of bhog (food). During the installation, the deity reveals a playful act: he steals a cup of sweetened milk/khir (a divine delicacy) and hides it behind a curtain, earning the epithet “Makhanchor” (butter‑thief). This act is portrayed as a divine test and a source of joy for the devotees. The narrative weaves historical context—mentioning the Muslim conquest, the concealment of idols, and later restoration—along with moral teachings about selfless service, perseverance through trials, and the importance of pure devotion. The speaker emphasizes that true devotees receive direct instructions from the deity in dreams, and that hardships are divine examinations meant to strengthen bhakti. The talk concludes with reflections on the significance of rituals, the symbolism of chandan and milk, and an exhortation for listeners to emulate the saint’s unwavering dedication.
Chapters
वो ऊँचे कोटी के भगत े छेत्र मा जगा पुरी मंदिर से यमुना की तरफ गये गए। भगवान गोपीनाथ का बिगड़ा देकर नाचने लगे, बड़े उत्साह से और 1 हार गिर गया। क्या कोपिला लोगों के गले में तुम ने मैं कथा सुनाता हूँ, जो कि मैंने अपने गुरु से सुना था। मानपुरी किस शिशे कौन थे, ईश्वरपुरी, ईश्वरपुरी किसके गुरु थे, कितने मानपुरी ये अनेक से थे, इनमें 1 थे, आद्वेदाचार् 1 थे, ईश्वर पुरी 1 से। रामचंद्रपुर। तो माल पुरी बहुत ही ऊँची कुटी के भक्त थे। 24 घंटे जुड़े रहते थे भगवान के चिंतन में और कुछ खाते। अगर कोई उन्हें कुछ दे ता था। अगर कुछ दे नहीं तो भूख रहते थे। आपका भी यही भाव है। आपको कुछ दे दिया तो खाओगे तो भूख रोगे नहीं, हमारा ये भाव ने तो भाव लड़का लेना है। तुम पुरी ने 1 दिन गोवर्धन पीक वडीगाम समाप्त की और गोविंद कुंदन विश्राम कर रहे थे। वरदान परिक्राम करके 1 बहुत खुबसूरत गवाला उधर आया। ग्वाल मटके में दूध लाया था वाला ने कहा बादल पुरी, तुम मझे भूखे नजर आते हो। तुम्हें यह दूध या हूँ तुम्हारे लिए पियो। मैं थोड़ी देर में लौटता हूँ। मडका लेने के लिए। मानपुर ने इतना खुबसूरत बाल कभी नहीं देखा था। वो इतना मधुर कंठ कभी नहीं सुना था। सोमानंद पुरी ने राह देखी कब हो बा लगाएगा मडका लेने वो लौटा नहीं मालंद पुरी को हल्की सी नींद ले। भगवान ने a puri को sp me agवanनाmhनndpuri मैं तुम्हारी भक्ति से बहुत प्रसन्न हूँ। मैं चाहता हूँ कि मेरी मूर्ति यु दबी हुई है। इस स्थान पर मुझे गर्मी लगती है तो मेरी स्थापना करो। ये इस मूर्ति का न है। purak पूरी पृथ्वी पर थे। उस में भारत में मुसलमानों का राज्य था। और मुसलमानों ने कई मंधोंको नष्ट कर दिया था। और जो पुजारी थे वो मूर्तियों को उठा कर जयपुर ले गए। जयपुर में हिंदू राजा था। जयपुर का कौन नाम है। गुप्त विंदावन और कईयों को नाइस कर दिया जाता है। मुसलमान पति किम को छुपा लिया था। मिटटी के नीचे तो भगवान को गर्मी लगती थी कि गोपाल विग्रह को छुपाया हुआ था। तो झाड़ियों के नीचे पूरी ही भगत इतना प्रसन्न हूँ। मैं चाहता हूँ तुम मेरी स्थापना करो। मुझे बहुत गर्मी लग रही है। अगले दिन महान पुरी ने काम के सारे पैसे लोगों को बुलाया कहा। गोपाल ने मुझे सपने में ये आदेश दिया है कि उनको छुपाया हुआ है। झाड़ियों के नीचे और उनको खोज के स्थापना की ब गाँव लगा। ठीक है। सब बड़ी बड़ी कैंची ले आये। झाडियों को ऊपर से काटा खोदा खोलने पर गोपाल विग्रह का दर्शन मिला बहुत भारी बिग रहा था। बहुत भारी। मुझे उठाने के लिए कई योगी योगी आवश्यकता से मानपुर के निर्देश में वो बिगहा। जो छुपा हुआ था, उसे निकाल कर धोया और साफ किया। भगवान ने कहा मेरी स्थापना करो, मुझे गर्मी लग रही है। मानपुर ने 1 दिन के अंदर सारी अभिषेक की योजना कर ली। पजकभ्याऔपरजमरीता से भगवान का ह अविषय किया भील और गिया मकर में विशय किया, गोविंद कुंड से 900 लोटे पानी लाए। भगवान का स्नान करने के लिए जो भगवान का विषय किया और पंद्रह ब्रामणों ने भगवान के लिए भोजन दिया। तो 2 दिन के अंदर मार पुरी ने मूर्ति स्थापना का प्रबंध कर दिया। भगवान अपने आप को आचार विग्रह के रूप में प्रकट करते हैं। आज के विग्रह में कोई अंतर नहीं, कई बार हमारे लोग करते हैं ये लोग मूर्ति पूजा मे विश्वास करते। आपने सुना होगा आय समाजी आया वाली उनका क्या सिदाना वहां का कोई रूप नहीं है। तो चेतन मापने विचार का विरोध किया। तो मालनपुर ने 2 दिन में पूरा प्रबंध कर दिया और ब्रज के हर खानान जुड़ा सेवा में भगवान कृष्ण के को अनकूट की योजना की थी, वैसे रोज अनकूट किया जाता था। गोपाल की खुशी के लिए अनंगुटमतलब चावल से 1 पहाड़ बनाते हैं, जैसा कि कृष्ण भगवान के समय हुआ था। इस प्रकार ठाकुर जी की स्थापना हुई और मानद पुरी खुद पुजारी थे। सारा दिन अकेले मदन पुरी भगवान की पूजा करते थे, जैसे भगवान सोने जायेंगे। 9 बजे तो जब भगवान को सुना देते थे, उसके पश्चात लन्दन पुरी थोड़ा सा दूध पीते थे। वह थी उनकी खुराक। सारा दिन कुछ नहीं करना, सिर्फ भगवान के विगरा की पूजा, आरती सब अकेले करते थे। तो भगवान ने सपने में 1 और आदेश दिया। भगवान ने कहा बाल पुरी, मैं तुम्हारी सेवा से बहुत ही प्रसन्न हूँ। तुमने मेरी स्थापना कर ली है। मुझे अभी भी गर्मी लगती है। मैं चाहता हूँ पहले चंदन लेकर आओ। चंदन लाने के लिए। आनंदपुरी को गरदन से जगराज पुरी तक जाना था। अगर आपको कहें राधा, मदन बोल के लिए चंदा लाओ आप हो गए। ठीक है ट्रेन की टिकट 2 या ट्रेन की टिकट 2 पर स्वीकार कर लिया चंदन लाने के लिए और बिगुल पैदल चले वो ना जा लाला। कई बार भगवान हमारी परीक्षा देते हैं, हमें कठिन सेवा देते हैं, यह देखने के लिए हम पास होते हैं या फेल होते हैं। वाद पुरी गा, आप क्या चन्दन चन्दन लाने। अकेले कैसे जाऊंगा, इतनी दूर नहीं। महा ने कहा चल न लेकर आओ। तुरंत स्वीकार करे 2 बंगाली ब्राह्मण आये थे, पुरी ने ने दीक्षा दी शिक्षा दी और मदनपुरी आ गए। चले जगलपुर रास्ते में, वो पहुंचे रेमुना में, रेमुना बढ़ा में। यहाँ की प्राचीन शिषीरालागोपिनाद की स्थापना हुई थी और ये ऐतिहासिक मंदिर है। कहा जाता है कि इस बदनकाविगाहवनराम ने अपने हाथों से बनाया था। तो रामचन्द्र पुरी कुमार पुरी लेमिना पहुंचे उनकी इच्छा दी। यहाँ उन्हें गोपीना का दर्शन मिले और उन्हें पता था इस मंडल में बहुत ही अच्छा टेस्टी प्रसाद भगवान को खिलाया जाता। खास करके इस बंदगी खीर जो भगवान को सौपी जाती थी, उसका नाम था क्या था नाम अमृत के ली। ऐसा टेस्ट जो अमृत स्वरग में बन के आता है। तो माल पूरी की इच्छा थी। अगर मुझे चखने टीज खीर मिल जाए, मैं लौट कर अपने गोपाल के लिए भी ऐसा ही प्रचार बनाऊंगा। ये इच्छा प्रकट हुई जबकि भगवान को भोग लग रहा था। अक्सर नियम हैं भोग लग जाए। उसके बाद जब भगवान को उठाते हैं उसके पश्चात भोजन खा सकते हैं। और माधवन पुरी के मन में भावना प्रगट हुई। भोग मालनपुर शरमा कर चले गए बाजार के बीच में यहाँ की, उन्होंने 1 बैठक में बैठ कर क्या किया। गवान का नाम ले रहे थे, भगवान ने क्या किया भगवान ने रोज शाम को। इस मंदिर में 12 प्याले खेल के गान को भोग में लगाया जा रहा था। भगवान ने देखा उनके पुरी चखे बिना चल पड़े हैं। भगवान ने क्या किया? 1 ही है प्याला चुराकर जैसे हैं, ऑर्डर के पीछे पड़ रहा है। पर्दे के पीछे छुपा दिया और जाली को सपने में मैंने अपने प्रसिद्ध भक्त महानंद पूरे की खुशी के लिये 1 खीर का प्याला चुरा कर पीछे रखा है। ले जाकर भगवान को पा। इस लीला के पश्चात भगवान का नाम बदल गया। भगवान का नाम पहले था राधा गोपीनाथ और प्यारा चुराने के बाद नाम बन गया कि चोर। govida जा छोड़ आपको अच्छा लगेगा न चोर बोला अपमान जब भगवान को चोर बुलाते हैं, भगवान तो खुश होते हैं। नाम है मखन चोर, सुनाइए न माखन चोर माखन चोर का क्या जो माखन चुराता था, घरों में जाकर बताएं। इस माता को शिकायत करती थी। आ का बेटा आकर हमारे घर में चुराता। मखनपकेपुबताओऔर कभी पकड़ नहीं पाया। तो भगवान को म छोडा तो ग्राधकोपिनर का नाम बन गया कि चोर को बिना भगवान को आप चोर भी बना सकते हो। और लीला के समान मन तो न पूरी ने की प्रशंसा के लिए भगवान ने 1 का प्यारा चुरा कर रख दिया, कहा भगवान के पर्दे के नीचे नीचे तो पुजारी को। भगवान ने सपने में कहा मैंने 1 शरीर का प्याला चुरा कर पर्दे के पीछे रखा है इस खीर के प्याले को। पर बीए पुचा जारी हैरान हो गया। भगवान ने किए का प्यारा चुराया है ये संभव, हो सकता है कैसे? और पुजारी गहर में यहाँ कोई मान पुरी नाम का पुरी ने मैं हूँ मालनपुर जाए। तुम जानते नहीं तुम्हारा क्या सौभाग्य है तुम्हारी खुशी के लिए भगवान ने क्या किया? जा है आनंदपुरी इतने प्रसन्न होंगे या उन्हें पता लगा कि भगवान ने खीर का प्याला चुराया है, वो नाचने लगे खुशी के साथ। और पूजा कितने आनंद में है। वो समझ गए। भगवान ने क्यों इसके लिए चुराया या तो पुरी उन्हें शक था। अब पूरे में खबर फैलाएगी खबर फैल जाएगी ह। भगवान ने मुझे 1 प्यारा चूरा कर दिया है। उनको उनकी प्रशंसा होगी, उनको प्रतिशत दिया जाएगा, आदर दिया जाएगा। साधारण समाज में हम चाहते हैं, वह प्रतिष्ठा हो, ठीक है ा वहाँ गुणगान हो, हमें आदर दिया जाए। और जो उत्तम कोटी के भगत हैं वो ये नहीं चाहते। वो ये नहीं चाहते, उनका गुणगान हो, वो ये नही चाहते, उनकी परसंसा हो, वो नहीं चाहते है, उनको हार पे, हार चढ़ाया जाए। ये भग्गाभावानलपुरी ने सोचा मैं रेमिना में रहूँगा तो सब यहाँ गुणगान करेंगे। वो चल पड़े कहा जगनाल पुरी जा के उन्होंने जाना था। चंदन इकट्ठा करने गए, वो जगनपुरी गए, वहाँ उन्होंने सरकार के अधिकारियों से चर्चा की, सबने योग दिया और एटी टू पाउंड लंदन और राउंड्स कैंपर प्रबंध किया हाथ में 1 सेवक उन दिनों में क्योंकि मुसलमानों का राज्य था, वो चुंगी वाले थे, वो भी मुसलमान थे और कई वाहनों को वो तंग करते थे। तो जगनपुरी के अधिकारियों ने पत्र दिया ये चन्द नाम दे रहे है। और भगवान चले वहाँ जाने के लिए। रास्ते में। फिर वो रेमुना में रुके रमना पुजारी था। उसने बचा लिया क्योंकि पहले ही उन्होंने उन्हें खेकाप्ादादिया था। और पुजारी ने उनका स्वागत किया। और उस दिन रात को भगवान ने पुरी को सपने में 1 और संदेश दिया ने कहा बालपुरी मैं तुम्हारी भक्ति से बहुत ही प्रसन्न हो, तुम्हें मैंने परीक्षा दी थी, तुम पास हो गए। पर मैं ये नहीं चाहता कि तुम्हें चन्दन उठाकर, गोड़ना लगाओ चौर सौ पंद्रह सौ मील की तरा, वहाँ कोई चिंता थी मुसलमान अधिकारी तंग नहीं करे। गा मेरे में और गोपिनाथ में गोपिनाथ कौन हैं? जमुना का बिगड़ा गोपाल कौन है? गोदान का बिगड़ा गोपाल में, गोपिनाथ में कोई अंतर नहीं। येही चंदन जो तुमने मेरे लिए इकट्टा किया, ये दे 2 पुजारी को और ये गोपीनाथ को लगा गोपीनाथ को चंदा लगेगा, मेरी गर्मी भी कम हो जाएगी। भगवान ने 3 बार आदेश दिया, सपने में मालपुरा करी बार आदेश दिया। मुझे छुपाया हुआ है, खोजकर निकालो दूसरी बार आदेश दिया, अपने में जाओ जगदलपुरी चन्दन लानेले। तीसी बार आदेश दिया। यही चन्दन लगा 2 किसकी सेवा में, मोमीनात की सेवा में। तो आप कहोगे? ये तो बड़ा अच्छा साधन है। हमें भी सफल में भगवान आदेश देते रहते है। कल? भगवान ने आदेश दिया जॉब करना बंद कर। 2 मुझे आदेश दिया ये करो। तो प्रॉपर जी कहते थे जब आप शुद्ध भगत बन जाओगे तो आपको भगवान सपने में आदेश देंगे। जब तक शुद्ध भक्त नहीं मानते, आपको मान प्रतिनिधि से शिक्षा लेनी चाहिए। पुरी शुद्ध भग। जब मानपुर पुजारी के जाने को कहा, भगवान बड़े खुश हो गए। ये मालपुरी के अनेक शि छाया एंक थे। ईश्वरपुरी एंक थे रामचंद्रपुर ईश्वरपुरी, जो शिष्य थे। बड़े बेटे अमृता के साथ गुरू की सेवा करते थे, बुढ़िया में उनके मल को साफ कर दे थे, उन्हें कंधे में उठाकर ले जाते थे, पिशाब को साफ करते थे। और मालपुरी बहुत प्रसन्न थे। इशणपुरीकेएक और शिष्य थे, जिनका नाम था रामचन्द्रपुर। रामचन्द्र। पुरी का क्या भाव था। पहले सन्यासियों की सेवा करो, फिर निंदा करो। जब कोई सन्यासी आते थे, पुरी में बाबा बंडारा हिलाते थे। सन्यासी कहते थे बस बस बाद हम सन्यासी इतना नहीं खा सकते हैं। अरे महा प्रसाद की ही इज्जत नहीं करोगे। यह तो अपराध हो या खाने देख। ढोगी। सन्यासी सन्यास ले लिया है। आतंक से गुजारा वो उन्होंने बहुत प्रयास किया कि चेतन महा प्रमुख के चरित्र में कोई कमी निकल आए, कोई निकली नहीं। 1 दिन बाद 1 दिन रामचंद्रपुर गए थे, कहा माँ प्रभु के कमरे में। वहाँ उन्होंने देखा चीटियाँ चल रही है। उन्होंने कहा लगता है हमारे सन्यासी ने कल बहुत मीठा खाया है। इस कारण चीटी चल रही है। चेतार का सिधार था, सन्यासी के चरित्र में कलंक मी होना चाहिए। जैसे कि सफेद चादर में 1 काला दाग हो, वो दिखेगा या नहीं दिखेगा दूर से ही दिखेगा, सिन्हाजी में थोड़ा भी कलम को दूर से दिख जायेगा की आप बहुत मीठा खाते हो। उन्होंने अपना खाना 5 गुना कम कर दिया। और जब ने भक्त भक्तों ने देखा कि इस राज पूरी के कारण वहाँ पग ने अपना खाना कम कर दिया। सब को बड़ा और हालांकि रात पूरी प लोगों की निंदा करे थे। माँ जब भी रामचन्द्र प्रभु को, रामचंद्रपुर को देखते थे तो क्या करते थे, उन को प्रणाम करते थे। ये रामचंद्र से गुरु के गुरु। तो महाजवपुरामजदपुरी ये सन्यास में कमी निकालता था। महाप्रभु में भी कमी निकाली। तो उनके गुरु मलपुरी हे। इन अंतिम दिनों में विधम्रताके प्रभाव में आकर कह रहे थे, मेरे में कोई पुल नहीं है। मैंने और प्रेम प्राप्त नहीं किया, वो पराली हो गए थे। माया वालियों का प्रभाव था। कहने लगे अरे मान का चिंतन क्यों नहीं करते? तो गुरु ने कहा तुम मुझे मायावादी की शिक्षा दे रहे हो। देखा जाओ भी ना जोर से दूर, तुम्हें देखते हुए गंगा ये जीवन बन जाएगा। तो 1 शिक्षक को ये वर दिया कि तुम्हारे माध्यम से सारे विश्व में प्रचार बढ़ेगा जो कि हरपुर ने किया, जिन प्रभु और प्रापा द्वारा। और राजनपुर। उसने वर दिया कि तुम निकल जाओ बिना जोन से और राम पुरी माया वाली बन गए। पापों के परिणाम के प्रभु इस लीला से बड़े प्रभावित थे। और माँ बाबू ने कहा जो भी इस लीला को सुनेगा उसके मन में भगवत प्रेम। सोचे दिन हम आप लोगों के पेशे में 3 प्रसिद्ध ग्रंथ है। यहाँ से ज्ञान मिलता है। छेदी चिली ने भागवद र चि मांगा। तो ये संक्षेप में आपको वाम पूरी कथा दी है। और आपने तो पूरी ने अब देखा के वो ही लड़का जो मटके में दूध लाया था। वो भगवान है। तो पुरी शर्मिंदा हो गई। मैंने भगवान से सेवा ले ली। जो खुद के भक्त हैं, वो सेवा करना चाहते हैं। पर लेना नहीं चाहते। तो वो क्या ने भगवान से सेवा ले ली। फिर उसे प्रसन्न थे। भगवान का दर्शन प्राप्त हुआ। तो मालपुरी भगवान के सनाथन साथी। मालनपुर ने उदाहरण दिया कैसे हमारा व्यवहार होना चाहिए। दिन रात वह से में जुड़े रहते थे। नाम के उचारण हमे भी के जल में रूची लेने है। पुरी से प्राथना करो को आश्वान क्या हम सब में भक्ति भावना जाले। आदद पूरी की गो प्रबल कोई प्रशन है। किसी का? गुरु होने के बाद वो मा संगत में रहता था। वो हमारे संगत का प्रभाव पड़ता है, इसलिए उसमें आदत हो गई थी। सबक हमें कमजोर नहीं निकालना। अब चेत जाना कब है? पर जो चित्र कौन है, स्वयं भगवान है। फोन की नेक लीला में ये लीला बड़ी पसिद्ध मानी जाती है और कोई प्रेशर नीचे बिछे है। आप लोगो को सुनाई दे रहा था। पीछे हाँ कि ना ये गोपाल विग्रह इस समय ना द्वारा में है। गोपाल विगरा की स्थापना हुई थी 5000 साल पूर्व, फिर जब मुसलमानों का शासन शुरू हुआ कोई 700 साल पूर्व, तब उन्हें बचाने के लिए पुजारियों ने झाड़िया उन के नीचे छुपा दिया कि कोई मुसलमान सेनापति घूल नहीं पाए और फिर बादल पुरी ने भगवान के आदेश के अनुसार इस विधा की स्थापना की बड़े धूम धाम से 2 दिन में पूरा बंद कर दिया बादलपुर का उदाहरण देखो रोज भगवान की सेवा करते थे अकेले लगी पुजारी दिन में वो कुछ नहीं खा ते थे सोने से पहले थोड़ा दूर भगवान को लाने और जब भगवान ने कहा चंदर लाव मेरे लिए 2000 मील की यात्रा पैदल की उन्होंने आपको बोला जाए ना मधमोलेदूरचनलाऊ tit, भगवान ने मानद प्र पहले परीक्षा ली, bodktinktinseai puri sfl हो गए i ka badla muslman to आजकल आप सबको करुना वायरस की चिंता है मे 1 नाम करुणा नहीं है वक्त ने करुणा बना गया तो करुणा वायरस मतलब दया का वायरस करूणा का मतलब है दया करुणा वायरस तो हम रोज फैलाते हैं हमारे भक्त भी 1 वायरल क्या बुलाते हैं करुना वायरस तो पुजागाबजसा svewlseokenivol question yes last question she s a question led led a question on stop द स्टोरी आप ने बताया ये लीला को कोई भी सुने गए वो शुद्ध बहुत सारी जगह पर भगवान की लीला के बदले ही कहा जाता है मेरे अंदर कुछ परिवर्तन नहीं हो रहे तो मेरे अंदर क्या कमी है परिवर्तन हो रहा है अगर परिवर्तन नहीं हो रहा होता तो अब इधर होते नहीं आ भक्तों को लगता है हम में कोई परिवर्तन नहीं हो ा परिवर्तन नहीं हो रहा तो भक्ती छोड़ दोगे छोड़ा नहीं देता हो रहा है पर हम चाहते है और तेजी से हो हमें भी प्रयास करना पड़ेगा मान पुरीने ये कठिन आदेश स्वीकार किया चंदन दाऊ तो हमे भी भगवान को के कठिन कार्य को स्वीकार करना ये राधा मदर मन का मंदिर इतने सालो से बंद रहा है और बन रहा है क्यूँ अभी तक बना क्यों नहीं हम लोग कोई सेवा नहीं कर रहे हमें भी सेवा करनी चाहिए ऐसा भाव वाला कहते हैं हा वो सरदार हो मजे मजे में जाएंगे भाव वाला नहीं हमने भी घर घर जाकर ईंट मांगनी है इतना ने के लि के nyvolqवestion कैन वी कैन आप मन भटकेगा जब जब जॉब कर रहे हो ध्यान से जॉब पर सुनिए इतना तो आप कर सकते हो जब जॉब करते हो और कुछ का मत करो केवल जॉब करो जैसे प्रसाद खाते हो कोई बार बार बीच में टोकेगा आप क्या कहते हो मुझे शादी में खाने को बाद में आता है न उसी पर का जवाब जॉब करने बैठे और कुछ मत करो वो मंच फिर हो जाएगा ओ किसाल स्टॉप में हाई क्रिष्णा हाई ग्रे हर हाल हर हाल हाल।
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