81st Grand Celebration of Sri Vyasa Puja of HH Gopal Krishna Goswami Maharaj || ISKCON Delhi

The video records the 81st Grand Celebration of Sri Vyasa Puja honoring HH Gopal Krishna Goswami Maharaj at ISKCON Delhi. The program combines formal speeches, personal reminiscences, and devotional rituals. Senior devotees recount the Maharaj’s service since the 1970s, highlighting his role in establishing temples, distributing Krishna‑centric literature across Delhi/NCR, and extending outreach to Pakistan, the former Soviet Union, and other countries. The Maharaj’s scholarly work, especially his translation of the Bhagavad‑Gita, is praised alongside his leadership qualities—humility, dedication, and ability to inspire. The latter part of the ceremony consists of traditional chanting, mantra recitation, and puja offerings, with multiple participants invoking the guru, Krishna, and the divine feminine. The event underscores a call to continue the Maharaj’s legacy of devotion, service, and propagation of Krishna consciousness.
Chapters
hari hari vishnu सबसे पहले महाराज को मैं उन्न चuहtrमemiltalेin, mhाराजbolttrme में थोडा सा कनफ्यूज है चौर me लेकिन मुझे याद है कि 1974 में बंगाली मार्केट में हमारा सेंटर हुआ करता था।
राधा पर
तो मैं अकाउंट सेक्शन में पैसे लेने के लिए गया हुआ था। मेरी बहुत सारी सेवाएँ थी। वो भारतीय अकेला माय था। पूरी पूरे एनसीआर में। तो वहाँ पर महाराज जी मुझे दर्शन हुए तो उन्होंने मेरा नाम पूछा। मैंने बताया बड़े खुश हुए गंदे, आप ऐसे ही सेवा करते रहा करो। वैसे मैंने देखा कि जिसको भी मिलते थे वो भगवान की सेवा में लगाने का प्रयास करते थे। महाराज जी। उसके बाद 1975 में ही जब
पंडाल
प्रारंभ हुआ यहां पर रामलीला ग्राउंड में प्रवपालजी का, तब भी उनसे मुलाकात हुई थी। तो उन्होंने मुझे सेवा दी के जितने भी अखबार हैं अखबारों में जितने भी लेख आते हैं उन सब अखबारों को ले आओ। हमारा पंडाल पर राम चल रहा था 10 दिन का तो मेरी यह सेवा थी। सबसे पहले में यह सेवा दी गयी महाराज के द्वारा कि अखबार लाना करनाल। पेस में जा कर के मैं सारे अखबारों को इकट्ठा करके लाता था और महाराज को देता था। महाराज फरप्रउपाजजी को देते थे। ऐसे करके मेरी सेवा उन्होंने ये स्टार्ट की। जब भी कभी उनको जाना होता था पंजाब में चेंडीगार्डकुल क्षेतर तो मुझे हमेशा साथ लेकर जाते थे। उन दिनों कार्य पूरा तो होती नहीं
थी,
खाली बसें थी। ऐसी बात चलती थी। कश्मीरी गेट से उसमे जाया करते थे, रात को सफर करते थे, दिन में जाकर के मंगलाआरती में पहुंच जाते थे। जैसा कि आपको पता है कि महाराज का जन्म 1944 में दिल्ली में हुआ है। उनके पिता जी 1 बड़े अवसर थे नेवल में, नेवी में और उनकी जो पढ़ाई है माल रोड के ऊपर स्कूल है। 1 सेंटेज कल वहां पर। उसके बाद वो विदेश में चले गए। कनाडा में वहां पर मैनेजमेंट का डिग्री हासिल की और कोको कोला
में वो
नौकरी पहली नौकरी शुरुआत की। उसके बाद प्रहपाजजी से मिले। बाद में उनकी दीक्षा भी हुई। परवपा जी से ही तो जितनी तनखा मिलती थी वो प्रभुपाद जी को दे दिया करते थे, अपने पास नहीं रखते थे और अपने खर्चे के लिए प्रपात जी खुद उनको पैसे देते तुम्हारे खर्चे के लिए। तो इसी बात से हमें सीखना चाहिए। अपने पास कुछ नहीं रखा है, सब गुरु की सेवा में लगना चाहिए। दिल्ली में रहते हुए जब हमारा मंदिर नहीं बना था तो 1 दफा हम लोग प्रहार जी के साथ धोलाकुओंकेपास है। पार्क बहुत बड़ा नाम भूल गया मुझे उसका तो वहाँ पर सैर करने के लिए प्रुपपाजजी के साथ हम के तो प्रभुपाद जी ने वहां पर इच्छा जताई कि दिल्ली के चारों कोनों में 11 मंदिर तो वर्ष होना चाहिए। और 1 कृष्ण जयंती पार्क जो है ये राधा पार्थासार्थी के नाम से बनना चाहिए। कृष्णा जयंती पार्क। तो प्रपात जी की इच्छा को पूर्ण करते हुए महाराज जी ने
दिल्ली में
एनसीआर में लगभग 22 मंद्र बना दिए। प्रहुपाजी चाहते थे कि चारों कोणों में 11 मंत्र हो। लेकिन प्रहुपाजजीमहाराज जी ने उससे भी ज्यादा करके दिखा दिया। ये सारी प्रहुपाजीकीकृप थी। जो महाराज के शिष्य थे, उनको भी बहुत सेवा में लगना चाहते थे। महाराज जी कभी कभी कुछ बिगड़े हुए शिक्षा भी आ जाते हैं, तो उनको भी अडजस्टमेंट करते थे, कभी कभी गुस्सा भी होते थे, लेकिन बाद में प्यार भी करते थे। उनका कहने का मतलब यह था कि सब सेवा में लगे। और बाद में 1975 या 76 में ही उन्होंने बोला यह 1 लड़का है, वो पी एच डी कर रहा है। तो उससे मैं चाहता हूं कि भगवत गीता एलिटिस का ट्रांसलेशन किया जाए। तो फिर लड़के। लड़के को मिलने के लिए मुझे साथ में लेकर गए और लड़के को बुलाया। और उसने पहले जो ट्रांसलेशन हिन्दी की भगवत गीता की, वो उसने लड़के ने की थी जी जी। लेकिन वो जो ट्रांसलेशन उसने हिंदी में की थी, बड़ी टफ थी, उसके लिए डिक्शनरी देखनी पड़ती थी, अंग्रेजी के लिए डिक्शनरी देखनी पड़ती है। प्रउपाजीकीलैंगवेज बड़ी मतलब सरल है। लेकिन हिंदी पढने के लिए जीव के ट्रांसलेशन वो ट्रांसलेशन देखनी पड़ती थी। बड़े कठिन शब्द पर थे। खैर, उसके बाद फिर नए ने संस्मरण आ आय और किया। तो प्रोप। महाराज की इच्छा यह थी कि जितनी भी प्रपात किताबें लिखी है, सब का ट्रांसलेशन हिंदी में, बाकी, लैंग्वेज में, गुजराती में भी। महाराज ने कराया 1 किताब को पंजाबी में भी थी। उसका मुझे पता नहीं किसने ट्रांसलेशन का आपने की थी। अच्छा तो 1 वो भी तो बहुत बहुत पुरानी थी। और चाहते थे महाराज के जैसे प्रउपाजीभीचाहते थे कि ज्यादा से ज्यादा किताबें प्रिंट हो और उनका वितरण हो। तो ये सेवा अभी महाराज ने बड़ी अच्छी तरह से निभाई। लगभग कई सालों तक पूरी दुनिया में पुस्तक वितरण में दिल्ली िसकोनफर्स्टआता रहा है। तो ये सारा महाराज के प्रयास से ही होता था। ये श्रेय महाराज को ही जाता है कि ज्यादा से ज्यादा किताबें दिल्ली से बिकी गई है। उनकी इच्छा यह थी कि पाकिस्तान में भी प्रचार होकर राची में to me a one sram
जाएंगे।
उन्होंने प्रबोधन सरस्वती। महाराज को भी लगाया कि दोनो जाओ कुछ किसी वजह से बात में हम लोग नहीं े। लेकिन मैंने देखा कि अभी भी पाकिस्तान में जन मस्मी परशु मनाई गई है। बड़ी धूम धाम से। और जो वो प्रार्थना करते थे, वो सिंधी में ही बोल रहे थे। वो मेरे पास आया है। जब महाराज को कहीं भी जाना होता था, मुझे साथ में रखते थे। और जब 1 दफा की सेंस का मन मुझे याद आ गया, वो मुझे बार बार बताता हूँ, उससे हमें सीखना है।
क्या
1 दफा रात को लगभग 10 बजे मुझे टेलीफोन करते है। श्री धाम आ सकते हो क्या? हाँ जी, मैं तो हमेशा ही तैयार रहता हूँ। आया आ कर के। उनके कमरे में गया तो कमरे में 45 लेडीज वीआईपी बड़े घरों की बैठी हुई थी। वहाँ पर। मैंने प्रणाम किया। महाराज को महाराज के सामने सोफा वहाँ बैठ देंगे उनके सामने कभी सोफे पर नहीं बैठा हूँ। तो मैं नीचे ही ज करके बैठ गया। नहीं नहीं, पर बैठो मैं नहीं, मैं यहाँ ठीक हूँ। उसके बाद लगभग आधा घंटा घंटा उन्होंने बात की लीड के साथ। जब वो चली गई तो मैंने महाराज जी को बोला। महाराज आपने मुझे बुलाया था, क्या काम था? नहीं, न, नहीं मैंने, इसलिए बुलाया था, कोई काम नहीं था। मैंने बात करनी तो इससे हमें ये सीखना है कि हमें चाहे ब्रह्मचारी हो, सन्यासी हो, ईवन ग्रस्त भी हो, उनको स्त्रियों से बात करनी है तो कम से कम 23 आदमी चाहिए। ब्रह्मचारी अकेला ही बात करें, यह ठीक नहीं है, यह शास्त्रों के अनुसार ऐसी भी गलत है। और महाराज ने तो इसको करके बताया उदाहरण दिया। और महाराज जी दयालु बहुत थे, दयालु बहुत थे, बहुत सारे जो है, बहुत सारी गलतियां कर देते हैं। लेकिन महाराज जी एकदम उनको माफ करते थे। मुझे बोलते हैं कि श्रीधाम ये कनाट प्लेस में गोपाल टावर जो बन रहा था, उन दिनों बन रहा था, सेवंटी फाइव में बनना शुरू हुआ था। तो वो जो उसका मालिक था, वो महाराज का मित्र था, मेरा दोस्त है, उसको मिल के भी मिलने गए, महाराज के साथ मेरा भी इंट्रोड्यूस कर। म मार तो वी आई पी थे, उनके साथ मैं जाता था, मै भी हो जाता था।
ऐसे ही
रीगल सिनेमा के ऊपर भी माता जी दिन सुना रही थी, यहाँ बैठी हुई है, वो बैठी हुई है। रीगल सिनेमा मे भी प्रचार के लिए 1 दु दफा, उनके साथ मुझे जाना हुआ, तब ये माता जी छोटी थी, शायद उनको पता नहीं था। उन्होंने बताया तो मैं उसी समय महाराज से मिलती हूँ। बाकी यह है कि महाराज चाहते थे कि मेरे जितने भी शिष्य हैं, आपस में मिलते रहे, आपस में लड़ाई झगड़ा न करें, अगर छोटा सा थोड़ा मोटा कोई मतभेद है, उसको प्यार से समझाए, ये निया के उसको बड़ा इशू बना ले। अगर हम प्यार से रहेंगे। मतभेद तो छोटे मोटे होते है, जहाँ पर बर्तन होते है, वो आपस में खटकते ही हैं, लेकिन खटकने के बाद, थोड़ी देर के बाद आवाज बंद हो जाती है। उसी प्रकार महाराज जी चाहते थे की मेरे शिष्य जो है, आपस में मिल जुल के रहे, प्यार से रहे और खूब प्रचार करे और पूरी किताबों का वितरण जोर जोर से करे, यह उनकी इच्छा थी। तो मेरी भी यही प्रार्थना है। आपके महाराज की बातों पर ध्यान दीजिये, अगर हम वाके ही अपने गुरु को बहुत प्यार करते हैं, सच्चा प्यार करते
है,
तो हमें जो बातें महाराज ने समझाई है, उनके ऊपर सौ फीसदी अमल करना है।
हरे कृष्ण
परमपुविनीगोपाल कृष्ण गो, स्वामी, महाराज
के
धन्यवाद, सबको अरे कृष्णा, बहुत बहुत धन्यवाद। अभी आपने देखा, आँखों देखा, हाल जैसा जैसा प्रचार में लगे थे, बड़े संशिप्त में बोल हे है, बोलने का यहाँ टाइम इतना ज्यादा नहीं है, लेकिन महाराज के साथ काफी कंधे में कंधा मिला कर। दिल्ली के लिए प्रचार कार्य में, राधा पर सारथी की सेवा में श्री राम प्रभु लगे रहते थे। अब हम लोगो की जो इस समय वर्तमान जी वी सी है। गुरु महाराज के पूरे क्षेत्र के तो गुरु प्रसाद हिजहोलनेसगुरुप्रसाद महाराज वो आ तो नहीं पाये हैं, लेकिन उनकी मेसेज, उनका विडियो रिकॉर्डेड हैं। उसको हम सुनाने जा रहे हैं हिजहलनेज गुरु प्रसाद स्वामी महाराज की
are are
so?
अभी, जब तक वो विडियो रिकॉर्डिंग सेट हो रही है तो ऋषि कुमार प्रभु से निवेदन करूँगा कि वो हिजहोलिनेस जयपताका स्वामी महाराज जो गुरु महाराज के अभिन्न मित्र हैं। ऐसा हो तो रोने लगे। मैं उनसे मिलने गया। तिरोभाव के बाद वहाँ अस्पताल में आये थे। बोले गोपाल कृष्ण महाराज हमको छोड़ के चले गये। बहुत दुखी भाव से आँखों में आँसू लेकर के तो और हर बार जब वो थे तब भी और अभी भी। उनका प्रेम तो वही है, बढ़ता ही जा रहा है। उनका मैसेज पाठ करेंगे। रिषि कुमार हरि बोल
krishna sobti guru maharaj midea devotes please accept my best wishes all gloristucilaprbo all gloristyhissolnas gopal krishna same maharaj riten from home base sri mayapur chandro mandir today as a remember his solin as gopal krishna goswami maharaj i feel both sorrow and gratitude sorrow, because we have lost a very important leader and i lost a very dear, friend and got brother gratitude because if is association and the wonderful example of service he set in your marge from night in sixty eight in his con, we ve a bagus together it was always very stadium determin to serve shilaproasiapropa trustedimwith big responsibilities and maharaj carethemoutwith great car wherever he was sent to up the work holharterdly one of his most visible contributions wasnt dely when shila prop bout want or a strong centre in the capital of india maharaj took that instruction to heart he worked tialesly to establish is condalytoday what we see beautiful temples like east of kilarsdwarakarohina pnjabibag to name a few are standing as test to money to is detrmination he turned dali into one of the strongest iscon bases in india with thousands of devotees lascal festivals and powerful preaching programs maharaj was a bbde trusty and also pilar for book distribution in india he personally and graced the devoties setting yearly goals and inspiring them to surpass those goles under his leadership india became one of the top countries for distributing shila propos books even when is health was week he would still travel preach and inspire devoties never to stop this most important service and other great contribution was is car for shila propos movement in russia and the formes soviet union he reset much in those olidays giving support and guidens to devotees there when the situation was very difficult later he continued to noch or the yatra engaging the growth of temples and preaching in that part of the world he was also very active in north america serving as a gbc member and caring for devotes their his presense give confidence to many congregation and is come study leadership give them string to carry on marais personal quality s made special he was very disciplined always rising early sanding his rounds attentively and keeping a strict personal standard at the same time, he was effection it and aprocible many de wat is feltengreage by just a few words f from him, he combind a strong management with real gar for devotes that is why so many temples florist under his guidens। now that maharaj has departed there s a great gap, he can ed a very heavy load of service for shila prabupathenhiscont to on a him। we must not let that lord fall and especially the senior disciples of gopal कृष्ण महाराज should also step forward to take up the service of dixcaguru maharage has left behan the log family of devoties and they will need shelter and guidence for me personally gopal krishna maharaj will always be remember as someone who was stedi dependable and detoment silapropadoffen spokaboutwanting strong managers and strong preachers maharaj was both is life is a clear example of loyalty to guru and krishna s mission, he was an mvty trusty personally appointed wesilaprbupat and it was always busy with various services, but still he gave time to mayapur it was a member of ammibimayapur execute bord and every year he would come to mayapur for nusimachaturdesi till, he instolledansima deva in dilli the best way to one him is to continue his projects to expand thistebution to bulls temples to breach to the people and to help the diutisusnuccred in this way, we can keep his legacy alive and please filipropotioffo visinssthisonas gopal krishna goswami maharaj i pray car for service mo विमान यूनाइटेड सर्विंग सर्विस जयपताका जयपताका स्वामी हमारा आज की
की आप देख सकते हैं जयपताका महाराज का और हमारे गुरु महाराज का चोली दामन का सम्बन्ध था। सिटी में दोनों 1 साथ नए भक्त बने उसके बाद दोनो जी बी सी 1 साथ बने उसके बाद दोनों पताका महाराज गुरु थोड़ा पहले बन गए थे लेकिन दोनों ने लैंडमार्क स्थापित किया प्रचार में 1 तरफ जो वेस्ट इंडिया और साउथ इंडिया जयपताका महाराज के पास थी उसको भी उन्होंने चमका दिया और हमारे गुरु महाराज के पास वेस्ट इंडिया और नार्थ इंडिया, नार्थ इंडिया ने तो चमत्कार स्थापित कर दिया आज सभी नॉर्थ इंडियन के भक्तों का हार्दिक स्वागत है अब हम लोगों के बीच में
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नहीं समझते हैं में उन्होंने 1 बहुत अच्छी बात बताई के जनरली लोगों की शादी होती है तो रंग रलियां मनाने के लिए इधर उधर जाते हैं। और महाराज जब गृहस्त जीवन ने स्टार्ट किए तो प्रभु ने कहा गोपाल
जाय
अरे कृष्णा शिर पर की जाए सीधे गोपाल कृष्ण महाराज की जाए। so i first ball im, sorry i could not be their personally today to one such, a great and wonderful bysnaveradyour friend and someone, who i have always in mired, from the very time, i first saw him the first time, i saw i gopal krishna marrage was an nineteen, seventy six in myarpor in shilapabasrmhe, was bringing, some books that had just
been published and shilapublipgosmre को हमारा sास्ांजनवादप्रणाम और साथ ही साथ सभी उपस्थित भक्त उपस्थित तो sarvatr honge का कृष्ण गो महाराज के अयुर्भावतिथि के उपलक्ष्य में सारे संसार में उनकी गुणगाता गायी जा रही है। उनका स्मरण हो रहा है किन्तु वह मेरे लिए मैं आप जेली में उपस्थित भक्तों को संबोधित कर रहा हूँ और आप सभी उपस्थित अभी का हूँगा, भक्तों का स्वागत और अभिनंदन इस बात का अभिनंदन मतलब आनंद में व्यक्त करना चाहता हूँ जैसे नंद के घर आनंद भयो। कृष्ण जब नंद भवन में प्रगट हुए
तो वहाँ
उनका जन्म से मनाया जा रहा था। आज इस्कौन भवन में केवल देली में ही नहीं वैसे सर्वत्र प्रभुपाद 1 ऐसा घर बनाये बिल सच हाउस जिसमें सारा संसार रह सकता है। जगत में इस्कॉन घर में आज ये उत्सव मनाया जा रहा है गोपाल कृष्ण गोस्वामी महाराज जन्म उत्सव की हरी और आज एकादशी भी है कुछ समय साम में देख रहा था वैसे मेरा भी जन्म एकादसी कोई हुआ था वैसे जयपताका महाराज आलसो व वर्ण का 10 तो
वह
ऐसे गोपाल कृष्ण गोसाई महाराज अब क्या कहें कैसे कैसे गोपाल कृष्ण गो
सा
जिनके साथ या शिला भोपाल ने हमें गोपाल कृष्ण गोसाई महाराज से गुरु भ्राता दिए आज उनके संग सानिध्य में हम में भी 50 से अधिक वर्ष सेवा करने का अवसर प्राप्त हुआ करियर हम अधिकतर समय मैं दिल्ली में ही साथ में बिताये मुंबई में भी, मायापुर में भी और स्थानों पर भी यह अलग अलग जी, बी, सी, इत्यादि या ब्यूरो मीटिंग्स में भी हम साथ में रहे ही हमने साथ में अधिक समय बिताया और प्रेसिडेंट िस्कॉनदलीहम उस समय राधा फारसार्थीमंदिर ल पद नगर में था, वहाँ से भी हम आगे बढ़े और स्थान क्या कौन उस समय 1 हुआ करता
था
और उस कोठी का वैसे आधा हिस्सा हमारे पास था बगल वाला आधा वैसे उस कोठी के मालिक भगवान नहीं थे और कोई मालिक था 1 पंजाबी थे, सरदार थे वे बाबा होलीडे होम चलाते थे। तो लक्षपतनगरससे हम आगे बढ़े वन वन
नाइन
अबतक की जो सारी यह इस काल के जो स्थान थे वो किराये के स्थान थे। अब पहली बार क्योंकि गोपाल कृष्ण महाराज बी बी टी ट्रस्टी होने के कारण उन्होंने मैनेज किया, ग्रैंट 8 लाख रुपए की धनराशि व ग् रैंड के रूप में प्राप्त किए, खुद की कोठी निवास्थान प्राप्त किया ग्रेटर कैलाश में, और वहाँ से भी हम आगे बढ़े और फिर फाइनली जहाँ सरसी राधा पार्थसारथी का मंदिर अब विद्यमान हैं, उस भूमि की खोज में। हमने बहुत सारे as a प्रेसिडेंट मैंने ऑन डेली बेसिस हम खोज रहे थे, लैड वही राधा पारसारथी मंदिर का उद्घाटन हुआ। उसी समय वैसे और 1 मंदिर बना। तो यहाँ तक तो हम गोपा किष्णा महाराज के साथ ही थे, हम आज जी बी सी मैं प्रेसिडेंट, फिर गोपाल महाराज मुझे रिजनल सेक्रेटरी बनाये हमारा क्षेत्र और भी बढ़ गया, महाराष्ट्र भी आ गया और गोपाल कृष्ण महाराज जी हमको रहे गए दिल्ली में, और हमें पहुँचाया वे गौतम बुद्ध नगर नोयडा में, गोपाल कृष्ण महाराज वाज हार्डेस्ट वैसे हम गोपाल कृष्ण गोसाई महाराज के गुरु भ्राता या अन्य लीडर्स वैसे 1 शहर में 1 ही मंदिर की स्थापना कर रहे थे किन्तु गोपाल कृष्ण गोसाई महाराज ने 1 नया स्टैंडर सेट किया की पंद्रह 20 मंदिरों का उद्घाटन ओपनिंग स्थापना की। गोरी गोपाल कृष्ण गोस्वामी महाराज और वैसे यही बात वैसे माननी पड़ी है प्रभुपद चाहते थे कि उनके ग्रंथों का अधिक से अधिक वितरण हो और वितरण भी अधिक से अधिक गोपाल कृष्ण महाराज की किए अधिक अधिक मंदिरों का निर्माण हो, वो कार्य भी आई थिंक पाल कृष्ण महाराज वाज नंबर वन जहाँ तक
नो,
जब वे जन्मे थे तो कोई कुंडली लिखी थी, पढ़ी थी या नहीं कितने मंदिर बनायेंगे किन्तु उन्होंने फिर से देरी में, पंद्रह 20 और भारत वर्ष में और कई सारे और संसार भर में उनका बहुत बड़ा जोन था। इन कैनाडा इन अफ्रिका in ruशिaहer देर वो 1 प्रकार के समरा एंपरर और कितने सारे मंदिरों का। उन्होंने आ मंदिरों की स्थापना की, कितने सारे उत्सव का आयोजन किया इत्यादि इत्यादि ऑल दिस स कता है? तो इस प्रकार के उन्होंने स्टैंड सेट किए हैं रहा था कि अधिकतर दिल्ली के बखत टेंपल बॉडीज कांग्रेगेशन एकत्रित हुआ होगा वहाँ राधा पार साथी मंदिर के आंगन में, प्रांगन में, यह वहाँ मंडप में। तो क्या राज और आप सब मिल के इतने सारे तो मंदिर बन चुके हैं। तो क्या यह रुकेंगे क्या? अफकोर्स नोट तो प्रभुपाद भी और गोपाल कृष्ण महाराज भी कहा करते हैं डबल डबल। तो आप सब धीरे धीरे दिल्ली एन सी आर के मंदिरों की संख्या डबल कर सकते हो जो जनरेशन को ट्रिपल कर सकते हैं, खोर्टरिपल कर सकते हैं। इसको इस्कॉन इस्कॉन के भक्त, आप सब इस्कॉन के लीडर एंड कांग्रिगेशन इत्यादि मिल के इस देली की राजधानी को धर्मधानी बना सकते हो
और
की घर घर में गौरंग को पहुँचा सकते हो
तो
ऐसा करोगे तो स्पेशली गोपाल महाराज प्रसन्न होंगे इस कार्य में लगे रहो। उनकी प्रसन्नता के लिए। मैं ये भी सोच रहा था की प्रभुपाद का व्यास पूजा का के दिन की प्रभुपाद कितने प्रिय होंगे कृष्ण को, कृष्ण ने उनको जन्म दिया, स्वयं जन्म लिए, अष्टमी को और नवमी को, प्रभुपाद को जन्म दिए। तो कितना घनिष्ट सम्बन्ध होगा प्रभु, पाद और कृष्ण के माध्यम में। और जब हम गोपाल कृष्ण महाराज की बात या जन्मोत्सव की बात करते हैं तो कृष्ण ने और प्रभुपाद ने उनको जन्म दिया। कृष्णा स्मी के बाद आ गई नमीनदोसप्रभुपाल जन्मे, वन डे इन बिटवीन और फिर गोपाल कृष्ण महाराज को। आज के दिन जो जन्म दिए तो इससे वे कृष्ण को और शिलर प्रभुपाद को कितने प्रिय होंगे इसका हम कुछ अंदाजा लगा सकते या नहीं भी लगा सकते। ऐसे गुरु और गौरांग के प्रिय गोपाल कृष्ण गोस्वामी महाराज की जाए गौर पेमाने हरी हरी ब
आपको पहले निवेदन किए थे जय प्रदा का महाराज और हमारे गुरु महाराज का सबसे लंबा समय सफल रहा 1 साथ मित्रता का कार्य करने का और गुरु भाई के रूप में 1 दुसरे के प्रेम का। उसके बाद नंबर 2 में लोग महाराज जाते हैं जैसा उन्होंने कहा पिछले 50 साल से महाराज के साथ लग कर के उन्होंने सेवा का कार्य किया और बहुत अच्छी बातें हम लोगो को बताई। अब हम लोगो के बीच में मायापुर से डिवाइन पर्सनालिटी बीच में आये है लिनस भक्ति प्रचार प्रभाजक महाराज हरीहरीवोल जाह। maharaj
mike
हम लोग दीनबंधु प्रभु का हार्दिक अभिनन्दन और स्वागत करते हैं। hariom
महान मोंग विष्ण पदायक कृष्ण पेस्ट भूतले श्रीमते गोपाल कृष्ण गोस्वामी नामि नमोंगविष्णपदाय कृष्ण पृष्ट भूतल दान स्वामी नीति नामिना नमस्ते सर सत्य देव गोरबानी प्रचार ने गोपाल कृ gopal puja i speak in eंग्lिशispeak also this year in ग्लिश तो
हर साल में अंग्रेजी में बोलता हूँ तो इस साल में ग्रेस में बोलूंगा
दि is time i was thinking, what to speak?
इस बार मैं सोच रहा था कि किस के बारे में बोलो because you
no more than me, क्योंकि आप सब
मेरे से ज्यादा जानते हो
wilglodifihis name,
तो मैंने सोचा की मैं उनका नाम का गुणगान करूँगा
देव इस गोपाल कृष्ण
गोस्वामी, उनका नाम है गोपाल कृष्ण गोस्वामी
इन इंग्लिश eiबtdfomisजीके जी अंग्रेजी में इसका
जो सीमित रूप है या संक्षित रूप
है जी के जी साइल इसको मैं विस्तार करूंगा जी का मतलब, जी जेननडिसापलऑफशिलर
प्रभुपाद जी का मतलब, शिला प्रभुपाद का असली खरा शिष्य जी मतलब जेनुइन
के
मेंस काइंड हार्टेड वशनवाकेअर्थात अत्यंत कृपालु, दया
हृदय वाले वैष्णव का क for kind
hated
मेंस ग्रेट leader sco और तीसरा
जी जो है ग्रेट लीडर ऑफ स्कॉट इस्कॉन के महान नेता
टाइम is लिमिटेड आलसो टलसलेशनडेकिंग टाइम समय सीमित है, इसलिए
और साथ साथ अनुवाद भी समय लहर में you can just speaking english, you can save time, just speaking english, groprsadmarsspolking english
के आप लोग ट्रांसलेशन आपको जरुरत
है क्या
सो is genre disciple of silaprhupadbcause, a success of or live depends on how we are acting as a disciple? we are very much interested to become guru, because mohaporvu instructed us to become guru, but who can become guru, who becomes the disel so gopal gist maharaj life is dedicated to fulfil the desire of is devin gressvoktiedandusa mis
some
ask question, who is so many temples in daily in car? it s not gopal gist moharasbilted silaprabupat wanted him to bill tos temples in daily thats why he build why he so much focused in book distribution। because that was instruction from si boat so, whatever he did is not his own personal, desire that is the secret of spiritual life is डिvाइnग्रेs ही प्लिशकिकस all over the world, because his guru to do that that is a r parmpra everybody is given service and accordingly, we should render our service, so gopal kisna maharaj is he embodiment oficenintesaple, because his life is dedicated to fulfil the instruction of his spiritual master, then when someone becomes great in this world, they dont even kn he was a great personality, he is a great personality, because westionawayis allways present, but he was very kind hearted, very very kind hearted,
he
has time for everyone i saw in my guru maharaj also my gorumara inisitinggromahrg is his alias jarpadasamimaharage and the president are waiting for the meeting, but his giving time to the devotes ours and ours who i। because this is the symtom of avisinovahes very kindharted, he does not discribunateohes are president his this his that so his compation, his kinness is not dependent on social states, he has genin compassion for all the devotes and also he has compassion for all the living entities of this world, so gopal krishna maharaj is also the embodiment of that wonderful quality, he was he is a kind hearted bashnava,
then
he was the great iscon leader, he is the great iscon leader leader means taking responsibility gopagristomaharge is extremely responsible extremely responsible h there as problem in mayapur hedrabad any part of the world never, there are some crices challenges difficult is he was there from the begining till the end antil an problems cetl down he s always there not fort the institution, but for the debate is also so there for leader means responsible so, he was great responsible leader, uthority is very sweet, but resp posibility is not that sweet so leader is that person, who once the responsibility, who takes the responsibility so gopal kisna maharaj is the example of taking responsibility, thank you very much hari krishna gopal। कृष्ण को सभी महाराज की शिला प्रभुपाद संत गोरा भक्त बिन्दकी मानने ही थैंक
यू महाराज अभी हम लोगो के बीच में वृंदावन प्रभु होम, वृंदावन कृष्ण का घर वृंदावन ब्रजवासी महात्मा दीनबंधु प्रभु पधारे हैं। हमें तो लगता है कि जो लोग दिन बंद प्रभु को नहीं पहचानते वो इस वर्ड के नहीं है। कहीं बाहर से पैदा हुए इनको सबसे पहली बार, आज से 40, 42 साल पहले इन्होंने ब्रज पूरा हमको घुमाया था और जहाँ ही जाते थे हम दिन भैया दीना भैया मतलब कोई ब्रजवासी ऐसा नहीं है जो इनको नहीं पहचानता। दिन बंद प्रभु की
सब
ज्ञान श्री गुरु नम, श्री चेतन मन बिस्तमस्तापिदमजेर बुतलेसयमरुपकदमयम सवा, श्रीकृष्ण चेतन प्रभु ने तियान शिवश्री गोरबकटरद, हरे कृष्णा हरे किशन किशन किशन। हरे हरे हरे राम हरे राम राम
राम हरे हरे
व् so we gathered here on this very special day
just
couple days after s re the propos bas puja were gather here to celebrate the eighty first biaspugercelebration of his olinic gopal krishna gosamimaaras i should probably speak in hindi but we were flying all night wit out any sleep so my brain is not working wollen be e o express everything in hindi perfectly
so
you ll have to excuse me
so
anyway we re gather here to one one of the great generals and file prop as sank utan army has been please is pro pa the most as be heard everyone who spoke us mentioning this thing and we seeing under his leadership almost every year the is indian yatra specially deli comes in number one in booktosutionunder the g great leadership of his holling is gopal krishna gosamimanddsdistributing by gopal krishna maragh was proper made him as we heard one of the trust is of bbt so he has produce so many l lititesansommany different languages in this holy land of bart so we can imagine how iminslyplease is the vingresacbuctivadun to fomypropatmust be with him is he has captured the essence the best way making speritaladvansement is to please tispersolmaster so we know that this book decision was very dear to see the proper and we have seen how gopal krishna maras was completely devoted almost every lecture will always be in cursing us to derivat more books to distribute more books to distribute more books and so he is completely dedicated to for filling this desire there must how many twenty two temples twenty temples like an remember no
no
other place in the world like there ive seen maybe a couple places where is three or four temples but more than twenty temples and that just some house some we pained funny colors in but a sin rate krishna temple but use mondes all over the dely area this is all the incretofi⁇mtotally in a if holi is gopal krishna gosamimarusthere⁇s no other place like this no we were last year we visited the latest temple of rohini amusifldulofhe temple amazing temple so it is not a ordinary person who
can
inspire so many people to take up cishnacuntstake at soceralyse to build these temples to maintain these temples and distribute krishna contest to all the people of deli so we can just imagine the status of gobakishnamaras what a great to body is we can even imaged now all over the world i ve never seen any place for the twenty temp huge temples and is maharaj was just been sitting despite being such a great personality he was very very kind hearted i remember when the drags me out of cancer temps pundri can i had a bus we travel all up mp and rgestanpreaching and members with they drag me auto that bus maybe the temple president of brindavan and govegishamarag was always so kim and help me in so many ways in this service, and always hes been so kind to me even to his somondervul services that his doing is still was very very kind i remember i state here few months ago my health was in very good so, i was here in delle for one month for different types of test and treatments, but almost every day is holiness would call to find ut how i was doing is so busy doing so much and for and service i⁇mcomliteuslis first only thing i do is talk। but he is busy schedule heat every day called to make sure that i was all right, even vit me to come to take prasad with him। he was such a kind body and he was so fix intevotional service, i can remember would pundricaniwele traveling around making a life members in up mp rgestan so different times। we would make some organized, some programs and maharaj would come to a grass with is presidents and those programs and even if the program when late still for three the morning, he was there mungalarty every single time, even though we were totly wiped out we sometimes a programs we go so fix in his vous of devotional service, always been tally in a of is holinusandivery। very happy that like i come here today and speak a few words and his g लोरिफिक होली। को कृष्णा गोस्वामी महाराज की ज
बहुत बहुत धन्यवाद, बिल्कुल सही कह रहे हैं, 1 बार इनके प्रीचिंग प्रोग्राम में, इंदौर में हम भी पहुँच गए थे और देखा उन्होंने इन्वाइट किया था महाराज को और वो प्रोग्राम बहुत देर तक चला हम लोग तो नहीं देख पाया। वैसे तो हर आदमी यह बात जानता है की गुरु हमारा चाहे ढाई बजे मॉर्निंग की फ्लाइट से भी आये हो, फिर भी नहा के तुरंत मंगल आरती पहुँच जाते थे, तो उनकी साधना में तो कोई बराबरी नहीं है। अब हम रिक्वेस्ट करेंगे उजान भक्ति प्रेम महाराज का भक्ति प्रेम महाराज भक्ति साधु महाराज के शिष्य हैं और काफी अच्छा प्रचार मध्य प्रदेश में कर रहे हैं। हम लोगों का सौभाग्य है कि गुरु महाराज का गुणगान करने के लिए स्पेशली वहाँ से पधारे हैं। हरिबोल महाराज
maggi नमों विष्णुपद नमों विष्णुपद कृष्ण नमस्ते guru maharaj please accept my most amble of is senses the dust of your deven gliss popat and to erholinis all glos to a divine vestfir festival maharaj anavaring dedication cilapohopatsmision special in the field of book distribution was inspiring to behold you are not only a leader in strategy, but also in personal example, the you manten your morning chadana with sus dicipline even emesterelentles global shedul was इनस्प्रिचल प्राइरिटी एंड सरेंडर
you re
manager acumen was a give to his con, you will temples fire there are non give shilta to communities that netted guidance and ofile the integutyofiobots stands with farmnisandagress who had that rer contribution sorry you had er combination of stickness and fiction that mad devotes on to rise to expectations बिकॉज ऑफ यू टायरलेस फोर्ट स कॉनस्टेंट टुडे ऑन फाउंडेशन stennbyyour deket of lidership and vision, histry surely remember you as one of the piles, who ship is con into global force for
bukti
now that you have been debate from or visual association, there is a great, but to legasy remains in every book distributed vrydibutitananda dearst and every temple that icos with चैंटिंग to champion you have shown us how to live with gravity, sat with humility and lead with parpas may alescariyour example in my heart and of art service tusilapropat with the same on verin dedicat, there to imbodidantilor last bret after the deport of your dear godvaterisolnes bucticarushami guru mahara, he took the responsibility of is udan project, and is dizeplsandado lidership, they are was no problem, please continue to show your marsian to us who is our only hope you। मोस्ट फॉलसरवनभुकतiप्रेम
थैंक यू महाराज अभी हम प्रार्थना करेंगे हिंदी के वनलीस्पेकस्पीकर स्वामी, हमारे भक्ति, वैश्व महाराज, आश्व भक्ति, आश्व वैश्व महाराज जो ब्रज में रहते हैं, लेकिन अब तो पूरा गुरु के रूप में बहुत से भक्तों को शरण प्रदान कर रहे हैं और राजस्थान, मध्यप्रदेश, पंजाब हर जगह यात्रा करते रहते हैं, प्रचार करते रहते है।
hmरजhरेकusanmong visnpdykinpsa
kina
साहित्य का प्रचार मुकवान साधो भगत पानी,
फिर दिल
ये भव्य उत्सव गुरु महाराज के बिना। अब। लेकिन अब मैं सोच रहा था क्या? जितने बड़े बड़े भक्त हैं, सभी ने महाराज का गुणगान करते हैं, करते आये हैं। जैसे कहे कि जस घोषोत्रिहुबन गुरु महाराज के गुणगान पूरे विश्व में भक्तगण कर रहे हैं। और आज विशेषकर कर करते रहेंगे। तो मैं यहां उपस्थित सभी गुरु माता, गुरु बहन को ही अनुरोध करता हूँ। प्रार्थना करता हूँ कि गुरु महाराज ने शिल प्रभुपाद के प्रति, कृष्ण के प्रति जो, उनकी निष्ठा जो, उनके सेवा जो समर्पण और अपने अपने का सब कुछ शक्ति समर्थ लगा कर के जो किए तो वो तो जुगव्यापजुगपरजंत हम देखते रहेंगे। आप समर्पित रहो, इस कनक चो, धिकारी समर्पित रहो, आपस में मिल कर रहो, यही उनका उपदेश था। तो अगर इस प्रकार इस उपदेश को हम सार्थक कर पाए, हम कम से कम अपने गुरु भाता, गुरु बहन, मिल कर के सुख कर पाए। गुरु महाराज की प्रसन्नता के लिए, ताकि हम को देख कर के गुरु महाराज तभी रहे। नहीं वो प्रहुपाजी के पास चले गए। जब तक हम इस धराधाम में रहेंगे, हमारे व्यवहार और आचरण को देख कर के दूसरे भक्त गुरु महाराज को याद करेंगे। ये ये उनके शिष्य है, फले न परिचय थे तो हमारा व्यवहार, हमारे निष्ठा, हमारे सेवा, हमारे और जो भी नंबर था, दि गुण इस स्तर पर होना चाहिए। ताकि दूसरे भक्त देख कर के गुरु महाराज को गुणगान करे। यह हमारे गुरु महाराज के प्रति जो श्रद्धांजलि है, यह 1 महत्वपूर्ण श्रद्धांजलि होगा। उनके चरण में अगर यही प्रार्थना करके यही कृपा करेंगे आज की सी स्थिति में कितनी शक्ति दीजिये ताकि आप की इच्छा आप के आदेश को पूरा करने पाऊं और इस संस्था और प्रहुपाजी के प्रति जीवन के शेष निश्वास प्रजंदरपुरनसमर्पि रह पाए। यही इसी के द्वारा हम गुरु महाराज को प्रसन्न कर सकते हैं। और वह भी वो चाहते थे उन्होंने जीवन भर वही किया और हम लोगो को प्रहुपाजीके साथ कृष्ण के साथ जोड़ कर के यही शिक्षा देते हैं वही आशा करते हैं आज वो हमारे पास नहीं रहे फिजिकली। लेकिन ऐसा नहीं क्यों नहीं है वो है बाइक देख रहे हैं और उनकी वाणी के उपदेश के रूप में हमेशा हमारे साथ हैं और रहेंगे भी तो उनकी वाणी को इस प्रकार से था सत्या स साकार कर पाए जो हम यहाँ उपस्थित हैं। आप सभी के चरण में मैं ही साग्रह प्रार्थना करता हूँ। आप सभी ने प्रयास कीजिए मुझे भी आशीर्वाद कीजिये ताकि शेष निश्वास पर अगर यही कर पाए तो ही गुरु महाराज के जन्म उनके लिए 1 विशेष स जल मानता हूँ और क्या ही कर सकते हैं।
हरी कृष्ण रीकृष्ण महाराज बहुत बहुत धन्यवाद अभी हम लोगो के बीच में व्यास पूजा बुक बम्बई से छपे आई है सूरदास प्रभु के प्रयास से कांता प्रभु लेके आये हैं उसका अनवारण होगा और उसके बाद फिर आगे
see
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करतल धोनी करतल धोनी हरी हरीवाल जाहु जाहु व्यास बूजा बुक जाहो। ये बुक उपलब्ध है सब लोग उसकी काफी प्राप्त करें। अब हम लोगो के बीच में जनार्दन महाराज हिजली भक्ति आश्रय जनार्दन स्वामी भक्ति भक्ति अनुग्रह जनार्दन स्वामी जो ओरिजिनली दिल्ली के राधा पार साथी के डिवोटी है और महाराज के लॉन्ग टाइम सर्विंग सेक्रेटरी है। अब ब्रज में निवास करते हैं और अभी अभी इनकी नियुक्ति गुरु के रूप में प्रतिष्ठित हुए हैं। जय हो वक्त महाराज जना कृष्णा
गुरु
महाराज की जय so first of all before i before i read my offering, i would like to read the offering of bredgabilaspribu brudgeabilaspribu is one of the main leaders in china mayapur and also he is working in cooperation coordinating,
where
ambris probe, there is holiness gopal krishna goswami maharaj please accept my humble absences or gloristochilapraw pad and this most a species ocation of your eighty first bearsapujaselebration we are profound the grateful to you maharage, we met you very very dearly as you know ambarish probe is currently hospitalized and under going help challenges this is a time when we feel your absense cutely maharage। because he were always appeler of support for him i remember how you would constantly as about his well be when ever we meet? how is ambarish pab, where is he now? how is he doing maharage i mes those moments of your father the concern and want now with umbarispabu having dedicated in self so fully to completing the temple of the very planetarium by twenty seven which will mark the fifty university of shia propers this appearance we feel your guiding presence is needed more than ever yet we n know that your blessings are always with us and we grow stent from the legacy of your love and service maharaj shelare personally instructed you back in nine sixty nine to stablish a grand temple in shidamaiopor from that day onward you not only stables contlistemples across india but also became a piler in making the t of deep a reality now as we post forward to completed by twenty twenty seven we humble pray for your continued mercy and inspiration were also immensely greatful to all the devotees wald wide who are praying for mbrisprobusrecovery specially the delyconligation and all the dedicated thesipols maharage after your departure i open felt like an orphan but your deciepolsidben my shelter and stent
let
us all take firm sunculpaand this var suppugoday to complete the t o vip in your onerfolfeeling your cherrisdesi the shila papas project the place first thank you maharaj for the congress opportunities you have given us to serve chilopraupad i remain aternallyindeted to you your seven brujabelasdus
ias
so now there is a one minute video of the update of the t o v plus watch it
coresogreseverybody wanted to no winver opening the temple currently
we are completed the nusindodering and we
are starting the works on the main
wing primary we are going to do the colums the alter the feeling which is already going on and the propadasasa amazing wiasasnofiprpis an all to so the compton date for the main bing s twenty six two thousand and twenty six by disme of two thousand and twenty be completing the main in and from twenty seven words or from twenty six to tent may there will be a grand celebration of the opening of the temple of we re the planetarium just to more yes to go and the temple we are progressing very rapidly so that all dedwotiswrewatching this video can come to see the mayapur on to six end to witness the greatest grand celebration of the temple of vedic planetarium re krishna karen progress everybody wanted to know when we are opening the temple currently we are completed the nusringadavewing and we are starting the works on the main wing primary we are going to do the colums the alter the feeling which is already going on and the propadyasas an amazing wasasnofipsfis an all to so the competion date for the main bing is twenty two thousand and twenty six and by disember of two thousand and twenty be completing the main and from twenty seven or words or from twenty six to tent seven make there will be a grand celebration of the opening of the temple of planet area more yes to go and the temple we are progressing very rapidly so that all the word is watching this video can come to see the mayapur on twenty six end to witness the greatest grand celebration of the temple of vedic planitariam opening re krishna
yes just like to remind for those who have not pledge you made do so there s small table of presentation of this ramesh is representative of bride laspabuormeshpab and by police offer this govind chat and there is a very special pavitra specially made in this ocation
you do
i krishna
god
maharaj
so this is my offering for this year is viarsapugiaalmost beloved spitel master and this ospiciusocation of viarsapuja i fall flat your lotes speed not symbolically but curly
people the lecture tension
is a
very opening offering something
something
pavitra
ji
haribo
जuस्ttाyng to have things expedited we dont have much time s almost master and this spcisapuja
from the court of
my let this offering the formal glorification but a lifelong declaration of the pen acountability and service what follows is not a con position of my mind, but a confession of my son i m not get a disciple ohgodudevethe more i tried to follow you the more i realized i am not get a disciple i have senas from you won saffron from your hands and then given the devine name back the anugraha
but how
much of your anugraha mercy have i tally owner in the silent ours of morning as i cant before the dates i as myself am i becoming the kind of servant you can trust is my consiousness a place you want want to enter do i reflect your move of love for shilaproupud or mealy imitating it you have offer you like to shilaproupad with wevering stedines to storms of politics sicnesscritisison isolation exastionand old age
i
sometimes become this corrig by small inconveniences और अ full field desires yet youve remain un shaken that contrast awakens me what what guru maharaj do my practical campus in the ka ofs of service when ego whispers destructions pool or conflict a rise i have learned to us myself a simple daily question what would gurumaragduin this moment when i m tempted to speak harsly i remember how you those your words so carefully when my mind grows restless i recalled your stillness during japa when i wished to withdraw from difficulty i reflect in your un st pool travel even when your body protest your life has become my map not just a philosophy not just a memory but a practical guidline for ich brath ich response ich desicion the power of quit the termination you never demand the spotlite yet iscon moves forward because of your hidden labor in this as of digital noise and shall preaching you have show need a p our of det over drama the strent of humility over carisma and the glory of substance over stile everytime i see you walk silently to the temple room with fall did hands and bold head you preach more loudly than a thousand lectures you have doghtne spritual leadership is not domination it is dedication preaching is not performing it is bleeding success is not a plos it is obedience this a long if i internalize it fully will save me from spritual ruin your comparsion is invisible get over wellminggur maharaj many will never know how much you suffer for us you we quietly when a the siple falls you take the burden of others karmas silently you protect our dignity even when we are you absorb offenses like a tree that gives shade or even to the ac, i have sim this with my own is and now i tried to emulated in the day to day grind of temple leadership a and disciple care, we have taught me that compassion is not emotion it is action waking up, even when existed for giving, even when her guiding even on misanderstod serving even when ignored my sanyas is meaningless widout becoming a reflection of you। what is my saffron club, if i still desire praise, what is my dandari, i cannot go control my tong what is my title, if my heart stille clings to full s ego you once told me janardan swami sanyas means accepting the full responsibility to carry sularpropers mission for word event, when it crosses you you did not speak those words likely you have live them and now that heavy responsibility s seats in my sholders not, because i am qualified, but because you place it there with love and trust now my only prayer is let me not be tray that trust let me become like a clear glass now distortions only transmission let your desires fast through me unfilted by my own ambitions viarsapuja is not just a day, wearsapuja is a life stile every t time i offer guru puja in the temple, i am vowing to you every time, i cant sixteen rounds attentively i am olering your instructions everytime i say no to comfort and yes to service i m serving your mood everytime i sp eksilapropes message without compromise, i am becoming your voice, this is what i now strive to do daily, this is the viasapoja that matters most to live in such a way, at your glories shin to me arfortlesly, because i am no longer in the way। my final prayer, a life of obedience a death of rememberence gurudev, i do not sek liberation, i do not sic respect, i do not sic position, i only pray for a life of obedience to your every desire, and when this body falls my final breath carry your name, your emag your glands your words live this world not a great preacher or a sanyasi, but a ser who remain at your feet unshakoblylayal invisibly useful and atternally greatful i am for ever your begger hare krishna,
thank you very much janardan maharaj guru maharaj was called by popat gopal gopal gopal for every thing, he will call out to sen the i have seen so many times marg cad called सो वेरी सर्वेंट सेक्रेटरी असिस्टेंट तो महाराज जनार्दन महाराज थैंक यू सो मच
हरे कृष्ण सबके लिए विशेष सूचना है कि अभी भी जो जन्माष्टमी संपन्न हुए, जनमाष्टमी के वृंदावन धाम में इस लेन भक्तिनगर जनधन स्वामी महाराज ने इस कांड में दीक्षा गुरु का संकल्प ग्रहण किया है। इस होल भक्तिनगर जनधन swami marg
ivelcansholines बखतीकवगोपेंद्र महाराज हरी महाराज
विष्णपदाक श्रम गोपाल कृष्ण ने नमो विष्णु पाद कृष्ण कृष्ण भूतल श्रीमते भक्ति विधान वाणी ने नीर
विशेष
बंछाकलपतरकपापतिदानंग पावन जय श्री कृष्णा चैतन्य प्रभु नंद हरी कृष्णा हरि कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरि हरि हरि राम हरि राम
राम
तो प पहले मेरा नाम जो है मैं गुरमा आखिरी सन्याशी मतलब मेरे बाद और किसी को सन्न नहीं दिए है और मेरा नाम याद रखिये। हमेशा गलती करते हैं लोग भक्ति केवल गोपिंद्र कृष्ण स्वामी ोपिनदकृष्ण स्वामी गोपेन्द्र कि आज बड़ी पावन दिवस है। पूजा, सी टी वन व्यस्पुजाहैइसलिए वेसन। महाराज ने कहा कि हम लोगों को ऐसे आचरण करना चाहिए की हमे देख के सभी लोग जैसे समझे की महाराज जी के नाम कभी रोशन होगा कर्तव्य। हम देखते हैं इतना सक्सेसफुल होने का कर्तव्य प्ड़हुपसयमलिखते हैं मेरी आगा प्ड़पजकहतेहमैमुझे सक्सेस फुल होने का ये ही कारण है मेरी आगा मतलब भक्ति शृद्दंद्रशठाकर की आगा डाटे रहे जिंदगी यही मेरा परम लक्ष्य है। तो महाराज ने भी यही 1 ही लक्ष्य को फॉलो किया की प्रभु पक्ष की आगा इनको पूरा करना है। तब महाराज जी हर साल वृंदावन जाते हैं, प्रभु पज्जकेतरा में प्रउपाकेहीसन्देश देते है की मै प्रपा इतनी भाषा में इतने किताब किताब को, किताबों को डिस्ट्यशनटेनसिलेशन कर दिया और इतना डिस्ट्र्यूशनयही मैचेस हर साल
देते थे
जो मेरी आग है। यह बहुत महत्वपूर्ण शब्द है। तो जैसे हम ज 7 सी स्कूल देखते हैं, इतनी भक्तों कितने 22, 23 मंदिर और भारत में और भी जितने क्षेत्र है, महाराज के जितने क्षेत्र है। इसमें मंदिर बहुत सारे मंदिर है, दिल्ली में है, गुजरात में है, बम्बई में है। अभी पर क्षेत्र संपन्न नहीं हो पाया। तो लुधियाना है इतने मंदिर भारत में और विश्व में तो है ही नहीं। तो हम देख सकते हैं की सक्सेस फुल का ये ही कारण है। मेरी आग प्रपद आगा का पालन करना। तो महा तो मारा
न।
तुम जाओ। बृंदावन ने कहा प्रभु आप तो जगननाथपुरी जा रहा है, मैं भी आपके साथ में चलो ने तुम्हारा कर्तव्य है मेरी आग को पालन करना। जल्दी गिर गए मुरी जैसे हम गो स्वयं भगवान गाते हैं। चैतन तो माँ, देखे तो मासमारी, गाए तो मार बोन शरबिनदयफलोययो शास्त्र निरुपन। इसलिए जन्म दिन में या कोई भी ग गुणों को गाना महापुर स्वयं कहते है भगवान के महापुरु, तुम दर्शन के, स्मरण के गाई, तुम्हारे गुणों को गाते हुए सभी इंद्रियों की फल ही है। यह शास्त्र निर्धारित है। तो उसके बाद वृंदावन दास ठाकुर कहते
हैं
सबजत्रमंगलदुईपुनति थी कृष्ण भक्ति है। भजन कोरिलसबानकृष्ण भक्ति ह खं्डेअबेदबान इसड़ेरजनमतिथिजहन पवित्र। शेई मत बशनोवेरोतिथिओचौरित्र कहते है कि विंदमंदषठाकुर महा पूर्व के आव भाव के बारे में कहते हैं सर्व यात्रा मंगल कोई भी कार्य कर सकत है। मंगली दुई पूर्ण तिथि, तिथि में है। महापुरु आविर्भाव सभी शुभ लक्षण इसमें है। कृष्ण भक्त होते है, विखंडित हो जाते है। इसके बाद ठाकुर कहते हैं शे बो ष्णोबेरतिथिओ चरित्र। तो जैसे भगवान के चरित्र हैं। विंदावन ठाकुर कहते हैं कि जैसे महाप्रभ चरित्र नितन चरित्र, पालन करने से अविद्या खंडित हो जाएगा, सारा बाधा विघ्न नष्ट हो जाएगा। कृष्ण के भक्ति होगी, उसी प्रकलउसकेबादमें कहते हैं। इसी प्रकार वैष्णव की तिथि और चरित्र, मतलब आविर्भाव तिथि, तिथि और उनके सारे जीवन चर्या। इसलिए हमें सभी मिलकर जितना ज्यादा ऐसी गदा गा सकते हैं। खंडित हो जाएगा तो सर मंगल हो जाएगा हम गा सकते हैं, श्रवण कर सकते हैं। यह शास्त्र शास्त्र निरूपण शास्त्र के द्वारा निरूपित किया है। सी प्रकार आज महार महाराज के सुबह सुबह आवेरातिथमेसमवत हुए हैं और कुछ मेरे साथ जैसे घटना महाराज जैसे मैं 1 बार पंचकुला में गोर नेता की अभिषेक हुआ जो गोरनेतयहैिेहठंडे के दिन थे महाराज पहुंचे थे मैं वृंदावन में के रूप मैं बहुत दिनों से सेवा नियुक्त किए है तो महाराज जी हम जानते हैं। तो मैं देखभाल कर रहा महाराज के सभी लोग स्वेटर पहने टोपी लगे महाराज मुझे पूछे की मैं कर लूँ मैं ऐसा कर लूँ। महाराज ने कहा नहीं मैं बोल कर लीजिये लेकिन उनके मन नहीं माना उन्होंने कहा नहीं बाद में सब कुछ उतार के जैसे पुजारी तो इसमें और भी कोई बना में बार जब वृंदावन जाते हैं तो ठाकुर जी के जन मांगते
है
जो मांगते हैं तेज बार जाके मांगे जनव की 1 जनव मिलेगा
कोई
कमी नहीं है तो इतना बोल के नोटिस है पास मिनट पास मिनट हो गया और बहुत और भी बहुत के द्वारा गोली महा पूर्व करते है भक्तों की तो इतना बोल के विराम देते है जा गोपाल महाराज सुबह भाव महा
के जब
के नेता
बहुत बहुत धन्यवाद महाराज बहुत ग्रहित आपने अपना प्रवचन दिया। अब हम लोगों के बीच में दिल्ली के सबसे पुराने पुराने में पुराने डिबोटीहम हमारे गुरु भाइयों में पुराने। वैसे तो श्री धाम प्रभु बैठे है नंबर वन पुराने में, लेकिन राधा दामोदर प्रभु काफी पुराने भक्त हैं और कथा भागवत कथा के प्रवचन करता भी है। पूरे भारत वर्ष में घुम घुम कर प्रवचन करते हैं। अभी अभी जनमासन ऐसे पहले इनकी कृष्ण कथा होती है। आर्डिटोरियम में इन्होंने कथा किया है। और अभी अपने विचार गुरु महाराज की सस्ती में रखेंगे राधा दामोदर प्रभु हरी
बोल
namang win a man namngi,
भक्ति
विधान नमस्ते शिवाजी गो भक्त हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम आज महाराज का पावन दिवस पर हमारे अग्रज गुरु भाई सन्यासी औ और प्रेसिडेंट भक्त विंस बोल के गए है। महाराज के विषय में हम क्या बताएं? महाराज का सभी भक्तों के ऊपर असीम कृपा है? और मेरे ऊपर तो कृपा उनका इतना ही है। हम बता नही सकता। 1 बार बोल दिए थे, निकल गए सबके ऊपर महाराज के ऊपर कृपा है? और मेरे ऊपर कृपा है ही नहीं। सब लोग चौंक पड़े। मैंने कहा कि नहीं हमारे पास कृपा है, सब के ऊपर कृपा है? पर महाराज की कृपा हमारे ऊपर कृपा है? क्यूकी सिचतनवहाँप्रभु की कृपा।
ऐसी
ठाकुर को प्रभु ने चुना सारा विश्व में प्रचार करने के लिए उसे उठाया वड़ा को गीता भागवत का प्रचार सारे विश्व में प्रचार किया और हमारे गुरु महाराज। भागवत माध्यम से हम जान सकते हैं कि इतनी उनका प्रचार विभाग में समय देने के लिए बाध्य हुआ या किया। उसी परंपरा में हम प्रयास किया
कुछ
भागवत के लिए, कुछ प्रचार के लिए। जदी बहुत क्वालिफाई नहीं है। भागवत का अनंत असीम है, फिर भी प्रयास है। हमारी प्रपात ने सारे विश्व में गीता भागवत का प्रचार किया है। और हमारी सोसाइटी जब बनी नहीं इस बने नहीं थे। पहले गीता भागवत का प्रचार किया। प्रभु प्रचार को छोड़कर हमारा कुछ नहीं
है
भागवत के द्वारा। हम जान सकते की इस बहुलकी मिशन में भाग पाली महाराज गुरु महाराज जी ने कितना दीदा के साथ में प्रचार किया। बम्बई में जब थे तो उन्होंने उस समय भी हमारे गुरु भाई जन जानते थे, साल में 1 बार जाते थे तो वहाँ हम बिजी थे तो वहाँ पर भी महाराज का प्रचार समय थे, 2 टावर था, 2 टावर में बड़ी प्रचार था वक्तिबाददूसरी भागवत्पाद और बड़ी हल्ला बड़ी प्रचार होते थे। तो कुछ मैट्रियल कॉम्पिटिशन नहीं है कॉम्पिटिशन था की कौन कितना प्रचार कर सके पर्पज की कृपा से अपने गुरु महाराज ने सारा विश्व में प्रचार किया। बाद में जो दिल्ली मंदी की निर्माण हुआ सभी भक्तों को लेकर के बाहर इंटरनेशनल लेवल में भी है और दिल्ली के लेवल में भी। जो जो मन व्यक्ति है, धना व्यक्ति है सबको जोड़े भगवत्पाद जी महा जो हिंदु जा हैं उनको जोड़े हैं विशेष रूप से दिल्ली के है उनको भी जोड़े हैं उनके साथ में हजारों लोगों को जोड़े और बुगिस्ुेशनमंदिर निर्माण। इन 2 फोकस किया उन्होंने। आज आप सुनते हैं देखते हैं कि 18, 19, 20 मंदिर हो गए और भी कोई तैयारी में है तो ये महाराज की बड़ी मेहनत है बड़ी गुरु महाराज की कृपा है, प्रहुपालजीकी कृपा है और सास में ये बुक डिस्ट्रिब्यूशन है। अभी वर्तमान में देखा जाए तो पहले मायापुर टेम्पुल आगे होते थे और सी
आगे होते थे, अमेरिका होते थे।
अभी दिल्ली मंदिर कई साल से विषय से भगवत गीता का प्रचार में आगे बढ़ रहे हैं। ये सब गुरु जी की कृपा है की कृपा है
और इस संस्था में
इस संस्था में जो जो लोग है यही गुरु महाराज की कृपा पात्र उन गुरु भाइयों से, गुरु बनने से मैं 1 ही निवेदन करूँगा की बस गुरुवार का पालन करते हैं। जिसको जो आदेश मिला है उस महादेश को पालन करते हुए अपने जीवन को सफल बनाये। हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे गोपाल कृष्ण को से महाराज की
बहुत बहुत धन्यवाद राधा।
gurudev
ardevacsnmagura
अभी हम लोगो के बीच में ग्रे जीता मित, प्रभु महाराज इनको पंडित जी कह के बुलाते थे ज्ञानियों में भी कुछ भी कहना होता था जीतामिरप्रभु को अक्सर पंडित जी कहके बुलाते थे। और जो लोग दिल्ली में रहते हैं सब जानते हैं जितामितप्रभु सबसे सिंसियर डिवोटी है गुरु महाराज की तरह कभी मंगल आरती नहीं मिस करते, कभी बाहर जाना होता है तो राधा पर सारथी को एप्लीकेशन देखे जाते हैं। बड़े दृ है
में स
हे से करूणकरिहोहैवैशसहित्य साधु भगवत 5 मिनट का समय है तो महा मंत्र कर दे तो ज्यादा अच्छा होगा की पहले से मुझे इशारा कर दे की 5 मिनट हो गया है तो महाराज के जो है मैं जब से बना उससे बहुत पहले की बात है जब मैं स्कुल में ही नहीं था। और पढाई जो है मैंने छोड़ दी थी क्योंकि पढ़ाई में मन नहीं लगता था, एमटेक जो है पूरा नहीं हुआ था और मैं घर में रहता था। तो उस समय मैं नहीं जानता था कि मेरा जीवन कहाँ समर्पित होगा लेकिन मैं यही प्रार्थना करता था अपने हृदय में कि जहाँ पहले से निश्चित हुआ है कि मुझे समर्पित होना है, मैं वहीं पर समर्पित हो हूँ लेकिन मैं नहीं जानता। मुझे कोई दिशा पता नहीं है कि मुझे कहाँ समर्पण करना है। तो समय 1 ब्रज मंजरी देवी 1 बहुत विद्वान शिष्य थी कृपालु महाराज की, 10 दिन का उनका प्रवचन हुआ महोबा में और उसके बाद फिर मैं उनसे जब मिला तो उन्होंने मतलब मुझे कहा कि तुम मेरे शिष्य बन जाओ और मेरे ऐसे संदी बनना है तो मेरे जो गुरु महाराज कृपालु महाराज उनके शिष्य से बन जाओ और वो कृपालु महाराज भी बहुत ही योग्य और प्रमाणिक लेमार्क संप्रदाय के आचार्य रहे जिन्होंने भक्ति धर्म को बहुत फैलाया लेकिन मैं अपने अन्दर ही सोच रहा था कि मुझे वही दिशा चाहिए जो पहले से निश्चित हो चूका है। तो मैं बहुत विचार करता रहा कि मुझे क्या करना है तो मैं जो है फिर उनसे नहीं जोड़ा बृज मंजरी जो बहन जी थे उनसे मैं नहीं जुड़ा और मुझे पता नहीं था।
फिर सन
2014 में जब नाड़ी ज्योतिष में मैं गया तो मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ सुन कर के नाड़ी ज्योतिश में पहले से लिखा हुआ था, क्या लिखा हुआ था उसमें तो सब कुछ लिखा हुआ था उसमें मेरे जन्म का जो वर्ष है और दिनांक है वो सब लिखा हुआ था और मेरा नाम जो है जन्म का नाम है वो भी लिखा हुआ था मेरे पिता का नाम, माता का नाम लिखा हुआ था, सब लिखा हुआ था और फिर ये भी बताया की इस समय ही आपको आना था आप इस समय 60 साल की आयु के ह आपको इसी समय आना था यहाँ पर और ये भी फिर लिखा था इस समय आप इस फोन के जो है 1 विशेष है जो फोन की संस्था है उसमें आप कार्यरत हैं और आपके गुरु गोपाल कृष्ण है और आपका दूसरा नाम जेता मित्र है। अब गोपाल कृष्ण नाम लिखा हुआ है तो ऐसा तो कभी नहीं लिखा जाता, न कभी बोलता है, न कोई कोई बोलता है गोपाल कृष्ण, हमेशा उनका नाम होली गोपाल कृष्ण, गोस्वामी इतना पूरा नाम होता है लेकिन हजारों साल पहले अगस्त मुनि ने यह लिखा हुआ था और उन्होंने गोपाल कृष्ण लिखा था क्योंकि वे बहुत महान आचार्य हैं, अगस्त मुनी है तो अगर वो लिखे गोपाल कृष्ण तो लिख सकते हैं बाकी आज कल कोई भी गोपाल कृष्ण नाम नहीं लिखता, महाराज का उनके नाम के आगे भी हिज होली ने या जाता है और उनके नाम के बाद भी गोस्वामी हो गया। 1 मिनट ही बोल तो यह जो है, मतलब क्या है की मुझे मैं यही प्रार्थना कर रहा था, शुरू से ही प्रार्थना कर रहा था की मुझे जो है जहाँ समर्पित होना है और जहाँ निश्चित हो चुका है मुझे वही समर्पित होना है। और ये जो है कितने आश्चर्य की बात है की ये जो है इसमें लिखा है ना, बहुत बातें लिखी उसमें ये समय नहीं है की वो सब बताने का मुझे यह बताना है की मेरा निश्चित हो चुका था पहले से ही की मैं गोपाल के गोस्वामी महाराज का शिष्य बनने वाला हूँ, पहले से निश्चित हो चुका था। तो ये मुझे आपको बताना है। शिला गोपाल कृष्ण कोसा महाराज के बहुत
बहुत धन्यवाद जीतामिप्रहुयेरहस से छिपा के बैठे थे, कभी बताया नहीं था यह बात तो अभी हम लोगों के बीच में धर्म क्षेत्र क्रकेट अनफुल फिल् प्रोजेक्ट ऐक्चवली लास्ट में महाराज देरादून जाने से पहले हमसे बोले की महामंत्र कुरु क्षेत्र मंदिर बनाना पूरा करना तो उनका बड़ा इच्छा था की ये बहुत सुन्दर मंदिर बने और 1 और शख्स हमारे अम्बरीश प्रभु अम्बरीश प्रभु ने भी कहा 1 बार जब उनको एअरपोर्ट लेने गए थे तो उन्होंने कहा महा मंत्र प्रभु सोम three temples ही टू मी तो कुरु क्षेत्र ही ब्राड मीट, टू डेली देन ही ब्राड मी तो मायापुर सो ही आलसो sad देर इस समथिंग हैव टू डू फॉर कुरु क्षेत्र अभी आज मैं इनको बता रहा था कि अम्बरीश प्रभु की भी इच्छा है कुछ सेवा करने की। सभी लोगों को भी वहाँ से मेसेज आया है अम्बरीश प्रभु की और से और उनके सभी टी बी पी के लोग आप सभी से रिक्वेस्ट कर रहे हैं। आप सब लोग हमारे साथ बोलिए। हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हर। अमरीश प्रभु के स्वास्थ्य की रिकवरी सुपरफास्ट हो। हरी व महाराज के बहुत से हटे थे। वो और हम लोगों के बीच में धर्म, क्षेत्र, कुरुक्षेत्र जॉन फिल्म फिल्म प्रोजेक्ट हैं, उसके महानायक उपस्थित हैं और बहुत कमिटेड हैं। मैं साक्षी गोपाल प्रभु से आग्रह करूँगा की वो अपने समय सीमा के अन्दर अपने प्रवचन को
विष्णु कृष्ण श्री गोपाल कृष्ण गोस्वामी साधु भगवत श्री कृष्ण चेतना प्रभु नित्यानंदा गौर भक्त विंदा दोनो हर
उठा के सभी बोले हरे कृष्णा हरे
कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे। मै अपने गुरु महाराज हे जो गोपाल समाज के चरणों में अनंत को प्रणाम ऐसे अर्पित करता हूँ। बड़ा सौभाग्य है जो मुझे गुरु महा मिला उससे बड़ा सौभाग्य यह है मेरा की मुझे। उनके निर्देशन में, धरमकशीतकुशत्र में पारी के दम पोजेक्ट कृष्ण अर्जुन मंदिर के निर्माण में उनका सहयोग करने का सुअवसर मिला। 1982 में गुरु महाराज का सानिध्य प्राप्त हुआ, 1900 तिरासी में महाराज से दीक्षा प्राप्त हुआ, 1986 में मायापुर में ब्राह्मण दिक्षा प्राप्त हुआ और 1992 में आदेश प्राप्त हुआ। जाओ और धर्म मिशन को का करो शुरू करो। बोले अरे कृष्ण बताइएगा पेंतालीस सालों का सम्बन्ध है, वो 5 मिनट में कैसे कम कुल किया जाए। अनेक अनेक बातें हृदय में प्रकट हो रही है, करुणा भी है, उसमे कई कई रूप गुरु महज के प्रकट हो रहे हैं। लेकिन मैं आज यह बताना चाहता हूँ की महाराज के हृदय में पति जो के प्रति कितनी करुणा थी। छानवे में भगवान जगरनाजीकीरक्षायात्रा पूरे पंजाब हरियाणा में महाराज के अध्यक्ष से शुरू हुई। और लुधियाना की रक्षा यात्रा के बारे में आप जानते हो की गुरु में आज की अध्यक्षता में रक्षा यात्रा पुरे वर्ल्ड में नंबर वन बनी जिसको आकर के सभी स्टोन पारसमल ने सराया और गुरु का लिफिकेशन किया। लेकिन जब जगरनाथपुर के जो मंदिर के ट्रस्टी हैं वो इस बात के लिए विरोध करने लगे की ये जो रथयात्रा है लुधियाना की दिसम्बर में नहीं होनी चाहिए यह रथयात्रा डे पर होनी चाहिए उसके लिए कम से कम 57 साल बहुत संघर्ष चला और बाद में उन्होंने हमारे जो बुगनेसमेमंदरहै उनके डिवोटी को तंग करना शुरू कर दिया। और बाद में फिर ऐसी स्थिति आ
गई कि
वो इस कोड में ये यात्रा बंद करने लगे। तो मैंने महाराज से बोला महाराज ये रक्षा यात्रा बंद नही होनी चाहिए क्योंकि उस समय पंजाब हरियाणा में लगभग पचीस 30 यात्रा निकल रही थी। 1 साल के अन्दर और महाराज के आदेश से निकल रही थी महाराज मुझे आदेश देते थे अब लंदन मे छात्रा साक्षी पाल, अब प्रणाली मेरा छियात्रा शुरू करो, साक्षी पाल तुम पानी मेरा छियाताशुरू करो महाराज मुझे आदेश देते थे। और मैं उसको पूरा करने का प्रयास करता था। और मैंने क्या देखा कि इसके द्वारा लाखों लाखों लोग इस कोन से जुड़ते जा रहे थे। 1 साफ़कर शहर का फेस्ट, तब महाराज बोले साक्षी पर तुम्हें मेरे साथ चलना होगा। अब हम मीटिंग करने जा रहे हैं। जगरनाथपुर में जगरनाथ पुरी के साथ ले गए फ्लाइट से जगरनाथ पुरी में, वहाँ पर में सबके साथ मीटिंग हुआ हुआ और बाद में मुझे महज अकेले बोलते हैं साक्षी पाल सच बात तो यह है मैं सब के पाप ले लूंगा लेकिन मैं नही चाहता की यात्रा बंद हो कितनी करुणा महाराज के ह्रदय में यह यात्रा साल भर निकलने चाहिए क्योकि इसके द्वारा ही नाम का प्रचार होता है। तो महाराज के हृदय में कितनी करुणा थी लोगो को हरिनाम देने के कितनी भावना दी सब का पाप अपने लेने के लिए बोले के पाप ले लूंगा, सबके पाप मुझे मिल जाए लेकिन ये यात्रा बंद नही चाहिए। तो जाते जाते महाराज ऐसी मेरी लास्ट मीटिंग हुआ था रोनी के मंदर में महाराज मुझे कहते सब काम छोड़ 2 और मुझे अब ये मंदिर बना कर 2 मैं अपने गुरु की इच्छा को पूर्ण करना चाहता हूँ। तो महाराज से जब रोणी मंदिर के ओपनिंग के बाद अभिषेक के बाद में महाराज के कमरे में गया तो मैंने पूछा अब हमें क्या करना है कैसे आगे बढ़ना के लिए तो महाराज मुझे बोला साब डोंट वरी बोले डोंट वरी थिंकिंग अबाउट कुष्ट पोजेक्ट ट्वेंटी फोर्स हार्स ये मुझे बोला महाराज ने और मैं देख रहा हूँ। महाराज के महाराज की कृपा जाने के बाद हमारे ऊपर ऊपर पहले ऐसी कई गुना बढ़ गयी है। ये मैंने साक्षात पिछले 1 साल के अंदर क्या देखा है परमाणु देखा महाराज का आशीर्वाद का और अब मैं आप सब भक्तों को यह निमंत्रण दे रहा हूँ की आप हमें आशीर्वाद दीजियेगा की हम अगले साल राम जयंती को ये मंदर गुरु महाराज की उपवाजकृपासीलोकारपण करने जा रहे हैं।
आप सबको भाव भरा निमंत्रण दिया जा रहा है।
आप कृपया हमें कृपा बरसाने के लिए आएगा यह नोट नोट कर लीजियेगा। थैंक यू वेरी मच हरी कृष्णा।
बहुत बहुत धन्यवाद। आज पहली बार कुल क्षेत्र ने समय की पाबंदी दिखाई है।
भई
मैं पुन कहूँ पुन, कहना चाहता हूँ गुरु भाई और बहनों को, ये केवल गुरु महाराज की कृपा से हो रहा है। और होगा
बहुत अच्छी। गुरु निष्ठा। हम लोगों के बीच में भावनगर से और वैसे से कनाडा के भी है। बहुत जगह भ्रमण करते रहते हैं, गुहिया प्रभु आये हैं। वो अपने विनम्र भावांजलि प्रस्तुत करें।
हरे कृष्ण नमोष्पदायकृषा, गोपाल कृष्ण, गोषमीप्रभुसत नमो विष्णु पदाय नमस्ते सरस्वती देवी गौर
पूजा महा म स की
दिल्ली भक्तों अभिनंदन मैं हर समय कहता रहता हूँ, कहीं भी मुझे बोलने का आदी नहीं हूँ। मुझे जो कहना है वो कहना नहीं आता है। फिर भी जो अवसर दिया गया है वो बदल खूब अभिनंदन बस मुझे यही कहना है कि गुरु महाराज का हमारे ऊपर बहुत कृपा रही है। हमारे पूरे परिवार के ऊ बहुत कृपा है। और अभी 1 डेढ़ साल के बाद महाराज चले जाने के बाद जो आपत्ति आई है, जो पीड़ा सहन कर रहे हैं, वो हमारा मन जानते हैं। हमको बहुत फीलिंग हो रहा है। गुरु महाराज आज नहीं है, हमारे बीच में प्रैक्टिकल दिखाई दे रहा है। तो हम सभी भक्तों से विनती करते हैं कि हमारे जैसे व्यक्ति का किसी के सुनने से बेटर है। बहुत सारे महारथी लोग स्कुल में बैठे हैं। जो बढ़िया कथा करते हैं, बढ़िया प्रवचन करते है, उसका सुनिए, उसका जीवन में अमल कीजिए और आपका जीवन धन्य कीजिए और गुरु को कीजिए। तो साची भक्ति होगा। और गुरु बहुत प्रसन्न होंगे और आपका जीवन भी धन्य होगा। क्योंकि अभी मेरा जीवन देख के मेरा बेटा द्वारका से जीवन समर्पण किया है। और जब बढ़ रहे है, आगे बढ़ रहे हैं। बहुत प्राउड फील कर रहा हूँ। मैं बस अभी हम 5 साल से हम मिल नहीं पा रहे हैं, पता कब मिल पायेगा गुरु को जल्दी से जल्दी मिला दे। हम लोग बस थैंक यू
थैंक यू गया प्रभु
मेरा गला हरे कृष्णा,
जय गुरु देव कृष्ण महाराज, गुरु देव, को कृष्ण महाराज, गुरु देर कृष्णा मारा जाय भगवत बाद गोपाल कृष्ण महाराज, हरे कृष्णा।
अब हमारे बीच में गुरु महाराज के बहुत प्रिय महारथी। महामंत्र बहु अरे जोर से बोलो हरी
बोल
महा मंत प्रभु इस मंदिर को बनाने में बहुत सहयोग किया है। यही नहीं पूरे विश्व में प्रचार करके धन ला कर के इस मंदिर को खड़ा किया है। हरे कृष्ण हिजगेशमहामंत्रपहु
अरे वाह हरे कृष्णा प्रभु। बहुत बहुत धन्यवाद, मैं वहाँ नहीं। यहाँ बैठ के गुरु महाराज का दर्शन करते हुए बोलना चाहता हूँ भैया नितिला हिज होलीनेस गोपाल कृष्ण, गोस्वामी महाराज की ही डिवाइन सी भक्ति विधान स्वामी शील प्रपात की, इसका गुरु भक्त वृंद की, सामवेद भक्तवृंद की। हमारे महाराज। गुरु महाराज बहुत ही अद्भुत व्यक्ति थे। मैं तो ऐसे ही जो बीज घूमने गया, हुआ था। हमने कहा की भैया यहाँ कुछ देखने लायक है बम्बई में तो किसी ने बोला वकीलों ने 1 वकील बोले की भाई बहुत अच्छी जगह, जो बीज तो जुहू बीज पर घुसते घू, मे घूमते जहाँ हर 1 मंदिर है वहाँ कार्नर भी पहुँच गए, वहाँ 2 कर्मचारी 1 उड़िया थे, बंगाली स्नान कर रहे थे, अच्छा हम सोचते थे और सभी नौजवान यही सोचते है की साधु संत के रूप में खटिया लोग घूम रहे हैं, चोर चंटी लोग हैं, मैंने उनसे ऐसे ही बोला भैया बम्बई को भी लूट ले चले आये, ऐसे वो बेचारे इतने अच्छे सज्जन लोग थे, उन्होंने कहा अरे आपने देखा नहीं यहाँ बहुत सुन्दर स्कॉल टेम्पल है, देखा नहीं आपने इसका हम जानते थे, लाहाबाद पढते थे तो वहाँ पर भक्तों की टोली आती थी, और कुम्भ मेला होता था तो इस कान के डिबोटियोंकोहम जानते थे पहले से 1 हमारे मित्र हैं भी अमेरिका में कमला नंददास। तो मैंने कहा इस्कॉन का टेम्पल। तब थोड़ा हमारे अन्दर 1 प्रेरणा आई, हम जाते ही अन्दर गए जब मंदिर में वो लोग तो हमको छोड़ कर के फाउंडिंग सामने भाग अन्दर गए, अन्दर दर्शन करने तो प्रपात की मूर्ति देख कर स्तब्ध हो गए, अरे क्या वाह ये तो बहुत बड़े संत है, फिर परिणाम नाम कर के वापस आये, लाबी में बैठ गए तोहार ने देखा की लोग पकड़ पकड़ के ले जा रहे थे, लोगो को ऊपर तो हमें लगा कोई न कोई मामला है, कोई बड़ा आदमी यहाँ आया हुआ है जिसके लिए ये लोग ले जा रहे हैं। तो हम भी उनके पीछे पीछे चले गए, कुछ समय महाराज 100 7 नंबर में जिसमे रधरीप्रभुभीबैठते है वहाँ बैठे थे, पीछे बैठ गए, जो गए बम्बई मंदिर में जो बाहर बालकनी क्यूँकी वो भी भरे हुए थे, ी धीरे धीरे 11 लाइन पूछते थे सब ठीक है कैसे है नाम जप करते हो, पूछते पूछते जो ऐसी बात कर ले चले जाते थे लास्ट में। हमारा नंबर आया तो सब से इंग्लिश में बात कर रहे थे, हमसे हिंदी में बोले महाराज आपका नाम क्या है हमने कहा कमला शंकर दूबे अरे पंडित जी हो बड़े आश्चर्य से बोला पंडित जी हो और क्या करते हो हमने कहा वैसे तो महाराज में वकील भी हूँ लेकिन मैं फिलोसफी से एमए कर रहा हूँ, ओ पूरा प्रहुपाजीकीपुस्तके दिखाए क्या इससे बढ़िया कहाँ मिलेगी फिलोसफी पढ़ो बस यही दोनो मंत दोनो आदेश हमारे हृदय में हो गया, फिर चले गए वहाँ अपने स्था पर, फिर बाद में हम आते रहे, जाते रहे, आते रहे, जाते रहे लोग बोलने लगे की अरे ये लोग तो सियाईएजेमटहैऔर घबरा गए, अरे भाई ऐसा तो नहीं तो फिर ढूंढने लगा वो स्वामी मिलेंगे तो उनसे पूछा मामला क्या है ऐसा तो नहीं ये सब फर्जी दिखावटी काम है, अंग्रेज लोग आरती वारती कर रहे हैं पीछे कोई नकली काम हो तो, लेकिन महाराज आते थे वहाँ ग्रुप बाजी थी कितना स्वामी के ग्रुप के लोग ज्यादा थे वो ज्यादा ज्यादा वहाँ प्रचारित थे तो महाराज के लिए कोई बताता ही नहीं था, 1 दिन फिर वही जगह जहाँ पहली बार बैठे थे, हलमाजीवालेसाइड में ठीक वही बैठे तो म महाराज आ गये। उस समय मद्रास से आये थे तो हम खड़े हो गए, हमको रोक करके तुरंत बोले हम आपसे मिले हुए है, हमने सोचा अरे 1 साल पहले मिले थे, इनको तो पूरा याद है, फिर वापस आये दर्शन करके फिर बोलते हैं। अगर आप पंद्रह मिनट इंतज़ार करें तो मैं आपसे मिलूंगा। फिर उन्होंने खुद ही जा कर उनके साथ 1 असिस्टेंट थे, लक्ष्मी नारायण उनको भेजा बोला वहाँ 1 रोकेट डूबे बैठे उनको बुला के लाओ। जब हम ऊपर आये तो बोल बताया हमने की महाराज मैं तो बहुत जुड़ा हुआ हूँ, मैं तो बहुत आता हूँ, कोई आपसे मिलाता ही नहीं मुझे। वो समझ गए की हम दूसरी कंपनी में फंस चु तो उन्होंने तुरंत कहा की मैं कल पूना चल रहा हूँ मेरे साथ चलो फिर महाराज मुझे पूना ले गए, वहाँ वृंदावन ले आये फिर दिल्ली गए वहाँ बम्बई गए तो फिर उन्होंने कहा मैं दिक्षा दे रहा हूँ। 24 तारीख 24 84 टी फोर में हमने कहा महाराज दिक्षा का मतलब क्या सब लोग ले रहे है हमकास हम भी ले लेते हैं। और कुछ बात नहीं हुई और महाराज ने मुझे दीक्षा दे दिया। अब मैं सोचता हूँ की वास्तव में मैं इस लायक नहीं था भक्त बनू। लेकिन महाराज ने जबरदस्ती कृपा किया अब मैं देखता हूँ की जितने हमारे मित्र हैं वो सड़ रहे हैं। वकालत के जंजाल में काली कोट पहन पहन के धक्के खा रहे है कितना पैसे से कभी किसी को शांति नहीं मिलती। उनके पास वो प्रेम नहीं है, वो भक्ति नहीं, वो रस नहीं है जो गुरु महाराज ने दिया। आज के इस पावन में मैं उनसे उनके चरणों में विनती करता हूँ जैसा अनुग्रह उन्होंने हमारे ऊपर किया। उसी प्रकार सारे गुरु भाइयों पर वेद व्यास प्रभु स्पेशल उनको घड़ी दिए हुए है। महाराज तो सब पर कृपा करे और सब लोग इसी तरह से द्रवीभूत रहे हैं। इस मान गोपाल कृष्ण गोस्वामी महाराज की बोल परमानंद अभी मायापुर टी ओ बी बी का कलेक्शन चालू हो चूका है। आप लोग पीछे मत रहिएगा अभी प्रिया प्रभु ने 1 गोल्डन डेलियल खरीदा है। कितने का मिलता है भैया 1 लाख 1 लाख टी बी बी की बोहनी चालू हो गई प्रभु बात की राधा माधव की और किसी को भी गोल्डन मेडलियन देना हो। संकोच मत करना। भाग के पीछे रास्ते से आया हरी बोल हम लोगों के बीच में हमारे कम्यूनिकेशन के डायरेक्टर ऑल इंडिया और जो अभी आपने देखा कितने रोज कोई न कोई वी आई पी आ रहा है। बहुत काफी लोगो को ले आये,
बोल
दिया सबको
अरे
तो ब्रजनंदन दास प्रभु। पहले ज्वाइन किया बम्बई में मुंबई से फिर पूना गए वहाँ के प्रेसिडेंटर हैं, वहाँ ऐसी पंजाबी भाग आये वहाँ के प्रेसिडेंट हैं फिर राधा पर साथी की सेवा में लगे रहे। अब ये कम्यूनिकेशन के ऑल इंडिया डायरेक्टर हैं और बहुत प्रभावी सेवा कर रहे हैं। आप लोग इनको आशीर्वाद देंगे। इसी तरह से अग्रसर गुरु महाराज की सेवा में चलते रहे परजेदनंदनदाज
हरे कृष्ण ये हमारी टीम में जब पंजाबी बाग मंदिर के प्रेजेंट थे तो मंगल आरती डेली हम और वे करते थे। नाइटी वन की बात है, तब से डेली मंगल आरती देख। गुरु महाराज की आज तो मेरा गला बिल्कुल बैठा हुआ है, इसलिए बोल नहीं रहा हूँ। देखिए जैसे की शिप्रहुपात जी डबल एट की बात करते थे। जब प्रहुपातजी ने हमारे गुरु जी को आदेश दिया की देश की राजधानी दिल्ली में 1 विशाल मंदिर बनना चाहिए और 10 मंदिर दिल्ली एन सी आर में बनना चाहिए। पा जी ने आदेश दिया गुरु महाराज। अब गुरु महाराज जी ने इसको डबल कर दिया। इस समय पूरे दिल्ली एनसीआर में 21 मंदिर बनकर तैयार हो गए। यही गुरु महाराज की बात है। बिल्कुल हनमान जी के त हनुमान जी को जब भगवान राम अंगूठी दे दिया तथा ने कहा था कि जा कर के सीता जी का पता लेकर के मेरे पास आ जाना। इतना ही कहा था। लेकिन हनुमान जी गए, लंका में आग भी लगाई, बहुत कुछ काम करके आये। तब भगवान राम कहते हैं की तुम्हारी उत्तम दास हो, क्यूँकि उत्तम दास की यही परिभाषा है की जिसको जो काम सौंपा जाता है वे डबल करके आता है। तो वह हनुमान जी की तरह हमारे गुरु में डबल, हर काम में आगे रहे, यह उनका विशेष है। आप विश्वास नहीं करेंगे 41 साल से हम गुरु महाराज के संरक्षण में सेवा करते रहे। 41 साल बहुत होते है और वो 41 साल के अनुभव को हम 5 मिनट नहीं बता सकते। आप खुद सोचिए 41 साल बहुत होता है कितना सेवा किया गुरु। लेकिन इतना जान लीजिये की महाराज का सबसे बड़ा जो अनुभव हमने सीखा महाराज हर पल तैयार रहते थे, चाहे रात हो, आधी रात हो, जैसा भी हो, हमेशा तैरता है, ये बात जानते है कब अनुभव हुआ। मुझे जब रशिया में प्रॉब्लम आई थी, हमारे सलूशन बड़ी तेजी से करते थे। जब प्रॉब्लम आई थी तो महाराज ने कहा पुतिन जो है इंडिया आने वाले थे। महाराज ने मुझे बुलाया अपने कमरे में की पुतिन जिन जिन लोगों से मिलने आ जायेंगे। उसके पहले मैं मिलना चाहता हूँ। और 1 फाइल को रशिया का काठी महाराज। उस समय पर मुखर्जी साहब और डिफेंस मिनिस्टर थे, मैं उनके पास 1 पुतिन उनसे मिलना चाहते थे। डिफेंस का मामला था रशिया गवर्नमेंट इंडिया का 1 अच्छा रिलेशन था। तो महाराज ने कहा कि डिफेंस मिनिस् ऐसी मेरी मीटिंग कर, आप, हम गए उनके पास जानते हैं। रात को साढ़े 11 बजे मिलने का टाइम दिया। रात को साढ़े 11 बजे मैं उनके घर से महाराज को फ़ोन लगाया की महाराज साढ़े 11 बजे का टाइम मिल रहा है। मैंने सोचा था की साढ़े 11 महाराज महाराज जायेंगे, तुम्हारा साढ़े गरह महाराज आप पायेंगे शायद कहीं चाहे 12 बजे बुलाए। लेकिन रसिया प्रोजेट के लिए हम आयेंगे तुमने बोला है, ताली बजा दिया इतना अच्छा काम हो। महाराज भाई तो खुद अवागरहगया साढ़े फिल्में मंदिर आया।
यहाँ।
फिर महाराज को लेकर गया, महाराज सुबह सवा 11 बजे हम लोग पहुँच गए, लेकिन वो ठीक 12 बजे ही आये क्यूंकि वो कहीं और गए थे मीटिंग के लिए, लेकिन जब महाराज ने फाइल पकड़ाई मास्को का कैसे किया जाता है बड़े लोगों से छोटे समय में बड़े महाराज सी क्यूँकी महाराज बोलते थे, हम सिर्फ सुनते थे, महाराज पहले बोल देते थे की मैं बोलूंगा और समझना कैसे कैसे काम निकाला जाता है महाराज। और वेरी एक्सपर्ट व फाइल पकड़ाया और वो डिफेंस थे। कहा की ठीक है स्वामी जी 1 काम हम जरूर कराएंगे। अब अगले दिन पुतिन साथ मीटिंग हुई और काम हो गया। 1 गुरु महाराज ऐसे कितने अनुभव है,
लेकिन यह चिट्ठी आ गई है, समय बहुत कम है।
तो मैं चाहता हूँ की हमारे गोपाल को स्वयं महाराज। हम बड़े स्वभाव शाली है की उनके हम शिष्य है। हमारे अंदर यही भी होना चाहिए की प्रभु सेवा के इस काम की सेवा करे। हमारे पास आलस नहीं होना चाहिए। 9 आलश तब प्रभु पाजी खुश होंगे हमारी ग रमराज खुश होने जैसा उन्होंने काम किया।
हरे कृष्ण हम लोगों के बीच में गुड वाइफ माता जी दोनो आये हुए है, क्या हुआ बोल नहीं सकते थोड़ा बोलिए हमारे फार्म प्रेस रहे है।
य
दु प्रभु ने कहा था यह आते ही भैया, मैं सब कुछ बन चूका हूँ, ये मेरा झंडा नहीं मैं प्रसीडेंट कनाडा में बन चूका हूँ, मुझे गुरु बनना है जय गुरुदेव की।
a
name दाती गो, तब कंचन गोरांग रादेव, सुते देवी, हरि कृपा गौभक्त रे,
हरे
नमो, विशुायाकृष्णप्रेस्टा, श्रीमत् गोपाल कृष्ण गोस्वामी इतिनामिन प्रभुपाद, साहित्य प्रचारण कृत्वान साधु भागवत पादाएथेनमहा तो शीला गोपाल कृष्ण गोस्वामी महाराज के गुणगान संख्या है और मोटे मोटे में
उन्होंने
200 प, 250 मंदिरों की नींव डाली, यह बहुत बड़ा उनका तो गोपाल कृष्ण को स्वामी महाराज परजा का चार्य
थे,
वो कभी रुके नहीं, दिल्ली उनकी मेन राजगादी थी फिर भी दिल्ली में हम सब पर छोड़ के सारी जवाबदारियां छोड़ गए, सारे विश्व में भ्रमण करते रहे। उनकी जी बी सी फोर्टफोलियो उनका रन वाइड था, वाशिंगटन से लेकर कलकत्ता तक और नॉर्थ से लेकर साल तक। तो यह हमें बताता है कि वो बहुत बड़े सुविज्ञा मैनेजर थे और मैनेजर के साथ साथ भी वो महान भक्त थे जैसे कि कोई दिन भी मंगला आरती नहीं छोड़ना और मंगला आरती करना स्पेशली मुख्यता श्री शिगोरनेचायमायापुर अर्थात हियर बम्बई जहां भी जाते थे, मंगलाआरती कभी रात को 2 बजे भी आये हो, लेकिन वो मंगलार्ची नहीं छोड़ी और उन्होंने प्रपा उनके ऊपर प्रहपाजी बहुत बड़ा विश्वास करते थे। तो बी बी टी के इंचार्ज बनाए, बीबीटीटरस्टी तो उपात की जान थी। तो गोपाल कृष्ण का स्वामी महाराज को उन ने दी और हम जानते हैं कि उनकी उनका समर्पण में हरेक रहात देना और उनका विश्वास पात्र बनना
ne
mint, man will respect ne mint। तो ऐसे हमारे गुप कृष्ण गोसाय महाराज काबिल शुद्ध भक्त और साधु के प्रचारण कृत्वान साधु साधु के उनमें सब गुण व गुणियल थे और उन्होंने भक्तों की भी बहुत देखभाल की और भक्तों का ख्याल किया और अभी भी करते हैं। जैसे दिनबंधु प्रभु बता रहे थे, मैं सुन रहा था ऑनलाइन कि उनको जब सिख थे तो हर रोज वो फ़ोन करते थे, वैसे भी जब मेरा पहला हार्ट टैक जब आया तो डॉक्टर यहाँ है स तो उनको फोन करते थे कि पर्याप्त पैसा है की नहीं उनकी सलवार के लिए तो यह शिला गोपाल कृष्ण गो सहीं महाराज की खासियत है और उनके गुण भी अनलिमिटेड है। और मैं रिस्पेक्ट करना चाहूंगा कि समय सर में गुणगान गाना समाप्त करूँ थैंक यू वेरी मच जोली नेस गोपाल कृष्ण
गोस्वामी महाराज की जय हो प्रभु की
आप
की दवा गोपाल कृष्ण महाराज गुरुदेव गोपाल कृष्ण महाराज श्रील गुरुदेव गोपाल कृष्ण मारा जाय भगवत पाजगोपलकरषणमामराज अरे कृष्णा बहुत
बहुत धन्यवाद हम लोगो के बीच में 1 बहुत अद्भु वक्त है, आपने देखा महाराज ने 1 विल लिखी थी, उन्होंने लिखा मेरे पास कुछ नहीं है, मैं अकिंचन हूँ, 1 सम्पत्ति मेरे पास है, वो सम्पत्ति उन्होंने किस को दिया वेदव्यास प्रभु को।
1 बात है।
1 बात मैं बताना चाहता हूँ, आप लोगों को नहीं मालूम होगा, अक्सर महाराज कहते थ महाराज कभी किसी पहचान वाले को ये नहीं करते थे कि आप पैसा दे। 2 मुझे हमेशा पूछते थे महा मंत्र मेरी समझ में नहीं आता, वे व्यास क्या है क्या नहीं है क्या कहूँ क्या नहीं कहूँ हम का महाराज ऐसे मत बोला करो आप बोलो ये काम होना चाहिए कर देंगे वो और वास्विकता भी थी। 1 समय था जब वेद व्यास प्रभु बहुत कर्ज में दबे हुए थे, वह पैसा लगा था कर्जा इनके ऊपर और हमारे दवे जी थे, वो बनवाते थे कंस्ट्रक्शन के इंजिनियर थे महाराज बम्बई से ले आये थे, तो उनको कोई मतलब नहीं पैसा नहीं है जहाँ से रुपया आ सकता है खींच लाते थे तो हर हफ्ते जाते थे, उससे बोलते थे, वो चेक दे देता था। 1 बार संडे को मैं उनको थोड़ा दम दे रहा था की भाई यह क्या करते हो आप पैसा कलेक्शन की जिम्मेदारी हमारे ऊपर है, आप 1 ऑफिस देख लिए घुस जाते हो, बिना पता किए की स्थिति क्या है, तो इतने में आ गए हमारे ऑफिस में और सुन लिया की मैं उनको थोड़ा दंड दे रहा हूँ, तू बोले नहीं नहीं नहीं प्रभु आपको कोई अधिकार नहीं है, देखो ये जो टी सेट पहना हूँ न ये भी बैंक के पैसे का है और सब समय मर्सिडीज नहीं थी के बाद जेन गाड़ी थी, पीली थी वो जो जेन गाड़ी हमारे नीचे खड़ी है वो भी बैंक के पैसे की है और मेरा भोजन भी बैंक के पैसे का है, तो मंदिर क्यों नहीं बैंक के पैसे बन सकता है बड़ा तब ऐसी हमारी उनकी बड़ी प्रगाढ़ दोस्ती हो गयी हमने कहा मैं तो बहुत पैसे वालों को दबाता हूँ, पैसा लेता हूँ, लेकिन ऐसा दान दाता कहाँ मिलेगा जो बैंक से उधार ले कर दान दे दे तो वो बोलना नहीं चाहते, लेकिन उन्हें फ़ोर्स कर रहा हूँ, उन्हें मैं घड़ी उतरवा लूंगा, हमारी उनकी शर्त है हरे बाल आइए। 22 कुछ तो बोलो दास दिल खोलो
भैया गुरु महाराज की जय मैं गुरु महाराज का 1 छोटा सा दास हूँ और ये उनकी शक्ति है, ये उनका
उनकी विशेष कृपा है जिसकी वजह से
मेरे जैसा जो है।
अधम
भगवान की गुरु की शरण में में आ पाया और उन्होंने ही अपनी शक्ति से मुझे किसी प्रकार से इतने
समय तक आप सब के साथ जोड़े रखा।
वैसे तो मैं किसी लायक का नहीं हूं, जो कुछ भी अगर सेवा मुझसे
हो पायी तो वो महाराज ले पाये।
मुझसे ये उन्हीं की शक्ति है, उन्ही की कृपा है।
मेरा इसमें कोई योगदान नहीं है।
श्रील गुरुदेव की जा
वैसे हमें आसान नहीं थी। मैं सोच रहा था की भाई ज्यादातर लोग हाजरी दिखाने के लिए आते हैं, चेहरा दिखाने के लिए शायद लोग सोचेंगे अरे गुरु महाराज नहीं है। अपने घर में इधर उधर मना लेते हैं। लेकि आप लोगों को देख कर मुझे विश्वास हो गया की गुरु महाराज के प्रति विशेष शक्ति आप लोगो में है। इसे 1 बार कर। धन से आप अपने लोगो का भी स्वागत कीजिए हरी हम लोगो के बीच में फ्रंटियर गाँधी हमारे रुकमिणी कृष्ण प्रभु पंजाबी विभाग के महानायक उपस्थित है और यह अपने प्रति संचिपसीपांचमिनट में पूरा कर देंगे।
अरे कृष्ण नम मिष्णपदामि 4 रंग के त्वं साधु भगवत गोपाल महाराज की तो मुझे शाम को थोड़ा जल्दी निकलना पड़े। इसलिए मैं इस सेशन में मुझे मौका दिया गया। इसके लिए बहुत धन्यवाद तो मैं अपनी ऑफरिंग से पढता हूँ। रिस्पेकट गरुमहाराज please acept sins mosospicirsocatn of your first aperencday i take the oportunity to try to offer सmgenvinwords of gorificatonand gratitude for my purification in new sepration a bonafide spitualmastur like you are holiness is prsenfiformof marcy of the lord guru krishna rupiheass्t प्रमाण गुरु रूप कृष्ण कृपा कर भक्त गण as बिटवीन the लॉ एंड द लिविंग एंटिटी इस aटrnl सिमिलरली the रeलaशnशिप between pेजेंtेटive lॉdकरिs्naएंड डिसipलइस आल सो एटरनल टरनल मींस इट कैनोट बी फेक्टेड बाई लिमिटेशंस ऑफ टाइम एंड स्पेस गुरु महाराज ऑन दिस फर्स्ट vas puja celebration do वी आर मिसिंग यू asociation but in वे वी हर फीलिंग मोर डीपली कनेक्टेड रिमेंबरिंग योर डिवाइन एक्टिविटीज एग्जामपल इंस्ट्रक्शंस sectra as we सी इन श्रीमद भागवतम हाव अर्जुन आफ्टर disapperence of the lod from this planet was feeling so miserable and discolet got his composit back just by remembering all the favors he received from the lot, his intimate dealing with the lord and the instructions he received from the lot similarly today by meditating up on all the ab im filing very very diplyconected with your holinsआल फेवर्स you stordaponमें गुरु महाराज आउट ऑफ ह र बाउंस कंपैशन यू हैव ऑलवेज बीन डिस्टोइिंग फेवर on में डिस्पाइट all मई डिसqualificatons you never dispruvdमेंराजर आलवेज एंड करेज में डिस्पाइट मई all falirshendigeps डिस it my highly unfavorable attitude focisonlcansesness im somehow able to survive because of your continued mercy in the form of various favors in fact my whole existence in the spiturlife is made of your holiness is cases mercy and it is imposible for me to innumiratinnumirabl favors you have distidop still i s try to list few of them the biggest favor you bestordaponme। is by initiating me in the chanting the holy name chanting of the gitimantrasiwas gliding down to the darkest region of hell with my पftafॉlसselfconfideंc, but you very ginni saved me now to my immature in sensitive dealings many times i created very disturbing situations in the community of devotees still guru maharaj you persisted in me guru maharaj you are always der baking me up with you r अनकंडिशन sport and guides in the ear to thousand nine many devotes from the congigration gave the centre of silprhupaand you are holinesand shifted their loyalty to baba ji in radakundinaway being the president of the temple, i was milna responsible for this major catastropguru mharage you could have easily got rid of me as you had all the good reasons to dispose me from my services in those moments of cut classes not use see the community with your expert handing, but also for give me again and put your trust in me by emprovering me to continue services in the same capacity of the co president in the prprdofsimabgotam one to seventeen shilapropasas the lord is more actions to take back into his kingdom, then we can desire most i donon desire at all to go back to got het similarly lords pour representative like your holiness are always more egr to give center to fॉlncnditionsols then the cnditinsolhimiself i came to this wonderful socity of shilaprwpa with my own selfish agenda of finding sum relieve from the heat of material world i never imagin mis टेकिंग सम रेस्poंसiblitis इन दि सोसाइटी बट गुरु महाराज आउटऑफ यू र अनकंडिशनल compton यू favrdमेंबईएंगेजिंग में सर्विसेज for टू टेक सम responसiblities सेट example for me for honing my vison extending yourself to train man whenever i remember आल दिस favors ऑफ लव केयर एंड coslेsmrsyapon मी आई ऑनली lement and file gilt हाऊ, आई वेस्टेड सो मेनी वन्डरफुल ऑपोर्चुनिटिज ऑफ टेकिंग फुल एडवांटेज ऑफ यू र वंडरफुल परसनल asociatinyouar entimatdelings gorुmहाराज हव vr folgt यू लविंग एंटीमेट डीलिंग विद यूनिक कॉम्बिनेशन ऑफ चाइड इनोसेंस फादरली केयर सेंसिटिव एंड फ्रेंडली मेंटल many times after giving shimabagwatm class you used to very inocently ask how as the class expecting ones feedback how can i forget you are loving waise fully ambeudwithcar and concern over phone call saying blessings on i had the great fortune of traling with you in the car to jab after a day long of hectigmetings lectures meting devotes it got very late in the night around eleven thirty p m i was feeling very drowsy looking at my dad face you smiling ly as heavy day isntdisdysmharag you again smiled and said same with me i used to come to stop clash temple to meet you very laminglyused to us have you take prasad on sias with addrdiwotis left your room and we were about to go out of the man dothe temple you personally called me and ask me to come back to on very special dish cold by one of your russian disciple in sept number two thousand three i request to arholenus to visit the house of my parents despit your super, hectic shedul गुरु महाराज यू एग्री टू विजिट एंड विस्टो कॉजलेsmrsipmई लिंग बेडरिडन मदर यू वैरी लविंग्ली डिड कीर्तन फॉर हर lso similarly my ldes sister who आलवेज used to meet you with कmpलेnटs हैव ज्वाइन fulटइmआश्रमइनवाइट योर होliनes हर home dूtingनidaयाt्रा यू वेरी लविंगली एक्सेप्टेड हर इमिटेशन onead frod prasad again harder complains from that day she started chanting and later took initiation from me and is very entusesically preaching how gan forget you are loving testismensaying, you are good for nothing, you are not at all hmbnremembering all this intimate loving dealings and other unlisted dealings i feel so fortunate and i s me time unfortunate net because you consider les conditions sol like me vardi of such dealings and unfortunate because all that i could not appreciate you are cotes mursi of your instructions always give stent to teke this dificult situations always consider yourself as a servant of the sermennto unless you practically apply the third work of sistas, you will keep on rating in this material world number tre attentive chanting not chanting is a सोलूशन for all प्रॉब्लमस नंबर for just told it become tik skin nbr five have more कoम्यuनिcation with tosdeवotiज आर फीलिंग sidलइnरवीकिनकिशn कांशेसनेस six ऑफsटेकsइन picture life make over dewosinalservice sweet number seven try try harder number it god helps those who help them self number nine rod calls a f all conflict between devotes is follsegonmber ten unit is more important than persnal emvisinsilस्किp सम ऑफ़
लास्ट परगराफ लगा तो
गुरु महाराज बहुत ही एक्स्ट्रा डरी है और हमारा सौभाग्य है की महाराज की शरण में है, महाराज का बहुत बड़ा हृदय है, सबको एकोमोडेट कर लेते हैं, सबको माफ़ कर देते हैं, महाराज का बहुत कोमल हृदय है, सब पे करना करते हैं। महाराज का बहुत मजबूत हृदय है, हर प्रकार की परेशानियों में भी अपने शिष्यों को शंटर देते रहते हरे हरे गोपाल महाराज की
प्रिया हम लोगो के बीच में 1 ऐसा बालक है जो प्रेसिडेंट बन गया और दिक्षित नहीं था। हमें लगता है की इस कान के इतिहास में पहली बार कोई व्यक्ति नया भक्ता प्रेसिडेंट बनाया गया जो दिक्षित नहीं था। ऐसे थे जिनका नाम बाद में दीक्षा के बाद 56 साल के बाद नाम बदला गया और बन गए प्रिया बोल जस्ट फॉर वन मिनट कम
1 मिनट
सुन्दर गोपाल कम क्लोजर प्लीज अरे बैठ
जाओ भाई अरे किशन तो बस अरे ना तो मैं पहली बार ही जो है माइक के सामने बैठा हूँ
तो
कहा से मेरा जो एक्सपीरियंस रहा गुरु महाराज के साथ, तो मैं जब गुरु महाराज से मिलता था बल वद्र बहू ने मेरे को जोड़ा था तो गुरू महाराज मेरे से कभी भी जो है भगवान की बातें नहीं करें क्योंकि महाराज को पता था ये भाग जाएगा। तो मैं जब भी महाराज से मिलता था तो महाराज मेरे या तो क्रिकेट का स्कोर पूछते थे या पोलिटी सीन के बारे में पूछते थे। यह मिनिस्टर कैसा है ये क्या कर रहा है वो क्या कर रहा है अरे वाह तो मेरे को लगता था ये मैं महाराज के पास साधु समझ के आता था। तो मैंने ये महाराज जो मेरे से पॉलिटिक्स की बात करते हैं, क्रिकेट की बात करते हैं, यह चक्कर क्या है। फिर धीरे धीरे जो है मैं जुड़ता गया स्कोन के साथ और 2 साल, 3 साल, 4 साल जो है निकल गए थोड़ा थोड़ा जो है वेद व्यास प्रभू की के पास है, बाल भुवी के पास है और भक्तों की के पास है, हल्का हल्का जो है भक्ति में, मन लगने लगा तो क्योंकि हमारी हमेशा पॉलिटिक्स और क्रिकेट की बात होती थी तो मैं 34 साल बाद 1 बार फिर गुरु महाराज के दर्शन करने आया। तो मैंने उस दिन शुरुआत जो है क्रिकेट के स्कोर से कर दी कि महाराज आज मैच में यह हुआ तो महाराज मेरे को बहुत जोर से डांटा बोले तुम अभी भी इस कचरे में पड़े हुए हो। तब मेरे को महसूस हुआ कि महाराज जैसा देवता है वैसी पूजा करते हैं। महाराज को पता था कि यह गधा जो क्रिकेट और पॉलिटिस के कारण ही जो है इससे हसी बात करेंगे तो ही जो है इस कोन में जुड़ेगा और जो है सेवा करेगा। तो इस तरह से महाराज की है करुणा बनी रहती थी और इसके अलावा महाराज का मैंने 1 जो चमत्कार था वो करुणा के समय देखा तो महाराज की बहुत इच्छा थी कि जैसे ही प्राइम मिनिस्टर ने लॉक डाउन जो है डिक्लेयर किया तो गुरु महाराज का इमीडिएट फ़ोन आया उन्होंने लेक्चर दिया था। प्राइम मिनिस्टर ने उसमें प्रसाद की बात भी की थी की सबको प्रसाद खिलाएं तो गुरु महाराज का फ़ोन आया की प्रदुमन जो है कैसे प्रसाद कराना है। पहला दिन था लॉक डाउन का तो मैंने कहा ठीक है महाराज बोले 2 4000 लोगों से शुरू करो तो हमने शुरू किया वो धीरे धीरे प्रोग्राम जैसा सबको पता है 5 लाख लोगो का परे पहुँच गया और उस समय जो
है
5 लाख बो दलना आसान है पैसे तो थे नहीं जो द्वारका में थोड़ी बहुत एफ डी बनी थी वो खत्म हो गई और गुरु महाराज हर 1 घंटे में फ़ोन करते थे की सब लोग मास्क लगा रहे है की नहीं सेनिटाइजर आप यूज कर रहे है। मतलब 11 चीज महाराज जो है बिल्कुल लाइव देखते थे द्वारका का और हमारा चौथे पांचवे दिन जो है जब 5 ल तक पहुँचे थे, पैसे खत्म हो गये थे और महाराज हर घंटे पूछते थे कि कितने पैसे बचे हैं, आपको लगभग 1 करोड़ रुपए डेली चाहिए कहाँ से आयेगा। तो मैं बोलता था महाराज है है है थोड़ा झूठ भी बोलता था महाराज के साथ कम होते थे फिर भी बोलता था महाराज हो जायेगा हो जायेगा और गुरु महाराज की ब था लेकिन 1 समय ऐसा आया कि पैसे बिल्कुल खत्म हो गये। फिर महाराज का फ़ोन आया बोले चिंता मत करो, कृष्णा व्यवस्था कर देंगे और आप सबको सरप्राइज होगा सुन के कि डेढ़ या 2 घंटे बाद 1 भक्त आये और बोले मैं आपके मतलब महाराज का, उन्होंने नाम लिया गुरु महाराज से, जो है 3 साल पहले यू एस ए में मिला था तो मैं उनसे बड़ा प्रभावित हुआ था और मैं यहाँ कुछ सेवा करना चाहता हूँ, मैंने कुछ से काम नहीं चलेगा, बहुत चाहिए बोले कितना चाहिए मैंने कम से कम 34 करोड़ तो चाहिए 34 दिन निकल जायेंगे हमारे और उन्होंने उसी समय 2 करोड़ रुपए दे दिए है और फिर जो है गुरु महाराज किसी न किसी को बेचते रहे और पैसे आते रहे। तो इस तरह से अद्भुत थे हमारे गुरु महाराज तो वेदव्यास प्रभु की आज्ञा की कुछ और बताऊँ। तो द्वार का मंदिर जो है द्वार का मंदिर का भी ऐसा ही हुआ था जब भक्ति रक्षक गोलोक महाराज जमीन की रजिस्ट्री कराने वाले थे तो मेरे को बुलाया गया और तो गुरु महाराज ने बोला कि भई आपको ज जिमेदारी संभालने है और आप प्रेसिडेंट बन जाओ मैं महाराज मेरे तो कुछ आता आता नही, दिक्षा भी नहीं हुई है, बोले मैं बोल रहा हूँ न आप दिमाग
क्यों लगा रहे हैं।
तो इस तरह से सेवा दी गयी और आज गुरु महाराज की कृपा से लगभग नाइनटी परसेंट जो है द्वार का प्रोजेक्ट कम्प्लीट हो गया है और जो
है अगले साल अगले लगभग है।
अब जो एग्जिस्टिंग टेंपल है, टेंपरेरी टेंपल है वो बस तोड़ना है तो हम लोग सितम्बर में उसको तोड़ देंगे और ये जो 23 साल जो लेट हुआ है उसके जिम्मेदार है मैं नहीं हूँ वेद व्यास है अरे अरे वाह मेरा टेंपल जो है कम्प्लीट हो गया था गुरु महराज की आज्ञ और वो खुलने वाला था। फिर भेजा बोले पागल हो गया है क्या गधा है बिल्कुल तू और इसको पूरा मंदिर खोलना चाहिए। तो उस चक्कर में जो है ये 23 साल लेट हो गया और 1 डेढ़ साल में खुल जाएगा और से जय की जाए।
बहुत बहुत बहुत आप लोग, सब आशीर्वाद दीजिये प्रिया सफलता पूर्वक अगले साल मंदिर का उद्घाटन करवा दे। अब हम लोगो के बीच में वैसे तो सब 1 से बढ़कर 1 मैं देख रहा हूँ क्या विभूतियाँ बैठी है और सब कुछ लोग तो शराब भी देते होंगे सबको बुलाना सम्भव ही नहीं है 1 से बढ़कर 1 कलाकार हमारे बीच में डॉक्टर कृष्ण प्रिया भी है महाराज के स्पेशल डॉक्टर छिपे हुए है, साधु हृदय है, राघव महाराज है लेकिन इस समय तो आप बुला नहीं सकते। लास्ट स्पीकर बा हमारा मंदिर का अध्यक्ष अध्यक्ष प्रभु कहाँ घुसा वो बोला ही नहीं अभी तक और हम लोगों के बीच में सुन्दर गोपाल प्रभु जो के चीफ पुरे इंडिया में नहीं पूरे वर्ल्ड में मार्ग काम किया है जल्दी से जल्दी शुरू करो। हरी
बहुत बहुत धन्यवाद। उमज्ञानतिविरनधस्य ज्ञानान जन सलाकया चगछुरुन मिलित जेन तस्मै, श्री गुरवे नम नम ओम विष्णु पादाय कृष्ण पृष्ठायभुतले, श्री मति भक्ति विदा स्वामी नीति नामी ने नमस्ते सरस्वती देवि गौर वाणी प्रचारण निर्विशेष सुन्यवादी पाश्चात्य देश तारण जय, श्री कृष्ण चैतन्य प्रभु नित्यानंद, श्री अद्द्वईतगदाधर श्रिवाश शादी गौर भक्त वृंदा हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे तो बहुत बहुत धन्यवाद जो मुझे यहाँ पे। अवसर मिला गुरु महाराज का आज आयुर्भावति दिवस मना रहे हैं।
तो
मैंने गुरुदेव चलीसा जो लिखा था और गुरु महाराज को सुनाया था। गुरु महाराज बहुत प्रसन्न हुए थे
और
महाराज ने कहा था कि आप इसका हिंदी और अंग्रेजी दोनों में अनुवाद करके अर्थ और इसको प्रकाशित करना है। तो उसका जो प्रथम जो दोहा था उसको मैं उस पे चर्चा करूँगा जिसमें गुरु महाराज के दिव्य गुणों का वर्णन है। प्रकट भये सौभाग्य निधि करुणा सिंधु मही, प्रकट भै सौभाग्य निधि करुणा सिंधु मही धरम धुरंधर ज्ञान निधि, गौडिया बनस प्रदीप तो सौभाग्य निधि इसमें गुरु महाराज को सभ निधि। सबसे महाराज की महिमा का गान है सौभाग्य मतलब सौभाग्य के निधि है खजाना जहाँ पर गुरु महाराज हाथ डाल दे वो जगह जो है वो सौभा आगे से भर जाता है जहाँ चरण रख दे वो स्थान पर सौभाग्य आ जाता
है
इसलिए गुरु महाराज जैसे हम देखते हैं, जहाँ भी जाते हैं वहाँ पर जैसे फसल उगती है वैसे मंदिर उगर रहे है। भगवान श्रीकृष्ण जो है वो मोदी के बीज लगाए थे। हमने सुना है जिलाओं में नंद गाँव में मोती के बीच खेती की और हमारे गुरु महाराज मंदिर की खेती करते जहाँ जहाँ मंदिरों के बीच डालते हैं और कुछ समय के बाद वहाँ से अद्भुत दिव्य मंदिर प्रगट हो जाते हैं और उस मंदिरों में दर्शन देकर लाखों जीवात्माओं का उद्धार होता है। और करुणा सिंधु करुणा सिंधु करुणा सिंधु नाम, अति सोहे सुमिरत भकत समुह मन महाराज के लिए करुणा सिंधु नाम जो है बिल्कुल उपयुक्त है क्यूँ ये करुणा के सागर हैं, करुणा के सागर कैसे हैं सबके लिए उनके हृदय में करुणा है। मॉर्निंग वार्क पर, मॉर्निंग वार्ग पर चीटियों के लिए, मॉर्निंग मार्ग पर चीटियों के लिए हरे कृष्ण चिल्लाते हैं। मॉर्निंग वाक पर चीटियों के लिए हरे कृष्णा चिल्लाते हैं और आपको देख कर वासुदेव ही पर याद आ जाते हैं। मॉर्निंग वार्क में जाते हैं, चीटी को देखते हैं और बैठ जाते हैं। और बैठ कर हरे कृष्ण, हरे कृष्णा करने लगत। क्या हो गया महाराज चक्कर आ गया इसलिए महाराज बैठे हैं क्या हुआ महाराज भक्त लोग महाराज बोले देखो चीटियां जा रही है इनके लिए जॉब कर रहा हूँ। महाराज जा रहे होते और अचानक वास बेसिन में उनको देखता है, कीड़ा देखता है, डूब रहा है, महाराज जाकर उसको हाथ से निकालते है।
बाहर
तो वो यही सोच रहा था कि महाराज जब चीटियों के लिए और कीड़े मकोड़ों के लिए इतनी करुणा है तो हम लोगो के लिए कितनी होगी और प्रकट भये सौभाग्य निधि करुणा सिंधु महि महीब महीब क्यों बोला गया। महि बोला सारी पृथ्वी के राजा हैं उनको महि बोला जाता है। उसी तरह से हमारे गु गुरू महाराज जो है पूरी पृथ्वी में कृष्ण भक्ति का प्रचार करके पूरी पृथ्वी को जीत लिया इसलिए गुरु महाराज बोलते हैं वही पूरी पृथ्वी के राजा हैं। और धर्म धुरंधर धर्म की धुरी को धारण करने वाले को कहते धर्म धुरंधर धर्म जो है जो शास्त्रों में बताया गया। भगवत साक्षात धर्म प्रणीत भगवान ने जो धर्म के धर्म का जो मार्ग बताया उसको भगवान अपने आचरण के द्वारा उसकी धर्म की दूरी को धारण करते हैं। ताकि धर्म का र इधर उधर न हिले बिल्कुल सही रास्ते पर चलता जाए। अपने आचरण से उन्होंने करके हम लोगो को सिखाया और ज्ञान निधि ज्ञान के खजाना है। जैसे सौभाग्य निधि है, वैसे ज्ञान के भी निधि है। कोई भी अगर हम प्रश्न पूछे महाराज। 2 शब्दों में 1 सेंटेंस में उतर
अरे अरे संत जी
100, 12 हा
कंप्लीट कर लेते दोहा अगर दूसरी मीटिंग के लिए 22 शब्द,
2 शब्द जब
तक वो आयेंगे तब तक 2 श।
तो इस प्रकार से ज्ञान ज्ञान के खजाने क्यों है की थोड़े शब्दों में ही उत्तर देते थे, जैसे 1 बार में गया गुरु महाराज के पास, महाराज बोले सुंदर, गोपाल वाट, इज, योर एजेंडा तो, मैंने, बोला, महाराज, वर्ड कैन, बी एजेंडा, मई एजेंडा, इज, ओनली प्रीचिंग, दैट, वी, have, टू, प्रीच, महाराज, सेट बट, मई एजेंडा, इस प्रीचिंग टुगेदर। तो महाराज कहना चाहते हैं कि मिल के करो प्रचार करना है, लेकिन अकेले अकेले नहीं, सबके साथ म मिलकर करो। 1 शब्द महाराज जोड़कर देखिये कितना बड़ा संदेश दे देते थे, यह बहुत ही बड़ी बात है। इस है ज्ञान के निधि और गौरी वंश प्रदीप गौड़ीय वंश के दीपक हैं। गौड़ीय वंश के के हमारा गौड़ीय संप्रदाय है, उसकी महिमा को फ फैलाने वाले दीपक के समान है। जो सारे संसार को गोरी वंश की महिमा से प्रज्वलित कर रहे हैं। ऐसे हमारे गुरु महाराज, महाराज वरमपुंजीगोपाल कृष्ण को स्वामी। महाराज के चरण कमलों में आज मैं नमन करता हूँ और महाराज से प्रार्थना करता हूँ की मुझे इसी प्रकार अपने चरणों की सेवा में लगाए रखे। शिलभभगुउत्पाद गुरु महाराज की
फास्ट्रैक तुम्हारा स्पेशल रिक्वेस्ट है।
हरे कृष्ण, हरे किश्ना, हरे किशना, किशन कृष्णा, हरे ह, हरे राम हरे राम राम राम, गोपाल कृष्ण, गोस्वामी महाराज की शिला, गोपाल कृष्ण महाराज व्यास पूजा की शिला की मिताई, गोरे मनदे, हरी हरी
बोल
छोटे छोटे लीला है और सबसे पहले लीला स्टार्ट करूँगा। श्री धाम प्रभु जी ने बताया की जो भगवत गीता वो जो पहला प्रिंट आया था वो राजीव गुप्ता प्रो के परिवार की तरफ से उन्होंने ट्रांसलेशन किया था अभी तक वे, उनकी माता 45 साल पहले तक हम लोग मिले थे, वो जीवित थी और अभी शायद हेल्थ प्रॉब्लम चल रही है तो हम सब उनके लिए प्रार्थना करेंगे। और जिन्होंने राजीव गुप्ता जी ने भगवत गीता पहला स्कोर को, गुरु महाराज को और गुरु महाराज ने प्रात को किया था। तो उनके घर हम जाते हैं। तो वो बताते है की गुरु महाराज को पराठे बहुत पसंद थे, क्या पसंद था पराठे और उनके घर में कम से कम वो 5, 8, 10 जितना वो खा सकते थे, यंग थे तो उतने पराठे खाते थे और पराठे खाते नहीं थे। जितने भी भक्त मंदिर में रहते थे उनके लिए भी पराठे पैक करके ले के आते थे। वो राजीव गुप्ता प्रभु जी के मदर बताती है जो श्री धाम प्रभु ने कोट किया था और महामंत्री प्रभु जी ने कोट किया ये 22 नवंबर के इस कौन के कितने मंदिर आ गया है 22 छिल्ला प्रभुपाद अपने गुरु महाराज, ऐसी कौन सी ए में मिले थे 1 मिनट पहले बता देना जब होने लगे कौन सी में मिले थे प्रभुपाद अपने जो गुरु महाराज हैं 1922, 1922 में क्या है 22 और प्रभुपाद को जो ऑर्डर मिला था की आपने अंग्रेजी में ग्रंथों को लिखना है। तो सबसे पहला जो वो कौन सा लिखा था वो था बैक टू गोड दिन क्या था, शिला भक्त, सिधान महाराज का प डे और एयर कौन सा था नाइनटीन टी फोर और गुरु महाराज का भी बर्थ का क्या है नाइनटीन टी फोर। तो महाराज के आने से पहले प्रकट से क्या आ गया बैक टू गार्ड और महाराज के भी जो हम लोग म प्रणाम करते है तो उसमे प्रभुपाद से साहित्य या प्रकाश वितीय। तो पहले से महाराज के आने से पहले ही प्रभुपाद ने उनके लिए तैयार कर लिया था। और 1900 चौवालिस में फिर क्या हो गया, 22 प्लस, 22 कितना हो गया फोर्टी फ और फिर इस कौम की स्थापना कब हुआ? नाइनटीन सिक्टी सिक्स 1 मिनट
हरे कृष्ण
हरे कृnओमज्ञानमरजञनन, जन, उन मिलितमयसम, श्री गुरवे, नम, शिल, गुरुदेव, व्यास पूजा, महा महोत्सव की जाए। तो मेरा महाराज जी तो गुणों की खान है और उनके साथ में अनुभव ही अनुभव है। महाराज सरलता की खान थे, महाराज परम दयालु थे, परम वि न थे और इतने बड़े महाराज गुरु महाराज थे, जी वी सी थे, लेकिन उसके बावजूद भी महाराज 1 सफाई कर्मचारी को भी पूछते थे कैसे हो ठीक हो
रुक कर
के सफाई कर्मचारी को भी। तो वास्तव में वैस्नव की यही पहचान है जो प्रत्येक को सम्मान देते है। तो ये सबसे बड़ा गुण था। और महाराज जब भी रत यात्राओं में कीर्तन में आते थे, बोलते थे मैं गालू, मैं गा सकता हूँ। अच्छा उन्होने महाराज ने गाया, उन्होंने गाया की नहीं गाया। और फिर ये भी पूछते थे तुम ने गाया मतलब इतना इसको इससे ज्यादा सरल क्या है। और जब भी उनके कमरे में मिलने भी जाए तो महाराज जो है अगर प्रसाद पा रहे होते थे तो हम लोग रुक जाते थे, महाराज बोलते नहीं बुलाओ सेवक लोग रोक देते थे। अभी नहीं प्रसाद पा रहे है। महाराज अगर देख लेंगे तो बोलेंगे बोल, ओ और बुलाने के बाद अपने संग ऊपर बिठाते थे। और अभी पूरा पाया नहीं है उसमें ऐसे ही 23 चीजें देते थे।
पाओ।
तो इसको तो कंपलीट कर दूं।
तो पाओ बोलते थे।
तो क्या हुआ? जब मैं नीचे बैठा तो बोले नहीं मेरे संग ऊपर बैठ के पाओ।
ठीक है, धन्यवाद।
शिला गुरुदेव की जाय, अभी कार घर बहुत सुन्दर मंदिर बन रहा है, बन गया, बन गया, दर्शन करने जाइए, बुक्स का
अरे, कृष्णा, शिव गुरुदेव की जाय। तो बहुत सारे बुक्स हैं जो की आज जिनका अनाज तन हो रहा है, विमोचन हो रहा है। शिव गुरु महराज हमेशा इनके अंग्रेज करते थे, विशेषतया इन बुक्स के लिए हम आभारी हैं ग्रे केशव कृष्ण प्रभु हिसार कांग्रेगेशन हरिबोल रघुपति प्रभु एंड दी united किंगडम congregation ग्रेस सुदामा प्रभु एंड हर ग्रेस पद्मावती माता जी सीनियर सेल्स ऑफ़ गुरुमहाराज हर ग्रेस सुलक्षणा माधवी माता जी एंड आर गुड हजबी विवेक प्रभु फ्रॉम सका काइंड हेल्प दिस रिबोट इन भक्तों के सहयोग से हमने विशेषता 1 बुक है। कॉन्वर्जेशन विद द सेन शीला प्रोप के साथ गुरु महराज का जो संवाद है ये। इसका मूल एक्वल कॉस्ट ऑन थाउजंड 8 हंड्रेड आन फिफ्टी रुपीज है 1850 रूपए का है। लेकिन इन भक्तों ने क्योंकि स्पोंसर किया ये 2 विशेष ग्रंथ है ये आपके लिए सिर्फ आज के लिए उप उपलब्ध है और आगे भी उपलब्ध होंगे। लेकिन आज जरूर लीजिये मात्र 550 रुपए के लिए फाइव हंड्रेड एंड फिफ्टी रुपीज सेड। इसमें 111 कॉन्वर्जेशन है जो गुरु मारा जो शील प्रपात के पास हुआ था। इसके बाहर 1 भी नहीं है कॉन्वजेशनआपकोकहीं नहीं मिलेगा प्लीज वाई, दिस बुक थैंक यू और नंद गोपाल जीवन प्रभु गोल्डन मीडिया गो मीडिया टीम उन्होंने रिलीज कराया है ये। इसके अतिरिक्त 2 दिव्य ग्रंथ है जो की शिला गुरु महाराज के वरिष्ठ शिला भक्तिनगर, जनधन स्वामी महाराज और शिला भक्ति वैश स्वायम महाराज वहाँ पर विमोचन कर रहे हैं। श्री दाम प्रभु गुरु के गुरु भाई। ये 2 बुक है भक्ति वृत्ति नैचुरल टेनेंसी, दि सोल बियॉन्ड इल्यूशन, द लाइफ ऑफ भक्ति। ये दोनों दोनों बुक गुरु मराज के जितने भी रशिया लेक्चर्स हैं उनका पूरा ट्रांसक्रिप्ट है। तो प्लीज इन ग्रंथों का भी लाभ उठा सकते हैं। अब सर्वसाक्षी प्रभु ग्रह, सर्वसाक्षी प्रभु को हमेशा गुरु मराज एनग्रेश करते थे। ग्रंथ लिखने के लिए। तो ही हेयर सर्वसाक्षी प्रभु आगे खड़े हैं। उन्होंने बहुत सारे ग्रंथ आज गुरु महराज को समर्पित किए हैं। पहला है हिंदी में श्री चैतन्य भागवत, मध्य खंड, भाग 1, गौडीबाषीकेसाथ, 8 का, खंड 4 में वॉल्यूम का भी पाठ तो चैतन्य भागवत का जरूर आप पढ़े बहुत ही महत्वपूर्ण ग्रंथ है। श्री मानस शिक्षा रुगनतदसगौस्वामी द्वारा विरचित ग्रंथ है। श्री स्वनियम दशक और श्रीला भक्ति न ठाकुर कृत श्री स्वनियम द्वादशक के साथ मनस शिक्षा ग्रंथ स्वामी का और पांचवा ग्रंथ है। आज का श्री कृष्ण भजनामृत, श्री नरहरी सरकार ठाकुर के द्वारा और श्री भक्ति लोक, श्रील भक्ति ठाकुर, शुद्ध भक्ति मा सेवा का अभ्यास करना है। तो 1 मार्ग दर्शन श्री भक्ति लोक वैष्णव सारो महाराज का चरित्र। पहली बार इस कांड में प्रामाणिक रूप से जरूर पढ़िएगा और सबको लेक्चर देना पड़ेगा आचार्य होंगे आप डिसपेरेंमेंकाम आएगा श्री गौर के शो और लीला दास महाराज का। श्रीला प्रभुपाद कथामृत भाग 1, जिसमें शीला प्रभु लीलाओं का 250 कथाओं का संग्रह है। शीला प्रपात कथा मृत और जानकी नाथ प्रभु है, जो कि पिछले साल भी उन्होंने बहुत ही सुन्दर ग्रंथ किया था। वृंदावन लीला नामक ग्रंथ है। वृन्दावन लीला। इस ग्रंथ में गो चंपू, आनंद, वृंदावन चंपू, श्रीमद भागवत कई अन्य शास्त्रों से श्री कृष्ण की पौगंडावस्था की 22 बाल लीलाओं को पढ़ सकते हैं। और इस पौगंड वस्था और किशोर एवम पूर्व राग लीला के बारे में बहुत ही विस्तृत रूप से बताया गया और कोई बुक्स नहीं है। इस डीटेल में तो जरूर इस ग्रंथ को खरीदें वृंदावन लीला बाई और डीआर जानकी नाथ प्रभु और हिज ग्रेस नंद गोपाल जीवन दास प्रभु जिनके बारे में सील गुरुमाराज ने मुझे पर्सनली बताएगा दैट नंदगोपाल is genius यू शुड हेल्प इन बुक डिस्ट्रीब्यution तो इसलिए कई भक्तों ने उनको ग्रंथ वितरण में हेल्प किया है। आप सभी प्लीज गुरु महाराज के जितने भी ग्रंथ है उसका स्टाल लगा हुआ है जरूर आज ही खरीदे हमने देखा है की आप सब जय गुरुदेव बोले चले जाते लेकिन बुक्स नहीं लेते। गुरु महाराज का सो प्लीज भाई, दोज, बुक्स वेरी, वेरी, वेरी और उद्धव गीता शील विष्ण ठाकुर के सरार्थदरशनीटीका एवं शील भक्त सिद्धांत सी ठाकुर के गौरी बाट सहित उद्धव गीता ग्रंथ है जिसको न गोपाल जीवन प्रो ने रिलीज किया है और लघु भागवत श्री गोस्वामी का प्लीज थाली बजाइए कम से कम और भक्ति तत्व विवेक ठाकुर। अमेजिंग ये सारे ग्रंथ आज इ डिस्क में उपलब्ध है तो गोल्डन एज मीडिया बहुत ही विशेष सहयोग है और हम सब के प्ररेणा स्रोत हर ग्रेस उर्मिला माता जी ने गुरु महाराज के साथ अपने साक्षात्कार उसके ऊपर ग्रंथ निकाले है ट्वेंटी सिक्स पास, टाइम्स स्पेशल पासटाइम्स, गुरु महाराज, हर ग्रेस उर्मिला माताजी दि बुक। उनके लिए बाया हाथ का खेल है
बुक
और ये इसमें विशेष हम सहयोग का आभार प्रकट करना चाहते हैं। शिक माता जी जिन्होंने पूरे ऑडियो का ट्रांसकर किया। यहाँ है माताजी माताजी प्लीज टैंक फॉर ट्रांसकर बुक एंड जगनाथ सखा प्रभु जगनाथ सखा प्रभु देर ओके प्लीज थैंक यू बुक खत्म हो गया। मतलब और हमारे बीच हिज ग्रेस नित्यानद प्रभु है जो की बाहदुरगढ़ मंदिर के अध्यक्ष हैं। उन्होंने बहुत ही सुन्दर ग्रंथ का आज विमोचन किया है जिसका नाम है भूरिदा जना सभी प्रीचर्स के लिए 10 मस्त ह बुक सबको चाहिए जो नए प्रचारक हैं वरिष्ठ प्रचारक है, सबके लिए 1 मार्ग दर्शिका है। कृष बना मृत का प्रचार करने के लिए 1 व्यापक पुस्तिका है। इस पुस्तक में प्रचार के सिद्धांत, प्रचारक के गुण और समय स्थान पर स्थिति के अनुसार प्रचार करने के विषय में बताया गया है। ऑल प्रीचर शुड हैव दिस बुक वेरी वेरी इम्पोर्टेंट बुक फाइनली, there is a very very special book that इस रिलीज बाई hrgrेsराधिकाकृपा माताजी every गुरुमाराज, यूज तो मेकर स्पीक दिस र शी विल स्पीक फॉर्चुनेटली ऑनली फॉर forty five seconds
goris
goris टो गुरुमाराज गोरिस ऑसपेशलफादगोरिसो। ये पुस्तक है revised edition, जो 2023 में गुरु महाराज को मैंने ऑफर किया था। मेमोज विद माई, स्पिरिचवल फादर और गुरु महाराज बहुत प्रसन्न हुए थे। तो इस बार जो उनके साथ जर्नी जो है वो इस समय 2 साल जो बीत गए उनके बिना 1 साल जो बीत गया है उनके बिना, हमारा तो उसके इसमें मेमोज है वेरी ब्यूटिफुल जस्ट री बैक पेज इट सेंस इ these pages flow the secret moments of a sols journey led shaped and uplifted by the devine grace of a spiritual father, this is not just a memoir, it is a tribute to the timeless bond between a siple and guru wo win with faith surender and love so, this is the book, it s got n memories with god marrige yes and this is god specially gr marg jana chahte kartarpur the gurdwara there and then the how i went this year in the march to fulfill that desire that i and i wanted also to travel with im ह
ये जितने भी ग्रंथ है। mata grant at these books are available here at what is price
free।
फ्री, फ्री, सबको दे रहे है, सबको दे रहे है last अnoncmentheris डिप्लोमा कोट्स इन भगवत, गीता, फॉर, वर्किंग प्रोफेशनल्स बहुत ही विशेष कोर्स है, दिस इज अ ज्वाइन सर्टिफिकेशन, बाई एन आई टी क्रुक क्षेत्र एंड इस्कॉन ये महत्वपूर्ण कोर्स है। क्यूंकी प्रोपज इच्छा थी गुरु महाराज पर्सनली इसको एनक्रेशकररहेदे मोहन गौर चन्द्र प्रभु एंड स टीम ऑफ़ वन्डरफुल डिवोटीज, फ्रॉम कुरुक्षेत्र और बहाने थैंक यू वेरी मच बाद की जाए, गुरु महाराज की थैंक यू
थैंक यू अभी हम जिस के लिए प्रतीक्षा रत थे, गुरु महाराज की भव्य वाणी, सुनने के लिए तैयार हैं हरि हरि। अब आपके बीच में गुरु महाराज का लेक्चर शुरू होने जा रहा है। हरी हरी क्या बोल रही हूँ क्या
बोलो
हरे कृष्ण गोपाल व्यास पूजा की सो महाराज के साथ बहुत ही मधुर मधुर पास टाइम है इसमें और यह बूट लिपटे में मेरे को, मेरे पास को ऑडियो भेजे थे और उस लिखा है दिन भी फास्ट टाइम्स है जो इसमें नहीं आ पाये हैं।
इसका प्राइस सिर्फ हंड्रेड रुपीज़ है, अभी
अवेलेबल है जो लेना
अभी महाराज का लेक्चर है न करिए प्लीज गो डाउन द स्टेज से निचे उतरिए आप जल्दी से जल्दी सुनिए कथा गुरु महाराज का प्रवचन प्रारंभ हो रहा है। हरी बोल प्लीज गो डाउन स्टेज स्टेज से नीचे उतारिए हरे कृष्ण
सारे
s mn bagwat wah भगवत माँ कितना टाइम है टाइम
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मैं थोड़ा बीच में अंग्रेजी में भी बोलूंगा, क्योंकि यह प्रोग्राम ऑनलाइन ब्राड कास्ट हो रहा है। सारे विश्व में और कई भगा सुन रहे हैं, वो अंग्रेजी बोल रहे हैं so is peak in english or hindi के। इसका अनुवाद तातपर्य इस प्रकार से है पढ़िए अनुवाद
हर रशना कित मेरे पुत्र। तुम्हें भी भगवान की शरण ग्रहण करनी चाहिए, क्योंकि वे अपने भक्तों पर अत्यंत दयालु हैं। जन्म मरण के चक्कर से मुक्ति चाहने
वाले व्यक्ति सदैव भक्ति सहित भगवान के चनकमलों की शरण में जाते हैं। अपना निदिष्ट कार्य कर के परित होकर, तुम अपने हृदय में भगवान को शुक्र करो और 1 पल भी विजित हुए बिना उनकी सेवा में तन्मय रहो।
अनुवाद दुवाए सबको बोलो दिलाने को कृत वादरहेगामेरे पुत्र।
तुम्हें भी भगवान की संग करनी चाहिए, क्योंकि वे अपने भक्तों पर अत्यंत दयालु हैं। जन्म मरण के चक्कर से मुक्ति चाहने वाले व्यक्ति सदैव भक्ति सहित भगवान के चनकमलों की शरण में जाते हैं। अपना निदिष्ट कार्य करके प्रवित होकर तुमने हृदय में भगवान को स्थिर करो और 1 पल भी विजित किए बिना
उनकी
सेवा में तन न रहो।
पर प्रापा जी के द्वारा
सुनीति ने अपने पुत्र को जो भक्ति योग की पत्ति बदलाई, वह भगवत साकार। की आदासविदीहै प्रत्येक व्यक्ति अपना स्वाभाविक मृत्यु पर कार्य करता हुआ, उसी के साथ ही अपने हृदय में भगवान को बचाए रख सकता है। स्वयं भगवान ने भगवत गीता में भी अर्जुन को यही उद्देश दिया था। लड़ते रहो और मन में मुझे धाम के रहो कृष्ण चेतना में सीधी चलाने वाले प्रत्येक निष्ठान व्यक्ति का यही आदर्श होना चाहिए। इस प्रश्न में रानी सुनीति ने अपने पुत्र को उपदेश दिया कि भगवान भ्त्यवस्सलकलाते हैं, अर्थात वे अपने भक्तों पर अत्यंत दयालु हैं। उनसे कहा तु अपनी विमाता से अपमानित होकर रोते हुए मेरे पास आये हो, किन्तु मैं तुम्हारा भला नहीं कर सकती। किन्तु कृष्ण अपने भक्तों पर इतने दयालु हैं कि यदि तुम उनके पास जाओगे तो उनकी मसलता तथा उनका मृदु व्यवहार मुझ जैसी लाख लाख माताओं से भी बढ़कर होगा। जब कोई दूसरा किसी का दुख घटा पाने में असमत रहता है तो श्री कृष्ण ही भक्त की सहायता करते हैं। सुनील ने इस पर भी बल दिया कि भगवान तक पहुंचने की क्रिया सरल नहीं। अध्यात्म में बड़े चढ़े निशि तक इसकी खोज में रहते हैं। सुनील ने यह भी बताया कि 2 महाराज अभी 5 वर्ष के छोटे बालक हैं। अतः कर्मकारण द्वारा अपने आप को शुद्ध कर पाना उनके लिए संभव नहीं है। किंतु भक्तियों की विधि से 5 वर्ष से भी कम आयु का बालक या किसी भी उम्र का व्यक्ति शुद्ध हो सकता है। भक्तियोग की यही वशिष्ट वशिष्ट महता है। अतः उनसे अतः उसने उन्हें देवता की या अन्य किसी विधि की पूजा करने की सलाह नहीं दी। उन्हें केवल भगवान की शरण में जाने को कहा, जिससे सिद्धि प्राप्त हो सके। जो ही मनुष्य अपने हृदय में भगवान को बसा लेता है, हर काम सरल हो जाता है और सफलता भी मिलती है।
but sum ham श्rीगश्ीताशीगुपम सगझतमसहागनालगुना तनवितमतमस जे व सद वेतम सब धुतम kृnaजेश्रीराधा कृष्णा पदान सहागनाललिता श्री विशाकानतमशाहे कृष्ण करुणा सिंधु दीन बंधु जगत पते गोपी कंचना गोरांगी राधे बिना बने श्री रिशमानसुधवंच ind a baba nabi ka श्लोक को खाते में बड़ा गहरा संदेश दिया जा रहा है। ये श्लोक का उच्चारण कर रही हैं। सुनिति सुनीति, कौन थी मनाज की म ता तो शिव भागवत में हम भगवान के भक्तों की लीलाओं के विषय में पढ़ते हैं और अगर हम इन लीलाओं उपदेश में रुचि ले तो हम तेजी के साथ भगवान की शरणगत हो सकते हैं। तो चौथे स्कर में आप धामराज की कथा पढते हो। पढते हो की उनके पिता को थाना पाल की 2 पत्नियां थी सुनीति और सुरीजी ज्यादा आकर चंद पिता का था सुरजी के प्रति और 1 दिन जब श्री जी का बेटा बना उतना भर की 2 पत्ति सुनी थी तो 1 दिन जब की श्री जी का बेटा पिता की गोद में बैठा हुआ था तो छोटा बालक धुआ जिनकी आयु लगभग 5 साल की थी उस समय उनकी इच्छा हुई की मैं भी मेरे पिता की गोद में बैठो जो पिता की गोद में बैठने जा रहे थे। तुम की सोतेली माँ ने उन्हें नीचे उठा लिया और नीचे उठा कर कहा तुम्हारा जब सौभाग्य होगा कि तुम मेरे से जन्म लोगे, फिर तुम अपने पिता की गोद में बैठने के योग्य हो सकोगे। उनका दुर्भाग्य क्या था कि उन्होंने सूरीजी के से जन्म लिया था और पिता का आकर्षण ज्यादा था। सूरी जी के प्रति पिता ने कुछ नहीं कहा जो उनकी सौतेली माँ ने जोर से डांटा सब नौकरों ने सुन लिया और पिता ने कुछ नहीं कहा और रोते हुए अपनी माँ के पास आये और पहुँचने से पहले माँ को सारी सूचना पहुँच गयी थी क्यूँ क्यूँ की सोतेली माँ ने जोर से चिल्ला कर डाटा की जिसे सेवकनर में उन्होंने भी सुन लिया। तो जब माता के पास आया माता ने कहा मैं तो तुम्हारा कोई सहयोग नहीं दे सकती और इस लोक में क्या करे की हे तुम्हे भी भगवान की श्रहनकरनी क्यूँ की वो अपने भक्तों पर अत्यंत दयालु है तो हम सब को भगवान की शरण ग्रहण करना चाहिए। स्वामी जी, गुरु जी भगवान के शरण हो गए है। गवान की शरण ग्रहण करने का अर्थ है उनकी शिक्षा का सम्पूर्ण रूप से पालन भी करना। और हमें कभी भूलना नहीं चाहिए की परम भगवान जो हैं अपने भक्तों पर अत्यंत दयालु है। तो भगवान की श्रम करने का अर्थ है उनकी शिक्षा का पालन करना और चेतनीय महा प्रभु जी जो स्वयं भगवान है उन्होंने खास कर के ये शिक्षा द की इस कलियुग में भगवत प्राप्ति का साधन क्या है? भगवान के देवे नामों का विचार। तो हम सब जो की भगवान के शरण होना चाहते हैं। हम सब का सबसे पहला कर्तव्य यह है कि माला का जाप करें बड़े ध्यान के साथ। भगवान के होने का अर्थ है भगवान की शिक्षा का पालन करना और उनकी शिक्षा पहली शिक्षा क्या है। ये हरि नाम का उच्चारन शास्त्र में कहा गया है। काली, काली नाम कृष्ण। इस कलयुग में भगवान अवतरित होते है उनके विभिन्न नामों के माध्यम से। तो हाई नाम का उच्चारण, ये उन सब भक्तों का सबसे अवश्य प्रथम कर्तव्य है। और जो की गंभीरता से भक्ति में आगे बढ़ना चाहते हैं। जो शिक्षा ले चुके हैं, दिक्षा लेने की इच्छा र ते हैं, उन सब पर ये जिम्मेदारी सौंपी हुई है की सबको 16 माला का जाप जरुर करना चाहिए। का सी उसे दिनों में अच्छे माला का जाप जितनी ध्यान ऐसी जॉब करेंगे। उतनी तेजी के साथ हरे की हल, निकालेगी जैसे क्षेत्र महाप्रभु ने शिक्षा के पहले श्लोक में कहा है चेत्र दर्पन मार्जन, ये भगवान विनाम को उच्चारण का पहला लाभ क्या हैं। हिंदी की महल दूर होती है। रूपक स्वामी जी ने हमें अनेक प्रसिद्ध ग्रंथ दिए हैं, पर खास करके 2 ग्रंथों का अनुवाद शिरप्राबाजी ने किया है। अंग्रेजी भाषा में 1 है। भक्ति, रस, मृत, सिंधु और दूसरा है। श्री उब्देशमितोश्री के सातवे लोक में जी कहते हैं कि भगवान के जो नाम है वो 3 मीठे हैं, लीला है वो भी मीठी है। पर क्यूंकि हमारे जीव में अविद्या की बीमारी है? इसलिए हम इसका मीठा पन महसूस नहीं कर पाते। जैसे की अगर आपको बुखार हो तो चाहे कितना कच्चा भोजन और प्रसाद को दिया जाए। आपको इसका टेस्ट नहीं आयेगा। पर दीपक को सोमी जी आगे कहते हैं की अगर धान ऐसी जॉब करेंगे रोज तो फिर ये विजया की बीमारी दूर हो जाएगी और फिर से हमें भगवान के नामों का मीठा पन महसूस होगा। दुसरे शब्दों में असली उपाय हर समस्या का है। भगवान के नामों का जाप ध्यान से करना और ध्यान से करेंगे तो फिर बहुत आकर्षण घटेगा और ध्यानिक आकर्षण बढ़ेगा। तो सुरीली माता क्या कहती है भगवान की शरण लो, ये है श्रीमद भ भगवत गीता का निर्णय, यह है श्रीमद भागवत का निर्णय की हमे भगवान की शरण लेनी चाहिए और भगवान जो हैं अत्यंत दयालु है। असली दयालु व्यक्ति कौन है स्वयं भगवान भगवान गीता में क्या कहते है? तो भक्त हे अर्जुन सबको यह सूचना 2 की मेरा जो भक्त है कभी नष्ट नहीं होगा। दूसरे शब्दों में भगवान अपने भक्तों की सुरक्षा करते हैं। इसका ये अर्थ नहीं की अगर आप भगवान के भक्त बन जाओ तो आपको कभी भी किसी प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा। भगवान आपको बुद्धि देते हैं और भगवान भक्तों की सुरक्षा करते हैं। ये निर्भर है कितनी मात्रा में हम भगवान की शरण लेते हैं। आगे 1 सुनीती माता कहती है? जन के चक्कर ऐसी मुक चाहने वाला व्यक्ति, तो हम सबके सामने असली समस्या क्या है जनामृददेकेबंधन से छुटकारा प्राप्त करना। हम सोचते हैं कि जीवन का उद्देश्य है धन कमा, लो इंडिया की सुविधा प्राप्त कर लो। पर ये जो जन मुद्दे का बंधन है, यह केवल कष्टों से भरा हुआ है। इसलिए भगवान गीता में कहते हैं कि भौतिक जगत के 2 मुख्य लक्षण हैं, 1 है दुखालायम, दूसरा है, 1 तरफ से कष्ट कष्ट और दूसरी तरफ से हर चीज है स आई है। तो हम सब को इस प्रकार से जीवन का उपयोग करना चाहिए की अब जन्म मित्र के बंधन से छुटकारा प्राप्त कर सको। प्रापा को 1922 में उनका 1 मित्र भक्ति सिद्धांत जी के पास ले गया था। सिनदजीपजमिलेबगी सिनाद समझ पाए कि है वो व्यक्ति जो की क्षेत्रीय महापबलिककीभविष्य वाली को सत्य करेगा क्षेत्रीय महापीभवि्यवली थी, के नाम का उचारन विश्व के हर कोने में प पहुँचेगा तो पहली मुलाकात में ही 1922 में भक्तीसीदाजीनेप्रापा जी से कहा तुम पढ़े लिखे, युवक हो, ले जाओ चेतन महाबली संदेश को पश्चिम देशों में तो भक्ति सीरांताजीयेथी उनकी इच्छा। तो प्रापा जी ने कहा इस समय हमारा देश गुलाम देश है, पहले हमारे देश को स्वतंत्र बना ले, फिर लोग सुनेंगे हमारे संदेश को। तो भी सिनादाजीनेये समझाया की ये असली स्वतंत्रता है जन के बंधन से छुटकारा प्राप्त करना। तो यहाँ सुनीति देवी हमें शिक्षा दे रही हैं। जन मित्र के चक्कर से अगर आपको मुक्ति चाहिए तो हमें भगवान के चरण कमलों की शरण में आना चाहिए। हमें भगवान के चरण शरण में आना चाहिए और में रहने के लिए, उड़ाने के लिए, साधु संगत का बड़ा गहरा प्रभाव रहता है। शास्त्र में कहा गया है साधु संघ, साधु संघ सर्व शास्त्र का लावा मात्र साधु संघ सर्वसिधहया में चेतन महा प्रभु के लीलाओं और उपदेश का ज्ञान हमें मिलता है। तो इस प्रसिद्ध ग्रंथ में कृष्णनाथ कार्वराज कहते है की भक्तों की संगत में ये उपदेश दिया जाता है भक्तों की संगत में रहा क्षेत्र में महा पबजी जब दक्षिण भारत की यात्रा कर रहे थे तो वहाँ 1 प्रशिद्ध भक्त राम से मिले चितीमेवहापपजीको पहले ही सूचना प्राप्त हो गयी थी कि दक्षिण भारत की यात्रा में से परिचय होगा। तो वहा से अनेक प्रश्न पूछे जिनमें 1 था की सबसे ज्यादा कष्ट हमे किस कार्य द्वारा प्राप्त होता है और राम राय ने कहा भगवान के भक्तों की संगति जुदा हो जाना यह है सबसे कठिन स्थिति के लिए तो हम सब को प्रयास चाहिए भक्तों की संगत में रहे आप सब और या आप में से कई घरो में रहकर भक्ति कर रहे हो। कइयों के शहर में मंदिर हैं, कई यों के शो में मंदर नहीं है पर हमारा प्रयास होना चाहिए कि हम भक्तों की संगत में रहे इन बंदरों का लाभ उठायें क्यूंकि मंदिर जाने से भगवान के दर्शन प्राप्त करने से, बवाल सुनने से हम ज्यादा दर्द होकर भक्ति के मार जोड़ सकते है। तो जन्म के चक्कर से अगर मुक्ति चाहिए। तो यहाँ सुनीती माता क्या कहती है भगवान के चलन करोगे ो आगे कहती है बिल कुल निष्ठा कार्य के साथ तुम इस मार्ग में जुडो और अपने कार्य को भगवान की खुशी के लिए करोगे। भगवान के हृदय में बिठाओगे तो इस कार्य के द्वारा आपका हृदय शोध हो जाएगा और कहती हैं कि 1 पल के लिए भी हमें विचलित नहीं होना चाहिए और भगवान की सेवा में रहना चाहिए तो भगवान की सेवा में हमें रहना चाहिए। ये है सुर्ती माता का उपदेश उपदेश देवी धृुणोमराजको मराज के माध्यम से यह उपदेश पूरे मानव समाज को दिया जा रहा है कि हमें भगवान की सेवा में रहना चाहिए। वह 1 पल क भी हमें विचलित होना चाहिए। अगर हम हर कार्य करेंगे भगवान की खुशी के लिए तो इस प्रकार हमारा मन मोदी इंडिया शो हो जायेंगे। तो ये उद्देश्य का पालन हमें हम सब को करना चाहिए। और में पापा जी समझा रहे हैं कि ये भक्ति योग की विधि की हर व्यक्ति अपने कार्य को भगवान की खुशी के लिए कर सकता है और इस विषय में भगवत गीता का बड़ा प्रसिद्ध स्लो है। तो स्मार्ट सर्वे हे अर्जुन। वह कहते हैं मन बुद्धि को मुझे अर्पण करते हुए तुम अपना कार्य करो। तो पापा जी भी इसी विषय की चर्चा कर रहे। पापा जी कहते हैं की इस प्रकार हम सब हमारे जीवन को सफल बना सकते हैं। अगर हम तन मन बदी से भगवान की सेवा करे तो ये शासन ने तो हम सब का यह भाव होना चाहिए की हमें भगवान के शरण गत होना है और हमें शुद्ध भक्ति प्राप्त करनी है के उदाहरण में आप क्या देखते हो इन्होने अपने माता के उपदेश का पालन किया और जैसे ही वो अपने महल को छोड़ कर निकल रहे थे वहाँ पहुँच गए ना जमुनी यह जमीनी का सदा 1 ही भाव रहता है सबको नारायण का उपदेश दिया जाए। वैसे मन विभान के शक्ति माने जाते हैं। और धमनी जैसे आप जानते हैं, हमेशा ठीक से पहुँच जाते हैं, ठीक स्थान पर से लिए। मुनी ने आर में इस बालक की परीक्षा ली।
ना।
धमनी ने कहा तुम छोटे से बालक
हो,
अपनी माँ के सौतेली माँ के शब्दों को इतनी गंभीरता से क्यों ले रहे हो?
जाओ खेलो।
ये तो खेलने को भी की। खेलने कूदने का समय है, यह भक्ति का समय थोड़ी है। वैसे देखा जाए समाज में। आज से है की आप किसी मन में जुड़े, भक्ति के साथ घरवाले और रिश्तेदार क्या कहते हैं, इतनी जल्दी जुड़
रहे हो,
सरकार आपको नितार कर देती है। और भक्ति के लिए आप जवान हो, बाकी कामों के लिए बुरे बन गये हो। और फिर भक्ति कब करनी चाहिए? जब आप बिल्कुल निकम में बन जाओ, समाज में आधे अंधे आधे भरे आधे लगे। जब किसी प्रकार की योग्यता नहीं हो, जब भगवान की सेवा में जुडो, पर हमें भगवान की सेवा में जुड़ना चाहिए। जब कुछ शक्ति है तो जरूरी 2 की परीक्षा ले रहे थे। जैसे इस काम में दीक्षा लेने से पहले भक्त को 123 साल तैयारी करनी पड़ती है। क्यूँ? क्यूंकी ये देखा जाता है। दीक्षा लेने से पहले यह व्यक्ति सचमुच ही गंभीर है। भक्ति की शिक्षा प्राप्त करने के लिए। तो धन की परीक्षा ली। कहा? ये तो खेलने को दी की उम्र है। यह भगवान को खोजने की उम्र थोड़ी है। धूल ने कहा अगर आप ने सहयोग देना चाहते हो तो मैं आप से चर्चा करने म, या आप मुझे मेरा सहयोग नहीं दे सकते। भगवान को खोजने में तुम भी छोड़। 2 अकेले तो उन्होने देखा की बड़ा है भगवान भगवत प्राप्ति के लिए। तो फिर उन्होंने ने आगे उपदेश दिया। इस विषय में कहते हैं की अगर आप भक्ति के मार्ग में सफलता चाहते हो तो हमें बड़े दीर्ध होकर इस मार्ग में जुड़ना चाहिए। उत्साह निश्चय धरी करमा। संगति सदी भक्ति थी की अगर आप भक्ति में आगे बढ़ना चाहते हो तो हमें उत्साहित होना चाहिए। क्यूँ नहीं आप किसकी सेवा में जुड़े हो? किसी श्रदधाननव्यक्ति की सेवा में है न, पर भगवान की सेवा में, तो हमें बड़े उत्साहित होना चाहिए। भगवान की सेवा करने का मौका मिले। अगर आपको किसी प्रसिद्ध व्यक्ति के साथ नौकरी मिल जाती है तो आप बड़े भाग्यवान हो। यहाँ हमें भगवान की सेवा में क्या मौका मिल रहा है? तो हमें बड़े उत्साह के साथ ये सेवा निभाने जाए। चाहे छोटी भी सेवा हो, आप कथा पढते हो। गुणीचमाजनमकी गुलीचा माज पत्नी का नाम है। गोला प्रसिद्ध मंदिर है जगनपुर। तो महा प्रभु अपने भक्तों के साथ खोज मिलकर पूरे मंदिर की सफाई कर रहे थे, वह दीवारों को साफ़ कर रहे थे, मिट्टी कर रहे थे, पानी पानी से धो रहे थे। तो भगवान की सेवा में चाहे। कुछ सेवा भी हो में बड़े उत्साह से करना चाहे। और जब भगवान देखते है की हमारी विनम्र की सेवा कर रहे हैं तो ज्यादा प्रसन्न होते हैं, आप पढ़ते हो। माना प, पूजा की कथा की पूर्व राम उडीसा के राजा थे, उनकी इच्छा थी की भगवान का दर्शन प्राप्त हो, भगवान इनकार करते गए। फिर जब उन्होंने देखा की रतिया के समय राजा होते हुए सड़क को साफ़ कर रहे है, हो रहा है, दूसरे शब्दों में भी का काम कर रहा है। महाप्रभु बड़े प्रसन्न हुए, उन्हें खास दर्शन दिया। तो भगवान की सेवा में चाहे, कुछ सेवा भी हो में बड़े उत्साह से करना चाहे और जुड़ना चाहे। यह नहीं की अगर किसी कारण मे कोई कठिनाई आए हम विचलित हो जाए तो हम भक्ति को छोड़े। तो धूम ने निर्णय कर लिया था की मुझे भगवत प्राप्ति के मार्ग में सफलता चाहिए, मुझे भगवान की आशीर्वाद चाहिए। जब मनी ने देखा ये बड़ा दर्द है भगवत प्राप्ति के लिए, तो उन्होंने फिर उन्हें उपाय दिया 1, तो उन्होंने मंत्र दिया कौन सा मंत्र है? ओम भगत। इस करीबी के लिए यह हर 1 का मंत्र ही आवश्यक है। श गोस्वामी से पूछा ये बताइए कलियुग में कैसे सफलता प्राप्त होगी? शुक्र गोस्वामी ने कहा ले
कलियुग में
दोष ही दोष है, पर है। इस कलियुग में, तो भगवान अवतरित होते हैं उनके देना रूप में, और इस लीग में मंत्र है, महा मंत्र है या हाई, कृष्ण मंत्र है। तो साथ ही ये शिक्षा दी, कैसे भगवान का रूप बनाया जाये। मिट्टी और जल के साथ। तो इस भगवान की मुर्गियों का दर्शन आप को मिलता है। भगवान इस कलियुग में 1 तरफ से तो हरी नाम के रूप में प्रकट होते हैं, दूसरी तरफ से अपने आँचल विग्रह के रूप में। इस आंचल विग्रह और भगवान में कोई अंतर नहीं है। हमें यह नहीं सोचना चाहिए ये तो केवल मूर्ति है, भगवान स्वयं उपस्थित है। इन मूर्तियों में। तो दोनो महराज ने 1 तरह से मंत्र को चालन किया, दूसरी तरफ ऐसी भगवान का रूप बनाया जिस पर वो जिसका चिंतन कर रहे थे और साथ ही उन्होंने तपस्या का पालन किया। बड़ी गहरी, तपस्या, पहले महीने, हर तीसरे दिन खाते थे, अगले महीने छठे दिन, तीसरे महीने जल, केवल 9 दिन में 1 बार। इस प्रकार वो अपनी तपस्या बढ़ाते गए और ंतमेनेपरभगवानका दिव्य दर्शन प्राप्त हुआ। तो तपस्या पर ज्योति भागवत। तपस्या के बिना अब भगवान को नहीं समझ सकते। कई बार लोग कहते हैं इस संस्थान में बहुत से बंधन है, बहुत से नियम हैं। ये नियम है भक्ति की माग में आगे बढ़ने के लिए। भक्त अनेक नियमों की चर्चा करते हैं। तो ये जो नियम हैं, ये हमारी भलाई के लिए। जब आप इन नियमों का पालन करते हो, वो भक्ति के खम्बे बन जाते हैं, जब इनका पालन नहीं करते तो वो पाप के खम्बे बन जाते हैं। तो सेवा पर ज्योति। भगवान ने गीता के अठानवे दिनों में कहा 3 चीजों को नहीं त्यागना चाहिए, क्या है ये 3 चीजें? यज्ञ, दान और तपस्या। तो तपस्या क्या है इस कलियुग में? भगवान गीता में इस विषय की चर्चा करते हैं। शरीर की तपस्या है, किसी का उपयोग करो। भगवान की सेवा में, जीव की तपस्या है की प्रजा भगवान का गुणगान करो। कृष्ण कथा में रूचि लो जी द्वारा भगवान के नामों का उच्चारण और कृष्ण कथा की चर्चा और खाना के द्वारा भगवान का गुणगान, सुनो पैरों के द्वारा भगवान के मंदर पहुँचो, साइकल स्कूटर या मोटर चलाकर जी द्वारा भगवान के नामों का उचारन करो और भगवान के प्रसाद को ग्रहण करो। भगवान गीता में कहते हैं जो व्यक्ति मुझे भोग लगाये बिना खाये और केवल पाप खा रहा है तो खाओ तो क्या कहो, कृष्ण प्रसाद खाओ। आप में से कितने भक्त है जो केवल कृष्ण प्रसाद खाते हो तो
सब
ने हाथ उठाया तो जिन्होंने हाथ नहीं उठाया, उन्हें यह निर्णय कर लेना चाहिए की हम खाएंगे तो क्या खाएंगे, केवल कृष्ण प्रसाद खायेंगे तो धूप ना भगवान को आकर्षित कर सके अभी तपस्या के माध्यम से। और उन्होंने ना मुनीजी शिक्षा का पालन। तो आप सबसे ये निवेदन है की आप लोग का सन्देश बड़ी गंभीरता से स्वीकार की जएगा देवी 1 गणेमायेमामाया दया माया का प्रभाव तेज है। भगवान स्वयं कहते हैं माया का विरोध करना। इतना स भगवान आगे यह भी कहते है जो मेरी शरण में आएगा वो इस माया का विरोध कर सकते हैं। माया का विरोध कर सकता है तो माया का विरोध करना। सम्भव केवल जब है जब भगवान की शिक्षा का पालन करो। इसलिए ध्यान मार्ग में जुड़ने के लिए ये निवेदन किया जाता है। महा मंत्र का जाप कीजिये। 4 नियमों का पालन कीजिये, गीता भागवत का अध्ययन कीजिये। पापा जी ने बड़ी कठिनाई के साथ इन ग्रंथों का अनुवाद किया और आपको खुशी होगी ये जानकर की प्रापर के जो ग्र थे यह 70 से अधिक भाषा में प्रकाशित हो गयी है। मैं कुछ दिन पहले रशिया में था और वहाँ के बी बी टी मैनेजर से चर्चा कर रहा था। तो रशिया में ये साल पिछले। साल 2012 में इस्को ने डे मिलियन किताबें रूस भाषा में बाते और ये साल की योजना है। 2 मिलियन कॉपी तो पापा जी ने ग्रंथ के अध्ययन के वितरण की सेवा पर बड़ा बल दिया। क क्यूंकि इन ग्रंथों में ज्ञान है और इस ज्ञान के उपयोग से अज्ञानता दूर होती है। और ये ज्ञान कैसे प्राप्त होगा शास्त्रों के अध्ययन के द्वारा। जैसे 2 प्रकार के भक्त हैं। 11 ग्रंथ भक्त और जैसा है साधु भक्त। तो हमें दोनों की आवश्यकत है। तो हम भक्ति के मार्ग में देर हो कर आगे बढ़ना चाहते हैं। तो इन ग्रंथों का अध्ययन भी बहुत आवश्यक है। आप सब पढ़े लिखे हो, आप सब को, इन ग्रंथों को बकैदा पढ़ना चाहिए। इन ग्रंथों में भगवान की वाणी साथ में महान चारियों के के भावों को पापा जी ने सार रूप में प्रस्तुत किया है। धात्री। तो आप सबसे ये निवेदन है की आप ध्यान से जाप कीजिएगा रोज साथ में भगवत गीता भागवत को भी पढो अगर में क्लास के लिए आ सकते हो। यह सबसे अच्छा है। मंदिर में नहीं आ सकते क्लास के लिए। तो भी हमें गीता भागवत को पढ़े रोज पढ़ना चाहिए। आप कितने भक्त भाग गीता को रोज पढ़ते हो और कितने भक्त है जो कम से कम हफ्ते में 12 बार पढ़ते हो गुर और कितने भक्त जो की भागवत को 1 या 2 बार पढते हो। तो मैं देख रहा हूँ की आप भक्त पढ़ने में थोड़ा कमजोर हो और कितने स के
के।
तो 1 निवेदन है की आप सब प्रयास कीजियेगा की रोज कम से कम गीता तो पढ़ो। गीता में भगवान का उपदेश और पापा जी ने अनेक समय ये कहा है की जब भगवान देखते है की हम इन ग्रंथो को पढ़ रहे हैं वो बड़े प्रसन्न होते है क्यूँ? भगवान कहते हैं ये भक्त मुझे समझना चाहता है मुझे इसे योग्यता देने। 2 जिसके द्वारा वो मुझे समझ सके तो आप सब भक्ति में जुड़े हो और ये भक्ति का बीज उगेगा जैसे चेतने महा। प्रभुजी ने सनातन स्वामी से कहा शनमकृतनमकेमाध्यम से और शणमकृतिनमकेमाध्यम से भक्ति का बीज उगेगा। पर हमें अपने आप को भौतिक वात्रण से बचाने के लिए साधु संगत में रखना है और हमें वैश्नव अपराध से बचना है। नेशनल अपराध के द्वारा भक्ति का बगीचा नष्ट हो सकता है। तो व्यास पूजा, उत्सव जो है कि व्यास उत्सव के द्वारा हम यह स्वीकार कर रहे हैं गुरु जो है व्यास देव की शिक्षा आगे दे रहा है। और प्रापा जी का 1 गोनीय था अनेक गुणों में की उन्होंने हमें सौ प्रतिशत शत सन्देश दिया है। इसलिए जब पापा जी ने गीता को प्रकाशित किया, उन्होंने भागवत गीता यथा रूप से नाम से प्रकाश तो गुरु का कर्तव्य यह बनता है कि जब ह वान की शिक्षा है उसको यथा रूप आगे प्रस्तुत किया जाए। और अगर हम परंपरा के सन्देश को स्वीकार करेंगे, उसके आधार पर जीवन को बिताने का प्रयास करेंगे तो बिना शंका के भगवत प्रेम प्राप्त कर सकोगे। और जन्म मृति की मदद से छुटकारा। तो ये खास निवेदन के ध्यान से जाप की जगह हर साल मैं आपको ये सन्देश देता हूँ क्यूंकि हमे भी है माया का इतना तेज प्रभाव है, रोज सुनने पर भी का असर इतना गहरा नहीं पड़ता। इसलिए भागवत में कहा गया है नस्ता प्रेशबदरेशुनीतियम, भागवत, सेवा, भगवती, वर्ष, भक्ति, भगवती, अगर हम रोज ध्यान से सुनेंगे, फिर माया के प्रभाव से हम बच सकेंगे तो शार्तों का अध्ययन भी आवश्यक है। अगर आप प्रयास करोगे तो हर कार्य सम्भव है। चेतन में कहा गया है कि चेतन महा प्रपी की असीम कृपा से कठिन कार्य सरल हो जाता है, उनकी कृपा के बिना सरल कार्य कठिन हो जाता है। आप यह निर्णय करोगे की हमने भागवत गीता भी 1 श्लोक पढ़ना है, 7 पड़े के साथ रन आपको सहयोग देंगे। और अगर आप ये निर्णय करोगे की हमने भागवत भी 1 श्लोक पढ़ना है तो यह भी सम्भव है। आप केवल आपको निर्णय करना है की हमे जरुर पढ़ना है और फिर किसी न किसी रूप से आप समय निकाल सकोगे और साधु संग म हो। साथ में भगवान के संदेश का प्रचार करो। चेतना भागवत में भगवान चेतन माप ने कहा सब भक्तों से घर घर जाओ और सबसे ये निवेदन करो। क्या बोलो, कृष्णा भाजा, कृष्ण खोलो, कृष्णा शिक्षक अनेक ऐसी विनती करो क्या कृष्ण का नाम लो, कृष्ण का भजन करो और कृष्ण के शिक्षक को अपनाओ तो हम सभी भाव होना चाहिए। प्रचार का और भगवत गीता के में ध्यान में भगवान क्या कहते है? सब भक्तों में सबसे प्रिय कौन है, कौन है? मैं प्रचार करता है, उससे ज्यादा पीना तो हुआ है न। आप सब भगवान के बनना चाहते हो तो क्या करना चाहिए?
इसलिए आपको
आप कितने भक्त प्रचार के सेवा से जुड़े हो। हर साल आप सब बड़े उत्साह के साथ जुड़ते हैं और देने के मनाउने साथ बुक सेवा में और कर के भक्त में रिहा जोड़ते हैं के हमने यह अनुभव किया है की हमारे जो गृह भक्त हैं उन्हें भी परचा के बहुत शख्त केवल यह निर्णय कर लेना चाहिए की हम इस सेवा में जुड़ना है। तो में आप सब का भारी की। आप सब पिछले कई सालों से लंदन के वेतन की सेवा में भी सहयोग देते हो। और ये प्रचार का उत्साह में हमेशा रखना चाहिए। चेतन माह पर बने इस प्रचार की सेवा पर। बोल दिया।
कहा
कृष्ण उसे भगवान का संदेश। 2 ये नहीं की जब आप प्रचार करोगे तो सब आपका साथ देंगे। जब भगवान हरिदा थे बंगाल में घर जाकर, ये नहीं कि सबने उनका साथ दिया, कईयों ने उनका साथ दिया, कहा कि क्या भाग्य है महान संत आ गए हमारे घर पर। कई ने उनका विरोध भी किया, अपमान नहीं किया और उन्होंने अपमान से लिया क्योंकि महा प्रभु का संदेश ले जाए संदेश को घर घर। तो यही है संदेश पापा हमारे अचारियों का कि संदेश भगवान का संदेश हमें पहुँचाना है हर कोने। पर। पापा जी ने अपने माज के आदेश को बड़ी गंभीरता से स्वीकार किया और प्रापाजीकीइच्छा थी कि भारत वासी भी अपनी इस शिक्षक को अपनायें और इस संदेश को आगे बढ़ाए तो आप सब गंभीरता से इस शिक्षा को अपनाइए। लोग ध्यान से जाप माला कीजिये गीता भगत को पढ़िए, शादी संग का लाभ उठाइये, प्रचार की सेवा में जुड़िये और इस प्रकार अपने जीवन को सफल बनाइए। हरे कृष्ण समय का भाव है इसलिए
आपकी परीक्षा होने वाली है, ऐसा नहीं धक्कामुकी शुरी कर दे। 1 तरफ से आना है पाल, प्रचालन करना है, फिर आगे जाना है, इसके बाद फिर भोगा आफरिंग होगी, फिर पुष्पांजलि होगी, उसके बाद आरती होगी आरती के दर्शन के पश्चात सुन्दर प्रसाद आपकी प्रतीक्षा में है, प्रसाद तैयार है, प्रसाद की कोई कमी नहीं है इसलिए प्लीज गो, स्लो गो, इन क्यू और साथ ही साथ जो हम
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भी सांजली हरी कृष्णा तो पुष्पांजलि के लिए जो डिवोटीज है कृपया फ्लावर्स डिस्ट्रीब्यूट कर दे। अब हमारे बीच में इस केस जीता में पुष्पा मंगला चरण का उच्चारण करेंगे
है।
सब लोग मेरे पीछे बोलेंगे अज्ञान तिमिर धस ज्ञान आंजना शलाकयमचछूउनमलतम नाम तस्मै श्री गुरवे न महान श्री चैतन्न मनोभिष्टम स्थापितमयेनभूतलेम स्वयं रुपहा कदा मैयम ददाति स्वपदंदिकम वन्दे हम श्री गुरु, श्री वत पद कमल श्रीगुरु वेश् श्री रोप सागर जात सहगण रघुनथानबेतम तमस जीवम साद्ेतम साव धोता पर जनसहेतम कृष्ण चेतन देवम श्री राधा कृष्ण पादाम सह गन ललिता, श्री विशाखन नमहा ओम विष्णु पादायaकृsnapेठaय भूतले श्र मते भक्ति वेदांत स्वामी इति नाम ने नमस्ते सरस्वति देवे गौर वाणी प्रचार ने निर्विशेष सुनवादी पाश्चात्य देश तारने नमहा ओम विष्णु पादाय कृष्ण प्रेष्ठायम भूतले श्रीमते भक्ति सिद्धांत सरस्वती इति नामिले श्री वार से भानवी देवी दईता
कृपा
कृष्ण सम्बन्ध विज्ञानम दय नेम प्रभाबेन महा मधुर योजन प्रेमा ध्यान, श्रीरुपानोगुम भक्ति दम श्री गौरम करुणा सकते विग्रहाय नमोस्तुते नमस्ते गोर वाणी श्री मूर्त
दिन
तारने रोपनगर विरोध धाप सिद्धांत हारि नेम नमहा गौर किशोर आयन साक्षात वेरा मूरत विप्रलम्भ रसम बोधे बादाम बोजाय ते नमहा नमहा भक्ति विनोदय सच्चदानन्द नमीने गौरशक्ते सर्पाय रूपनगर गौरा विराव निरदेसा सज्जन प्रिया वेसन सर्वे भा महान स्त्री जगन्नाथाय पेन महा कृपा सिन्धु पतित नाम पवन बा व्यसन वेब् नमो न महा नमो महा वदान्य कृष्ण प्रेम प्रदाय ते कृष्ण आया कृष्ण चैतन नाम ने गौरत से नमहा पंच तत्व आत्मा कम कृष्ण भक्त रूप सरूप कम भक्तावतार भक्ता क्या नमामि भक्त शक्ति कम हे कृष्ण करुणा सिन्धु दिन बंधो जगत्पते गोपेश गोपिका कांत राधा कांत नमोस्तुते जयतन सूरत पंगो मम मंद मति गति मत सर वस्व पदम भोज राधा मदन मोहन दिव्या वरन्दाराण कल पेद्रोमाधाहा श्रीमन् रतना गार सिंह सनस्था, श्रीमन राधा श्री ल गो विन्द देवा प्रेस ठालीभीशेव्मनोस्मरामी, श्रीमान रा से रस रंभी बंसी बट तटस्थित करसन वेणु सुनेर गोपी गोपी ना था श्रेयस तुना तब कांचन गोरांगी राधे ब्रिन् नन्द बनेश्वरीदृश्भानु स्वत देवी प्रणमामि हरिप्रिय
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कृष्ण चैतन्न प्रभु नित्यनन्द श्री अद्वैत गदाधर, श्रीवासादि गुर भक्त वृन्दा हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे
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3 बार प्रणाम मंत्र पढ़ेंगे 3 बार
पुष्पांजलि करेंगे महान ओम विष्णु पादाय कृष्ण बिरसाय भूत ले श्री मति गोपाल कृष्ण गोस्वामी इति नाम नेम प्रभु पदर्शन साहित्य यहाँ प्रकाशन वितिर्यचग प्रचार कृते वान साधो भागवत पदाया
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पुसपाजलिमसमरपेया मी सिला
गोपाल सब लोग प्रणाम करे
नमहा। ओम विष्णु पादाय कृष्ण प्रेस ठाय भूतले श्री मति गोपाल कृष्ण गोस्वामी इति मिन प्रभुपाद साहित्य यह प्रकाश वितिर्यचम प्रचार करत वान साधू भागवत पदायतेनमहापुषपजलम समर्पयामि जिला गोपाल
कृष्ण कुसाव महाराज की सब लोग प्रणाम करें
नमहा। ओम विष्णु पादाय कृष्ण प्रेस्ठायभूतले श्री मति गोपाल कृष्ण गोस्वामी हेति नाम प्रभुपाद साहित्य यहाँ प्रकाश मितिरियचम प्रचार कृदवान सदोम भागवत मदायन ते न महा पुषपांजलिम समरपेयामीशिला गोपाल
कृष्ण को स्वयं महाराज की सब लोग प्रणाम करें
शील गुरु महाराज की
संसार दा वा नलालीनलोकात्राणया का रुनिया घना घना तम प्राप्तस्य कल्याण गुणारणभास्या बंदे गुर श्री चरना रबिनदागरदेगरचरन महा प्रभु की ने सभी मित्र मन से ना ता मा ध्यान मनसूर सेना रोमांचक श्रीरंग भाजोवदगोरश्रीचरन जो बन्दे गुरु से करना रेरा श्री विग्रह रा धननित्यनानाश्रंगार तन साउंड वाले मार चना शिव
का
बंदे गुरु श्री चरणा विदा
जती
बंदे गुर श्री चरणा रविदा चतुर विधा श्री भगत प्रसाद स्वादन त्रता हरी भक्त
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से भगपरसादसधनत सदबदेगुरोश्रीचरा बंदे गुरु श्री डरना रेला श्री राधि का मा धवयोरपारामधुरजलला राधे का पर मधुर लिया
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बंदे गुरश
चरना रविदातररशारतिवा स्या गुरू से चरना रवेरा साखा धरी समस्त शास्त्र
दस्त था बस
हरी ना खा हरीना समस्त शास्त्र
था
भा
धरि देना सम् शास्स्
किन्तु प्रभु
जा प्रिय श्या वंदे गुरु श्री चरण गुरश चरना जश्या प्रसाद प्रसाद जश्या प्रसादा जश्या प्रसाद प्रसाद यस्य प्रसाद नगली स्यजस्त्रीसंधाबनदे गुरु श्री चरनारसु वंदे गुरु श्री चरना संध्या बन्दे गुरु श्री सध्या बन्दे गुरु 4 जय गुरु देव गुरु देवा गुरू देवा जय गुरु देव गुरु देव
गुरु
देव गुरु देवा या भगवा दा भगवत बादाम भगवत पद जाया भगवत भगवत भगत जरा तरारा रा जाया रे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे रामा रामा रामा रामा किश्नर किश्ना कृष्णा कृष्णा हरे हरे रामा रामा रामा रामा हरे हरे हरे क राम राम राम हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे राम राम राम हरे हरे कि राम हरे राम राम राम हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे हरे हरे राम राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे हरि हरि हरि हरि हरि कर हरि बारिद हरि हरि हरि hare
krishna goswami maha sami
विस को
न गोस्वामी प्रभु की कुल की प्रेम शिकहोशीकृष्ण
मथुरा दाम की
की
की रवि की भक्ति देवी की सी हरी नाम संकीरतन की
गुरु महाराज
puja t्वenटी ंटी फाइव की जनता गोसीतन
गोरी गोरी
अरे कृष्ण माताजी और प्रभु ध्यान से सुने अविलम्ब प्रसाद हेतु प्रस्थान करें और प्रसाद के तुरंत फिर से वापस आये प्रसाद पाने के तुरंत बाद 1 मिनट का समय बिना कमाए आप यहाँ आए आपके पास और यहाँ पर बैकुंठा प्ले बैंड के द्वारा रॉक म्यूजिक म्यूजिक माधव का राख माधवा फेमस मधवास रॉक बैन रॉक बैन उसके बाद फिर से इन लोगो ने अभी तक अपनी श्रद्धांजलि अर्पित नहीं किया है के वो फिर से फिर से इकठ्ठा हो के फिर इसी तरह से आनंद लेंगे और फिर रात्रि में प्रसाद के बाद आप विश्राम के लिए प्रस्थान करेंगे। दिलाने गोपाल कृष्ण गोस्वामी शील भगपाकीसपूजामहामस की जय 1 घड़ी खोई हुई है जो मिल चुकी है हमारे हाथ में और बहुत महंगी घड़ी है लो कलर की है अपनी पहचान बता कर के क्या समय हो रहा है वो बताओ तब मिलेगा लो टाइम बता के ले लो भैया अरिवार
हो गई है a।
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