भीष्मदेव द्वारा दिए गए 9 धार्मिक सिद्धांत हैं | SB 01.09.25 | 11 JUN 2023 | Gopal Krishna Goswami

Gopal Krishna Goswami explains nine religious principles from Bhishma Deva, connecting them to modern life. He warns against materialism and debt, stresses that leaders must serve people, and emphasizes truthfulness and charity. He also addresses anger, environmental damage, and how to use technology mindfully while maintaining a daily spiritual practice.
Chapters
galahad
baking
ग
कोलेजन होरिजन
के ा
हलिया रा
ग से राग
गेहो
ा
ना
ले
ले हे
हारे
हार
का काहे
काहे
काहे
रे हरे हे हाये रे हे
हे
हे हा हार
का
का अक्षय please कूट mobile sim sintmordwimोd कवाइ मोगराम अपने अपने बच्चे इधर उधर घूमते रहे और आवाज न करे बात
करे मोड पे रखे
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bugcomgnida अक्सर ये प्रोग्राम बनने में हो रहा था और कुछ कई हवसों वोट भी कल उदहारण के लिए 16 हज़ार लोगा हर सुबह से है। आज सबको पीछे सुनाई दे रहा है, पर समझ में आ रहा है अगर सुनाई देगा समर hat उठा के रासेशुर om s we have a gest here read on to a minister for dedersipravlpe round to make sure that deti property and for so ne, et pr mission to in giving ex जो करेगे तो हम पढ़ेंगे न दिखा kna पाश विधन धरमनषिनमशनुsम सहारा पंजे
आप देख सकते आज म पंडे से मत रस्ता न्यारा
जल
दान धर्म नाम
सा
सद लिखा का खुल
गया
शाम सलेज, रिया रा ज ग,
छोटा, चल, सो जा
ह
सुनकर श्यामन बैठे हुए है।
सर पर
पूछा विधान है। भरवा बोशीरमवशयज जरा सुनने के बाद
देव
को इस प्रकार में बोलते महाराज सर ने समस्त वहशियों की उपस्थित उनसे
भारी
के अनिवार्य से
पूछे।
विश्वदेव को आगे पूर्ण सर ने बोले महाराज विदेश समझे कि वे सीख रही, प्रयाण करने वाले हैं। अत भगवान श्रीकृष्ण ने महाराज यिजेस्पीको प्रेरित किया। धर्म के से धान के बारे में उनसे पूछे। भगवान श्री कृष्ण ने महाराज को प्रेरित किया कि वे अनेक महार्षियों की उपस्थिति में भी देव से प्रश्न पूछे, जिससे यह संकेत मिलता है कि दबी भेस्देवजैसा भगवद भक्त सामान्य परोसती भांति रहता है, किन्तु बड़े बड़े ममियों से, यहाँ तक कि ब्याज देव से भी कहीं अधिक स दिष्ट होरहा है। दूसरी बात यह है कि जिस समय न केवल सर्सिजापरलेटेथे अभी तो अपने इस अनर्थ के कारण वे अत्यंत स्थिति में थे, ऐसे स्थान से प्रश्न नहीं हो सकना चाहिए थे, लेकिन भगवान श्री कृष्ण जैसे के करना चाहिए थे। क्यूंकि ये सुन्दर भक्त सद आध्यात्मिक प्रकार के कारण से मान से पूर्ण रुपये स्वस्थ रहते हैं और किसी भी अवस्था में लेकर जीवन की सही दिशा में, जीवन की सही सा बताने में समर्थ होता है। विदिषीभीचहते थे की वहाँ पर उपस्थित व्यक्तियों से जो भी देश के विधान लते थे, उनसे ना पुस करके अपनी समस्याओं सुनाना संदेश करे। श्री कृष्ण की योजना थी, क्योंकि वे अपने भक्त की महिमा को सथापित करना चाहते हैं है कि उसका उसकी अपेक्षा अधिक प्रकार बने। भगवान जोर देकर घोषित करते हैं, क्योंकि भक्तों की पूजा उनकी खुद की पूजा से ही महत्वपूर रहे। सूर को संघ ने कहा विश्वदेव अस्पताल आज कुमर स्वर बोलते देख कर महाराज
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कन्या मन मंद सरर sri raधaaकरश्णकरुरा सिंधू बंधू से 2 पे हो ही आए
से
लो अयेरामरेमैभुगा हार्दिक स्वागत, तो इस अध्याय में हम पढते हैं कि किस प्रकार विरमदेवी तैयारी कर रहे हैं। अभी शरीर को जागने के लिए को ये वर्ग प्राप्त हुआ था उनके पिता के द्वारा, कि वो चुन सकते थे उनके अगर आज की प्रजा को ये छूट दी जाए, कोई चुनेगा ही नहीं। जैसे रामराज्य के समय भी प्रजा को छूट थे, वो चुन सकते थे। दे आ गे लड़े थे। पान भाइयों के विरोध पर वो प्रश्न थे। जब न्होंने देखा कि जिस को आज गनी प्राप्त हो रही है और बरेशमलेक्यातैयारी कर रहे हैं। श्री को से आगे मेरे लेटे हुए हैं किस पर वो
है।
और बिश्मनेक्योंकि इतने प्रसिद्ध भक्त थे भगवान के मन का त्यागने का समय आया। सारे देवता पानो भाई उनके उनके
या
गे थे को तो पान भाई साह
आ
गए और स्वयं भगवान उधर आये। भगवान वहां उपस्थित थे। और सौभाग्य था भगवान के कम लोग का समर्थन करते हुए भगवान वहां थे, ऊपर स्थित थे। भगवान ने युजिश्रेसे, हा, तुम, इनसे पूछो क्या है? धरम और अनेक ऋषि मुनि उपस्थित थे। वहां सभा में उन से कहा पूछो इनसे क्या है? धर्म का? धर्म के नियम क्या है? तो आप लोग को पीछे सुनाई दे रहा है। समझ तो वन साबित करना चाहते थे क्योंकि जो भक्त हैं वो हर स्थिति में, हर स्थिति में पूरा ध्यान है। और हालांकि बौधिक बिजली से व श्री आ गए थे, लाइन बेर बढे
व
दिखाना चाहते थे कि मेरा जो भक्त है वह स्थिति में मन बुद्धि को वश में रखता है, वो पेज दे सकता है। हमने देखा कि तैयारी कर रहे थे श्री त्यागने के लिए, तो उस समय उन्होंने अनुमान का कार्य नहीं छोड़ा, पर प्रभा ने हर स्थिति में प्रयास किया अनुमान हो जाए। जो भी 10 से भाग का अनुमान हो रहा था, उस समय, उस समय प्रभा की स्थिति बहुत ही कमजोर थी। अनेक भक्त उनका सहयोग देने को maकेpोनपरराकोई भाग रहा था। और उस में प्रॉपरली ने शिविर भगतन के का वां मार दिखाना चाहते थे कि मेरा जो भक्त है। हालांकि बहुत से ऐसा लगता है कि कष्ट की स्थिति में है, वो है जो आप होगे। भगवान ने क्यों कहा को कि आप बताइए क्या है। धर्म के नियम ये कहा यह पूछो कि जब वह अनेक संत उपस्थित थे और भगवान उपस्थित पिता में कहते हैं कि भगवान स्थापित करना चाहते हैं, क्या अब भी भक्त की महिमा को पढ़ाना चाहते हैं? जो भक्त हैं वो इसका प्रयास रहता है कि भगवान की महिमा को क्या कहते है, बुरा है और भगवान है, वो क्या चाहते हैं भक्त की महिमा को बोल रहा है। जैसे कि भ असिन बाजार की यात्रा करने जा रहे थे, उनके सूचना जाओगे आप। 1 बड़े प्रसिद्ध भक्त को मिलेंगे नाम
है
है वो राजपा भगवान का बहुत सम महा, अभी दक्षिण भारत की आशा की तो मेरे से अनेक प्रश्न पूछे, अनेक प्रश्न पूछे और या भगवान की छाया सी है कि वो क्या करे। भर की महिमा बोला भाई का सदा भगवान भारत महिमा को बढ़ाना चाहते है। हमें ये उम्मीद नहीं करनी चाहिए। भगवान हमारी महिमा भी बढ़ा। हे सो। तो भगवान ने से कहा यूजिशटसायेसनमहादा उपस्थित
थे
भाई सब परस्त भवानी उपस्थित है। उर सभा में भगवान ने ह से कहा पूछो इनसे क्या है? हम गाज क्या है? असली सिधांत और किस प्रकार व्यक्ति न तो बेशमदेवनेउसर दिया है में प्रभाजी कहते हैं बेसमदीजीके 9 मेन पॉइंट है क्योंकि वाले समाज को अनुकूल करना चाहिए। 92 समाज को श्रद्धा के अनुसार लेना चाहिए। पशु जैसा आज के वरन में जो मानव समाज है किस तरह जी रहे
हैं
मैं नहीं ना पशुबीकफभानाधरम के बिना मानव समाज क्या है? पशु। तो आज हम देखते हैं कि लोग पशु जैसे हैं लोग हो कि इसका यह परिणाम होगा म मास खाते हो ये परिणाम होगा। वो क्या कहते हैं? बाबा जी कैसे थे और वाला था किस का सावधान रुचि दी। उसी प्रकार समाज में लोग इतने अज्ञानता में हैं कि वो सोचते हैं कि धर्म के नियमों का पालन होना चाहिए और धर्म के नियम के स प्राप्त हो गया है। तो साथ में प्रॉपर जी कहते हैं कि बिश्वदेव ने मानव समाज को ये आदेश दिया कि 9 सिद्धांतों के ऊपर हमें जीवन को बिहार में जाना चाहिए। दूसरे शब्दों में डिफरेंस बिटवीन यूमन लाइफ एंड भानजी में पिट के जीवन में अंतर है की 9 सिधांत क्या है? सबसे पहला है
न।
आगे क्रोध से बचो क्रोध? तो गीता में क्या कहते हैं लस्ट नांगर 3 मार्ग हैं जो आपको ना की तरह मिल जाते हैं। तो क्रोध जो है इसे हमें बचना चाहिए। हम अक्सर क्रोध बहुत आता है माया क्रोध कम नहीं। 2 प्रकार के क्रोध होते को ना। वहीं मानना भी है क्या? और जब उन्होंने देखा कि मधाहं मे तुरंत अपने साथ, तो ये है आध्यात्मिक रोल की जब भगवान के भक्तों को पर अपराध किया है आप कुछ बोलते हो जैसे आप प्रचार में जाते हो। कई बार लोग असुर भाव के इस प्रचार को आने का प्रयास करते हैं तो आप से हो सकते
हैं।
जब आप देखते हो की कोई प्रयास कर रहा फिर प्रचार को रोकने के लिए तो क्रोध जो है उसे में बचना। अकसर पोलिक समाज में रोल क्यों आता है में क्यों आता है माने पोलिक छाए को हम पूरा नहीं कर सक। हमारे बोधि की कोई सीमा नहीं है और दिन बढ़ते जा रहे हैं और हमारे हज में भाग रहता है सब सुविधाओं को प्राप्त करने के लिए प्राप्त नहीं होता तो क्या होता है। फिर आप को लगता है कि मुझे जो मिला नहीं मिला फिर भी सो क्रोध जो है वो है नर का मान क्रोध से बचना है सब बचना चाहते हो और क्रोध में आकर बैठी अनेक भयंकर का दिखाई देता है। सबसे पहले कहा मानव समाज में क्रोध से बचा अगला क्या थे जुलाई झूठ मत बोलो आप लोग लोग है कलयुग में इस में आप दशकर कर रहे हो। आपको पता है कि आज 1 घंटे में कोर्ट जाना कलयुग में क्या देखते हैं कि झूठ के अलावा सच को भी बोलता है। सच बोलना है भगवान जीव की तपस्या की चर्चा करते हैं जीव की तपस्या के विश्व में क्या करते हैं में सत्या का उचारण करना है। सत्य का उचारण करते है। शास्त्र के आधार पर, जैसे कि प्रापरली ने भावी किरार प्रकाशित क्यों ही उन्होंने सत्य का उछाल लिया। उन्होंने कुछ बदला। तो सत्य का 1 अर्थ है, भगवान के सास हैं, जो देश हैं, उनका जरूर पालन। हमारे विवाह में भी सत्य का पालन होना चाहिए। और सत्य का पालन बहुत हो। तो आज समाज में क्या स्थिति है? उनका 1 ही भाग रहा ै किसी प्रकार से भौतिक सुविधाएं प्राप्त हो तो जीवन में वह क्या उद्देश्य होना चाहिए। देश होना अगर हमने गलती करी है से स्वीकार कर लेने के हैं। क्रोध से बचे और आप बिल्कुल, झूठ मत बोलो। सो बचपन से ही हम पलते हैं। सा में या झूठ बोलते हैं। और इसलिए भगवान गीता में जीप की तपस्या की तपस्या के विषय में है। क कहते है, सत्य का उपचार कर चोरी से है। झूठ बोलने से बचो और झूठ बोलने से बचने का प्रयास करोगे। क्या परिणाम होगा? आपके रिश्ते भी ज्यादा मजबूर होंगे। और आप देखोगे कि समाज में याद शान आज के बादल में कौन सच बोलता है। कौन झूठ नहीं बोलता। आपके मंत्री जी, इलेक्शन के समय आकर, आपको हजारों, वादे ये करेंगे, ये करेंगे, ये करेंगे होता है। कुछ प्रजा इतनी मूर्ख है, ज्ञान में है, उन्हें पता कि झूठ बोल रहे हैं। सो में सच बोलने की आदत होनी चाहिए, सेवा ले, हार्मिक, जीवन में जुड़ते हो। और अब हमारा पिछला अभ्यास है कि झूठ बोलते रहना, उसे मार में हम पढते है। देखते हैं कि यहाँ तो सत्य का उचारण होरा है। तो हम देखते हैं सर कुछ आध्यात्मिक जीवन में पेश करते है। लक्ष्या ना चाहिए। यह झूठ नहीं बोल रहा है। गलती हो भी जाए को वह अवश्य ही उसको माफ कर। तो आगे कहते हैं जो धन है, जो सम्पत्ति है, उसे बातो कैसे बाटो, उसे बांटो समानता के साथ। आज। अब समाज में क्या देखते हो? समाज में देखते हो कि 2 या 3 परसेंट आबादी की बात है कितना 90 परसेंट, ये सच बात है। आप देखते हो कि जो हो जाना, गुल, धनी लोग हैं, उस तेजी के साथ और धनी बन रहे हैं। व सजे आप देखो, ये बड़े और और गाय बना रही है। मुझे लगता है कि हम पर और प्राप्त हो जा। और आप विश्व में देखते हो। धनी लोग हैं, वो क्या हो रहे हैं, ज्यादा धनी बन रहे। और जो गरीब लोग हैं, मिड क्लास लोग है में कई हैं, जो आगे भी बढ़ रहे है। इसके कारण क्या होता है? क्रांति का भाव जैसे कि कॉम्बिनिज्म हुआ था, कॉम्बुनिजम हुआ था इस बात से कि जो धन है उसको 1 बराबर बाटना चाहिए। पर समझ का जो इंडियन नेता थे, उनमें उनका कोई चरित्र नहीं था, आजकल नहीं था वो बभानी। इसके कारण समाज की प्रजा को कोई सुख नहीं मिला। इसलिए ये अबयेक समाज के जो नेता हैं, उनका क्या भाव होना चाहिए, उनमें उनका चरित्र होना चाहिए, चरित्र होगा। फिर समाज में कोई सुधार होगा, चरित्र नहीं होगा तो कोई सुधार नहीं होगा। तो विश्वदेव ने कहा अगर की आप चाहते हो कि समाज की प्रजा तो क्या करो? जो धन है उसको मानता से बाट। ऐसे बातों की सबके पास हो। वो इशू परेशा में क्या है? वो एशिया? वरशीधामशर्माहर व्यक्ति को उतना ही चाहिए। सो अगर हम शिक्षा का पालन करें। समाज की प्रजा क्या सही हो जाएगी कि लोग निधन हो सके, वो धन बनाना चाहते हैं। उनके मन में 1 ही विचार है। क्या रोल और शासन में क्या पढ़ते हो? शास्र में पढ़ते हो कि असली सुख क्या है? असली सुख है। हामे, कार्यो का परिणाम अगर आपको असली सुख चाहिए तो क्या है? उपाय, बकसी और आय हम धन के पीछे जाते हैं। क्योंकि धन का सुविधा है। पर जो मलहालिगवालीव्यक्ति है वो क्या सोचता है। ये धन है। तो इसका उपयोग करना चाहिए। किस लिए
है?
कृष्ण भक्ति भी भगवान स्वामी है। वो हमारे शुभ जूती है। वो तो हमें समाज में अगर शांति चाहिए, सुख चाहिए तो क्या करना चाहिए? जो धन है उसको समानता से बाटना चाहिए। ये देखना चाहिए कि सबके पास जो आवश्यकता उसके लिए धन है। बाबा जी कहते थे सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वो देखे की पूरी प्रजा को क्यों आवश्यकता है, वो प्राप्त हो। भवन राम के समय, राम राज्य के समय भवन राम पेज बदल कर जाते थे। यह देखने के लिए कि समाज की प्रजा को कोई दुख नहीं है। किसी को किसी प्रकार का कष्ट नहीं है। ये होना चाहिए ने साल का भाव और धन धन में बाटना चाहिए। समानता के साथ। तो आगे के क्षमा दया की भावना होनी। जो वैश्व है वो उसमें के शमा की भावनाएं। वैश्वा कभी यह नहीं सोचता कि उसने मुझे ऐसे किया। आप देखते हो आज का ने प्रयास किया था, पर किसी न किसी रूप से कृष्ण वाले कृष्ण जिसको भगवान बचाना चाहे, कोई नहीं बचा, माना चाहे कोई नहीं बचा, जो मन चाहे कोई नहीं बुझा। तो पानी भाइयों को सामना करना पड़ा। इस हाई से। वो भी शो केस है। वो भी समझ नहीं पाया है। क्यों पानी भाइयों को कैश भुगतना प? भक्त जो है कैश की स्थिति में भी घबरा जा रही है को कश बुकना पड़ता है और क्या सोचता है। सोचते हैं कि में पूरे का हो तो भक्त जो है। कभी ये ही सोचता मुझे इसे बदला लेना है। यह कार्य है मानव समाज में क्षमता का भाव, क्षमता का भाव है। कहाँ से है कोई अपना गलती से माफ करना। आप पुरुष। तो उसने प्रयास किया था ये पान भाइयों का वध करने के भगवान ने उनकी सुरक्षा तो उस मामले पर चाहते तो कह सकते थे। इतना कह दिया जे हम हम से उन्होने अपने को
बड़ा
बड़ा बड़ा सोचने लगे में अजय सिंह विराजा पूरी हो रही है और भाई विधु उन्हें जगाने के लिए ये उपदेश कि यह सुविधा किससे मिल रही है जो उन्होंने मारने का प्रयास किया था तो भाग्य है हमेशा उसमें क्या क्षमता का भाव रहता है। ये आपने कुछ किया है हमें हिंदी में क्या कहते हैं, में कहते है, रशियन कहते हैं हो तो तुम ये करोगे तो हम ये करोगे करोगे। माना यह भाव न मनजअगरमनमेंभीआ देखो कि ये समदर अभाव हो। तो फिर आप का काफी ज्यादा सुंदर रहेगा हमें, पर इसका ये मतलब नहीं है। कोई कमी है, कोई दोष है, हम सुधारे हैं और हर कोई कमी है तो उसको सुधारना चाह पर हमार में सम भाव होना चाहिए। यह नहीं होना चाहिए। हमें बदला लेना है। सुन बोलिंग, सवाल सुना, कशिया हमें बदला लेंगे। बर्फ में, श्यमदाभाहोरबर्ख में यह नहीं होना चाहिए कि हमें बदला लेना है और इसमें से देश बनाएगा। इस प्रकार उन्होंने उनमें शमता का भाव है। सो जो भक्त है, उसमें समता का भाव होना चाहिए। फिर आगे कहा गया कि मानव समाज में संतान को क्या करना चाहिए? केवल किसके द्वारा, जो आपके पती के द्वारा संधान हो। तो आज के समाज में हम इस समाज में क्या देखते? विषय पर लोग विश्वास करते हैं तो समाज में, समाज में 44 है कि हमें संतान को पैदा करना चाहिए। केवल प्रमाणिक पत्नी के है। और आजकल विदेशों में विवाह है। लिव हुहै, आप पति, पनपती जैसे रह रहे हो, पर शादी नहीं। तो पूरे समाज का ध्यान रखकर। कह रहे हैं कि संतान बच्चे, पैदा कर। ने तो काय उन्हीं से प्रभाव हुआ है। उनके घर से जो देखते हो कि नियमों का पालन हो रहा है और जो हमारे नेता हैं वो दिन भी दिन, हर चीज को लीकेज करते जा रहा है। समाज में ये ऐसे दोष है और जो सरकार है वो सारे विश्व में सो। आगे वो कहते हैं जो जो मन है, मन को क्या होना चाहिए, शुद्ध बनाना जाए। मन को बनाओ, मन के विषय में, आपस में अनेक उद्देश्य, भगवान गीता में क्या कहा? मन को क्या कहना चाहिए? मन के द्वारा, मन को मित्र बनाओ। बंधु ने, मन बंदू का माना जाता है, मन बंदू माना जाता है। जो मन में ध्यान हूँ, मुझे ये खोजना है, क्या है, जीवन का उद्देश है। और मन जब केवल यही क्यों सोता है, भौतिक सुविधाओं का इतनी सुविधा प्राप्त हो गई है। वो मन है, क्या है। ये मन आपका बंधू बनता है। मन ही आपका राम से मिले। क्योंकि अनेक प्रश्नों में 1 प्रश्न यही था कि व्यक्ति को किस प्रकार का चिंतन करना चाहिए? और मैं भगवान के नामों का, भगवान के नामों के विषय में क्या करोगे, क्या चिंतन करोगे, क्या करोगे? भगवान दयालु है, वसा होते हैं उनके दिव्य नामों में, भगवान के नाम में इतनी शक्ति है को ज्ञान से भी उनका उच्चारण करेगा। तो ला में 1 फिल्म में गलत ने फिल्म बनाई है। राम हार फिल्म में गुनिया पर कमजोरी थी। उसने ये दिखाया कि लोग भंग लेते हैं। फिर नशे में आकर। भक्तों ने कहा कि वी शुड, गो, टू, द कोर्ट, वन का नाम कोई भी सुनेगा या उनका प्रभाव है, तो ये अभ्यास है, यह हमारा भक्त है। भग बना। मैंने पूछा आपका परिचय कैसे हुआ है? उसने कहा, बहुत साल पहले 1 फिल्म बनी थी। फिल्म में देखने का वो धूल इतनी अच्छी लग रही थी। बार बार जाता। अमेरिका में जाएंगे तो भगवान के नामों में इतनी शक्ती है और भगवान के जो नाम है वो क्या की मार को दूर करे। कई बार हम धार्मिक जीवन में जुड़ना चाहते हैं। पर क्यूंकि हमारे अनाथ बड़े घेरे हैं तो प्रश्न पूछते है इन अनाथ से हम कैसे बचे? तो क्या हमें क्या शिक्षा देते हैं। बजना किया सो देवजी कह रहे हैं मन को क्या करो। मन को बदला। रामनंद रोय ने कहा भाई या भवन के नामों के और भगवान के मिला अनेक लिया भगवान, उनके गुलाल तो किसी न किसी रूप से हमें प्रयास करना चाहिए। या मन के द्वारा क्या करें वन का चंदन है। आगे कहा गया है लोग में कि हमें है, जीनिक शरीर को बिल्कुल साफ है आप भारत में पानी की कमी है, उन देशों में मारी कमी नहीं है लोग। वो आदत पडी हुई है ये साल नही करना। ऐसे तो कहा गया है सन्यासी को इसमें 3 बार सन्यास सनान करना चाहिए और हमें साफ रखें अपने रात को। पर वह समाज ने क्या देख रहे हो। जैसे कि फ्रांस में कई यूरोप के लिए पानी है तो लोगों को आदत है क्या? 7 साल के हैं कि मन को वॉइस में रखना, मन में पवित्र भाव रखना, विद भाव रखोगे, सबका पवित्र हो या मन में कपट रखोगे। आपका एक्शन भी उसी प्रकार का होगा। इसे यहां कहा जा रहा है कि यूरिन और जो श्री है उसे क्या करना चाहिए को साफ करना चाहिए। आपको श्री को बिल्कुल साफ रखना चाहिए। रोड करते है तो आगे है। आगे वो कहते हैं किसी के प्रति द्वेश मत रखो, किसी के प्रति, तो हम मलिक समाज में द्वेश रखते हैं। हम क्या सोचते हैं? हमें सुख मिले, बाकी, सबको दुख मिले, हम केवल सोचते हैं। ये सच है के है। वी आर सेल्फ तो कहते हैं कि सबके प्रति मित्तर का भाव रखो। तो ये 1 ऐसा आदेश तो नहीं है। सबके प्रति मित्रता का भाव रखो, किसी के प्रति द्वेष मत रखो, द्वेश रखोगे, सोचोगे दूसरों की कमजोरी के वंश में क्या पीना होगा? हमारे हृदय में क्या भाव लाएगा? मनभेद का भाव। यहां कहा गया है सब के प्रति क्या करो, कि किसी के प्रति वे, एशिया, एशिया, वेश, ये सब क्या है। या रहेगी जब तक भगवान भगवान ने मोगा को कहा था, जब तक तुम्हारे हृदय में इशा रहेगी, जब तक भगवान निवास करेंगे जो हमारा भाव होना चाहिए कि हम क्या किसी के प्रति मन देने लगे। सर के परिचय से जरा भाग रहे। आटमिलसेजराभाव रखेंगे तो ध्यान गुरु भी हो। कासगूरहैशिवभवज में पढ ते भगवान को शिक्षा दे। वो बड़े प्रसन्न थे। फ भगवान ने पूछी से कहा मैं तुम सब भाइयों से बड़ा प्रसन्न हूँ। क्यों तुम सब भाइयों में 1 ही भाव है? या इसलिए वासबिाओकोपराकरूंगा क्या तो भक्त उसका क्या भाव सा है सब के प्रति के प्रति। वे कहते थे भी लाइक बी। हमें मालूम कि जैसे होना चाहिए। जैसे हमें 1 दूसरे के संबंध में क्या करना चाहिए में 1 दूसरे के गुणों को देखना चाहिए। यह नहीं कि आपके गुणों को देखे। आज से क्या देखते हैं, हम देखते हैं और हमें 1 दूसरे के गुण, बोले, मारा, क्या भावना, सबके प्रति, सबके प्रति। भक्तों में यह भावना रहती है। इसलिए वैश्णव को खा गया है। पर आज दुख दुख है। ि जब वह स्वर देखता है कि कोई यह मालिक जीवन बिताना चाहता, तो वो क्या क्या भावना आती है, क्या भावना आती है दया की भावना। अब मैं यह सिधेश्वर भगवान के भाग से है। क्या है, बड़े अत्यंत दयालु है। और इसलिए भर क्या करते हैं, प्रचार करते हैं, प्रचार इसलिए किया जाता है, हम प्रचार करते हैं, सबको प्रचार करते हैं। कोई भेदभाव नहीं।
यह
धन को प्रचार, सब को प्रचार करते हैं। और प्रचार की भावना है की भावना है। यह स्थापित करती है कि हम वैश सबके कष्टों को बिठाना चाहता। वो ये जानता है कि अगर हमने बिठाना है तो क्या है उपाय, यह दयालु उपाय है, जो भक्षकों किसी के प्रति मनभेद नहीं रखना चाहे। और आगे ये सारा जीवन टू बी। सिंपल हमें सारा जीवन मिल जाना, हमारा ध्यान बाद मिलकर क्या है? सदा सिम्पल जिन हाई थे। सारा जीवन, सारे जीवन का क्या है, सारा जीवन का हल है। सिम्पल लाइफ। यह आवश्यक नहीं है कि आपको 6 साल मोर है, कई बार आप देखते हो, खाना में 4 सदस्य हैं, 4 मोड। तो ये कि हम
रहे।
सारा जीवन, सारे जीवन गलत है। जो आवश्यकता है, उन्हें प्राप्त कर। और ऊंचा विचार, ऊंचा विचार का क्या है। पुछा विचार का अर्थ है कि हां, ये सोच रहे हो, जीवन का लक्ष्य क्या है? और जैसे चेतन महा भाबू ने सनातन गोस्वामी से कहा, भक्ति के लिए जो अनुकूल है, उसे स्वीकार करो। जो प्रतिकुल है, उसे तो ये होना चाहा। मह भाव, जो अनुकूल है। रे, अरे, अरे, राधे,
अरे, किसका, रे,
anrede
शो तो हम लोग
very clear
las्tma गसेजघननेजा बनेगा, हेयाहेहँहयाेया बहुल लंबा ब्रेक हो गया, क्या हो गया है, kisna, इस नोट लाउड, हरे कृष्णा सो हम चर्चा कर रहे थे, फिल्म देव, सारा जीवन विचार, सारा जीवन, ऊंचा विचार, सारा जीवन पाप कहते थे, सिम्बल सिम्मल समझा दिया था। सो थिंक का क्या अर्थ है? ऊंचे विचार, ऊंचे विचार का अर्थ है कि आप सदा यह सोच रहे हो कि जो गाय अनुकूल हैं, वो ही हम करेंगे, जो प्रतिकूल है, भक्ति के ल, हम त्याग। सो। ऊंचा विचार होना, भौदयवालियों का क्या नियम है। ऊंचा जीवन सारा
रहेंगे।
गाना जैसे जानते हो। आज कल आज कल कहते हैं, प्लास्टिक मनी, वो किसको कहते हैं? तो आप 1 काम से उधार लेते हो, दूसरे से चुकाते हो, जीसे उधार है तो अभी भी मोटरें दिखे हो। सड़कों में मोटर है, सब फाइनेंस ली। तो सारा जीवन, ऊंचा जीवन, सारा विचार ऐसे व्यक्ति हैं, वो व्यस्त हैं। और सारा विचार। उनसे पूछो जीवन का क्या च। वो आपको ठीक होता तो ऊंचा विचार होना चाहे। सारा जीवन और ऊंचा विचार। तो ये कहते हैं सारा जीवन बिताओगे, सारा जीवन बिताओगे, सारा जीवन बिताने का प्रयास करोगे। अभी आप क्या आवश्यकता है, वो भी कम हो जाएगी। हम समाज में रहते हैं, अब यह दिखाने की कोशिश करते हैं। हम सब की ज्यादा सफल है। और सक्सेसफुल हो सारा जीवन मिर्चा और सारा जीवन मिर्चआओगेसोआगे। वो कहते हैं जो आपके सेवक हैं, उनकी देखभाल करो मतलब कि जो प्रजा है उनकी देखभाल करना। तो ये राजा और राजा कैसे बनता है? क्या कि समाज की प्रजा की देखभाल। तो अगर नेता समाज की देखभाल करेगा। क्या होगा, समाज में सुख प्राप्त होगा। तो आजकल हम देखते हैं कि नाम के लिए वो ऐसा व्यवहार करते कि वो हमारी चिंता है में कोई किसी प्रभार नहीं करे। तो यहां विफदरजीकरें हमें जो हमारे है की देखभाल करने जा। सो जी ने संक्षेप में ये नो पॉइंट्स की चर्चा की है। और भगवान ने देश से क्या कहा था, वहीं देश से कहा था तुम पूछो इनसे क्या होना चाहिए? है सो? उसके उत्तर में तो हम भक्तों को कम से कम प्रयास करना चाहिए। क्या इनका पालन करे लिखा है? झूठ मत बोल, सारा जीवन मिला, तुमारा प्रयास होना चाहिए, सारा जीवन मिला ले और सारा जीवन बिताओगे। तो फिर जाने जीवन के लिए भी समय निकाल पाओगे। आज आप देखते होगे सुबह से रात तक संघर्ष, अमेरिका जैसे देशों में भी लोगों को 234 नौकरी करनी पड़ती है। अपना खर्चा निकालने के लिए। ये है वो माल। क्योंकि हम चाहते हैं और और और जो आप देख रहे हो। समाज में पुरुष आजकल आप क्या देख रहे हो? गर्मी बढ़ रही है, घटी है, बढ रही है, गर्मी है, बोरी है। ऐसा आपको अनुभव हो रहा है। पिछले साल से अधिक गर्मी में भी लोग कह रहे हैं गर्मी। हमने कभी देखा है तो पोलूशन वगैरह का कारण क्या है? बोले बोले की छाया के कारण जाते हैं। और और और क्या परिणाम होता है? पोलूशन। तो जब आप प्रकृति के विरोध में जाते हो, समाज के द्वारा क्या होता है? प्रकृति क्या प्रक्रिया करती है, को कैश देती है, प्रक्रिया को सुझा देती है। जैसे पिछले हफ्ते। कुछ दिन पहले अमेरिका कैनाडा में बहुत हो हो रहा रहा है, पूरा अमेरिका का 1 हिस्सा धुहे से भर गया था। अभी जो प्लेन वाले सब कैंसर हो गया? जब आप प्रकृति के नियमों का विरोध कर तो क्या परिणाम होता है? प्रकृति तो जाती। तो भगवान भक्तों की महिमा को बढ़ाना चाहते हैं। और इसलिए भगवान ने तुम पूछो क्या है? और बेर कौन है? भाग महाजन से है। और हमें ये जीविज्ञान प्राप्त करना चाहिए किससे संतों के द्वारा और हमें ये जो पॉइंट्स जो हैं, इनका प्रचार करना चाहिए। इसका ये पॉइंट का पालन हो, समाज में क्या होगा? असली शो प्राप्त हो सो। आज समाज में लोग दुखी हैं क्योंकि प्रजा जो है, जो नेता हैं, वो किसी प्रकार का ज्ञान नहीं दे। और द्यारमेज्ञान के बिना हमारे अधूरा है। सो शु टेक, दिस पोइंट सीरियसली प्रैक्टिस करना चाहे, ना चाहे, थोड़ा छोड़, आप के नो प्वॉइंट्स, अच्छे लगेंगे। सबसे पहले हम सब प्रदेश से
वादन
हरी हारे जा। रे ने इसका कोई प्रश्न है?
हरिशरण
मेस में यही प्रश्न है। आपने बताया कि जो एशियाली है उसमें भगवानी आ सकते है। लेकिन हम देखते है कि इंद्र एशियाली। उन्होंने अश्विनी कुमार से, एशिया के जो ग्रह से और भरवां जरने पेश की। हम देखते है कि घरबार हमेशा कृपालु रहते हैं, सहायता रहते है। तो ऐसे में क्यों न देखे है,
गुल भी है। और a a a a e a e a e yeah yes for you coming thankyou as on the first point wise fegiesaanyousar a of maharaj and how
to in
a use, yet, we see a great to god, we see a inshan not read all was at a point up rsetis not a duitoinasensoti manate things take please co wi the lol for bunder had he was divoti there were the plan on the lord that is file and i would pro that the evil like i never be toria so i think that i in ro who create a lot insan also and as a sa what did so for young yeh
thank you for second
question is how to do for how to how to de as you advance fically channing hi krishna and pain to help you or come ho how can be or com o wshmegeal for body? एडवांस भाई सालना भक्ती सालना भरती करोगे तो आप देखोगे इसे है अनेक
आप
उन पर विजय जाते हो न yeah
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महाराज मदद प्रश्न था कि जैसे अभी अपने 9 प्वाइंट्स के बारे में बताया, उसमें से 1 था की हाई की। आज कल हम सोसाइटी में देख रहे है की इतना हो रहा है, बहुत बढ़ रहे है, आगे बढ़ रहे हैं, बड़ी बड़ी चीजें कर रहे हैं, तो उस बीच में रहते हुए हम अपने उस सोसाइटी में रहते हुए अपनी हाईकिंग को कैसे मिले? कभी कभी जब हम ऐसा करने की कोशिश करते है तो डिोरनाइजकरतेहै चाहिए, खुद भी उसको कैसे सुमिला मतलब यह है
कि हम का सारा जीवन का, जैसे कि should be on every six बड़े फैशन हम नए नए डिजाइन ला दे, नए डिजाइन कितना कइयों में ये ये होता है कि हम लेंगे, हमें लेटेस्ट फैशन चाहिए सो सारा जीवन को।
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आपके आशीर्वाद से आज हमारे सारे बाल दिया।
सुनाई क्या
महाराज जी, आपका बहुत बहुत धन्यवाद। आपके आशीर्वाद से हमारे सभी साजो में सारे लोग का पान कर र किया जा रहा है। जिसके कारण आज हमारे मंदिर में कई भी होती बाल मंदिर में हम लोगों को प्रचार की कमी है। बस अगर वो 1 बहुत जल्दी पूरे संसार में न पालन करने आए है हो जाएंगे।
यह जो प्रचार देख रहे हो ये है बाबाजी का परिणाम के दिल्ली शहर में और कई जगह प्रभाजी है मैं हूँ भरे और बुक डिस्ट्रिब्यूशन हो रहा है उसका ये पहिना उदहारण के लिए मान लो आप 10 हजार गीत में बाट 2 महीने में कई बार भक्तों की उम्मीद रहती है। सीधा भग भले और ये चाय जितना आप लोग करोगे उसने उसका प्रभाव पड़ेगा और नतीजे का ये मतलब नही है कि एकदम नतीजाएगाऔादाजी बाहर जाते हैं तो
लोग सा कुछ गलत बोलते हैं तो गुसा तो आता है लेकिन इस बात को याद है मारा गुस्सा नहीं
अगर
वो भगवान उनके भक्तों की निंदा कर रहे हैं। आप गुस्सा हो सकते हमें प्रयास करना चाहिए। क्रोध को वश बनाने के लिए मुझे लोग भर भी पूछते रहते हैं, क्रोध को कैसे कम किया जा? all one s one i do
आपके का सौभागय आपने जो आज इलायची होता है कि मन को शोरी बना सकते हैं, बना सकते हैं। यह हमारे ऊपर और मन बहुत चंचल है। इसको इस प्रकार से
करे मन आपको
ा
मन में जो हमें शैतान मन को कैसे वर्क मिला है। आप ही नाम करो। मन को इगनोर कर। राबजी कैसे दे। इंग्लिश में इगनोरे चंचल, मन को इगनोर करोगे। छोड़ बचा जाता। मा बाप के साथ दुकान में हर चीज खरीदना चाहता है। यह चाहिए, यह चाहिए मां बाप वैसे से मन जो है, उसके आदेश का पालन मत करो। मन के ऊपर क्या है, बुद्धी बुद्धी का उपयोग करो। मन कैसा है उठा ये वस्तु आपकी बुद्धि कहती है? नहीं कैमरा तो सारालीनजीवन में हम मोदी का उपयोग करते हैं। उसी प्रकार जो प्रतिकुल कार्य है, उसको क्या गा। okay one day de लोग पीछे सुनाएंगे राजा आई हैव, पूछे, हर विश
जैसा आपने सिंपल के बारे में भी पूछा। और कई बार आप बताते हैं कोर्ट 1 वर्ड सरफेस स्टेटस सिंबल स हो तो उसको हम देखते हैं। डॉक्टर के समाज में भी हम देखते हैं। तो उस चीज को सिम्पल लिंग में कैसा हम अपने लाइफ में डाले। कई बार डॉक्टों के पास लोग यूज करते हैं बड़े बड़े मोबाइल यूज करते हैं, बड़े बड़े दिया करते हैं।
आप उसे मोबाइल का है, मैं भी है। हम छाफरुसीकरकेशावर के 1 कर, ये अधार्मिक जीवन के लिए डेटीमेंटलहैअधयारमिक, जीवन में आपको मोबाइल फोन चाहिए। क्यों चाहिए आपके लिए फोन नंबर बिठाना है तो वही टेलीफोन लो। इसमें ये योग्यता हो। आप जितने ज्यादा, जितने, ज्यादा वारा सुविधा हो, उतने ज्यादा में हो। उसको प्रचार के लिए जुकी गाड़ी मिली प्रचार के लिए 1 मॉडल, 1 मॉडल ज्यादा छा और स जी, अगर आप ऊँचे आइडिया रखोगे तो मन में यही सोचते रहोगे कैसे हैं सो हमारा सिद्धांत होना चाहिए। और अगर कोई कर रहा है तो आप नकल मत करो। टू रोंग, जोन मेकर लाइफ, वो भर कैसे कर रहा है। मगर दूसरा व्यक्ति जहर पी रहा है, आज भी जहर पीते है। जवाब धार्मिक क्षेत्र में गंभीरता से पालन नहीं करते। अब जहर पी रहे हो तो खास है कि जब भक्तों के संग में रहोगे तो आपको आप जल्दी पहचान, सकोगे, जैसा कि, आयाम, बीम,
महाराज, प्लीज, सक, मे, सेंसेस और राज वन प्वाइंट पोस्ट। मन को शुल्क बनाना चाहिए। और भगवान के नाम से हम कंपीशुबनासकते है हाराज, हमारे पास है न, इतना ज्यादा है तुम कैसे?
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