A Free Medicine for Omicron.. Worked on Spanish flue | SB 4.29.36 | Dec 2021 | Gopal Krishna Goswami

The recording is a devotional discourse primarily delivered by a speaker (identified as Gopal Krishna Goswami) with occasional interjections from other participants. The speaker emphasizes the necessity of acquiring true spiritual knowledge (ātma‑jnāna) through bhakti‑yoga—devotional service and the chanting of the divine name, especially “Hari Ram.” He likens the repetitive chanting of the holy name to a vaccine, claiming it can protect the mind and soul from the “Spanish flu” of ignorance and, by extension, modern ailments such as the Omicron variant. The talk critiques contemporary society for its neglect of spiritual teachings, the prevalence of superficial preaching, and the loss of reverence for scriptures. It stresses that liberation (moksha) is achieved only when the mind is disciplined, the heart devoted, and the soul aligned with the divine, and that this requires sincere practice, meditation, and guidance from a guru. Various anecdotes illustrate the power of name‑chanting, the consequences of neglecting devotion, and the role of teachers in transmitting knowledge to children. The speaker also warns against misusing devotional practices, urges consistent effort, and calls listeners to adopt a disciplined, community‑oriented spiritual life.
Chapters
जो भागयशाली बेटी है वो भक्तों के प्रति सब में आकर इसका लाभ उठाता है। और ये है वो भला, वह क्या करे है। बहुत सी जम के बाद भाग जारी बची है। जो मुझे तो असली कार्य यह है की हम उस आध्यात्मिक ज्ञान को प्राप्त करे और अध्यात्मिक ज्ञान को प्राप्त करने का क्या। इसका अर्थ है कि आप जीवन का लक्ष्य है, उसको प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं, प्रयास कर रहे हैं। शास्त्रों के धार शास्त्र में है। भगवान मा साक्षा भागवतप जमी महत्वपूर्ण पर दे रहे हैं। वो कह रहे हैं कि असली प्रयास ज्ञानता से निकला तो ज्ञाता से
आप
भगवान के जिसका अर्थ है या भगवान की शिक्षा, भगवान से काम प्राप्त करते जीवातमा का असली। अफसोस की बात है कि आज के समाज में बहुत कम स्थान है। जहा आपको उपदेश है और बड़ी बड़ी मामी जान है वह दिया जाता। व आत्मा का असली कार्य यह है कि वो अध्यात्मिक ज्ञान को प्राप्त कर रहे है। जिसके पालन से, बंधन से मुक्त है का अर्थ क्या है? ये स्वीकार करना हमारे में क्या है। आत्मा ठाकुर कहते हैं कि जो भगवत गीता का दूसरा देय है, मोस्ट इmपॉर्टnटमें क्या ज्ञान मिलता है। आत्मा में क्या जाए वाक के है, उसका जन्म होता है आत्मा सो अज्ञानता में हम क्या सोचते हैं, हम से है श्री हमारा असली के साथ सब कुछ, जिसके बाद हार विज्ञान हो, वो जानता है कि क्या ये जो रे हमारा केवल आत्मा को ठाकरा है। जैसे जो वर्सा पहनते है वो आपके शरीर को और जो ज्ञान लगता है भी स्वीकार करता है। परम भगवान जो हैं और वो है जिल के असली बो। तो ये है जीवन का प्रधान, मलाकी शिक्षा आप साधित करने पड़ते है। प्रधान ने क्या कहा? इसी प्रकार का संदेश ने आज लोग यह नहीं जानते कि असी सुख कैसे प्राप्त हो सकता है। तो हमारा असी स्वार्थ क्या है की हम 1 ज्ञान का मूल करे जिसके हम समझ सके जीवन का क्या लाइफ होना चाहिए और अगर हम अज्ञानता में कार्य करे तो इसका क्या परिणाम होगा। आप भी जन्म के बंधन में जाओगे। आज भले प्राप्त हुआ है, कल किसी और कल किसी और रूप में प्राप्त कर सक चुरासी साwuनiiruनीbकी हम सोचते है। eveything led with is boni सबको समाप्त हो जायेगा। ये है हरियाणा। तो बिहार विज्ञान को हमें रेभूल करना चाहिए। कब से हमारा 5 साल की आयु प्राप्त करने से ही करने पर हमें ध्यान में ज्ञान अनुकुल करना। अब देखते है की कैसे आज के वादन में तो माँ बाप क्या कर रहे बच्चों को ढाई साल की उम्र से or computer sco की बौधिक क्षेत्र में हम 2 ढाई साल की
है।
पर ध्यान में क्षेत्र में हम इसकी आवश्यकता समझते हैं, हम सोचते हैं और ध्यान खुद ही प्राप्त होता है। तो जब तक व्यक्ति ध्यान मे जान को अनुकूल नहीं करे उसे यह नहीं पता कैसे जन्म बंधन से स्वार्थ है।
वो
ध्यान ज्ञान अनुकूल करे जिसके द्वारा जन्म के बंधन से प्री मिले थे, उनके गुणमनाजकोपहलीबार सो गुणबुनाज ने कहा था तुम जो देश को, पहले हमें मारे, देश को ही समझाया की ऐसी दादा क्या है? jan और ज्ञान को उम्र के साथ चाहे बड़े हो हम ईवनिंग क्लास में जा का कोर्स, हम साथ में ध्यान, ज्ञान को भी आगे नारी उपाय क्या है पर भगवान के शरण होना उनके प्रतिनिधि के द्वारा सुनिए पढ़ते हो i
i
ो
a a i हमारा नहीं है, सो मन रहे हैं से, स्वार्थ है उस ज्ञान को नुकुर करना, इसके द्वारा बंधन से कैसे प्राप्त होता है? वहाँ के प्रतिनिध के द्वारा। जब तक कोई व्यक्ति भक्ति योग नहीं करे, वो विराग या विराग बनाई। तो हमारा सिद्धांत क्या है भक्ति योग में जोड़ने के द्वारा। you will डवluपमूलटासेान भक्ति के प्रति आकर्षित होगा और माया के प्रति माया को, माया को आप जी त्याग त्याग सकते हो या आपके बाद हो और आप इन का उपयोग कर हो। ध्यारमिइसलिएभवन पिला कहते है की वो ही आकर्शन जो हम बोलीवाली के प्रति रखते हैं, हमें किसके ध्यानमिबालीवाली स और उससे सो। यहाँ कहा जा रहा है जब तक कोई व्यक्ति भक्तियोग से नहीं जुड़े, भक्तियोग में जुड़ने से क्या लाभ होता है? क्या कारण है भक्तियोग आप बार बार पर के द्वारा अपने मन बुद्धि नियो का भगवान की सेवा में और मन बुनियो उपयोग नहीं में हम का से बच नहीं पाएंगे। तो भक्तियों के मान में आप क्या करते हो? इन दीयों का उपयोग करते हो? और जब हम इन दियों का दरुपयोग करते हैं, उसके द्वारा अध्यामिक परिवर्तन नहीं कर सकते तो जामुनी करे है पुरुष। जब कोई व्यक्ति भी सेवा में नहीं जुड़े, आप मुख नहीं होते। जब आप भक्तों की समझ में आते हो तो आपको भक्तियों की महिमा का ज्ञान मिलता है। और अगर हम भक्तियों के नियमों का पालन करे। ऐसी है वासदेव भगवती ऑफिसर की भक्ति करोगे, उससे उत्पन होगा। तो भक्ति योग है। सबसे महत्वपूर्ण कार्य और इसे स्वीकार कर सकते हैं। तो है ध्यान में ज्ञान प्राप्त करो। कैसे हमारे प्रति जो पानी गुरु है उसके मन में 1 भाव रहता है कि समाज का, कल्याण के लिए ज्ञान का प्रचार करना चाहिए? और विभक्ति का ज्ञान शुरू कैसे होता है? पर माता के घर में थे शिक्षा प्रदान की मांग को माता और प्रदान शुरू से ही उनके बाद ध्यान नहीं जानता। उसके पिता ये समझ ना पाये कौन मेरे बेटे को और उनके अध्यापकों को लगता है कि साधु पेश है बेटे को। हमें कुछ कुछ समझ नहीं आता। कौन इसे ज्ञान दे रहा है? दोष मत 22 बड़ी हम दिमाग को तुमने बड़ा प्रयास किया। पिता विधा पूछा आज बताओ पर क्या ज्ञान है? पर ने क्या क्या ज्ञान दिया? दिया ज्ञान सबसे पहले मूल्य ने लिया था कैसे प्रकार? तो भक्तियों आरम्भ होता है, किसके साथ के दम का पालन जब किया जाए भक्तों के सम्बन्ध में। तो फिर आप इन दिनों को शूर बना सकते हो भक्ति गाने में जोड़ to get
a
a name ruprisaa नाम की दवा तो दवा भक्ति में आगे बढ़ भी कैसे होता है की हम नाम का 4 करेंगे तो भक्ति करेंगे हरिराम का उच्चारण करते या फिर क्या परिणाम होता है? क्यों अनाथ है? लोक में अना का वर्णन किया गया। क्यों है वो दूर है बोधिक गर्शन और कई बार पूछते हैं कौन साक्षी बनता है हमने क्या किया आमा? who is a pro agar ap, legal sistam prolate, so co co? देवता हैं वो जी की साखी है और देवता है क्या गाया कर रहा है? तो आध्यात्मिक ज्ञान, आध्यात्मिक ज्ञान भक्ति का ज्ञान है। बड़ा महत्व है विश्व वाणी के द्वारा भगवान के नाम, भगवान के नामो के विषय में क्या पढ़ते हो? जितना लो उतना ही कम है। किसी का करने के पश्चात पढते ी गंदा करते हैं उनको 2 दिन की छुट्टी पर भी मन में कभी भाव नहीं भाई। राम से छोटी छोटी है, कभी छोटी है मन में कभी यह नहीं रा हमें हरी नाम के क्या कारण है? कारण यह है कि हरी नाम के उचारण से संतोष कर। 1 बार अमेरिका में कह रहे थे, जब मुसलमान लोग भारत में आये, उन्होंने कमर के बल पर लोगों के धर्म को बदला बनवाया और जो करिन हैं वो क्या करते हैं उन्हे कैसे लोगों के धर्म को ओवर बैन। we now many is the active, so crises, all the tractive tractive है, नाम है इसका उजान सब कर सकते हैं कुछ कर रही है और 4 करके क्या लाभ होता है के काम को लोग मुहम्मद स। अ ने पूछा क्या कारण है कि जानते भी हम लोग काम करते है, ये बोते आकर्ष है ये काम मन में, बुद्धि में ये है उनका गूगल वाली को ढूंढ रहे हो। उत्तर भारत में आ गया है वो तो भारत में कहा। तो भगवान ने कहा अर्जुन को काम के कारण हम विचलित हो जाते है। भगवान ने कहा ये जो शत्रु है जीवन का, वो का निवास करता है, का निवास करता है। मन में बुद्ध भगवान क्या कहते है? the sort ये ज्ञान की तलवार से ज्ञानता का जो भाव है, जो भगवान गीता में हमें ये बताया कौन है आपका शत्रु, फिर ये बताया शत्रु कहाँ रहता है? भगवान ने ये भी बताया इसका वध कैसे हो? ज्ञान की जब हम करते हैं तो इसका ये जॉब करना और सुनना ये शासन को सुनना बा नामों का, उच्चारन को भी पढ़ना और शासन को पड़ोगे सुनोगे तो क्या लाभ होगा और ज्ञान मै ज्ञांत वहाँ जन्म हुआ था क्या और सालों के सहयोग से दूर हो। तो भगवान कहते हैं ये जो देहादिक जीवन का शत्रु है उसका क्या करे स्ट्रॉ आध्यात्मिक ज्ञान है, बहुत है। तो इस लोक में भगवान ने जब तक आप भक्ति योग में नहीं जुड़ोगे, हम अपने आप को बोले जुदा
नहीं
हो सकेगा न मुक्त बना। और 1 ही उपाय है और क्या है भक्तियोग वे भक्ति कैसे होता है? तो विषय में अब क्या करते हो? भगवान अपने नामों में पूरी शक्ती दागी है। क्या कारण है की अब भी राम का उच्चारन करते हो? रोज पूरी शक्ति, दागी, ह और इन नामों का चालन करने का परिणाम होता है नाम के द्वारा, सारे विश्व में लोगों को यह अनुभव है कि लगभग हर हर बैकग्राउंड का व्यक्ति हरी नाम को सीखा जा सकता है। तो ये हरी नाम का उजाला हम भक्तों के लिए सबसे बडा प्रॉपर जी ने कुछ लेक्चर्स दिए थे ये वायरस के ऊपर, प्रापाजी ने कहा था 1 spenis सो प्रभाजी, उस बहुत छोटे थे, वो स्पेनिश fरूजलाथाकसेकागर में सबसे ज्यादा आपको लगा। तुम्हार उन दिन में 1 स्वामी जी थे जिन्होंने क्या प्रजा को शिक्षा दी। का हर नाम को, इसके द्वारा ये वा बन जाएगा हरि फ्लू rape kiya hai ram का उtcarnaspanisflo, these is real story। तो किया था soul प्लीस हरीराम हई नाम का प्रचार जालन करोगे, हई नाम का प्रचार करोगे। तो दिस विल बी दी सबसे अच्छी वेसिनaशन रील वेsिनेशon caning names of the lord। असली वेस्सिनेशन क्या है सो हमें लाभ उड़ाना तो हर नाम के विषय में जहाँ भी छू क्या बन जाता है सो। तो हरी राम जान से कोई ले या ज्ञान से आपको पूरा लाभ मिलेगा में पढते। 3 स्टेज है पहले जॉब करे और अपराध में कर रहे दूसरा हम जॉब कर रहे हैं, प्रयास कर रहे हैं। अपराधों को बचाने और शुद्ध नामा और फाइनल से है। पवित्र भाव से जान हो तो हरी नाम का उच्चारण शुरू कैसे होता है? शुरू होता है चालन से और अपराध भी होते हैं साथ पर आपका परिचय हवा की महिमा से जो वाहन का उचारण करते हो तो उसका ऐसा असर बढ़ता है कि जैसे कि जब आप 4 कहते हो के chand re कis्णaफॉममेदसाम अपराध का वर्णन करते रीना में जाते हो। और 10 परा हमारे 1 व्यक्ति जो भोज शराब की देते है, ने कॉल के साथ जुड़े नाम शुरू किया। और ये जो शराब की आदत थी। तो शुरू में आप केवल हई नाम देते हो। 10 दाम प्रावध विषय में चर्चा नहीं करता। जैसे भक्त आगे बढ़ते हैं, वो खुली पूछते हैं, कोई नियमों का पालन नहीं करता। इसमें से प्रोपर पहला केर खोला न्यूयॉर्क में और भक्तों को गाछे तो उन्होंने 10 में कुछ नहीं पता। तो भक्तों ने खुद ही पूछा। वो 12 हफ्ते के बाद से तो ये ही राम का लाभ ज्ञान से या ज्ञान से? जो भी हरी राम रहेगा उसका क्या हरदा को ना मिलने जाते की खुली जगनपुर साथ सना। हा ये बताओ, ये जो ब्लेचर है या वजन हैं, इनका उधार कैसे होगा? चिंतन चिंता मत करो, उधार क्यों हा राम। हा राम बाली के वो अपराध से उच्चारण करेंगे तो उसके द्वारा क्या होगा? ये जो बहुत तो सबसे आवाज और अपने नाम का उचारन शुरू कर दिया। फिर जैसे ज्ञान प्राप्त होता है, दसदामापरालूंगा प्रयास करते हो प्राब्लम से बचने के लिए और जाप करते, जाओ करते जाओ तो शुद्ध नाम का भाव भी आएगा। तो भारतीय शुरू होता है। तो यहाँ के लोक में की भक्तियों के द्वारा बौद्धिक जगत के त्याग। कई बार लोग कहते हैं इस कैसे छोड़ा जाए। हम सोचते हैं, हम की दास है। और जैसे हमारे ही मन के हम पर भर्ती में इतनी शक्ति है कि जो बौद्धिक कितना भी हो उससे जुड़ा हो सर। कई बार भारतीय लोग चाय छोड़ना पुल है, बा लोग बाकी नहीं पालन कर लेंगे, चाय चाय दे सकते है। पर भक्तियों के माध्यम से आप भी तान को जुड़ा हुआ। जैसे की भक्तियों में जुड़ने से पहले भक्तों की कई बीमार और भरतियों के पालन से है। कई बार भारतीय लोग जब विदेश में हमारे मन मे जाते है वो चाय हो तो कैसे या सकते हैं बल के पर तो भारतीयों के माध्यम से, भर्तियों के माध्यम से लोतो। विश्व कम होगा। तो अगर फेल गया है हमने इस किताब में। पर सोना कहते हैं मन को वइसे करना सबसे महत्वपूर्ण है और मन को वश में लाओगे फिर दूसरे इंडियन को वश में ला सकोगे मन है मन
को
तो वश में ला सकोगे। इसलिए आप पढते हो को इस विषय का मगर गीत मन मन भाव मन के द्वारा मेरा चिंतन करो, मेरा भक्त बन, मेरी उपासना करोगे तो क्या प्राप्त होगा? बिना शक के मन को वश में कैसे करे? कि भारत की यात्रा कर रहे थे और यात्रा शुरू करने से पहले सर बरचा मायावती ने आखिर किसके प्रति भर्ती होगी बने। मaयावलीबुदसबको हरा दिया। 1 बुद्सोंकीसाथसवा थी, fिलoसीकोडfीकरदा तो थे ने बड़ा क्रोध आया हमें इसका बदला लेना जा गए खाने को लेकर। 1 में महा भाव को देने लगे। ये महा प्रसाद है। तो जैसे महा प्रसार की प्लेट पर के ऊपर से 1 भाग गई
खालिया
प्लेट को, गिराया को गुरुजी के सिर और लगी जो भक्त थे, उन्होंने क्या कहा स्वीकार किया कि हमारी गलती हुई, हमारे गुरुजी को बचा लो और गुरूजी कैसे बचे और गुरूजी हो सारे बुद्ध क्या बन गए सबको कि हाई राम सी में थे, वो नासी में आये। 2 हम सह नहीं सकते आपकी इतनी आलोचना होती है या हम चाहते हैं कि आप चलिए आप। उनकी बात विद्वान संस्कृत के छोटी आयु में ही परबने। तो प्रमुख मान गए उनके भक्त की सन्यासी की सभा जरूरी महा प्रभु जब ऊपर आये जो ये सन्यासी थे, सब ऊँचे मंच पर थे। वहाँ प्रभु का
प्रभु
की धोती पैरों को मंदिर में जाने से पहले, वहाँ प्रभु में बैठे or उनके चेहरे से हजारो का का सियासी से ऊँचे मंच पे बैठे थे नासी। तो प्रकाश उन्हें देखा की माँ बाबू बैठे हैं, जहाँ के लोग पाउंड होते है। आप हमारा हमारे साथ बैठे। तो माँ बाबू के हाथ को पकड़कर ले गये। मंच में पूछा अभी इतने बड़े संत के विधवान हो, आप सन्यास भी हमारी परंपरा में लिया है तो आप हमारे साथ बैठकर विधान सूत्र का करेया। वहाँ बहू ने कहा मेरे गुरु ने देखा हुआ, माँ बहू ने कहा गुरु का देश। उन्होंने कहा की तुम्हारे ज्यादा बुद्धि नहीं है, तुम केवल नाम का उचारण के योग्य हो। तो ये मायावती सन्यासी इतने प्रभावित हो गये थे महाप्रभु के प्रचार से 10 हजार मायावती 1 हो। और फिर फिर उन्होंने 1 बड़ा हाई नाम किया में। तो उसे देर बाद हमने हर प्रकार के व्यक्ति को प्रभावित किया उसके प्रति शव के है, जो उपाय उपाय के लिए तो दारजबुनीकहरहे हैं की भक्ति योग के माध्यम से, भक्तियोग के विजन के पालन से आप थोड़ा सा बोले। और ये सारे विश्व में अनुभव है कि हरीराम के माध्यम से जिनके पास जो जुड़े थे, गंदी आदतों में, जो बचपन से, शराब पर राम के उचारण से क्या बन गये है, शुल्क ब्राह्मण ब्राहमण है, उसमें गुण भी होने जा। यह नही हुआ है। तो हम ब्राह्मण हैं और तुम जा बंद ब्राहमण गुणों के। ये स्थापित किया समाज में। ब्राहमण बंद, कैसे गुणों के आधार पर तो आज के इस लोक में बनी बहुत महत्वपूर्ण प्रदेश दे रहे हैं। अगर हम बस मार्ग में सफलता चाहते हैं। हमें क्या करना चाहिए मेरे नाम में? जी विषय में जितना दोगे कैसे राधा के थे। क्या है भाई का? जब तक आप नहीं करोगे, बोली नहीं टूटेगा। भर्तियों के द्वारा ही बोली सबका अनुभव होगा। क्या बच्ची सा रोज। तो ध्यान व शक्ति के सहयोग से आप बया का आयुष तोड़ तो साथ में हर विषय का ज्ञान है। हमें इसका लाभ उठाना चाहिए। और ये स्लो बड़ा महत्वपूर्ण है। और पापा जी साल भर में कहते हैं अनाथ अनाथ धात को कैसे न कर सकते हो? कैसे वा, अधूरी, श्रद्धा तथा साल। सबसे पहले आपके हृदय में ये श्रद्धा होनी चाहिए? क्या ये ध्यानिक मार्ग के द्वारा हमारा परिवर्तन हो? आपके इच्छा होनी चाहिए, हमें असली चीज चाहिए, नकली नहीं। we won the real thing सी के क्या है शास्त्र, निर्णय किया है भक्ति भक्त श्रीमन भगत में शुरू से अंत तक ये भक्ति होगा। संदेश बोल रहा है भगवान। ये जो मिला है, उनके क्या देखते हो कृष्ण भगवान। जैसे की भगवान ने प्रकट होते ही अनेक स्कूलों का बढ़ गया साधारण कैसे सम्भव है? 1 छोटा नया पैदा हुआ बच्चा कूल का है। भगवान के लिए कोई का संभव नहीं है। जमा कर में चाहे भगवान का ज्ञान लीलाओं के विषय में कहा प्राप्त करते हो? स्पष्ट साबित होता है। क्या? तो भक्तियों का मतलब है कृष्ण। तुम भगवान स्वयम की सेवा में जोड़ना बाप अपना मनमानी उपाय नहीं ढूंढ सके। हमें स्वीकार करना चाहिए क्या सास ज्ञान। guru salugruaprmani prतiनiधinospos pोसेचिठीा गुरु का क्या क्या तो बनता है, पर जो सन्देश है उसको और साधु शास भगवान। और सबसे उत्तम ग्रंथ क्या है? गाव? श्रीमन भगवान का ज्ञान है, सबसे उत्तम ज्ञान है। और यह क्या है पका। वह कहते है में की अगर आप पेड़ की चोटी से किसी फल को नीचे भेज हो, अलग के द्वारा, वो आपको वैसे ही प्राप्त हुआ। अगर आप ऊपर से फेंकोगे तो नीचे पहुँच जाता टुकड़े टुकड़े तो हमारा सोभाग्य है। हमें प्रौपर्जी की कृपा से सारे वैदिक साहित्य को इस सन्देश को प्राप्त हो रहा है। अगर यह इसका उपयोग करे तो क्या लाभ होगा? कि किया क्या है? उनको आप दूर कर सकते हो। कई बार the rule swami जो शिक्षा दी गई है, ये निर्भर है। पापाजी ने 1 पॉइंट को कम ने किया, 1 पॉइंट से जुड़ा है। देश में इसका लाभ उठा है। तो आज के लॉग में नाथमुनि हमको महत्वपूर्ण ज्ञान दे रहे हैं। राज को पूरे समाज मे है और वो सन्देश क्या है। मानव जीवन की प्राप्ति के पश्चात ये पूछे के हम हैं कौन सा ा समाज में लोग मुझे बड़ा आदर देते है सोचते की हम बड़े ज्ञानी है है कौन के में अब के पूछो कौन कहाँ से आ रहे हो? कहाँ से हो मुझे स्वीकार करो and body to what you like to woo लिया हाथ को खो दिया क्या बाइबल में मैनेज मेज इन गॉचमेजव्यक्ति जो बनता है वान के पॉइंट्स है pali मिलते थे, we do chanhrikrishna प्रोपर गये थे सं iv में वह म मग बाबा 2 चंद वाला कहे हैं की हमे भक्तियों के माध्यम से भक्ति जोड़ना चाहिए और भक्तियों की शिक्षा प्राप्त करते हैं। किस के द्वारा, गुरु के द्वारा, साधु के द्वारा, शास्र के द्वारा, उनके पालन से क्या परिणाम होगा। आपका भौतिक आकर्षण कमजोर होता जाएगा वो अंत में जीरो बन जाएगा यूरो बन सकता है। देवी माँ में भगवान कहते हैं जो मेरेशयरनगतहोता है वो का मतलब है स्वीकार करना गुरु हो जाएगा। हमने कहा था क्या कहा भक्तों के संग में मेल कर। अगर आप भक्तियों का पालन करोगे तो ज्यादा सरल है। भक्तों के संग में रहकर भक्तियों का पालन करना ज्यादा सरल है। अगर आप को अकेले छोड़ दे कोई और भागती हो, मुझे कोई दिल की सुविधा नहीं हो तो आप क्या खुश रहोगे संघ में बाने का भक्तों के संघ में, भक्तों के संग में रहकर वक्तियों की विधियों का पालन करना ऐसा है तो वह प्रयास के संघ में रहे और मिलकर सबका 1 ही भाव होना जाए या इन नियमों का पालन करें भगत संघ में आकर आपको मिलती
है
में कैसे पालन करेंगे से सोना हो जाएगा। देखते भक्तों के संग दूसरे लोग कर रहे है। coles bodiवाnoporala प्राप्त हो निशा जैसे हमने सुना है, दिस भाव बहुत आवश्यक है के रास्ते में सफलता जाते कई बार लोग सारे how you get that the termination नेशन polling गुरु साधु शास्त्र में भगवान की वाणी, उसको यथा रूप आगे प्रस्तुत किया जाए परवाने गुरु से संदेश प्राप्त हो उसे लोगे मन वर्ष में आयेगा और मन वर्ष में आगे आ जाए। तो अगला स्टेप क्या है? क्या है सारी इंदियों को भी वैसे की चाबी किसके पास है, मन की चाबी किसके पास है, बुली की चाबी किसके पास है? तो हमने पूरा उपाय दिया है। ऐसे इंदियो हमें केवल उसका लाभ उठाना चाहिए। ै in the base
गुना हम हरी नाम की चर्चा कर रहे हैं बड़े अच्छे से अपने गलननकियाउसका हरी नाम में
कभी तो बहुत उत्साह होता है और
कुछ दिन तो ऐसा लगता है कि बहुत ही ढीले। तो कैसे हमेशा उत्साह बना के रहे हैं।
मूली 1 ही उपाय है साला सारे ज्ञानपुर बादल नहीं कर रहे तो क्या होगा ये जो जादूवशतुै? number one medisin cut in the same madison s school, ever for the process manmani
अच्छी साधना का क्या अभी आपका अच्छी साधना से बड़ा उत्साह तो अच्छी साधना ने
तो बुरी होती है तो जो पढने में नहीं वो को कर से बेहतर हो। और then se age is inrmidsa bag ka, ye
one time so,
how much time it to the lives, one mint
that one in
one minute me i have a mine, i m not going to to non sosit, i will now minute, i en sedetkisaquestion as yes frely, no is here right time,
i
express e। और जिन्होंने कभी कि का नाम भी नहीं सुना था, कभी किशना नहीं सुना सरलता से हर नाम भी ले रहे है धाम में देश है व्यक्ति रहते है आसीदेजलकेबाद और कई बार कहते हैं
को गुड
बात चाहे वर्षा नाम के बल पर मारी आगे बढ ह man मंदा जिसके उचारन हमारे its proven, यह अनारी काल से इसका उचारण और वे भी खुली अनुभव कर रहे है
सो
महाराज महाराज जैसा हम देखते हैं कि
हर किसी और चैटिंग करते और प्रसाद लेते नेस बांग्लादेश में इतना मारा ये
चैटिंग करके और प्रसाद देखे किसी को
नहीं सुधार सकते तो जैसे बांग्लादेश में इतना गलत हम भक्तों ने मारा नहीं
में क्या हो मतलब इतना उनका हुआ के बच्चों के साथ जो भी हम लोग चुप नहीं रहे दुर्घटना भी दी थी तो हमने फसल प्रोटेस किया था प्रतिनिधि बांग्लादेश का मेजर है दिल्ली बंधन या गारंटी गारमेंट बोलेंगे की ये बोले भारत सरकार का बाजा सम्बंध है बांग्लादेश के प्रधानमंत्री थे ले मेरी 3 कितना हो सकता था हमने किया था उससे ज्यादा नहीं हो पाए हमें हमारी इसी बी पता रहती है
महाराज आपसे क्वेश्चन पूछा था हेरिंग फ्रॉम राइट सोर्स का, तो आपने कहा था अचार बी और 4 भी तो कभी कभी जैसे जो स्पीकर्स होते तो आपने कहा था कि हैरिंग फ्रॉम ाइटसोउइसका मतलब होता है अचारी और ट्रचारबी जो करते उनसे सुनना चाहिए तो जैसे कभी कभी होता की जो स्पीकर्स होते है मतलब हम उनको जानते नहीं होते कि उनका मतलब अचार एग्जैक्टली कैसा है तो अल्टीमेटली एंड कनक्लूजन बहुत बार यह निकल जाता है एयर ओनली फ्रॉम, वन पर्सन दैट इज, सर मीन जस्ट, वन पर्सन शुड बी देयर इन लाइफ वी शुड टेक रेस्पोंसिब्लिटी ऑफ रेशमे। तो ऐसा सोचना चाहिए कि हमें जिसका अचार बता है सिर्फ उसी व्यक्ति से हमें सुनना या जिनको नहीं भी पता तो उनसे भी सुनना के
tikiquesion pregententented to in a example, कई बार सुना और किसी guen, a,
n, i वांटेट ऐसे जो स्टेटमेंट होती है, कई बार ऐसा सुना गया कि वन पर्सन इज रिकार्ड तो टेक रेस्पॉंसिबिलिटी स्पे कॉंटरेडिटरी स्टेटmentaजीीकी, एवरीवन लाइनस, ओन्ले सो, इसको मतलब इस कॉंटरेडिकशnको कैसे, clear
on टीमेटली, metic follow, follow a, then you a bete but s
राम महाराज महाराज मेरा प्रश्न यह है कि हम मन को बचने कैसे करे।
ये उपाय है rt का हमने शेतान स farmer i हम के मन की बात सुन सान ने बवाल किया जाता है आगे ज्यादा मन आगे वादा करो
था के हम बुदपुशीरिशनके लिए जाते हैं कई बार बहुत अच्छा रेस्पोंस त लेकिन कुछ लोग को की से डॉक्टर बना देते हैं हमारे साथ उस टाइम में पूरा हाथ कम हो जाता है कि
मैं इतना नालीदार दान दिया जा रहे थे। बोल कई लोगों ने तो बड़ा अच्छा सा गया, महातल गए है बनाने कई साल में दरवाजा है देख के फिर चुराने मारे बगल ऐसे ऐसा स्वागत चाहिए, कोई जूता भी मारेगा, कोई कोई हार भी। देगा तुम्हारी राह देख रहे थे। पुरे साल गीता last को
मेरा प्रचार के विषय में प्रश्न है कि बस प्रचार में तो ऐसे ही जीव थे, उस प्रसंन में डायर किया कि बस में 4 मतलब हम को कुछ आर्गुमेंट करे, मतलब हम क्या बहुत बुरी तरह
मतलबआपढ़ाई
तो वो कंपेर चाहते हैं कि उनके पिता आप कैसे मुकाबला करोगे, मुझे बहुत कुछ गलत हो। तो
नेकां ऐजेवेकतकेसाथ बैस करना बेकार है।
मेरा कोशनमराकोशयहकी चूल् एक्मिनेशनसहोते है तो हम कभी कभार प्रैक्टिस कर रहे होते हैं
बोलते हुए आइये
हम कोश, मेरा कोशन ये है की जैसे हम प्रैक्टिस कर रहे होते हैं, साधना प्रैक्टिस कर रहे होते हैं। तो हम कभी कभार रिचली करते है रिजवी करने जाते हैं और उसमें हम भूल जाते हैं। मेरा जी जैसे हम कभी प्रैक्टिस कर रहे होते हैं, हम साथ में प्रैक्टिस कर रहे होते है जैसे हमें कोई
सेवा मिल जाती है,
देन
देन स
टाइम हम भगवान को भूल जाते हैं, भूल जाते हैं कि हम चैटिंग किसलिए कर रहे हैं, पर पर्स भूल जाते हैं और हम फिर उसको जस्ट 1 हरीचूलकीतरहकरने लग जाते है।
मैकेनिकल मैकेनिकल मैकेनिकल भी, दिखावा भी हो च हम दिल को कुछ कई बार शादी में जाते हैं। तो jan ee shadi bride chand chand
हर मिशन मेरा क्वेश्चन है कि भगवान
की अनुभूति इस तरह से जैसे प्र
परमात्मा स्वयं भगवान, जो ये जानता है कि भगवान से हम ऐसी उत्पन हो
रहा है, अन्य रूप याने के परमात्मा भ्रम विष्णु के रूप में भगवान स्वयं
और अनु परमाणु में विराजमान,
उस कम
क्वेश्चन?
इस दोनों में क्या भ्रम और परमात्मा
a a a a a n o complete member one you go as a form on complete god for की आँखे नहीं पा ी getinसotogod you say you now, we have
got
okay have to shop no thank you very much।
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