77th Vyas Puja Mahamahotsava - Srila Gopal Krishna Goswami | 3rd Sept 2021

The video records the 77th Vyas Puja Mahamahotsava held on September 3, 2021 in honor of Srila Gopal Krishna Goswami. The event combines traditional Vedic worship, extensive kirtan of the Hare Krishna maha‑mantra, and a series of devotional speeches by senior ISKCON devotees. Speakers praise the guru’s spiritual achievements, recount his contributions to ISKCON (temple construction, book distribution, missionary work), and announce community initiatives such as new temple projects, distribution of the guru’s writings in multiple languages, and upcoming service opportunities. The ceremony also reflects on the challenges posed by the COVID‑19 pandemic, expressing gratitude for unity and resilience among devotees. The program concludes with collective prayers for the guru’s health, continued service, and the spread of Krishna consciousness, interspersed with repetitive chanting and devotional poetry.
Chapters
हरे कृष्णा हरे कि कृशन कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे
हरे रे
हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे
हरे
हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे
हरे
हरे हरे हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे हरे हरि चुना चुना हरे हरे हरे राम रे राम राम राम हरे हरे चुना हरे हरे हरे राम राम राम हरे हरे कितना हरे कितना कितना कितना हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे
हरे
हरे हरे हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे
हरे
कृष ना हारे कृष ना
कृष्णा कृष ना हरे हरे
हरे रामा हरे रामा
रामा रामा हरे ahaरेha अरे कृष ना हर कृषना कृषना कृषना हारे ह रे हरे रामा हा रे रा मा rama rama hare hare
हरि नाम संकीर्तन की
जशिलप्रपदजगोपवनंद हरि हरि बोल
kayee
get
बोले
हरे कृष्णा
हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम
हरे हरे श्र गुरुदेव कुछ ही देर में पधारने वाले हैं, तो सभी आइए उत्साह के साथ भगवान के नाम को ध्यान पूर्वक सुनिए और पीछे पीछे दोहराइए
हरे कृष्ण हरि क्रिशना कृष्ण कृष्ण ना हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे ह अरे
आप लोग की बारी
मेरे अकेले के गाने ऐसे भगवान है जब सारे गुरु भाई और गुरु फैन गायेंगे तो प्रसन्न होंगे ऐसे ही सब लोगों ने प्रसाद पाया है अभी और यहाँ जो बैठे हैं सबने गोविंदा में पाया है
हर कृषना हरि कृषना कृष्णा कृषना हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे बोलिए बोलिए हर कृषण हरे कृषना कृष्णा कृषना हरे हरे हरे राम हरे रामा रामा रामा हरे हरे बोलो बोलो बोलो हरे कृषना हरे कृषना क्रिष्णा कृष ना हारे हरे हरे राम हरे राम राम राम ह हरे हरे हरे हरे कृषना रे कृषना कृषना क्रिश हरे हरे हरे राम हरे रामा रामा रामा हरे हरे हरे क्रिनारे कृषना कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम
हरे राम राम राम हरे हरे
हरे
बिना गाई आपकी बारी आई भाई
गुंज
रहा ब्रह्म दिन देखा स्वर्जसकी मुरलिका ब्रहम मानने देखो स्वर जिस की मुरली का कृष्ण का दर्शन पाकर लगे सब का दर्शन फीका गूंज रहा दमाणडमेदेखोस्वरजस की मुरली का कृष्ण का दर्शन पाकर लागे सब का दर्शन पिता अरे वृन्दावन का गाड़ा देखो वृन्दावन का गाला देखो पहुँच गया अमेरिका अरे हर माथे पर लगा है हरे कृष्ण का पिता हरे करना हर कृषना कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम राम राम राम हरे हरे बोली बोलो
बोलो बोलो
हरे कृष नारे प्रिन प्रशन रे हरे हरे राम हरे रामा रामा रामा हरे हरे हरे
isna
हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे बोलो बोलो बोलो बोलो हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे
हरे
कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम
राम हरे हरे
हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कि
रे
हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे हरे का हर कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे रेहरेरसारसाहरहर हरे राम रे राम राम राम हरे हरे गाइए गाइए हरे करना हर कृषणा कृषना कृषना हरे हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे हरे केसे रि हरि किशन हरिकिशन श हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम रे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे रामा रामा रामा हरे हरे हरे कृशन हरे हर
ना
हरे कशना कृषना कृष्णा हारे हारे हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे हरे बोलो हरे किनारे कृषणा कृषना कृष्णा हरे हरे हरे रामा हरे रामा रामा रामा रे हरि हरे प्रशन हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे हरे कृष्ण हरे ृ ना रे हरे हरे राम हरे रामा रामा रामा रे हरि हर हरे राम हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा रे हरे हरे राम हरे राम रामा रामा हरे हरे हरे क्रश नारे कृशन आरkृsnaaकरशना हरे हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे हरि बोल बोलो हारे, hरेकृsनa हरेकृशराकृिशना कृषणा हारे
रामा
हरे रामा रामा र बाहर हर हारे कृश्णा
हरे रामा
हरे रामा
श्रिना
हरे कृष्णा कृषना कृष्णा हरे
हरे रामा
हरे रामा रामा र हमारे हरकिशन हर हर राम हरे राम राम राम हरे अरे सारे सारे सारे सारे आर अरे राम रे राम राम राम हरे रे अरे सारे रे सारे हरे हरे राम हरे राम राम हरे हरे हरे करारे किशना कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे रामा रामा रामा हरे हरे
ला
प्रभु
बस
बस पमररिम शीला प्रभु बा बसाया मेरे बोलो बोलो
श्रीला प्रभु
मसाया
फलेरियम श्रीला मचाया फलेरियम मसाया फलेरियम मचाया लेरिसा हरे कृषना हारे कृषना कृष्णा कृष्णा हरे हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे हरे बोलो बोलो बोलो बोलो हरे राम हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा रे हरे हरे रामा रे राम रामा रामा हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रामा हरे
रामा रामा राम हरे हरे बोलो हरे
कृष्णा हरे कृष्णा हरे कृष्णा ह कृषना कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे हरे हरे कृषना हरे कृषना हरे कृषना कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रामा हरे रामा रामा रामा
हरे हरे हरे कृष ना
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे हरे कृष्ण हरे हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृश्नरेकषनरक हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे बोलो हरे कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हर बोलो हरे कृष्ण हरे कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृष्णा कृष्णा हर हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृषनाषनाकृष्णा कृषना हरे हरे हरे राम हरे रामा रामा रामा रे हरि
हरे कृष्णा हरे
कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे जय प्रभु पा जय जय प्रभु पा जाय प्रभु पा जैसी पा प्रभु पा जशिला प्रभु
बुरे
बुरे बुरे बुरे द गौर पे मानद हरे रो
hari krishna now we have the famous gkd govind krishna das hari bolkggkad for g c g wow matti हम बने तुम बने के लिए foreversogovind krishna bob his a seंसaशionalong t youth mara nco wapis banate ut hour
re the divine brothers goi from pructraeमgानाति मेरं
दस्य
गया नन्दना शाला का या
चक
शो
र कम ना 10 मै श्री
गुरुवे नम हा
मुकम को रोटी बच चालम
पंगो
लंगा या ते
दिरिया कृपा
तमाम बनदे श्री गुरु दिन करना,
दोनों हाथ उठा लीजिये, मेरे गले की चेकिंग तो हो चुकी है, फटा हुआ है, सीधे हाथ उठा लो और प्रेम से
बोले श्री गुरुदेव की
प्रसाद के बाद तो आवाज डब हो चाहिए। यह माइनस में जा रही है। दोनों फिर से उठा और ऊपर और ऊपर आयेंगे। ये वेरी नाइस घूरना बंद करो, घूरने से कुछ नहीं मिलेगा, मुझे आल राइट
सेकंड टाइम श्रीला gुrुदeकीसेंसेश i mean this
are the dates oarsensasionji, thank you
and
you are your das।
हरि कृषना हरि कृषना कृषना कृषणा हरे
हरे
हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे हरे बोलिए बोलिए हरे कृषना गोद
हरी बोल ना वेल्कम गुरु महाराज बाई लवली चांटिंग द महामंत्र हरे
मा
हरे
रामा
ताली बजा सकते हैं
हरे कृषना हर कृषना
कृष्णा कृष्णा हरे हरे
हरे
रामा रामा हरे हरे प्रेम से हरे
कृषना
अरे ना
कना हरे रे रामा
हरे रामा
रामा रामा हरे ह रे
हरे कृष्णा हरे कृषना कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रामा हरे रामा
रामा रामा
हरि हा रे बोलिए बोलिए हरे कृषना हरे कृषना कृष्णा कृष्णा हरे हरे राम राम
राम र
रकृषनाबोरेकृशना हरे कृषना
कृषना
कृष्णा हरे हरे
हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे हरे हरे कृषना
कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हाथ उठा के हरे कृषना हो अरे कृषणा कृष्णा कृष्णा हरे हरे
हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे
ह
सभी हाथ उठा के गुरु महाराज
का स्वागत करे बोलो बोलो मेरे साथ गुरु देव, गुरु देव, गुरु देवा जाय गुरु देवा जैयो गुरु देव, गुरु देवा,
गुरु देवा जय गुरु देव
जय प्रभु पद प्रभु पदा प्रभु पदा जयो पर
हरे कृष्णा ब्राज, पूजा, माँ मौत से की। तो अब हम गुणगान आरम्भ कर रहे हैं और हमारे राधा परसारी मंदिर दिल्ली के अध्यक्ष हिज गेश मोहन रुबा प्रो गुरु महाराज जी का गुणगान करेंगे और बनमाली प्रभु जहाँ भी हो वो तैयार रहेंगे।
अरे
ओ म ज्ञान, दिवरंधस्या ज्ञान। आज dnashalkajकsुरoल na si गurnnaअरेksn तो आज बहुत ही पवित्र शुभ दिन है आज हमारे गुरु महाराज का अविरभाव दिवस, इसी कारण वर्ष हम लोग यहाँ पर एकत्रित हुए हैं। सभी भक्तगण और हमारे मंदिर की विशेषता
यह है
कि ही पर महाराज व्यास पूजा का उत्सव बनाते हैं। यह हमारा सौभाग्य है। भक्तों का सौभाग्य है कि गुरु महाराज की विशेष कृपा है यहाँ पर और आप सब भक्तों के ऊपर भी कृपा है कि आप सबको मौका मिलता है, हम सब को मौका मिलता है इस व्यास उत्सव को बनाने के लिए, तो गुरु महाराज का आविर्भाव इस पृथ्वी में बहुत विशेष है। शिलप्रहोपाजीके महा सेना नायक हैं और शिप्राजी ने इनको भारत भेजा था, इंडिया भेजा था, नाइनटीन सिक्स्टी नाइन में और बहुत ही विशेष कार्य के लिए भेजा है इस कॉल की स्थापना करने के लिए। भारत वर्ष में शिलप्रहबाजीकी इच्छा थी कि भारत में प्रचार हो गृशुभावना का और वह प्रचार जो है गुरु महाराज के माध्यम से यहाँ पर हुआ है और आज हम देख रहे हैं कि दिन प्रतिदिन प्रचार का कार्य बढ़ता जा रहा है, बढ़ता जा रहा है। आज जो भी सफलता हम लोग देख
रहे हैं इस
दिल्ली एनसीआर में, यह पूरे भारत में, उसके सबसे बड़े कारण क हमारे गुरु महाराज भी है।
वाह।
बहुत सुन्दर पेंटिंग है ये भेद किया जा रहा है। गुरु महाराज जो है शिप्राजी को नई छपी हुई पुस्तक दे रहे हैं और प्रहोपाजी बहुत खुश हो, हे देखकर नई किताब छपी है, नवीन प्रभु हैं, पंजाबी बाग से जिन्होंने पेंटिंग बनाया है, बहुत सुन्दर पेंटिंग बनाते हैं, प्रोफेशनल आर्टिस्ट हैं, उनका, हम धन्यवाद करते हैं। हरे कृष्ण तो हम महाराज के बारेमें बता रहे थे कि कैसे महाराज है जो यहाँ पर 1 मजबूत नींव रखी है, नीवी ने रखी हैै उस इमारत के निर्माण की है जिसमें सभी भक्त लोग जो है बड़ी शांति से निवास कर सकते हैं और इस महामंत्र का जब और कीर्तन कर सकते हैं। ऐसी व्यवस्था महारज ने कर दी है कि किसी प्रकार की समस्या नहीं है। 1 बहुत बड़ा आंदोलन छेड़ा गया है और आज गुरु महाराज के अथक प्रयास से आज हम देखते हैं किस देश के प्रधान मंत्री ने सम्मानित किया शील प्रभाजी को, इसलिए शिला प्रोपज का गौरव शिलहप्रहोपाजीकी महिमा आज पूरे पथ में फैल चुकी है और उसमे हमारे गुरु महाराज का बहुत बड़ा योगदान और 1 समर्पित शिष्य का यही कर्तव्य है कि अपने गुरु का गुणगान करे, अपने समर्पित कर दे। अपने गुरुदेव के लिए। आप लोग सभी शांति बनाये रखेंगे तो हमें बोलने में भी अच्छा लगेगा और आपको शायद सुनने में भी अच्छा लगेगा। अरे वो तो हम क्या बता रहे है, इसलिए कई बार भक्त लोग बोलते है की हमे जाना है, घर जाना
है,
बोलते है साल में 1 बार घर जाना है, कौन सी घर की बात कर हे ये जो घर नहीं है यहाँ पर बैठे है, ये क्या है इतना बड़ा घर आपको दे दिया हमारे गुरु महारा ने और इतना बड़ा परिवार है इस परिवार को छोड़ कर कौन से घर में जाना चाहते हैं। इसलिए फिलप्रहोपाजीएक बहुत सुन्दर बात कहते थे। इसका सोर्स अननोन है, लेकिन शिलप्रहोपाजीइसको कोर्ट किया करते थे। जन्मे, जन्मे, सबे पिता, माता पाये, हर जन्म में आपको माता पिता मिल जाये, यहां तक कि पक्षी योनी में भी माता पिता मिलते हैं। पक्षियों की योनी में भी माता पिता मिलते हैं। कृष्ण गुरु नहीं मिले। भजहरिहएयानीकी कहने का मतलब ये है अगर कृपा हो जाए, आपके ऊपर गुरु और कृष्ण की कृपा हो जाए तो आप माया के पर विजय प्राप्त कर सकते हैं। और हम भगवान श्री कृष्ण की सेवा भजन करके आप जन्म के बाद भगवान के धाम में जा सकते हैं। वो है असली घर, हमारा बैक होम, बैक टू गॉड नहीं तो यहाँ पर घर की आसक्ति की वजह से और बार बार घर जाने की वजह से क्या होगा? इस संसार में सड़ते रहना पड़ेगा हमें तो चाय हमारे पास है, इस संसार में बस चलना है। यह गुरुदेव के चरणों में जाना है। श्री गुरु चरण रति, यही उत्तम गति, ये जो है। बहुत ही महत्वपूर्ण बात समझने के लिए बहुत जरूरी है। हम भक्तों को पूरा कनविंस होना चाहिए कि यही हमारा घर है और कोई
घर नहीं, हमारा
वासुदेव कुटुम्बकम ये है भगवान श्री कृष्ण वासुदेव का परिवार है और इस परिवार में केवल क्या होता है, संकीर्तन होता है। गुरु कृष्ण का गुणगान होता है और कोई आशा नहीं है। भक्ति का शुभारम्भ जो है वो श्रद्धा से होता है। शररुपगोस्वामी भक्ति रस कहते हैं 2 श्रद्धा श्रद्धा, ऐसी प्रारंभ होती है भक्ति। और आज यह अवसर है। जब हम सभी गुरु भाई, मिलकर गुरुदेव का गुणगान करते हैं, तो 1 मात्र आशय यह होता है कि हम अपनी श्रद्धा को बढ़ाये गुरु साधु और शास्त्र में क्यूंकी श्रद्धा ही हमें प्रेम तक ले जाएगी। श्रद्धा का ही कंडेंस फॉर्म है कृष्ण प्रेम और ऐसे अवसर में अपने आप को हम रिजर्मिनेट करते हैं, स्टेट करते हैं और वो सारी शिक्षाओं को याद करते हैं। जो शायद किसी कारण वर्ष हम भूल जाते हैं। और आज वो आज वो दिन है जो अपने आप को फिर से हम लोग पुनः स्थापित कर रहे हैं, कृष्ण भावना में और अपने आप को सशक्त बना रहे हैं और मजबूत बना रहे हैं। ताकि भविष्य में वो गलतियाँ न करे। जो कर चुके हैं, अगर वही गलतियाँ करेंगे जो कर चुके हैं तो शायद आगे हमारी उन्नति नहीं हो पाए। इसलिए आसक्ति अगर हमें बढ़ानी है तो गुरुदेव के पानी है। श्रीमद भागवत इसलिए कहता है महज सेवा, दाह आहुरमेमुक्तेशतमोद, द्वारम, योशिदा, संगी, संगत, महज सेवा, यानि की सेवा। वर्षों के चरणों में, गुरु के चरणों में, जब हमारी आसक्ति हो जाती है, चलो प्रोप जी का, हम 1 वार्निंग बॉक्स सुन रहे थे, तो प्रो बात बोलते हैं। कोई 1 व्यक्ति पूछ रहा है प्रोप जी, ऐसे डिटेचमेंट के बारे में, तो प्रो बात कहते है। डिटेचमेंट इस ब्रोग्स प्रोपोगंडा। प्रोप जी, क्या कह रहे हैं? दिस डिटेचमेंट इस बोगस प्रोपगेंडा। प्रपा जी कहते हैं हमे डिटेचमेंट के पर ज्यादा फोकस नहीं करना है, बल्कि अटैचमेंट के पर फोकस करना है। वी हैव टू प्यूरीफाई और अटैचमेंट। यानी कि जो अटैचमेंट हमारा संसार ऐसी है, सांसारिक चीजों से है, सांसारिक लोगों से है।
वो।
अटेचमेंट हमें गुरु देव के चरणों में लाना, श्री गुरु चरन रति। उस अटेचमेंट को हमें प्यूरिफाई करना है। तो अटैचमेंट को आप त्याग नहीं सकते हैं। अटैचमेंट को आप छोड़ नहीं सकते हैं। अटैचमेंट। तो कहीं न कहीं लगना पड़ेगा अगर गुरु और कृष्ण के लिए अटैचमेंट नहीं होगा। तो स्वाभाविक है कहीं न कहीं संसार के लिए अटैचमेंट बना ही रहेगा। ये गारंटीड है। और हमारे महाराज गुरु महाराज के बारे में जितना बताया जाए उतना ही कम है प्रेम किशोर प्रभु। यहाँ पर उन्होंने बताया था, उनके 1 भक्त थे जो गुरु महाराज से दीक्षा लेना चाह रहे थे। शुरू में इतनी उनकी श्रद्धा थी, नहीं तो दिशा के लिए तैयार हो रहे थे। और 1 बार वो दक्षिण भारत गए, तपती गए और वहाँ पर 1 बोर्ड देखा उन्होंने। अगस्त नाडी का, अगस्त नाडी में वो सारा पामलीफमेंसारा लिखा होता है आपका पूर्व जन्म के बारे में और इस जन्म के बारे में और भविष्य के बारे में, सब कुछ लिखा रहता है। जस्ट लाइक ृगुसमितइसकेलिएहम रेकमेंड नहीं कर रहे है, बता रहे हैं। जिसे हमारे गुरु का है। उस में बता रहा तो वहाँ पर वो भाग गया, उसको 1 क्यूरियोसिटी हुई जानने की अपने बारे मे चला गया। जब उसका खोल के देखा, पत्ता खोल कर देखा, उसने अपने अंगूठे का छाप लगाया और उसको खोलकर देखा तो उसमे हमारे गुरु महाराज के बारे में जिक्र किया हुआ था। उस भक्त को कहा उस व्यक्ति ने। आपके गुरु जो है बहुत महान है। और जब वो चलते हैं, जहाँ भी वो जाते हैं तो पीछे पीछे देवी देवता भी जाते हैं।
उनके।
और दूसरी बात क्या उन्होंने बोली श्रीमद भागवत में जैसा लगा। तीर्थी गुरबंदी, तीर्थानी यानि की आपके गुरुदेव जहाँ चरण रखते हैं, वो स्थान तीर्थ बन जाता है और तीर स्थानो को भी पवित्र करते हैं। ऐसा जब उन्होने सुना उस भक्त ने सुना तो वो भक्त जो है हैरान हो गया, हो गया। आश्चर्य कैसे दिया हमारे गुरु महाराज के बारे में और श्रद्धा बढ़े उसकी। और फिर उसने गुरु से दीक्षा।
मिली।
तो इस तरह का जो प्रेम है, जिस प्रकार की शक्ति, जिस प्रकार का समर्पण। आज के समय देखिये, कौन किसके लिए जीता? बताई पूरा संसार जो है, स्वार्थ की दुनिया है, यह स्वार्थ की दुनिया है, कोई जो है दूसरे के लिए नहीं जीता, हर व्यक्ति, हर इन्सान जो है अपने लिए जी रहा है अपने परिवार के लिए, यह परिवार के लिए भी छोड़िये खुद के लिए ही जी रहा है। केवल 1 भ्रम है की परिवार के लोग आपसे जुड़े हैं। यह भी 1 बहुत बड़ा लुजन है। फॉर एग्ालजैवलमिकीजी डाकू थे, नाम का वो डाकू थे। और उसके बाद वो जब नारे जी ने कहा की आप इतना पाप कर रहे हो, आप परिवार वालों से पूछो जो आप पाप कर हे हो, उसके भागीदार हैं। वो वो क्या उस पाप का भागीदार बनने के लिए तैयार है? जाके पूछे। तो फिर वो जब गए अपने परिवार वालो से पूछा पाप कर रहा हूँ सो यू कैन शेयर न, आप लोग शेयर कर सकते हो। रिएक्शन यू आर रेडी फॉर दैट ने कहा हम क्यों लेंगे आप भूत थोड़े लेंगे का फल, उसका सर चकरा गया। तो जीवन भर इन लोगो के लिए मैंने मेहनत की, दिन रात मैंने मेहनत की और इतने लोगो को मारता रहा, इतना पाप किया और ये कह रहे हैं कि पाप के भागीदार नहीं बनना चाहते हैं। अरे ना जी ने जो कहा बिलकुल सत्य कहा नारज जी ने उनकी आँखें खोल दी, माया का पर्दा हटा दिया नारद जी ने, तो इसलिए हम लोग सुन रहे थे। प्रवपाजीकेमॉर्निंग वा प्रहुपाजी कहते हैं जब 1 गुरु जब शिष्य को दिशा देता है, 1 गुरु जब दीक्षा देते हैं, किसी को शिष्य बनाते हैं तो उसके सारे पाप हर लेते हैं। आल द सिर्फ एक्शन और डिसाइपल कितनी बड़ी बात है। देखिये कि वैश्व का जीवन जो है वो दूसरे के लिए होता है, गुरु का जीवन जो है दूसरे के लिए होता है, अपने लिए होता ही नहीं है, अपना, उनके लिए कुछ है ही नहीं, अपना कोई स्वार्थ नहीं है। 11 क्षण जो है 11 प्राण का 11 भाग जो है वो दूसरों के लिए समर्पित है। अनंत कोटी ब्रह्माण में अनंत कोटी जीव हैं और इतने सारे जीवों का उद्धार करने लिए तैयार होते हैं। जैसे वासुदेव दत्त कहते हैं इस ब्रह्माण में जितने जीव हैं उन सबका पाप मुझे दे दीजिये महाप्रभु और उन सबको मुक्त कर दीजिये महापुर इसकी कोई आवश्यकता नहीं है। आपने बस इच्छा प्रकट ली, उसी समय कार्य हो जाएगा। तो इसलिए वैश्व जो है धरातल पर आते हैं, इस भूतल में आते हैं। जैसे हमारे गुरुदेव हैं और उनके आने की वजह से, उनके यहाँ चरण रखने से। आज देखिये इस दिल्ली जो 1 समय में हस्तिनापुर के नाम से जाना जाता था, फिर से वो हस्तिनापुर राज्य के नाम से स्थापित हो रहा है, यानि कि पूरे विश्व की राजधानी बन रही है।
यह
और राजधानी के नरेश हैं हमारे गुरुदेव हिस्वुलनजगोपाल के शु है महाराज
जिन्होंने
पूरे विश्व में अपना साम्राज्य स्थापित कर दिया है। और ये जो पताका है इस कौन का हमेशा लहराता रहेगा। तो इसलिए हम सब जो है गुरुबार के चरणों में पूरी तरह से ऋणी है। इसलिए भारत से करत प्रार्थना करते हैं, उनके चरणों में प्रार्थना करते हैं। अपना आशीर्वाद बनाये रखे। हम से बहुत सारी भूल हो जाती है, हम से बहुत सारी गलतियाँ हो जाती है। हम सब माया बाद जीव हैं। सर हम लोग जो है गलतियाँ करते रहते हैं और हमेशा कुछ न कुछ गड़बड़ करते रहते हैं। लेकिन गुरुदेव की कृपा है वो हमे क्षमा करते रहेंगे। तो हम लोग सेवा में लगे रहेंगे, अगर शमा नहीं रहेंगे तो कोई स्कोप नहीं है। फिर तो आध्यात्मिक जीवन में जीवित रहना बड़ा मुश्किल है हमारे लिए। तो गुरू महाराज का हृदय से। आज हमारे पास वो अवसर है, आज हमारे पास मौका है। ऐसे तो अवसर पूरे साल मिलता नहीं है। आप गुरु महाराज के जाओगे, गुरु महाराज का गुणगान करोगे, कमरे में महाराज बोलते है जी, ऐसा मत बोलो। डू समथिंग प्रैक्टिकल 1 असली घटना ये करना काल में पिछली बार क्या हुआ। हमने प्रोप जी का लेक्चर सीरीज किया था। ग्लोरिफिकेशन तो 3 दिन तक जो है प्रोजी का ग्लोरिफिकेशन करते रहे। चौथे दिन सुबह सुबह हमारे सेविंग करते। सुबह प्रपात का 1 लेक्चर जरूर सुनते है तो वह मौका होता है, समय होता है और वो पक्का होता है कि सुनेंगे सुनेंगे। फिर तो से प्रोप जी 1 जगह बोल रहे। कनवर्सेशन प्रोप कहते हैं डोंट जस्ट ग्लोरीफाई मी डू समथिंग प्रैक्टिकल इसलिए क्या है की लेकिन आज हमें मौका मिला है थ्योरी केलो प्रैक्टिकल केलो। आज मिला है की खुला खुला जो है ओपन में आप सबके सामने भक्तों के बीच में गुरु का गुणगान कर सकते हैं। ऐसा अवसर, ऐसा मौका कहाँ मिलेगा फिर बताइए। इसलिए हृदय खोल के अपने मन की आँखे खोल कर, अपने दिल की आँखों को खोल कर। आज हृदय से हम अपने गुरु महाराज का गुणगान करेंगे। बोलिए गोपाल महाराज गुरुदेव की जा silapradkidबहोतबहत
धन्यवाद मोहन रोजा ने न सिर्फ महाराज के प्रति महाराज लोरिफाई किया, महाराज का महिमा किया, लेकिन साथ साथ में शिक्ष को भी प्रेरित किया की इस तरह से हम जिम्मेदारी उठानी चाहिए। गुरु की सेवा में सो बहुत बहत। धन्यवाद मोहन प्रभु जी का अभी हम कुछ विडियो प्ले करना चाहेंगे, कुछ सीनियर डिवोटी सो अनरुधप्रभु का भी आया हुआ है। मेरी वीडियो हमारे पास हू इज वेरी, सीनियर, रिपोर्ट, रशिया, उमा, पति, प्रभु, इज आलसो देर और साथ ही हम अनरुधप्रभु
मैंने प्रथम 3 शिष्यों को दीक्षा प्रदान कर ही थे। हमारा प्रम स्वभाग्य है कि हमारे बीच अभी भी 1 वरिष्ठ शिलपरोपाशिषपरेरणा शोध है। हमारे मंदिर के भक्तों को मार्दर्शन देते रहते हैं और उन्होंने स्कॉड से अपना नाता जोड़ा था। 1971, 72 में। हैरानी की बात हम में से कितने लोग 1972 के बाद पैदा हुए? तो हम जब पैदा भी नहीं होते तब से प्रभु भक्ति कर रहे हैं। मेरे लिए भी बहुत बड़े परिणाम श्रोता है। आज मैंने उनके चरण कमलों में बहुत बड़ा अपराध भी किया था। उसके लिए माफी भी चाहता हूँ। सबके सामने प्लीज मुझे माफ़ कर दीजिये। श्रीधाम प्रभुजी और मैं अनुरोध करूँगा की आप मंच पर पा रहे और गोपाल कृष्ण महाराज का गुणगान करे हिस ग्रे श्रीराम प्रभुकी।
dant
gopal goswami mara की
सो
जब हमने देश को न ज्वाइन किया सेवेंटी टू में, तो उस समय हमारे दिल्ली
मंदिर में
भारतीय केवल 3 लोग थे, बाकी 56 लोग जो थे वो विदेशी थे और तेजस 10 अधिकारी हमारे प्रेजिडंट हुआ करते थे।
सेंटर के।
तो अभी देखिये कहाँ वो 5 और 3, 8, 9, 10 भक्त थे। अभी हजारों हजारों की संख्या में हिज्लनसगोपालशममहाराज के शिष दिनब दिन बढ़ते जा रहे हैं, बढ़ते जा रहे हैं, बढ़ते जा रहे हैं। ये विशेष प्रपात जी की कृपा है। प्रपात जी को भक्त सेनापति कहा गया है। प्रो पा जी भक्त सेनापति थे, वे कुंठा लोक से आये हैं। वैसे तो महाराज जी भी विकुंठा से ही आये हैं, क्योंकि जब तक किसी को भगवान का आशीर्वाद नहीं है, भगत धाम से नहीं आया है। वो इतना प्रचार कर ही नहीं सकेगा। तो प्रपात जी भक्त सेनापति और गोपाल गोस्वामी प्रपात जी के सेनापति हैं। मैं पहली दफा 1975 में महाराज जी के दर्शन किए थे। और उस समय से मैं देखता ही आ रहा हूँ
के
महाराज की तपस्या दिन प्रतिदिन दिन, प्रति दिन बढ़ती जाती है, कोई समय बर्बाद नहीं करते हैं, फालतू में ट्रैवलिंग भी करनी होती है। तो रात को करते हैं, दिन को नहीं करते। ताकि समय बर्बाद न हो। दिन में मीटिंग करनी है, भगवान की भक्ति करनी है, लोगों से मिलना है, भक्तों से मिलना है। और जब प्रभु महाराज जी का जब प्रवचन होता है तो आपने भी देखा होगा की 1 भी लाइन वो प्रभुपाद जी के, तो प्रभुपाद जी ने बोला बिल्कुल उसी को ही बोलते दुराते हैं। अपनी तरफ से कोई बात नहीं बोलते ये सबसे बड़ी क्वालिफिकेशन है। भक्तों को चाहिए कि जब हम प्रवचन करते हैं, भगवत, गीता, भागवत कोई भी प्रवचन करते हैं, जो प्रपाती ने कहा है उसी बात को आगे बढ़ाना है ना। के अपने बातों को जोड़ना है। तो ये महाराज जी का गुण है के जब भी वो बोलते हैं, प्रपाती ने ऐसा कहा था, प्रपाती ने ऐसा कहा था, प्रउपाजीको लेके चलते हैं।
आगे।
ये भक्तों की सबसे बड़ी क्वालिफिकेशन है। जैसे होने वाला तपस्या, तपस्या तो मैं 1975 से देख रहा हूँ, बहुत तपस्या क रहे है, ये और बढ़ती जाती है तपस्या दिन, प्रति दिन जब भी चाहे वो सवेरे 3 बजे आ जाते हैं, लेकिन आल्टर में पहुंच जाते हैं, अपने गोता पूजा करते हैं। अच्छा 1 बात और पपाजी इच्छा थी के दिल्ली के चारों कोनों में हमारे मंदिर होनी चाहिए, सेंटर होनी चाहिए
और
1
पार्क भी होना चाहिए। गविंदा जनती पार्क बुद्धा जनती पार्क है न, वैसे तो प्रो पाजी की कृपा से देखिए, महाराज ने कमाल कर दिया। अभी हमारे दिल्ली के एन सी आर में चारो तरफ देखो मंदिर है। ये दिल्ली मंदिर, पंजाबी, बाग, रोहणी, भादरगढ, गाजियाबाद, साबाबादफरिदाबाद, द्वारिका सब जगह बंदर छिपी हमारे पास नहीं था, वो बड़ी मुश्किल से मिल गया, वो भी जहाँ उपाजीपलेरहतेथे वो भी राज की प्रेरणा से, अभी हमारे स्कोर की लैंड हो गई है, बहुत बढ़िया बिल्डिंग बन गई है। वो भी अभी ये पंचशील में 1 बिल्डिंग का उद्घाटन हुआ है, वो आप जाके। सब देखिये, बहुत ही फर्स्ट क्लास वन बिल्डिंग बनी है तो वो भी फर्स्ट क्लास मार्वेल, दिवारी, माती हुई मॉडल सारी फेसिलिटीज हैं उसमें तो वो भी महाराज की कृपा से, परसो उसका उद्घाटन हो चुका है। तो प्रउपाजजी की जितनी भी इच्छा थी, इच्छा तो बहुत है, सारी तो पूरी नहीं हो सकती है, लेकिन नक्सिमम इच्छाएं प्रहपाजजीकी महाराज जी ने पूरी कर दी है। हम्बलनेस नम्रता जितनी प्रपी में नम्रता है,
उतनी ही
परम गोपाल से महाराज
में
भी उतनी ही नम्रता है। हमेशा अपने आप को नंबर बनाये रखते हैं। देखिये, मैं तो बड़ा इन सिग्निफिकेंट हूँ, लेकिन जब मैं इनके कमरे में जाता हूँ तो मुझे बोलते है नहीं। वह वहाँ बैठो मेरे सामने चेयर पर बैठो, जब मैं प्रणाम करता हूँ तो उल्टा प्रणाम करे। मैं किदर बोला महाराज जी, यह मेरी पर विलेज है, मुझे प्रणाम करने का है। नहीं, नहीं, नहीं आप मेरे गुरु मैं प्रणाम करूँगा। तो मैंने कहा 1 दिन के महाराज जी, आपको तकलीफ होती है प्रणाम करने में परिणाम मत किया करो। तो आप मुझे परिणाम भी मत करो। मैंने कहा ठीक है, महाराज जी मैं नहीं करूँगा। लेकिन जब महाराज जी शेयर करने जाते हैं तो मैं पीछे से प्रणाम कर देता हूँ। तो वो पता नहीं इनकी नजर कैसे पहुंच जाती है। पीछे या उनके असिस्टेंट बता देते हैं। तो पीछे मुड़ कर के फिर परिणाम करना शुरू कर देते हैं। महाराज जी ऐसा मत करो, फिर किया करो। तो तो ऐसे हैं हमारे। महाराज जी, आप बड़े ही भाग्यवाली हैं, जितने भी महाराज के शिष्य हैं और होने वाले हैं, बहुत ही उस भाग्यशाली हैं।
आप।
जैसे प्रहपाजजी कहा करते थे कि जो मुझे फॉलो करेगा, मैं अपने शिशुओं को भगवत धाम में ले के जाऊँगा, ऐसा प्रहपाजजीकाकहना है। तो मैं कहता हूँ कि जो परम पूजनीय है, गोपाल जैसे महाराज का हाथ पकड़ लेगा, उनकी धोती पकड़ लेगा। जैसे प्रोपर ने कहा है तो वो भी अवश्य ही भगवत धाम जाएगा
होती।
पकड़ने का मतलब ये है कि जो वो सिखाते हैं, हमें उनको पूरी तरह से पालन करना, यह नहीं है कि दिया और निकाल दिया, इस कान से नहीं। जो वो कहते हैं, उसका पालन करना है तो उसका पालन करेंगे। तो वश्य ही भगवत धाम जायेंगे। इसमें कोई शक नहीं है।
वो ले जायेंगे,
इतनी मजबूत उनकी भक्ति है, प्रपात के प्रति दृढ़ विश्वास है, भगवान के प्रति दृढ़ विश्वास है। तो अगर आप उनकी बातों का कहा मानेंगे, उनकी बातों पर चलेंगे, उनकी नीवों में चलेंगे, उनकी शिक्षा मानेंगे, तो अवश्य ही आप सबका कल्याण होगा। हरे कृष्णा धन्यवाद बोलिए, हरे कृष्णा, हरे
कृष्णा कृष्णा कृष्णा, हरे, हरे हरे राम, हरे राम राम राम, हरे हरे पर
पुजनिय गोपाल कीसंगोषामें, महाराज की
की, रे
कृष्ण धन्यवाद
जे, श्री धाम। प्रभु जी की जाए। तो क्योंकि हम पौने 8 बज चुके हैं और प्रोग्राम हमारा 8 बजे तक का ही है। तो पंद्रह मिनट और बाकी है। तो 15 मिनट के। अन्दर हमारे बहुत सारे स्पीकर्स है। तो मिनट से हम कोई 5 स्पीकर चुनेंगे हमने पर्चा तैयार कर लिए है हमने और जिनके 5 के नाम आयेंगे उन्ही से बुलायेंगे तो 3 मिनट ही बोलना है। आपको 3 मिनट से ऊपर आप बोलेंगे। तो हम करताल बजायेंगे। ऐसे करके अगर आप 3 मिनट के बाद अगर 4 मिनट पे जाते हैं तो हमको हम यहाँ भरतनाटम करेंगे। आपको बताने के लिए कि 1 मिनट एक्स्ट्रा हो चुका है। क्योंकि हमें। आठवें प्रोग्राम वाइंड अप करना है। तो इसीलिए हम जिन जिन को बुलाएंगे उनको 3 मिनट में अपनी ऑफरिंग जिप फाइल में ऑफर करनी है। जिप फाइल। आप जानते हैं। इट्स अ जिप फाइल से आपको थ्री मिनट वन ए टी सेकंड्स में अपने प्यार को अभिव्यक्त करना है। वी नो दैट की हम बहुत बड़ा अपराध करे। आपके प्यार के ऊपर हम अंकुश लगा रहे है कैसे बदमाश सी, लेकिन हमारी मजबूरी है भाई और बहन। तो इसलिए जितने आदरणीय भक्त हैं उनसे हमारा हाथ जोड़कर निवेदन है। 3 मिनट के अंदर आपकी ऑफरिंग पूरी कर दीजिये। जैसे ही 3 मिनट होगा हम करताल बजा देंगे टिकट टिकट, इन टिकट टिकट न। फिर भी अगर आप 4 मिनट पहुँच जाते फिर हम यहाँ डांस करना पड़ेगा। सो प्लीज कृपा करे, हमारा भाइया डांस न देखे और अपनी ऑफरिंग को टाइम से कम्प्लीट करें।
ठीक है।
तो अब मैं थोड़ा आउटडोर आउट स्टेशन से आये हुए हैं, सो उनको पहले बुलाऊंगा सो। इस ग्रेस वनमाली प्रबुझि, ओके सो, थ्री मिनट्स परहाजी, धन्यवाद
नममदाकृष्प्रष्ठाय, बुतलेश्मतिगोपाल, कृष्ण स्वामी,
तिनाम
प्रचारण, साधु भगवत, दायि नम, विष्णु, पद कृष्ण भक्त, विदा नमस्ते, सारस्वती देवे, गोरवानी, जय, श्री कृष्णा प्रनित्यागौरभक्त, हरे, कृष्ण हरे, कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे, हरे, हरे, राम हरे, राम राम राम हरे हरे। आज का दिन बड़ा पावन है, पवित्र
है,
मंगल है, शुभ है, दिव्य है, भक्ति से लबालब भरा हुआ है, आध्यात्मिकता से रक्षा पचा हुआ है। क्योंकि आज बादर मास के कृष्ण पक्ष के यह एकादशी है। अर्थात यह हमारे प्यारे गुरुदेव परम पूज्य गोपाल कृष्ण गोसवा महाराज जी, इनका पावन, पवित्र एवं शुभ अविरावदिवसहजोलिन गोपाल कृष्ण गोसवाममहाराज। अविभाव दिवस के ज। तो महाराज श्री का जीवन को अगर हम देखेंगे तो प्रपा जी का 1 स्टेटमेंट है भगवत। गीता के आठवें अध्याय चौदहवें नंबर स्लोप में प्रोपज लिखते हैं भक्ति योग इस वेरी सिम्पल एंड प्यार एंड इजी। भक्तियोग। बहुत सरल है, पवित्र है और आसान है। गुरु महाराज के अगर जीवन म देखेंगे। तो ये स्टेटमेंट एकदम क्लियर हो जाएगा। मतलब ये स्टेटमेंट का 1 जीता जागता, 1 मूर्तिमान स्वरूप है, इलेस्ट्रेशन है। हम आप सब गुरुदेव से मिले हैं, पहली बार और पहली बार मिलकर सेवा भी की है। पर हम आप सब में से कितने भक्त हैं जो पहली बार गुरुदेव महाराज का सेवा किया और वो तारीख याद रखे हैं। बताइए गुरु महाराज पहली बार जब प्रोपज से मिले वो तारीख भी याद रखे हैं। इससे पता लगता है जैसे नाइनटीन सिक्स्टी एट थर्टी फर्स्ट में, नाइनटीन सिक्स्टी एट, द द फर्स्ट डे। वह पहला दिन था जब कनाडा में मांट्रियल में गुरु महाराज ने प्रपज के लिए सेवा किया था और जून फर्स्ट, नाइनटीन सिटी 8 मोंटरिअल। प्रवपाजीऐसीपहले बार मिले ये डेट भी याद है, यानि की उनके हृदय में वो पूरा दिन तारीख सब जैसे हम लोग आजकल सेल्फी लेते हैं और उसको अपने डेटा में स्टोर करते है। पर गुरु महाराज जितने भी बार प्रोपज से मिले, जहाँ जहाँ मिले, जब जब मिले वो सब यादें अपने हृदय की गहराई में सेल्फी से आंखों से लेकर सेल्फी हृदय के डेटा में आज तक बंद करके रखे हैं। और इन बातों को दिस शोज दैट द सीक्रेट ऑफ प्रोग्रेस इन कृष्ण कांशसनेस भक्ति में प्रगति करने का रहस्य यह है कि हम अपने आचार्यों से प्रेम करें अर्थात आचार्यों का सेवा करे और उनको खुश करने का प्रयास करें। यह हम परम पूजा, गोपाल कृष्ण को स्वयं महाराज श्री के जीवन से देख सकते हैं। ही टीचिंग स वि र एग्जामपल हाऊ टू लव, द आचार्य ऑफ ऑर्गेनाइजेशन हाउ टू लव, द दिक्षा गुरु एंड हाऊ टू लव, द शिक्षा गुरु श्रील गुरुदेव हमें शिक्षा देते हैं कि किस प्रकार से जो है, भक्ति करना है। दैट वी कैन लर्न फ्राम हिजोलिनस गोपाल कृष्ण को सह महाराज हिजलिनस गोपाल कृष्ण को सही महाराज की
रिक्वेस्ट करेंगे ग्रेस प्रिय गोविन्द से। iska shamary pre going to from sconcuructrपय?
गुरु महज आज के स पवन पावन, पवित्र दिवस पर आपके चरणों में शतशत प्रणाम तो हम भक्त लोग, आपके शिष्यगन साल में 1 बार हम इकत्तर होते हैं और आपका गुणगान करते हैं। जैसे हम लोग बिजनेस में कंपनी चलाते हैं तो 1 साल में उसका लेखा जोखा होता है थर्टी फर्स्ट बैलेंशीट बनती है तो उसमें आता है प्रॉफिट कितना बढ़ गया 10 परसेंट, 15 परसेंट पर गुरु महाराज आप 1 ऐसी कंपनी चला रहे हैं जिसका प्रॉफिट थाउसेन परसेंट बढ़ जाता है।
हर साल
हम देखते हैं अपने रिकॉर्ड, आप खुद ही तोड़ देते हैं, जो भी रिकॉर्ड बनाते है आप खुद ही तोड़ देते हैं। चाहे वो बुक डिस्ट्रीब्यूशन है, टेम्पल कंस्ट्रक्शन है और कितनी को्िकशनपरीचिंग है देखते है हम लोग, भक्त लोग कितने सुबह से लेकर लाइन लगी हुई है, टूटने का नाम ही नहीं ले रही। जहाँ भी हम एयरपोर्ट पर जाते हैं, बोलते हैं अरे कृष्णा वहाँ भी आपका शिष्य बैठा पर जाते हैं, वहाँ भी हैं, रेलवे स्टेशन पर जाते हैं, वहाँ भी है। तो आपकी इतनी, मेहमा, आप प्रहुपाजीके, इतने। इस मिशन को ऐसे है जैसे प्रहुपाजीआपको अपनी अथॉरिटी पूरी आप में रेस कर गए हैं। कुरक्षेत्र मंदिर का 1 प्रोजेक्ट बाकी तो मेरा ख्याल आपने प्रहुपाजीकी सारी जितनी भी डिजाइंस पूरी कर दी है और कुरक्षेत्र मंदिर शायद अभी वो भी पूरी होने वाली है जल्दी। तो हम देखते है किस तरीके से आप हमारे को कितना गाइडेंस रोज गाइड करते हैं कितनी हमारे में शक्ति, हमारे में कौन सी शक्ति है, गुरु मारा, इतना बड़ा टेम्पल बनाने की आपकी शक्ति, आप ने हमारे को ऑथोराइज कर रखा है। तो इतना बड़ा आपकी कृपा से मंदिर वहाँ आ रहा है। क्योंकि प्रहपाजीकेइच्छा पूरी करने के दिन रात सोचते रहते हैं और दिन रात हमारे को प्रेरणा देते हैं। तो आज हम जैसे की साक्षी गोपाल प्रभु जी ने सुबह बताया था तो इस मंदिर का निर्माण आपकी कृपा से आप जल्दी ही आप प्रहुपाजीकी। ये भी जो इच्छा पूरी करने वाले हैं तो नेक्स्ट इयर, शायद यह भी इच्छा पूरी कर देंगे। तो आप हमारे ऊपर, आज इस दिन के ऊपर आपके चरणों में हम करते हैं। आप जो भी शक्तियां हमारे में थोड़ी सी और शक्ति का संचार कर दीजियेगा ताकि हम अपना जीवन कुछ सफल कर पाए और आपके जो भी काम है आप हमारे को जो भी सेवा दे रहे हैं वो हम पूरी कर पाए
अरे
अरे कृष्ण ये बहुत ही सुपर डुपर आदर्श ऑफरिंग थी जिसमे प्रेम के उद्गार भी थे और सब भक्तों को प्रेरणा भी मिली और 3 मिनट से पहले भी हो गई amazing, अब सर्व लक्षण प्रभु उनसे रिक्वेस्ट करूंगा सर्व लक्षण प्रभु उसके बाफिशयामहरीp्rbु रेडी रहे please sir lcsinprboje is wise president s con punahewol कितने दुखी बातें आए हैं तालियां जोरदार हम जानते हैं शाम का मौका आ चुका है लेकिन फिर भी हमें उत्साही रहना चाहिए कयोंकि आज एकादशी है तो इसलिए एकादशी जो आत्मा होती है बडे उत्साह body s fasting but solsfestingसो वelकमआlthedotisan tusiaस्टि here we have so is कानपुर
अरे कृष्णा बहुत बहुत धन्यवाद सभी भक्तों को और मुझे 1 मौका मिला देने के लिए आप सब को ये बताने के लिए मैं 1 चीज बताना चाहता हूँ हमारे गुरु मज्य जो हैं मरे हुए मुर्दे को भी जिंदा कर सकते
है
इसका ज्वलंत उदाहरण मैं खुद हूँ 2 साल पहले मैं लास्ट में पहुँच चुका था 3 बड़े बड़े डॉक्टर ने डिक्लेर किया था यह खत्म हो गया है 3 एस्टरलेजरने बोला था कि नो चांस लेकिन उस समय मैं गुरु महाराज ने फ़ोन किया था और मुझे मेरे कान में रखा गया था मुझे होश भी नहीं है और इसलिए आज आपके सामने मैं खड़ा हूँ और गुरु महाराज पुणे में द्वारका यात्रा में मैं बहुत लम्बा खड़ा था गुरु महाराज दूर से और जो खड़े थे गुरु महाराज मुझे बुलाये और बोले सर क्या आप पुणे का बुक डिस्ट्र्यूशनलीड करोगे जब आप नहीं आयेंगे तो हम नही हो सकता है। फिर गुरु मारा तो हमने गुरुमाराज को रिक्वेस्ट किया और गुरु महाराज आ गए और उस पर्टिकुलर 1 मीटिंग था उसमें सारे पुने के 80 काउंसिलर है और गुरु मारा ने सबको 11 पवित्र पहना और कमाल यह हुआ की उस समय में हमारा बुक डिस्ूशनमैरथनमें हमारा नंबर वन आ गया और गुरुमाराज के पास मैं गया गुरुमाराज इस बार हमारा मैराथन में नंबर वन आ गया महाराज क्या बोलते हैं तो क्या हुआ दिल वाले साल में पूरे साल में नंबर वन है गुरु महाराज हमारे बीच में कॉम्पिटिशन कराते ताकि अच्छे से अच्छे डिस्ट्रीब्यूशन हो जाए और गुरु महाराज हम पूना पूना मंदिर में हमने 1 मीटिंग किया था नया मंदिर बनने से पहले हमने सोचा था की केवल 5 करोड़ का मंदिर हम बनाएंगे तो गुरु महाराज बोले 5 नहीं आपको कम से कम पचीस करोड़ मंदिर बनाना लेकिन बनाते बनाते 50 करोड़ हो जायेगा महाराज की कृपा से 50 सौ करोड़ हो गया और कम्पलीट हो गया राज ग्लोरी है हमारे पास समय बहुत कम है इसलिए ज्यादा हम नहीं बताएंगे और गुरुमाराज ऐसी प्रार्थना करते है की गुरु महाराज कृपा करे ताकि हम ग्रंथ वितरण करें और 1 और चीज बता के मैं एंड करूँगा गुरु महाराज हमारे पुणे जुगल किशोर है और जुगल किशर किचन में इंचार्ज थे और गुरुमाराज उनको बोलते हैं जुगल किशोर व आर यू डूइंग इन किचन कम आउट यू यू शुड प्रीच तो महाराज ने जैसे ही बताया जुगल किशोर को एन आई टी राहर केलर में प्रीचिंग चालू किए। आज आप यकीन नहीं करेंगे। उधर हंड्रेड्स ऑफ़ डी टीजर, बिकमिंग डी
टीजर
उसमे से कुछ वक्त भी ब्रह्मचारी भी बने और ये गुरु महाराज किसी को भी ऐसे व्यक्ति को प्रेरणा प्रदान करते हैं ताकि हम उसको यकीन भी नहीं कर पाएंगे। 1 मरे वो मुर्दे को भी जिंदा कर सकते हैं।
अरे कृष्ण गोपाल कृष्ण को स्वामी महाराज की शिला देखी।
अरे अरे कृष्णा 1 क्रेटा गाड़ी है आर जे टू सेवन सी थ्री सि जीरो ने इनका बोनांजा निकाला है इनको सोने का हार दिया जा रहा है क्योंकि उन्होंने गाड़ी ऐसी जगह लगाई है जिससे पूरा साउथ डेरी ब्लॉक हो गया है। सो प्लीज जिनकी भी गाड़ी है यह आर जे टू सेवन सी थ्री सि जीरो ने क्रेटा गाड़ी है प्लीज अपना सोने का हार लेने के लिए अपनी गाड़ी के पास पहुंचे बस वहाँ से हिला दे और आपको इनाम मिलेगा okay sham har prbt request करे। please come and glolifis्re gurdev
डेली हमलोग संध्यार्ती में गाते हैं, भक्ति न देखे गोरादा संपद। तो आज ये सब कार्यक्रम देख के तो मैं इस प्रकार से सोच रहा था की भक्ति ठाकुर गुरु महाराज को देख रहे हैं। ऐसे ओपुलेंस ऑफ लोट चैतन्य गुरु महाराज भी गोराल संपद जो महाराज ने
यहाँ
पर इतने सब लोग जॉब कर रहे हैं और सेवा कर रहे हैं, दर्शन कर रहे हैं और कई प्रकार के जो गेस्ट हैं मतलब जो भी डिवोटिज नहीं बने हैं वो लोग आ रहे हैं राधा पार, सारथी इतने प्रेम से देख रहे हैं। दर्शन करने गया था तो मतलब 1 फेस्टिवल था हार्ट का देख के इतने सब लोगों को भगवान के दर्शन करते हुए प्रेम से, तो ये महाराज की बहुत कृपा है और महाराज में कई प्रकार के गुण हैं थोड़ा बहुत संग मिला मुझे तो कई बार उनको देखने का मौका मिला उसमें कुछ 12 चर्चा करूंगा मैं हम लोग सिर्फ मायापुर धाम में थे। और महाराज की विनम्रता हमेशा इस प्रकार से रहती है कि महाराज को
सब
भक्तों के साथ जाते हैं महाराज ऐसा नहीं है कि कुछ स्पेशल है। तो मगर इस प्रकार ऐसी कुछ हुआ था कि सबको मालूम है आप सबको 5 तत्व अभिषेक में 5 तत्व इंस्टॉलेशन में टू थाज थ्री ऑफ और जो भी था वो याद नहीं मुझे ठीक से तो उस समय हम वहाँ पर थे और महाराज जी और जयवताकामाराज को चुना था सी बी सी ने और मायापुर मैनेजमेंट ने अभिषेक के लिए तुम्हे कई बार मुझे इस प्रकार से उस समय कहा था कि तब और भी वक्त होने चाहिए थे बाकी प्रॉपर्टी साइप्रस भी होने चाहिए थे। तो महाराज का मतलब इस प्रकार से यह नहीं कि मैं कुछ स्पेशल हूँ इसका कुछ भी मतलब फील नहीं था बल्कि महाराज उल्टा चाहते थे कि बाकी भक्त लोग भी वहाँ पर हो। और इसी प्रकार से 1 बार उसी समय की बात है मायापुर में नेट शायद उससे बात है तुम्हारा जनली हम सब जानते हैं तत्व की आरती करते हैं मायापुर में मंगल रती में तो उस समय सेवा में थे तो मैं कभी कभी मंगला जाता था तो हम लोग गए थे मायापुर धाम में और महाराज उस दिन राधा माधव के ऑल्टो तक गए और जब राधा माधव के ऑल्टो में गए मंगली से पहले राधा माधव स्टेसी पुजारी से महाराज बोला की आरती कौन करता है और पुजारी ने माँ को ये नहीं बोला कि आप कर सकतेहैं बोले महाराज आप कर रहे हैं और महाराज ने जिस तरह से पुजारी को बोला कि मैं कर सकता हूँ आई कैन एक्सप्रेस से बोला बहुत ही बिन नंबर क्वालिफाई तो तो इस प्रकार से महाराज की विनमर्ता है और हम लोग महज में महज का सेवा में था कीनिया में तो महज बहुत अड्जस्टिंग भी है तो 1 शहर से दूसरे शहर के लिए तो पैकिंग में शूज भूल गया मैं वॉक के लिए और हम सबको बता ट्रैवलिंग कैसे में महराज को वॉक ब्लॉक मिस नहीं करते है वो मेडिकल सिस्टी भी है तो मार्ग शूज भूल गया था मैं हम लोग गए थे किस मुह से युगांडा की तरफ तो वहाँ पर मार्ग भूल गया मैं लेके जाना बट महाराज
ने
काफी अडजस्ट किया उस समय और बाद में किसी दूसरे भक्त के शूज पहन कर वॉक में गए और उसी टाइम पर मैंने मुझसे महज की क्लॉक गुम हो गयी थी तो रात को महज सोने लगे तो क्लॉक लाम क्लॉक नहीं मिल रही थी तो मैंने बोला मोबाइल लगा देता हूँ तो महाराज बोले मे को लामनहीचाहिएरातमें उठता टाइम में उड़ जाऊंगा सुबह में। फिर मैंने बोला maराजमोबइlटाme बहुत सान है sorry here any way to completed maharaj didnt want to see timing anyway, thank you very much।
बहुत बहुत धन्यवाद जिका अब हमारे बीच
में
हिज गेस हैलग्रीउप्रहुजो की हमारे संन्यास कैंडिडेट भी हैं, अब विद्वान भी है
हर नमाविणसा प्रभु, पदस्य, साहित्यम जय प्रकाश से भरे प्रचार कतनसाधुभगवतपादय तो संकेत में बोलना है थोड़ा इसे गुरु महाराज की अनेक पासटाइम आप लोग बोले जैसे समुद्र में बहुत सारी नदियाँ मिल जाता है लेकिन समुद्र विचार नहीं करता है कौन सा पानी है परन्तु सब को एक्सेप्ट कर लेते हैं तो हम तो कोई 1 नाली के हैं तो फिर भी प्रयास कर रहे हैं तो गुरु महाराज में वास्तविक प्रभुपाद कृपा मूर्ति है जैसे श्रील प्रभुपाद है कृष्ण कृपा से मूर्ति तो हम गुरु महाराज के जो आचरण है और प्रभुपाद के प्रति जो निष्ठा है देख सकते हैं कि प्रभुपाद की कृपा को कैसे कैरी कर रहे हैं तो 2012 में गुरु महाराज गुरगांव में उनके साथ चलने के लिए मुझे बोले तो एम ई की में जो मालिक है तो महाराज बोले आपके कैडल है कथा करेंगे तो आज मेरे साथ चलो दूसरे गाड़ी क्यों करना है तो वहाँ तो वो जो मालिक था तो महाराज से मिला और महाराज को एड्रेस कर रहा था प्रभु में सुना हूँ आप डबल एम बी ए की है लेकिन महाराज इतने बिना मरता से बोले नहीं नहीं हमारे मंदिर में तो कई इंजीनियर से हैं, कई एम बी बी एस से। महाराज अपने बारे में कुछ भी नहीं बोले। दूसरे जू में मकर संगराद के दिन गुरु महाराज ने कहा ऐसे गुरु प्रभुपाद ने कुछ लिखा नहीं है। गंगा सागर मेला के बारे में, मकर संक्रांति के बारे में। तो आप कुछ थोड़ा बता सकते हैं। और मैं सुना हूँ इंटरनेट से आज भिषमददेहत्याकिए थे। तो मैं कहा कि गुरुमाराज आज आज दिन नहीं है। क्योंकि गीता जयंती की फिफ्टी सिक्स डेज के बाद छोड़े कहते नहीं प्रहुपात, कुछ लिखे नहीं है, आप कुछ मुझे लिखकर दीजिए तो मेक ड्राइ नमा बना कर के पेपर में लिख लिया। तो गुरु महाराज बोले मैं सर प्रपात के शब्दों को दोहराऊंगा, आप चल जाओ, मेरा रोड में क्लास दे? 2 तो प्रभुपाद के प्रति कितनी निष्ठा है, प्रपात के प्रति, शब्द के प्रति। और हम उस शिक्षा को ग्रहण करना चाहिए, परंपरा हैं और प्रभुपाद की कृपा को कैसे कैरी कर रहे हैं सब भी जीव के प्रति नाइनटी। सेवन में तो गुरु महाराज वृंदावन मंदिर से वर्किंग कर रहे थे, छठी गिरा तक। उस समय रास्ता अच्छा नहीं था। तो ऐसे देखे गुरू महाराज झुके हुए हैं। त हम सोचे कि कुछ कंकर आ। तो महाराज देखे कि 1 चिंटी को हरे कृष्ण, हरे कृष्ण बोल रहे कि चिंटी मर गया था तो कितने दयार है। तो आज इस पवित्र गुरु महाराज के अप्रभाव पर हम प्रार्थना करेंगे कि उनकी करुणा 1 बिंदु हमारे पर पड़े। तो हम उनके आदर्शों को हम अनुसरण कर।
पाए
श्रीलभगोतपाद की जाय, श्रील भगतपादआबरिभामहामत सब की जाए।
अब हमारे बीच में इंटरनेशनल प्रचारिका, हर ग्रेस, राधिका कृपा माता जी जो हिंदी, इंग्लिश और पंजाबी भाषाओं में प्रचार करती हैं और गुरमुखी में भी किताबें लिखी हैं, बेश
न
की जाए, सो सबने। आज बोला मोहन प्रभु जी की बात सुन के। और फिर भक्त ने बताया कि गुड़ महाराज मुर्दों को भी जिंदा कर देते हैं तो सही है मैं ज्यादा पीछे नहीं जाऊंगी। बिल्कुल पिछले 1 महीने पहले की बात बताऊंगी, उसके बाद रीड व आई हैव। रिटन गुड़मार ने पहले बोलूंगी मोगला करतार नहीं बचायेंगे मृदंग फर्स्ट ऑगस्ट को गुरवाज लेक्चर दे रहे थे, इधर टेंपल में बहुत बारिश हो रही थी, हम गाड़ी पा करके भाग रहे थे। आज रनिंग टू द गुर्माजकेकीरतन की आवाज आ रही थी, जैसे मैं भाग रही थी और सोच रही थी चप्पलें उतार दिए और कहीं मैं फिसल न जाऊं। और वही हुआ कि उसी आय स्लिप डाउन और मैं स्लिप कर गई और फिर भी उठ कर अपनी साड़ी से अपने बाजू को लपेट कर चली गई। मुझे लगा मेरी बाजू में बहुत दर्द है, रिस्ट पर बट उसको मैंने अच्छे से बांध दिया, पूरा लेक्चर अटेंड किया। उसके बाद गुरु मार्च से मिली उनसे प्रसाद भी लिया, उनको बताया कि से दर्द हो रहा है तो ही से भी डॉक्टर पर जाओ। तो प्रभु जी डॉक्टर पर ले गए जो हमारे गुरु भाई डॉक्टर हैं, पर वो अवेलेबल नहीं थे, सो वे, तो उन्होंने देखा और एक्सरे हुआ तो का फ्रैक्चर है, रिस्ट में क्रैक आ गया और बहुत बड़ा फैक्टर, व प्लास्टर चढ़ा दिया दिन टोल गुरुमाराज के, ऐसे ऐसे हो गया तो ही वेरी वर
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दिन बीत गए इतने बड़े प्लास्टर के साथ और संडे को हुआ वेंसडे को, मेरे को कोई राशि मेरे फिंगर्स में तो डॉक्टर को मैंने बोला मुझे ये प्लास्टर उतरवाना है, मुझे लग रहा है मेरे फिंगर्स में कोई प्रॉब्लम आ रही है, तो डॉक्टर मान नहीं रहा था न से की इतनी जल्दी। fungles lg to days me nothing happens, i said i want to get it removed so i went and i got it removed the was a lot of fungleinfectionma fingers in to डेज तो गुरु को मैंने सी थर्सडे का दिन था, वो और प्लास्टर उतर गया। i was लाइंग मेडिसिन ले का फ़ोन बजा और गुर महाराज का फ़ोन था इज सो फोन उठाया गुरमार मुझे कहते हैं हो यू सेन महाराज मेरे, ऐसे से प्रॉब्लम हो गया, फेक्चर नहीं देखना फंगर्सदेखातोलेट पेन बट आई वांट दैट टू बी फर्स्ट फुल्ली रिकवर। मुझे कहते हैं अभी तुम्हें जाना है जो ऑथोपेटिक सर्जन जो हमारे गुरु भाई हैं, तुम्हारे डिसाइपल यू गो टू हिम। sad men gुrगाwwillgo to more a morning। no you go right now and itr you calling up or should i rang it is no no cali। मैंने उनको कॉल कर वो क्लिनिक में थे m sico clokivasinrsclinic five thirty, six clock, i was their। उन्होंने मेरा एक्सरे देखा अच्छे से देखते जा रहे हैं, देखते जा रहे है, माटीफाइनग्लास उठा लिया, कहते हैं फ्रैक्चर तो है ही नहीं। there is nothing in your hand। और उन्होंने मेरा हाथ पुल किया, पुश किया, सब कुछ घुमा लिया, ट्विस्ट किया, कहते हैं पेन नहीं उस दिन तो बहुत पता कहते ह। there is no facture your hand and he imidetelycalld grumaransinther is no flactureinyorhand, she is perfectly ka। सो दिस इज दी पावर ऑफ़ गुरुमाराज गुर माराज कुछ भी कर सकते हैं। बहुत सारे इंसीडेंट्स है मेरे पास बोलने के लिए समय नहीं है, करताल जो बोलना चाहती हूँ। क्यूँकि अभी प्रभु जी ने बताया प्रभु जी बहुत सीनियर है, जिन्होंने मुझे प्लीज भी किया है। उन्होंने अभी बताया कि इंटरनेशनल प्रीचर हूं तो पहले मैं लॉकडाउन से पहले आई वॉज ट्रैवलिंग इंटरनेशनली पर जब लॉकडाउन हो गया तो कोई जा नहीं सकती थी। घर पे बंद थे तो स्टार्टेड डूइंग देर ऑनलाइन प्रीचिंग आ स्टार्टेड सो तब आया मैरेथोन ऑनलाइन प्रीचिंग में बहुत लोग जुड़ गए मेरे साथ तो पहला मैराथन आया लास्ट यर तो भागवत श्रीमद भागवत मैरेथोन सो गुरमाल मुझे क्या है इम गिविंग यू टारगेट ऑफ़ ऑन थाउजंड बागवत। मैंने कहा ये तो लाइफटाइम टारगेट है, हो आई अचीव बट वें गुरु माला जी अभी आपको। प्रभुजी ने कहा जब गुरु माज कुछ देते हैं तो साथ में शक्ति देते हैं। इस नोट वी डू इट हम ये गलती करते है, सोचते हैं हमने किया, हम कुछ नहीं करते हैं। गुड माराज ने मुझे लाइफटाइम टारगेट दिया और मैंने वैसे का वैसे ही अपने ग्रुप्स में सबको बोल दिया कि हमें भागवत मैराथान करना है। वन बिलिव जो मेरे ग्रुप्स में लोग है, वो नाइनटी नाइन परसेंट नए लोग हैं। वो इस्कॉन को नहीं जानते हैं, वो इस्कॉन को अभी जाना है। सब कुछ नया सीख रहे हैं उन्होंने मेरे साथ। मिलकर तकरीबन 400 भागवतम सेट करें लास्ट हियर। और इस साल गुरु महाराज ने मेरे से प्लेज हुआ। मेरा से मोना जी ने प्लेज लिया। मैंने कहा हम कर लेंगे, जितना करना चाहते हैं प्ले कीजिए तो ऐसे 300 कर लेंगे। आज हम थ्री हंड्रेड एंड सेवेंटी भागवतम सेट कर चुके हैं। सो ऑल द क्रेडिटस ग्रुमहाराज गुरुमाराज के कहने पर ये सारे डिवोटीज जो बकते हैं भी, वो सब अपने आप ही करते हैं। जैसे गुरमा की व्यास पूजा थी, वो लोग अपने सुबह सुबह मेरे फोन पर मेसेज आ रहे हैं। फाइव भागवत इन गुरवारा जॉनर टेन भागवतम इन गुरुमाराज नर सो सो मेनी भागवतम दन दिस इज क्च्वललीगुरमारज की शक्ति है कभी हम अपने ऊपर न ले। bus i will read few lines from the grnsebndtheरs शॉट point at जस्ट टू लाइन टू लाइन फ्रॉम द गुरु महाराज में बैठती है गुरुदेव मात गुरुदेव पिता गुरुदेव स्वामी परमेश गुरुदेव सखा अज्ञान पंजन गुरुदेव मंदपसहोदरागुरुदेव दाता हरि नाम उपदेश गुरु देव मंत निरोधा गुरुदेव सांत सत बुद मूरत गुरुदेव पारस परस परा गुरुदेव तीरत अमृत सरोवर गुरु ज्ञान मंजन अपरं परा गुरुदेव करता सब पाप हरता गुरुदेव पतित पावन करा गुरुदेव आद जुगाद जुग जुग गुरुदेव मंतर जप उदरा गुरुदेव संगत प्रम मेल कर किरपा हम मूड़ पापी जत लग तरह गुरुदेव सतगुर पार ब्रहम परमेशर गुरु देव नानक हरि नमस्कार सो गुरनान देव जी कहते हैं मैं हरी को नमस्कार करता हूँ की मुझे हमेशा सच्चे गुरु के सानिध्य में रखे
दे।
जस्ट फ्यू लाइन रीड माई पोइंट आर बिलवेड फादर और डिजायर यौर मर्सी र विश your happiness आर लर्निंग योर प्लेजर आर ैस्पिरेशन योर joi आर ड्रीम योर डिलाइट आर होप योर ब्लेसिंग आर लॉन्गिंग योर लव आर अर्ज योर कंटेंटमेंट आर प्रेयर्स your compaशioनगमाज की जाए जस्ट दर is a टू mint video that has been prepared by my online diosnalfamlymy group of round twelve hundred forteen hundred people which have got with me उन्होंने 1 छोटा सा video बनाया two minutes, just its two minute video यहाँ दिखाए to minute to minute so please i we request that to be played right now for the pleasure of all grumaसेली here vusapropatiजgrm san glories hansal to right or greatness is fail to behold ousplendor you are the jemmafarlives, you are the jo
or hats, you are the pudofarisma may
spuricul master may tres
mast my tregayoucuyniss wa strand your general city a
sad
you humtizavabautiyou botitiawewakniyou, we look for wattू your cines wijers your general city, we look for your compassion, we remove mai sport master may tres
my spirtual master my treaser we thank the lot for your presence naver lage we bank the lot to keepesalwazing your shelter weve prad to the lot to never lose your trust we ask the lot to let you be there awas mi spicel master my treaser
कविता सनापतनेसोरधीकपा बहुत बहुत धन्यवाद इतना सुन्दर उन्होंने अपने हृदय को उद्गार रखे। साथ ही भक्तों से पोयम बुलवाया। उन्होंने बहुत बढ़िया थैंक। यू सो मच माताजी। nice wide सो ना हाव रुकमनी करिश्णा
प्रभु जी,
उसकी सुंदर तैयार रहे। प्लीज
तो आज बहुत ही शुभ दिन है। स सुबह से महाराज का गुणगान सुन रहे हैं। तो मैं अपने आपको बहुत ही सौभाग्यशाली समझ रहा हूँ कितने भक्तों का इतना सुन्दर उद्गार, महाराज की इतना सुन्दर प्रेम। भगवान गीता में कहते हैं जन्म कर्म च मे दिव्यं। भगवान के जन्म और कर्म की दिव्यता को समझना आसान नहीं है। भगवान के जन्म, कर्म की दिव्यता से ज्यादा कठिन है भक्तों के जन्म और कर्म की दिव्यता को समझना। क्योंकि भगवान तो कभी अपना चतुरभूज रूप दिखाते हैं, कभी यूनिवर्सल फॉर्म दिखाते हैं। हमारे गुरु जो चमत्कार करते भी है, उसको बड़ा छुपा कर रखते हैं। जैसे सर ने बताया, माताजी ने बताया, ये थोड़े से चमत्कार है। भक्तों के पास सारी सिद्धियां होती हैं। प्रोप बताते है की भक्त सिद्धि को प्रदर्शित नहीं करते और 1 शिष्य से यह गलती हो जाती है। उनको लगता है कि गुरु हमारी तरह ही कोई साधारण व्यक्ति हैं। लेकिन आज के दिन महाराज का प्राकट्य हुआ तो बहुत सुन्दर अवसर है हमारे पास। हमने इतना महाराज का गुणगान सुना कि हम इस बात में मनन करे कि महाराज का प्रगति वास्तव में दिव्य है। 1 साधारण जीव, इस संसार में प्रकट होता है अपने कई जन्मों की अतरिप्तइच्छाओं की पूर्ति करने के लिए। तो महाराज का भौतिक विषय से कुछ पाने की इच्छा नहीं है। आध्यात्मिक दृष्टि से पूर्ण है। महाराज का प्रकृति केवल बद्ध जीवों के उद्धार के लिए ही हुआ है। अगर इस बात को हम एप्रीसियेट करते हैं हृदय से। तब हम महाराज के गुणों को समझ पाएंगे। अगर मानेंगे नहीं, महाराज का जन्म ऐसे ही है। फिर कोई बात नही चांस की बात है। महाराज थोड़ी सी कुछ उन्नत है। नहीं। महाराज का प्रकृति केवल मेरे उद्धार के
लिए ही हुआ है।
तब हम महाराज के गुणों को हृदय से उनको एप्रीसियेट कर पायेंगे। तब हम भक्ति में कुछ सफलता प्राप्त कर पायेंगे। तो महाराज के गुणों की खान है। समय कम है तो मैंने 3 गुणों को चुना है। छोटे छोटे संक्षेप में बताना चाहूँगा सबसे पहले है कि जैसे भगवान का गुण है निमिशा, भगवान अपने भक्तों के गुणों को देखते हैं, गुणों को देखते है। आँखे बड़ी बड़ी कर लेते हैं औ भक्तों के फाल्ट होते हैं तो आँखे बंद कर लेते है। हमारे गुरु महाराज भी वैसे ही हैं इनके पास। कभी महाराज किसी जी में थोड़ा सा भी गुण दिख जाएगा। महाराज उसको पकड़ लेते हैं और उसको फैन करत है और उसको बड़ी उसको आगे बढ़ाते है। ये महाराज की दक्षता है। मैं कई बार महाराज के पास गया, नेचर है बुताना महाराज कम्पलेंट करने के लिए। ऐसे में 1 बार बताता हूँ महाराज के 2 गुण बता देते हैं। वह चुप करने के लिए कुछ बोलते है। इसके आगे यह महाराज का बहुत सुन्दर गुण है। सब अच्छे गुण को देखते हैं। दूसरा महाराज के गुण लगता है। की जैसे परमात्मा किसी जीव को भूलते नहीं है। महाराज की फोटोगिमहमारेएयु्ध फार्म के लड़के थे, वो पंजाबी बाग में रहते थे, ज्वाइन करना चाहते थे, पूना चले गए, पूना में जाके वहाँ जॉब कर रहे थे, गुरु महाराज पूना में गए और जैसे ने लक्सर दिया, उस लड़के को देखा, महाराज तुरंत पहचान लिया, उसको बोला पंजाबी बाग से कमाल ऐसा नहीं, वो लड़का फ्रंटलाइन लीडर है। 1 साधारण है, पहचान है, पंजाबी बाग से है, आप भी मिले नहीं, कभी कुछ नहीं कैसे, महाराज जान जाते है और जैसे भक्तों के रिश्तेदारों में क्या समस्या चली है। 1 बार किसी ने महाराज से शेयर कर ली, महाराज इसको बोलते नहीं है। और 1 सेकेंड के लिए मिलेंगे वो ही समस्या पूछेंगे आप काफी भक्तों के क्पीरिंसहोगा जो आपके जीवन में समस्या चल रही है, महाराज वह पूछते है। और तीसरा जो गुण है महाराज महाराज की दक्षता महाराज एक्सपर्ट है, हर चीज में कैसे भक्तों को इंगेज करना है, कैसे हर परिस्थिति को इंगेज करना है और महाराज के आंसर हम देखते है। तो 1 काली भक्त मुझसे शेयर कर रहे थे। महाराज ने उस भक्त से शेयर किया कि इस कौम को मैनेज करना इतना आसान नहीं है। तो उस भक्त ने बड़े ही भाव बिफोर रोके बोला महाराज हाव कैन असिस्ट यू बोला जस्ट मैनेज टेम्पल महाराज की एक्स और सिचुएशन भी। 1 बार महाराज घर किसी मंदिर में गया तो 1 भक्तों का ग्रुप आया, उन्होंने 1 भक्त के बारे में कुछ बताया महाराज वो ठीक नहीं कर रहे है, कुछ काम कर रहे है, उस को बुलाया बोले मैंने सुना महाराज ये सब साजिश है, सेवा ह। महाराज बोला देखो अगर इस बात में कोई सच्चाई नहीं है तो परवाह मत करो और सच्चाई है तो 1 मास। इस प्रकार महाराज बहुत साल पहले मैं महाराज को अपने घर ले गया था। 2000 3 की बात है, मेरे माताजी बीमार थे, महाराज आइए प्लीज अपने दर्शन दे दीजिये तो महाराज आए तो माता पिता थोड़ा कंपलेंट करने लगे, रात को लेट आता है ये सब। वो तो महाराज बोले देखिये गुरु तो चाहता है हर शिष्य संन्यास ले लेकिन आज कल के आज कल के शिष्य नालायक के बात सुनते ही नहीं है। तो किसी को पता नहीं चला क्या बात है, क्या है महाराज अपना आंसर देते है, महाराज है इसे न गोपाल महाराज की जय
अभी हiजसकृष्णप्रिपबुजी बलबदुरबबूजी दोनों से रिकवेस्ट चाहिए। प्लीज, वन, बाई, वन दे, कैन, कम, सो, हिस, ग्रेस, कृष्ण, प्रिय, प्राबुजी,
nmmisudakisnasta, but, प्रचार, कृत्वान, साधु, भागवत, पदायतेनमहा,
गुरु
महाराज के जो अनंत गुण हैं उनको सुनने में सुबह से बहुत बहुत, बहुत ही अच्छा लग रहा था और लगता है कि जो व्यास पूजा है 1 दिन की नहीं कई दिन की होनी चाहिए क्योंकि क्योंकि कई कई जो हैं भक्त उनकी जो उदगार हैं उनके अंदर ही रह जाते हैं और सुनने में बहुत अच्छा लगता है कैसे कैसे लोगों के लिए लाइसेंस है। तो यह देख कर मुझे न भगवान कृष्ण की वो जो गोवर्धन लीला है न वो याद आती है जब भगवान कृष्ण। गोवर्धन को उठाये होते हैं। तो सारे के सारे, उनके जो, उनके मतलब सखा भी हैं, गोपियां भी हैं, वत्सल्य रस भी हैं। सारे के सारे, जो उनके भक्त हैं, वो 7 दिन तक जो हैं वो इंजॉय कर रहे होते हैं, सभी रस 1 ही साथ। तो इसी तरह से आज का दिन भी बहुत ही महत्वपूर्ण दिन है। और गुरु महाराज के जो गुण हैं वो तो अनंत है। और सबसे ज्यादा जो उनका गुण जो है, मुझे लगता है वो है उनकी ह्यूमिलिटी नम्रता, मुझे तो लगता है कि नम्रता परसोनीफाइड है वो हुमिलिटीपरसोनिफाइड मतलब, अगर कोई अगर नम्रता का कोई रूप ले ले तो वो ऐसा ही रूप होगा, ऐसा लगता है गुरु महाराज को देख के, क्योंकि ये जो हैं वो कभी भी वो समझते नहीं हैं। कभी देखिये सारे लोग बोल रहे थे, तो उन्होंने कहा ये लोग तो ऐसे कहते हैं, लेकिन वैसे तो सब हैं, टीम वर्क है, सब लोगों की ही प्रेरणा से सारे कार्य होते हैं। दिखने में तो ये ठीक लगता है, लेकिन जो प्रेरणा है, जो पीछे पुश है, वो गुरु महाराज के हैं। कोई भी कार्य होता है तो आज के दिन जो है मैं ज्यादा कुछ नहीं कहूँगा, मैं तो सुनने में बहुत अच्छा लग रहा था लोगों के उदगार में यही गुरु महाराज के चरणों में, आज जो 1 बहुत ही शुभ दिन है और इस दिन जो है वैश्नव बहुत ज्यादा उदार होते हैं, मैं उनके चरणों में प्रार्थना करूंगा गुरु महाराज, मुझे भी जो है अपनी बाजी स्कान की सेवा में, हमेशा लगाए रखिये जाय, शीलपाकीजशीलभागवत
वाज, गुरु महाराज अविरभामहामहामत्सव के जा,
हमारे बीच में, हमारे इस्कॉन दिल्ली के फोर्ट फॉर लाइफ, डायरेक्टर हिज, गेश बलबजपरहुजप्रहुपाजी का
सबसे प्रिय प्रोजेक्ट है।
फोर्ट फार लाइफ, उसके डायरेक्टर
ज्ञान
दश्याज्नजासलाखया चकचुरोमिलतमतसमें, सिरिगुरुवेनमहा यश्यसाधाप्रसादा, यश्यप्सादनग, नायनतुरश्सजसथिसंध्यम, बंदे गुरु, श्री चरणारविंद बंदे गुरु, श्री चरणा र
विनधम
परम, गुरदेव के चरणों में कोटि कोशिश प्रणाम। हम 1 सामान्य लड़के के तरह थे, कोई ज्यादा बुद्धि भी नहीं था, कोई ज्यादा सभ्यता भी नहीं थी। लेकिन जब से महाराज के गुरु महाराज के शरण में आये, एटी के दशक में महाराज ने स्वीकार किया, अपने सुलागति दी और 1 प्रकार से जीवन प्रदान किया। प्राय हम सब संसार में आते हैं, माता पिता से माता पिता जन्म देकर छोड़ देते है, संसार में। 1 जंगल के संसार में रहता है, लगा रहता है, कोई उसको रास्ता लक्ष्य नहीं मिलती है। लेकिन गुरु महाराज 1 जीवन पर जीवन उधार के रूप में स्वीकार किए और अपनी स्वागती दिए। मैं 12 अनुभूतियां शेयर करना चाहूँगा। 1 समय जब मि डे चल रहा था, दिल्ली में स्टार्टिंग में था, तो फिर यहाँ से जब लार्ज बड़ा स्केल पर आ गया, तो फिर यहाँ से बड़े किचन में चला गया, तो मैं वहाँ नहीं जाना चाहता था, सफेद जाना पड़ेगा और संभालने के लिए गुरु महाराज बोले की तुम क्यों नहीं जा रहे? हाँ महाराज मंदिर छोड़ने बाहर में नहीं जाऊंगा सेवा के लिए। तो महाराज बोले यह महाराज कितनी सुन्दर मुझे लगा हृदय को द्रवित किया और बड़ी अच्छी अनुभूति हुई कि हमारे पवित्र होनी चाहिए। दूसरी 1 अनुभूति है पहले भी कर चुका हूँ क्षेत्र में नया सेंटर शुरू कर रहे थे तो लोग प्रोग्राम के लिए तो बोले की आप यहीं रहो हम लोग आगे बढ़ायेंगे इसको मार से बात कर लीजिये आप तो महाराज ऐसी बात कि चंडीगढ़ मेरा तो महाराज बोले कि इसको यहाँ छोड़ दीजिये सेवा करेगा मेरे साथ में उसको बुला के लाओ तो बुला लाए प्रणाम किया तो राज बोले कि तुम अपनी में दिक्षा देकर बहुत गलत किया बात इस प्रकार से जब कुछ मेरा बाल बढ़ गया था तो मगर महाराज बोले कि तुम्हारा बाल बढ़ गया है फंक्शन के लिए वाले ही तुम्हारा बाल मंदिर में भक्त हो गया। 1 समय महाराज प्रवास में थे है पुर में प्रोग्राम था फॉर्म तो महाराज को अरेंज किया गया था कहीं रहने के लिए किसी घर में में हम देखे की सातवें थे महाराज रात भर सोए नहीं बैठे रहे जॉब करते रहे 3 बजे के बंगलादेश इस प्रकार से 1 जीवन का गुरु मारक साथ अच्छी अनुभूति रही और महाराज के जब से शरण में आये हैं तब से जीवन का लक्ष्य की प्रस्तृति हुआ हुआ और अपने जीवन को लक्ष्य को प्राप्त करे रेकृष्ण
रeकues्टइजग्रेस मधु सुंदर प्रभुजी दिल्ली वैशनवmoमेंकवि शिरोमणी है हमारे इस ग्रेस मधु सुंदर प्रभुजी बुक डिस्ट्रीब्यूशन शिरोमणी है मधु सुंदर प्रभुजी लविंग अमेजिंग डिवोटी शिरोमणी है मधु सुंदर प्रभु जी मधु सुंदर रहे हैं लव सुन्दर बालपुर मुझे सुंदर गाल पर से बहुत प्यार है इसलिए मैं हूँ सुन्दर गुबालपुरआैप्हुजी का प्यार है लिए राजी कह रहे हैं कि मैं तो बुक डिस्ट्रबूट करता हूँ लेकिन वो तो कितनो को भक्त बनाते है उनकी भक्ति की भूख मिटाते हैं, वो कहते हैं आई लव यू सो यू कम फर्स्ट
कृष्णा उम ज्ञान तिमबरंधसयग्ञानं जन सलागयाचक्छुरुन मिलित येन तस्मै श्री गुरवे नम हरि कृष्णा तो गुरु महाराज के सानिध्य में काफी सारे अनुभव हुए हैं और वस्तुतः हम लोग जो भी आज कुछ कर पा रहे हैं जैसे कृष्ण प्रिया प्रो ने बताया
भी कि
माया के प्रभाव से ऐसा प्रतीत होता है कि हम लोग कर रहे हैं भगवान कृष्ण बताते हैं गीता में कि अहंकार भी उरात्मा करता हामिद मन ते पर उस माया के प्रभाव के द्वारा हम सब इस बात को महसूस करते हैं कई बार कि हम लोग बहुत कुछ कार्य कर रहे हैं लेकिन वास्तविकता यह है कि हर छण और हर मोमेंट हम देखते हैं कि भगवान की शक्ति गुरु की कृपा के द्वारा हमारा रक्षा करती है और इसके कई सारे अनुभव हर भक्त होते हैं और उन अनुभवों को भक्त जो है वो अपना व्यक्त कर रहे हैं जब तक गुरु का आशीर्वाद न हो और भगवान गुरु के आशीर्वाद से भगवान का संरक्षण न हो। 1 सांस भी हम लोग नहीं ले सकते स्पेशली भगवान की सेवा में
तो
ये बहुत परम सौभाग्य की बात है कि हम सबको गुरु महाराज जैसे शुद्ध भक्त के संघ का अवसर प्राप्त हुआ महाराज के हजारों गुण हैं जिनकी गिनती नहीं की जा सकती और मैं सुबह से अपनी चेतना को शुद्ध करने के लिए बैठकर सुन रहा था। सारे भक्तों के वक्तव्य महाराज के गुणगान। तो अभी मुझे कुछ, वैसे तो कई सारे अनुभव हैं, लेकिन सब से जब भी महाराज के पास मिलते हैं, जब भी, जब भी जाते हैं, मिलने कुछ न कुछ नये गुण, कुछ न कुछ नए अनुभव होते हैं। और वो सब जो है वो महाराज की कृपा से सारे भक्त लोग याद भी करते हैं। तो 1 बार महाराज प्रवचन दे रहे थे सेमिनार हॉल में, तो प्रवचन के प्रांत हमने महाराज से प्रश्न पूछा कि महाराज आपने कहा कि भक्तों का संग इतना जरुरी है। और इस प्रकार से कुछ प्रश्न मैंने पूछा तो महाराज उत्तर दिए कि डी डे से दे मारा। मैंने कहा ये बात महाराज आपने ही तो कहा बोले नहीं नो आई सेड दर ध्रू महाराज सेड तो जनरली कहने की जरुरत नहीं है। बीच बीच में महाराज कुछ इस तरह की बात बोल के कुछ शिक्षा दे देते हैं कि मतलब कैसे रिपीट करना है। जैसे करताल बजा के शिक्षा दे रहे हैं। तो और भी इस तरह से 1 बार महाराज मुझसे मिले। अचानक 1 शब्द महाराज जुड़ते हैं तो महाराज बोले सुन्दर, गोपाल, वाट, इज, योर, एजेंडा, महाराज, वॉर्ड, कैन, बी, a, r, and और sendai only p्reacिंग, तुम्हारे बोले, माई, एजेंडा इज प्रीचिंग, टुगदसोइनवनवor्ड, महाराज से दैट यू आर लिटल डेविएटेड यू नो। you are going in siprेtlाin, press together, not only preaching, but working with the dibates together। तो ऐसे हजारों बातें हैं, पर समय की कमी है और भक्तों का उदगार भी है। तो अंत में मैं यही प प्रार्थना करूंगा कि आज ब्याज पूजा का दिन है, महाराज विशेष करुणा लेकर बैठे हैं तो करुणा बांट रहे हैं। जैसे चेतन महापूर्व महाप्रकाश लीला में बांट रहे थे करुणा। तो ये महाराज के 1 प्रकार से महाकरुणा लीला है। तो उस करुणा को हम भी लूटना चाहते हैं महाराज से प्रार्थना करते हैं कि उनकी सेवा के दौरान हम सब से बहुत रोटियां होती है। तो हमें छमा करते रहे।
हर
ओके 2 गाडियां हैं सिक्स नाइन सेवन और 1 है थ्री वन सेवन फोर, ये 2 गाडियां जिनका बम्पर प्राइज निकाला है इन्होंने ऐसी बढ़िया गाड़ी पार्क की पूरी दिल्ली जाम हो गया है। जिनकी गाडियां प्लीज वहां से गाड़ी हटाये और बंपर प्राइज इकट्ठा करे तुरंत हमसे नहीं किसी और से थ्री वन नाइन सिक्स, थ्री वन नाइन सिक, थ्री वन नाइन सिक्स का बम्पर प्राइज निकाला प्लीज, जरूर पहुंच पर गाडी के पास पहले उसको ढूंढे कहा फंसी है वो फ स को वहां से निकाले और इनाम जीते heरiwolरिकवेस्ट रेंगे ज ज गोपेश से जो कि इस का फरीदाबाद जिंदाबाद को हमेशा जिंदाबाद करते आये है और करते रहेंगे। सoprvise क्esटonप्लीज
तो आप में से कौन कौन अमोगलियपोकोभरतनतम करतेहुए देखना चाहता है। न विष्णु, गोपाल, कृष्ण गोस्वामी, साहित्य, प्रकाश, प्रचार, कृत्वान, साधु, भागवत, पदाय, मोस्ट, स्पिशियसडेहम सबके जीवन का सबसे सुखद दिवस है। वैसे तो हम सुनते हैं कि 1 भक्त के जीवन में, शिष्य के जीवन में हर दिन व्यास पूजा है और परम पूजा, भक्ति जनार्दन स्वामी महाराज अपने सुबह ऑफरिंग में बोल भी रहे थे, इस बात को की ओनली कॉल फ एग्जिस्टेंस इस यू गुरुदेव ऐसा महाराज कुछ बोल रहे थे परन्तु नासवीखयाबक्त के लिए, फिर भी पूरा साल यह हर्षण तो नहीं परन्तु परार्थना यही है की हर षण कर सके परन्तु फिर भी व्यास को विशेष अवसर मिलता है महाराज के चरणों में ऑफरिंग करने का। तो मैं 23 इनसीडेंस है जो रिसेंट है वो शेयर करूँगा जिससे महाराज के गुण अद्भुत प्रकट होते हैं। तो महाराज हर तरह की शक्ति देते हैं, हर तरह का बल देते हैं। अप्रैल के महीने में मार्च के एंड में मुझे करुणा हुआ था तो किसी सेवा के पक्ष में महाराज और हमारे मंदिर में कुछ और भक्तों को भी हुआ। तो महाराज को मुझे फ़ोन करना था कि महाराज मंदिर बंद करना पड़ेगा। कुछ भक्तों को है। तो महाराज ने बोला आई हर्ड यू आर अफेक्टेड बाई करोना बट यू हर स्ट्रॉन्ग मैन। तो ऑ्योसलीहवेरीवेरी वीक मैन बर। क्योंकि गुरुवार ने बोला वो कह के मारे जितनी शक्ति दीदी के करुणा कुमार से एक्ली लिटरली भगाई दिया करुणा रहा परन्तु कोई भी असुविधा स्वास्थ्य में नहीं हुई। और फिर करीब 12, 11, 12 घंटे क्वारंटीन के और फिर किसी सेवा के में महाराज जी का फोन आया। और महाराज जनली हम सबको पता है जब भी महाराज से मिले महाराज बोलते हैं। हाव आर, यू आर, इस टाइम बोला हा। और यू। महाराज ने ऐसे इतने अमेजिंग तरीके से, इतने सख्त तरीके से बोला की जो थोडा बहुत कमजोरी बची थी वो सब महाराज ने 1 लात मार के भगा दी वहां से और फिर महाराज ने बोला और यू आउट इन टेंपल जा रहे हो मैंने महाराज क्वारंटीन कप स टू गो। फिर महाराज ने बोला वेल माय, डॉक्टर कीप सोन टेलिंग मी टू कीप इनसाइड द रूम ऑव्योसली महाराज रूम में नहीं रहते, महाराज बाहर ही जाते रहे, मेशा सेवा में रहते हैं। तो महाराज ने 1 तरह से हिंट दिया कि कहाँ अंदर छुपे रहोगे बाहर निकलो सेवा। महाराज ने फिर शक्ति डाल दी और फिर किसी तरह से सेवा में वापस लगा दिया। तो एक्सट्रीमली ग्रेड फुल महाराज ऐसा करते हैं। हमारे मंदिर का मेजरनुएशनएक्सपेंशन रहा है, काफी साल से चल रहा है, महाराज को पता है हम बहुत स्लो है परन्तु महाराज के आशीर्वाद से बहुत जल्दी शयदिनॉगरेशन होगा इस के लिए बहुत सहायता कर रहे हैं। मारी तो पिछले कई बार मीटिंग महाराज से मिल रहा था, महाराज पु े गोपिशवफंडसमैंने थिंग, शुड बी, एब्ल टू मैनेज, अगली बार गोपेश बाकी चीजों के अलावा महाराज पूछे थे ये गुर शुल बी, एब्ल टू मैनेज वी शुल् बीएल। तो मैनेज 45 बार हुआ तो मुझे लगा की महाराज हर बार ये पूछते हैं कुछ में गड़बड़ तो नहीं कर रहा। और फिर कुछ जाकर ध्यान से देखा, अकाउंट्स डिपार्टमेंट के साथ डिस्कस किया तो ऐक्चवली भी फाउंड दैट वी वर शॉर्ट ऑफ फंड्स। तो मतलब मेर को इतनी बड़ी शिक्षा मिली की कई बार महाराज के शब्दों को मैं विशेषता सरल ले लेता हूँ कि महाराज ने बोल दिया। बस ठीक है उसका उत्तर दे दिया। पर जब महाराज कुछ चीज बोल रहे है टू मेक डब्लू डब्लू हंडरड टाइम्स शोर की, हम सही चल रहे हैं, नहीं चल रहे। फिल्म महाराज की कृपा से एनी वे वी आर एल टू मेक लास्टिंग पंद्रह जून को महाराज आये थे हमारे नए मंदिर का को देखने के लिए की प्रोग्रेस कैसा है तो महाराज बहुत दयालु है, बहुत कृपालु है हमारा घर सेकेंड, फ्लोर पर है महाराज का स्वास्थ के हिसाब से हमें भी बहुत दिक्कत होती है सेकेंड फलोर पे चढ़ने उतरने के लिए। तो महाराज को देख सकते हैं, फिजिकली कितनी दिक्कत होती है। पर महाराज कृपा बरसाने के लिए चढ़ जाते हैं। आराम से ऊपर सेकंड चढ़े प्रसाद लिया, कहते है की टेक रेस्ट बता रहे थे। तो फिर महाराज ने बोला विल टेक रेस, फिफ्टीन ट्वेंटी कहीं आगे जाना है सेवा के लिए। तो फिर महाराज अंदर रूम में गए और रेस्ट किया तो हमें लगा मुझे लगा की महाराज रेस्ट कर रहे हैं। रेस का मतलब होता है आँखें बंद करना। सोना। बाद में भक्तों ने बताया जो ब्रह्मचारी भक्त अंदर गए थे हमारे मंदिर के महाराज का मसाज करने के लिए। तुम्हंे बताया महाराज रेस कैसे कर हे थे। महाराज पूछ रहे थे तुम लोग आपस में झगड़ा तो नहीं करते। मंदिर में प्रसाद तो ठीक, मिलता है। तो ये महाराज का रेस्ट है। अब सोच सकते हैं कितना अमेजिंग है तो महाराज को यही चरणों में प्रार्थना करते है कि महाराज एक्सट्रीमली ग्रेटफुल महाराज की मुझ जैसे महाराज आपने मुझे भी सेवा में लगाया। please forgive my all fences and please keep on engaging me in your service in chilbasmisson thank you gurdev।
गोपेशर आपके हम सब के बीच में आयेंगे समझ सकते है। संकृतन लीडर बुक डिस्ट्रब्यूटर और अपनी कविताओं से सुन्दर कविताओं से गुरु महराज का गुणगान करेंगे हिस देश मध सुंदर प्रभु
हम ज्ञान है। तो आप लोगों ने देख लिया मेरा गुरु भाइयों के प्रति प्रेम सुन्दर गोपाल
और गोपेश
तो दोनो का मौका दिया। और तो ये कविता जो है वैसे इन लोगो का नाम नहीं था। तो ये जो कविता लिखी है ये आप लोगों का ही जो सुबह से गुणगान हो रहा है, उसी से लिखी गई है। इसमें मैं कुछ नहीं किया है, उसी को ही कविता के रूप में कर रहे हैं।
स्टार्ट करते है।
कृष्ण कृपा की मूर्ति है स्वामी शिला प्रपात, कृष्ण कृपा की मूर्ति है स्वामी शिला प्रपात, शिला प्रपात के पुस्तक वितरण की मूर्ति है स्वामी शिला भगत पान कृष्ण जीवों पर कर, कृष्ण जीवों पर करना कर प्रकट हुए जन्माष्टमी के दिन नंद बाबा ने प्रपात उपहार में दिए। नौमी के दिन प्रपात ने अपना अनमोल रत्न दिया। एकादशी के दिन ऐसे शिला प्रपात के प्रिय सैनिक प्रखंड हुए। आज के दिन चलो भक्तों आज के दिन 1 विशाल त्योहार मनाए। चलो भक्तों आज के दिन 1 विशाल त्योहार मनाएं। इस सारी पृथ्वी को आज धुलन, सी, सजाए नगर, नगर, गाँव, गाँव में सजाएं रंगीन पताकाएं सुन्दर विचित्र रंगीन रंगीलियों से सड़के सजाए जिस मार्ग से गुजरे गुरुदेव, वे न रहे फूलों की शैया के बिन, जिस मार्ग से गुजरे गुरुदेव, वह न रहे फूलों की शैया के बिन। क्योंकि शिला प्रपात के प्रिय सैनिक प्रकट हुए हैं। आज के दिन हर युवा पे है, आज शरभ गुरुदेव की चर्चा, हर युवा पे है। आज शिर गुरदेव की चर्चा आकाश से देवता भी कर रहे हैं पुष्पों की
वर्षा,
हर युवा पर। आज सिर्फ गुरदेव की चर्चा आकाश से देवता भी कर रहे हैं पुष्पों की वर्षा। आप लोगों को लग रहा होगा की ये पुष्पो की वर्षा जो है, कोई पीछे से कर रहा है, आकाश से नहीं हो रही है, ऐसा नहीं है, ये विश्वास रहा है, कभी देख सकता है। सारी प्रकृति मना रही है, सारी प्रकृति मना रही है। आज धूम धाम से दिवाली, सारी प्रकृति मना रही है। आज धूमधाम से दिवाली हर, बृकआरछाईहैदेखो, हरियाली ही हरियाली, सब भक्तों का उद्धार हो जायेगा, अब सब भक्तों का उद्धार हो जायेगा। अब चाय कितने भी है, आप दिन ही सब भक्तों का उद्धार हो जायेगा, अब चाहे कितने भी हैं, आप दीन हीन क्यूंकि? प्रपात के प्रिय सैनिक प्रकट हुए हैं। आज के दिन। महाप्रभु ने गोस्वामियों को मंदिर निर्माण के आदेश दिए, महाप्रभु ने गोस्वामियों को मंदिर निर्माण के आदेश दिए। गोस्वामियों ने विंदा मन में अनेक मंदिर बना दिए। प्रबाद ने दिल्ली में आपको 12 मंदिर निर्माण का आदेश दिया। प्रबाद ने दिल्ली में आपको 12 मंदिर का निर्माण का आदेश दिया, आपने पूरी दिल्ली को मंदिरों से घेर लिया, प्रपात ने आपको दिल्ली में 12 मंदिर निर्माण का आदेश दिया, आपने पूरी दिल्ली को मंदिरों से घेर लिया। प्रपात की सेवा में रत रहते हैं आप, 24 घंटे 7 दिन बारहो मास, तल्लीन प्रपात की सेवा में, प्रपात की सेवा में 24 घंटे बारो मास रहते हैं आप तल्लीन, ऐसे प्रपात के प्रिय हुए। आज के दिन, इस्कॉन का यस बढ़ाने में है आपका विशेष योगदान, इस्कॉन का यस बढ़ाने में है आपका विशेष योगदान मैं संजय करताल बजाने आया था, इस्कॉन का यस बढ़ाने में है आपका विशेष योगदान, पूरे ब्रह्माण में हो रहा है। आज आपका गुणगान अनेक भाषाओं में आपने प्रपात के ग्रंथ छपवाये, अनेक भाषाओं में आपने प्रपात के ग्रंथ छपाये, पूरी दुनिया में आपने प्रपात के ग्रंथ बंटवाए। ऐसे गुरुदेव को प्रसन्न करना चाहते है आप, तो ज्वाइन करें मधु सुंदर की
टीम,
ऐसे गुरुदेव को प्रसन्न करना चाहते हैं आप, तो ज्वाइन करें मधु सुंदर की टीम। एस सेल, प्रभात के प्रिय सेवक का प्रकरण है, आज के दिन,
रिक्वेस्ट करेंगे विचित्र कृष्ण प्रभु जी से प्रबजीnइम iske bad last hanuman two and we stopped for the day
reकरshna prmpujagoalsamy maharaj vas puja mhamohsavkenas, it is said when we forget the mercy of spritual, master and krishna, that is the state, illusion maya and the day was puja remind sus as the shastra says the acharya means he has to important qualities, one is is otrk and second, it is upkar so we see maharaj,
you have given
the process and constent inspiration to follow the process for the deliverance of the condition sole and also when you see the condition soles are unable to follow the process of to the expectations you show your nature of upkar bing merciful and give them the chance to constantly practice one time shilaprbupad he was लेक्चरिंग to the hi pees in the initial days and while giving his lecture he mention krishna sitting on the bank of yamuna along with the covert boys and while narrating this fast time he close deside and started chanting krishna krishna krishna krishna krishna proximately ten times he chanted krishna word close rise so among the assembly on hippi as ramanand probo he was only initiated among that assembly
he
as brahman rabu what is return in the back side of the lid of swami so brahmand probo said krishna is return so when he closes is is he sees word krishna and constantly cant krishna similarly maharaj we see why open dis or close dise you are alves ingasedincanting or some form of devotion service so everywhere you see krishna and you can show krishna to the condition sols so on this auspicious day hardflldplaers at your lotus feet that despite many fold i have you have engaged me inspired men some services please keep me les in gasedinयrसrviसeज to your sptulmasterओके अभी विश्वरुप्रभुजिनने
सारा यहां टेक्निकल हेल्प की और अमदाबाद से हैं और बहुत प्रकार की सेवाएं करते हैं सो रिक्वेस्ट करेंगे अभी उनका विडियो प्ले करेंगे and then we have the last aping from as gras
marge most sense in s on the most of species basfodaoferngras i make for the inteligence to select some drops from the son of your transient colleges and glories to right a few for my own education i take the opportunity express my gratitud shilaprowpadonis one twenty five wersaniversity for blessing me which is most trustwersy and intmate associate your devingesasmyspretal master its prevulit for us the field the presence of shilapraupat in your association and we get to realize is unlimited transitant colitis in your persnality you are one of those rar sors, whois scaling out the legacy of papad to continue to deliver the folonsosyouare living this moment of papad with the vison to deliver umanity the next ten thousand years you do not let opsticlsayour determination to sell your spital master is actually very difficult to manage and expand over society, but it you try to understand the mentality of the individual the taonstheneeds tuting them quali keeping the vison for them and the society and following the instruction of sita propet you take the decision according to the situations with the balance approach this ip maturity is very difficult to gain, but you are giving the best example for this we will be able to please you if we try to come as close as possible to your desire if all your dispels unitedly make a strong effort number ne to throw away the great for the respect and fame to to deflect tocltuatfrget and forgiving tendency keeping the concept of a bigger family in the main number the to help connect and appreciate each other keeping you in the center for to secrifice their comfort and taking the humberside and to improve the colite of thinning and riding and making wigistansforpeton। if you do this, we can bring the incredible change in the society on the one twenty fifth bortaniversofslapra pat couple of das, the prime minister of india is released the kin in the mamagofshlapowpat in this event, the prime minister modi clorifasilpropad very amazingly that around twenty mint for around twenty minutes s one of the most influencing personality in the world today and being the prime minister of the country, it is the glorification of shila propet by the entire nation on this most species apres day, all the credit goes to your wonderful efforts and your relation with the prime minister on this ospistesdayibag for your merci that i can become instent in you re service to silapraupat please place me to utualisewhat your time left in my life in serving and expanding this moment, which is the only hope to save the uunity in the precise way, you wish me to utilise your offen say that silaproupatprate to the lar that does not get attracted to my ever similarly bag at your lotus feet that police prodect me from my always and make me eligible to receive the most piciskift of the consonent love of lord jatana please five my fences and give me your internal association otfolonsorent wisaduptasokanow last fin offering
भजnbaliprभुsoy human
hr gsnagrmagiwis very happy ins day। you are a very promin personality from golobndascrutual world and the रeलकेजीबसn, the krishna bagan gerson and that is celebra gave। you soman responsibilities also going to the rsvalrsvilesovit union blok, which was so like a karten blok, sor dificult and god made you have unlimited qualities and unlimited quantities test to mention like last day, he was a big project of iscon and the way, you handle like always the big people with so much ease that they can the entire government policy to help iscon india pan india for various temples, construction and grow marg, it is always the way, you please to the so called material big people, you imegetely make them transform from demons to devotes very quickly and on this very spices day gradi would be at your lotus feet in bless me that i can serve you it nali intotesiglyi⁇m ful marg vispujamhamhodserve की जाए।
हरे कृष्ण सो आप सब भक्तों का बहुत बहुत धन्यवाद और विशेष रूप से गोपाल कृष्ण महाराज श्री गुरुदेव जो की बहुत धैर्य से 11 ऑफरिंग को सुनते है और उसमे फिर रेस्पांस भी देते हैं महाराज उन भक्तों को लोरिफाई करते हैं। सो महाराज बेसिकली महाराज का परपस है हम सब यहाँ पर ऐसे इकट्ठा हूँ और महाराज का आशीर्वाद हम लें तो दैट वेज हमारी जो एकता है हमारे यहाँ पर 1 छत के नीचे आना है ये महाराज का मेन मोटिव रहता है। व्यास पूजा के विशेष लास्ट जब कोविद का समय बिता तो ही महाराज ने व्यास पूजा की थी। यह व्यास पूजा होनी चाहिए ताकि डिवोटीज सब 1 तरह से हम इकट्ठा हो और सबमें एकता बड़े समय स्नेह बड़े आपस में और हम मिल कर के जिम्मेदारी उठाएं। तो इसलिए महाराज व्यास पूजा का जो फंक्शन है इसको आर्गेनाइज करने के लिए प्रेरणा देते है, हमें उसे उत्साह देते हैं और साथ ही आप सब भक्तों को बहुत बहुत धन्यवाद बहुत ही प्रेम से भरे हुए सबके उद्गार थे, सबने भाव को व्यक्त किया लेकिन टाइम कम था तो हमें मेरो 1 अपराध वाली सेवा लेनी पड़ी करताल, बजाने की भरना टाइम नहीं कर पाया, वो करना भी नही चाहिए था। मेर को बहुत खतरनाक करता हूं लेकिन आप सबने लेकिन टाइम ली अपनी ऑफरिंग को अपने कम्प्लीट भी किया आप सब का बहुत बहुत धन्यवाद और कई ऐसे भक्त थे जिनका मैं नाम देना चाहता था लेकिन अभी बच चुके हैं। 9 सो इसका मतलब ऑफरिंग को हम क्या बोलना पड़ेंगे न न क्योंकि बच चुके हैं। 9 नोट 9 सो हम जितने भी भक्तों को हम यहाँ बुलाना चाहते थे लेकिन नहीं बुला पाए उनसे जोड़कर शमा चाहते हैं वो भी यहाँ पर अपने भाव को व्यक्त करते है, कविताओं को, अपनी शेरो शायरों को जो आये थे वो व्यक्त करते, हम इरशाद बोलते वह करते लेकिन हम वो नहीं कर पाए। तो उसके लिए क्षमा चाहते हैं हृदय से, लेकिन क्या करें टाइम लिमिट होता है तो इससे हम सबको एकॉम्मिनेट नहीं कर पाते बट वी आर वेरी वेरी थैंकफुल। तो आल द डिवोटीज जननेकी ऑफरिंग दी है निश्चित रूप से महाराज के बाद वो ऑफिस पहुँची है महाराज को पढेंगे भी यहाँ हो सकता है माइक में आप अपने आप को व्यक्त न कर पाए हों लेकिन निश्चित रूप से आपके ऊपर महाराज का आशीर्वाद है, महाराज की कृपा है और हम भगवान से प्रार्थना करते हैं महाराज के अच्छे स्वास्थ्य के लिए। हालांकि भगवान श्री कृष्ण बहुत अधिक प्रिय है, लेकिन इस जगत को महाराज की बहुत आवश्यकता है। तो महाराज अच्छा स्वस्थ रहे और महाराज अच्छे स्वास्थ की वजह से, महाराज से हरी कथा, हरि नाम सुनते रहे, उनका मार्ग दर्शन लेते रहे, ये हम प्रार्थना करते हैं के चरण में, श्री सीता राम लक्षण जी के चरणों में, श्री गौणताजीकेचरणोमे कृष्ण महामंत्री के द्वारा, हम प्रार्थना करने करेंगे भगवान के चरणों में, भगवान महाराज के अच्छे स्वास्थ के लिए और हम हमेशा महाराज के प्रति लायल रहे, हमेशा वफादार रहे उनके सामने भी और उनकी अनुपस्थिति में भी हमेशा लॉयल रहे अपना नाम जब अच्छे से करते रहे और महाराज हर साल जो व्यास पूजा में हमको इंस्ट्रक्शन देते हैं वो हम अच्छे से पालन कर सके। तो 1 हरे कृष्ण महामंत्र इस प्रार्थना को व्यक्त करते हुए हरे कृष्णा, हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा, हरे हरे हरे राम, हरे राम राम राम, हरे हरे हे होल, गोस्वामी महाराज के हे होलनेस, गोपाल स्वामी महाराज, श्री गुरुदेव पूजा, महा महा
महा महोदसबक त्रि वेष्णव भक्त दे,
हरी
हरी बोल सो भक्तों के लिए प्रसाद भी है प्रसाद पाकर जाइएगा और अभी जो सी ऑफ़ कीर्तन है जैसा हर साल करते है वो हमारे गोविन्द कृष्ण प्रभु तो उनसे मैं रिक्वेस्ट करूँगा की वो सी ऑफ़ कीर्तन करे ताकि भक्त कीर्तन करते करते यहाँ से जा। okay moewandstosay something marg cu kan chahte ho pleas बने
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we gave us all rose represent date are dtiapesenhistecing and real created for every thing go to prove not to me and second, we do i don⁇thave any divine power, this is just an ilution some time, something somethin we haven my accident, but you think that have the music powers has competi sips get to imotional sometimes, but gown real this all conditions soles walking on the path beriplication for the process, secret we don frother process process in by the geach
okay i in re krishna marg ce me। चमत्कार तो भगवान करने वाले हैं, प्रोउपाजीकरने वाले हैं, ऐसे शिवा ठाकुर महाप्रभु के तो महाप्रभु शिवा सूरज पर हाथ रखे हुए थे। उन्होंने पूछा शिवा ठाकुर से की आपने ऐसा क्यों किया? मैं सूरज को ढक रहा हूँ अपने हाथ से। तुम सूरज को भला कैसे सकते हो। तो शिवा ठाकुर ने भी अपनी महिमा को छुपा नहीं सकते। भले कहें? आप तो भक्त है, महाराज महाराज छुपा नही सकते है। महाराज के हैं, नहीं तो हमे क्या होना है। महाराज की विनम्रता है, लेकिन महाराज निश्चित रूप शकतिशाली बड़ा सौभाग्य है। ऐसे करुणामय गुरुदेव हमें मिले। तो ये हमारा इतना बड़ा सौभाग्य है और ये हमारा कितना बड़ा सौभाग्य है। वो आज हमने देखा देवकीनंदन पूजी के भावों में जो वो व्यक्त कर रहे थे कि महाराज मेरे शिक्षा गुरु हैं और हमेशा हमेशा अपने क्षेत्रा में रखे। ऐसे ही हमें हृदय से प्रार्थना करनी चाहिए कि हमेशा महाराज की ्षेत्रछायमेंरहे और मारा हर ऐसा कार्य करें जिससे महाराज के मुख में मुस्कान आये और कभी ऐसा रंचमात्र कार्य न करे जिससे उनको हल्का सा, दुख हो। तो ऐसा हम भगवान के चरणो मे प्रार्थना करते हैं की हम हमेशा सारे कार्य ऐसे करे जैसे गुरुदेव हमेशा हो, गर्वित महसूस करे। अरे कृष्णा गोपाल कृष्ण गोस्वामी वाराजी
हरे
कृष्ण
हरे कृष्णा कृषना कृष्णा हरे हरे हरे रामा
हरे रामा
रामा रामा हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा उत्ता पूर्वक कृष्णा हरे हरे
हरे रामा
हरे राबा
रामा रामा
हरे हरे
हरे कृष्णा
हरे कृष्णा कृषना कृष्णा हरे हरे
हरे रामा
हरे रामा रामा रामा
हरे हरे बोलो बोलो
ठीक यहाँ हो तो ठीक यहाँ
आए
लाओ ले लाओ ले
ठीक कहीं होते है
हरेक कृष्णा हरे कृष्णा
कृष्णा
कृषना हरे हरे हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे हरे कुश रा हरे
कुछ राम
हरे हरे राम हरे राम राम राम
हरे हो जाय प्रभु पा जाया, शिला प्रभु पाया जाय, प्रभु पा गया शिला पा
ला
जाया गोरु दे
जाया गोरो देया गोरोदेजाया गुरु दे जाया
गुरु दे ला गोरुदेगोरद जय गुरुदेव हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम हरे हरे कृ कृहरकृ्णकृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम। हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे कृष्ण हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे रा राम राम हरे हरे
हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम रा
हरे
कृष्णा हरे कृष्णा कृश् कृशनहरेहरेहर रामा हरे रामा रामा रामा हरे हरे
हर कृषना हा रे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे हरे हर कृष्ण हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम रा हरे हरे 2 नित्यानंद रा हरे कृष्ण हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा रे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे अरे कितना अरे कितना, कितना कितना हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्णा अरे किसना किसना किसना रे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ओह अरे किशना अरे कितना कितना कितना हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्णा हरे किशना कितना हरि हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कितना हरे किशन किशन हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे गोल हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे
हर
किशना हर किश्ना कृष्णा किसना हरे हा रे हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा किसना, किसना, हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।
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